Sunday, July 5, 2026
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मिथ ब्रेकर – क्यों होता है दिल से कही गयी बात का असर

राखी राय हल्दर

क्वांटम दुनिया सीरीज में आज हम बात करेंगे दिल और दिमाग में मौजूद बिजली की । कहते हैं न दिल से निकालने वाली आवाज खाली नहीं जाती आखिर दिल से निकली हुई बात में ऐसा क्या है जो उसे इतना खास बना देती है? जवाब है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी । दिल और दिमाग दोनों में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स या तरंगें हैं यानि यहाँ इलेक्ट्रिसिटी है जिसमें हीट  यानि ताप और लाइट यानि प्रकाश दोनों है। दिल और दिमाग में इलेक्ट्रिसिटी है,  तभी ईसीजी और ईईजी और हो पाता है। क्योंकि ईसीजी और ईईजी दोनों के जरिए दिल और दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी यानी वैद्युतिन गतिविधियों को ही रिकॉर्ड किया जाता है। इतना ही नहीं हमारे भीतर जो प्राण शक्ति है वो भी इलेक्ट्रिसिटी का ही एक रूप है। तभी प्राण निकाल जाने से शरीर हिल नहीं पाता और ठंडा पड़ जाता है । ठीक एक मशीन की तरह जो इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई को बंद कर देने से रुक जाती है। और वह तार भी धीरे धीरे ठंडा हो जाता है जिससे होकर इलेक्ट्रिसिटी मशीन तक पहुँच रही थी । हमारे दिल और दिमाग में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स हैं। वेव्स या तरंगों को  फ्रिक्यूएंसी में नापा जाता है।
दिल से निकली हुई बात की फ्रिक्यूएंसी ज्यादा होती है। और ये दिमाग की तरंगों को भी साथ ले सकती है। और इस तरह दिल से निकालने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स की फ्रिक्यूएंसी ही उसे असरदार बना देती है। तभी कोई बोल बोल कर भी लोगों के दिल को छू नहीं पाता और वहीं कोई पाँच मिनट मैं ही किसी के दिलों दिमाग पर गहरा असर छोड़कर निकल जाता है। लेकिन दिल से कही हुई बात का असर ज़िंदगी पर कैसे पड़ता है? क्या है इसके पीछे का विज्ञान ?  जो शक्ति दिल और दिमाग में बहने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी का रिश्ता उस शक्ति से है जिसे हम साहित्य में मैं की शक्ति कहते हैं। इसी मैं की बात मेरी किताब सृष्टि रहस्य की मैं कविता में कुछ इस तरह शामिल है
‘मैं’
एक ज्योति हूं
मेरा होना,
तन में कंपन भरता है
जिसे तुम दिल की धड़कन कहते हो
वह –
मेरे होने से चलता है।

नामुमकिन है देखना मुझको
परिचय मेरा,
तन से ही झांकता है
तुम देख नहीं पाते
प्रकाश तन में ही बसता है।

मुझे तन की डिबिया में
बंद समझते हो तुम,
महसूस करती हूं ‘मैं’
असर,
तन पर देखते हो तुम।

तुम समझते हो
तन के सुकून से
सुकून मुझे मिलता है,
होता यही गर सच तो
कोई –
महलों में क्यों तरसता है?

मैंने तुम्हें मेरा मुकुट
अजनबियों को पहनाते देखा है,
तन-सुख की इच्छाओं पर
अक्सर मरते देखा है।

बेतुकी इच्छाओं के लुटेरों ने
हमें खूब लूटा है,
अलगा कर मुझसे तुमको
बार-बार कूटा है।

तुम्हारे भीतर ही ‘मैं’
अज्ञान के हाथों गिरवी हूं,
कसम मुक्ति की लेकर देखो
बिंदु से सिंधु तक जो पहुंचा दे
‘मैं’ वही सीढ़ी हूं।

तभी मैं की शक्ति को बेतुकी इच्छाओं के चंगुल से बचाना बहुत जरूरी होता है। यही मैं की शक्ति कैसे ज़िंदगी पर असर डालती है।

हिंदी अकादमी की ओर से हिंदी दिवस समारोह

रिसड़ा । पश्चिम बंग हिंदी अकादमी की ओर से प्रेसीडेंसी विभाग के अन्तर्गत रिसड़ा अंचल में हिंदी दिवस का आयोजन किया गया।इस अवसर पर काव्य आवृत्ति, हिंदी ज्ञान प्रतियोगिता, नाटक प्रतियोगिता, समूह बहस, चित्रांकन एवं लोकगीत का आयोजन किया गया। पिछले दो वर्षों से  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एवं हिंदी अकादमी के अध्यक्ष श्री विवेक गुप्ता के प्रयासों से हिंदी भाषी बहुल क्षेत्रों में हिंदी दिवस का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन कल्याणी विश्वविद्यालय की प्रो. विभा कुमारी, डॉ इतु सिंह,रिसड़ा के पौरपिता विजय सागर मिश्रा, सूचना एवं संस्कृति अधिकारी अन्वेषा गांगुली ने किया  मिश्रा ने कहा कि हिंदी दिवस का यह आयोजन हिंदी भाषियों के सांस्कृतिक एवं रचनात्मक क्षमता को मंच प्रदान करने का माध्यम है। चित्रांकन का प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार क्रमश: अलीना परवीन, आशा साव, मनीष पासवान को मिला। डॉ इबरार खान, मधु सिंह और कार्तिक बासफोर निर्णायक की भूमिका में थे। काव्य आवृत्ति वर्ग अ में प्रथम आदित्य कु. पासवान, द्वितीय अंजली सेठी, तृतीय अनुप्रिया सिंह ,चतुर्थ तनु साव, पंचम मनीषा शुक्ला, छठां गायत्री पांडे एवं वर्ग क में प्रथम राधा कुमारी ठाकुर, द्वितीय सृष्टि मिश्रा, तृतीय सोनिया चौधरी, चतुर्थ आशुतोष राऊत, पंचम संजना जायसवाल, छठां चंदन भगत को मिला। समूह बहस में प्रथम स्थान प्रभाकर कुमार साव और द्वितीय स्थान आशुतोष कुमार राउत को मिला। हिंदी ज्ञान में प्रथम स्नेहा महतो एवं नेहा साव तथा द्वितीय आशुतोष राऊत एवं आदित्य तिवारी को मिला। नाटक में प्रथम ,द्वितीय एवं तृतीय क्रमशः विद्यासागर कॉलेज फ़ॉर वोमेन्स, ऋषि बंकिम चंद्र सांध्य कॉलेज एवं इंसानियत नाट्य दल को मिला। इस पूरे आयोजन में रंगकर्मी प्लाबन बसु, मनोज झा, उत्तम ठाकुर, रूपेश यादव, लिली शाह, मनीषा गुप्ता, विकास कुमार, प्रमोद चौहान, रमाशंकर सिंगल, प्रकाश त्रिपाठी, राजेश पांडे, योगेश साव,असित पांडे, डॉ मंटू कुमार ,अमरजीत पंडित बतौर निर्णायक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन संजय जायसवाल एवं सूर्यदेव राय ने किया।

नये संसद भवन के 6 द्वारों पर पहरा देते हैं ये प्राणी

19 सितंबर 2023, यह दिन भारत के लिए काफी ऐतिहासिक रहा। संसद के विशेष के दूसरे दिन, मंगलवार को संसद भवन को नये भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। लगभग 65,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में बना भारत का नया संसद भवन बाहर से दिखने में जितना ही भव्य है, इसे अंदर से भी काफी सोच-समझकर ही डिजाइन किया गया है।
नये संसद भवन के हर एक कोने, दिवारों और दरवाजों को सजाने के लिए कहीं पौराणिक मान्यताओं तो कहीं भारतीय समृद्ध संस्कृति का सहारा लिया गया है। संसद भवन को इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि इसकी आयु कम से कम 150 साल हो। भुकंप के झटकों या तेज आंधी-तूफान भी इसका कुछ ना बिगाड़ सकें।
अब तक भारत के संसद भवन का नाम लेते ही मध्य प्रदेश में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर के तर्ज पर बने गोलाकार संसद की तस्वीर ही याद आती थी। आजादी के समय भी इस संसद भवन में कई ऐतिहासिक घटनाएं घटी थी। इसी भवन में बहरी हो चुकी अंग्रेजी हुकूमत के कान खोलने के लिए भगत सिंह ने बम फोड़े थे, क्योंकि भारत की आजादी के दीवाने भगत सिंह का मानना था कि जो सरकार आम जनता की आवाजें नहीं सुन सकती हैं, वह बहरी हो चुकी है। अब हम आपको भारत की नयी संसद भवन के विषय में एक दिलचस्प जानकारी देते हैं। भारत के नये संसद भवन में 6 द्वार हैं और प्रत्येक द्वार पर एक जीव को बतौर पहरेदार तैनात किया गया है। कौन से हैं वो जीव और क्यों उन्हें बतौर पहरेदार तैनात किया गया!
1. गज द्वार :- हाथी को काफी बुद्धिमान प्राणी माना जाता है। इसलिए संसद के इस द्वार का नाम हाथी के नाम पर ही रखा गया है जो बुद्धि, स्मृति, धन और बुद्धिमत्ता का प्रतिक है। यह द्वार भवन के उत्तर की ओर है। वास्तु शास्त्र के अनुसार भी उत्तर दिशा का संबंध बुध से है जिसे बुद्धि का स्रोत माना जाता है।
2. अश्व द्वार :- अश्व यानी घोड़ा को साहस और बल का प्रतीक माना जाता है। इस बात का जिक्र ऋग्वेद में भी किया गया है। यह द्वार भारत की मजबूत लोकतांत्रिक जड़ों को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है।
3. गरुड़ द्वार :- गरुड़ को भगवान विष्णु की सवारी माना जाता है। पक्षीराज गरुड़ को शक्ति, धर्म और कर्तव्य का प्रतिक माना जाता है। इसी वजह से कई देशों के प्रतीक चिन्ह के तौर पर गरुड़ का उपयोग किया गया है। नये संसद भवन का पूर्वी द्वार गरुड़ द्वार है।
4. मकर द्वार :- नये संसद भवन का वह द्वार जो पुराने संसद भवन की तरफ है, उसे मकर द्वार कहा जाता है। मकर एक पौराणिक समुद्री जीव है, जो आधा स्तनपायी पशु और आधी मछली होता है। इस जीव को रक्षक माना जाता है जिसे हिंदू और बौद्ध स्मारकों में काफी देखा जाता है।
5. शार्दुला द्वार :– यह एक ऐसा प्राणी है, जिसका शरीर शेर का और सिर घोड़ा, हाथी या फिर तोते का होता है। नये संसद भवन में शार्दुला को बतौर शक्ति का प्रतीक रखा गया है। इसे सबसे शक्तिशाली और जीवित सभी प्राणियों में अग्रणी माना जाता है।
6. हम्सा द्वार :- देवी सरस्वती का वाहन हंस होता है, जिसे संस्कृत में हम्सः कहा जाता है। हंस उड़ान व मोक्ष का प्रतीक है। यह जन्म-मृत्यु के चक्र से आत्मा की मुक्ति को दर्शाता है। नये संसद भवन के द्वार पर हम्सा की मूर्ति को भी ज्ञान और आत्म-साक्षरता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया है।

11-28 मार्च तक होगी सीयूईटी-यूजी परीक्षा 15-31 मई, सीयूईटी-पीजी परीक्षा

अकादमिक सत्र 2024-25
नयी दिल्ली । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 2024-25 के अकादमिक सत्र के लिए मंगलवार को तीन प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं सीयूईटी-यूजी, सीयूईटी-पीजी और नेट की प्रवेश परीक्षाओं की तिथि घोषित कर दी। स्नातक पाठ्यक्रमों (यूजी) में प्रवेश के लिए विश्वविद्यालयीन सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी)-यूजी 15 से 31 मई, 2024 तक होगी।
यूजीसी के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने कहा, ”पिछली परीक्षा के तीन हफ्ते के अंदर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीयूईटी-पीजी की परीक्षा अगले साल 11 से 28 मार्च तक होगी। उन्होंने घोषणा की कि राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नेट) 10 से 21 जून तक होगी।

80 वर्षों से विराजते आ रहे हैं लाल बाग़ के राजा

गणेश चतुर्थी, सबसे प्रतिष्ठित हिंदू त्योहारों में से एक, पूरे भारत में भव्य उत्सव मनाया जाता है। मुंबई के हलचल भरे शहर में, “लाल बाग के राजा” के आगमन के साथ उत्साह अपने चरम पर पहुंच जाता है । यह लेख लाल बाग में मनाए जाने वाले इस प्रतिष्ठित गणेशोत्सव के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालता है, इसकी उत्पत्ति, महत्व और इसके द्वारा अर्जित की गई भक्ति के वर्षों का पता लगाता है।
लाल बाग में गणेशोत्सव का समृद्ध इतिहास : गणेशोत्सव, जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, दस दिवसीय हिंदू त्योहार है जो ज्ञान और समृद्धि के हाथी के सिर वाले देवता भगवान गणेश के जन्म का जश्न मनाता है। हालाँकि यह त्यौहार पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन यह मुंबईकरों के दिलों में एक अद्वितीय स्थान रखता है, जो इसे अद्वितीय उत्साह और भक्ति के साथ मनाते हैं । लाल बाग के राजा, जिसका अनुवाद “लाल बाग का राजा” है, मुंबई में सबसे प्रसिद्ध और सम्मानित गणेश मूर्तियों में से एक है। आठ दशकों से अधिक समय से, यह भव्य मूर्ति आस्था, आशा और एकता का प्रतीक रही है, जो शहर भर और बाहर से लाखों भक्तों को आकर्षित करती है।
उत्पत्ति और आरंभ : लाल बाग के राजा की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में हुई थी जब स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव के सार्वजनिक उत्सव की शुरुआत की थी। ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान, तिलक ने इस उत्सव को दमनकारी औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जनता को एकजुट करने के एक साधन के रूप में देखा। उन्होंने लोगों को अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की मूर्तियां लाने, सामुदायिक संबंधों को बढ़ावा देने और भारतीय संस्कृति में गर्व की भावना पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया । मुंबई का एक हलचल भरा इलाका, लाल बाग, इस परंपरा को अपनाने वाले पहले लोगों में से एक था। 1934 में, पहले लाल बाग के राजा की स्थापना की गई, जिससे एक ऐसी विरासत की शुरुआत हुई जो दशकों तक निर्बाध रूप से जारी रही।
लाल बाग के राजा का महत्व : लाल बाग के राजा अपने धार्मिक महत्व से आगे बढ़कर मुंबई की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और एकता की भावना का प्रतीक बन गया है। भक्त, उनकी जाति, पंथ या धर्म के बावजूद, भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने के लिए एक साथ आते हैं। यह मूर्ति लाखों लोगों की इच्छाओं को पूरा करने और उनके दिलों को सांत्वना देने के लिए जानी जाती है । हर साल, लाल बाग के राजा की मूर्ति को सावधानीपूर्वक तैयार किया जाता है, जिसमें कुशल कारीगर एक उत्कृष्ट कृति बनाने में अपना दिल और आत्मा लगाते हैं। मूर्ति को विस्तृत गहनों और कपड़ों से सजाया गया है, जो एक राजा के लिए उपयुक्त ऐश्वर्य को दर्शाता है।
भक्ति के वर्ष: 2023 तक, लाल बाग के राजा का उत्सव लगभग नौ दशकों से मनाया जा रहा है। 80 से अधिक वर्षों से, यह मुंबई की सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने के प्रति अटूट विश्वास और प्रतिबद्धता के प्रमाण के रूप में खड़ा है। लाल बाग के राजा का प्रतीक गणेश चतुर्थी, मुंबई की स्थायी भावना का एक प्रमाण है। यह सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं है बल्कि एक सांस्कृतिक घटना है जो जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को एकजुट करती है। लाल बाग के राजा की विरासत लगातार फल-फूल रही है, जो इस शुभ समय के दौरान भगवान गणेश की दिव्य कृपा चाहने वाले सभी लोगों में खुशी, आशा और आशीर्वाद फैला रही है।

 

तनाव को लेकर अध्ययन में नये तथ्य का खुलासा

कोलकाता । डॉ. देवासिस घोष और अनिंदिता गुहा के अध्ययन में पाया गया कि हमारे रक्त में रसायन इस बात से जुड़े होते हैं कि हम तनाव को कैसे संभालते हैं। अध्ययन, “प्लेटलेट सेरोटोनिन स्तर: मानव व्यवहार, तनाव प्रतिक्रिया और साइकोट्रोपिक दवाओं के चयन में एक आवश्यक भूमिका”, दिखाता है कि ये रसायन तनाव को कैसे प्रभावित करते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि तनाव के दौरान दो रक्त रसायन, सेरोटोनिन और डोपामाइन एक साथ काम करते हैं। इससे हमें तनाव को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
पहले, लोगों को लगता था कि ये रक्त रसायन जन्म से ही वैसे ही रहते हैं, लेकिन अध्ययन कहता है कि तनाव उन्हें बदल देता है। उन्होंने तनावग्रस्त लोगों का अध्ययन किया और उन्हें उनके रासायनिक स्तरों के आधार पर समूहित किया।
उन्होंने पाया कि इन रसायनों के बहुत अधिक या बहुत कम होने का मतलब बहुत अधिक तनाव हो सकता है। एक रसायन का बहुत अधिक मात्रा में होना उदा. सेरोटोनिन का मतलब अन्य यानी डोपामाइन का कम होना भी हो सकता है और इसके विपरीत भी। प्रमुख शोधकर्ता डॉ. देवासिस घोष ने कहा, “इन रसायनों की जांच से हमें तनाव को समझने में मदद मिल सकती है। दोनों को देखकर डॉक्टरों को उपचार चुनने में मदद मिलती है।”

बेंगलुरु में गणेश उत्सव, ढाई करोड़ रुपये के सिक्कों और नोटों से सजावट

5, 10, 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये के नोटों की मालाएं तैयार
बंगलुरू । कर्नाटक के बेंगलुरु में जेपी नगर स्थित सत्य गणपति मंदिर परिसर को करीब ढाई करोड़ रुपये के सिक्कों और नोटों से सजाया गया है। बेंगलुरु और समूचे कर्नाटक में सोमवार से गणेश चतुर्थी उत्सव धार्मिक उत्साह के साथ शुरू हो गया। श्रद्धालु भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरों और पंडालों में जा रहे हैं।
अपनी अनूठी सजावट के चलते सत्यगणति मंदिर श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रहा है। न्यासियों के मुताबिक, इस मंदिर का प्रबंधन संभाल रहे गणपति शिर्डी साई न्यास ने पांच, 10 और 20 रुपये के सिक्कों की मालाएं तैयार की हैं। इसी के साथ-साथ 10, 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये के नोटों की भी मालाएं तैयार की गई हैं। ये सभी मालाएं करीब ढाई करोड़ रुपये की हैं। एक न्यासी ने बताया कि करीब 150 लोगों की टीम ने एक महीने के दौरान सिक्कों और नोटों की मालाओं से मंदिर की सजावट की। उनके मुताबिक, इसके लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और सीसीटीवी से भी निगरानी रखी जा रही है।
सिक्कों का इस्तेमाल कर कलात्मक चित्रण किया गया है। इनमें भगवान गणेश, ‘जय कर्नाटक’, ‘राष्ट्र प्रथम’, ‘विक्रम लैंडर’, ‘चंद्रयान’ और ‘जय जवान जय किसान’ की छवियां शामिल हैं। एक न्यासी ने बताया कि नोटों और सिक्कों से की गई यह सजावट एक हफ्ते के लिए रहेगी ।

हिन्दी दिवस के अवसर पर पुस्तकालय का उद्घाटन

भाटपाड़ा । हिंदी दिवस के अवसर पर कांकिनाड़ा ज्योति फाउंडेशन द्वारा ‘निःशुल्क लाइब्रेरी’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर हिंदी दिवस का पालन किया गया और बर्ष 2023 में बैरकपुर शिल्पांचल से एसएससी जी.डी.  में चयनित लगभग 300 फौजियों को ‘जय जवान प्रतिभा सम्मान- 2023’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर वैजनाथ साव, मनीषा गुप्ता, नागेंद्र पण्डित, कोमल साव, आदित्य तिवारी, आशुतोष राउत और संजना जायसवाल ने काव्य पाठ किया। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष कुमार घोष, डॉ संजय जायसवाल, ख्वाजा अहमद हुसैन, एस. के. अग्रवाल, जगतदल विधायक सोमनाथ श्याम, गोपाल राउत, आतिफ़ जलीस, अब्दुल वदूद अंसारी, तरुण साव, उत्तम कुमार, डॉ मंटू साव, कार्तिक साव, देव प्रसाद सरकार और अन्य सम्मानीय शिक्षकगण उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था के सचिव प्रियांगु पाण्डेय ने कहा कि बैरकपुर शिल्पांचल को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा ही एकमात्र विकल्प है। धन्यवाद ज्ञापन बांकेलाल यादव ने दिया ।

ताइवान एक्सीलेंस वीकेंडर 2023 आयोजित

कोलकाता । ताइवान एक्सीलेंस द्वारा प्रस्तुत बहुप्रतीक्षित ताइवान एक्सीलेंस वीकेंडर 2023 आज कोलकाता के साउथ सिटी मॉल में आयोजित हुआ । गत 15 सितंबर से 17 सितंबर तक तीन शानदार दिनों में आयोजित होने वाला ताइवान एक्सीलेंस वीकेंडर ताइवान के बेहतरीन और देश में उभर रहे अत्याधुनिक नवाचारों का पता लगाने के लिए एक विशिष्ट मंच प्रदान किया । यह कार्यक्रम कोलकाता में ताइपे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर संपर्क कार्यालय (टीएआईटीआरए – कोलकाता) की निदेशक सिंग झेंग के नेतृत्व में एक भव्य उद्घाटन समारोह के साथ शुरू हुआ। उनके साथ आनंद के जीवंत शहर की जानी-मानी अभिनेत्री पूजा बनर्जी भी शामिल थीं। उद्घाटन समारोह में इंडियाज गॉट टैलेंट के प्रसिद्ध बैड साल्सा डांस ट्रूप द्वारा नृत्य प्रस्तुति दी गई। उल्लेखनीय उपस्थित लोगों में श्री देबाशीष सेन, जो हिडको के प्रबंध निदेशक और न्यू टाउन डीए के अध्यक्ष दोनों के रूप में कार्य करते हैं, श्री संबित दासगुप्ता, बीसीसीआई (द बंगाल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) के सहायक निदेशक, के के कुओ शामिल थे। , उपाध्यक्ष कर्मा, श्री एलेक्स ली, साइबरपावर के निदेशक अल्बर्ट, वान हाई कोलकाता में बिक्री और विपणन मालिकों के प्रतिनिधि, पोलिन लियाओ, मेडेन के बिक्री प्रतिनिधि, डेविड चेन, उपस्थित थे । दूसरे और तीसरे दिन क्रमशः प्रसिद्ध अभिनेता नील भट्टाचार्य और अंतरा नंदी उपस्थित रहे । सायंता मोदक और अर्चिका गुप्ता जैसी प्रभावशाली सोशल मीडिया हस्तियां भी संबंधित दिनों में उपस्थित रहीं ।
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान, उपस्थित लोगों को आईसीटी और गेमिंग, फैशन, लाइफस्टाइल, होम एंड लिविंग, स्पोर्ट्स, स्वास्थ्य और कल्याण और अन्य श्रेणियों में फैले ताइवानी उत्पादों की एक विविध श्रृंखला का पता लगाने का अवसर मिला । 21 प्रसिद्ध ताइवानी ब्रांड, जैसे एसर, आइफा, अडाटा, एरोमीज, एसर, साइबरपावर, डर्मा एंजेल, डी – लिंक , गीगाबाइट, कर्मा, एमएसआई, थर्मालटेक, कोलकाता में ताइपे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर संपर्क कार्यालय की निदेशक सिंग झेंग ने ताइवान उत्कृष्टता सप्ताहांत पर अपने विचार साझा करते हुए इसे अद्वितीय ‘उत्कृष्टता के चिह्न’ के साथ ताइवान की अभिनव भावना का एक गतिशील प्रदर्शन बताया। वह इसे ताइवान के प्रमुख ब्रांडों के साथ जुड़ने, अनुभव करने और बातचीत करने के एक उत्कृष्ट अवसर के रूप में देखती है। 2022 में, दोनों देशों के बीच 8.45 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। हाल के वर्षों में, ताइवान और भारत ने अपने संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि का अनुभव किया है, विशेष रूप से व्यापार, निवेश, पारस्परिक बंधन और सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में।

सुमित बिनानी बने एसीएई के 61वें अध्यक्ष

कोलकाता । सुमित बिनानी एसोसिएशन ऑफ कॉरपोरेट एडवाइजर्स एंड एक्जीक्यूटिव्स (एसीएई) के 61वें अध्यक्ष बने। उन्होंने 2023-24 की अवधि के लिए सीए पी. डी. रुंगटा से एसीएई के अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यभार संभाला। एसीएई वर्ष 1960 में स्थापित सबसे पुराने और प्रतिष्ठित एसोसिएशन में से एक है। लगभग 1600 पेशेवर व्यवसायी और उद्योगपति इसके सदस्य के रूप में इससे जुड़े हैं । सुमित बिनानी ने अपने कार्यकाल के दौरान “इग्नाइटिंग उत्कर्ष” नामक थीम को अपनाने का प्रस्ताव रखा है, जो प्रगति, उत्कृष्टता और सकारात्मक विकास के विचार का प्रतीक है। इस मौके पर सीए तरूण गुप्ता और सीए नीरज हरोदिया (उपाध्यक्ष), एडवोकेट रमेश पटोदिया, (महासचिव), पांच बार की केटलबेल विश्व चैंपियन सुश्री शिवानी शाह अग्रवाल (संयुक्त सचिव) और सीए मोहित भूटेरिया (कोषाध्यक्ष) के साथ एसोसिएशन के कार्यकारी समिति के सदस्यों ने नए अध्यक्ष का हर तरह से सहयोग करने की बात कही। एसोसिएशन ऑफ कॉरपोरेट एडवाइजर्स एंड एक्जीक्यूटिव्स के अध्यक्ष सुमित बिनानी ने कहा, उत्कर्ष की चिंगारी को आगे बढ़ाते के साथ मेरा प्राथमिक लक्ष्य इसके मूल्यों को बनाए रखते हुए हमारे एसोसिएशन की दृश्यता और ब्रांडिंग को बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से संलग्न होना होगा। एकजुटता और परस्पर निर्भरता मेरी यात्रा के मुख्य शब्द होंगे। प्रेसिडेंट के रूप में हमेशा मेरा लक्ष्य सभी सदस्यों के साथ मिलकर काम करना है। हमारे संघ को मजबूत और उन्नत करना और निरंतर विकास, उत्कृष्टता और सकारात्मक विकास की संस्कृति को अपनाना मेरा मुख्य लक्ष्य होगा।