अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पं. विजयशंकर मेहता “डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान’ से समादृत
भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज में मनाया गया 75वां एनसीसी दिवस समारोह
कोलकाता । एक एनसीसी कैडेट के चरित्र के स्तंभ अनुशासन, समर्पण और कर्तव्य होते हैं । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज एनसीसी के तीनों अंग थल सेना, नौसेना और वायु सेना से संबद्ध हैं। कॉलेज के एन सी सी कलेक्टिव ने गत 5 दिसंबर, 2023 को 75वें एनसीसी दिवस का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कमांडिंग ऑफिसर 31 बंगाल बीएन एनसीसी, कर्नल रोहित शर्मा, कमांडिंग ऑफिसर नंबर 1 बंगाल एयर स्क्वाड्रन एनसीसी, विंग कमांडर एस. सेल्वा कुमार वीएम, कमांडिंग ऑफिसर नंबर 2 बंगाल नेवल यूनिट एनसीसी, लेफ्टिनेंट कमांडर नज़ीर ए अजीज उपस्थित थे। कॉलेज से एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट आदित्य राज, अरित्रिका दुबे, अभिषेक कुमार सिंह के साथ-साथ बीईएससी से जुड़ी सभी तीन इकाइयों के रक्षा कर्मचारी इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि थे।
राष्ट्रीय कैडेट कोर भारतीय सशस्त्र बलों की युवा शाखा है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली, भारत में है। यह संगठन रक्षा मंत्रालय के तहत 16 जुलाई, 1948 को बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था जो कामरेडशिप, साहस, अनुशासन, ईमानदारी और सबसे ऊपर, देशभक्ति की भावना पैदा करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत रेक्टर और छात्र मामलों के डीन, प्रो दिलीप शाह के उद्घाटन भाषण से हुआ। दिलीप शाह ने हमारे कैडेटों की उपलब्धियों के विषय में बाताया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम आरम्भ हुआ। बीईएससी एनसीसी गतिविधियों का एक परिचयात्मक वीडियो था जिसमें – सीओवीआईडी -19 प्रकोप के दौरान रीच आउट प्रोजेक्ट, स्वच्छ भारत, प्रोजेक्ट कर्तव्य और कई अन्य परियोजनाएं और अभियान शामिल थे, इसमें कॉलेज में एनसीसी की संबद्धता के बाद से हमारे एनसीसी सीडीटीएस की उपलब्धियां भी शामिल थीं।
एनसीसी दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर हमने सीओ 31 बंगाल और सीओ 2 नेवल एनसीसी का भी स्वागत किया क्योंकि वे हाल ही में बंगाल में तैनात हुए हैं और पहली बार कॉलेज में आए । कर्नल रोहित शर्मा ने कैडट को संबोधित करते हुए अपना वक्तव्य रखते हुए एक एनसीसी कैडेट के जीवन के बारे में बताया कि वह स्वयं एक एनसीसी सीडीटी थे। वह स्वयं इस बात का प्रतीक हैं कि कैसे एक कैडेट भी हमारे देश का भविष्य बन सकता है। भवानीपुर कॉलेज के कैडेटों ने “अनेकता में एकता” थीम पर शानदार नृत्य प्रदर्शन किया। इससे हम सभी एनसीसी शिविरों में राष्ट्रीय एकता की एक मजबूत भावना विकसित होती है।
कैडेटों को प्रोत्साहित करने के लिए मंच पर विंग कमांडर एस. सेल्वा कुमार (वीएम)ने अपने वक्तव्य से प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति के जीवन को नियंत्रित करने वाले चार स्तंभ हैं: आत्म-अनुशासन, योग्यता, कड़ी मेहनत और आशा। यदि जीवन एक कार है, तो कार के ये चार पहिए हैं, और इनमें से किसी एक गुण की कमी कार को असंतुलित बना देती है।’ कर्नल रोहित शर्मा की तरह, सेल्वा सर भी एक एनसीसी कैडेट थे और उन्होंने एनसीसी विशेष प्रवेश योजनाओं के बारे में भी बात की, जिसमें 03 साल का एनसीसी कोर्स पूरा करने वाले और अल्फा या ब्रावो ग्रेडिंग के साथ सी सर्टिफिकेट रखने वाले को एसएसबी के लिए उपस्थित होने की अनुमति है। उन्होंने सीधे साक्षात्कार का भी उल्लेख किया। वह एनसीसी विशेष प्रवेश योजना के माध्यम से भारतीय वायु सेना – उड़ान शाखा में शामिल हुए थे।उनके शब्द वास्तव में प्रेरक थे और कैडेटों ने सशस्त्र बलों की विभिन्न प्रविष्टियों के बारे में और अधिक जानने में रुचि दिखाई और बताया कि एनसीसी प्रमाणपत्र इसके लिए कैसे उपयोगी हो सकते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम को कॉर्पोरल प्रिंस मिश्रा ने “एनसीसी – ए हीरो इन मेकिंग” पर एक स्व-रचित कविता की प्रस्तुति दी । बीईएससी कैडेटों द्वारा एक समूह गीत प्रस्तुत किया गया। सुखदायक धुन के बाद, हमने लेफ्टिनेंट कमांडर नासिर ए अजीज को आमंत्रित किया जिन्होंने अपने भाषण में इस सच्चाई को उजागर किया कि ‘एक अधिकारी का जीवन पैसे के बजाय सम्मान का चुनाव है’। उन्होंने समय के मूल्य पर भी बात की और समय के साथ हमारी बेहतरी को सर्वोत्तम कार्यों में कैसे बदला जा सकता है। उन्होंने एक नाविक और एक अधिकारी के रूप में भारतीय नौसेना में अपने अनुभव को भी साझा किया। उनके उत्साहवर्धक शब्दों के बाद, हमारे कैडेटों ने अपनी ऊर्जा दिखाने के लिए बैकफ्लिप और सोमरसॉल्ट के साथ जोश-प्रकार के प्रदर्शन किए जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। इसके बाद सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिन कैडेटों ने अखिल भारतीय वायु सैनिक शिविर – बेंगलुरु, अखिल भारतीय नौ सैनिक शिविर – आईएनएस शिवाजी, लोनावला, महाराष्ट्र, नौकायन अभियान – कोलकाता से फरक्का और वापसी के अलावा कई अन्य शिविरों और प्रतियोगिताओं में भाग लिया, उन सभी को रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने द्वारा सम्मानित किया गया। कमांडिंग ऑफिसर और हमारे एनसीसी अधिकारियों ने केक काट कर और एनसीसी गीत गाकर जश्न मनाया। एनसीसी एयर विंग अधिकारीअरित्रिका दुबे ने इस कार्यक्रम के विषय में बताया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों में मास्टरक्लास
इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट कोलकाता के साथ हुआ आयोजन
गोबिंदा रॉय और रितुपर्णा बसु ने दिया प्रशिक्षण
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने आईएमआई (इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट) कोलकाता के सहयोग से आईएमआई के दो प्रसिद्ध वक्ताओं के साथ दो मास्टरक्लास का आयोजन किया। प्रतिभाशाली युवा दिमागों को विश्व स्तरीय प्रबंधन तक पहुंच प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए 2010 में आरपी-संजीव गोयनका द्वारा स्थापित और स्थापित, आईएमआई युवा दिमागों को प्रबंधन की दुनिया के लिए तैयार करने में सहायक रहा है। यह कार्यक्रम24 नवंबर 2023 को, प्लेसमेंट हॉल में आयोजित यह कार्यक्रम सुबह 11:30 बजे दिन के प्रथम विषय ‘रणनीतिक व्यवधान: डिजिटल युग में व्यापार परिवर्तन को नेविगेट करना ‘के साथ शुरू हुआ, जिसे अतिथि व्याख्याता आईएमआई कोलकाता में प्रोफेसर और सोशल मीडिया और ब्रांडिंग वेबसाइट के अध्यक्ष डॉ गोबिंदा राय ने दिया । उनके साथ प्रवेश विभाग की प्रमुख कराबी और आईएमआई के सहायक प्रवेश प्रमुख इंद्रनील भी थे। पहला एक घंटे का सत्र विचित्र प्रश्नोत्तरी दौरों से भरा था जहां हर सही उत्तर को चॉकलेट से पुरस्कृत किया गया । सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की वायरल सामग्री और आज की सबसे चर्चित तकनीक चैट जीपीटी पर भी चर्चा हुई।
द्वितीय विषय ‘विपणन, ग्राहक संबंध प्रबंधन और ब्रांड प्रबंधन पर आज की अंतर्दृष्टि’ की अतिथि व्याख्याता डॉ ऋतुपर्णा बसु, आईएमआई कोलकाता में फैकल्टी और मार्केटिंग में एरिया चेयर रहीं । यह वक्तव्य दोपहर 12.30 बजे से शुरू हुआ । व्याख्यान में कई ब्रांडों की विभिन्न मार्केटिंग रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया और एक मजेदार रिकॉल गेम के साथ समाप्त हुआ। मास्टरक्लास में भाग लेने के लिए 50 से अधिक उपस्थित लोगों को ई-प्रमाणपत्र प्राप्त हुए, कार्यक्रम का समापन बी.कॉम (मॉर्निंग) समन्वयक प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी द्वारा अतिथियों के अभिनंदन के साथ हुआ। रिपोर्टर सृष्टि झुनझुनवाला और फ़ोटोग्राफ़र पापन दास और अग्रग घोष रहे। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
नेफ्रोकेयर इंडिया का ‘ए वॉक फॉर योर किडनी’ अभियान
कोलकाता । नेफ्रोकेयर कीऔर से ‘ए वॉक फॉर योर किडनी’ नामक वॉकथॉन का आयोजन किया गया। एक ऐसा वॉकथॉन, जिसमें लगभग 400 प्रतिभागियों के साथ-साथ मशहूर हस्तियां इसमें शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने इस स्वस्थ अभ्यास के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अपने कदम से कदम मिलाया। यह वॉकथॉन नेफ्रोकेयर से शुरू होकर होटल गोल्डन ट्यूलिप पर खत्म हुई। इस कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। जिसमे नेफ्रो केयर के संस्थापक और निदेशक डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता, नंदिता रॉय (फिल्म निर्माता), शिवप्रसाद मुखर्जी (निदेशक), देबाशीष दत्ता (सचिव मोहन बागान क्लब), गोल्डन ट्यूलिप होटल के निदेशक आशीष मित्तल के अलावा कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इसमें शामिल हुए। नेफ्रो केयर के संस्थापक और निदेशक, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता ने कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि प्रतिदिन 30 मिनट की तेज सैर हमारी कई स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कर सकती है। नेफ्रोकेयर इंडिया की इस दूसरी वर्षगांठ पर हम देश भर में अपनी उपस्थिति का विस्तार करके और आने वाले वर्षों में करीब दस लाख लोगों तक पहुंचने के लिए 300 व्यापक और समग्र किडनी देखभाल इकाइयों की स्थापना करके किडनी को स्वास्थ्य और सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को उजागर करना चाहते हैं। “नेफ्रो केयर इंडिया में हम बीमारी के इन सभी पहलुओं का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण करते हैं और रोगी को समग्र चिकित्सा देखभाल प्रदान करते हैं। एडवांस्ड रीनल केयर इंस्टीट्यूट, जिसकी स्थापना प्रसिद्ध नेफ्रोलॉजिस्ट और अवार्डी, डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता ने की थी। स्वास्थ्य किडनी की देखभाल पर ध्यान देने की आवश्यकता और इससे जुड़ी विसंगतियों का शीघ्र पता लगाने के लिए नियमित परीक्षण करने का महत्व और किडनी से संबंधित किसी भी समस्या के समाधान के लिए समग्र उपचार करने का के बारे में लोगों को जागरूक किया गया।
पत्नी को सांस की हुई तकलीफ तो पति ने लगा दिए 500 पौधे
हड़प्पा सभ्यता के लोगों का कारोबार फैला था अफगानिस्तान तक
पायलट से लेकर क्रू मेंबर तक, एयर इंडिया ने 6 दशक बाद बदला लुक
74 फ़ीसदी भारतीयों को नहीं मिल रहा है पौष्टिक खाना
स्त्री के अपमान का परिणाम दिखाता द्रोपदी कूप और शिक्षा देता तमिलनाडु का थिमिथि उत्सव

हमारी परम्परा, हमारा इतिहास बार – बार बताता रहा है कि उत्पीड़क का अंत भीषण होता है…महाभारत इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि उत्पीड़न करने वाले का परिणाम सर्वनाश होता है और स्त्री पर अत्याचार करने वालों का अंत भयावह होता है। युग बीत जाते हैं, लोग चले जाते हैं मगर इतिहास साक्षी देता रहता है, ऐसा प्रमाण बै कुरूक्षेत्र की भूमि। कहा जाता है कि द्रोपदी के श्राप के कारण आज तक यह नगरी विकास का चेहरा देख नहीं सकी। यहाँ महाभारतकालीन अनेक प्रमाण भरे पड़े हैं । ज्योतिसर और ब्रह्मसरोवर के आसपास कई प्राचीन मंदिर हैं। इन्हीं में से एक है द्रौपदी कूप। यह प्राचीन मंदिर द्रौपदी की कहानी आज भी बताता है. इसी मंदिर के अंदर एक कुआं है, जिसे द्रौपदी कूप कहते हैं। बताया जाता है कि द्रौपदी रोजाना इसी कुएं के जल से स्नान करती थी. महाभारत युद्ध में भीम द्वारा दुशासन को मारने के बाद द्रौपदी ने अपने खुले केश दुशासन के खून से रंगे थे और प्रतिज्ञा पूरी की थी. इसके बाद द्रौपदी ने अपने खुले केशों को इसी कूप में आकर धोया था. यही कारण है कि यह स्थान वर्तमान में द्रौपदी कूप के नाम से जाना जाता है।
प्राचीन कुआं भी है – कुरुक्षेत्र में महाभारत काल का प्राचीन कुआं आज भी देखा जा सकता है. माना जाता है कि इसी स्थान पर महाभारत युद्ध में द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना की थी और कर्ण ने यहीं पर अभिमन्यु को धोखे से मारा था, जिससे वह वीरगति को प्राप्त हुआ था। इसके बाद भीम ने इस कुएं का निर्माण किया, जहां द्रौपदी ने स्नान कर अभिमन्यु की मृत्यु का बदला लेने की शपथ अर्जुन को दिलाई थी।
बर्बरीक का मंदिर – यहां महाभारत युद्ध में निर्णायक की भूमिका निभाने को आतुर रहे बर्बरीक का मंदिर भी है। बताया जाता है कि यह वही स्थान है, जो महाभारत काल से पहले का है. यहां पर भीम पुत्र घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की प्राचीन मूर्ति स्थापित है, जहां लोग पूजा करते हैं। मान्यता के अनुसार, बर्बरीक के पास ऐसी धनुर्विद्या थी, जिससे वह किसी भी सेना को अकेले ही जीत सकते थे. तब श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वचनों में बांध कर उसका सिर मांग लिया था, लेकिन बर्बरीक ने कहा कि वह तो महाभारत का युद्ध देखना चाहते थे। कथा के अनुसार, तब श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम महाभारत का पूरा युद्ध जरूर देख सकोगे. तुमने मुझे सम्मान स्वरूप अपना शीश भेंट किया है, इसलिए कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर कलयुग में तुम्हारी भी पूजा होगी। यही कारण है कि आज भी श्रद्धालु जब द्रौपदी कूप को देखने आते हैं तो बर्बरीक की पूजा जरूर करते हैं। मंदिर के पुजारी का कहना है कि बर्बरीक को ही आज खाटू श्याम के नाम से जाना जाता है।




