Wednesday, April 29, 2026
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ज्यूक्स ने डिस्कवरी इंडिया के साथ बनाया पहला रियल लाइफ इन्टरटेन्मेंट ऐप

कोलकाता : यूएक्स डिजाइन फर्म ज्यूक्स इनोवेशन ने डिस्कवरी इंडिया के साथ मिलकर डिस्कवरी प्लस ऐप बनाया है। यह ऐप मार्च 2020 में लॉन्च किया गया था। ज्यूक्स और डिस्कवरी की साझेदारी को लेकर डिस्कवरी इंडिया के बिजनेस हेड आईजैक जॉन उनकी टीम इस बात को लेकर काफी सजग थी कि भारत जैसे ओटीटी मार्केट में यूजर्स इस ऐप को स्वीकार करें। कई शोध और डिजाइन कार्यशालाएँ ज्यूक्स ने हमारे लिए कीं, प्रेरित किया जिससे हम अड़चनों को दूर कर सकें। ज्यूक्स ने डिस्कवरी प्लस ऐप एक बेहतर ओटीटी अनुभव देने के लिए किया। ज्यूक्स इनोवेशन के सह संस्थापक सौरभ गुप्ता ने कहा कि हमने ओटीटी अनुभव को तैयार करने के लिए मानव प्रदर्शन और अनुनय डिजाइन के विज्ञान का लाभ उठाया है जो विशिष्ट व्यावसायिक परिणामों को वितरित करने, विभिन्न उपयोगकर्ता आवश्यकताओं को संबोधित करने और प्रभावी ढंग से प्रौद्योगिकी विचारों का प्रबंधन करने के बीच एक आदर्श संतुलन है ”। ज्यूक्स इनोवेशन के सह-संस्थापक, हेमल गथानी ने कहा, “ग्राहक समर्थन हमारे विचारों को वास्तविकता में बदलने में महत्वपूर्ण कारक था। डिस्कवरी टीम ने हमारे विचार प्रक्रिया का समर्थन किया और बाद में सोचने के लिए हमें सशक्त बनाया, जिससे हमारे अंत से निर्बाध वितरण हुआ।

स्ट्राइड्स ने शुरू किया फेविपिरावीर टैबलेट्स का उत्पादन

कोलकाता : स्ट्राइड्स एंड कम्पनी ने फेविपिरावीर एन्टीवायरल टैबलेट्स विकसित कर उसका उत्पादन शुरू कर दिया है। यह उत्पाद जापान की कम्पनी टोएमा केमिकल एविजेन का जेनेरिक संस्करण है। इस एंटीवायरल दवा का आविष्कार आरम्भ में इन्फ्लूएन्जा के उपचार के लिए हुआ था। नोवल कोरोना वायरस यानी कोविड -19 के फैलने के बाद चीन समेत कई अन्य देशों में इस पर अध्ययन हुआ और इसके सकारात्मक परिणाम निकले। इसको लेने के बाद कोविड -19 की अवधि घटी और मरीजों के फेफड़ों की स्थिति सुधरी। स्ट्राइड्स ने 400 एम जी और 200 एम जी की क्षमता वाले फेविपिरावीर एन्टीवायरल टैबलेट्स का उत्पादन किया है। स्ट्राइड्स के सीईओ तथा प्रबन्ध निदेशक डॉ. आर. अनन्तनारायणन के मुताबिक स्ट्राइड्स दवा को विकसित और व्यावसायिक तौर पर बाजार में उतारने वाली पहली भारतीय कम्पनी है। इन टैबलेट्स का उत्पादन बंगलुरू स्थित फ्लैगशिप फेसिलिटी में हो रहा है। इस इकाई में 6 बिलियन यूनिट्स सॉलिड ओरल का उत्पादन हो रहा है। स्ट्राइड्स ने इसकी आपूर्ति के लिए भारतीय एपीआई निर्माता से हाथ मिलाया है।

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा राहत सामग्री वितरित

कोलकाता : कोलकाता की सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्था सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से राहत सामग्री वितरण के दूसरे चरण में राजाबाजार साइंस कॉलेज क्षेत्र के फेडरेशन हॉल सोसाइटी में 45 जरूरतमंद लोगों के बीच राहत सामग्री वितरित किया गया ।कोरोना महामारी के कारण उपस्थित स्थिति से निपटने के लिए संस्था के सदस्यों ने लोगों से आग्रह किया कि वे लॉकडाउन का पालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग रखें ।यह समय डरने का नहीं बल्कि समझदारी के साथ लड़ने का है । राहत सामग्री बांटने का काम संस्था के महासचिव डॉ राजेश मिश्र, फेडरेशन हॉल सोसाइटी के सचिव श्री विमलचंद्र,नारायण चौधरी,मुकेश चौधरी एवं त्रिविक्रम मिश्र ने किया।

महामारी ने वह करा दिया, जो पहले कभी न हुआ

नयी दिल्ली : महामारी के संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय भले ही सबसे पहले छह जनवरी में सतर्क हुआ हो लेकिन, असल में मार्च में मरीजों की संख्या बढ़ने पर ही सरकार सक्रिय हुई। नतीजे में 40 दिन के सख्त लॉकडाउन में भारत ने वह सब कर दिया, जो पहले कभी नहीं देखा गया। इस दौरान हमने कई ऐसे शब्द और उनके अर्थ को भी समझा, जिनमें से ज्यादातर न पहले हमने सुने थे, न ही इनका मतलब पता था।
अब तक ये हुआ हासिल
लंबे समय से ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं खरीदे गए, न ही अस्पतालों में औद्योगिक सिलिंडरों का इस्तेमाल हुआ। अब 1.02 लाख नए सिलिंडर पहली बार खरीदे जा रहे

एन-95/एन-90 मास्क के अलावा हर साल करीब 50 से 70 हजार तक पीपीई आयात होती थीं। अब हर दिन डेढ़ लाख पीपीई और 2.30 लाख मास्क बन रहे

कोरोना से पहले देश में हर माह 5 हजार वेंटिलेटर बनते थे, लेकिन एक माह में 9 हजार वेंटिलेटर का निर्माण हुआ

23 मार्च से आईसीयू बेड की संख्या 41,974 से बढ़कर 1,94,026 हुई

40 दिन में 1741 केयर सेंटर, 1297 कोविड स्वास्थ्य केंद्र और 738 अस्पताल तैयार

एक महीने में ही एचसीक्यू उत्पादन प्रति माह 12.23 करोड़ से 30 करोड़ हुआ

ये नए शब्द मिले
हॉटस्पॉट                        कंटेनमेंट जोन

बफर जोन                      आरटी पीसीआर
रैपिड                             एंटीबॉडीज किट्स
प्लाज्मा थैरेपी                  बैट कोरोना वायरस
रेड, ऑरेंज, ग्रीन जोन

साभार – अमर उजाला

ये रहे घर से सुरक्षित बैंकिंग हेतु कुछ उपयोगी सुझाव

बैंकिंग फ्राॅम होम यानी बैंक संबंधी कार्य घर से करना आज के वक्त में बहुत सुविधाजनक हो गया है। ग्राहकों के लिए कई ऐसे टूल्स उपलब्ध हैं जिनके जरिए वे अपने मोबाइल/कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हुए बड़ी ही आसानी और सुरक्षित ढंग से घर बैठे कई प्रकार के लेनदेन कर सकते हैं। हालांकि यह भी सच है कि बैंकिंग उद्योग में धोखाधड़ी भी बढ़ रही है खासकर ईएमआई स्थगन, केवायसी अपडेशन और यूपीआई के मामलों में यह ज्यादा हो रही है। कोटक महिन्द्रा बैंक (कोटक) नियमित तौर पर सक्रियता के साथ अपने ग्राहकों तक पहुंचता है और उन्हें समझाता है कि सुरक्षित बैंकिंग के लिए किस प्रकार सतर्कता बरतनी चाहिए और कुछ बुनियादी सावधानियों का पालन करना चाहिए।

सुरक्षित बैंकिंग हेतु कुछ उपयोगी बातेंः

1. अपने पासवर्ड, ओटीपी, एटीएम पिन, कार्ड का ब्यौरा जैसी संवेदनशील जानकारियां किसी को भी न बताएं। कोटक आपसे ऐसी सूचनाएं कभी नहीं पूछता।
2. ईएमआई स्थगन संबंधी धोखाधड़ी के बारे में सचेत रहेंः धोखेबाजों ने ग्राहकों को ठगने का नया तरीका खोज निकाला है। ये फर्जी लोग बैंक के प्रतिनिधि बन कर ग्राहकों से सम्पर्क करते हैं और उनसे गोपनीय बैंकिंग ब्यौरा पूछते हैं जैसे उनका पासवर्ड, पिन, ओटीपी आदि तथा उनसे कहते हैं कि ईएमआई भुगतान को टलवा देंगे। अपनी ऐसी गोपनीय सूचनाएं कभी किसी को न बताएं। कोटक अपने ग्राहकों से ऐसी कोई भी जानकारी नहीं पूछता।

3. केवाईसी और रि-केवायसी संबंधी धोखाधड़ी से सावधान रहें। यदि आपको संदिग्ध व अनजान ईमेल आईडी या मोबाइल से कोई लिंक आए जिसमें केवायसी या रि-केवायसी पूरा करने को कहा गया हो तो उस पर क्लिक न करें। बैंक से सम्पर्क करने के लिए वेबसाइट पर विज़िट करें।

4. यूपीआई के जरिए पैसा प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने अथवा पिन या ओटीपी ऐंटर करने की जरूरत नहीं होती।

5. स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स जैसे ऐनीडेस्क, टीमव्यूअर आदि को डाउनलोड करने से परहेज़ करें क्योंकि इनके जरिए धोखाधड़ी करने वाले आपके उपकरण को काबू में कर लेते हैं, आपकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर के आपकी जानकारी के बगैर आपके बैंक खाते और धन तक पहुंच जाते हैं।

6. बैंकिंग ट्रांज़ेक्शन पर तुरंत अपडेट पाने के लिए अपने एसएमएस और ईमेल अल्र्ट को एक्टिवेट करें।

7. बैंक से सम्पर्क की जानकारी के लिए हमेशा बैंक की अधिकारिक वेबसाइट विज़िट करें। जब भी ई-कॉमर्स या किसी सेवा प्रदाता के नंबर ऑनलाइन तलाश रहे हों तो सतर्क रहें। धोखाधड़ी करने वाले सर्च साइटों पर अपने नंबर अपडेट करते हैं और जब कोई व्यक्ति उन्हें कॉल करता है तब वे कैशबैक या रिफंड का वादा करते हुए बैंक खाते का गोपनीय ब्यौरा मांगते हैं। कम्पनी की वैबसाइट पर जा कर उसकी कॉन्टेक्ट डिटेल्स चैक करें।

पृथ्वी और पर्यावरण को सुरक्षित रखे विकास का नया मॉडल

2020 का अप्रैल महीना इतिहास में अपनी भयावहता के लिए दर्ज है…महीने की शुरुआत ही लॉकडाउन के साथ हुई और खत्म भी इसी के साथ हुआ। अगर इन्सानों के हित को ध्यान में रखकर देखा जाये…तो यह डरा देने वाला साल है। अप्रैल साहित्य और संस्कृति के साथ सिनेमा और खेल की दुनिया से काफी कुछ छीन गया। कोलकाता में रंगकर्मी उषा गांगुली और कवि नवल का जाना शहर को हमेशा खलता रहेगा। उषा गांगुली के जाने से हिन्दी रंगमंच को गहरा झटका लगा तो इरफान खान और ऋषि कपूर के जाने में हिन्दी सिनेमा में रिक्तता आ गयी…इसे भरना इतना आसान नहीं होगा। नजरिया बदलकर देखें तो यह साल और महीना बहुत कुछ सिखा गया…रामायण और महाभारत का प्रसारण दोबारा हुआ तो आज की पीढ़ी अपने इतिहास से मिली…बच्चों में जिज्ञासा बढ़ी और आज पिस्तौल की जगह आप उनको सुदर्शन चक्र, गदा और तीर – धनुष के साथ देख रहे हैं…टीवी ने बच्चों को संस्कृत के मंत्र सिखा दिये। पाकशाला प्रयोगशाला बन गयी है और लोग बजट के बीच रहना सीख रहे हैं। हम यह नहीं कह सकते कि लॉकडाउन के बाद ये चीजें कहाँ तक ऐसे ही रहेंगी मगर कोरोना ने मनुष्य को यह तो बता दिया है कि उसकी शक्ति असीम नहीं है…एक समय और एक सीमा के बाद वह बिल्कुल बेबस और लाचार हो जाता है। विकास का दम्भ भरने वाले देशों की हालत तो सबसे ज्यादा खराब है। वे लोग जो कृत्रिम जीवन शैली में अपनी जड़ों को भूलते जा रहे थे..उनके लिए तो यह तमाचा है। आज प्रकृति खुलकर साँस ले रही है.,,,नदियाँ साफ हो रही हैं…ओजोन का छिद्र भर चुका है…समुद्र में मछलिया और शहरों से हिमालय फिर दिखायी देने लगे हैं…हम मानते हैं कि विकास का होना जरूरी है पर क्या ऐसा नहीं हो सकता कि इस यात्रा में प्रकृति हमारी सहचर हो…विकास का मॉडल ऐसा हो जो पृथ्वी को पर्यावरण को सुरक्षित रखे…हमारी जिन्दगी बहुत बदलने जा रही है…सामाजिक दूरी, मास्क और दस्ताने हमारी जिन्दगी का हिस्सा बनने जा रहे हैं…पर इतने से भी अगर पूरा विश्व स्वस्थ और सुरक्षित रहे तो यह कीमत कम है बहुत कम…आप भी स्वस्थ रहिए…सुरक्षित रहिए और सचेत रहिए..।

बोलते अवशेष

कहते हैं कि जो अपने इतिहास को जानता है, अतीत से सीखता है..वही आत्मविश्वास से परिपूर्ण होता है। हम सब जानते हैं कि हमारे महाख्यान, पुराण, उपनिषद…सब वास्तविकता के धरातल पर मौजूद हैं। इसके बावजूद इन सबको मिथक कहकर उड़ा देने का चलन है..मगर इनका होना एक वास्तविकता है…। यह न सिर्फ हमारा इतिहास, हमारा विश्वास और धरोहर हैं बल्कि इनका संरक्षित होना आज के युग में हमारी आवश्यकता है। कोई भी प्रलाप तभी तक टिकता है, जब तक उसके सामने तथ्य सामने न हों…तो आज जरूरत है कि भ्रमजाल में उलझाकर रखने वाली विचारधाराओं के सामने हम तथ्य लायें…ऐसे तथ्य जो हमारे आस -पास परम्पराओं, मन्दिरों, ऐतिहासिक स्थलों, आश्रमों..समेत कई रूपों में उपस्थित हैं। हम सब जानते हैं कि इनका संरक्षण आवश्यक है और संरक्षण तब होगा जब इनको हम सामने लाएँगे…संरक्षण की आवाज उठाएँगे…यह सिर्फ सरकार के वश की बात नहीं है मगर इनका संरक्षण न सिर्फ इतिहास बचा सकता है बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प और पर्यटन समेत कई क्षेत्रों को विकसित कर सकता है और यह काम कॉरपोरेट क्षेत्र, संस्थान और मंदिर भी सरकार के सहयोग से कर सकते हैं। इनका संरक्षण हमारा दायित्व है….क्योंकि जिन्होंने इन सबको बनाया होगा….वे हमारे और आपके पूर्वज हैं।
आज का युग सोशल मीडिया का युग है…मोबाइल पर वीडियो से लेकर आलेख, तस्वीरों, टिक – टॉक और तस्वीरों और वीडियो का युग है और यही आपके अस्त्र – शस्त्र हैं तो इनको उठाइए….और आपके पास अगर ऐसे स्थल, मंदिर, परम्पराएँ हैं जो प्राग्ऐतिहासिक हैं.,,,जिनका सम्बन्ध रामायण या महाभारत समेत अन्य आख्यानों या इस देश के इतिहास से किसी न किसी रूप से है….लिख डालिए या बना डालिए। सोशल मीडिया पर शुभजिता या shubhjita.com या शुभ सृजन नेटवर्क को टैग कर दीजिए। हम आपकी तथ्यपरक, अन्धविश्वास मुक्त जानकारी को अपनी वेबपत्रिका तथा शुभजिता यू ट्यूब चैनल में विश्वास/ धरोहर या मेरी जान हिन्दुस्तान में स्थान देंगे…और आपके पूरे परिचय के साथ सचित्र देंगे…यह एक श्रृंखला है…जिसे आप साझा कर सकते हैं…आप चाहें जहाँ से हैं…किसी गाँव…शहर…कस्बे से हैं…आपने देखा है…घूम आए हैं… और आपके पास सुझाव हैं…तो वह भी बता सकते हैं। कल वो आपके लिए आए थे…आज आपको उनके लिए उठना है…हम सबको उठना है और सारी दुनिया को दिखाना है हमारा अतीत…भव्यता और उसके भावी पीढ़ी तक ले जाना है…। मन बहुत मसोस लिया…दुःखी बहुत हो चुके…अब कहने या लड़ने की नहीं करने की बारी है। आइए,…इस धरोहर संरक्षण को एक मुहिम बनाएँ…जिससे प्रशासन और सक्षम क्षेत्र इस दिशा में आगे आएँ….क्योंकि अब खंडहर देंगे प्रमाण
इस सन्देश को साझा करके अपने मित्रों को इस कड़ी में शामिल करें…और शुभजिता और अपने 5 से 10 दोस्तों को टैग करें और यह सन्देश अपनी वॉल पर और व्हाट्सऐप पर साझा करना न भूलें। भाषा हिन्दी, या अंग्रेजी हो तो बेहतर होगा क्योंकि आपकी बात को समझना आसान होगा।
#बोलते अवशेष#
#हमारी धरोहर, हमारा इतिहास, हमारा गर्व#

लयलाह लंका उजाड़ि / मैथिली लोकगीत

चित्र – सिद्धार्थ कश्यप

लयलाह लंका उजाड़ि
दया हनुमान जी के
छोटे-छोटे पयर छनि
सोना के खड़ाम छनि
बएह छथि वीर हनुमान
दया हनुमान जी के
ककरहुँ डारि पात
ककरहुँ मूल फल
ककरहुँ सीड़ सहित
दया हनुमानर जी के
रामचन्द्र के डारि-पात
लछुमन के मूल फल
दशरथ के सीड़ सहित
दया हनुमान जी के
सभ केओ कहनि बनरा रे बनरा
सीता कहथि वीर हनुमान
दया हनुमान जी के

(साभारकविता कोश)

मूक पत्थरों को वाणी देती मूर्तिकार वंदना सिंह

डॉ. वसुंधरा मिश्र

महिला मूर्तिकार वंदना सिंह चार दशकों से कला के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। कठोर पत्थरों को अपनी कोमल भावनाओं और विचारों से प्रेरित हो कलाकृतियों को जीवंतता प्रदान कर रही हैं। आपका जन्म वाराणसी में सन् 1969 में हुआ। राजस्थानी ब्राह्मण परिवार के संस्कारों से अनुप्राणित वंदना का झुकाव बचपन से ही कला के विभिन्न क्षेत्रों से रहा। नौवीं कक्षा से पांच साल तक नंदलाल बोस के शिष्य मनमथ दासगुप्ता से बनारस में स्केच, ड्राइंग, पेंटिंग और कला की बारिकियों की शिक्षा ग्रहण की।बीएचयू में बीएफ और एम एफ ए के दौरान विख्यात कलाकार रामकिंकर बैज की परंपरा के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रो. बलवीर सिंह कट्ट से कला के क्षेत्र में विभिन्न चित्रों को सीखा और मूर्तिकला में प्रतिभा हासिल की । बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान आपने मिट्टी, लकड़ी, धातु, कागज, सोप स्टोन, काले, गुलाबी संगमरमर आदि पर अनेक प्रकार की कला के प्रयोग किए। स्केच, पेंटिंग और कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगती रही।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय से बीएफ ए और एमफ ए की डिग्री हासिल की और उसी दौरान मूर्तिकार मृगेंद्र सिंह (बीएचयू में फाइन आर्ट्स में प्रोफेसर) के साथ विवाह के बंधन में बंधीं। अंतर्जातीय विवाह के कारण परिवार की नाराजगी भी झेलनी पड़ी। अपने संघर्षों से लड़ती हुई राह में आई सभी चुनौतियों का सामना किया।

वंदना ने मूर्ति कला को चुनकर अपने सपनों को उड़ान दी।दो पुत्रों के साथ परिवार को देखते हुए स्त्री के संघर्ष की कहानी को कभी संगमरमर में तो कभी लकड़ी में तो कभी धातु में उकेरतीं रही हैं । स्त्री के दुख, पीड़ा, मानसिक द्वंद, पति-पत्नी के रिश्तों की दरार और तनाव को प्रकृति से जोड़ने का काम करती है वंदना।

मौलिकता हर कलाकृति में झलकती है जो आपकी कला को नई ऊंचाईयां देती है। पत्थरों पर कार्य करने वाली महिलाएं कम संख्या में हैं। घर, परिवार और समाज के विभिन्न क्षेत्रों को अनुभूत करती एक कलाकार स्त्री की दृष्टि अलग ही अभिव्यक्ति प्रदान करती है। रंगों का चुनाव और उसमें आई रेखाएं कलाकार की गंभीरता को दर्शाती है जो निश्चित ही उनके मौलिक और सकारात्मक चिंतन का फल है।”निशब्द” काले संगमरमर पत्थर की बनी मूर्ति है जिसमें दो स्तम्भों के द्वारा भावनाओं को उकेरा है जिसमें नीचे की ओर मानव आकृति है जो धीरे धीरे विलीनता की ओर जा रही है।


विश्व जिस कोरोना महामारी से गुजर रहा है वह मानव जाति के विलीन होने की कहीं शुरुआत तो नहीं? मनुष्य को अपनी “नैसर्गिक प्रकृति को नहीं भुलाना चाहिए” इसी कल्पना के धरातल पर वंदना चुनार मिर्जापुर के जर्गो बांध उत्तर प्रदेश में कला स्टुडियो का निर्माण भी कर रही हैं। इस स्टुडियो में युवा दम्पत्ति शहर की चकाचौंध से दूर प्रकृति के आंगन में अपनी कला को एक नया आकाश देने का प्रयास कर रहे हैं। बच्चों के बड़े होने के बाद अब अपनी मूर्ति कला को पूरा समय दे रही हैं। 2018 से दो वर्षों तक ललित कला अकादमी, लखनऊ द्वारा स्कॉलरशिप पर स्त्री के विभिन्न पहलुओं पर आधारित मूर्तिकला शोध कार्य कर रही हैं।

शुभजिता और सखी समूह अब साथ

सखी समूह फरवरी 2011 में शुरू हुआ महिलाओ का पहला समूह था जो उनका सीक्रेट अड्डा था जहाँ वे अपनी बातें एक दूसरे से बेहिचक साँझा करती रही है।आज 7हजार की संख्या में देशभर से सखियाँ हंसना बोलना , लिखना , गाना , नाचना , रसोई , चित्रकारी , कशीदाकारी , हर विधा पर इस समूह में कार्यशाला आयोजित होती , भविष्य में ऑनलाइन कुंकिंग क्लास व मधुबनी पेंटिंग सीखने की सशुल्क कक्षाएँ भी संचालित हो रही हैं। वैसे तो इन कक्षाओं का शुल्क अधिक है मगर  600 रुपये शुल्क के साथ  घरेलू महिलाओ के लिए वाट्सएप पर क्लास लगाई जा रही है। सभवः हो भविष्य में यह महिलाओ के लिए और भी मजबूत आधारशिला बनेंगी। सोशल मीडिया पर ‘आ सखी चुगली करें ‘के नाम यह समूह सक्रिय है।

इस समूह की सृजनात्मकता आप अब शुभजिता की वेबसाइट और यू ट्यूब चैनल पर आ रही है। हमारे सहयोगी के रूप में समूह की सदस्याओं की प्रतिभा आप विभिन्न रूपों में देख सकेंगे और महिलाएँ इससे जुड़ भी सकेंगी…क्योंकि यह समूह महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए निर्मित है। आज से शुरुआत..राजकुमारी व्यास के एक खास वीडियो से…जो आखा तीज की जानकारी देता है। सरल भाषा के कारण बच्चे भी इससे साख सकते हैं –