Sunday, July 5, 2026
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सशक्तीकरण की संस्कृति का प्रतीक है रवीन्द्र सरणी का श्री श्री महालक्ष्मी मंदिर

उत्तर कोलकाता के बड़ाबाजार में बहुत से मंदिर हैं और बहुत से मंदिर ऐतिहासिक भी हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक मंदिर है श्री श्री महालक्ष्मी मंदिर। श्री श्री महालक्ष्मी मंदिर 100 साल पुराना है। उत्तर कोलकाता में रवीन्द्र सरणी पर स्थित यह मंदिर काफी लोकप्रिय है। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह मंदिर कभी शिव मंदिर ही था। इस मंदिर को सशक्तीकरण का प्रतीक कहा जाये तो यह गलत नहीं होगा। यह मंदिर न सिर्फ सिर्फ देवी महालक्ष्मी के स्वरूप को समर्पित है बल्कि इस मंदिर की सेवायत भी एक महिला ही हैं। कोलकाता में यह एकमात्र मंदिर है जहाँ माँ महालक्ष्मी नारायण के साथ नहीं हैं। इस मंदिर में महालक्ष्मी के साथ गणेश जी की प्रतिमा आपको दिखेगी।


मंदिर की स्थापना के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। मंदिर की स्थापना चुन्नी लाल त्रिवेदी ने की थी। दरअसल, पास ही स्थित लोहिया अस्पताल के मालिकों ने उनसे शिव मंदिर की स्थापना करने को कहा था और चुन्नी लाल त्रिवेदी के परिवार की कुलदेवी महालक्ष्मी हैं तो उन्होंने शिव मंदिर तो स्थापित किया ही, इसके साथ ही अनुमति लेकर महालक्ष्मी मंदिर भी स्थापित किया। इस मंदिर में महालक्ष्मी की 10 विद्याओं में कमला स्वरूप में देवी की पूजा होती है। यहाँ देवी की विशेष साधना होती है और मान्यता है कि यहाँ मनोकामना पूरी होती है। करोड़ों व्यवसायियों ने माँ महालक्ष्मी की पूजा कर सफलता प्राप्त की। यह महानगर में अकेला महालक्ष्मी मंदिर है। लक्ष्मी जन्मोत्सव इस मंदिर का प्रमुख त्योहार है जो राधा अष्टमी को मनाया जाता है। इसके बाद दीपावली का त्योहार उत्साह से मनाया जाता है और दूर – दूर से दर्शनार्थी आते हैं। मंदिर में चारों वेदों का पाठ होता है। उत्सवों के दौरान मंदिर में पुलिस व्यवस्था सख्त होती है।

इस मंदिर की सेवायत एक महिला हैं। प्रो. ममता त्रिवेदी इस समय यह बड़ा दायित्व सम्भाल रही हैं। 2013 से ही यह जिम्मेदारी वे सम्भाल रही हैं। प्रो. त्रिवेदी कहती हैं कि उनको अपने परिवार का पूरा सहयोग मिल रहा है औऱ सारा परिवार ही मंदिर का कार्य़ करता है। मंदिर में महालक्ष्मी की प्रतिमा दक्षिण भारत से है और श्री गणेश जी की प्रतिमा जयपुर से आई है। इस मंदिर में देवी का चेहरा बहुत सुन्दर और सौम्य है।

पास ही हनुमान जी की प्रतिमा और शिवलिंग है। यही शिवलिंग सबसे पहले स्थापित किया गया था। कोरोना काल को देखते हुए दर्शन के नियमों में बदलाव किया गया है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी दर्शन की व्यवस्था की जा रही है।
प्रो. त्रिवेदी मंदिर का विस्तार करना चाहती हैं। युवा पीढ़ी को परम्परा से अवगत करवाना चाहती हैं। संस्कृति और आध्यात्मिक अध्ययन की परम्परा से जोड़ना चाहती हैं। छात्रवृत्ति दादा जी के नाम पर शुरू करना चाहती हैं और मंदिर को भी थोड़ा और बड़ा करना चाहती हैं। निश्चित रूप से यह मंदिर परम्परा और परिवर्तन का शानदार संयोजन है।

 

मराठी कथाकार गुरुनाथ नाईक का निधन

पुणे : कई रहस्यपूर्ण उपन्यासों सहित 1,200 से अधिक पुस्तकें लिखने वाले प्रसिद्ध मराठी कथाकार गुरुनाथ नाईक का लंबी बीमारी के बाद महाराष्ट्र में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। नाईक के पारिवारिक सूत्रों ने गुरुवार को उनके निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मूल रूप से गोवा के रहने वाले नाईक का निधन बुधवार शाम को पुणे के अस्पताल में हुआ।
सोलह साल पहले मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित होने के बाद से वह लिखने में अक्षम थे। उनका उपचार चल रहा था। नाईक ने 1970 से 1982 के बीच 700 से अधिक रहस्यपूर्ण उपन्यास लिखे और अपनी किताबों में कई काल्पनिक रहस्यमयी चरित्र गढ़े।
‘जहरी पे’, ‘कैबरे डांसर’, ‘महामानव’, ‘रक्तचा पौस’ उनकी कुछ लोकप्रिय पुस्तकों में शामिल हैं। उन्होंने अपनी कहानियां आकाशवाणी पर भी सुनाईं। नाईक ने लातूर में एक मराठी समाचार पत्र के संपादक के तौर पर भी सेवाएं दीं।
(साभार – दैनिक भास्कर)

प्रख्यात वायलिन वादक प्रभाकर जोग का निधन

पुणे : प्रख्यात वायलिन वादक प्रभाकर जोग का गत रविवार को यहां अपने आवास पर अधिक आयु संबंधी दिक्कतों के कारण निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। उनके परिवार के करीबी सूत्रों ने यह जानकारी दी।।
उन्होंने भारत और दुबई में ‘गनारे वायलिन’ शो के तहत 80 से अधिक एकल प्रस्तुति दी थी। छह दशकों से अधिक समय तक संगीतज्ञ और संगीतकार के रूप में काम करने वाले जोग ने मराठी और हिंदी फिल्म संगीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि संगीत क्षेत्र ने एक सच्चा साधक खो दिया है। बारह वर्ष की आयु में, जोग ने संगीत कार्यक्रमों में वायलिन बजाना शुरू कर दिया था क्योंकि पिता की अप्रत्याशित मृत्यु के बाद उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।
उन्होंने बाद में संगीतकार सुधीर फड़के (जो बाबूजी के नाम से लोकप्रिय थे) के सहायक के रूप में काम किया। ‘गीत रामायण’ सीरीज के गीतों में जोग की वायलिन धुनें हैं। उन्होंने फड़के के साथ ‘गीत रामायण’ के करीब 500 शो किए। फिल्मों में, उन्हें मराठी फिल्म ‘श्री गुरुदेवदत्त’ में वायलिन वादक के रूप में पहला काम मिला। उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए थे जिनमें 2015 में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ के लिए प्रतिष्ठित गान सम्राज्ञी लता मंगेशकर पुरस्कार भी शामिल है।
मंगेशकर (92) ने ट्विटर पर जोग को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मुझे यह सुनकर दुख हुआ कि महान वायलिन वादक और संगीतकार प्रभाकर जोग का आज निधन हो गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।’ जोग की आत्मकथा ‘स्वर आले जुलुनी’ में उनके जीवन और उनकी संगीत यात्रा का विवरण है।

नोटबंदी, डिजिटल भुगतान की सुविधा के बीच जारी है ‘नकदी मैजिक’

कोलकाता : नोटबंदी के सालों बाद भी नकदी का जादू जारी है। अब भी यह भुगतान का सर्वप्रिय तरीका बना हुआ है।अब तो इसका इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। 8 अक्टूबर को खत्म पखवाड़े (14 दिन की अवधि) में लोगों के पास नकदी बढ़कर 28.30 लाख करोड़ रुपये हो गयी। यह नोटबंदी से पहले 4 नवंबर 2016 को 17.97 लाख करोड़ रुपये था यानी करीब पांच साल में लोगों के पास नकदी 57.48% बढ़ी है। गत 8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने 500 और 1,000 रुपए के नोटों को बंद कर दिया था। बाद में 500 और 2000 रुपये के नए नोट जारी किए गए। नोटबंदी के बाद से सरकार लगातार सिस्टम से कैश घटाने के लिए डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहित कर रही है। यूपीआई जैसे भुगतान के साधनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, नकदी का इस्तेमाल फिर भी कम होता नहीं दिख रहा।

लॉकडाउन में लोगों के पास बढ़ी नकदी
सिस्टम में कैश के बढ़ने का एक कारण कोरोना महामारी को माना जा रहा है। 2020 में जब कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन लगाया गया था तो अपनी रोजाना की जरूरतों का सामान खरीदने के लिए लोगों ने नकदी को जमा करना शुरू कर दिया था।

त्योहारी सीजन में माँग बढ़ी  
त्योहारी सीजन के दौरान, नकदी की माँग ज्यादा रहती है क्योंकि बड़ी संख्या में व्यापारी अभी भी एंड-टू-एंड ट्रांजैक्शन के लिए नकद भुगतान पर निर्भर हैं। लगभग 15 करोड़ लोगों के पास बैंक अकाउंट नहीं होना भी इसकी एक वजह है। इसके अलावा, टीयर 1 सिटी के 50% की तुलना में टियर 4 सिटी में 90% ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन का पेमेंट मोड नकदी होती है।

नकदी का गणित
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया  के अनुसार, ‘जनता के पास कैश का कैल्कुलेशन बैंकों के पास मौजूद कैश को सुर्कुलेशन इन करेंसी से घटाकर किया जाता है। सीआईसी का मतलब देश के भीतर मौजूद वो नकदी  या करेंसी है जिसका उपयोग  उपभोक्ता और व्यवसायी के बीच लेनदेन के लिए किया जाता है।

सीएम मैटीरियल थे ममता के मेंटर सुब्रत मुखर्जी


लोकनाथ तिवारी

बंगाल के सीएम मैटीरियल सुब्रत मुखर्जी एक ऐसे राजनेता थे जिनमें दक्ष प्रशासक के गुण थे। कोलकाता के मेयर के रूप में उन्होंने 2000 से 2005 तक इसका प्रमाण भी दिय़ा था। स्वर्गीय इंदिरा गांधी उनको रॉयल बंगाल टाइगर कहती थी। ज्योति बाबू से उनके बेहद मधुर संबंध थे। जिस कोलकाता नगर निगम के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा था, उसे न केवल लाभजनक निगम बना दिया बल्कि पेयजल, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, एरियावाइज टैक्स सिस्टम जैसी कई जन कल्याणकारी परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया। उस दौरान मैं सन्मार्ग में रिपोर्टर था। लगभग रोज सायंकाल में हम सभी मेयर के कार्यालय में उनके साथ होते थे। राज्य, देश, दुनिया के विभिन्न विषयों पर चर्चा होती थी। इंदिरा गांधी, ज्योति बसु, प्रियरंजन दासमुंशी का जिक्र होने पर उनका चेहरा खिल उठता था। कई स्मृतियां हैं। इमरजेंसी की, छात्र राजनीति की, ज्योति बाबू के जमाने की, क्या-क्या लिखें, क्या छोड़ें….
बहुत कम लोग जानते होंगे कि समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता रहे स्वर्गीय अमर सिंह की बुनियाद बनाने में सुब्रत मुखर्जी का अहम योगदान था। सुब्रत मुखर्जी ने जब 1982 के विधानसभा चुनाव में कोलकाता के बड़ाबाजार इलाके में स्थित जोड़बागान सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा तो उनके प्रचार में हिंदी प्रदेशों से कई दिग्गज नेता प्रचार करने आये। चूंकि जोड़ाबागान हिंदीभाषी बहुल क्षेत्र है, इसलिए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह भी आये। सुब्रत मुखर्जी ने बातों ही बातों में एक बार बताया था कि उस समय अमर सिंह उनके एक सहयोगी के सहयोगी थे (सुब्रत मुखर्जी के शब्दों में चमचे का चमचा)। वीर बहादुर सिंह को एयरपोर्ट से लाने की जिम्मेदारी किसे दी जाये, तब अमर सिंह का नाम सुझाया गया क्योंकि वह सुंदर, व्यवहार कुशल व हिंदी भाषी युवक थे। अमर सिंह उसी समय वीर बहादुर सिंह के करीब आये और उसके बाद उत्तर प्रदेश होते हुए केंद्र की राजनीति में कहां तक पहुंचे यह इतिहास है।
सुब्रत मुखर्जी को राज्य की वर्तमान सीएम ममता बनर्जी का भी मेंटर माना जाता है। तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रहे सुब्रत मुखर्जी को इतिहास में एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर याद किया जाएगा, जिन्होंने बंगाल की राजनीति में 50 से भी अधिक वर्षों तक काम कर अपनी विशेष पहचान बनाई। सुब्रत मुखर्जी की 75 वर्ष की उम्र में दीपावली की रात गुरुवार को कोलकाता के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में 1946 में जन्में मुखर्जी अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। बंगाल की राजनीति उन्होंने 1960 के दशक में एक छात्र नेता के रूप में शुरू किया। मुखर्जी ने 1967 में बंगबासी कॉलेज के छात्र नेता के रूप में उस समय राजनीति में प्रवेश किया, जब पश्चिम बंगाल में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी। मुखर्जी ने अपनी संगठनात्मक क्षमता, वाकपटुता तथा भाषण देने के शानदार कौशल के जरिए राजनीति में तेजी से प्रगति की और जल्द ही कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बन गए।
कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रियरंजन दास मुंशी ने मुखर्जी की संगठनात्मक क्षमता को पहचाना और उसी तरह उन्हें निखरने का मौका दिया। दोनों नेताओं ने पश्चिम बंगाल में नक्सलियों और वामपंथियों के खिलाफ राजनीतिक तथा वैचारिक लड़ाई लड़ी और कांग्रेस की जड़ें मजबूत करने का काम किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी सुब्रत मुखर्जी की वाकपटुता और संगठनात्मक क्षमता से प्रभावित होकर उनकी प्रशंसा करते हुए उनको रॉयल बंगाल टाइगर कहा था। मुखर्जी ने 1971 में चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और 25 साल की उम्र में बालीगंज विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पश्चिम बंगाल में सबसे कम उम्र का विधायक बनने का गौरव हासिल किया।
मुखर्जी 1972 में बंगाल में कांग्रेस के भारी जनादेश के साथ सत्ता में लौटने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रॉय की कैबिनेट में सबसे कम उम्र के मंत्री बने। उन्हें सूचना और संस्कृति राज्य मंत्री बनाया गया था। वर्ष 1977 में चुनाव हारने के बावजूद कांग्रेस पार्टी में मुखर्जी की प्रतिष्ठा कम नहीं हुई और वह तेजी से आगे बढ़ते रहे। मुखर्जी ने 1982 के विधानसभा चुनाव में जोड़बागान सीट से जीत हासिल कर वापसी की।
सुब्रत मुखर्जी हरफनमौला व्यक्ति थे। 1980 के दशक में मुनमुन सेन के साथ एक टेलीविजन धारावाहिक में अभिनय भी किया। उन्होंने चौधरी फर्मास्यूटिकल नामक एक धारावाहिक में हीरो की भूमिका की थी। उनमें ग्लैमरस अभिनेत्री मुनमुन सेन के साथ स्विमिंग पुल का दृश्य बहुत चर्चित हुआ था। उस धारावाहिक के निर्माता थे अग्निदेव चटर्जी। धारावाहिक के 14 एपिसोड ही प्रचारित हो सके। सुब्रत मुखर्जी के स्विमिंग पुल वाले सीन के बाद ऐसी परिणति तो होनी ही थी।

जमशेदपुर प्रेस क्लब के नये कार्यालय का उद्घाटन

जमशेदपुर : जुबिली पार्क गेट नम्बर-2 साकची के सामने स्थित नये प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर के कार्यालय का उद्घाटन शुक्रवार को झारखंड  के स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री बन्ना गुप्ता व वरीष्ट पत्रकार सिद्धीनाथ दुबे ने संयुक्त रूप से किया।  इस मौके पर क्लब के अध्यक्ष पुतुल सिंह उर्फ प्रशांत सिंह, महासचिव अंजनी पांडेय समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। उद्घाटन के बाद अपने सम्बोधन में मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारों को लेकर संवेदनशील है। इस भवन में पत्रकार अपने फुरसत के क्षण बिता सकेंगे। पत्रकार जनता की अभिव्यक्ति है और उनकी सुविधा का ध्यान रखना जनप्रतिनिधि का दायित्व है।

कोरोना काल में पत्रकारों ने अपने कर्तव्य का निर्वाह कुशलता के साथ किया है और अपनी जान भी जोखिम में डाली है। उम्मीद है कि पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य सुविधा के क्षेत्र में बड़ी घोषणा कर सकती है।  मंत्री ने भविष्य में हरसम्भव सहयोग का आश्वासन दिया। वरिष्ट पत्रकार सिद्धीनाथ दुबे एवं क्लब के अध्यक्ष प्रशांत सिंह पुतुल ने भी मंत्री के सहयोगी रवैये की सराहना की। गौरतलब है कि इस नये भवन का निर्माण मंत्री बन्ना गुप्ता की पहल पर करवाया गया है।

 

रोशनी के त्योहार में कुछ मीठा हो जाए

कलाकन्दसामग्री – पनीर-250 ग्राम, खोया-250 ग्राम, क्रीम- ½ कप, दूध-1/2 कप, चीनी-1 1/2 कप, इलाइची पाउडर- 1 छोटा चम्मच, पिस्ता-बादाम बारीक करटे हुए- 2 बड़ा चम्मच, 1 ½ बड़ा चम्मच घी

विधि – सबसे  पहले इस मिठाई को बनाने के लिए पनीर और मावा को आप कद्दूकस की मदद से अच्छी तरह से मसल  लें और फिर मिला लें। इसके बाद इस पूरे मिश्रण में आप दूध और क्रीम को अच्छी तरह से मिलाएं। फिर कढ़ाई में घी गर्म कर लें, जिसमें तैयार किया हुआ मिश्रण डाल दें। मध्यम आंच पर इसे अच्छी तरह से भून लें। जब ये सारी सामग्री अच्छी तरह से मिल जाए तो इसमें आप चीनी मिलाएंगी और थोड़ा सा पानी डालेंगी जब चीनी पूरी तरह से घुल जाए और मिश्रण सूख जाए तो इसमें इलायची पाउडर मिलाएं। जब इस पके हुए  मिश्रण को एक बड़ी थाली में डालें तो पहले आपको उसमें चारो तरफ घी लगा लें। इसके बाद इसे चौकोर आकार में काटना चाहिए फिर बार में सूखे मेवे  से सजा दें। फिर बाद में इसको फ्रिज में स्टोर कर लेना चाहिए, आप इस मिठाई को 3-4 दिन तक खास सकती हैं।

दिल बहार बर्फी 

सामग्री – नारियल का बुरादा- 2 कप, कंडेस्ड मिल्क – 1 कप, केवड़ा जल- 4 बूंद, रूह आफजा- 1 चम्मच, रेड फूड कलर – 1 बूंद, पिस्ता- 2 चम्मच

विधि – दिल बहार बर्फी बनाने के लिए आपको  सबसे पहले एक बर्तन में नारियल का बुरादा  निकालना होगा, लेकिन 3 चम्मच नारियल का बुरादा बचाकर अलग रख लें। फिर  बर्तन में कंडेंस्ड, केवडा वाटर, छोटी इलायची पाउडर डाल दें. इसके बाद फिर इन सब चीजों को अच्छी तरह से मिक्स कर लें, जब तक मिश्रण तैयार न हो जाए। इसके बाद बचा हुआ नारियल का बुरादा लेकर उसमें 3 चम्मच कंडेस्ड मिल्क मिला लें। अब नारियल को दो हिस्सों में बांट लें,  एक भाग पर रुह आफजा डालें, इसके बाद अब एक ट्रे या प्लेट लें और उसमें तेल लगाकर बचा हुआ बुरादा छिड़क दें। अब इसमें पहले सफेद बर्फी वाला हिस्सा डालें इसके बाद सफेद वाले मिश्रण के ऊपर गुलाबी वाले बुरादे को डालकर अच्छे से दबा करके सेट कर लें. इसके ऊपर सूखे मेवे से सजावट  करके 15 से 20 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें। अब ये मिठाई अब सभी को परोसें।

दीपावली मनाइए स्वदेशी अन्दाज में

दीपावली हम सब मना रहे हैं तो घर सजाने के लिए और उसे बेहतरीन बनाने के लिए आस – पास नजर डालने की जरूरत है। ऐसे स्वदेशी हस्तनिर्मित उत्पाद आपको बाजार में दिखेंगे जिनको देखकर आपका काम ही आसान नहीं होगा बल्कि आपका मन खिल भी उठेगा। महानगर के राम मंदिर बाजार से कुछ ऐसे ही उत्पाद हमें दिखे जो हम आपसे साझा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे –

रंगोली बनाने का समय न हो तो यह स्टिकर रंगोली एक बढिया विकल्प है

 

गेंदे के फूल नहीं मिल रहे तो प्लास्टिक से बने यह हार आपकी समस्या को सुलझा देंगे और इनको साफ करना भी आसान है

 

दीयों का यह गिफ्ट पैक आप उपहार में भी दे सकते हैं और घर भी सजा सकते हैं

 

परिवार की कल्पना को साकार करता यह दीया हमें भा गया

 

घर को देसी लुक देने में यह कन्दील दीया आपकी मदद करेगा

 

इसे दरवाजे पर लगाइए या आलमारी में, यह हर जगह सुन्दर लगेंगे

कोरोना के भय के बीच बेहतर कल की उम्मीद से गुलजार हैं बाजार

धनतेरस और दिवाली का बाजार गुलजार है। मंदी की शिकायत करते हुए व्यवसायियों से भी जब आप पिछले साल की बात करते हैं तो वे भी कह उठते हैं कि ‘बाजार तो पहले से ठीक है, देखिए उम्मीद है कि बिक्री बढ़ेगा।’ इसी उम्मीद के सहारे कोरोना की त्रासदी झेल ली गयी मगर यह भी याद रखना है कि महामारी को रोकने के लिए सावधानी जरूरी है। लोकल ट्रेन जब चली तो नियमों की धज्जियाँ उड़ते हम सब देख रहे हैं मगर भय तो है, और लोग सजग हो भी रहे हैं। यही कारण है कि हर दूरी दुकान के सामने ‘नो मास्क, नो इंट्री’ यानी मास्क के बगैर प्रवेश नहीं का बोर्ड आपको दिख ही जाता है लेकिन इस सावधानी के बीच कुछ लापरवाह लोग भी आपको दिख जाते हैं। बहरहाल धनतेरस और दिवाली के बाजार की पड़ताल करने जब हम निकले, तो बाजारों की गहमागहमी और भीड़…देखकर तो यही लग रहा था कि पुराना समय लौट आया…अजीब सी मनस्थिति थी…एक तरफ तो सामान्य सी परिस्थितियों को देखकर अन्दर से प्रसन्नता थी तो दूसरी तरफ खीज भी कि इतना सब कुछ होने के बाद भी लोगों को अपनी और दूसरों की चिन्ता नहीं है, कि वे मास्क के बगैर ही घूम रहे हैं।
सबसे पहले हम निकले टी बोर्ड के पास ब्रेबर्न रोड…के फुटपाथ पर जहाँ मोहम्मद अशफाक से हमारी मुलाकात हुई। इनकी दुकान पर मुख्य रूप से अल्यूमिनियम, स्टेनलेस स्टील के हर तरह के बर्तन हमें दिखे। इनमें बाजार के बेहतर होने की उम्मीद और बारिश का डर दोनों दिखा। थोड़ी दूर आगे जाने पर हमें मिले राजेश शाह। राजेश एक विद्यार्थी हैं जो अपना पारिवारिक व्यवसाय भी सम्भाल रहे हैं। युवाओं को देखना एक सन्तोष का भाव भर गया क्योंकि एक तरफ जहाँ डिग्री की होड़ में पारिवारिक काम से युवाओं के नाता तोड़ने का चलन आम बन गया है, वहीं उमेश चन्द्र कॉलेज के विद्यार्थी राजेश कॉलेज भी जाते हैं और काम भी सम्भाल रहे हैं। उनकी दुकान पर स्टेनलेस स्टील और लकड़ी के बर्तन दिखे।

इसके बाद राम मंदिर बाजार के दिवाली बाजार की तरफ जब निकलना हुआ तो गुप्ता स्टोर के शानदार दिवाली कलेक्शन पर हमारी नजर पड़ी जहाँ एक ही छत के नीचे सब कुछ दिखा। आलमारी सजाने के कागज से लेकर दीया, बन्दनवार, सब कुछ…और अलग -अलग डिजाइनों की बहुत अच्छी वैरायटी के साथ…25 रुपये से दीयों के गिफ्ट पैक की कीमत शुरू…यानी आप वाजिब कीमतों पर एक बढ़िया उपहार खरीद सकते हैं। बाजार में डिजाइनर दीयों की माँग बढ़ती ही जा रही है। एक दीया ऐसा था जिसकी परिकल्पना भा गयी। इस दीये में एक परिवार था और बीच में दीया था। इस बाजार में हर एक बजट के लिए कुछ न कुछ है और अगर आप भूखे हैं तो भी खाने के लिए बहुत कुछ है…चाट…फुचका….खैर …इस विषय पर फिर कभी विस्तार से बात करेंगे। यह दुकान 40 साल पुरानी है तो राम मंदिर की पुरानी दुकानों में एक नाम आता है गोपाल स्टोर का…। यह दुकान विद्यार्थियों और कला एवं हस्तशिल्प में रुचि रखने वालों की जरूरत हैं क्योंकि इसके लिए हर तरह की जरूरी चीजें मिलती हैं यानी जरी से लेकर मोती तक…हर तरह के रंगों से लेकर खूबसूरती बढ़ाने वाले प्रसाधनों तक। गोपाल स्टोर के संचालक प्रकाश गिनौड़िया ने पोस्टर रंगों से लेकर 10 रुपये के रंगीला कलर्स दिखाए…कोरोना से नुकसान हुआ है मगर उम्मीद सबकी कायम है।

जब बात पीतल के बर्तनों की हो रवीन्द्र सरणी स्थिल नूतन बाजार का इलाका हो आइए…कतार से पीतल के बर्तन दिखेंगे…पीतल की प्रतिमाएं भी। 25 हजार का दीया भी दिखा हमें और 1 हजार रुपये किलो की प्रतिमा की। महालक्ष्मी मंदिर के पास हमें दिखी,,,छुरी, चाकू की दुकान…जहाँ पर हँसुआ से लेकर त्रिशूल तक सब था। दुकान के संचालक से पता चला कि यह दुकान तब बनी थी जब कोलकाता में घोड़ा गाड़ी वाली ट्राम चलती थी। सारा सामान हाथ से बनाया जाता है। बहरहाल दुकान 90 साल पुरानी है और अपना कारखाना होने के कारण आपूर्ति को लेकर समस्या नहीं होती। 40 रुपये की छुरी से लेकर 300 रुपये का हँसुआ और हजारों तक कीमत जाती दिखी।

बिक्री कम हो रही थी…इसे लेकर छोटे व्यवसायियों में मायूसी तो है और अनमने भाव से ही वे काम कर भी रहे थे तो कुछ दुकानदार सपरिवार बैठे थे। राह चलते हुए बर्तनों का ढेर लगाए व्यवसायी दिखे तो बाजार खराब होने की शिकायत भी दिखी। 35 रुपये के चम्मच से लेकर 160 रुपये की थाली और 50 रुपये से शुरू होने वाले पीतल के बर्तन जो आप पूजा में इस्तेमाल कर सकते हैं। पीतल से बनी माँ काली और माँ लक्ष्मी की प्रतिमाओं की भारी माँग है। रवीन्द्र सरणी पर एक 200 साल पुरानी दुकान पर मुलाकात हुई सम्राट दास से…जो जादवपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और जनसंचार यानी जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई कर रहे हैं। नौकरी की सलाह मिलती है पर सम्राट अपने पारिवारिक पुश्तैनी व्यवसाय को आगे ले जाने की इच्छा रखते हैं। मेसर्स बीरेश्वर दास नामक इस दुकान पर बर्तन और देवी – देवताओं की प्रतिमाएँ दिखीं। सम्राट छठीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

वह बताते हैं कि एक ही साज – सज्जा की प्रतिमा अगर एक महीने के बाद खोजी जाये तो वह उपलब्ध नहीं होगी यानी प्रतिमाओं में नवीनता के लिए प्रयोग निरन्तर होते रहते हैं।
ठीक इसी तरह कुम्हारटोली में भी दीयों का बाजार बहुत पहले से सज उठा है और यहाँ के दीये कोलकाता के बाहर भी जाते हैं और स्थानीय स्तर पर बड़ाबाजार की दुकानों में भी आपको यह दीये मिलेंगे। बहरहाल बाजार इतिहास भी हैं और हम इन दोनों को आपके सामने लाते रहेंगे।

सेंट्रल पब्लिक स्कूल में आयोजित हुआ दीपावली उत्सव

जमानियां : उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानियां स्थित सेन्ट्रल पब्लिक स्कूल में दीपावली उत्सव आयोजित हुआ। छात्राओं ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए अपनी कलाकृतियों से विद्यालय को सजाया। इस उत्सव में कक्षा 11वीं की छात्राओं ने प्रतिष्ठा तिवारी ने अमीषा सिंह, सोनल तिवारी, श्वेता एवं अन्य छात्राओं आकर्षक रंगोली एवं कलाकृतियाँ बनायी। कुछ कलाकृतियाँ हम नीचे दे रहे हैं –