Friday, October 30, 2026
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देश की मुख्य आर्थिक सलाहकार बनने की दौड़ में हैं ये महिला अर्थशास्त्री

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के रूप में अपना 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने शिक्षा जगत में वापस लौटने का फैसला किया है। वह आज यानी 7 दिसंबर को पद छोड़ देंगे। ऐसे में सरकार इस पद पर नियुक्ति के लिए किसी महिला के नाम को प्राथमिकता दे सकती है। सूत्रों के मुताबिक सरकार में तीन महिलाओं के नामों पर मंथन चल रहा है। इनमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की प्रो. डॉ. पमी दुआ और नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की महानिदेशक पूनम गुप्ता के नाम सामने आए हैं। खास बात ये है कि अगर कोई महिला (सीईए) बनती हैं तो फिर देश में यह पहली बार होगा, जब वित्त मंत्री और मुख्य आर्थिक सलाहकार दोनों महिलाएं होंगी। जानिए, कौन हैं (सीईए) पद की दौड़ में शामिल ये 3 महिलाएं।

गीता गोपीनाथ संभाल रही हैं आईएमएफ में बड़ी जिम्मेदारी
गीता गोपीनाथ भारतीय मूल की अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं। इस समय वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) की मुख्य अर्थशास्त्री हैं। उनका कार्यकाल जनवरी में समाप्त होने वाला था। उन्होंने फिर से हॉर्वर्ड ​यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में लौटने का फैसला भी ले लिया था। लेकिन इससे पहले ही (आईएमएफ) के फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के लिए उनके नाम की घोषणा कर दी गई।

गीता ने कोरोना महामारी से लड़ने में भारत सरकार की जिस तरह से प्रशंसा की है, उसे देखते हुए इस मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में उनकी स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि अमेरिकी नागरिकता इस राह में रोड़ा बन सकती है। बता दें कि भारतीय मूल की अमेरिकी गीता गोपीनाथ का जन्‍म 8 दिसंबर 1971 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स दोनों से एमए की डिग्री के बाद 2001 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से इकोनॉमी में पीएचडी की पढ़ाई की।

वह साल 2005 में हार्वर्ड में पहुंचीं। 2010 में आइवी-लीग इंस्टिट्यूट में प्रोफेसर बनीं। उन्हें अंडर 45 कैटेगरी के टॉप 25 इकोनॉमिस्ट में भी नॉमिनेट किया गया। साल 2011 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने गीता को यंग ग्लोबल लीडर भी चुना।

डॉ. पमी दुआ का दुनिया भर में नाम, आरबीआई के लिए भी किया काम
डॉ. पमी दुआ को साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने चार वर्ष के लिए आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का सदस्य नियुक्त किया था। वह इस समिति में पहली महिला सदस्य थीं। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की है। डॉ. पमी भारत की सबसे सम्मानित मैक्रोइकोनॉमिक्स प्रोफेसरों में से एक है। वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में डायरेक्टर, रिसर्च काउंसिल में चेयरपर्सन और शैक्षणिक गतिविधियों की डीन भी रही हैं। उन्हें मैक्रोइकोनॉमिक्स फोरकास्टिंग के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। प्रो. पमी भारत के प्रतिष्ठित डी-स्कूल से भी जुड़ी हैं।

पूनम गुप्ता आईएमएफ में रहीं, पीएम की आर्थिक सलाहकार समिति में हैं शामिल
भारत की लीड इकोनॉमिस्ट पूनम गुप्ता मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद की रेस में शामिल हैं। वह नेशनल इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में आरबीआई की चेयर प्रोफेसर थीं। उन्हें हाल ही में प्रधानमंत्री की पुनर्गठित आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया है। पूनम नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के महानिदेशक के रूप में पद संभालने वाली पहली महिला हैं। वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी एसोसिएट प्रोफेसर रह चुकी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, वॉशिंगटन डीसी में एक इकोनॉमिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। वह आईएमएफ में इकोनॉमिस्ट के तौर पर काम चुकी है। पूनम ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और मैरीलैंड विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

अपनी मौलिकता और कल्पनाशीलता को आगे बढ़ाइए, बनिए यूट्यूबर

 अपना खुद का काम शुरू करने की युवा पीढ़ी का झुकाव इन दिनों यूट्यूब की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे कई यूथ आइकॉन हैं जो अपने यूट्यूब चैनल की बदौलत घर-घर में पैठ बना चुके हैं, जिनसे मोटिवेट होकर अब अधिकांश युवा यूट्यूब के जरिए आत्मनिर्भर बनने के विकल्प तलाश रहे हैं। अगर आप भी ऐसे ही लोगों में से एक हैं जो यूट्यूब पर रोजगार के विकल्प तलाश रहे हैं. बस किसी सही मार्गदर्शन की तलाश है। तो, यहां आपके लिए मौजूद है यूट्यूब से जुड़ी वो तमाम जानकारी जिसे जान और समझ कर आप भी यूट्यूब पर अपना चैनल शुरू कर सकते हैं और उसके एडसेंस का लाभ भी उठा सकते हैं। चलिए आसान तरीके में जानते हैं चैनल बनाने के तरीके और फिर एडसेंस के जरिए उससे आत्मनिर्भर बनने के तरीके.  यूट्यूब पर चैनल बनाना बेहद आसान है। आपको कुछ आसान से कदम अपनाने होंगे और यूट्यूब पर आपका चैनल बनकर तैयार होगा। जरूरत है कि आपके वीडियो में नयापन हो, मौलिकता हो और साथ ही आप फर्जी वीडियो तथा अभद्रता से बचें, यह आपकी छवि खराब करेगा।

ऐसे बनाएं अपना चैनल

  • सबसे पहले यूट्यूब पर साइन इन करें। आप चाहें तो अपनी जीमेल आई डी से भी यूट्यूब में साइन इन कर सकते हैं।
  • प्रोफाइल पिक्चर पर क्लिक करने के बाद आपको क्रिएट चैनल का ऑप्शन दिखाई देगा।
  • यहां आपसे चैनल क्रिएट करने का सवाल होगा।
  •  अपनी सारी जानकारी को अच्छे से जाँच लें और क्रिएट चैनल वाले विकल्प को चुन लें।

कैसे मोनेटाइज होगा चैनल?

चैनल मोनेटाइज करने की भी कुछ शर्तें हैं। यूट्यूब चैनल शुरू करते समय एक थीम पर काम करें ताकि आपका चैनल जल्दी और आसानी से मोनेटाइज हो जाए। हाल ही में यूट्यूब ने अपनी मोनेटाइजेशन पॉलिसी में बदलाव किया है. जिसके बाद अब मोनेटाइजेशन के लिए ये शर्तें पूरी करनी होंगी।

  • आपके यूट्यूब चैनल पर 1,000 ऑर्गेनिक सब्सक्राइबर होने चाहिए।
  • आपके चैनल पर 12 महीने में 4,000 घंटे का वॉच टाइम होना चाहिए।
  • आपका वॉच टाइम गिनने के लिए यूट्यूब आपकी लाइव स्ट्रीमिंग और आपके वीडियो की जांच करता है। अनलिस्टेड वीडियो, डिलीटेड या प्राइवेट वीडियो, एडवरटाइजिंग कैंपेन और यूट्यूब शॉर्ट्स को इसमें नहीं गिना जाता है।

यूट्यूब एडसेंस से ऐसे जुड़ें

यूट्यूब की सारी गाइडलाइन फॉलो करते हुए आप एक बार मोनेटाइजेशन की शर्तें पूरी कर लेते हैं तो यूट्यूब के एडसेंस से जुड़ सकते हैं। मोनेटाइजेशन की सारी शर्ते पूरी होने के बाद आपके पास यूट्यूब से मेल आएगा. जिसके बाद आप मोनेटाइजेशन पर क्लिक करेंगे। इसके बाद यूट्यूब आपको मोनेटाइज करने से पहले चैनल जाँच करेगा. सारी शर्तें पूरी होने पर आपके पास यूट्यूब से ही मेल आएगा जिसमें आपको मोनेटाइजेशन प्रक्रिया से जुड़ने और एडसेंस में शामिल होने की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद चैनल वेरीफाई होने की एक प्रक्रिया होती है. ये सभी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद आप यूट्यूब एडसेंस का हिस्सा बन जाते हैं और फिर आप अपने कंटेंट से कमाई कर सकते हैं।

(साभार – एनडीटीवी)

 

 

भाई की शादी में बचा खाना परोसने रेलवे स्टेशन पहुँची बहन

सोशल मीडिया पर मिली सराहना

कोलकाता: शादी ब्याह समारोह के दौरान खानपान की बर्बादी बहुत देखने को मिलती है। छोटा समारोह हो या बड़ा आयोजन जरूरत से ज्यादा ही खाना तैयार होता है और बच जाने पर उस खाने को कूड़े में डाल दिया जाता है, लेकिन कोलकाता की एक महिला ने खाना बर्बाद करने की बजाए उसे जरूरतमंदों के बीच परोस दिया। सजी – धजी महिला का गरीबों को भोजन कराने का यह अंदाज लोगों का दिल जीत गया।
दरअसल, 5 दिसंबर की रात 1 बजे कोलकाता के राणाघाट जंक्शन पर शादी के कपड़ों में सजी महिला खाना लेकर बैठ गई और कागज के प्लेटों में एक-एक कर सभी को खाना देना शुरू कर दिया। इसमें दाल-चावल, सब्जी, रोटी समेत कई अन्य व्यंजन शामिल थे। वेडिंग फोटोग्राफर नीलांजन मंडल ने महिला द्वारा बांटे जा रहे खाने को कैमरे में कैद कर लिया और थोड़ी देर बाद फेसबुक पर वेडिंग फोटोग्राफर के नाम से बने पेज पर इस फोटो और वीडियो को शेयर किया।
नीलांजन मंडल ने लिखा- पापिया अपने भाई की शादी में गरीबों को बचा हुआ खाना खिलाती नजर आई। पापिया की इस दयालुता की जमकर सराहना हो रही है।
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जल्द होगी एयर इंडिया की कायापलट, विदेशी सीईओ की सम्भावना

नयी दिल्ली : एयर इंडिया को नई उड़ान देने के लिए टाटा समूह ने तैयारी शुरू कर दी है। टाटा ग्रुप ने भारी कर्ज में डूबी सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया को हाल में खरीदा था और वह जनवरी 2022 में इसकी कमान अपने हाथों में ले सकता है। एयर इंडिया का कायापलट करने के लिए 100 दिन का एक ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया के सीईओ के लिए नामों की छंटनी कर ली है और इसमें अमेरिका की डेल्टा एयरलाइन के पूर्व प्रेजिडेंट फ्रेड रीड का नाम सबसे आगे चल रहा है।
100 डे प्लान के तहत एयर इंडिया की ऑन-टाइम परफॉरमेंस में सुधार के साथ यात्रियों और कॉल सेंटरों से जुड़ी शिकायतें दूर करना शामिल हैं। एक सूत्र ने कहा कि 100 डे प्लान का मकसद मूल सेवा से जुड़े मानकों में सुधार लाना है। इन चीजों को पहले 100 दिन में पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया जा सकता है लेकिन उनमें सुधार किया जा सकता है। ऑन-टाइम परफॉरमेंस और यात्रियों की शिकायत के आंकड़े हर महीने आते हैं और अगर इनमें कोई सुधार आता है तो हर कोई इसे देख सकता है।
कंपनी ने क्या कहा
टाटा ग्रुप ने इस मामले में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कंपनी ने एक ईमेल के जवाब में कहा कि अभी एयर इंडिया शेयर-परचेज ट्रांजैक्शन चल रहा है। हम इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जब तक डील पूरी नहीं हो जाती है तब तक हम किसी भी अटकलबाजी पर टिप्प्णी करने से परहेज करेंगे। सरकार जनवरी के तीसरे हफ्ते में एयर इंडिया को टाटा ग्रुप को सौंपने की तैयारी में है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन द्वारा अक्टूबर में जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक यात्रियों की शिकायत के मामले में एयर इंडिया तीसरे नंबर पर रही।
कौन हैं फ्रेड रीड
अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले रीड सिविल एविएशन इंडस्ट्री के दिग्गज हैं। वह डेल्टा के प्रेजिडेंट रह चुके हैं और वर्जिन अमेरिका के लॉन्च के समय इसके सीईओ थे। हाल तक वह एयरबीएनबी से जुड़े थे और अभी सर्फ एयर मोबैलिटी के प्रेजिडेंट हैं।
(साभार – नवभारत टाइम्स)

बहू को परिवार का हिस्सा मानकर उसके अधिकार दें : इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज : हाई कोर्ट ने यूपी पावर कार्पोरेशन केस में पूर्णपीठ के फैसले के आधार पर सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति को नया शासनादेश जारी करने अथवा शासनादेश को ही चार हफ्ते में संशोधित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने पुष्पा देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। इस फैसले में पूर्णपीठ ने कहा है कि बहू को आश्रित कोटे में बेटी से ज्यादा अधिकार है। यह फैसला इस मामले में भी लागू होगा। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति को आदेश अनुपालन की जिम्मेदारी दी है। कोर्ट ने जिला आपूर्ति अधिकारी को नया शासनादेश जारी होने या संशोधित किए जाने के दो सप्ताह में याची को वारिस के नाते सस्ते गल्ले की दुकान का लाइसेंस देने पर विचार करने का निर्देश दिया है।
बता दें कि याची की सास के नाम सस्ते गल्ले की दूकान का लाइसेंस था, जिनकी 11 अप्रैल, 2021 को मौत हो गई। याची के पति की पहले ही मौत हो चुकी थी। विधवा बहू याची और उसके दो नाबालिग बच्चों के अलावा परिवार में अन्य कोई वारिस नहीं है। याची ने मृतक आश्रित कोटे में दुकान के आवंटन की अर्जी दी। जिसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि पांच अगस्त 2019 के शासनादेश में बेटी को परिवार में शामिल किया गया है किन्तु बहू को परिवार से अलग रखा गया है। कोर्ट ने शासनादेश में बहू को परिवार से अलग करने को समझ से परे बताया और कहा कि बहू को आश्रित कोटे में बेटी से बेहतर अधिकार प्राप्त है इसलिए बहू को परिवार में शामिल किया जाए।

 

पेप्सिको के लेज वाले भारतीय आलूओं का पंजीकरण रद्द

एफ एल -2027 आलू के लिए पेप्सिको ने किसानों पर किया था मुकदमा
नयी दिल्ली : पौधे की किस्मों का संरक्षण करने वाले प्राधिकरण पीपीवी एंड एफआर ने शुक्रवार को पेप्सिको इंडिया  को आलू की किस्म ” के लिए मिला पंजीकरण प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। यही वह आलू की किस्म है, जिसे उगाने के लिए कंपनी ने गुजरात के किसानों पर मुकदमा किया था।
गौरतलब है कि दो साल पहले अमेरिका की कंपनी पेप्सिको और गुजरात के किसानों के बीच एक विवाद काफी चर्चा में रहा था। मामला था पेप्सिको के ‘लेज’ वाले आलू किसानों द्वारा उगा लेने का। पेप्सिको ने उस खास आलू पर अपना कॉपीराइट जताते हुए किसानों पर मुकदमा और मोटा जुर्माना ठोंका और बाद में मुंह की खाई। अब कंपनी को एक और झटका लगा है क्योंकि आलू की जिस वेरायटी को वह ‘अपना’ बता रही थी, अब वह उसका अपना नहीं रहा है। भारत ने पेप्सिको से यह अधिकार छीन लिया है। पौधे की किस्मों का संरक्षण करने वाले प्राधिकरण पीपीवी एंड एफआर ने शुक्रवार को पेप्सिको इंडिया को आलू की किस्म ‘एफ एल -2027’ के लिए मिला पंजीकरण प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। यही वह आलू वेरायटी है, जिसे उगाने के लिए कंपनी ने गुजरात के किसानों पर मुकदमा किया था। एफएल – 2027 किस्म का आलू अमेरिका में 2003 में विकसित किया गया था और भारत में इसे एफसी5 के नाम से पहचाना जाता है।
​साल 2019 का वह पूरा विवाद
पेप्सिको ने अप्रैल 2019 में गुजरात के साबरकांठा में 4 छोटे किसानों के खिलाफ पेप्सिको के विशेषाधिकार वाली आलू की किस्म ‘एफएल-2027’ को उगाने और बेचने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया था। पेप्सिको का कहना था कि ये किसान अवैध रूप से आलू की इस किस्‍म को उगा और बेच रहे हैं। कंपनी का दावा था कि आलू की ‘एफएल-2027’ किस्‍म से वह लेज ब्रैंड के चिप्‍स बनाती है और इसे उगाने का एकल अधिकार पेप्सिको के पास है। आलू की इस किस्म का उत्पादन कंपनी के साथ जुड़े हुए किसान ही कर सकते हैं, नहीं। चारों किसानों से पेप्सिको ने 1-1 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने की मांग की थी।
इससे पहले पेप्सिको ने साल 2018 में गुजरात के अरवल्ली जिले के पांच किसानों पर एफएल2027 आलू को बोने के मामले में मोडासा कोर्ट में केस दर्ज किया था। उनसे भी लाखों का हर्जाना मांगा गया था।
जब हुई फजीहत तो वापस लिया मुकदमा
पेप्सिको को किसानों पर मुकदमे को लेकर किसानों और सामाजिक संगठनों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। किसानों की ओर से यह तक कह दिया गया था कि अगर भारत में किसान आलू उगाना बंद कर दें तो पेप्सिको को भारत छोड़ना पड़ जाएगा। भारी फजीहत होते देख और दबाव के चलते पेप्सिको ने गुजरात सरकार से बातचीत के बाद मई 2019 में मुकदमा वापस लेने का ऐलान किया। इस कदम के तहत कंपनी ने अहमदाबाद कमर्शियल कोर्ट में 4 किसानों और मोडासा कोर्ट में 5 किसानों के खिलाफ मुकदमों को वापस लिया था। साथ ही डीसा कोर्ट में बड़े किसानों और ट्रेडर्स के खिलाफ किए गए दो अन्य मुकदमों को भी वापस ले लिया था।
फरवरी 2016 में कंपनी को मिला था पौध किस्म का प्रमाण पत्र
पेप्सिको को इस विशेष किस्म के आलू के लिए भारत में फरवरी 2016 में पौध किस्म का प्रमाण पत्र दिया गया था। लेकिन अब पीपीवी एंड एफआर ने पेप्सिको के इस प्लांट वेराइटी प्रोटेक्शन प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया है। पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार कानून, 2001 के तहत कोई किसान कहीं का भी कोई बीज बो सकता है और बेच भी सकता है लेकिन विशेषाधिकार प्राप्त किस्मों की कमर्शियल ब्रांडिग नहीं कर सकता है।
​’पीपीवी एंड एफआर’ के फैसले पर पेप्सिको का क्या है कहना
पेप्सिको इंडिया ने इस फैसले पर कहा कि वह पौध किस्मों और किसान अधिकार संरक्षण (पीपीवी और एफआर) प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश की समीक्षा कर रही है। पीपीवी एंड एफआर एक सांविधिक निकाय है, जिसकी स्थापना पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकार अधिनियम, 2001 के तहत की गई है। प्राधिकरण का यह निर्णय दरअसल कृषि कार्यकर्ता कविता कुरुगांति द्वारा दायर की गई याचिका पर आया है।
याचिकाकर्ता की क्या रही दलील
याचिकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि पेप्सिको इंडिया को गलत जानकारी के आधार पर पंजीकरण प्रमाण पत्र दिया गया था। कृषि कार्यकर्ता कविता ने यह भी कहा था कि पेप्सिको इंडिया को आलू की किस्म पर दिया गया बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), पंजीकरण के लिए निर्धारित प्रावधानों के अनुसार नहीं था और जनहित के खिलाफ था। पीपीवी एंड एफआर ने भी कृषि कार्यकर्ता की याचिका पर सहमति जताई और कहा कि पंजीकरण आवेदक द्वारा दी गई ‘गलत जानकारी’ पर आधारित था। प्राधिकरण ने अपने 79 पृष्ठ के फैसले में कहा, “एफएल 2027 वाले आलू की किस्म के संबंध में पेप्सिको के पक्ष में रजिस्ट्रार द्वारा एक फरवरी 2016 को दिया गया पंजीकरण प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।” अपने निर्णय में प्राधिकरण ने रजिस्ट्रार के प्रमाणपत्र जारी करने पर हैरानी जताई है।

 

भारत जैन महामंडल लेडीज विंग, कोलकाता ने की जरूरतमंद बच्चों की सेवा

कोलकाता :  भारत जैन महामंडल लेडीज विंग, कोलकाता ने मानव सेवा के तहत कोलकाता के ‘नवजीवन’ अनाथालय में बच्चों के काम आने वाली वस्तुएं और खाने-पीने के सामानों का वितरण किया। बच्चों के चेहरों की खुशी देखने लायक थी। बच्चों की सेवा ही ईश्वर सेवा है। आज का यह सेवा कार्य नसरीन वारसी के सहयोग से किया गया। उनकी पुत्री माही के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में भारत जैन महामंडल लेडिज विंग द्वारा यह सराहनीय कदम लिया गया । माही को आशीर्वाद और उज्जवल भविष्य की हार्दिक मंगल-कामनाएं दी गईं । भारत जैन महामंडल लेडीज विंग कोलकाता की वाइस चेयरमैन अंजू सेठिया ने बताया कि इस प्रकार के सेवा कार्य जो भी करना चाहते हैं लेडीज विंग में स्वागत है। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज में सुरक्षा एवं भू राजनीति पर परिचर्चा

सेनेर्स की साझेदारी में बीबीए विभाग द्वारा आयोजन 
कोलकाता : किसी भी पैनल चर्चा का उद्देश्य विशेषज्ञों या उद्योग और विचारकों के समूह के बीच बातचीत को बढ़ावा देना है, ताकि दर्शक उनके वक्तव्यों एवं बातचीत से सीख सकें। भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने ‘सेनेर्स- के’ नामक अनुसंधान केंद्र की भागीदारी एवं सहयोग से परिचर्चा आयोजित की। वैश्विक स्तर, सुरक्षा और भू – राजनीति पर आयोजित इस परिचर्चा का आयोजन गत 27 नवम्बर को कॉलेज के जुबली सभागार में किया गया।
पैनल चर्चा का नाम ‘ऑकस कॉम्प्लिमेंट्स क्वाड 2.0’ रखा गया तथा विषय ‘वैश्विक स्तर, सुरक्षा और भू-राजनीति’विषय पर चर्चा की गयी। इस पैनल चर्चा में पांच विशिष्ट अतिथियों ने हिस्सा लिया। अतिथियों में एयर चीफ मार्शल अरूप राहा, लेफ्टिनेंट जनरल जॉन रंजन मुखर्जी, मेजर जनरल अरुण रॉय, कमोडोर पी.के बनर्जी एवं कॉलेज के डायरेक्टर जनरल प्रोफेसर (डॉ.) सुमन के. मुखर्जी शामिल हुए ।
एयर चीफ मार्शल अरूप राहा परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट, सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्वारा विशिष्ट सेवा के लिए। वे वर्तमान में सेनेर्स-के, के अध्यक्ष भी हैं। कार्यक्रम की एम सी ख़ुशी सोनी ने अतिथि वक्ताओं का परिचय दिया तत्पश्चात एनसीसी विभाग के केडेटों ने सम्मान पूर्वक उनको मंचासीन किया । पैनल चर्चा की शुरूआत राष्ट्रगान से हुई जिसके बाद सभी माननीय वक्ताओं का विभागीय छात्र अध्यक्ष माधव मोहता ने स्वागत किया। मध्यस्थ का कार्य किया डॉ. सुमन कुमार मुखर्जी ने चर्चा के नियमों और विनियमों से सभी को अवगत कराया ।
पैनल चर्चा के वक्तव्यों से पहले मध्यस्थ डॉ. सुमन कुमार मुखर्जी ने अपने विचार विद्यार्थियों के समक्ष पेश किए। उन्होंने दुनिया का एक अस्थिर, अनिश्चित, जटिल, अस्पष्ट दुनिया में बदलने के उल्लेख के साथ अपनी बातचीत शुरू की। उन्होंने यह भी कहा कि किसी राष्ट्र का विकास न केवल उसके आर्थिक प्रदर्शन पर निर्भर करता है बल्कि उसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रदर्शन पर भी निर्भर करता है। उन्होंने लिटिल रेड राइडिंग हूड की कहानी साझा करते हुए बताया कि दुनिया व्यापार में आपूर्ति श्रृंखला के मेक टेक डिस्ट्रीब्यूशन और पुन: उपयोग की ओर बढ़ रही है। उन्होंने इस तथ्य को भी साझा किया कि भारत के हर पांच में से एक नागरिक आजादी के पचहत्तर साल बाद भी गरीबी रेखा से नीचे है। उन्होंने यह कहकर अपना भाषण समाप्त किया कि हमारे देश को जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है और भविष्य अनिश्चित है कि हमारा देश विकास की धूप का सामना करेगा या झूठ के अंधेरे में डूब जाएगा।
पैनल चर्चा की शुरुआत प्रथम वक्ता अरूप राहा ने कहा कि चीन की विस्तारवादी नीतियाँ आधुनिक विचारों के खिलाफ हैं। उन्होंने कोविड महामारी की तुलना तीसरे विश्व युद्ध से भी की। उन्होंने विद्यार्थियों को इस तथ्य से अवगत कराया कि कैसे दुनिया व्यापार के लिए चीन पर निर्भर है और कैसे यह जापानी उन्नत तकनीक की मदद से महाशक्ति के रूप में उभरा। दूसरे वक्ता जे आर मुखर्जी ने भविष्य के आर्थिक विकास में भारत के उत्तर पूर्वी हिस्से के प्रमुख विकास के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि उत्तर पूर्व में चाय, तेल, बांस, खनिज, हॉटीकल्चर, हाइड्रो पावर और कोयले के कई संसाधन हैं। उत्तर पूर्व में केवल म्यांमार के साथ समस्याएं हैं क्योंकि यह चीन की पकड़ में है और बांग्लादेश के साथ उनके इस्लामी मूल सिद्धांतों के कारण। अन्यथा वहां बहुत शांति है।
पैनल में तीसरे वक्ता अरुण रॉय ने वैश्विक व्यापार पर अपने विचार रखे। वक्तव्य की शुरुआत करते हुए कहा कि लाइसेंस राज के कारण अमेरिकी व्यवसाय भारत में कैसे टिके नहीं रह सके, कैसे पैसा दुनिया पर राज करता है और कैसे राष्ट्रवाद वैश्विक व्यापार में भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने निकट भविष्य में उत्तर पूर्व क्षेत्र में पारिस्थितिक असंतुलन और व्यापार और विनिर्माण विकास और चीनी उत्पादों के बहिष्कार के माध्यम से हम इसका समर्थन कैसे कर सकते हैं, बताया । उन्होंने विद्यार्थियों को अच्छे नागरिक बनने की सलाह दी।
पैनल के अंतिम वक्ता पी के बनर्जी ने वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिए महासागर के महत्व पर बात की थी। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार का 97 प्रतिशत महासागरों के जलमार्गों के माध्यम से किया जाता है। उन्होंने अपने विशाल महासागर क्षेत्र के कारण भारत के लिए भू-स्थिर अवसरों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कैसे अभी भी महासागरों का एक बड़ा हिस्सा निगरानी में नहीं है, जिसके कारण ड्रग्स की तस्करी, मानव तस्करी, बंदूक चलाना, आतंकवाद, चोरी, डकैती, अवैध मछली पकड़ना जैसे कार्य हो रहे हैं। उन्होंने हमें अपनी अगली पीढ़ी को स्वच्छ और बेहतर महासागर सौंपने की भी सलाह दी। अंत में, प्रश्नोत्तर सेशन में सभी पैनल अतिथि वक्ताओं ने भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और भू-राजनीति पर दर्शकों के सवालों का जवाब दिया।
अंत में, विंग कमांडर विष्णु शर्मा को सम्मानित किया गया। विभागीय छात्र अध्यक्ष देवज्योति बनर्जी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इवेंट मैनेजमेंट टीचर कोऑर्डिनेटर प्रो. कौशिक बैनर्जी और बीबीए इवेंट मैनेजमेंट के छात्र अध्यक्ष देवज्योति बनर्जी और माधव मोहता ने उपरोक्त कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम के इवेंट कमेटी हेड, मेहक भइया और सुस्मृति गन तथा उनके सब-कमेटी हेड, दिशा रूपानी, जाह्नवी खणडेर्या एवं अनुशा अकबर ने भी इस कार्यक्रम में सक्रिय योगदान दिया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

द हेरिटेज अकादमी में आयोजित हुआ ‘ऐड अड्डा 2021’

कोलकाता : द हेरिटेज अकादमी के मीडिया साइंस विभाग की ओर से एक मार्केटिंग कम्यूनिकेशन कार्यक्रम ‘ऐड अड्डा 2021’ आयोजित किया गया। गत 2 – 3 दिसम्बर को आयोजित इस कार्यक्रम में महानगर के कई कॉलेजों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में कॉपीराइट, ऐड स्पूफ, ऐड क्विज, जिंगल्स समेत कई अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं। इन कार्यक्रमों से विज्ञापन और प्रचार अभियानों के बारे में विद्यार्थियों की जानकारी बढ़ी और उनको विज्ञापनों की दुनिया को समझने का मौका मिला। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, निर्माता एवं अभिनेता अरिंदम सील ने किया। इस कार्यक्रम में भवानीपुर गुजराती एडुकेशन सोसायटी कॉलेज, स्कॉटिश चर्च कॉलेज, द हेरिटेज अकादमी, सेंट जेवियर्स कॉलेज, सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी, एनएसएचएम नॉलेज कैम्पस, कलकत्ता विश्वविद्यालय समेत कई अन्य शिक्षण संस्थानों ने भाग लिया। ऐड क्विज प्रतियोगिता का विजेता भवानीपुर गुजराती एडुकेशन सोसायटी कॉलेज बना। वहीं कलकत्ता विश्वविद्यालय ने ऐड स्पूफ और कॉपीराइट प्रतियोगिता प्रथम स्थान प्राप्त किया। पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि केस रूप में अभिनेता नील भट्टाचार्य उपस्थित थे।

कई बीमारियों से अधिक घातक है वायु प्रदूषण, डॉक्टरों ने बताये सजग रहने के तरीके

कोलकाता : प्रदूषण आज एक विकट समस्या बन गया है। यह कई बीमारियों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक है मगर अब तक इस समस्या का समाधान नहीं निकल सका है। भारत में 7 मिलियन लोग हर साल वायु प्रदूषण से मरते हैं। यह याद रखने वाली बात है कि वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं बल्कि पूरी शरीर पर घातक प्रभाव डालता है।
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर इस समस्या के खिलाफ कई मशहूर चिकित्सक एक साथ आये। गत 2 दिसम्बर को इस मौके पर स्विच ऑन फाउंडेशन की तरफ से डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर (डीएफसीए) के सहयोग से एक पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया। इस मौके लंग केयर फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी डॉ. अरविंद कुमार की ओर से एक वीडियो के जरिए वायु प्रदूषण के खतरे को सामने रखा गया। यह वीडियो सीएमआरआई के डॉक्टर राजा धर ने प्रस्तुत किया।
पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम के समिति सदस्य डॉ, कौशिक चारकी ने कहा कि औद्योगिक श्रमिक न्यूमोकोनियोसिस, एस्बेस्टोसिस जैसे स्वास्थ्य जनित समस्याओं की चपेट में हैं। इनका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. अरूप हल्दर, डॉ. कौस्तुभ चौधरी, डॉ. सुमन मल्लिक, डॉ. सैरन्द्री बनर्जी तथा डॉ. संयुक्ता दत्त ने भी विचार रखे।
गौरतलब है कि 2 दिसम्बर को ही भोपाल गैस त्रासदी 1984 में हुई थी और इसके बाद से इसी दिन राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है।
वायु प्रदूषण जीवन शैली को लेकर चिकित्सकों के कुछ परामर्श
– प्रदूषण को लेकर जागरूक बनें। हृदय एवं फेफड़ों के मरीज विशेष रूप से सजग रहें।
– इनहेलर पास रखें। एन 95 मास्क पहनें और सुनिश्चित करें कि यह फिट हो।
– कम ईंधन जलाने वाले वाहन इस्तेमाल करें।
– रेस्तरां में खाना कम करें। अगर मांसाहारी हैं तो सप्ताह में एक दिन सब्जियों और पौधों का उपयोग करें।
– घरेलू वायु शोधक इस्तेमाल करें।
– बच्चों को प्रदूषण से बचायें, पानी और अन्य तरल पदार्थ दें। बाहर खुली हवा में व्यायाम करने को प्रोत्साहित करें।