कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन कोलकाता की ओर से एक वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार का केंद्रीय विषय उषा गांगुली और उनका व्यक्तित्व था। इस वेबिनार के आमंत्रित वक्ताओं में ओम पारिक, प्रताप जायसवाल, अशोक सिंह, महेश जायसवाल, मंजू श्रीवास्तव, सुशील कांति, कल्पना झा आदि ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय भाषा परिषद के निदेशक और प्रसिद्ध आलोचक शंभुनाथ ने कहा कि ‘रंगकर्म पूरे जीवन का होम माँगता है साथ ही इस संकट के दौर में रंगकर्म को ऑडियो-विसुअल रूप में सामने लाने की कोशिश होनी चाहिए।
उषा गांगुली और उनके व्यक्तित्व के संदर्भ में ओम पारिक ने अपने विचार रखते हुए कहा कि उषा जी ने मुझे शिक्षित किया। उनके व्यक्तित्व से मेरे व्यक्तित्व का पुनर्निर्माण हुआ। प्रताप जायसवाल ने कहा कि उन्होंने लोक समुदाय के लिए नाटक किया। नाटक उनका सब कुछ था । अशोक सिंह ने कहा कि उषा जी का व्यक्तित्व एक दबंग योद्धा की तरह था क्योंकि ‘रंगकर्मी’ जैसे दल को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाने में उनकी जो भूमिका रही उससे इंकार नहीं किया जा सकता। उषा गांगुली के संबंध में महेश जायसवाल ने उनके रंगमंचीय कर्म की सराहना करते हुए कहा कि रंगकर्म कोई पार्ट टाइम जॉब नहीं है, यह निरंतर किये जाते रहने वाला कर्म है।मंजू श्रीवास्तव ने उषा गांगुली को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा कहा करती थीं कि नाटक यदि उद्देश्यपूर्ण न हों तो उनका कोई औचित्य नहीं। सुशील कांति ने कहा कि उषा जी का जाना न केवल रंगमंच की क्षति है अपितु एक आदर्श व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया के खो जाने जैसा है। उनमें कलाकारों को माँजने का अनोखा अंदाज था। कल्पना झा ने उषा गांगुली से अपने व्यक्तिगत संबंधों को लेकर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के महासचिव डॉ राजेश मिश्र के स्वागत भाषण से हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ अनिता राय और तकनीकि संचालन अनुपमा सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन रामनिवास द्विवेदी ने किया।
रंगकर्म को ऑडियो-विजुअल रूप में सामने लाने की कोशिश होनी चाहिए – शंभुनाथ
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले ‘संदेश की बिक्री करने की तैयारी में बंगाल सरकार
कोलकाता : बंगाली मिठाइयों को पसंद करने वालों के लिए कोविड-19 की महामारी के बीच अच्छी खबर आई है। पश्चिम बंगाल सरकार ‘संदेश को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है जिसमें सुंदरबन के शहद का इस्तेमाल किया जाएगा जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार होगा।
पशुधन संसाधन विकास विभाग के अधिकारी ने बताया कि गाय के दूध से बने छेने में सुंदरबन के शहद को मिलाकार ‘ आरोग्य संदेश बनाया जाएगा जिसमें तुलसी का अर्क भी मिलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसमें कोई भी कृत्रिम स्वाद नहीं मिलाया जाएगा और आरोग्य संदेश कोलकाता और पड़ोसी जिलों में विभाग के बिक्री केंद्रों से बेचा जाएगा।
अधिकारी ने कहा कि संदेश प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करेगा लेकिन यह कोविड-19 को ठीक करने के लिए नहीं होगा। सुंदरबन मामलों के मंत्री मांतुराम पखीरा ने कहा कि आरोग्य संदेश बनाने के लिए शहद को पीरखली, झारखली और सुंदरबन के अन्य इलाकों से एकत्र कर वैज्ञानिक तरीके से भंडारण किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि संदेश को अगले दो महीनों में बाजार में उतार दिया जाएगा और इसकी कीमत आम लोगों की पहुंच में होगी।
बिहार में 90 साल बाद कोसी नदी पर फिर दौड़ेगी ट्रेन
पटना/सुपौल: कोसी रेंज में लोगों का 90 साल पुराना सपना सच होने जा रहा है। 90 साल बाद कोसी नदी के ऊपर फिर से ट्रेन दौड़ने वाली है। रेल मंत्रालय ने 23 जून को नए पुल पर रेल चलाकर सफल परीक्षण भी कर लिया। रेल मंत्रालय ने इससे जुड़ा एक शानदार वीडियो भी जारी किया है। रेलवे ने लिखा है कि ‘उत्तरी बिहार के दूरस्थ क्षेत्र के आम लोगों का लगभग 90 वर्ष पुराना सपना सच होने वाला है!’ आपको बता दें कि 1934 में प्रयलंकारी भूकंप में पुल के ध्वस्त होने के बाद सुपौल से मधुबनी का संपर्क पूरी तरह से कट गया था। लेकिन इस नए पुल के तैयार होने से उत्तर भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ने के लिए वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। कोशी महासेतु होकर दिल्ली से गोरखपुर-सीतामढ़ी-दरभंगा-सकरी-निर्मली-सरायगढ़-फारबिसगंज के रास्ते पूर्वोत्तर भारत जाने के लिए एक छोटा रास्ता मिलेगा। वहीं सुपौल से अररिया गलगलिया के रास्ते न्यू जलपाईगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन आसानी से किया जा सकेगा। नवनिर्मित कोसी महासेतु से जल्द ही रेल परिचालन शुरू होने की उम्मीद है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 6 जून 2003 को नए कोसी महासेतु के निर्माण के लिए शिलान्यास किया था। 1.9 किलोमीटर लंबे नए कोसी महासेतु सहित 22 किलोमीटर लंबे निर्मली-सरायगढ़ रेलखंड का निर्माण वर्ष 2003-04 में 323.41 करोड़ रुपयों की लागत से मंजूर किया गया था। ये भी एक तथ्य है कि कोसी नदी अपने स्थान को बदलने के लिए जग जाहिर है। जिस जगह पर नया पुल बनाया गया है यहां 1934 के समय से ही कोसी नदी नहीं बहती है। यह बिल्कुल नई लाइन और नया पुल है। 23 जून को रेलवे ने इस रेल ट्रैक पर एक स्पेशल ट्रेन चलाई जो सरायगढ़ से आसनपुर कुपहा तक गई।
चीन का प्राचीन भारत से कनेक्शन, जानिए 10 खास बातें
एक समय था जबकि भारतीय लोगों का संपूर्ण धरती पर राज था। ऐसा नहीं है कि भारतीय लोगों ने युद्ध करके धरती पर अपना शासन स्थापित किया था बल्कि प्राचीन काल में संपूर्ण धरती ब्रह्मा और उनके पुत्रों के वंशजों से ही आबाद थी।
1. चीन था पहले हरिवर्ष : पहले संपूर्ण हिन्दू धर्म कई जातियों में विभाजित होकर जम्बू द्वीप पर शासन करता था। अग्नीन्ध्र उसके राजा थे। आग्नीध्र स्वायम्भुव मनु के पुत्र प्रियव्रत के ज्येष्ठ पुत्र थे। प्रियवत समस्त भू-लोक के स्वामी थे। महाराज प्रियव्रत ने अपने सात पुत्रों को सप्त द्वीपों का स्वामी बनाया था, शेष तीन पुत्र बाल-ब्रह्मचारी हो गए थे। इनमें आग्नीध्र को जम्बद्वीप का स्वामी बनाया गया था।
जम्बूदीप के राजा अग्नीघ्र के नौ पुत्र हुए- नाभि, किम्पुरुष, हरिवर्ष, इलावृत, रम्य, हिरण्यमय, कुरु, भद्राश्व और केतुमाल। राजा आग्नीध ने उन सब पुत्रों को उनके नाम से प्रसिद्ध भूखण्ड दिया। हरिवर्ष को मिला आज के चीन का भाग, जो प्राचीन भूगोल के अनुसार जंबूद्वीप का एक भाग या वर्ष था। हरिवर्ष का उल्लेख जैन सूत्रग्रंथ ‘जंबूद्वीप प्रज्ञप्ति’ और हिन्दुओं के ‘विष्णु पुराण’ में मिलता है।
2. हरिवर्ष का उल्लेख : हरिवर्ष में निषध पर्वत स्थित था। हरिवर्ष को मेरू पर्वत के दक्षिण की ओर माना गया है। हरिवर्ष उत्तरी तिब्बत तथा दक्षिणी चीन का समीपवर्ती भूखंड जान पड़ता है। महाभारत ग्रंथ में हरिवर्ष के उत्तर में इलावृत का उल्लेख है जिसे जम्बूद्वीप का मध्य भाग बताया गया है। दूसरी ओर हरिवर्ष को मानसरोवर, गंधर्वों के देश और हेमकूट पर्वत (कैलाश) के उत्तर में स्थित माना गया है।
3. विष्णु पुराण में है इसका जिक्र : हरिवर्ण और हिमवर्ष (भारत) के बीच में किंपुरुषवर्ष स्थित था- ‘भारतं प्रथम वर्ष ततः किंपुरुषंस्मृतम्, हरिवर्ष तथैवान्यन्मेरोर्दक्षिणतो द्विज’।- विष्णु पुराण। राजा अग्नीघ्र के दूसरे पुत्र किम्पुरुष को कैलाश पर्वत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और तिब्बत के इलाके मिले।
4. हिन्दू मंदिरों के खंडहर : 1934 में हुई एक खुदाई में चीन के इतिहासकारों के अनुसार चीन के समुद्र से लगे औद्योगिक शहर च्वानजो में और उसके चारों ओर का क्षेत्र कभी हिन्दुओं का तीर्थस्थल था। वहां 1,000 वर्ष पूर्व के निर्मित हिन्दू मंदिरों के खंडहर पाए गए हैं। इसका सबूत चीन के समुद्री संग्रहालय में रखी प्राचीन मूर्तियां हैं।
5. तिब्बत था त्रिविष्टप : भारतीय प्रदेश अरुणाचल के रास्ते लोग चीन जाते थे और वहीं से आते थे। दूसरा आसान रास्ता था बर्मा। हालांकि लेह, लद्दाख, सिक्किम से भी लोग चीन आया-जाया करते थे, लेकिन तब तिब्बत को पार करना होता था। तिब्बत को प्राचीनकाल में त्रिविष्टप कहा जाता था। यह देवलोक और गंधर्वलोक का हिस्सा था।
6. महाचीन एवं प्राग्यज्योतिष : मात्र 500 से 700 ईसापूर्व ही चीन को महाचीन एवं प्राग्यज्योतिष कहा जाता था, लेकिन इसके पहले आर्य काल में यह संपूर्ण क्षेत्र हरिवर्ष, भद्राश्व और किंपुरुष नाम से प्रसिद्ध था। महाभारत के सभापर्व में भारतवर्ष के प्राग्यज्योतिष (पुर) प्रांत का उल्लेख मिलता है। हालांकि कुछ विद्वानों के अनुसार प्राग्यज्योतिष आजकल के असम (पूर्वात्तर के सभी 8 प्रांत) को कहा जाता था। इन प्रांतों के क्षेत्र में चीन का भी बहुत कुछ हिस्सा शामिल था।
रामायण बालकांड (30/6) में प्राग्यज्योतिष की स्थापना का उल्लेख मिलता है। विष्णु पुराण में इस प्रांत का दूसरा नाम कामरूप (किंपुरुष) मिलता है। स्पष्ट है कि रामायण काल से महाभारत कालपर्यंत असम से चीन के सिचुआन प्रांत तक के क्षेत्र प्राग्यज्योतिष ही रहा था। जिसे कामरूप कहा गया। कालांतर में इसका नाम बदल गया।
चीनी यात्री ह्वेनसांग और अलबरूनी के समय तक कभी कामरूप को चीन और वर्तमान चीन को महाचीन कहा जाता था। अर्थशास्त्र के रचयिता कौटिल्य ने भी ‘चीन’ शब्द का प्रयोग कामरूप के लिए ही किया है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि कामरूप या प्राग्यज्योतिष प्रांत प्राचीनकाल में असम से बर्मा, सिंगापुर, कम्बोडिया, चीन, इंडोनेशिया, जावा, सुमात्रा तक फैला हुआ था। अर्थात यह एक अलग ही क्षेत्र था जिसमें वर्तमान चीन का लगभग आधा क्षेत्र आता है।
7. क्या कृष्ण गए थे चीन ? : इस विशाल प्रांत के प्रवास पर एक बार श्रीकृष्ण भी गए थे। यह उस समय की घटना है, जब उनकी अनुपस्थिति में शिशुपाल ने द्वारिका को जला डाला था। महाभारत के सभापर्व (68/15) में वे स्वयं कहते हैं- कि ‘हमारे प्राग्यज्योतिष पुर के प्रवास के काल में हमारी बुआ के पुत्र शिशुपाल ने द्वारिका को जलाया था।’
8. कामरूप पर शासन : चीनी यात्री ह्वेनसांग (629 ई.) के अनुसार इस कामरूप प्रांत में उसके काल से पूर्व कामरूप पर एक ही कुल-वंश के 1,000 राजाओं का लंबे काल तक शासन रहा है। यदि एक राजा को औसतन 25 वर्ष भी शासन के लिए दिया जाए तो 25,000 वर्ष तक एक ही कुल के शासकों ने कामरूप पर शासन किया। अंग्रेज इतिहासकारों ने कभी कामरूप क्षेत्र के 25,000 वर्षीय इतिहास को खोजने का कष्ट नहीं किया। करते भी नहीं, क्योंकि इससे आर्य धर्म या हिन्दुत्व की गरिमा स्थापित हो जानी थी।
कालांतर में महाचीन ही चीन हो गया और प्राग्यज्योतिषपुर कामरूप होकर रह गया। यह कामरूप भी अब कई देशों में विभक्त हो गया। कामरूप से लगा ‘चीन’ शब्द लुप्त हो गया और महाचीन में लगा ‘महा’ शब्द हट गया। पुराणों के अनुसार शल्य इसी चीन से आया था जिसे कभी महाचीन कहा जाता था।
9. क्या चंद्रवंशी है चीनी लोग ? हम यह दावा नहीं करते लेकिन माना जाता है कि मंगोल, तातार और चीनी लोग चंद्रवंशी हैं। इनमें से तातार के लोग अपने को अय का वंशज कहते हैं, यह अय पुरुरवा का पुत्र आयु था। (पुरुरवा प्राचीनकाल में चंद्रवंशियों का पूर्वज है जिसके कुल में ही कुरु और कुरु से कौरव हुए)। इस आयु के वंश में ही सम्राट यदु हुए थे और उनका पौत्र हय था। चीनी लोग इसी हय को हयु कहते हैं और अपना पूर्वज मानते हैं।
10. बुध और इला से संबंध : एक दूसरी मान्यता के अनुसार चीन वालों के पास ‘यू’ की उत्पत्ति इस प्रकार लिखी है कि एक तारे (तातार) का समागम यू की माता के साथ हो गया। इसी से यू हुआ। यह बुद्ध और इला के समागम जैसा ही किस्सा है। इस प्रकार तातारों का अय, चीनियों का यू और पौराणिकों का आयु एक ही व्यक्ति है। इन तीनों का आदिपुरुष चंद्रमा था और ये चंद्रवंशी क्षत्रिय हैं।
संदर्भ : कर्नल टॉड की पुस्तक ‘राजस्थान का इतिहास’ और पं. रघुनंदन शर्मा की पुस्तक ‘वैदिक संपत्ति’ और ‘हिन्दी-विश्वकोश’ आदि से संकलित अंश।
(साभार – वेबदुनिया)
एमसीसी की पहली महिला अध्यक्ष बनेंगी इंग्लैंड की क्लेयर कोनोर
लन्दन : इंग्लैंड की पूर्व कप्तान क्लेयर कोनोर क्रिकेट के नियमों के संरक्षक मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) के 233 साल के इतिहास में इस संस्था की पहली महिला अध्यक्ष बनने जा रही हैं। कोनोर को गत बुधवार को वर्तमान प्रमुख कुमार संगकारा का उत्तराधिकारी घोषित किया गया। श्रीलंका के पूर्व कप्तान संगकारा अगले साल पदमुक्त होंगे।
इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड में वर्तमान समय में महिला क्रिकेट की प्रबंध निदेशक कोनोर का नामांकन बुधवार को एमसीसी की वार्षिक आम बैठक में स्वयं संगकारा ने किया। कोनोर अगले साल एक अक्टूबर को अपना पद संभालेंगी लेकिन अभी इसे क्लब के सदस्यों से मंजूरी मिलना बाकी है। कोविड-19 के कारण क्रिकेट गतिविधियों पर पड़े प्रभाव को देखते हुए संगकारा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया गया था। कोनोर को 2009 में एमसीसी की आजीवन सदस्य बनाया गया था।
उन्होंने कहा, ‘मैं एमसीसी के अगले अध्यक्ष के लिए नामित होने से बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूं। क्रिकेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है और अब उसने मेरे हाथों में यह बहुत बड़ा सम्मान सौंपा है।’ कोनोर ने 1995 में 19 साल की उम्र में इंग्लैंड की तरफ से पदार्पण किया और 2000 में उन्हें कप्तानी सौंपी गई थी। ऑलराउंडर कोनोर की अगुवाई में ही इंग्लैंड महिला टीम ने 2005 में 42 साल बाद एशेज श्रृंखला जीती थी। उन्हें 2007 में ईसीबी की महिला क्रिकेट का प्रमुख नियुक्त किया गया था
डोप आरोप मुक्त संजीता चानू को अंतत: 2018 के लिए मिलेगा अर्जुन पुरस्कार
नयी दिल्ली : डोप के दाग से मुक्त राष्ट्रमंडल खेलों की दो बार की स्वर्ण पदक विजेता भारोत्तोलक संजीता चानू को अंतत: प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार मिलेगा जो 2018 से रुका हुआ है। खेल मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि चानू को 2018 के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार अर्जुन पुरस्कार मिलेगा। उच्च न्यायालय ने चयन समिति को चानू के नाम पर विचार करने को कहा था और अपने फैसले को सीलबंद लिफाफे में रखने को कहा था जिसे चानू के डोपिंग के आरोपों से मुक्त होने की स्थिति में ही खोला जाना था। मंत्रालय के सूत्र ने कहा, ‘‘संजीता (चानू) को अंतरराष्ट्रीय महासंघ ने डोपिंग के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है इसलिए हमें दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करना होगा और अर्जुन पुरस्कार के लिए उसके नाम पर विचार करना होगा।’’
अर्जुन पुरस्कार के लिए 2017 में अनदेखी के बाद चानू ने दिल्ली उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करके इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की सूची से उनके नाम की अनदेखी के फैसले को चुनौती दी थी। मामला उच्च न्यायालय में लंबित रहने के दौरान मई 2018 में वह प्रतिबंधित पदार्थ के लिए पॉजिटिव पाई गई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने उसी साल अगस्त में अपने आदेश में समिति को पुरस्कार के लिए उनके नाम पर विचार करने का निर्देश दिया था और अपने फैसले को सीलबंद लिफाफे में रखने को कहा था जब तक कि डोप आरोपों के खिलाफ उनकी अपील पर फैसला लंबित रहे।
अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएफ) ने पिछले महीने चानू के खिलाफ डोपिंग के आरोप हटा दिए थे। मणिपुर की यह भारोत्तोलक इस दौरान मानसिक परेशानी का सामना करने के लिए आईडब्ल्यूएफ से मुआवजा मांगने की योजना बना रही हैं। आईडब्ल्यूएफ ने विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) की सिफारिश के आधार पर चानू को आरोप मुक्त किया था जिसके बाद राष्ट्रीय महासंघ ने खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने को कहा।
भारतीय भारोत्तोलन महासंघ के महासचिव ने भी पुष्टि की है कि चानू को अर्जुन पुरस्कार मिला है। अधिक जानकारी दिए बिना उन्होंने कहा, ‘‘इसकी पुष्टि हो चुकी है, संजीता को 2018 का अर्जुन पुरस्कार मिलेगा। ’’ छब्बीस साल की चानू ने 2014 और 2018 में लगातार दो राष्ट्रमंडल खेलों में क्रमश: 48 और 53 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीते थे। चानू ने 2016 और 2017 में अर्जुन पुरस्कार के लिए आवेदन किया था लेकिन दोनों मौकों पर उनकी अनदेखी की गयी।
रियल मी एक्स 3 और रियल मी एक्स 3 भारतीय बाजार में
प्रस्तुति – प्रियंका सिंह
नयी दिल्ली : स्मार्टफोन कंपनी रियलमी की ओर से भारत में नयी एक्स 3 सीरीज लॉन्च कर दी गई है। इस सीरीज में दो स्मार्टफोन्स शामिल हैं और दोनों ही पावरफुल फीचर्स के साथ आते हैं। कंपनी ने दो फोन Realme X3 और रियल मी एक्स 3 सुपर जूम भारतीय बाजार में उतारे हैं । ये डिवाइसेज पिछली रियल मी एक्स 2 सीरीज के अपग्रेड के तौर पर उतारे गए हैं। गत गुरुवार को हुए ऑनलाइन ओनली लॉन्च में कम्पनी ने अपनी नयी सीरीज की कीमत और फीचर्स से पर्दा उठाया।
नयी सीरीज की कीमत
रियल मी एक्स 3 सुपर जूम की कीमत पावरफुल 12 जीबी रैम और 256 जीबी स्टोरेज वेरियंट के लिए 32,999 रुपये रखी गई है। वहीं, दूसरे 8 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरियंट की कीमत 27,999 रुपये रखी गयी है। रियल मी एक्स 3 को भी दो वेरियंट में उतारा गया है। इस फोन के 8 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरियंट की कीमत 25,999 रुपये रखी गयी है। वहीं, दूसरे 6 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज मॉडल की कीमत 24,999 रुपये रखी गयी है।
दोनों ही डिवाइसेज की सेल 30 जून से शुरू होगी और इन्हें ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट के अलावा रियलमी की आधिकारिक साइट से भी खरीदा जा सकेगा। बायर्स दोनों ही डिवाइसेज ग्लेशियल ब्लू, आर्कटिक वाइट कलर ऑप्शंस में खरीदा सकते हैं।
स्त्रोत – नवभारत टाइम्स
सीबीएसई बोर्ड की रद्द परीक्षाओं पर संशय और उत्तर
सीबीएसई बोर्ड की कैंसिल परीक्षाओं को लेकर अभी भी स्टूडेंट्स के मन में कई प्रकार की जिज्ञासाएं हैं। ऐसे ही कुछ प्रश्नों के जवाब हम लाए हैं आपके लिए, जो कुछ हद तक आपकी जिज्ञासा को शांत करेंगे। सीबीएसई बोर्ड ने पिछले दिनों कई सारी घोषणाएं की जिनसे बहुत से बदलाव भी हुए. जो परीक्षाएं 1 से 15 जुलाई के मध्य आयोजित होनी थी वे भी रद्द हो गयीं. इस बीच स्टूडेंट्स के मन में कई सारे सवाल उभर रहे हैं जिनके जवाब एबीपी न्यूज की वेबसाइट पर मिले और वहीं से जो जानकारी मिली…उसी को हम आप तक पहुँचा रहे हैं।
स्थितियां ‘अनुकूल’ होने का क्या मतलब है? यह कौन तय करेगा कि अब परीक्षाओं का संचालन कराने के लिए स्थितियां ठीक हैं?
‘अनुकूल’ का मतलब होता है एक निश्चित स्थिति या परिणाम की सम्भावना बनना। यहाँ इस बात का मतलब कोविड 19 के दौरान अनुकूल स्थिति बनने से है, यानी की स्थितियां इस लायक हों, जिनमें परीक्षाएं आयोजत की जा सकें. मोटे तौर पर कहा जाए तो इसका यहाँ मतलब है कि कोरोना के मामलों में कमी आए या कोई और मजबूत तरीका निकाला जा सके जिससे कोरोना से बचाव हो सके। ऐसा कुछ होने पर ही परीक्षाएं आयोजित हो पाएंगी. सेंट्रल गर्वनेंट के तहत आने वाली मानव संसाधन विकास मंत्रालय यह तय करेगा की स्थितियां कब अनुकूल हैं.
- अगर मैं परीक्षा न देने का चुनाव किया जाए तो अंक कैसे मिलेंगे?
सेंटर ने एपेक्स कोर्ट को इस बारे में यह बताया है कि किसी पर्टिकुलर विषय में अंक देने के लिए स्टूडेंट के उस विषय की पिछली तीन परीक्षाओं को ध्यान में रखा जाएगा. इसमें इंटर्नल ऐसेसमेंट, प्रोजेक्ट वर्क, असाइमेंट्स आदि भी शामिल किये जा सकते हैं. हालांकि इस बारे में अभी सीबीएसई का कोई आधिकारिक नोटिस जारी नहीं हुई है। जल्द ही नोटिस जारी होगी जिसमें आप अंकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- आन्तरिक मूल्यांकन से अंक पाने का विकल्प कब तक अपनाया जा सकता है?
सीबीएसई ने अभी इस बारे में कोई तारीख घोषित नहीं की है. पर एग्जाम न देकर इंटर्नल ऐसेसमेंट से अंक पाने का विकल्प चुनने के लिए आपको एक निश्चित समय दिया जाएगा. इसको लेकर बिल्कुल भी चिंतित न हों.
- क्या मैं आन्तरिक मूल्यांकन और परीक्षा, दोनों चुन सकता हूं? जिसमें मेरे अंक अच्छे आएंगे उन्हें अंतिम अंक मान लिया जाए?
नहीं। आप आन्तरिक मूल्यांकन और परीक्षा, देने में से कोई एक विकल्प ही चुन सकते हैं. अगर आप परीक्षा देने का चुनाव करते हैं तो इन परीक्षा में पाए गए अंक ही अंतिम माने जाएंगे. नये नोटिफेकिशन में इस बाबत अगर कोई सूचना आती है तो इसकी जानकारी आप तक पहुंचायी जाएगी.
- सीबीएसई बोर्ड ने फिलहाल एसेसमेंट के लिए क्या तरीका अपनाने की योजना बनाई है?
1. परीक्षाएं रद्द हो जाने के बाद अब सीबीएसई बोर्ड कुछ बिंदु हैं, जिनको ध्यान में रखकर परिणाम घोषित करेगा।
2. 10वीं और 12वीं के वे विद्यार्थी जिनकी सभी विषयों की परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं, उन्हें इन परीक्षाओं में प्रदर्शन के आधार पर ही अंक दिए जाएंगे.
3. वे विद्यार्थी जो तीन से ज्यादा विषयों की परीक्षा दे चुके हैं, उनके तीन विषयों के अंकों के आधार पर परिणाम घोषित होगा. ये तीन विषय वो होंगे जिसमें विद्यार्थी के सबसे अच्छे अंक आये होंगे.
4. वे विद्यार्थी जो कुल तीन विषयों की ही परीक्षा दे पाए हैं, उनके दो विषयों के अंक ध्यान में रखे जाएंगे, जिसमें उनके सबसे अच्छे अंक आये होंगे.
5. वे स्टूडेंट्स जो केवल एक विषय की परीक्षा दे पाएं हैं, उन्हें, इंटर्नल/प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट एसेसमेंट के आधार पर अंक दिए जाएंगे. हालांकि ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या काफी कम है. अधिकतर पूर्वी दिल्ली के स्टूडेंट्स ही इस श्रेणी में आते हैं.
70 दिनों में 1 करोड़ बार डाउनलोड हुआ मित्रों ऐप
प्रस्तुति – निखिता पांडेय
नयी दिल्ली : चीनी ऐप टिक – टॉक का प्रतिद्वन्द्वी मित्रों ऐप काफी लोकप्रिय हो रहा है. हाल ही में इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से गोपनीयता सम्बन्धी कारणों से हटा लिया गया था. हालांकि अब फिर से ये ऐप गूगल प्ले स्टोर पर आ चुका है। शॉर्ट वीडियो ऐप मित्रों को गूगल प्ले स्टोर से 1 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है. ये ऐप सिर्फ एंड्रॉयड के लिए ही है. कम्पनी के मुताबिक इसे 11 अप्रैल को लॉकडाउन के दौरान लॉन्च किया गया था.
मित्रों ऐप विवादों में भी रहा है. वजह ये थी कि पाकिस्तान की एक स्टार्टअप ने दावा किया था कि इस ऐप का सोर्स कोड वहाँ से खरीदा गया था. पाकिस्तान के उस डेवलपर का कहना है कि इस ऐप को मेड इन इंडिया नहीं कहा जा सकता है.
वहीं इस ऐप के फाउंडर शिवांक अग्रवाल ने बताया है कि ये ऐप पूरी तरह से भारतीय है। गूगल प्ले स्टोर से हटाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कंप्लाइंस इश्यू की वजह से प्ले स्टोर से इसे हटाया गया था, लेकिन अब ये वापस आ चुका है।
शिवांक झाँसी के रहने वाले हैं और 2011 में आईआईटी रुड़की से पढ़ाई पूरी करने के बाद अडोबी और मेक माइ ट्रिप जैसी कम्पनियों के साथ काम कर चुके हैं.
मित्रों ऐप के यूजर्स के बारे में उन्होंने कहा है कि फिलहाल इस ऐप के 15 लाख ऐक्टिव यूजर्स है, जबकि 50 लाख वीकली ऐक्टिव यूजर्स हैं। इस ऐप ने 70 दिनों में ही 10 मिलियन डाउनलोड का आंकड़ा पार कर लिया है।
गूगल प्ले स्टोर पर मित्रों ऐप को 3.3 लाख रिव्यू मिले हैं और सोशल कैटिगरी में ये ऐप टॉप 3 में है। शिवांक का कहना है कि वोकल फॉर लोकल के लिए भारत में मजबूत भावना है और स्थानीय कानून को फॉलो करते हुए इस ऐप पर काम किया जा रहा है।
इस ऐप के दूसरे फाउंडर आशीष खंडेलवाल हैं। इन्होंने कहा है कि वो यूजर्स के फीडबैक को सुन रहे हैं और लगातार प्रोडक्ट में बदलाव करके इसे इंप्रूव कर रहे हैं। पिछले महीने से अब तक इस ऐप के लिए 6 अपडेट्स जारी किए गए हैं. अगले महीने इस ऐप में कुछ नए फीचर्स लॉन्च किए जाएंगे।
(स्त्रोत – आजतक)
कालजयी है ‘ओम जय जगदीश हरे’ आरती, लेखक को जानते हैं आप?
प्रस्तुति – निखिता पांडेय
एक ऐसी आरती जिसका हिन्दू शास्त्रों में कोई उल्लेख नहीं मिलता लेकिन फिर भी यह आरती इतनी प्रचलित और प्रसिद्ध है कि यह आरती हिन्दू धर्म के हर मंदिरों में गायी जाती है। इस आरती के रचयिता पंडित श्रद्धाराम शर्मा (फिल्लौरी) का आज पुण्य स्मरण दिवस 24 जून 1881 को था। श्रद्धारामजी की लाहौर में मृत्यु हो गई थी। उनका जन्म 30 सितम्बर, 1837 में पंजाब के जालंधर जिले में लुधियाना के पास एक गाँव फिल्लौरी (फुल्लौर) में हुआ था। उनका विवाह एक सिक्ख महिला महताब कौर के साथ हुआ था। ‘ओम जय जगदीश हरे’ के रचयिता : 1870 में 32 वर्ष की उम्र में पंडित श्रद्धाराम शर्मा ने ‘ओम जय जगदीश हरे’ आरती की रचना की थी। आज इस आरती के 150 वर्ष भी पूर्ण हो गए हैं।
पिता ने की थी भविष्यवाणी : उनके पिता जयदयालु स्वयं एक अच्छे ज्योतिषी और धार्मिक प्रवृत्ति के थे। पिता ने अपने पुत्र की कुंडली पढ़कर कहा था कि ये बालक अपनी कम आयु में ही जीवनी में चमत्कारी प्रभाव वाले कार्य करेगा। पंडितजी ने 1844 में मात्र सात वर्ष की उम्र में ही गुरुमुखी लिपि सीख ली थी। दस साल की उम्र में संस्कृत, हिन्दी, फ़ारसी, पर्शियन तथा ज्योतिष आदि की पढ़ाई शुरू की और कुछ ही वर्षों में वे इन सभी विषयों में पारंगत हो गए।
सामाजिक कार्य : पंडितजी ने साहित्य और भाषा की सेवा के साथ ही धर्म और समाज के लिए भी बहुत कार्य किए। उन्होंने अंग्रेजों खिलाफ भी लड़ाई लड़ी और समाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ लोगों को जगाया। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह औ स्त्री पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद किया। जगह-जगह पर उनको धार्मिक और सामाजिक विषयों पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया जाता था। उस दौरान तब हजारों लोग उनको सुनने आते थे।
(साभार – वेब दुनिया)




