Sunday, July 5, 2026
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टेनिस अब यह मेरे जीवन का हिस्सा है – प्राप्ति सेन

डांस स्कूल में टेनिस खेलने का मौका मिला वहीं से टेनिस मेरे जीवन का हिस्सा बन गया और फिर मेरी रुचि टेनिस में बढ़ती चली गई। भवानीपुर कॉलेज ने मुझे बहुत ही कम समय में कजाकिस्तान जाने के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी की जिसके लिए मैं बहुत आभारी हूँ। कहती हैं प्राप्ति सेन। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की द्वितीय अंग्रेजी ऑनर्स की छात्रा प्राप्ति सेन ने हिन्दी भाषा के प्रति भी अपना प्रेम प्रदर्शित किया। डॉ. वसुन्धरा मिश्र ने इस युवा खिलाड़ी का साक्षात्कार लिया जो आपके सामने प्रस्तुत है – 

प्र. कब से टेनिस खेल रही हैं? टेनिस के प्रति आपका रुझान कैसे हुआ?
पाँच वर्ष की उम्र से मेरी माँ ने मुझे नृत्य शिक्षा के लिए डांस स्कूल में दाखिला करवाया था। जहाँ पर टेनिस भी था। मैंने वहीं टेनिस खेलना शुरू किया था। डांस कम और टेनिस अधिक खेलती थी। शुरु में तो प्रोफेशनल रूप से नहीं खेलती थी। स्कूल में आ कर मैंने प्रोफेशनल ढंग से खेलना शुरू किया था।
प्र. आप किस स्कूल से पढी़ हैं?
मैं जोका के केन्द्रीय विद्यालय की छात्रा हूँ। मैं बंगाल की हूँ लेकिन मुझे हिन्दी से बहुत लगाव है।
प्र. आपने स्कूल जीवन में टेनिस का कौन-सा अवार्ड प्राप्त किया?
स्कूल जीवन में 2013 में कैडट नेशन चैम्पियनशिप,2019 में जूनियर नेशन चैम्पियनशिप और वेस्ट बंगाल गवर्नमेंट द्वारा 2019 में खेलश्री का अवार्ड मिला।
प्र. कजाकिस्तान में आपको किस आधार पर आमंत्रित किया गया?
मैम एक तो मैंने बहुत से टेनिस मैच खेल चुकी जो राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर रहे। दूसरा अवार्ड भी प्राप्त की। नेशनल रैंकिंग की वजह से कजाकिस्तान में मुझे अवसर दिया गया।
प्र. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक मिला? आपको कैसा लग रहा है? 
20 सितंबर 2021 में कजाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय टेनिस टूर्नामेंट में भाग लेना बहुत ही रोमांचक रहा। बहुत कम समय में मुझे सारे दस्तावेज भेजने थे। समय पर यदि नहीं भेजती तो भाग नहीं ले पाती। इसके लिए भवानीपुर कॉलेज के डीन प्रो. दिलीप शाह और खेल प्रशिक्षक रूपेश गांधी और भावेन परवान, दिव्या उदेशी, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी का पूरा सहयोग रहा जिनकी वजह से सारी औपचारिकताएं पूरी हो सकी। अवार्ड में रजत पदक, प्रमाणपत्र के साथ ही  700 डॉलर भी मिले।
प्र. अब आगे आप टेनिस खिलाड़ी के रूप में किस टूर्नामेंट में भाग लेने जा रही हैं?
अब पंचकूला में होने वाले टूर्नामेंट में जाने के लिए तैयारी कर रही हूँ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेनिस के लिए तुनिशिया और इक्वेडर जाना है।

भवानीपुर कॉलेज में मिशन ओरिएंटेशन में नये विद्यार्थियों का स्वागत

कोलकाता : भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज में प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को मिशन ओरिएंटेशन 2021 के कार्यक्रम में नये विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। कोरोना के नियमों का पालन करते हुए मिशन ओरिएंटेशन में कॉलेज में डिग्री प्राप्त करने के अतिरिक्त कई करेंट विषयों एवं अन्य रोजगार संबन्धित विषयों की शिक्षा देने के विषय में जानकारी दी गई । मिशन का उद्देश्य है विद्यार्थियों को अपनी डिग्री से इतर विषयों को पढ़ने का अवसर प्रदान करना। भवानीपुर कॉलेज में चार दिनों तक चलने वाले इस मिशन ओरिएंटेशन में दस सत्रों में विभिन्न स्ट्रीम के एक हजार से अधिक छात्र छात्राओं ने भाग लिया जिसमें बीकॉम बीए बीबीए बीएससी के छात्र रहे। इस मिशन में अट्ठारह से अधिक कलेक्टिव के विषय में बताया गया । नये विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। सीनियर विद्यार्थियों के कलेक्टिव क्रिसेंडो, फ्लेम, इन-एक्ट आदि ने अपने कार्यक्रम दिए। मिशन का उद्देश्य ही है अवसर देना। संगीत, नृत्य और अंतहीन संभावनाएं। डिग्री के अलावा खेल, एथलीट, पैशन, पब्लिक स्पीकिंग, डीजे, टेनिस, छोटे, बड़े और समसामयिक विभिन्न क्षेत्रों में कोर्सेज के एवी की प्रस्तुतियां दी गईं । कॉमर्स में 15 सीए फैकल्टी हैं जो कैरियर कनेक्ट आदि के लिए प्रोत्साहित करते हैं। कॉस्ट एकांउट्स, विदेश में शिक्षा का अवसर एसीसीए कोर्स के द्वारा कर सकते हैं जो विदेशों में 170 देशों में मान्यता प्राप्त है। । मिशन ओरिएंटेशन का सी फील लर्न अर्न का उद्देश्य है। सर्टिफाइड फाइनेंशियल, प्लानर सीएफपी,
कैरियर कनेक्ट, डेटा एनालिसिस, डिजिटल, साइबर सिक्युरिटी आदि बहुत से कोर्स की जानकारी दी गयी।
विद्यार्थी अपने उद्देश्य और लक्ष्य को देखते हुए तय करें इसके लिए गूगल फार्म भरवाए गए । कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन, डायनामिक्स ऑफ कैपिटल मार्केट, इ-लर्निंग, जी सूट, सर्टिफाइड ट्रैनर ऑफ गूगल, जीएसटी, टैली, स्टॉक एक्सचेंज आदि के एवी दिखाए गए।
कलेक्टिव में किसी की लीडरशिप नहीं है बल्कि समूह में काम करने की सीख है। तीन वर्षों तक टीम के साथ काम करना । रुचि के अनुसार अपने विषय को विद्यार्थियों ने क्रिसेंडो, फ्लेम, इन-एक्ट, एक्सप्रेशन, फैशन, बी ई एस टी बिजनेस संबंधित चौपाल बिजनस।एम यू एन, डिबेट सेतु बुलजाइ, क्विजार्ड, एन सी सी, एन एस एस आदि क्षेत्रों में नाम दिए।
मिशन ओरिएंटेशन 2021 में नये विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए डीन प्रो. दिलीप शाह, प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी, दिव्या उदेशी, प्रो विवेक पटवारी आदि शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सहयोग दिया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

दुर्गोत्सव 2021: सन्तोष मित्रा स्क्वायर में दिखेगी लक्ष्मी नारायण मंदिर की झलक

कोलकाता : इतिहास और बऊबाजार का एक गहरा रिश्ता है। जब हम दुर्गापूजा परिक्रमा पर निकले तो यहाँ की गलियों से गुजरते रहे। माँ दुर्गा के आगमन का उल्लास हर तरफ नजर आ रहा है। दुर्गापूजा कमेटियों के सदस्य बेहद व्यस्त हैं। जो सड़कें और गलियाँ खाली दिख रही हैं, वह गुलजार होने जा रही हैं। यह सही है कि कोरोना का भय है मगर बात जब 2020 की करें तो 2021 कहीं बेहतर होता नजर आ रहा है। थीम के रूप में भी कोरोना इस बार भी दुर्गा पूजा आयोजकों की पसन्द है। कुछ पंडाल तो दूर से ही कोरोना के प्रति सजग हैं और जागरुकता लाने में जुटे हैं। शुभजिता दुर्गोत्सव में आज हम आपको नींबूतला के दो मंडप दिखाने जा रहे हैं और आज का फोकस है सन्तोष मित्रा स्क्वायर सार्वजनीन दुर्गोत्सव समिति। अलग – अलग थीम पर बने इस पूजा के मंडप कोलकाता ही नहीं बल्कि कोलकाता के बाहर भी लोगों को लुभाते रहे हैं। इस साल संतोष मित्रा स्क्वायर में दुर्गा पूजा आयोजन के 86 साल पूरे हो रहे हैं। सन्तोष मित्रा स्क्वायर सार्वजनीन दुर्गोत्सव समिति अपनी बेहतरीन थीम पूजा के लिए विशेष स्थान रखती है। यह पूजा 1936 में स्थापित हुई थी और कोलकाता के बेहतरीन दुर्गा पूजा मंडपों में इस दुर्गोत्सव का विशेष स्थान है।सन्तोष मित्रा स्क्वायर यानी नींबूतला दुर्गापूजा के माध्यम से आप कोलकाता में बैठे – बैठे राजस्थान के जयपुर का भव्य लक्ष्मी नारायण मंदिर देख सकते हैं। इस मंदिर की प्रतिकृति ही होगा सन्तोष मित्रा स्क्वायर का दुर्गा पूजा मंडप। इस दुर्गोत्सव समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता प्रदीप घोष हैं। इस दुर्गापूजा की विशेषता यह है कि आपको थीम अलग – अलग दिखेगी मगर प्रतिमा पारम्परिक बांग्ला साज वाली ही होती है और इस बार भी प्रतिमा मिंटू पाल ने बनायी है। प्रतिमा में माँ की सज्जा साबेकीयाना होगी। यहाँ हर पंडाल के बार मेला भी लगता है जो कोरोना के कारण इस साल नहीं हो रहा है।

सन्तोष मित्रा स्क्वायर सार्वजनीन दुर्गोत्सव समिति के महासचिव नवकुमार हाइप ने बताया कि पूजा के अतिरिक्त यह दुर्गापूजा समिति काफी सामाजिक कार्य करती है। ठाकुरपुकुर कैंसर अस्पताल में समिति की तरफ से 2 निःशुल्क बेड उपलब्ध करवाये गये हैं। क्रांतिकारी सन्तोष मित्र के नाम पर इस समिति का नाम रखा गया है। कमेटी ने यहाँ स्थित 100 साल पुराने शिक्षण संस्थान का पुनरुद्धार करवाया है। पास ही की चटर्जी बाड़ी में पहली बार यह पूजा स्थापित हुई। पूजा से ज्ञान प्रकाश घोष, चारू प्रकाश घोष, मृंगाक मोहन सूर, रायचंद बड़ाल, आलोक कुमार दे समेत कई हस्तियाँ इस पूजा से जुड़ी रही हैं। 1993 में पहली बार थीम पूजा की शुरुआत यहाँ से हुई। यहाँ कई कलाकार निःशुल्क प्रस्तुति देते हैं।
कोरोना को लेकर यह दुर्गापूजा समिति काफी सक्रिय है। सैनेटाइजर और मास्क की व्यवस्था करने के साथ ही लोगों को सजग भी किया जा रहा है। आयोजक चाहते हैं कि भीड़ एकत्रित न हो.यानी पूजा देखिए मगर सेल्फी या तस्वीरों के लिए अधिक देर तक खड़े न रहिए।

जानिए महालया का महत्व

दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में है। महालया के साथ ही दुर्गा पूजा की शुरुआत हो जाएगी। दुर्गा पूजा के पहले महालया का अपना एक खास महत्व है। बंगाल में इस दिन को लोग खास तरीके से मनाते हैं। इसके साथ ही जिन राज्यों में दुर्गा पूजा धूमधाम से मनाया जाता है उन राज्यों में भी महालया का विशेष महत्व है। लोग महालया की साल भर लोग प्रतीक्षा करते हैं। हिंदू धर्म में महालया का अपना एक अलग महत्व होता है। यह अमावस्या के आखिरी दिन मनाया जाता है जो पितृपक्ष का भी अंतिम दिन होता है।

क्या है महालया

हिंदू शास्त्रों के अनुसार महालया और पितृ पक्ष अमावस्या एक ही दिन मनाया जाता है। इस बार यह 6 अक्टूबर को होगा। महालया के दिन ही मूर्तिकार मां दुर्गा की आंखें तैयार करता है। इसके बाद से मां दुर्गा की मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जाता है। दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की प्रतिमा का विशेष महत्व है और यह पंडालों की शोभा बढ़ाती हैं। दुर्गा पूजा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। इस बार यह 7 अक्टूबर से शुरू हो रहा है जबकि मां दुर्गा की विशेष पूजा 11 अक्टूबर से शुरू होकर 15 अक्टूबर दशमी तक चलती रहेगी।

ऐतिहासिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन अत्याचारी राक्षस महिषासुर का संहार करने के लिए भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान महेश ने मां दुर्गा के रूप में एक शक्ति सृजित किया था। महिषासुर को वरदान था कि कोई भी देवता या मनुष्य उसका वध नहीं कर सकता है। ऐसा वरदान पाकर महिषासुर राक्षसों का राजा तो बन ही गया था साथ ही साथ उसे घमंड भी हो गया था और वह लगातार देवताओं पर ही आक्रमण करता रहता था। एक बार देवताओं से युद्ध हुआ और वे हार गए। इसके बाद देवलोक में महिषासुर का राज हो गया। तब सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के साथ-साथ आदिशक्ति की आराधना की थी। इसी दौरान देवताओं के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली। उसने मां दुर्गा का स्वरूप धारण किया। 9 दिन तक चले भीषण युद्ध के बाद मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। महालया को मां दुर्गा के धरती पर आगमन का दिन माना जाता है। मां दुर्गा शक्ति की देवी है।

बंगाल में है खास महत्व

महालया का महत्व बंगाल में कुछ खास ही है। इसे धूमधाम से मनाया जाता है। मां दुर्गा में आस्था रखने वाले लोग इस दिन का लगातार इंतजार करते हैं और महालय के साथ ही दुर्गा पूजा की शुरुआत करते हैं। महालया नवरात्रि और दुर्गा पूजा की शुरुआत का प्रतीक है। कहा जाता है कि महालया के दिन ही सबसे पहले पितरों को विदाई दी जाती है। इसके बाद मां दुर्गा कैलाश पर्वत से सीधे धरती पर आती हैं और यहां 9 दिन तक वास करती है तथा अपनी कृपा के अमृत बरसाती हैं। महालया के दिन मां दुर्गा की आंखों को तैयार किया जाता है। मूर्तिकार इस में रंग भरते हैं। इससे पहले वह मां दुर्गा की विशेष पूजा करते हैं।

 

ऑनलाइन शिक्षा के संशय दूर करने का प्रयास करता है जैन ऑनलाइन का विज्ञापन

कोलकाता : डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी जैन की जैन ऑनलाइन ने आधिकारिक तौर पर अपने नया ब्रांड अभियान जारी किया। यह विज्ञापन ऑनलाइन शिक्षा को लेकर संशयों को दूर करने का प्रयास करता है। दो 60-सेकंड की फिल्मों के नेतृत्व में, विज्ञापनों को 15-30 सेकंड के छोटे और सामयिक संदेशों के साथ विविध प्लेटफार्मों के अनुरूप अनुकूलित किया गया है। जिज्ञासु कार्यालय सहयोगियों और जांच करने वाले पड़ोसियों की विशेषता वाला एकीकृत ओमनी चैनल अभियान, इस बात की पड़ताल करता है कि कैसे प्रभावशाली लोगों का एक समूह एक महत्वाकांक्षी शिक्षार्थी की पसंद को प्रभावित करता है। हाइपर कनेक्ट एशिया द्वारा परिकल्पित ब्रांड फिल्में हास्य व्यंग्य के माध्यम से ब्रांड का मूल संदेश देती हैं। रिलीज होने के बाद से, वीडियो को 10 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है।
डॉ. राज सिंह, कुलपति- जैन (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी) ने इस अभियान पर अपने विचार साझा किए, “हमारा ब्रांड अभियान हमारे विश्वास को रेखांकित करता है कि विकल्पों से भरी दुनिया में, सही सलाह अक्सर किसी के प्रभाव या राय निर्माताओं से आती है। ”
हाइपर कनेक्ट एशिया के सह-संस्थापक और क्रिएटिव लीड, किरण खड़के ने कहा, “महामारी ने उन छात्रों के लिए विकल्पों के एक पूल के दरवाजे खोल दिए हैं, जो ऑनलाइन विश्वसनीय डिग्री प्रोग्राम की तलाश में हैं। इससे एडटेक सेक्टर में तेजी आई है। हमने पहले अभियान के लिए कार्यस्थल में आगे रहने के लिए एक भावुक पेशेवर हमेशा अपने पैर की उंगलियों पर इस विचार को चुना, और दूसरा उस परिदृश्य की पड़ताल करता है जहां एक पड़ोसी की जिज्ञासा कुछ फायदेमंद होती है। फिल्म सापेक्ष जीवन स्थितियों के माध्यम से उनकी चिंताओं का समाधान देने की कोशिश करती है जिससे दर्शक संबंधित हो सकते हैं। ”

2 साल बाद मोहम्मद अली पार्क लौटी यूथ एसोशिएसन की दुर्गा पूजा

कोरोना पर टीकाकरण की जीत को दर्शाएगी थीम
कोलकाता : कोलकाता के प्रख्यात दुर्गोत्सवों में शामिल यूथ एसोशिएशन की दुर्गा पूजा 2 साल बाद एक बार फिर मोहम्मद अली पार्क में आयोजित हो रही है। इस दुर्गोत्सव को पार्क के निकट सेन्ट्रल एवेन्यू फायर स्टेशन में कुछ समय के लिए स्थानान्तरित करना पड़ा था। इस वर्ष पूजा में कोरोना टीकाकरण को थीम बनाया गया है और कोरोना पर टीकाकरण की जीत इस पूजा की थीम होगी। मोहम्मद अली पार्क पूजा के महासचिव सुरेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि 2020 अगर कोविड -19 संक्रमण के लिए था तो 2021 कोविड टीकाकरण का है जो कोविड -19 का एकमात्र उपचार है। थीम महामारी से बचाव पर केन्द्रित होगी मगर लोग बाहर से ही 15 फीट की दूरी से मंडप देख सकेंगे। लोगों के स्वास्थ्य से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। गौरतलब है कि इस पूजा में महिषासुर की जगह कोरोनासुर को दिखाया गया था। पूजा 1969 में ताराचंद दत्त स्ट्रीट में आरम्भ हुई थी। इस वर्ष हुगली जिले पंकज घोष सजावट की जिम्मेदारी सम्भाल रहे हैं। मंडप की ऊँचाई 30 फीट होगी और प्रतिमा नदिया जिले के कुश बेरा बना रहे हैं।

प्रेम, सौहार्द एवं राष्ट्रीयता का काव्य है छायावाद : डॉ. उदय प्रताप सिंह

जालान पुस्तकालय में छायावाद पर विचार गोष्ठी आयोजित

कोलकाता : सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय द्वारा छायावाद की शत वर्ष पूर्ति पर एक राष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन रविवार को किया गया। पुस्तकालय सभागार में आयोजित इस विचार गोष्ठी का विषय था ‘शताब्दी के आलोक में छायावाद ‘ । इस विषय पर विचार रखते हुए प्रमुख वक्ता हिन्दुस्तानी अकादमी, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि छायावाद को नकारने की पूरी कोशिश की गयी। यह उपेक्षा आज भी बनी हुई है। छायावाद पर लगे पलायन के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि वह पलायन नहीं बल्कि शांति की तलाश है। शांति, सौहार्द, समरसता और प्रेम के बगैर किसी देश का विकास नहीं हो सकता। छायावादी कवि अपनी कविताओं में राष्ट्रीय चेतना को अभिव्यक्त करते हुए आशा का संचार करते हैं।
श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय के अध्यक्ष डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि छायावादी कवियों ने मानवता को विजयी बनाने का सूत्र दिया। उन्होंने छायावाद को शक्ति एवं जागरण का काव्य बताया।
ऋषि बंकिम चंद्र कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषिकेश कुमार सिंह ने कहा कि छायावाद का नवजागरण से गहरा सम्बन्ध है। भारतेन्दु की कविताओं में राष्ट्रीयता की भावना ही छायावाद में जाकर प्रबल हो उठती है। स्वयं को जानना ही परम्परा है और मौलिकता ही भारतीयता है। छायावाद में यही मौलिकता और राष्ट्रीय चेतना दिखती है।
विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के हिन्दी विभाग के आचार्य प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने कहा कि स्वाधीनता आन्दोलन में साहित्यकारों की भूमिका प्रशंसनीय है।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी को विचार के केन्द्र में लाने वाले भारतेन्दु ही थे। दुःखद तथ्य है कि साहित्यकारों के अवदान की चर्चा राजनेता नहीं करते। वे साहित्यकारों की उपेक्षा करते हैं। चर्चा इस पर होनी चाहिए क्योंकि राजनेता साहित्यकारों के जीवन से प्रेरणा पाते हैं। सभी छायावादी कवि सिर्फ कवि नहीं थे बल्कि आलोचक भी थे। स्वागत भाषण सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय की मंत्री दुर्गा व्यास ने दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रख्यात गायक एवं वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश मिश्र द्वारा सरस्वती वन्दना की प्रस्तुति से हुआ। संगोष्ठी का संचालन बानरहाट कार्तिक उरांव हिन्दी गवर्नमेंट कॉलेज, जलपाईगुड़ी के सहायक प्रवक्ता डॉ. अभिजीत सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के अध्यक्ष भरत कुमार जालान ने किया। समारोह को सफल बनाने में पुस्तकाध्यक्ष श्रीमोहन तिवारी, विजय तिवारी, दिव्या प्रसाद समेत अन्य कई लोगों का योगदान रहा। विचार गोष्ठी का प्रसारण आभासी पटल जूम पर भी हुआ। समारोह में कोरोना सम्बन्धी नियमों का पालन किया गया और कई गण्यमान्य अतिथि भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

साहित्य,सिनेमा और संस्कृति पर वेब संगोष्ठी का आयोजन

कोलकाता : कोलकाता के सुप्रतिष्ठित कॉलेज खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के हिंदी विभाग तथा आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदी साहित्य एवं सिनेमा का अंतर्द्वंद्व’ विषय पर एक राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुबीर कुमार दत्त के स्वागत भाषण से हुआ। अतिथि एवं श्रोताओं का स्वागत करते हुए उन्होंने  साहित्य और सिनेमा के संबंध को उजागर किया । हिंदी विभाग और आईक्यूएसी के संयुक्त तत्त्वावधान में हुए इस कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि साहित्य और सिनेमा का सम्बंध काफी गहरा है। साहित्य के माध्यम से सिनेमा जीवन को नई दिशा देने का काम करता है। दिल्ली से जुड़े वरिष्ठ लेखक प्रो.जवरीमल्ल पारख ने बीज वक्तव्य दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने हिंदी सिनेमा के इतिहास पर चर्चा करते हुए  साहित्य और सिनेमा के शिल्पगत भेद की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि साहित्य और सिनेमा दोनों हमारी चेतना को उद्वेलित करते हैं, एक शब्दों के माध्यम से और एक दृश्यों के माध्यम से।उन्होंने साहित्यिक कृतियों में उपस्थित मूल्यों को सिनेमा के द्वारा व्यापक स्तर तक पहुँचाने की बात पर भी  बल दिया। प्रख्यात कवि एवं गीतकार देवमणि पांडेय ने सिनेमा में प्रयुक्त गीतों एवं गीतकारों की विडम्बनापूर्ण चिंताओं की ओर दर्शकों का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने साहित्यिक कृतियों और साहित्यिक कृतियों पर बनी फिल्मों को मूल्यपरक मानते हुए कहा कि हिंदी सिनेमा में संगीतबद्ध फिल्मों की एक लंबी परम्परा रही है। साथ ही साथ उन्होंने धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और साम्प्रदायिकता जैसे साहित्यिक विषयों पर आधारित फिल्मों की चर्चा की। कल्याणी विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं युवा आलोचक डॉ. हिमांशु ने कहा साहित्य और संस्कृति को सिनेमा और अन्य कला माध्यमों से जोड़ने की जरूरत है। सिनेमा में साहित्य की तरह सामंती और पूंजीवादी व्यवस्था के  बरक्स प्रतिरोध की क्षमता है। प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक श्री प्रहलाद अग्रवाल भारतीय ज्ञान परम्परा को नाटक के साथ-साथ सिनेमा में भी देखने की बात करते हैं। वे सिनेमा को कला के साथ व्यावसायिकता से जोड़ने की बात करते हैं। वे पार्श्व संगीत को सिनेमा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए कहा कि सिनेमा और साहित्य एक दूसरे के पूरक हैं। सिनेमा  समाज और संस्कृति को कई स्तरों पर प्रभावित करता है और उनसे प्रेरणा भी लेता है। इस अवसर पर देश-विदेश से भारी संख्या में साहित्य-संस्कृति और सिनेमा प्रेमी जुड़े थें। अतिथि परिचय एवं तकनीकी सहयोग विभाग की शिक्षिका प्रो. मधु सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राहुल गौड़ ने दिया।

गाँधी ने सिर्फ भारत नहीं विश्व मानवता को सहिष्णुता का पाठ दिया

भारतीय भाषा परिषद द्वारा गाँधी जयंती पर आयोजन

कोलकाता : गांधी ने स्वाधीनता आंदोलन के दौरान आध्यात्मिक प्रश्नों के साथ स्वराज और स्वतंत्रता के प्रश्न उठाए थे। गांधी के जीवन और विचारों से सिर्फ भारत नहीं सम्पूर्ण मानव जाति के उत्थान की भावना मजबूत होती है। गांधी जयंती के अवसर पर भारतीय भाषा परिषद में आयोजित वेब संगोष्ठी में ये विचार व्यक्त किए गए। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान युग में गांधी के विचारों की बड़ी जरूरत है। गांधी का विश्व भर में इधर पहले से ज्यादा आदर बढ़ा है। देश में भी उनके प्रति आदर का कोई अर्थ तभी है जब उनके विचारों के प्रति आदर बढ़ेगा। दिल्ली के विकासशील अध्ययन पीठ के प्रो. निशिकांत कोलगे ने कहा कि गांधी वेदांत और टालस्टाय से प्रभावित थे। उन्होंने अपने युग धर्म पर चिंतन करते हुए पाया कि राजनीति को मूल्यों से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने धर्म को सम्प्रदाय के रूप में नहीं मूल्यों के रूप में पहचानना उनके विचारों का बीज रूप ‘हिन्द स्वराज’ (1909) में है। वे चाहते थे कि भारत के लोग समानता, एकता और सद्भावना के आधार पर स्वराज की समझ बनाएं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर और चिंतक अपूर्वानंद ने गांधी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गांधी का केंद्रीय प्रश्न यह था कि वैष्णव जन कौन है, उसके गुण क्या हो सकते हैं। उन्होंने बतलाया कि राजनीति का अर्थ पंक्ति में खड़े अंतिम मनुष्य के हित में सोचना है। उन्होंने सावधान किया कि बहुसंख्यकता को बहुमत का पर्याय नहीं मानना चाहिए। मुक्ति सभी को साथ लेकर ही सम्भव है। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ आलोचक और भारतीय भाषा परिषद के निदेशक शम्भुनाथ ने कहा कि यह वस्तुतः गांधी-विरोधी समय है। गांधी का व्यक्तित्व एक महान भारत का सामंजस्य है। उन्होंने गोखले और तिलक के बीच सामंजस्य स्थापित किया। कबीर से ‘चरखा’ लिया तो तुलसी से ‘रामराज्य’ लिया। गांधी ने भारत को एक उदार और मानवीय राष्ट्र दिया है। उन्होंने ईमानदारी, सहिष्णुता और सामंजस्य को बड़े मूल्य के रूप में स्थापित किया। हमारा कर्तव्य है कि हम अपने उदारवादी और मानवतावादी देश के बुनियादी स्वभाव की रक्षा करें। विद्वेष, घृणा और हिंसा से बचें। सभा का संचालन करते हुए प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि गांधी जी ने सिर्फ अपने समय को ही नहीं बाद में आनेवाली पीढ़ियों को दिशा देने का काम किया है। गांधी धार्मिक कट्टरवाद और आतंकवाद के युग में फिर से प्रासंगिक हो उठे हैं। परिषद के मंत्री डॉ. केयुर मजूमदार ने गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के साहित्य संवाद में काव्य पाठ

कोलकाता :  सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से साहित्य संवाद श्रृंखला के अंतर्गत काव्यपाठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से कवियों ने हिस्सा लिया। स्वागत वक्तव्य देते हुए प्रो.संजय जायसवाल ने कहा साहित्य संवाद का यह मंच दो पीढ़ियों के बीच सृजन और संवाद की एक सहयात्रा है। हमें रचनाधर्मिता को सह्दयता और प्रतिरोध का हिस्सा बनाने की जरूरत। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक डॉ शंभुनाथ ने कहा कविता मानव जीवन की थाती है। कविता में सैकडों वर्षों की असंख्य आवाजें दर्ज हैं। हमें कविता को सिर्फ पढ़ना और लिखना नहीं बल्कि इसे सामाजिक एक्टिविज्म से जोड़ने की जरूरत है। इस अवसर पर देश के कोने-कोने से कवियों ने भाग लिया। चर्चित कवि बसंत त्रिपाठी ने अपनी कविताओं में मन की अंतर्दशा को प्रकृति के विभिन्न छटाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया। वरिष्ठ आलोचक अजय तिवारी ने अपनी कविताओं में गांव की मिट्टी की महक का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया। सेराज खान बातिश ने ग़ज़ल के माध्यम से व्यवस्था पर करारा प्रहार किया। मंजु श्रीवास्तव ने अपनी कविता में भविष्य को बचाने की बात कही। ज्योति चावला की कविताओं में स्त्री जीवन के कई रंग व्यक्त हुए। उन्होंने यौन-उत्पीड़न जैसी घटनाओं पर मार्मिक कविताओं का पाठ किया। दीपक कुमार ने व्यवस्था के भीतर की खामियों को उजागर किया। नीतू सिंह भदौरिया ने प्रकृति और प्रेम की कविताओं का पाठ किया।प्रदीप ठाकुर की कविताओं में वर्तमान समय की विडंबनाओं की कई छवियाँ दिखीं। शिवप्रकाश दास ने चटकल मजदूरों की पीडा़ओं को बड़ी आत्मीयता के साथ व्यक्त किया। मुकेश मंडल की कविताओं में आदमियत और हाशिये के लोगों को बचाने गहरी बेचैनी दिखी। रूपल साव ने अपनी कविताओं में काबुल की स्त्रियों के जीवन को सार्वभौम संवेदना से जोड़ा। जीवन और राजेश सिंह ने अपनी कविताओं में वर्तमान समय के सच को उकेरा।का पाठ किया। इस अवसर पर रामनिवास द्विवेदी, शुभ्रा उपाध्याय, उमरचंद जायसवाल, राजेश मिश्रा, अवधेश प्रसाद सिंह, अनिता राय, श्रीकांत द्विवेदी सहित भारी संख्या में साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मधु सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मृत्युंजय श्रीवास्तव ने दिया। कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालन हेतु तकनीकी सहयोग उत्तम ठाकुर, राहुल गौंड़ और सूर्यदेव राय ने दिया।