Friday, May 1, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 489

शुभ सृजन सम्पर्क स्टार्टअप स्टोरीज

हम सब जानते हैं कि कोरोना काल के कारण देश और अर्थव्यवस्था किस स्थिति से गुजर रहे हैं। खासकर देश भर में श्रमिकों की जो स्थिति है, वह वाकई दिल दहला देने वाली है लेकिन यह बात ध्यान में रखनी होगी कि श्रमिक सबसे बड़ा संसाधन हैं और वह आधार हैं किसी उद्योग का। आज नौकरियों की समस्या विकराल है और कोरोना के लॉकडाउन ने स्थिति को और बिगाड़कर रख दिया है। इतनी समस्याओं के बावजूद यह भी सच है कि आपदा में भी अवसर होते हैं, जरूरत उसे पहचानने की है। आज जो श्रमिक घर लौटे हैं, वह कोई न कोई हुनर सीखकर लौटे हैं, वर्षों काम करने के बाद लौटे हैं इसलिए उनका अनुभव और उनकी कार्यक्षमता ही सबसे बड़ा संसाधन है जो कि इनसे जुड़े राज्यों में उद्योग को एक नयी दिशा दे सकती है और श्रम संसाधन न मिलने के कारण जो उद्यमी निराश बैठे हैं, उनके लिए भी यह एक अवसर है जो इन श्रमिकों के हुनर का लाभ उठाकर राज्य की क्षमता और संसाधनों तथा माँग के अनुसार उद्यम स्थापित करें। उद्योग के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए उद्यमी को सुविधाएँ, सरकारी संरक्षण, पूँजी, जानकारी और प्रचार की भी जरूरत है। ये अवसर है कि हम साथ आएँ।
शुभ सृजन सम्पर्क स्टार्टअप स्टोरीज
शुभजिता मानती है कि आज रोजगार सृजन की जरूरत है और यह काम उद्योग से ही सम्भव है। उद्यमी स्तम्भ हम पहले ही आऱम्भ कर चुके हैं..अब बाजार में नया…नव उद्यमी स्तम्भ भी ला रहे हैं। अलग -अलग उद्योग, सरकारी योजनाएँ, पर्यावरण अनुकूल उद्योग के अतिरिक्त बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बंगाल के साथ महिलाएँ हमारे केन्द्र में हैं और स्टार्टअप का वर्गीकरण हमने वर्गों में किया है –
स्थापित उद्यम
1. उद्यमी – तीन साल से अधिक पुराना उद्योग (महिला व पुरुष, दोनों के लिए)
स्टार्टअप
2. नव उद्यमी – अगर आपका स्टार्टअप 1 साल पुराना है…।
3. नव्या (महिलाओं के लिए) – अगर आपका स्टार्टअप 1 साल पुराना है।
शुभ सृजन सम्पर्क एक हिन्दी डायरेक्टरी है
पंजीकरण शुल्क – तीन साल से कम 100 रुपये। तीन साल से अधिक 200
महिलाओं के लिए 100 रुपये

  • आपको स्टोरी के साथ एक डिजिटल सम्मान पत्र भी मिलेगा।

 

हिंदी विश्वविद्यालय कोलकाता केंद्र कार्यालय 30 जून तक बंद

कोलकाता  : कोरोना संकट को देखते हुए केंद्र एवं पश्चिम बंगाल सरकार के दिशानिर्देशों के आलोक में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा का क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता कार्यालय 30 जून तक बंद रहेगा। केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ ने बताया कि इस आशय का कार्यालय आदेश कुलपति के अनुमोदन से विश्वविद्यालय कुलसचिव ने केंद्र को जारी किया है। इस बीच औपचारिक रूप से ग्रीष्मावकाश के चलते ऑनलाइन कक्षाएँ अभी स्थगित हैं। फिर भी विद्यार्थियों के अकादमिक संवर्द्धन के लिए केंद्र के अध्यापक ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में नए सत्र में प्रवेश के लिए आवश्यक प्रक्रिया भी शीघ्र आरंभ होने वाली है।

बन जाएँ हम वोकल फॉर लोकल, बनाएँ आत्मनिर्भर भारत

शुभजिता फीचर डेस्क
ट्विटर पर उठी पुकार ‘बाय बाय इंडिया, ओनली भारत’
कोलकाता : भारतीयों की राष्ट्रीय चेतना और भी मजबूत होती दिख रही है और सोशल मीडिया पर भी यह मुहिम तेज हो गयी है। टि्वटर पर ‘बाय बाय इंडिया, ओनली भारत’ बुधवार को ट्रेंड करता रहा। स्वदेशी के पक्ष में एक लाख से अधिक टि्वट देखे गये। देश के प्रति अपने गौरव बोध को जाहिर करने के लिए भारतीय एक से एक अनूठे तरीके खोज रहे हैं और यह वक्त की माँग भी है। कोरोना वायरस के बाद लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को सम्भालने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर’ भारत का आह्वान किया था उनके इस अभियान ने जैसे रिसेट का बटन दबा दिया। भारतीय अब स्वदेशी आन्दोलन को लेकर दृढ़ता से आगे आ रहे हैं। मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स यानी भारत में निर्मित उत्पादों के समर्थन के लिए योग गुरु रामदेव और भारत के शीर्ष सन्तूर वादक व संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता तरुण भट्टाचार्य भी आगे आये हैं।
भट्टाचार्य का कहना है कि स्थानीय उत्पादों, संस्कृति, धरोहर, मूल्यबोध भारत की अद्भुत शक्तियाँ हैं और इनमें भारत को सशक्त करने की पूरी क्षमता है। भारत में निर्मित ब्रांडस, जैसे शेयर चैट का समर्थन करने की जरूरत है जो भारतीयता को सामने लाते हैं और देश के विकास में योगदान देते हैं। प्रिया इन्टरटेन्मेंट्ज प्राइवेट लिमिटेड तथा इको एडवेंचर रिसॉर्ट्स के प्रबन्ध निदेशक तथा अभिनेता अरिजीत दत्त ने इस अभियान को समर्थन दिया और खुशी जतायी। शेयर चैट के साथ उन्होंने अमूल, टाटा, आईटीसी के योगदान की भी सराहना की। ब्रांड्स भी ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर’ की मुहिम को आगे ले जा रहे हैं। टि्वटर पर चीनी उत्पादों के बहिष्कारों की मुहिम तेज हो गयी है। सोनम वांग्चुक, मिलिन्द सोमेन. अरशद वारसी, आयुष्मान खुराना समेत कई अन्य चर्चित हस्तियाँ टिकटॉक समेत चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने का आह्वान कर चुकी हैं और भारत को मजबूत बनाने की मुहिम आगे ले जा रही हैं।


जानिए कुछ ऐसे उत्पादों के बारे में जिनके देसी विकल्प हमारे पास हैं
हम आपको कुछ ऐसे विदेशी उत्पादों के नाम बताते है जो हमारे घरों में धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि इससे बेहतर क्वालिटी के देशी उत्पाद भी मौजूद हैं। लेकिन विज्ञापन के दौर में अच्छे प्रोडक्ट बनाने के बावजूद देशी कंपनियां आगे नहीं बढ़ पाती। आइए जानते है ऐसे ही कुछ प्रोडक्ट के विषय में…
1. टूथपेस्ट
विदेशी- कोलगेट, क्लोज अप, पेप्सोडेंट, सिबाका, एक्वाफ्रेश, एमवे, ओरवली।
लोकल- बबूल, प्रॉमिस, दंतकांति, विको वज्रदंती, नीम, एंकर, मिस्वाक, कामधेनु काला दंतमंजन।
2. टूथब्रश
विदेशी- कोलगेट, क्लोज अप, पेप्सोडेंट, सिबाका, एक्वाफ्रेश आदि।
लोकल- प्रॉमिस, अजय, अजन्ता, मोनेट, रॉयल, क्लासिक आदि।
3. नहाने का साबुन
विदेशी- लक्स, लिरिल, लाईफबाय, डेनिम, डव, केमे, पीयर्स, रेक्सोना, ब्रीज, हमाम, पोंड्स, डिटॉल आदि।
लोकल- निरमा, मेडिमिक्स, नीम, नीमा, जैस्मिन, मैसूर, संदल, हिमानी, सिंथॉल, शिकाकाई, गंगा आदि।
4. शैंपू
विदेशी- लक्स, क्लिनिक, सनसिल्क, रेवलॉन, लक्मे, पैंटिन, मेडिकेयर, पॉन्ड्स, हेड एंड शोल्डर आदि।
लोकल- विप्रो, स्वास्तिक, अयुर हर्बल, केश निखार, हेयर एंड केयर, नाइसिल, वेलवेट, बजाज आदि।
5. वॉशिंग पाउडर
विदेशी- सर्फ, रिन, सनलाइट, व्हील, ओके, मिम, एरियल, चेक, हांको, इजी, नील, स्काइलार्क आदि।
लोकल- टाटा, निमा केयर, सहारा, स्वास्तिक, विमल, हिपोलीन, फेना, सेसा, टी-सीरिज, घड़ी, जेंटिल, उजाला, रानीपाल, निरमा, चमको आदि।
6. क्रीम, पाउडर और सौंदर्य प्रसाधन
विदेशी- फेयर एंड लवली, लक्मे, लिरिल, डेनिम, रेवलोन, क्लियरेसिल, चार्मिस, पॉन्ड्स, डेटाल, ओल्ड स्पाइश, नाइसिल, जानसन बेबी प्रोडक्ट आदि।
लोकल- विको, बोरोप्लस, हिमानी, गोल्ड, नाइल, लेवेंडर, हेयर एंड केयर, हेवन्स, सिंथोल, ग्लोरी वेलवेट, कायाकांति ऐलोवेरा, कायाकांति नीम, कांतिलेप।

7. शेविंग ब्लेड- क्रीम
विदेशी- ओल्ड स्पाइस, पामोलिव, पॉन्डस, जिलेट, डेनिम, यार्डले, विल्मैन, विल्टेज आदि।
लोकल- टोपाज, गेलेन्ट, सुपर मैक्स, लेजर, एक्सक्वायर, प्रिंस, विजोन, इमामी, बलसारा, गोदरेज आदि।
8. शीतल पेय
विदेशी- कोका-कोला, फेंटा, स्प्राइट, थम्सअप, गोल्ड स्पॉट, पेप्सी, लहर, मिरांडा, 7 अप, सिट्रा।
लोकल- रसना, फ्रूटी, गोदरेज, जंप इन, गुलाब और बादाम शरबत, दूध, लस्सी, छाछ, नींबू पानी, नारियल पानी, ठंडाई, जलजीरा आदि।
9. चाय/काफी
विदेशी- टाइगर, ग्रीन लेबल, ब्रुक बॉन्ड, गुडरिक, नेस्ले, सनराइज, नेस्कैफे, रेड लेबल, ताजमहल आदि।
लोकल- टाटा, ब्रह्मपुत्र, असम, गिरनार, चाय दिव्य पेय आदि।
10. शिशु आहार/दुध पाउडर आदि
विदेशी- लेक्टोजेन, सेरेलक, नेस्ले, मिल्कमेड, से स्प्रे, एवरीडे, ग्लैक्सो, फेरेक्स आदि।
लोकल- अमूल, इंडाना, सागर, तपन मिल्क, केयर, शहद, दाल का पानी, फलों का रस आदि
बिस्कुट, चाकलेट, पानी, नमक, चिप्स और नमकीन तक पर विदेशी कंपनी का कब्जा
ये हमने आपके सामने कुछ विदेशी और स्थानीय उत्पाद रखे हैं। इसके अलावा क्या आपको पता है कि हमारे घर में नमक तक विदेशी कंपनियां सप्लाई कर रही हैं। अन्नपूर्णा, कैप्टेन, कुक, किसान, पिल्सबरी नाम से विदेशी नमक भी हमारे घर में घुस चुके है। हालांकि लोकल नमक के तौर पर मार्केट में अंकुर, सैंधा, टाटा, सूर्या ताया, तारा नाम से लोकल नमक भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा बिस्कुट और चाकलेट के मार्केट पर भी विदेशी कंपनियों ने कब्जा कर रखा है, जिसका हम अपने घरों में खूब इस्तेमाल भी करते हैं। पानी की बोतल खरीदते समय भी हममे से कई लोग एक्वाफिना, किनले, वैली आदि नाम देखकर तो खरीद लेते है। लेकिन लोकल कंपनी गंगा, हिमालया, कैंच आदि पर विश्वास नहीं करते। इसलिए समझना मुश्किल नहीं है कि प्रधानमंत्री ने भारतीयों को आत्मनिर्भर रहने के लिए लोकल, वोकल और ग्लोबल करने की बात क्यों कहीं है। अगर भारत के लोग स्वदेशी यानी लोकल प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना शुरू कर दें तो ना सिर्फ भारत आर्थिक रूप से मजबूत होगा बल्कि भारत के लोगों के जीवनस्तर में परिवर्तन देखने को मिलेगा।
लोकल का मतलब सिर्फ भारतीय नहीं
पीएम के भाषण के अगले दिन भाजपा ने साफ किया था कि लोकल का मतलब केवल भारतीय कंपिनयों के बनाए उत्पादों से नहीं है और इसके दायरे में देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बनाए उत्पाद भी हैं। देश की सबसे बड़ी बिस्किट कंपनी पारले प्रॉडक्ट्स ने पारले-जी, हाइड ऐंड सीक जैसे कई बड़े ब्रैंड्स के लिए स्वदेशी थीम वाले विज्ञापन जारी किए हैं। पारले प्रॉडक्ट्स के कैटिगरी हेड मयंक शाह ने कहा, ‘हम यह बताने के लिए सभी प्लैटफॉर्म्स का उपयोग करेंगे कि हम स्वदेशी ब्रैंड हैं।’
कम्पनियाँ आ रही हैं आगे
बड़ी कन्ज्यूमर कंपनियां अपने सभी ऐडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग कैंपेन में ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर बढ़ा रही हैं। ITC, पारले प्रॉडक्ट्स, अमूल, डाबर, बिसलरी, गोदरेज, मैरिको और वोल्टास जैसी कंपनियों ने इस दिशा में कदम उठाया है। पीएम ने हाल में 12 मई को राष्ट्र को संबोधित किया था।


डिजिटल मीडिया और टीवी पर स्वदेशी का झंडा
डाबर के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया, ‘हमने स्वदेशी के संदेश के साथ डिजिटल मीडिया और टीवी, खासतौर से न्यूज चैनल्स पर विज्ञापन करना शुरू किया है।’ वाटिका शैंपू और रेड टूथपेस्ट बनाने वाली डाबर का मुकाबला कोलगेट पामोलिव और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड सरीखी मल्टीनैशनल कंपनियों से है। मल्होत्रा ने कहा, ‘इस बात की काफी संभावना है कि मेड इन इंडिया फैक्टर का लोगों के खरीदारी करने के निर्णय पर असर पड़ेगा। वोकल फॉर लोकल कैंपेन में आयुर्वेद सरीखे भारत के परंपरागत ज्ञान का फायदा उठाने की क्षमता है।’
आईटीसी का मेक इन इंडिया पर जोर
आत्मनिर्भर भारत थीम वाले अपने संबोधन में पीएम ने लोगों से स्थानीय उत्पादों और ब्रैंड्स पर जोर देने की अपील की थी और देश में बनाए गए उत्पाद खरीदने को कहा था। सिगरेट से लेकर कन्ज्यूमर गुड्स तक बनाने वाली आईटीसी ने कहा कि वह अपने कैंपेन में मेक इन इंडिया पर जोर देती रहेगी। आशीर्वाद आटा, सनफीस्ट बिस्किट और विवेल साबुन बनाने वाली आईटीसी ने अपने गैर-सिगरेट कारोबार से एक लाख करोड़ रुपये की बिक्री हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। आईटीसी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर बी सुमंत ने कहा, आईटीसी ने इंडियन ब्रैंड्स का दमदार पोर्टफोलियो तैयार करने में जमकर निवेश किया है। इससे लाखों किसानों को सपोर्ट मिलता है और बड़े पैमाने पर लोगों की आजीविका का इंतजाम होता है। हमने 25 इंडियन ब्रैंड बनाए हैं।’
पतंजलि का हमेशा से स्वदेशी पर जोर
ब्रांड स्पेशलिस्ट संतोष देसाई ने हालांकि कहा कि लोकल क यह थीम उपभोक्ताओं पर कुछ खास असर नहीं डाल सकेगी। उन्होंने कहा, ‘अधिकतर उपभोक्ताओं को यह पता नहीं होता है कि कौन-सा ब्रैंड किस कंपनी का है। पतंजलि जैसी कुछ कंपनियों ने ही भारतीयता की थीम पर कारोबार बढ़ाया है।’ योग गुरु रामदेव की पतंजलि ने अपने सभी ब्रैंड्स में स्वदेशी के पहलू पर जोर दिया है।
– इनपुट – नवभारत टाइम्स

घरेलू हिंसा के खि़लाफ़ खामोशी तोड़ें 

-सीमा श्रीनिवास
एक ओर जहाँ पूरा विश्व कोविड 19 महामारी की चपेट में है और इसकी तबाहियों से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर घरेलू हिंसा की संख्या में भी बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। हालांकि घरेलू हिंसा हमेशा से भारतीय समाज की एक बड़ी समस्या रही है मगर कोविड 19 महामारी के दौर में देश भर में लागू हुए लाॅकडाउन की वज़ह से यह समस्या पिछले दो महीनों में साधारण स्थिति से बढ़कर दोगुनी हो गयी है। ऐसी परिस्थिति में यूनाईटेड नेशन्स ने भी घरेलू हिंसा को ‘‘शैडो पेनडामिक’’ यानि ‘‘छाया महामारी’’ का नाम दिया है। दुनिया भर से घरेलू हिंसा के मामले सामने आ रहे हैं जो यह प्रमाणित कर रहें हैं कि कोविड 19 महामारी के समय भी महिलाओं के लिए घर ‘सुरक्षित’ नहीं है।
पश्चिम बंगाल के संदर्भ में भी हमने पाया है कि कोविड 19 से बचने के लिए घर पर ही रहने के सरकारी आदेश की स्थिति ने बहुत सी महिलाओं के लिए घर को असुरक्षित हिंसात्मक स्थल बना दिया है। वे हिंसक के साथ एक ही छत के नीचे हिंसा झेलने को मजबूर हो गई हैं। महिलायें चाहकर भी हिंसात्मक वातावरण से खुद को नहीं बचा पा रही हैं। न तो वे अपने परिजनों को बुला पा रही हैं और न ही उनके पास जा पा रही हैं। घर से न निकल पाने और फोन द्वारा संपर्क न कर पाने की स्थिति में उनकी संभावित मददकारी संस्थाओं तक पहुँच भी ‘न’ के बराबर हो गयी है। घरेलू हिंसा जैसी ‘छाया महामारी’ ऐसी भयकंर है जिसमें महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, यौनिक, आर्थिक और भावनात्मक सभी तरह की यातनाओं को झेलना पड़ रहा है।
यहां इस बात पर रोशनी डालना बेहद ज़रूरी है कि ऐसी विकट परिस्थिति में भी बहुत सारे सरकारी व गैर सरकारी सहायक हेल्पलाइन चलायी जा रहे हैं जिन पर महिलायें खुद पर हो रही घरेलू हिंसा की सूचना दे सकती हैं और मदद माँग सकती हैं। ऐसी ही गैरसरकारी संस्था ‘स्वयं’ घरेलू हिंसा के खि़लाफ़ लाॅकडाउन में भी आपके साथ है और आपकी सहायता के लिए तत्पर है। स्वयं एक महिला संस्था है जो 1995 से महिलाओं पर होने वाली हिंसा का विरोध करती आ रही है और महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल महिला कमिशन भी पीड़ित महिलाओं की सहायता के लिए हेल्पलाइन सुविधा मुहैया करा रही है।

सरकारी हेल्पलाइन नम्बर

राज्य महिला कमिशन – 9830947247

कलकत्ता पुलिस विमेन्स ग्रिवियांस सेल – 033 – 22145049/1429

स्वयं सहायता हेल्पलाइन नम्बर – 9830079448/9830204393/ 9830204322/9830737030/9830747030 /9073916030/9073917030/9073910040 

मानसिक काउंसिलर हेल्पलाइन –  9830772814  यह सोमवार से शुक्रवार (रोजाना सुबह 10 से दोपहर 2 बजे)

ई मेल – [email protected]

वेबसाइट – www.swayam.info

लेखिका सामाजिक कार्यकर्ता हैं और स्वयं संस्था से जुड़ी हैं

  अम्फन चक्रवात : जेएसडब्ल्यू सीमेंट ने पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए 11 मिलियन रुपये 

कोलकाता : भारत में ग्रीन सीमेंट के सबसे बड़े निर्माता के रूप में प्रतिष्ठित जेएसडब्ल्यू सीमेंट, 14 बिलियन डॉलर के जेएसडब्ल्यू ग्रुप का हिस्सा है, जिसने अम्फन चक्रवात से प्रभावित लोगों के लिए चलाए जा रहे राहत कार्य में मदद के तौर पर 1.11 करोड़ रुपये दान किए हैं। यह अनुदान पश्चिम बंगाल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को दिया गया। इस महीने की शुरुआत में, सुपर साइक्लोन अम्फन ने पूर्वी भारत और बांग्लादेश में भारी तबाही मचाई है। इसे 2007 के बाद से गंगा डेल्टा से टकराने वाला सबसे शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात माना गया है। इस चक्रवात की वजह से पूरे पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वी भारत के अन्य इलाकों में 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है, और इस प्रकार यह अब तक का सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाला चक्रवात बन गया है; इसने एक दशक से अधिक समय पहले आए नरगिस चक्रवात के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। ओडिशा के तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में कोलकाता, हुगली, हावड़ा, पूर्वी मिदनापुर, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना  अम्फन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

अम्फन चक्रवात की वजह से हुई तबाही तथा राहत एवं पुनर्निर्माण के प्रयासों को समर्थन दिए जाने की आवश्यकता पर टिप्पणी करते हुए, जेएसडब्ल्यू सीमेंट के प्रबंध निदेशक, श्री पार्थ जिंदल ने कहा, हमें इस प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के साथसाथ मानव जीवन, संपत्ति और राज्य के मनोबल पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव का एहसास है। यह आपदा एक ऐसे समय में आई है, जब देश और इसकी पूरी आबादी कोरोनोवायरस महामारी की वजह से स्वास्थ्य और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट के रूप में, हम इस चक्रवात से प्रभावित लोगों की स्थिति जल्द बेहतर होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। हम आशा करते हैं कि, पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री राहत कोष में हमारे इस मामूली योगदान से उनके नुकसान के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, हमारी क्षेत्रीय टीम राहत एवं पुनर्निर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों में हर संभव तरीके से मदद कर रही है, जिसमें हमारे जेएसडब्ल्यू सीमेंट के कर्मचारियों के साथसाथ बिजनेस एसोसिएट्स भी शामिल हैं।

ग्राहकों की मदद करेंगे कोटाक के केया व़ॉयस बोट तथा चैटबोट हेल्प

कोलकाता : कोरोना काल के लॉकडाउन के कारण डिजिटल बैंकिग का महत्व बढ़ गया है। कोटाक बैंक ने लॉकडाउन के दौर में अपने 60 हजार ग्राहकों के लिए नेट और मोबाइल बैंकिंग की सुविधाएँ दी हैं। बैंक के केया वॉयस बोट और चैटबोट हेल्प परिसेवा का लाभ ग्राहक उठा रहे हैं। बैंक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक 2018 में शुरू किया गया केया वॉयस बोट भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अपनी तरह की पहली सुविधा है। कर्ज से सम्बन्धित प्रश्नों के जवाब 11 प्रतिशत ग्राहकों को इससे मिले।75 प्रतिशत मामलों में पूरी दक्षता के साथ वह ग्राहकों के प्रश्नों के उत्तर 20 से 25 सेकेंड में देती है। लोगों में नेट बैंकिंग, क्रेडिट और बैलेंस को लेकर जिज्ञासा देखी गयी। वहीं 2018 में ही लायी गयी केया चैटबोट सुविधा नेट, मोबाइल तथा कोटाक बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध है। केया चैट बोट पर ऋण के अतिरिक्त ईएमआई और क्रेडिट कार्ड से लेनदेन के प्रश्नों में 300 प्रतिशत वृद्धि देखी गयी। केया चैटबोट के पैकेज में कोटाक ने ट्रैकिंग, खाते की जानकारी की सुविधा बढ़ा दी है। लॉकडाउन में केया चैटबोट ने जिज्ञासाएँ 28 प्रतिशत बढ़ गयीं। बैंक के 650 कर्मचारी ग्राहकों की सहायता कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए स्टॉक मार्केट आकर्षक बना रहा है डिजिटाइजेशन, रिटर्न में सुधार

कम उम्र में ट्रेडिंग शुरू करना एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह वित्तीय अनुशासन लाता है और पर्याप्त बचत के साथ भविष्य की अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए तैयार करता है। इस क्षेत्र में बढ़ता डिजिटाइजेशन ज्यादा से ज्यादा मिलेनियल्स निवेशकों को स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग की दुनिया में एक गहरा गोता लगाने को आकर्षित कर रहा है और इस वजह से बड़ी संख्या में युवा स्टॉक मार्केट में निवेश कर रहे हैं।
एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड के चीफ ऑपरेशन ऑफिसर नीलेश गोकराल के अनुसार, डिजिटाइजेशन के नेतृत्व में दुनिया में बड़े पैमाने पर अगली तकनीकी क्रांति दिख रही है। पहले स्टॉक ब्रोकर और ट्रेडर फ्लोर पर मिलते थे और लेन-देन होते थे। लेकिन अब यह सारी व्यवस्था डिजिटल पर शिफ्ट हो गई है। स्टॉक ब्रॉकर्स का पहले बाजार पर एकाधिकार था और उनकी अंतर्दृष्टि और सिफारिशें निवेशकों के लिए जानकारी का एकमात्र स्रोत थीं, डॉट-कॉम क्रांति से महत्वपूर्ण बदलाव आया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के आने से सूचनाएं सभी के लिए सस्ती और सुलभ हो गई हैं। इस वजह से ट्रेडिंग अब भौतिक उपस्थिति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल माध्यमों के जरिए सुलभ होता गया। स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग के लिए मोबाइल एप की बढ़ती संख्या के कारण अब एक बार फिर बड़े पैमाने पर शिफ्ट हो रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्स ने मिलकर ट्रेडर्स को समृद्ध जानकारी तक पहुंच दी और त्वरित निर्णय लेने में सक्षम बनाया है।
इसके लिए ट्रेडिंग का अधिकतम लाभ हासिल करने में डिजिटाइजेशन की भूमिका को परिभाषित किया गया है।
ट्रेडिंग की दुनिया में प्रवेश बाधाओं को दूर करना
ज्ञान की कमी के कारण लंबे समय तक लोगों में शेयर बाजार में निवेश करने को लेकर हिचकिचाहट थी। उन्हें पारंपरिक दृष्टिकोण का ही पता था जिसमें उन्हें शेयर खरीदने या बेचने के लिए स्टॉक ब्रोकर के पीछे जाना पड़ता था। इस प्रयास में भारी-भरकम ब्रोकरेज फीस और अन्य छिपी लागत भी हावी थी। हालांकि, सरकार और नियामकों की डिजिटल पहल के आधार पर ई-केवाईसी जैसी ऑनलाइन ट्रेडिंग और घटनाक्रम के साथ, यूजर्स को अब ट्रेडिंग शुरू करने के लिए लाइन में इंतजार नहीं करना पड़ता। दलालों को अब मोबाइल एप के जरिये संपर्क किया जा सकता है और उसके जरिये ट्रेडिंग और निवेश की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा, चूंकि, अब कागजी कार्रवाई और रखरखाव की लागत भी कम हुई है, कई ब्रोकरेज फर्म जीरो फी ट्रेड शुरू करने या दूसरों पर मामूली फ्लैट फीस लगाकर उपभोक्ताओं को डिजिटाइजेशन का लाभ दे रहे हैं।
महत्वपूर्ण जानकारी तक त्वरित पहुंच
ट्रेडिंग में सूचना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और शेयर बाजारों के कारोबार में डिजिटाइजेशन के नेतृत्व में इसी ने बड़े स्तर पर क्रांति लाई है। मोबाइल एप्स कई लिहाज से मददगार हैं। निवेशकों को बेहद अस्थिर क्षेत्र में नेविगेट करने में मदद करते हैं। ऑनलाइन ट्रेडिंग के दौरान रियलटाइम में महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुंच हासिल करने में मदद करते हैं। टीवी पर बिजनेस चैनल से चिपके रहने या बिजनेस की अखबरें और मैगजीन से चिपके रहने की आवश्यकता नहीं है और लोगों को अब मोबाइल होने की छूट मिल गई है और उन्हें ऑनलाइन ट्रेडिंग एप्स और प्लेटफार्म से रियलटाइम नोटिफिकेशन और अपडेट्स मिलते रहते हैं। डिजिटल साधनों के जरिये ट्रेडिंग यूजर्स को कभी भी, कहीं भी, रियलटाइम में शेयर की कीमतों पर नजर रखने की अनुमति मिलती है। यह सही निवेश निर्णय लेने में मदद करता है क्योंकि हर मिनट या सेकंड शेयर बाजार में बेहद महत्वपूर्ण हैं।
वैश्विक बाजारों को मजबूत करना
पारदर्शी और कुशल ट्रेडिंग पॉलिसी के साथ इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली गति, सुविधा और सहजता निवेशकों के एक पूरे नए सेग्मेंट के लिए बाजार खोलती है। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग ने दुनियाभर के विभिन्न शेयर बाजारों के ट्रेडिंग में व्यापक बदलाव लाया है क्योंकि इसने दुनियाभर के अलग-अलग बाजारों में व्यक्तियों को सीधे ट्रेडिंग करने में सक्षम बनाया है। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग का सबसे बड़ा लाभ वैश्विक शेयर बाजारों को कंसोलिडेट करना है। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग ने ऐसे लिंक बनाए हैं जो दुनिया भर में लिक्विडिटी के विभिन्न स्रोतों को मिलाते हैं जो इस कंसोलिडेशन में योगदान करते हैं।

कर्जमुक्त कंपनी बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है रिलायंस : रिपोर्ट

नयी दिल्ली : रिलायंस इंडस्ट्रीज कर्जमुक्त कंपनी बनने के अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है। पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रिलायंस ने विभिन्न कंपनियों से अच्छा-खासा धन जुटाया है, जिससे उसके लिए शून्य ऋण वाली कंपनी बनने के लक्ष्य को पाना आसान हो गया है। एक ब्रोकरेज कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सऊदी अरामको के साथ रिलायंस के सौदे में देरी भी होती है, तो भी वह अपने पूरे शुद्ध कर्ज का भुगतान करने की स्थिति में होगी।
अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी के नियंत्रण वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी डिजिटल इकाई में अल्पांश हिस्सेदारी फेसबुक तथा निजी इक्विटी कंपनियों मसलन सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, केकेआर और जनरल अटलांटिक को बेचकर कुल 78,562 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है। इसके अलावा कंपनी राइट्स इश्यू के जरिये भी 53,125 करोड़ रुपये जुटा रही है।
कंपनी पर एडलवाइस पर एक शोध रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘हालिया सौदों के बाद हमने रिलायंस इंडस्ट्रीज के बही-खाते का विश्लेषण किया है। कंपनी ने पिछले माह के दौरान इक्विटी के रूप में 1.3 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। हमारा अनमान है कि यदि अरामको सौदे में देरी भी होती है, तो भी कंपनी 2020-21 में अपना समूचा 1.6 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध ऋण चुका पाएगी।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी का समायोजित शुद्ध कर्ज 2.57 लाख करोड़ रुपये कुछ ऊंचा है और इसे चुकाने में अधिक समय लगेगा।
एडलवाइस ने कहा है कि कंपनी की दूरसंचार इकाई जियो का पूंजीगत खर्च काफी हद तक पूरा हो गया है। ऐसे में रिलायंस इंडस्ट्रीज तेल और गैस क्षेत्र से कम आय के बावजूद 2020-21 में 20,000 करोड़ रुपये का मुक्त नकदी प्रवाह (एफसीएफ) हासिल कर पाएगी।
ब्रोकरेज कंपनी ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज जियो में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। इसके अलावा राइट्स इश्यू से मिलने वाली राशि, ईंधन के खुदरा कारोबार में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बीपी को 7,000 करोड़ रुपये में बेचने आदि के बाद कंपनी के पास 1.3 लाख करोड़ रुपये की नकदी होगी। ऐसे में कंपनी 2020-21 में कर्जमुक्त होने के लक्ष्य को हासिल कर पाएगी।’’

सबसे ज्यादा कमाई करने वाले खिलाड़ियों की सूची में कोहली इकलौते भारतीय, फेडरर शीर्ष पर

न्यूयॉर्क : विराट कोहली 2.6 करोड़ डालर की कुल कमाई के साथ फोर्ब्स की 2020 में विश्व में सबसे अधिक कमाई वाले खिलाड़ियों की सूची में एकमात्र भारतीय हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान 100 खिलाड़ियों की इस सूची में 66वें स्थान पर काबिज हैं। वह पिछले साल 100वें और 2018 में 83वें स्थान पर थे।
कोहली ने 2.4 डॉलर की कमाई प्रचार और ‘ब्रांड एंडोर्समेंट’ से की है जबकि उन्होंने 20 लाख डॉलर की कमाई वेतन और पुरस्कार राशि से की है।
पिछले साल उनकी कमाई 2.5 करोड़ डॉलर थी जबकि 2018 में उन्होंने 2.4 करोड़ डॉलर की कमाई की थी।
टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी और 20 ग्रैंडस्लैम के विजेता रोजर फेडरर लगभग 106.3 मिलियन डॉलर (800 करोड़ रुपये से ज्यादा) की कमाई के साथ 2020 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले खिलाड़ियों की सूची में पहले स्थान पर आ गये है।
फोर्ब्स की ओर से गत शुक्रवार को जारी सूची में फुटबॉल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो (105 मिलियन डॉलर), लियोनेल मेस्सी (104 मिलियन डॉलर), नेमार (95.5 मिलियन डॉलर) और अमेरिकी बास्केटबॉल खिलाड़ी लेब्रॉन जेम्स (88.2 मिलियन डॉलर) शीर्ष पांच में शामिल है।
स्विट्जरलैंड का यह दिग्गज 1990 के बाद इस सूची में शीर्ष पर पहुंचने वाला टेनिस का पहला खिलाड़ी है।

तीन भारतीय कंपनियों को नासा से वेटिलेटर विनिर्माण का लाइसेंस

वाशिंगटन : तीन भारतीय कंपनियों को अमेरिका के राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (नासा) से कोविड-19 के मरीजों के लिए वेंटिलेटर के विनिर्माण का लाइसेंस मिला है। ये तीन भारतीय कंपनियां…अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लि., भारत फोर्ज लि. और मेधा सर्वो ड्राइव्स प्राइवेट लि. हैं। नासा की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई है। तीन भारतीय कंपनियों के अलावा 18 अन्य कंपनियों को भी यह लाइसेंस मिला है। इनमें आठ अमेरिका और तीन ब्राजील की कंपनियां शामिल हैं।
नासा अमेरिका की अंतरिक्ष अनुसंधान, वैमानिकी और संबंधित कार्यक्रमों की स्वतंत्र एजेंसी है। नासा ने दक्षिण कैलिफोर्निया की जेट प्रॉपल्शन लैब (जेएलपी) में कोरोना वायरस के मरीजों के लिए विशेष रूप से वेंटिलेटर विकसित किया है।
जेएलपी के इंजीनियरों ने एक माह से कुछ अधिक समय में इस विशेष वेंटिलेटर ‘वाइटल’ को डिजाइन किया है। इसे अमेरिका के खाद्य एवं दवा प्रशासन से 30 अप्रैल को ‘आपात प्रयोग की अनुमति’ मिल चुकी है।
नासा का कहा है कि वाइटल को चिकित्सकों तथा चिकित्सा उपकरण विनिर्माण से सलाह लेकर विकसित किया गया है। कोरोना वायरस से अब तक अमेरिका में 1,02,836 लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका में इस महामारी से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 17 लाख को पार कर चुका है।