Sunday, July 5, 2026
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हिन्द की तुम बेटी हो

– शुभम हिन्दुस्तानी,
गाजीपुर, उ.प्र.

अपनी हिम्मत को टंकार दो
वक्त को ललकार दो
हिन्द की तुम बेटी हो
वक्त को पछाड़ दो,

खुद को पहचान लो
बल को अपने धार दो
मुसीबतों को दो जवाब खरा
आत्मविश्वास, परिश्रम से
तुम हार को हरा दो।

नभ में अपनी जीत का
झण्डा तुम फहरा दो
हिन्द की तुम बेटी हो
अपनी जीत धरा पर
अपने तिरंगे को फहरा दो।।

 

क्या होती हैं बेटियाँ

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माँ बाप की शान होती हैं बेटियाँ
विपत्ति ही नहीं, हर समय
ईश्वर का वरदान होती हैं बेटियाँ
अन्धकार में जाड़े की घाम होती हैं बेटियाँ।।

कभी माँ, कभी बेटी. कभी बहू
हर रूप में घर की शान होती हैं बेटियाँ
माँ के रूप में संतान के लिए,
जेठ में शीतल छांव होती हैं बेटियाँ

बहू के रूप में एक नहीं
दो – दो घरों की शान होती हैं बेटियाँ
इस स्वार्थी संसार में
करुणा का वरदान होती हैं बेटियाँ

इतनी महान होकर भी
इस स्वार्थी संसार में
कुर्बान होती हैं बेटियाँ
मत मारो गर्भ में इनको
संसार की उत्पत्ति का आधार होती हैं बेटियाँ

कभी दुर्गा, कभी चामुंडा की
अवतार होती हैं बेटियाँ
समाज में इनकी हालत देखकर
फिर कहता हूँ, मत मारो इन्हें
बहुत महान होती हैं बेटियाँ।।

 

 

 

दिव्यांगों तथा वृद्धों का ख्याल रखने पर पुरस्कृत होंगी पूजा कमेटियाँ

‘कोविड सेफ दुर्गोत्सव’ पुरस्कार की घोषणा

कोलकाता : अब दुर्गा पूजा पंडालों में दिव्यांगों तथा वृद्धों की सुविधा का ध्यान रखने वाली पूजा कमेियों को पुरस्कृत किया जायेगा। इसके साथ ही कोविड प्रोटोकाल का पालन करने वाले पूजा कमेटियों को ‘कोविड सेफ दुर्गोत्सव’ पुरस्कार से नवाजा जाएगा। एनआईपी एनजीओ, फोरम फॉर दुर्गोत्सव, रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3291 और नारायण मेमोरियल अस्पताल के सहयोग से पूजा समितियों के लिए पुरस्कारों की घोषणा की गयी।

नेशनल इंस्टीच्यूट आफ प्रोफेशनल (एनआईपी) एनआईपी के सचिव देबज्योति रॉय ने बताया कि फोरम फॉर दुर्गोत्सव 2010 से ही इस संबंध में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्य मकसद है कोविड प्रोटोकॉल बनाए रखने के साथ वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए पूजा पंडालों को अनुकूल बनाना। फोरम फॉर दुर्गोत्सव में 350 दुर्गा पूजा समितियां शामिल हैं।

नारायण मेमोरियल हॉस्पिटल (बेहला) की सीईओ सुपर्णा सेनगुप्ता, नारायण मेमोरियल हॉस्पिटल के क्रिटिकल केयर सलाहकार डॉ. प्रसून कुमार मित्रा, रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3291 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रवीर चटर्जी, अभिनेता देबशंकर हल्दर  आदि मौजूद थे।

रॉय ने कहा कि एनआईपी ने अपनी यात्रा 2002 में शुरू की थी। शुरुआत से ही यह विकलांगों के सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के लिए प्रयासरत है। 2012 में एनआईपी को इस क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग से पुरस्कार मिला था। उन्होंने कहा कि एनआईपी ने पहली बार महसूस किया कि दिव्यांग बंगाल के सबसे बड़े धार्मिक त्योहार दुर्गा पूजा का आनंद लेने से वंचित हैं। पूजा पंडाल तक पहुंचना न केवल दिव्यांगों के लिए बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी कठिन काम है।फोरम फॉर दुर्गोत्सव एनआईपी के सहयोग से वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल पंडालों के निर्माण के लिए सर्वश्रेष्ठ पूजा समिति को पुरस्कृत करेगा।

इस अवसर पर सुपर्णा सेनगुप्ता ने कहा कि एनआईपी की ओर से सूचीबद्ध पूजा समितियों के लिए पंडाल प्रोटोकॉल सेट करने के लिए चुना जाना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे रही है और इसके परिणामस्वरूप हमें बाहर जाते समय अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है विशेष रूप से पंडाल में। पूजा समितियों को प्रोटोकॉल के अनुसार पंडालों की योजना बनाने की सलाह दी गई है। प्रबीर चटर्जी ने एनआईपी के इस प्रयास की सराहना की और रोटरी क्लब के पूरे सहयोग का आश्वासन दिया।

पुत्री दिवस पर भवानीपुर 75 पल्ली ने किया छऊ नर्तकों के बच्चों में वस्त्र वितरण

कोलकाता : विश्व पुत्री दिवस पर भवानीपुर 75 पल्ली पूजा कमेटी पुरुलिया के 250 छऊ नर्तकों के बच्चों को वस्त्र वितरित किया । सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए कमेटी पुरुलिया के छऊ गाँव में यह आयोजन किया । इस वर्ष अपनी थीम ‘मानविक’ को सार्थक करते हुए भवानीपुर 75 पल्ली पूजा समिति ने अपनी सीएसआर पहल में यह कार्य किया। कमेटी छऊ नर्तकों की सहायता के लिए आगे आई है जो लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। छऊ एक पारम्परिक नृत्य है जिसमें नर्तक रामायण एवं महाभारत जैसे पौराणिक आख्यानों को अपने नृत्य के माध्यम से जीवन्त करते हैं। इस दुर्गा पूजा कमेटी के सचिव सुबीर दास ने कहा कि कमेटी ने पुरुलिया के चारिदा गाँव में 250 छऊ नर्तकों के बच्चों को वस्त्र वितरित किया है और उनके परिवार के सदस्यों को भी वस्त्र दिये जाएंगे। दुर्गा पूजा के दौरान छऊ नर्तकों के ऐसे 50 परिवारों की सहायता की जायेगी।

फ्लिपकार्ट होलसेल अब जनरल मर्चेन्डाइज श्रेणी में रखेगा कदम

कोलकाता : फ्लिपकार्ट होलसेल अब जनरल मर्चेंडाइज श्रेणी में कदम रखने जा रहा है। इसके पोर्ट फोलियों 24 हजार से अधिक उत्पाद हैं। इनमें होम टेक्सटाइल, कुकवेयर स्टोरेज समेत कई अन्य श्रेणियाँ शामिल हैं। यह प्लेटफॉर्म 1350 से अधिक शहरों एवं 8 हजार पिनकोड पर ग्राहकों को उत्पाद पहुँचायेगा। अगले 6 माह में यहाँ पर 55 हजार उत्पाद और 1 हजार से अधिक विक्रेताओं को जोड़ने का लक्ष्य है। यह जानकारी फ्लिपकार्ट होलसेल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट तथा हेड आदर्श मेनन ने दी।

बीएचएस में आयोजित हुआ ‘ओडिशी’

कोलकाता : बिड़ला हाई स्कूल का द्विवार्षिक उत्सव ‘ओडिशी’ हाल ही में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम सह प्रतियोगिता में 10 शिक्षण संस्थानों के प्रतिभागियों ने 11 प्रतियोगिताओं में भाग लिया। ऑफलाइन प्रतियोगिताओं के लिए प्रविष्टियाँ मेजबान स्कूल को गत 8 सितम्बर को जमा की गयीं। इनमें फैशन शो, कन्टम्परेरी डांस, फ्यूजन बैंड, रचनात्मक लेखन, ऐप डेवलपमेंट और प्रोडक्ट मार्केटिंग जैसी प्रविष्टियाँ शामिल थीं। गत 10 सितम्बर को विद्या मंदिर सोसायटी के महासचिव मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) वी. एन. चतुर्वेदी, बिड़ला स्कूल की निदेशक मुक्ता नैन, बिड़ला हाई स्कूल की प्रिंसिपल लवलीन सैगल ने ‘ओडिशी’ का उद्घाटन किया। पहले दिन स्टैंड अप कॉमेडी प्रतियोगिता हुई जिसके विजेताओं का निर्णय रेडियो 91.9 रेडियो एफ एम के प्रमुख जिमी टैंगरी और महादेवी बिड़ला वर्ल्ड अकादमी की वाइस प्रिंसिपल नुपुर घोष ने किया। इसके बाद वाद – विवाद प्रतियोगिता डबल क्रॉस लर्निंग एवं डेवलपमेंट सलाहकारम लेज्ली डी गामा के संचालन में आयोजितक हुई। इसका निर्णय ला मार्टिनेल हाई स्कूल की प्रिंसिपल वन्दना पॉल तथा फ्यूचर होम के निदेशक (ऑपरेशन) समरजीत गुहा ने किया। इसके बाद स्कूल के प्रतिनिधियों के लिए ट्रेजर्स हंट आयोजित हुआ। दूसरे दिन क्विज प्रतियोगिता हुई जिसमें 6 स्कूलों ने भाग लिया। साउथ सिटी इंटरनेशनल विजेता बना, दूसरे स्थान पर बिड़ला हाई स्कूल रहा। गायक अनुव जैन ने जूम पर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्टूडेंट काउंसिल के अध्यक्ष देवांशु चौधरी, तीन कोषाध्यक्ष मानव सिंधी, उत्कर्ष बागड़िया, भास्कर अग्रवाल, टेत्निकल हेड नेम शाह तथा नौवीं और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों का विशेष योगदन रहा।

एचआईटीके के पूर्व छात्र ने बनाया सेल्फ क्लीनिंग रियूजेबल फेस मास्क

कोलकाता : हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एचआईटीके) डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, बैच -2008 के पूर्व छात्र डॉ अमित जायसवाल, वर्तमान में आईआईटी मंडी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, ने अपनी टीम के साथ कोविड के प्रसार को रोकने के लिए एक सेल्फ क्लीनिंग रियूजेबल फेस मास्क का आविष्कार किया है। इस मास्क को बनाने के लिए नैनोमीटर आकार की चादरों का उपयोग किया गया है जो मानव बाल की चौड़ाई से 100000 गुना छोटी हैं जो रोगाणुओं को साफ कर सकती हैं और सौर प्रकाश से साफ करने योग्य हैं। यह कपड़े की सांस लेने की क्षमता से समझौता किए बिना 96 प्रतिशत वायरस को साफ कर सकता है जो कोविड -19 के आकार की सीमा में हैं।
हाल ही में डॉ. अमित ने आईआईटी मंडी में संस्थान के मुख्य वार्डन के रूप में संस्थान सेवा में उत्कृष्टता के लिए स्थापना दिवस पुरस्कार 2021 प्राप्त किया। हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कोलकाता के प्रिंसिपल प्रोफेसर बासब चौधरी ने कहा, “यह हमारे संस्थान के लिए एक अच्छी खबर है और हमें डॉ अमित पर गर्व है।”

 

रोबोटिक तकनीक से स्थानीय व्यवसायियों की मदद कर रही है श्रुति

कोलकाता : स्टैफ़र्डशायर यूनिवर्सिटी की एक छात्रा रोबोटिक तकनीक से स्थानीय व्यवसायियों की मदद कर रही है। कोलकाता की श्रति रोबोटिक आर्म्स की मदद से स्थानीय स्तर पर व्यवसायियों की सहायता कर रही है। श्रुति रोबोटिक्स और स्मार्ट टेक्नोलॉजी में एमएससी की छात्रा है। तीन महीने की इन्टर्नशिप के दौरान उसने स्टैफर्डशायर यूनिवर्सिटी के प्रोटोटाइपिंग एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम सैम्पिड के माध्यम से प्रॉम्टैक लिमिटेड के साथ काम कर रही है।
कोलकाता की रहने वाली श्रुति ने अपनी इस योजना को लेकर कहा कि वह ऐसे क्षेत्र में काम करना चाहती है जहाँ वह रोबोटिक्स की सहायता से स्वचालन यानी ऑटोमेशन के जरिए काम में तेजी ला सके। कम्पनी के साथ काम करना उसके लिए अच्छा अनुभव रहा और वह बहुत कुछ सीख सकी। इस तरह की भूमिका का एक आदर्श उदाहरण थी और यह मुख्य लाभों में से एक था – उस अनुभव को जीने और कंपनी के साथ, शिक्षाविदों और तकनीकी कर्मचारियों के साथ सहयोग करने में सक्षम होना। स्टैफ़र्डशायर विश्वविद्यालय और यूरोपीय क्षेत्रीय विकास कोष 2014-2020 द्वारा वित्त पोषित, सैमपिड प्रोग्राम व्यवसायों को बाजार के उत्पादों या अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग करने वाले घटकों के लिए नए विकसित करने में मदद करता है। प्रॉम्टेक ने रोबोटिक ऑटोमेशन की सम्भावनाओं का उपयोग ग्राहकों के हित में करने के लिए यह साझेदारी की है। प्रॉम्टेक के निदेश चार्ल्स विलियम्स ने कहा कि निजी तौर पर वे हमेशा से रोबोटिक्स के पक्षधर रहे हैं। हालांकि ग्राहक अब तक रोबोट के उपयोग को लेकर सहज नहीं हैं।
ब्रिंडली फोर्ड स्थित कंपनी प्रोमटेक लिमिटेड ने यह पता लगाने के लिए साइन अप किया कि क्या रोबोटिक स्वचालन विनिर्माण उद्योग में ग्राहकों के लिए घटक प्रबंधन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है मगर अवसर हमेशा से रहे हैं।

स्कूटर बेचकर 2 दिन में कमाये 1100 करोड़

नयी दिल्ली: ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री जब से शुरू हुई है, यह रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाता जा रहा है। बात स्कूटर के प्री- बुकिंग की करें तो ये 15 जुलाई से शुरू हुई और 24 घंटे के दौरान ही इसके एक लाख से ज्यादा स्कूटर बुक हो गए थे। वहीं अब बिक्री में भी एक दिन में 600 करोड़ कीमत की बिक्री पूरी होने के बाद कंपनी ने दूसरे दिन 500 करोड़ के इलेक्ट्रिक स्कूटर बेच डाले। इस तरह कंपनी की दो दिन की बिक्री 1100 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की हो गई है।
ओला के फाउंडर भाविश अग्रवाल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बिक्री के आंकड़े जारी किए हैं। उन्होंने लिखा, ‘दूसरा दिन पहले से भी शानदार रहा। 2 दिन में 1100 करोड़ रुपए की बिक्री पार हो गई। खरीदारी 1 नवंबर को फिर से शुरू होगी।’ बता दें कि कंपनी ने 15 सितंबर से स्कूटर की आधिकारिक बुकिंग शुरू की थी, जो 16 सितंबर तक चली है। भाविश अग्रवाल की मानें तो कंपनी ने हर सेकेंड 4 स्कूटर्स की बिक्री की है।

ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर दो वैरिएंट- S1 और S1 प्रो में आता है। ओला S1 की कीमत 99,999 रुपये और ओला S1 प्रो वैरिएंट की कीमत 1,29,999 रुपए है। बिक्री के दिन ग्राहक 20,000 रुपये की बुकिंग राशि देकर स्कूटर ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। हालांकि अगर आप खरीदारी करने से चूक गए हैं, तब भी आप अगली सेल के लिए स्कूटर 499 रुपये में ऑनलाइन बुक कर सकते हैं।
सिंगल चार्ज में 180किमी तक की रेंज मिलेगी
कंपनी का दावा है कि इसकी बैटरी 750W की क्षमता के पोर्टेबल चार्जर से तकरीबन 6 घंटे में फुल चार्ज हो जाएगी। इसके अलावा कंपनी के सुपरचार्जर से ये बैटरी महज 18 मिनट में ही 50% तक चार्ज हो सकती है।
ओला का दावा है कि ये इलेक्ट्रिक स्कूटर एक बार फुल चार्ज होने के बाद 180 किलोमीटर तक का ड्राइविंग रेंज देता है। ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर में कंपनी ने 3.9 केडबल्यूएच की क्षमता का बैटरी पैक दिया है और इसका इलेक्ट्रिक मोटर 8.5 kW का पीक पावर जेनरेट करता है।

निशिता राजपूत:: क्राउड फंडिंग से जुटाई 34 हजार लड़कियों की स्कूल फीस

घर में बेटा हुआ तो ढोल-नंगाड़े बजवा दिए गए, बात जब पढ़ाई-लिखाई की आई तो बेटे को प्राइवेट स्कूल में और बेटी को सरकारी स्कूल में धकेल दिया। मैंने ये गैर-बराबरी बचपन से अपने आसपास देखी। भविष्य की बेटियों के साथ ऐसा नहीं देखना चाहती थी इसलिए अपने बल पर उनके लिए स्कूल की फीस जमा की। मैं किसी बहुत रईस खानदान से नहीं थी, लेकिन एक लड़की की जिंदगी में एजुकेशन का महत्त्व जानती हूं। अगर मैं खुद पढ़ी-लिखी नहीं होती, तो आज शायद 34, 500 बेटियों के लिए 3 करोड़ 80 लाख रुपये स्कूल फीस जमा नहीं कर पाती। ये बातें हैं गुजरात के वडोदरा की निशिता राजपूत की।सबकुछ करने की हिम्मत रखता है, लेकिन दूसरों के भले के लिए कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं है।
एक बार मैं अपने पापा के साथ कहीं गई थी, वहां मुझे एक बूढ़ी अम्मा दिखीं, जो सूखे चावल खा रही थीं। जब मैंने जानना चाहा कि वे ऐसा रूखा-सूखा खाना क्यों खा रही हैं, तब पता चला कि उनके आगे पीछे-कोई नहीं है और एक परिवार उन्हें टिफिन दे जाता है। घर लौटकर भी मेरा मन उन बूढ़ी अम्मा की सोच में खोया रहा। उनका घर इतना दूर था कि चाहते हुए भी हर दिन उन तक अपने घर से खाना पहुंचाना मुश्किल था। उस समय हमने एक तरकीब निकाली। अम्मा के आस-पास रहने वाली एक महिला से संपर्क किया, जो हर दिन टिफिन बनाकर उन तक पहुंचाती और बदले में उन्हें पैसे मिलते। इससे दो चीजें हुई, अम्मा को अच्छा खाना मिला और उस महिला को फाइनेंशियल हेल्प। एक अम्मा से शुरू हुआ ये सफर आज 204 बुजुर्गों तक जा पहुंचा है। इससे बूढ़े अम्मा-बाबा को अच्छा खाना और कई महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिल सका है। हमारी ये कोशिश भी पूरी तरह से डोनेशन पर चल रही है।

मैं न किसी संस्था से जुड़ी हूं और न मेरा अपना कोई फाउंडेशन है, लेकिन शिक्षित बेटियों को देखने का मेरा सपना है। मैं लोगों से बेटियों के लिए फंड मांगती हूं और फीस जमा करती हूं। इसी साल जनवरी में मेरी शादी हुई है। अपनी शादी की गैर जरूरी खर्चों को किनारे कर उन पैसों से मैंने 251 बच्चियों की स्कूल फीस जमा की और 21 लड़कियों के नाम से 5 हजार की एफडी कराई। बच्चियों की पढ़ाई के लिए मैंने 11 साल पहले काम शुरू किया, तब से आज तक कुल 34,500 बच्चियों के लिए 3 करोड़ 80 लाख रुपये स्कूल फीस के तौर पर जमा कर चुकी हूं। मुझे हमेशा से लगता था कि शिक्षा पर अधिकार जेंडर देखकर तय नहीं किया जाना चाहिए। फिर भी बदहाली, अशिक्षा और लड़के-लड़की के बीच समाज में ऐसा अंतर है, जो कहता है कि लड़कों की शिक्षा लड़कियों की शिक्षा से ऊपर होनी चाहिए। ये बात मुझे हमेशा खटकती रही और इसीलिए आज से 11 साल पहले मैंने तय किया कि मैं छात्राओं की शिक्षा के लिए काम करूंगी।
मेरे इस फैसले की शुरुआत 151 बच्चियों के साथ हुई। ये वो दौर था, जब किसी के दरवाजे पर जाती और बच्चियों की फीस भरने के लिए उनसे मदद मांगती, तो ज़्यादातर लोग पल्ला झाड़ लेते, लेकिन जिन लोगों ने मदद की उसके बाद से उन्होंने मेरासाथ नहीं छोड़ा। मुझे जब भी कहीं से कोई फाइनेंशियल हेल्प मिलती, उस डोनेशन की ट्रान्स्पेरन्सी बनाए रखने के लिए मैं डोनर्स तक बच्चों का बायोडाटा शेयर करती, जिससे उन्हें इस बात की जानकारी रहे कि उनके पैसे किस बच्चे की पढ़ाई पर खर्च हो रहे हैं।
अपनी कोशिशों के बाद आज मुझे इतनी मदद मिल रही है, जिससे हर दिन मैं कई बच्चियों के सपने पूरे कर पा रही हूं। मजेदार बात ये है कि इन 11 सालों के सफर में मेरी टीम सिर्फ दो की रही। मैं और मेरे पापा। हम दोनों मिलकर सारा काम देखते हैं। चूंकि मैं कोई संस्था नहीं चला रही, इसलिए लोगों को अपने साथ जोड़ना मेरे लिए नामुमकिन है। मेरा काम स्कूल और डोनर्स के बीच एक ब्रिज बनने का है। मुझे मेरा बचपन याद है, जब मैं और पापा सड़क किनारे बच्चों को केले और बिस्कुट देने जाया करते थे, तब उनका जोर इस बात पर रहता था कि इंसान अपने लिए