Wednesday, April 29, 2026
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रिक्शा चालक के सोशल डिस्टेंसिंग तकनीक के कायल हुए आनंद महिंद्रा, दे दिया जॉब का ऑफर

नयी दिल्ली : कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करने को कहा जा रहा है। भारत समेत कई देशों में लॉकडाउन भी लागू है। कोरोना के इस संकट के समय में लोग नए-नए आइडियाज के साथ सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक आइडिया सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे रिक्शा चालक को आया है।

दरअसल, आनंद महिंद्रा ने ट्विटर पर एक वीडियो क्लिप शेयर की है। इस वीडियो में उन्होंने एक रिक्शा चालक के आइडिया की तारीफ की। रिक्शा चालक ने सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से अपने रिक्शे को अलग तरीके का डिजाइन दे दिया। उसने रिक्शे में कई पार्ट बना दिए, जिससे एक चालक दूसरे चालक के संपर्क में न आ सके। आनंद महिंद्रा को यह डिजाइन और आइडिया काफी पसंद आया।
महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने ड्राइवर को जॉब ऑफर कर दी। उन्होंने कंपनी के ऑटो और फार्म सेक्टर के एग्जक्यूटिव डायरेक्टर राजेश को ट्वीट में टैग करते हुए कहा कि वह ड्राइवर को कंपनी में एडवाइजर बनाएं। उन्होंने वीडियो क्लिप शेयर करते हुए लिखा, ‘हमारे देश के लोगों के कुछ नया करने और नई परिस्थितियों के अनुकूल हो जाने की क्षमता देख मैं हमेशा हैरान हो जाता हूं। @राजेश, हमें इन्हें बतौर एडवाइजर नियुक्त करना चाहिए।’

बता दें कि वीडियो को रिकॉर्ड करने वाला शख्स बोलता हुआ सुनाई देता है कि इसे कोरोना इनोवेशन कहते हैं। ड्राइवर ने एक गाड़ी को चार चैम्बर में विभाजित कर दिया।

कृषि की अधिष्ठात्री देवी हैं सीता

ऋग्वेद में अकेले राम नहीं सीता का भी उल्लेख मिलता है। ऋग्वेद ने सीता को कृषि की देवी माना है। बेहतर कृषि उत्पादन और भूमि के लिए दोहन के लिए सीता की स्तुतियां भी मिलती हैं। ऋग्वेद के 10वें मंडल में ये सूक्त मिलता है जो कृषि के देवताओं की प्रार्थना के लिए लिखा गया है। वायु, इंद्र आदि के साथ सीता की भी स्तुति की गई है। काठक ग्राह्यसूत्र में भी उत्तम कृषि के लिए यज्ञ विधि दी गई है उसमें सीता के नाम का उल्लेख मिलता है तथा विधान बताया गया है कि खस आदि सुगंधित घास से सीता देवी की मूर्ति यज्ञ के लिए बनाई जाती है।ऋग्वेद में कोष की आंघष्ठात्री देवी सीता को स्तुति की गयी है। इसी प्रकार अथववेद में भी सीता का स्तवन किया गया है। सामवेद में भी सीता की स्तुति है। वैदिक साहित्य में राम का उल्लेख अनेक स्थलों पर हुआ है।

१. वह रेखा जो जमीन जोतते समय हल की फाल के धँसने से पड़ती जाती है । कूँड़ । विशेष—वेदों में सीता । कृषि की अधिष्ठात्री देवी और कई मंत्रों की देवता हैं । तैत्तिरीय ब्राह्मण में सीता ही सावित्री और पाराशर गृह्यसूत्र में इंद्रपत्नी कही गई हैं ।

२. मिथिला के राजा सीरध्वज जनक की कन्या जो श्रीरामचंद्र जी की पत्न्नी थी । विशेष—इनकी उत्पत्ति की कथा यों है कि राजा जनक ने संतति के लिये एक यज्ञ की विधि के अनुसार अपने हाथ से भूम ि जोती । जुती हुई भूमि की कूँड़ (सीता) से सीता उत्पन्न हुईं । सयानी होने पर सीता के विबाह के लिये जनक ने धनुर्यज्ञ किया, जिसमें यह प्रतिज्ञा थी कि जो कोई एक विशेष धनुष को चढ़ावे, उससे सीता का विवाह हो । अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र कुमार रामचंद्र ही उस धनुष को चढ़ा और तोड़ सके इससे उन्हीं के साथ सीता का विवाह हुआ । जब विमाता की कुटिलता के कारण रामचंद्र जी ठीक अभिषेक के समय पिता द्वारा १४ वर्षों के लिये वन में भेज दिए गए, तब पतिपरायण सती सीता भी उनके साथ बन में गईं और वहाँ उनकी सेवा करती रहीं । वन में ही लंका का राजा रावण उन्हें हर ले गया, जिसपर राम ने बंदरों की भारी सेना लेकर लंका पर चढ़ाई की और राक्षसराज रावण को मारकर वे सीता को लेकर १४ वर्ष पूरे होने पर फिर अयोध्या आए और राजसिंहासन पर बैठे । जिस प्रकार महाराज रामचंद्र विष्णु के अवतार माने जाते हैं, उसी प्रकार सीता देवी भी लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं और भक्तजन राम के साथ बराबर इनका नाम भी जपते हैं । भारतवर्ष में सीता देवी सतियों में शिरोमणि मानी जाती हैं । जब राम ने लोकमर्यादा के अनुसार सीता की अग्नि- परीक्षा की थी, तब स्वयं अग्निदेव ने सीता को लेकर राम को सौंपा था । पर्या॰—वैदेही । जानकी । मैथिली । भूमिसंभवा । अयोनिजा । यौ॰—सीता की मचिया=एक प्रकार का गोदना जो स्त्रियाँ हाथ में गुदाती हैं । सीता की रसोई=(१) एक प्रकार का गोदना । (२) बच्चों के खेलने के लिये रसोई के छोटे छोटे बरतन । सीता की पँजीरी=कर्पूरवल्ली नाम की लता ।

३. वह भूमि जिसपर राजा की खेती होती हो । राजा की निज की भूमि । सीर ।

४. दाक्षायणी देवी का एक रूप या नाम ।

५. आकाशगंगा की उन चार धाराओं में से एक जो मेरु पर्वत पर गिरने के उपरांत हो जाती है । विशेष—पुराणों के अनुसार यह नदी या धारा भद्राश्व वर्ष या द्विप में मानी गई है ।

६. मदिरा ।

७. ककहो का पौधा ।

८. पातालगारुड़ी लता ।

९. एक पर्णवृत्त जिसके प्रत्येक चरण में रगण, तगण, मगण, यगण और रगण होते हैं । उ॰—जन्म बीता जात सीता अंत रीता बावरे ! राम सीता राम सीता राम सीता गाव रे । छंजः॰, पृ॰ २०७ ।

१०. सीताध्यक्ष के द्वारा एकत्र किया हुआ अनाज ।

११. जैनों के अनुसार विदेह की एक नदी का नाम ।

१३. हल से जुती हुई भूमि (को॰) ।

१४. कृषि । खेती (को॰) ।

१५. इंद्र की पत्नी (को॰) ।

१६. उमा का नाम (को) ।

१७. लक्षमी का नाम (को॰) ।

(साभार – विक्षनरी)

चीन की दवाओं पर घटा दुनिया का भरोसा, भारत बन सकता है निर्यात केंद्र

नयी दिल्ली : चीन की दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर दुनियाभर के देशों का भरोसा कम हो रहा है। इसका फायदा उठाने के लिए सरकार बंद पड़ी सक्रिया फार्मा घटक (एपीआई) इकाइयों को दोबारा शुरू करने की तैयारी में है। इन इकाइयों के लिए विशेष फंड बनाने के साथ कर्ज भुगतान में रियायत देने की भी योजना बनाई है।
वाणिज्य मंत्रालय के अधीन आने वाले दवा निर्यात संवर्द्धन परिषद के चेयरमैन दिनेश दुआ का कहना है कि भारत में प्रतिभाओं, उद्यमशीलता की भावना, प्रौद्योगिकी, स्वचालन और विनिर्माण सहित एपीआई के अन्य अवयवों की कमी नहीं है। बंद पड़ी इकाइयों को राजकोषीय मदद के साथ पूंजीगत सब्सिडी, दो साल तक ईएमआई में छूट और तीन साल तक बिना ब्याज कर्ज देने से एपीआई निर्माण के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, सरकार पहले ही सभी 53 केएसएम (प्रमुख शुरुआती सामग्री, जो एपीआई के लिए ब्लॉक का निर्माण करते हैं) और एपीआई के लिए प्रोत्साहन देने की घोषणा कर चुकी है, जिनके लिए हम आयात पर निर्भर हैं। इसके तहत ड्रग पार्क बनाने के लिए सरकार ने 10 हजार करोड़ के फंड की घोषणा की थी। हालांकि, उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि तत्काल लाभ के लिए बंद इकाइयों को शुरू करना ही एकमात्र विकल्प है।
एपीआई का सबसे बड़ा निर्यातक चीन भारत ही नहीं दुनियाभर के बाजारों पर कब्जा जमाए बैठा है। दुआ ने बताया कि विश्व के 55 फीसदी एपीआई बाजार पर चीन काबिज है, जबकि भारत 58 तरह की एपीआई के लिए चीन पर निर्भर है। इन दवाओं का 70 फीसदी हिस्सा अकेले चीन से आयात किया जाता है। इतना ही नहीं, देश की 373 जरूरी दवाओं की सूची में 200 एपीआई की श्रेणी में आती हैं।
एक्शन में आ सकती है सबसे पुरानी दवा कंपनी
देश की सबसे पुरानी सरकारी दवा कंपनी हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को पुनर्जीवित करने पर भी विचार चल रहा है। कंपनी ने गत फरवरी में सरकार को प्रस्ताव दिया था कि अगर उसे अपग्रेड करने को वित्तीय सहायता मिलती है तो वह देश में ऐसी दवाओं की जरूरत का 50% अकेले बना सकती है। अगर सरकार की योजना सफल रहती है तो भारतीय दवा निर्माताओं को निर्यात से 23 हजार करोड़ की कमाई हो सकती है।

आखिर कैसे बंद हो गया ओजोन परत में सबसे बड़ा छेद? बड़ा गहरा है रहस्य

मार्च के आखिरी दिनों में कोपरनिकस एटमॉस्फेयर मॉनिटरिंग सर्विस के वैज्ञानिकों ने आर्कटिक क्षेत्र के ऊपर एक बड़ी खाली जगह देखी। अब तक उन्हें वायुमंडल में इतनी बड़ी फांक नहीं दिखी थी। जल्दी ही यह एक बड़े छेद में तब्दील हो गई। उत्तरी गोलार्द्ध में इतने बड़े छेद से उनका सामना अब तक नहीं हुआ था। इसका आकार ग्रीनलैंड के बराबर था और इससे पोलर आइसकैप की सतह फैल गई थी। 23 अप्रैल को एक अच्छी खबर आई। सीएएमएस ने ट्वीट कर जानकारी दी कि इस साल यानी 2020 के मार्च में उत्तरी गोलार्ध में ओजोन परत में जो अभूतपूर्व छेद दिखा था वह बंद हो गया है।

ओजोन इतनी अहम क्यों है?
दरअसल, ओजोन परत पृथ्वी को सूरज की हानिकारक किरणों से जरूरी सुरक्षा मुहैया कराती है। पृथ्वी की ज्यादातर ओजोन इसके वातावरण (वायुमंडल) के ऊपरी स्तर यानी समताप मंडल में मौजूद होती है। जमीन से 10-40 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद ओजोन परत पृथ्वी को अल्ट्रावायलेट विकिरण से बचाने में काफी मददगार है।
इस रक्षा कवच में किसी भी छेद से बर्फ के पिघलने की गति काफी बढ़ सकती है और यह जीवधारियों के प्रतिरोधक प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। इससे मनुष्यों को स्किन कैंसर या रतौंधी जैसी बीमारियां हो सकती हैं। सीएएमएस के मुताबिक, हालांकि आर्कटिक क्षेत्र के वायुमंडल के ऊपर ओजोन परत पर छोटे छेद मिले चुके हैं, लेकिन यह पहली बार था जब ओजोन परत में इतना बड़ा छेद दिख रहा था और यह चिंता का विषय बन गया था।

छेद दिखा और फिर गायब कैसे हो गया?

सीएएमएस ने कहा कि लगातार बढ़ता हुआ छेद आकर्टिक के ऊपर असामान्य मौसम का नतीजा था। जब तेज हवाएं बर्फीली चोटियों के ऊपर की जमा देने वाली हवाओं में लगातार कई दिनों तक फंसती रहती हैं तो वैज्ञानिकों की शब्दावली में एक ‘पोलर वोर्टेक्स’ बनाती हैं। यह मजबूत दबाव अपने ही चारों ओर घूमती है। इससे इतनी ताकत पैदा होती है कि वह समताप मंडल की ओजोन में छेद कर डालती है। हालांकि अब यह छेद बंद हो गया है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम इसके अनुकूल हुआ तो यह फिर खुल सकता है।

सीएएमएस ने एक ट्वीट कर कहा कि आर्कटिक के ऊपर ओजोन परत में हुए इस बड़े छेद का कोरोना वायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन से कोई संबंध नहीं है। यह तो बेहद मजबूत और असाधारण हवा और लंबे वक्त से बने पोलर वोर्टेक्स की वजह से हुआ था। ट्वीट में कहा गया था कि ओजोन परत में हुआ यह बड़ा छेद ओजोन में आ रही बड़ी गिरावट जैसी बड़ी समस्या का एक लक्षण है। यह बंद हुआ था सिर्फ वार्षिक चक्र की वजह से। यह स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन उम्मीद बनी हुई है। ओजोन परत में सुधार आ रहा है लेकिन धीरे-धीरे।
अंटाकर्टिका के ऊपर छेद अभी भी बरकरार है
उत्तरी ध्रुव के ऊपर ओजोन में छेद एक दुर्लभ घटना है, लेकिन अंटाकर्टिका के ऊपर पिछले 35 साल से हर साल इससे भी बड़ा छेद बार-बार पैदा हो जाता है। हालांकि इसका आकार हर साल घटता बढ़ता रहता है, लेकिन निकट भविष्य में तो बंद होता नहीं दिखता।

1996 में क्लोरोफ्लोरोकार्बन का इस्तेमाल बंद हो गया था, तब से इसमें थोड़ा-थोड़ा सुधार दिखा है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे केमिकल का इस्तेमाल एयरोसोल स्प्रे, फोम, सॉल्वेंट और रेफ्रिजरेंट्स बनाने में होता है। वर्ल्ड मेटरोलॉजिकल्स ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएमओ) का कहना है कि अंटाकर्टिका के ऊपर ओजोन का छेद 2000 से अब तक एक से तीन फीसदी तक छोटा हो चुका है। हालांकि 2019 में अंटाकर्टिका में सबसे छोटा छेद रिकॉर्ड किया गया था, लेकिन(डब्ल्यूएमओ) का कहना है कि अंटाकर्टिका की ओजोन परत की छेद को भरने के लिए कम से कम 2050 तक इंतजार करना होगा।

देशभर में 17 मई तक बढ़ाया गया लॉकडाउन, ग्रीन और ऑरेन्ज जोन में शर्तों के साथ छूट

नयी दिल्ली : देश में कोरोना वायरस के प्रसार को देखते हुए लॉकडाउन को फिर से बढ़ाकर 4 मई से 17 तक कर दिया गया है। इस अवधि में सामान्य गतिविधियों को लेकर नई गाइडलाइंस भी जारी की गई हैं। हालांकि, यह सिर्फ सीमित क्षेत्रों में ही लागू किया जाएगा। इसी के मद्देनजर गृह मंत्रालय द्वारा शराब की दुकानों को खोलने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें यह कहा गया है कि सिर्फ ग्रीन जोन जिलों में ही शराब की दुकानों को खोलने की इजाजत दी जाएगी, लेकिन दुकानदारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दुकान पर एक बार में 5 से अधिक व्यक्ति मौजूद न हों।
केंद्र सरकार शुक्रवार (1 मई) को तीसरे चरण के लॉकडाउन की घोषणा की है। गृह मंत्रालय ने बताया है कि चार मई से अगले दो हफ्तों तक लॉकडाउन प्रभावी रहेगा। मंत्रालय ने कहा है कि कोविड 19 को लेकर देश में हालात की समीक्षा के बाद यह अहम फैसला किया गया है। केंद्र सरकार ने तीसरे चरण के लॉकडाउन की भी घोषणा कर दी है। गृह मंत्रालय ने बताया है कि चार मई से अगले दो हफ्तों तक लॉकडाउन प्रभावी रहेगा। मंत्रालय ने कहा है कि कोविड 19 को लेकर देश में हालात की समीक्षा के बाद यह अहम फैसला किया गया है।

लॉकडाउन के तीसरे चरण के लिए नई गाइडलाइंस भी जारी की गई है। इस नई गाइडलाइंस में रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन में बांटे जिलों में होने वाली गतिविधियों को लेकर सूचना दी गई है। ग्रीन और ऑरेंज जोन वाले जिलों को लॉकडाउन के दौरान कुछ रियायतें दी गई हैं। ग्रीन जोन में वे जिले रखे गए हैं, जहां पिछले 21 दिनों से कोई नया केस नहीं मिलेगा। गृह मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा समय में जिन गतिविधियों के लिए अनुमति मिली है, उसके लिए अलग से कोई अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। गृहमंत्रालय ने शुक्रवार को जारी आदेश में कहा है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत अधिकारों का प्रयोग करते हुए लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा की गई है।

वाल्मीकि आश्रम: इसी जगह पर लिखी गयी थी रामायण, हुआ था लव-कुश का जन्म

ऋषि वाल्मीकि हिंदू धर्म के खास गुरुओं में से एक है। ऋषि वाल्मीकि ने श्रीराम के पुत्रों लव-कुश को शिक्षा दी और महान ग्रंथ रामायण की भी रचना की। भगवान श्रीराम के त्यागे जाने के बाद देवी सीता ने अपना जीवन ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में ही बिताया था और मान्यता है कि यहीं पर लव-कुश का जन्म भी हुआ था।
कहां है वाल्मीकि आश्रम-
मेरठ से करीब 27 किलोमीटर दूर
बागपत का एक गांव है बलैनी। यह गांव बागपत शहर से भी करीब 23 किलोमीटर दूर है। मेरठ से बागपत की तरफ जाते समय करीब 27 किलोमीटर दूर अंदर की तरफ एक रास्ता जाता है। इस रास्ते पर थोड़ा आगे जाने पर एक आश्रम दिखाई देता है। वही ऋषि वाल्मीकि का आश्रम माना जाता है।


इसी आश्रम में लिखी गई थी रामायण
मान्यता है कि यही वह जगह है, जहां ऋषि वाल्मीकि ने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की थी। माना जाता है कि श्रीराम के त्यागे जाने के बाद माता सीता इसी आश्रम में आकर रही थीं। यहीं पर उन्होंने लव-कुश को जन्म दिया था।
हिंडन नदी के पास स्थित है आश्रम
ऋषि वाल्मीकि और माता सीता से संबंधित होने के कारण यह जगह बहुत ही पवित्र मानी जाती है। यहां पर हिंडन नाम की नदी बहती है, जिसे गंगा का ही एक रूप माना जाता है। इसी नदी के पास यह आश्रम स्थापित है। आश्राम के परिसर भी आज भी माता सीता का मंदिर स्थापित है।
मौजूद है माता सीता की रसोई
हिंडन नदी के किनारे बसे इस स्थान पर एक सीता रसोई भी बनी हुई है। यहीं पर सीता जी भोजन बनाती थी। माना जाता है कि आश्रम में मौजूद बर्तन वही हैं, जिनका उपयोग माता सीता खाना बनाने में करती थीं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

7.45 लाख फॉलोअर्स, ट्विटर पर आरबीआई बना केन्द्रीय बैंकों में सबसे लोकप्रिय

नयी दिल्ली : ऐसे समय में जब कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लॉकडाउन के बीच लोग अपने घरों में रह रहे हैं, सूचना का एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है माइक्रोब्लॉगिंग साइट, कई केन्द्रीय बैंक इस साइट पर सक्रिय हैं। लेकिन, कोरोना संकट के चलते आर्थिक अनिश्चितता के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ट्विटर पर दुनियाभर के केन्द्रीय बैकों में सबसे ज्यादा पॉपुलर हो गया है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर 85 वर्षीय शक्तिकांत दास का अपना अलग ट्वीटर अकाउंट है। प्रमुख केन्द्रीय बैंकों के ऑफिशियल ट्विटर एकाउंट का विश्लेषण करने पर यह पता चला है कि आरबीआई के पास सबसे ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
गुरुवार की सुबह तक आरबीआई के ट्वीटर हैंडल पर 7.45 लाख फॉलोअर्स थे। सिर्फ 20 अप्रैल को ही आरबीआई के ट्विटर पर 1.31 नए फॉलोअर्स जुड़े। अधिकारी के मुताबिक, मार्च 2019 से अब तक आरबीआई के फॉलोअर्स दोगुने हो गए और यह 3 लाख 42 हजार बढ़कर 7 लाख 50 हजार हो गए हैं। आरबीआई का ट्विटर अकाउंट जनवरी 2012 में बनाया गया था।
आरबीआई से जो पीछे हैं वो है बैंक ऑफ इंडोनेशिया, जो ईस्ट एशियन नेशन का केन्द्रीय बैंक और इसके फॉलोर्स 7.15 लाख है। तीसरे नंबर पर बांको डे मैक्सिको (मैक्सिको का सबसे बड़ा बैंक) है जिसके ट्विटर पर फॉलोअर्स हैं 7.11लाख।
आरबीआई ने एक और ट्विटर अकाउंट- ‘RBI Says’ बनाया है और इसी नाम से अप्रैल में फेसबुक पेज शुरू किया है। इसके साथ ही, इसने सेफ्टी कैंपेन लाउंच करते हुए लोगों को ये सलाह दी है कि वे कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए देश को किए गए लॉकडाउन के चलते बैंक के ब्रांचों में न जाकर अपने घरों में ही सुरक्षित और स्वस्थ रहें।
अधिकारी ने बताया कि 25 मार्च से शुरु हुए लॉकडाउन के दौरान इन 7 हफ्तों में आरबीआई के फॉलोअर्स में 1.5 लाख से ज्यादा का इजाफा हुआ है। अधिकारी ने आगे बताया कि मार्च 2019 में आरबीआ केन्द्रीय बैंकों में ट्विटर पर फॉलोअर्स के मामले में 6ठे स्थान पर था जो लॉकडाउन शुरु होने से पहले चौथे स्थान पर।

एमफिल, पीएचडी की थीसिस के लिए 6 माह अतिरिक्त मिलेंगे : यूजीसी

नयी दिल्ली : यूजीसी की एक विशेष समिति ने एमफिल और पीएचडी के छात्रों को विशेष राहत प्रदान की है। समिति ने यूजीसी को भेजी अपनी सिफारिश में कहा है कि एमफिल और पीएचडी करने वालों को थीसिस जमा करने के लिए तय आखिरी तारीख से छह माह और दिए जाएं। समिति इसके साथ ही परीक्षा ऑनलाइन कराने और विश्वविद्यालय की परिस्थिति के हिसाब से ऑनलाइन या ऑफलाइन, ओपन बुक एग्जाम करवाने की सिफारिश की है।
कोरोनावायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया गया है। इस लॉकडाउन का असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ा है। पीएचडी और एमफिल के छात्र लॉकडाउन से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इन छात्रों की सभी प्रयोगशालाएं बंद पड़ी हैं। इसके साथ ही कई एमफिल और पीएचडी छात्रों को इसी महीने अपनी थीसिस भी जमा करवानी है।
पीएचडी की एक छात्रा नूपुर ने कहा कि पीएचडी और एमफिल के रिसर्चर को अपनी थीसिस जमा करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यूजीसी के नियमानुसार और दिल्ली विश्वविद्यालय के अध्यादेशों के मुताबिक शोध की डिग्री प्राप्त करने के लिए कई शोधार्थियों को सेमिनार, थीसिस जमा करवाना होता है। विश्वविद्यालय के अध्यादेश के अनुसार निर्धारित समय सीमा के अंदर इनमें से कई शोधार्थियों को अपना प्री-पीएचडी सेमिनार करना था अथवा पीएचडी, एमफिल थीसिस जमा करनी थी।
यूजीसी की इस समिति के अध्यक्ष हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति आर.सी. कुहाड़ हैं। सदस्यों में इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर के निदेशक ए.सी. पांडेय, वनस्थली विद्यापीठ के कुलपति आदित्य शास्त्री और पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति राज कुमार शामिल हैं।
समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है, “पीएचडी, एमफिल स्कॉलर्स को डिग्री पूरी करने और थीसिस जमा करने के लिए छह महीने का एक्सटेंशन पीरियड जोड़ा जाए।”
आपको बता दें कि इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य वी. एस. नेगी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष प्रो. डी. पी. सिंह को पीएचडी एवं एमफिल शोधार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक पत्र लिखा था। उन्होंने पत्र में कोविड-19 (कोरोना वायरस) के प्रकोप के कारण उत्पन्न हुई आपातकालीन परिस्थितियों के मद्देनजर एमफिल और पीएचडी छात्रों के लिए थीसिस जमा करवाने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की थी।

देश की सभी आईआईटी, एनआईटी और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में भी खोले जाएंगे केंद्रीय विद्यालय

23 में से 7 आईआईटीज में संचालित हो रहे केंद्रीय विद्यालय

नयी दिल्ली : देश में कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही लड़ाई के बीच शिक्षा जगत से अच्छी खबर है। अब देश के सभी आईआईटीज, एनआईटीज और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में सरकार की ओर से केंद्रीय विद्यालय संचालित किए जाएंगे। इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आईआईटीज से इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य बिंदुओं पर प्रस्ताव मांगा है। इससे पहले कई आईआईटीज में निजी स्कूलों का संचालन हो रहा था। नवंबर में दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक याचिका के बाद कोर्ट ने आईआईटीज में चल रहे निजी स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए थे।
अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय स्कूल संचालित करने के साथ इन स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर संबंधित संस्थान के कर्मचारियों के बच्चों को दाखिला देने के आदेश जारी किए हैं। वर्तमान में 23 में से सात आईआईटीज, 31 एनआईटी में से मात्र दो व केंद्र व राज्यों को मिलाकर 50 में से मात्र आठ सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में ही केंद्रीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
आईआईटी मंडी के पूर्व कर्मचारी सुजीत स्वामी की याचिका पर पूर्व में दिल्ली हाईकाेर्ट ने आईआईटी में चल रहे निजी स्कूल बंद करने के आदेश दिए थे। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश की पालना के संबंध में स्वामी ने एमएचआरडी में नोटशीट के लिए आरटीआई दाखिल की। इसके बाद यह तथ्य सामने आया। एक्सपर्ट के अनुसार सरकारी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह एक बड़ा कदम है।
देश भर में कई आईआईटीज, एनआईटीज और विश्वविद्यालयों में ये स्कूल संचालित हो रहे हैं। आईआईटी गुवाहटी, दिल्ली, बॉम्बे, जोधपुर, मद्रास, कानपुर, खड़गपुर, एनआईटी सिलिचर, अगरतला, सेंट्रल यूनिवर्सिटी तेजपुर, सिलिचर, जम्मू, सागर, वर्धा, शिलांग, मिजोरम और नागालैंड में केंद्रीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
आईआईटीज और एनआईटीज में कर्मचारियों के एक संस्थान छोड़कर दूसरे संस्थान में जाने की स्थिति में छात्र एक केंद्रीय विद्यालय से दूसरे केंद्रीय विद्यालय में दाखिला ले सकेगा। इसके साथ ही सीटें खाली रहने पर अन्य छात्रों को दाखिला दिया जाएगा। इससे पहले कैंपस में संचालित होने वाले निजी स्कूल में सालाना 40 से 50 हजार रुपए बतौर फीस के लिए जा रहे थे। अब इससे कर्मचारियों पर भी भार कम होगा।

दुनिया का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो बना रामायण, बना 7.7 करोड़ दर्शकों का विश्व रिकॉर्ड

मुम्बई : रामानंद सागर के शो रामायण का फिर से प्रसारण कई मायनों में यादगार बन गया है। 33 साल बाद दोबारा डीडी नेशनल पर प्रसारित इस शो ने नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इस बात की जानकारी दूरदर्शन ने अपने ट्विटर हैंडल पर दी। यह कारनामा 16 अप्रैल को हुआ, जहां इस शो को 7.7 करोड़ रिकॉर्ड दर्शक मिले।
ट्वीट में लिखा है – विश्व रिकॉर्ड, दूरदर्शन पर रामायण के पुन: प्रसारण ने दुनियाभर में व्यूअरशिप के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह शो सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो बन गया है। जिसे 16 अप्रैल को 7.7 करोड़ दर्शकों ने देखा। गौरतलब है कि रामायण का पुन: प्रसारण 28 मार्च से जनता की विशेष मांग पर किया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब रामायण ने कोई नया रिकॉर्ड बनाया है। जब पहली बार टीवी पर यह प्रसारित हुआ था, उस वक्त भी शो ने प्रसिद्धि के कई रिकॉर्ड्स बनाए थे और 33 साल बाद एक बार फिर इतिहास दोहराया जा चुका है। 78 एपिसोड का शो रामायण वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास रचित रामचरितमानस के आधार पर बना है। 1987 से 1988 तक रामायण दुनिया में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो रहा। 2003 तक इस शो का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में द मोस्ट वॉच्ड माइथोलॉजिकल सीरियल इन द वर्ल्ड में नाम शामिल रहा।