Friday, May 1, 2026
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वडोदरा के डिजाइनिंग फोटोग्राफर ने बनाया इंसान के चेहरे वाला मास्क

वडोदरा : कोरोनावायरस से बचने के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है। सरकार ने बिना मास्क के घर से निकलने वालों पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया है। शहर के बाजारों में विभिन्न डिजाइन और रंग के मास्क बेचे जा रहे हैं। इस स्थिति में वडोदरा के एक डिज़ाइनिंग फ़ोटोग्राफ़र ने ऐसा मास्क बनाया है, जिस पर व्यक्ति का चेहरा दिखाई देता है।
डिजाइनिंग फोटोग्राफर पिंकेश भाई पटेल ने बताया कि मेरे द्वारा बनाए गए मास्क के बारे में लोग अब पूछताछ करने लगे हैं। अगर मेरे बनाए मास्क की डिमांड बढ़ती है, तो इसका व्यावसायिक रूप से उत्पादन किया जा सकता है। शहर के वाघोड़िया रोड पर स्थित पूनम काम्पलेक्स के पास पिंकेश भाई का स्टूडियो है। वे बताते हैं कि इस तरह के मास्क बनाने का आइडिया उन्हें गांधीनगर में फोटोग्राफी का काम करने वाले एक दोस्त से मिला। उसने फेस मास्क बनाए हैं। यह काम बहुत ही मुश्किल है। पर असंभव बिलकुल नहीं। अभी तक मैंने जो फेस मास्क बनाए हैं, उसे मेरे स्टाफ, दोस्तों और परिवार वालों के लिए बनाया है। ये सभी मास्क पहनकर उसे सोशल मीडिया में पोस्ट करते हैं। इसके बाद कई लोगों ने इस तरह के मास्क के प्रति अपनी दिलचस्पी दिखाई है। फेस मास्क बनाने की इस कला के बारे में पिंकेश भाई बताते हैं कि फेस मास्क बनाने के लिए व्यक्ति की बहुत ही अच्छी और हाई रिजोल्यूशन वाली तस्वीर की आवश्यकता होती है। यदि उसके पास ऐसी तस्वीर न हो, तो वह हमारे स्टूडियो में खिंचवा सकता है। इसके बाद हम टेकनिक का इस्तेमाल कर व्यक्ति के फेस से मिलने मास्क पर प्रिंट करते हैं। इस मास्क की दो परतें होती हैं। मैंने ऐसे कई मास्क बनाए हैं। इसकी कीमत 80 से 100 रुपए तक है।
पिंकेश भाई ने बताया कि फेस मास्क बनाने के लिए बहुत समय लगता है। क्योंकि, फोटोग्राफ ले लेने से ही काम खत्म नहीं होता। उसे कंप्यूटर पर फोटोशॉप पर जाकर उस पर काफी काम करना होता है। जब तक फेस और मास्क का प्रिंटिंग मैच न हो, तब तक मास्क नहीं बन सकता। अब मास्क अनिवार्य हो गया है, तो लोग इसमें भी कुछ नया मांगते हैं। इसलिए इस तरह का काम शुरू किया। मेरे द्वारा बनाए गए मास्क आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। लोग मास्क के बारे में पूछताछ करते हैं, तो अच्छा लगता है।

रजत कक्कड़ होंगे सोनी म्यूज़िक इंडिया के नए मैनेजिंग डायरेक्टर

मुम्बई : सोनी म्यूज़िक एंटरटेनमेंट ने रजत कक्कड़ को सोनी म्यूज़िक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में नियुक्ति करने की घोषणा की है। रजत मुम्बई में काम की बागडोर संभालेंगे और वे श्रीधर सुब्रमण्यम, सोनी म्यूज़िक एंटरटेनमेंट के प्रेसिडेंट, स्ट्रैटजी और मार्केट डेवलपमेंट, एशिया और मिडिल ईस्ट को रिपोर्ट करेंगे।
रजत कंपनी स्ट्रेटजी की बागडोर संभालेंगे एवं बॉलीवुड, पंजाबी और साउथ इंडियन म्यूज़िक इंडस्ट्री जैसे लीडिंग मार्केट में अपनी कंपनी के विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे। रजत एक अनुभवी एंटरटेनमेंट एक्जीक्यूटिव हैं जो पूरे देश में अपनी रणनीतियों द्वारा सोनी म्यूज़िक को सफलता के एक नए मुकाम पर ले कर जाएंगे।
कक्कड़ पर कंपनी के आर्टिस्ट रोस्टर को अधिक विकसित करने, उनकी भागीदारी और निवेश को बढ़ावा देने और सोनी म्यूजिक के तीन क्षेत्रीय कार्यालयों में उनकी सात अलग-अलग भाषाओं को कवर करने का काम सौंपा जाएगा।
इससे पहले, कक्कड़ ने जनवरी 2018 से अप्रैल 2020 तक फोनोग्राफिक प्रदर्शन लिमिटेड के सीईओ और प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया। म्यूज़िक इंडस्ट्री में कक्कड़ का करियर 1996 में सोनी म्यूजिक इंडिया में शुरू हुआ जहां उन्होंने छह साल तक काम किया। शुरुआती समय में उन्होंने सोनी म्यूज़िक इंडिया कंपनी के सेल्स डायरेक्टर के रूप में काम किया। 2002 में, वह यूनिवर्सल म्यूजिक इंडिया में बतौर वाइस प्रेसिडेंट ऑफ सेल्स और मार्केटिंग के रूप में शामिल हुए, 2003 में मैनेजिंग डायरेक्टर बन गए। म्यूज़िक इंडस्ट्री में शामिल होने से पहले, कक्कड़ ने 1991 से 1996 तक प्रॉक्टर एंड गैंबल में काम किया। उन्होंने चंडीगढ़ के यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल से मार्केटिंग में एमबीए किया है।

कोविड अस्पतालों में 1 लाख बेड तैयार करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश

लखनऊ : करोना महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने नाम एक बड़ी उपलब्धि लिख ली है और इस समय उत्तर प्रदेश कोविड अस्पतालों में एक लाख बेड तैयार करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में L1, L2 लेवल के अस्पताल पूरी तरह तैयार हैं और इसकी जानकारी समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी।
गत रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने आवास पर टीम 11 के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। इस दौरान टीम 11 के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुए कहा कि उनके द्वारा दिए गए निर्देश के क्रम में राज्य में एल-1, एल-2 व एल-3 कोविड अस्पतालों में बेड की कुल क्षमता को बढ़ाकर 1 लाख से अधिक हो गई है और कोविड की टेस्टिंग क्षमता के 10 हजार प्रतिदिन हो गयी है।
मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों से कहा कि राज्य में कोविड अस्पतालों एवं अन्य चिकित्सा सुविधाओं को और सुदृढ़ किए जाने के साथ ही अब टेस्टिंग क्षमता को बढ़ाकर 15 हजार किए जाए तथा महीने के अंत तक टेस्टिंग की क्षमता को बढ़ाकर 20 हजार किए जाए। साथ ही साथ उन्होंने कहा कि 1 जून, 2020 से रेल सेवा प्रारम्भ होने के कारण रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की समुचित स्क्रीनिंग की जाए।
स्क्रीनिंग हेतु रेलवे स्टेशनों पर आवश्यक रूप से प्रशासन पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को तैनात किए जाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश सरकार की ओर से रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर विभिन्न राज्यों से प्रदेश में आने वाले कामगारों/ श्रमिकों को ऐसे हैण्डबिल उपलब्ध कराने के लिए कहा जाए, जिसमें कोरोना वायरस कोविड -19 के विषय में बरती जाने वाली सावधानी के बारे में बताया गया हो, जिससे इन कामगारों/श्रमिकों को कोरोना वायरस कोविड-19 के सम्बन्ध में बरती जाने वाली सावधानी की पहले से ही जानकारी रहे।

जानिए अनलॉक – 1 की महत्वपूर्ण बातें

नयी दिल्ली : गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन 5.0 की गाइड लाइन जारी कर दी है। इसे लॉकडाउन न कहते हुए अनलॉक-1 कहा गया है। यह 1 जून से 30 जून तक लागू रहेगा। इसमें चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन को धीरे-धीरे खोला जाएगा। लॉकडाउन 5.0 के लिए सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन के मुताबिक आने वाले दिनों में लॉकडाउन से 3 चरणों में धीरे-धीरे छूट दी जाएगी। 1 जून से 30 जून तक अनलॉक-1 रहेगा। जानिए 10 बड़ी बातें-
1. गाइड लाइन के मुताबिक पहले चरण में शर्तों के साथ धार्मिक स्थल और सार्वजनिक पूजा स्थल, होटल, रेस्तरां और अन्य आतिथ्य सेवाएं और शॉपिंग मॉल्‍स 8 जून 2020 से खोले जाएंगे।
2. रात का कर्फ्यू जारी रहेगा लेकिन जरूरी सेवाओं के लिए कोई कर्फ्यू लागू नहीं होगा। रात को 9 से सुबह 5 बजे तक अब नाइट कर्फ्यू रहेगा। अब तक लॉकडाउन के दौरान यह शाम 7 से सुबह 7 बजे तक लगा रहता था।
3. लॉकडाउन-5 अब केवल कंटेनमेंट जोन में ही 30 जून तक रहेगा।
4. अंतरराष्ट्रीय उड़ानें अभी बंद रहेंगी। सिनेमा हॉल, पब बंद रहेंगे।
5. मेट्रो पर फैसला भी स्थानीय प्रशासन लेगा।
6. एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने का प्रतिबंध पूरी तरह से हटा लिया गया है। राज्य में भी लोग एक जिले से दूसरे जिले में जा सकेंगे। हालांकि इसके लिए उन्‍हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। कहीं आने-जाने से पहले किसी अनुमति की जरूरत नहीं होगी।
7. स्कूल, कॉलेज, एजुकेशन, ट्रेनिंग और कोचिंग इंस्टिट्यूट खुल सकेंगे लेकिन इनके बारे में राज्य सरकारों से सलाह के बाद फैसला लिया जाएगा।
8. मेट्रो परिचालन का फैसला स्थानीय प्रशासन करेंगे।
9. तीसरे चरण में ही सामाजिक, राजनीतिक रैलियां, खेल गतिविधियां, अकादमिक और सांस्‍कृतिक कार्यक्रम, धार्मिक समारोह और बाकी बड़े जमावड़े शुरू किए जाने पर विचार किया जाएगा। हालांकि इन्हें शुरू करने का फैसला हालातों को देखने के बाद लिया जाएगा।
10. कंटेनमेंट जोन में छूट का फैसला स्थानीय प्रशासन करेगा। कंटेनमेंट जोन के बाहर आर्थिक गतिविधियों पर छूट रहेगी।

नहीं रहे ज्योतिषी बेजान दारूवाला

अहमदाबाद : प्रसिद्ध ज्योतिषी बेजान दारूवाला का शुक्रवार को निधन हो गया। वे वेंटीलेटर सपोर्ट पर थे। वे 90 वर्ष के थे। उन्हें हाल ही में अहमदाबाद में अपोलो में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्हें वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। सोशल मीडिया पर आई खबर का खंडन करते हुए उनके पुत्र नस्तूर दारूवाला ने कहा कि उनके पिता कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं थे। नस्तूर ने बताया कि उनके पिता सिर्फ निमोनिया से ग्रस्त थे।
अंग्रेजी के प्रोफेसर रहे दारूवाला का जन्म 11 जुलाई 1931 को अहमदाबाद (गुजरात) में एक पारसी परिवार में हुआ था। देशभर के प्रमुख अखबारों और टीवी चैनलों पर उनके ज्योतिष से संबंधित कार्यक्रम प्रकाशित एवं प्रसारित होते रहे हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने नरेन्द्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी और मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी। भगवान गणेश के भक्त दारूवाला भारतीय और पश्चिमी ज्योतिष को मिलाकर भविष्यवाणी करते थे।

गीतकार योगेश का निधन

मुम्बई : कहीं दूर जब दिन ढल जाए, जिंदगी कैसी है पहेली, रिमझिम गिरे सावन, ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा जैसे गाने आज भी सुने जाते हैं। ये किन फिल्मों से हैं, किसने इन्हें गाया है, किसने संगीतबद्ध किया है, ये तो ज्यादातर जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन मधुर गीतों को शब्द देने वाले गीतकार का नाम योगेश है। योगेश का 29 मई की दोपहर को निधन हो गया। वे 77 वर्ष के थे। शायद दुर्भाग्य इसे ही कहते हैं कि योगेश ने एक से बढ़ कर एक गीत लिखे। उनकी लेखनी से लिखे गीत मिली, छोटी सी बात, आनंद, बातों बातों में, रजनीगंधा, मंजिल, प्रियतम, शौकीन, अपने पराए जैसी फिल्मों का हिस्सा रहे। अधिकांश हिट रहे। ये गीत अर्थपूर्ण भी हैं, लेकिन योगेश को कभी लोकप्रियता नहीं मिली। कई लोगों को तो यह भी नहीं मालूम था कि आज से पहले तक योगेश हमारे बीच में हैं।
19 मार्च 1943 को लखनऊ में जन्मे योगेश काम की तलाश में अपने रिश्तेदार से मिले जो कि स्क्रीनप्ले डायरेक्टर थे। इस तरह से योगेश का फिल्मों में आना हुआ। ऋषिकेश मुखर्जी जैसे काबिल निर्देशक से योगेश का परिचय हुआ और उनकी पारखी नजरों ने योगेश की अंदर छिपी प्रतिभा को पहचान लिया। ऋषिदा की फिल्मों में योगेश ने कई गीत लिखे। दुर्भाग्य की बात रही कि अन्य फिल्म निर्माता, निर्देशक, संगीतकारों ने योगेश की प्रतिभा का ज्यादा उपयोग नहीं किया।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का निधन

रायपुर : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्‍यमंत्री अजीत जोगी का गत 29 मई को रायपुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे कई ‍दिनों से बीमार थे। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रमुख अजीत जोगी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें नौ मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से उनकी हालत नाजुक थी। उन्होंने बताया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो सके।
जोगी परिवार के सदस्यों के अनुसार अजीत जोगी नौ मई को सुबह व्हीलचेयर पर बगीचे में घूम रहे थे और उसी दौरान वह अचानक बेहोश हो गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। भर्ती किए जाने के बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ती गयी।

संहिता को जानिए

1. प्रकृति और महत्वः
ऋग्वेद मानव ज्ञान का सबसे प्राचीन संकलन है। यह संहिता (संग्रह) अपनी प्रकृति में अद्वितीय है। वास्तव में, यह एक पुस्तक नहीं है, अपितु अनेक पुस्तकों से बना एक संकलन है, जिसे व्यक्तिगत रूप से एक-दूसरे से पृथक् किया जा सकता है। इस संहिता का वर्तमान स्वरूप स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि संग्रह एक कार्य नहीं है, परन्तु पुराने और बाद के तत्व भी शामिल हैं जो इसकी भाषा, शैली और विचारों के विभिन्न रूप इस बात को प्रमाणित करते हैं। इस संहिता के विभिन्न मंत्रों की रचना उन्हें व्यवस्थित रूप में किए जाने से बहुत समय पहले हुआ था।

ऋग्वेद भारत की सबसे प्राचीनतम पवित्र पुस्तक का प्रतिनिधित्व करता है। यह चारों वेदों में सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा है। इस वेद में ही वैदिक संस्कृति एवं काव्य की सभी विशेषताओं का ज्ञान हैं। इसमें हमें भारत के धार्मिक और दार्शनिक विकास के बीज मिलते हैं। इस प्रकार कविता, धार्मिक और दार्शनिक महत्व दोनों के लिए, ऋग्वेद का अध्ययन उस व्यक्ति द्वारा किया जाना चाहिए जो भारतीय साहित्य और आध्यात्मिक संस्कृति को समझना चाहता है। ऋग्वेद का मूल्य आज भारत तक ही सीमित नहीं है, इसकी उत्तम संरक्षित भाषा और पौराणिक कथाओं के कारण समस्त विश्व की भाषाओं, साहित्य और संस्कृतियों को भलीभाँति समझने में सहायता करता है।

2. रचना और विभागः
संपूर्ण ऋग्वेद-संहिता श्लोक के रूप में है, जिसे ऋक् के रूप में जाना जाता है, जिसका मूलभाव “प्रशंसा” करना है। ‘ऋक्’ उन मंत्रों को दिया गया नाम है जो देवताओं की प्रशंसा के लिए प्रयोग किया जाता हैं। इस प्रकार ऋक् का संग्रह (संहिता) ऋग्वेद-संहिता के रूप में जाना जाता है। ऋग्वेद की केवल एक शाखा सामान्य रूप से उपलब्ध है। और वह है शाकल संहिता। ऋग्वेद संहिता में 10552 मंत्र हैं, जिन्हें मण्डल नामक दस पुस्तकों में वर्गीकृत किया गया है। प्रत्येक मण्डल को कई वर्गों में विभाजित किया जाता है जिन्हें अनुवाक कहा जाता है। प्रत्येक अनुवाक में सूक्त नामक कई मंत्र होते हैं और प्रत्येक सूक्त कई पदों से बना होता है जिसे ऋक् कहते हैं। ऋग्वेद का यह मंडल सबसे लोकप्रिय और व्यवस्थित है, यह अष्टक पद्धति भी है, जो ऋग्वेद की विषय वस्तु को विभाजित करती है,परन्तु आज यह वेद के छात्रों में असामान्य है।

सूक्त मंत्रों का समूह है। किसी सूक्त में मंत्रों की संख्या निश्चित नहीं है। अमुक सूक्तों में मंत्रों की संख्या कम है एवं अन्य अमुक में बड़ी संख्या में मंत्र हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक ऋग्वेद संहिता का एक दृष्टा (ऋषि) एक देवता औरएक छंद होता है। प्रायः यह पूरे सूक्त के लिए सामान्य है। ऋग्वेद की संहिता में 10 मंडल, 85 अनुवाक, 1028 सूक्त और 10552 मंत्र हैं। अधिकांशतः पर ऋग्वेद के मंत्रों के संदर्भ में अनुवाक का उल्लेख नहीं है। उदाहरण के लिए ऋग्वेद, 3.16.7 का अर्थ ऋग्वेद के तीसरे मंडल के सोलहवें सूक्त के सातवें मंत्र से है।

इस तालिका के द्वारा हम मंडल के विभाजन, प्रत्येक मंडल में सूक्तों की संख्या और मंत्र मंडलों के ऋषियों के नाम जान सकते हैं।

मंडल सूक्त मंत्र ऋषियो के नाम
01 191 2006 मधुच्छन्द मेधातिथि गौतम
02 43 429 गृत्समद और उनके परिजन
03 62 617 विश्वामित्र और उनके परिजन
04 58 589 वामदेव और उनके परिजन
05 87 727 अत्रि और उनके परिजन
06 75 765 भारद्वाज और उनके परिजन
07 104 841 वशिष्ठ और उनके परिजन
08 103 1716 कण्व, अंगीर और उनके परिजन
09 114 1108 सोम देवता किन्तु विभिन्न ऋषि
10 191 1754 विमदा, इन्द्र शची और मान्यो
3. कुछ महत्वपूर्ण सूक्त
ऋग्वेद शाकल संहिता के 1082 सूक्तों में से निम्न सूक्त प्रसिद्ध हैः-

1. पुरुष सूक्त
2. हिरण्य-गर्भ सूक्त
3. धन-अन्न-दान सूक्त
4. अक्ष सूक्त
5. नासदीय सूक्त
6. दुःश्वप्न-नाशन सूक्त
7. यम-यमीसंवाद सूक्त

इसके अतिरिक्त, विभिन्न देवताओं, जैसे इन्द्र, मरुत, वरुण, उषा, सूर्य, भूमि, सोम, अग्नि आदि को अर्पित किए गए सूक्त हैं। इस प्रकार हम ऋग्वेद की विषयवस्तु के बारे में संक्षेप में कह सकते हैं कि इसमें विभिन्न विषय हैं, जो वैदिक दृष्टाओं द्वारा काव्यात्मक, दार्शनिक या धार्मिक रूप से प्रस्तुत किये गए हैं।

यजुर्वेद – संहिता
1. प्रकृति और महत्व
यजुर्वेद अपने विषयवस्तु के अनुसार ऋग्वेद और सामवेद से विशेष रूप से भिन्न है। यह मुख्यतः गद्य रूप में है। यजुर्वेद में ‘यजुः’ शब्द को विभिन्न रूप से समझाया गया है। परन्तु इसकी एक परिभाषा कहती है-

गद्यात्मको यजुः

‘यजुः’ वह है जो गद्य रूप में है, एक अन्य परिभाषा के अनुसार ‘यजुर्यजतेः’ इस के यज्ञ के साथ संबंध को व्यक्त करता है क्योंकि दोनों शब्द मूल ‘यज्’ से व्युत्पन्न हैं।

यजुर्वेद स्पष्ट रूप से एक अनुष्ठान वेद अध्वर्यु के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शक है, जिस से यज्ञ में व्यावहारिक रूप से सभी कर्मकाण्डों को करने में सक्षम होता है। जिन के कार्य यज्ञ के लिए एकवेदी (भूखंड के चयन) से लेकर पवित्र अग्नि को आहुति प्रदान करने तक जिस प्रकार सामवेद-संहिता में उद्गाता-पुजारी की गीत-पुस्तक है, उसी प्रकार यजुर्वेद-संहिता अधवर्यु के लिए प्रार्थना-पुस्तक हैं। यह पूरी तरह से यज्ञ के अनुष्ठानों के उद्देश्यों के लिए है।

यजुर्वेद भी दार्शनिक सिद्धांतों की प्रस्तुति के लिए महत्वपूर्ण है। यह प्राण और मन की अवधारणा का प्रचार करता है। यह वेद वैदिक लोगों के धार्मिक और सामाजिक जीवन को रेखांकित करता है साथ ही यह भौगोलिक तथ्य देने में भी प्रयुक्त किया जाता है।

2. विभाग और संहिता
यजुर्वेद में दो विभाग हैं:

1. शुक्ल यजुर्वेद
2. कृष्ण यजुर्वेद

कृष्ण यजुर्वेद में मंत्र और ब्राह्मण के मिश्रण की विशेषता है जबकि शुक्ल यजुर्वेद दोनों के स्पष्ट भिन्नता को बनाए रखता है। शुक्ल यजुर्वेद आदित्य- सम्प्रदाय से सम्बन्धित है और कृष्ण यजुर्वेद ब्रह्म-सम्प्रदाय से सम्बन्धित है।

शुक्ल-यजुर्वेद संहिता पर अपनी टिप्पणी की प्रारम्भ में, एक कहानी महिधर द्वारा यजुर्वेद के दो-विभाजित खण्डों के बारे में दी गई है। ऋषि वैशम्पायन ने ऋषि याज्ञवल्क्य और अन्य विद्यार्थियों को यजुर्वेद पढ़ाया। एक बार वैशम्पायन याज्ञवल्क्य से क्रोधित होकर ऋषियाज्ञवल्क्यको तब तक पढाया हुआ यजुर्वेदज्ञान को त्यागने का आदेश दिया। तत्पश्चात याज्ञवल्क्य ने सूर्य देव से प्रार्थना की, जो अश्व के रूप में उनके समक्ष आए (अर्थात वाजी) और उन्हें पुनःवेद का उपदेश दिया। इसलिए इस यजुर्वेद को वाजसनेयी नाम भी दिया गया।

वर्तमान में यजुर्वेद की निम्न संहिताएं उपलब्ध हैः-

शुक्ल यजुर्वेद

1. माध्यन्दिन संहिता
2. कण्व संहिता

कृष्ण यजुर्वेद

1. तैत्तरीयसंहिता
2. मैत्रायणी संहिता
3. कठक संहिता
4. कपिस्थल संहिता

3. विषयवस्तु
हमें यजुर्वेद की संहिता में यज्ञों का विस्तृत वर्णन मिलता है। वाजसनेयी-संहिता में कई महत्वपूर्ण यज्ञों का बृहद वर्णन मिलता है, जैसे दर्शपूर्णमास, अग्निहोत्र, सोमयाग, चातुर्मास्य, अग्निहोत्र, वाजपेय, अश्वमेध, सर्वमेध, ब्रह्म-यज्ञ, पितृमेध, सौत्रामणी, आदि। सामान्य विचार के लिए विषय वस्तुको तीन खंडों में विभाजित किया जा सकता है। प्रथम खण्ड में दर्शपूर्णमास, द्वितीय खंड में सोमयाग और तृतीय खंड में अग्निचयन शामिल हैं। वाजसनेयी-संहिता के अंतिम खण्ड में प्रसिद्ध ईशावास्य-उपनिषद हैं। यह जानना आवश्यक है कि वाजसनेयी- संहिता के प्रथम अठारह मन्त्र पूर्ण रूप से शुक्ल यजुर्वेद के शतपथ ब्राह्मण में अर्थानिहित है। इस बिन्दु के आधार पर कुछ विद्वानों का मत है कि इस संहिता के अंतिम खण्ड पश्चात् काल खण्ड का हैं।

सामवेद – संहिता
1. प्रकृति और महत्व
सामवेद चारों वेदों में सबसे छोटा है। यह ऋग्वेद से निकटता से जुड़ा हुआ है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सामवेद की संहिता एक स्वतंत्र संग्रह (संहिता) नहीं है, अपितु ऋग्वेद की संहिता से लिया गया है। ये छन्द मुख्य रूप से ऋग्वेद के आठवें और नौवें मण्डल से लिए गए हैं। सामवेद को अनुष्ठान के लिए विशेष रूप से संकलित किया गया है, इसके सभी छन्द सोम-यज्ञ के अनुष्ठान और उससे प्राप्त प्रक्रियाओं के विषय है। इसलिए, सामवेद उद्गात्र पुरोहित के लिए विशेष रूप से अभिप्रेत है। गान नामक गीत पुस्तिका में मन्त्र अथवा सामन् पूर्ण रूप से संगीत रूप धारण कर लेते है। जैमिनी सूत्र के अनुसार-गीतकको सामन् कहा जाता है। परम्परा अनुसार वेदों को ‘त्रयी’ कहा जाता है, मंत्रों के तीन भाग होते है- ऋक् = पद, यजुः = गद्य, सामन् = गान।

चारों वेदों में सामवेद को सबसे अग्रणी माना जाता है। भगवद्गीता में, जहां भगवान कृष्ण ने “वेदों में मैं सामवेद हूं” का उल्लेख किया है। -वेदानां सामवेदोस्मि (गीता, 10.22) यहाँ इन्द्र, अग्नि और सोम देवताओं का मुख्य रूप से आह्वान एवं प्रशंसा की जाती है, परन्तु मूल रुपसे यह सारी प्रार्थनाएँ परमब्रह्म के आवाह्न के लिए ही है । आध्यात्मिक अर्थो में, सोम सर्वव्यापी, प्रतापी देवता और ब्रह्म का प्रतिनिधित्व करता है, जो केवल भक्ति और संगीतमय मन्त्र के माध्यम से प्राप्य है। इस प्रकार सामवेद का प्रमुख विषय आराधना और भक्ति (उपासना) माना जा सकता है।

2. रचना और विभाजन
सामन् शब्द का अर्थ है ‘जप’ या ‘गीतक’और इसके छन्द बद्ध मन्त्र संगीत मे परिवर्तित हुए हैं, जो सम्पूर्ण सामवेद संहिता को दर्शाता है। जैमिनी सूत्र के अनुसार-गीतक को सामन् कहा जाता है।

गितिषु सामाख्या

सामवेद ऋक् पर आधारित गीतों और मंत्रों का वेद है। माधुर्य का तत्व ही सामवेद की प्रमुख विशेषता है। यास्क ने शब्द सामन्’ की व्युत्पत्ति सम + म दी है, जिसका अर्थ है कि ऋक् का सामंजस्यपूर्ण उन्मित करना। प्राचीन परंपरा के अनुसार, पतंजलि द्वारा कहा गया था, सामवेद में 1000 शाखाएँ थी। लेकिन वर्तमान में केवल तीन शाखाएँ हैं। ये हैं –

कौथुमा
जैमिनीय
राणायनीय।
वर्तमान काल में कौथुमीय शाखा ही प्रचलित है। सामवेद- कौथुम शाखा में सामवेद संहिता दो भागों में शामिल हैं – पूर्वार्चिक और उत्तरार्चिक। प्रथम भाग में चार भाग हैं:

1. आग्नेय – अग्नि के 114 छन्द
2. ऐन्द्र – इंद्र के 352 छन्द
3. पवमान – पवमान के 119 छन्द
4. आरण्य- इन्द्र, अग्नि, सोमा आदि के लिए 55 छन्द
(महानाम्नी मंत्र -10) इस भाग में 650 छन्दहैं।

सामवेद-संहिता के दूसरे भाग उत्तरार्चिक में कुल 1225 छंद हैं। अतः सामवेद-संहिता में कुल छंदों की संख्या 1875 है। इनमें से 1771 छन्द ऋग्वेद से हैं, इस संहिता के केवल 99 छन्द ऋग्वेद-संहिता में नहीं पाए जाते हैं और इसे सामान्यतः सामवेद के ही माने जाते हैं।

अथर्ववेद – संहिता
1. प्रकृति और महत्व
अथर्वन् का वेद अथर्ववेद कहा जाता है। अथर्ववेद में दुःखों और कठिनाइयों से मुक्ति पाने का निर्देश के साथ-साथ आध्यात्मिक चिन्तनों का वर्णन मिलता है। अथर्वन् का अर्थ आराधक है। इसप्रकार आराधक के रुप में ऋषि-अथर्व द्वारा अथर्ववेद-संहिता के मंत्र प्रकाश में लाये गए है।

निरुक्त की व्युत्पत्ति के अनुसार, अथर्व एक स्थिर दिमाग वाले व्यक्ति को दिया गया नाम है, जो अति दृढ़ है अर्थात योगी। यद्यपि प्राचीन भारतीय साहित्य रचनाओं में इस वेद को अथर्वाङ्गिरसःवेद से सम्बोधित किया गया है। यह अथर्व और अङ्गिरसः का ‘वेद’ है। अङ्गिरसः भी एक भिन्न समूह के शाखाकार थे। पतंजलि के अनुसार, अथर्ववेद में नौ शाखाएँ थीं, अपितु अथर्ववेद की संहिता आज केवल दो शाखाओं में उपलब्ध है – शौनक और पिप्पलाद | जो प्राचीन और आधुनिक साहित्य में अथर्ववेद का उल्लेख हुआ है वह वस्तुतः शौनक-संहिता ही है। यह 730 स्तोत्रों का संग्रह है, जिसमें 5987 मंत्र हैं, जिन्हें 20 काण्डों में विभाजित किया गया है। 1200 छंद ऋग्वेद से लिए गए हैं। अथर्ववेद के पाठ का एक छठाभाग, जिसमें दो पूरी किताबें (15 और 16) शामिल हैं, गद्य में, ब्राह्मणों की शैली और भाषा के समान है, शेष पाठ काव्यात्मक छन्दों में है। परम्परा के अनुसार इस वेद का परिचय ब्रह्म ऋत्विक् से होना चाहिए, जो यज्ञों के पर्यवेक्षक थे। यज्ञ अनुष्ठान में यद्यपि वे तीनों वेदों को जानने वाले थे अपितु सामान्यतः वे अथर्ववेद का प्रतिनिधित्व करते थे। उनके संग के कारण ही अथर्ववेद को ब्रह्मवेद भी कहा जाता है, जो ब्रह्म का वेद है।

अथर्ववेद भारतीय चिकित्सा का सबसे प्राचीन साहित्यिक स्मारक है। इसे भारतीय चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद) का मूल स्रोत माना जाता है। विभिन्न शारीरिक और मानसिक रोगों को ठीक करने से सम्बन्धित मंत्रों की एक श्रृंखला है। मंत्रों के एक अन्य वर्ग में सांपों के काटने या चोट लगने वाले कीड़ों से सुरक्षा के लिए प्रार्थना भी शामिल है। इसमें औषधी और भैषज्य वनस्पति का उल्लेख और उपयोग मिलता हैं। यह अथर्ववेद विशेषता को शेष वेदों से भिन्न करती है।

इस संहिता के दार्शनिक खण्ड पराभौतिक विचारों के उच्चतम उन्नतिको दर्शाता हैं। इस सिद्धांत के उत्पन्न काल से ही अनेकों अनेक अवधारणाओं, जैसे उपनिषदों में पाये गये जगत के निर्माता और संरक्षक (प्रजापति) से जुड़े विचार, सर्वोच्च देवता के विचार, अवैयक्तिक सृजनात्मक एवं कई दार्शानिक शब्द जैसे ब्राह्मण, तपस, असत्, प्राण, मनस इत्यादि से प्रारम्भ हुआ। अतः भारतीय दार्शानिक विचारों में हुए विकास को सटीक रूप से समझने के लिए अथर्वेद में उपलब्ध दार्शनिक विचारों को जानना अनिवार्य है।

सांसारिक सुख और आध्यात्मिक ज्ञान दोनों से संबंधित रखने वाला वेद एकमात्र अथर्वेद है। सांसारिक एवं संसार से परे इन दोनों पहलुओं को एक सूत्र में पिरोने का सामर्थ्य इस वेद में होने के कारण वैदिक भाष्यकार सायन ने इसकी प्रशंसा की है। इस प्रकार, यह वैदिक साहित्य के एक सामान्य पाठकों के लिए एक मनोहर पाठ की भाँति प्रतीत होता है।

2. विषयवस्तु
अथर्वेद को विविध ज्ञान के वेदों के रूप में देखा जाता है। इसमें कई मंत्र शामिल हैं, जो उनके विषय-वस्तु के अनुसार, मुख्यतः तीन श्रेणियों में विभाजित किए जाते हैं:

1. रोगों के उपचार और प्रतिकूल शक्तियों के विनाश से संबंधित।
2. शांति, सुरक्षा, स्वास्थ्य, धन, मित्रता और दीर्घायु की स्थापना से संबंधित।
3. परमार्थ की प्रकृति, समय, मृत्यु और अमरता से संबंधित है।

ब्लूमफील्ड ने अथर्वेद के विषय को कई श्रेणियों में विभाजित किया है, जैसे कि भैषज्य, पौस्टिक, प्रायश्चित्त, राजकर्मा, स्त्रिकर्म, दर्शना, कुंताप आदि। यहाँ अथर्ववेद के अमुक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध सूक्तों को सूचीबद्ध किया गया है।

भूमि-सूक्त (12.1)
ब्रह्मचर्य-सूक्त (11.5)
काल-सूक्त (11.53, 54)
विवाह-सूक्त (14 वां कांडा)
मधुविद्या-सूक्त (9.1)
सांमनस्य-सूक्त (3.30)
रोहित-सूक्त (13.1-9)
स्कंभ-सूक्त (10.7)
अतःअथर्वेद कई विषयों का एक विश्वकोश है। यह वैदिक लोगों के जीवन को दर्शाता है। दार्शनिक, सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक, कृषि, वैज्ञानिक और चिकित्सा विषयों से संबंधित उनके विचार इस संहिता में वर्णित हैं। अंततः, हम कह सकते हैं कि वेद संहिता अपनी प्रकृति, रूप और विषयवस्तु के लिए उपयोगी माना जाता है। यह वैदिक साहित्य का मुख्य भाग है जिसमें पाँच प्रसिद्ध संहितायें उपस्थित हैं।

साभार – वैदिक धरोहर

कोविड और रियल इस्टेट

प्रिय पाठकों व शुभचिन्तकों 

कोविड -19 ने हमारी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। वर्क फ्रॉम होम की विकसित होती संस्कृति ने कुछ प्रश्न खड़े किये हैं और इन प्रश्नों से जुड़ा है रियल इस्टेट क्षेत्र का आने वाला कल। हम नीचे जो लिंक दे रहे हैं, वह इसी प्रश्न का उत्तर जानने का प्रयास है और ये उत्तर कोई और नहीं आप ही देंगे तो देर किस बात की। इस लिंक पर क्लिक करें, एक गूगल फॉर्म खुलेगा जहाँ आपके सामने कुछ प्रश्न आएँगे…इनके उत्तर दीजिए..हो सकता है कि इससे नीति निर्धारकों को थोड़ी दिशा मिले –

https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSf0-RPLM_DjHYsx5v5aApf4Vh_u91GdTwD7ms8id64YV10kzw/viewform

क्या सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के लिए विषय वस्तु लिखना महत्वपूर्ण है?

रास्ते आसान हो जाते हैं. जब कोई राह बताने वाला हो…और यह तभी होगा जब कोई ऐसा मंच अथवा माध्यम हो…जब परामर्श सही जगह पर और सही समय पर पहुँचे। शुभजिता का प्रयास हमेशा से ही ऐसी सकारात्मकता को आगे ले जाना रहा है तो हमने की है इस स्तम्भ की शुरुआत विशेषज्ञ परामर्श..। इसके तहत अलग – अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श आपके लिए लाने का प्रयास रहेगा। शुभ सृजन सम्पर्क में पंजीकरण करवाने वाले विशेषज्ञों को आप तक पहुँचाया जायेगा और हमारा प्रयास इससे भी आगे होगा।  व्यवसाय के प्रसार के लिए एक ठोस रणनीति जरूरी है औऱ जरूरी है सही तरीके से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से व्यवसाय का प्रचार। यह हर तरीके के पेशेवर क्षेत्र में कारगर है, किसी भी स्टार्टअप, व्यवसाय या संस्थान के सिए जरूरी है। तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक, संध्या सुतोदिया  बता रही हैं ऐसे ही अवसर के बारे  में।अगर आपके पास कोई प्रश्न हों, अपने प्रश्न आप हमारे सोशल मीडिया पेज पर भी भेज सकते हैं या शुभजिता को टैग करके अपनी बात कह सकते हैं –  

– अगर आपने अभी तक कभी भी विषय वस्तु बनायी होगी, इस आशा और प्रार्थना के साथ कि उनमें से किसी की पद प्राप्ति होगी, तो यही समय है जब आप कार्य जुटा सकते हैं और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के लिए अच्छी विषय वस्तु बनाने के तरफ ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि आपकी एस ई ओ की शुरुआत और अंत अच्छी विषय वस्तु लिखने से होती है? यह इतना आवश्यक है कि हर बड़ी एजेंसी में उनकी अपनी विषय वस्तु लिखने वाला समूह बनाया जाता है; जो योजना बनाने की ओर ध्यान देते हैं और प्रभावशाली विषय वस्तु रणनीति लागू करते हैं।
इससे पहले कि हम इस ब्लॉग की मुख्य बातों पर जाएं, हम यह समझ लेते हैं कि मार्केटर्स एस ई ओ से क्या समझते हैं।

* ‘एस ई ओ’ विषय वस्तु क्या है?
– ‘एस ई ओ’ या सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन वेबसाइट को स्वयं के अनुकूल बनाने का तरीका है जिससे लोग सर्च इंजन ( गूगल, याहू, बिंग और अन्य) के जरिए ढूंढ सकते हैं। जब कि वेब में उपस्थित सभी विषय वस्तु के रूप में दर्शाया जाता है और वेब से ही ग्रहण भी किया जा सकता है।
इसलिए इन दो बातों को साथ में जोड़ते हुए यह कहा जा सकता है कि, एस ई ओ विषय वस्तु एक ऐसा विषय वस्तु है जिसे सर्च इंजन की पहुंच बढ़ाने के लिए बनाया जाता है। इसलिए विषय वस्तु को इस प्रकार लिखा जाता है कि जब भी उससे संबंधित कीवर्ड ढूंढा जाता है तब वे खुद ही उच्च पद पर आ जाते हैं। की वर्ड्स का रणनीतिक रूप से किसी वेबपेज के शीर्षक या ब्लॉग पोस्ट या विभिन्न स्थानों पर उपयोग किया जा सकता है। हालांकि विषय वस्तु को सर्च इंजन से लेकर मानवों के अनुकूल बनाना चाहिए।
तो जब हमें पता लग चुका है कि एस ई ओ क्या है, हमें यह समझना चाहिए कि एस ई ओ के लिए विषय वस्तु लिखना आवश्यक क्यों है।

* इन पांच कारणों से हमें पता चलेगा कि एस ई ओ के लिए विषय वस्तु लिखने का सही तरीका क्या है:-

1. एस ई ओ, कीवर्ड्स के लिए रणनीतिक रूप आवश्यक है :- जब बात एस ई ओ की आती है, तो कीवर्ड्स अति आवश्यक है। जिससे सही कीवर्ड या उसके बदले वेबपेज के शीर्षक या ब्लॉग पोस्ट या अन्य जगहों से रणनीतिक विषय वस्तु लिखने से प्राप्त किया जा सकेगा। इसलिए अगर विषय वस्तु ना हो तो सही कीवर्ड की पद प्राप्ति कठिन है।

2. अच्छी विषय वस्तु से सोशल मान्यता प्राप्त होती है :- जब लोग जो चीज ढूंढ रहे हैं वह उन्हें अच्छे विषय वस्तु से मिलती है तो वह उसे सोशल मीडिया और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ढूंढते हैं। जब दर्शक लगातार लिंक को अपने टाइमलाइन पर शेयर करते हैं, सर्च इंजंस इन कार्यों को सोशल मान्यता के रूप में देखते हैं और फिर उस मान्यता के अनुसार लिंक को पद देते हैं।

3. अच्छे विषय वस्तु से मिलती है अच्छी बैकलिंक:- बैकलिंक सोशल मान्यता का ही एक रूप है। ज्यादातर समय लोग अच्छी विषय वस्तु से जुड़ते हैं क्योंकि वह उन्हें खुद से मिलता-जुलता पाते हैं या जो विषय वस्तु दिखाया जाता है उसकी बढ़ाई करते हैं। जबकि कई बार लोग अन्य वेबसाइट और ब्लॉक को उसकी मूल्य दूसरे विषय वस्तु से जोड़ने के लिए भी दे सकते हैं। सर्च इंजन इन कार्यो को मान्यता के रूप में देखता है और उनके एल्गोरिदम इस मान्यता को वेब पेजेस और ब्लॉग पोस्ट के पद स्थापित में उपयोग करते हैं।

4. सर्च इंजंस को वेबसाइट पर विभिन्न लिंक के पद स्थापित में विषय वस्तु की आवश्यकता होती है :- इसका एक आसान तर्क है! अगर सर्च इंजंस के पास कोई विषय वस्तु ना हो तो वे क्या पद स्थापित होंगे? चित्र भाग में, विभिन्न चित्र पदस्थापित हैं; वीडियो के भाग में, विभिन्न वीडियो पदस्थापित है; समाचार भाग में, सर्च इंजन में समाचार पदस्थापित है। उसी प्रकार, अगले भाग में, विषय वस्तु को कीवर्ड और ‘सर्च’ शब्द के अनुसार पदस्थापित है।

5. विषय वस्तु लिखने से सर्च कार्य संपूर्ण होता है :– एसईओ विषय वस्तु में सर्च कार्य संपूर्ण करने का एक नया उभरता ट्रेंड बन चुका है। गूगल एक एल्गोरिदम पर काम कर रही है, जिससे गूगल सर्च इंजन पर उपयोगीयो को वह मिल जाएगा जो वह ढूंढ रहे हैं। इसलिए विषय वस्तु को उसके सही कारण के अनुसार पदस्थापित किया जाएगा। इसलिए विषय वस्तु अच्छी होनी चाहिए, जिससे उनके पद में उन्नति हो और अगर ना हो तो वह बिगड़ सकते हैं।

* अंतिम पंक्ति:- बिना अच्छे विषय वस्तु के कोई भी अच्छा सर्च इंजन पद पाने की आशा नहीं कर सकते हैं। हर बीतते दिन के साथ एसईओ के लिए विषय वस्तु लिखना अति आवश्यक होता जा रहा है। हमारी तुरिया कम्युनिकेशंस का दल सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन में अच्छे विषय वस्तु से संबंध की आवश्यकता को समझता है और ग्राहकों के लिए ही हमारा दल दिन-रात अच्छे निर्णय और विषय वस्तु रणनीति तैयार कर रहा है।

 

लेखिका तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक हैं

सम्पर्क-  फोन: +91 89815-92855 /  9748964480

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