Sunday, March 22, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 824

हर भारतीय को हैंडलूम को प्रोत्साहन देना चाहिए

2

नचिकेता सोनी भारतीय हस्तशिल्प के लिए काम कर रहीं युवा उद्यमी हैं जिनका काम लगातार सराहा जाता रहा है। परम्परागत टेक्सटाइल उद्योग को उन्होंने गौर से देखा है और अब वे डिजिटल माध्यमों के माध्यम से आगे बढ़ा रही हैं और ई कॉमर्स कम्पनी के रूप में उनकी एक छोटी सी शुरूआत बंधेज मार्ट एक लोकप्रिय नाम बन चुकी है। नचिकेता न सिर्फ उद्यमी हैं बल्कि उनको रोमांचकारी यात्राएं करने का भी शौक है। उद्यमी और ई कॉमर्स वस्त्र उद्योग प्रोत्साहक नचिकेता सोनी से अपराजिता की बातचीत के प्रमुख अंश –

nachiketa-soni-3

चुनौती है मगर मुझे विश्वास है कि आगे बढूँगी

बहुत लम्बा रास्ता है। पश्चिमी संस्कृति की ओर से तेजी से मुड़ रही भारतीय संस्कृति के लिए काम करना बड़ी चुनौती है। मैं जो बनाती हूँ, वह विशुद्ध भारतीय हृदय के लिए होता है मगर मुझे उम्मीद है कि मैं इस कला का प्रसार भारत में ही नहीं विदेशों में भी कर सकूँगी। दरअसल, बहुत कम जगहें ऐसी हैं जहाँ यह काम होता है और बहुत सी महिलाएं इससे जुड़ी हैं। मैं इस कला को प्रोत्साहित करना चाहती हूँ।

हर भारतीय को हैंडलूम को प्रोत्साहन देना चाहिए

मेक इन इंडिया ने निःसंदेह स्टार्ट अप और युवा उद्यमियों को लेकर लोगों की सोच बदली है। महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोच सकती हैं और बदलते वक्त के साथ हम भी चल सकते हैं। हम विकास का अंग बन सकते हैं। हाल ही में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हैंडलूम का प्रचार किया। हर भारतीय को हैंडलूम को प्रोत्साहन देना चाहिए।

सरकार से प्रोत्साहन की जरूरत है

हम जैसे कुछ उद्यमी हैंडलूम को आगे ले जाने की कोशिश में जुटे हैं मगर सरकार जब तक आर्थिक सहायता नहीं करती और उत्पादों को लेकर जब तक जागरूकता नहीं आती, तब तक कुछ भी करना सम्भव नहीं है। हमें परम्परागत हैंडलूम को शहरी लुक के अनुसार बनाना होगा जिससे यह परिदृश्य बदल सकता है। टेक्सटाइल का बाजार भी बेहद बड़ा है और यह जिस तरीके से चल रहा है, उसको बदलना बेहद कठिन है मगर आज बहुत से युवा पूरी प्रणाली को बदल रहे हैं।

महिलाओं को अपनी सीमाओं से आगे निकलना होगा

महिलाओं को अपनी सीमाओं से निकलकर कड़ी मेहनत करनी चाहिए क्योंकि वे सोचती हैं, दुनिया उससे बहुत आगे है।

 

 

 

उत्सव के इस आनंद को भारतीयता से उज्ज्वल करें

0

या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, देवी पक्ष का आगमन हो चुका है। नवरात्रि आरम्भ हो चुकी है और समूचा भारत अब उत्सव के इस समय में श्रद्धा और उल्लास के रंग में डूबने – उतराने लगा है। बंगाल के हर गली – नुक्कड़ पर माँ के स्वागत के लिए मंडप सजने लगे हैं और ऐसे ही समय में हम उत्सव के वातावरण में तनाव में भी हैं। सीमा पर सर्जिकल स्ट्राइक कर भारतीय सेना ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। भारतीय सेना के शौर्य को सलाम। जाहिर है कि बात अब आगे ही बढ़ेगी और सोशल मीडिया पर भी सेना की प्रशंसा के साथ युद्ध को उकसाने वाले संदेश प्रसारित हो रहे हैं। कई ऐसी जानकारियाँ सेना की शक्ति का प्रचार करने के लिए फैलायी जा रही हैं और ऐसा करने वाले लोग खुद को देशभक्त भी बता रहे हैं मगर यह ध्यान रहे कि सोशल मीडिया पर आतंक फैलाने वालों की नजर भी रहती है।

1Indians wearing traditional attire practice Garba, the traditional dance of Gujarat state ahead of Hindu festival Navratri in Ahmadabad, India, Friday, Oct. 9, 2015. Navaratri, the festival of nights, lasts for nine days, with three days each devoted to the worship of Durga, the goddess of valor, Lakshmi, the goddess of wealth, and Saraswati, the goddess of knowledge. Feasting and fasting takes over normal life for millions of Hindus, and many people join in religious dances in the evenings. The festival will begin from Oct. 13. (AP Photo/Ajit Solanki)

बेहतर होता अगर चैनलों पर भी इस तरह की गोपनीय जानकारियों को बढ़ – चढ़कर  न दिखाया जाता। दिक्कत यह है कि हमारे देश में अब तक इसे रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनी है जबकि यह आज की जरूरत है। घर के ड्राइंगरूम में बैठकर उकसाने वाले संदेश फोन से फैलाना बेहद आसान है मगर ऐसा करके आप देश हित में काम नहीं कर रहे बल्कि सीमा पर दिन – रात पहरा देते जवानों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। याद कीजिए, जब पठानकोट हमला हुआ था तब आतंकी सेना की वर्दी में घुसे थे जो हर गली – मुहल्ले के बाजार में उपलब्ध है। देश हित में इस तरह की चीजों पर रोक लगाना औऱ हमारा सजग रहना बेहद आवश्यक है। युद्ध में अगर कोई मरता है तो वे आम इंसान होते हैं या सेना के जवान होते हैं औऱ राजनेता सिर्फ खेल खेलते हैं। इस समय पाकिस्तान के नेता भी यही कर रहे हैं। युद्ध अंतिम परिणति है औऱ भारत इसे भरसक टालने का प्रयास ही करता रहा है मगर जब अति हो जाए तो जवाब देना जरूरी हो जाता है।

kumhar

अगर आप देश की प्रगति में हाथ ही बँटाना चाहते हैं तो आयातित और ब्रांडेड सामानों से आपको परहेज करना सीखना होगा। भारतीय कारीगरों द्वारा देश में तैयार किए गए हस्तशिल्प खरीदें, उनका सामान खरीदें। अगर लाभ बढ़ेगा तो इन उत्पादों की गुणवत्ता और बढ़ेगी, भारतीय कारीगर मजबूत होंगे, देश का धन देश में रहेगा, देशहित में उपयोग होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। अर्थव्यवस्था मजबूत हुई तो हम शिक्षा, स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्र में और अधिक खर्च कर सकेंगे और सेना को नए और उन्नत हथियार तथा सुविधाएं मिलेंगे। अतः शुरुआत तो हमें और आपको करनी होगी। शक्ति के इस महान पर्व में आइए हम प्रण लें कि हम स्वदेशी का उपयोग करें। इस विजयादशमी पर असत्य पर सत्य की विजय हो औऱ बुराई नष्ट हो, प्रगति का दीया जल उठे। अपराजिता की यही कामना है। अपराजिता की ओर से आप सभी को नवरात्रि, विजयादशमी और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

पिंक सिर्फ फिल्म नहीं, एक जलता हुआ सवाल है

0
देखते समय ‘नो वन किल्ड जेसिका’ याद आती है। वकील के किरदार में को देख ‘दामिनी’ वाले सनी देओल भी याद आते हैं। इन फिल्मों में महिलाओं के साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय की बातें की गई थी। ‘पिंक’ भी यही बात करती है, लेकिन अलग अंदाज में। इस फिल्म में समाज में व्याप्त स्त्री और पुरुष के लिए दोहरे मापदंड पर आधारित प्रश्न ड्राइविंग सीट पर है और कहानी बैक सीट पर।
 ‘पिंक’ उन प्रश्नों को उठाती है जिनके आधार पर लड़कियों के चरित्र के बारे में बात की जाती है। लड़कियों के चरित्र घड़ी की सुइयों के आधार पर तय किए जाते हैं। कोई लड़की किसी से हंस बोल ली या किसी लड़के के साथ कमरे में चली गई या फिर उसने शराब पी ली तो लड़का यह मान लेता है कि लड़की ‘चालू’ है। उसे सेक्स के लिए आमंत्रित कर रही है।
 यह फिल्म उन लोगों के मुंह पर भी तमाचा जड़ती है जो लड़कियों के जींस या स्कर्ट पहनने पर सवाल उठाते हैं। अदालत में अमिताभ बच्चन व्यंग्य करते हैं कि हमें ‘सेव गर्ल’ नहीं बल्कि ‘सेव बॉय’ पर काम करना चाहिए क्योंकि जींस पहनी लड़की को देख लड़के उत्तेजित हो जाते हैं और लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करने लगते हैं। फिल्म में ये सीन इतना कमाल का है कि आप सीट पर बैठे-बैठे कसमसाने लगते हैं। कई बातें कचोटती हैं। ये उन लोगों के दिमाग के जाले साफ कर देती है जिनकी सोच रू‍ढ़िवादी है और जो लड़कियों के आर्थिक स्वतंत्रता के हिमायती नहीं है।
‘पिंक’ में ये सारी बातें बिना किसी शोर-शराबे के उठाई गई है। फिल्म इस बात का पुरजोर तरीके से समर्थन करती है कि लड़कियों को कब, कहां, क्या और कैसे करना है इसके बजाय हमें अपनी सोच बदलना होगी। इस सोच ने लड़कियों की सामान्य जिंदगी को भी परेशानी भरा बना दिया है। वे अपने घर की बालकनी में भी चैन से बैठ नहीं सकती क्योंकि उन्हें घूरने वाले हाजिर हो जाते हैं।
 कहानी को दिल्ली-फरीदाबाद में सेट किया गया है। यह जगह शायद इसलिए चुनी गई क्योंकि पिछले दिनों यही पर महिलाओं पर हुए अत्याचारों की गूंज पूरे देश में सुनाई दी थी। दिल्ली के नाम से ही कई महिलाएं घबराने लगती हैं।  मीनल (तापसी पन्नू), फलक (‍कीर्ति कुल्हारी) और एंड्रिया (एंड्रिया तारियांग) अपने पैरों पर खड़ी लड़कियां है जो साथ में रहती हैं।
एक रात वे सूरजकुंड में रॉक शो के लिए जाती हैं, जहां राजवीर (अंगद बेदी) और उनके साथियों से मुलाकात होती है। मीनल और उसकी सहेलियों का बिंदास अंदाज देख वे अंदाज लगाते हैं कि इन लड़कियों के साथ कुछ भी किया जा सकता है। राजवीर हद पार कर मीनल को छूने लगता है। मीनल अपने बचाव में उसके सिर पर बोतल मार कर उसे घायल कर देती है। राजवीर एक ऐसे परिवार से है जिसकी राजनीति में गहरी दखल है।
मीनल से बदला लेने के लिए राजबीर और उसके दोस्त पुलिस में शिकायत दर्ज करा देते हैं कि मीनल ने उन पर जानलेवा हमला किया है। साथ ही वह कॉलगर्ल है। लड़कियों को मुसीबत में देख दीपक सहगल (अमिताभ बच्चन) उनकी ओर से केस लड़ने का फैसला करता है।
दीपक सहगल के किरदार के जरिये फिल्म में विचार रखे गए हैं जो थोपे हुए नहीं लगते क्योंकि वो फिल्म की कहानी से जुड़े हुए हैं। इंटरवल के बाद फिल्म कोर्ट रूम ड्रामा में बदल जाती है। पिछले महीने रिलीज हुई ‘रुस्तम’ में भी कोर्ट रूम ड्रामा था, लेकिन हकीकत में ये कैसा होता है इसके लिए ‘पिंक’ देखी जानी चाहिए।

पिं क के टिकट बुक करवाने के लिए क्लिक करें 

फिल्म का निर्देशन अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने किया है। उनके निर्देशन पर सुजीत सरकार का प्रभाव नजर आता है। गौरतलब है कि सुजीत इस फिल्म से जुड़े हैं। अनिरुद्ध की प्रस्तुति में खास बात यह रही कि उन्होंने उस एक्सीडेंट को दिखाया ही नहीं जिसके कारण मामला अदालत तक पहुंचा। उस घटना का जैसा वर्णन अदालत को बताया जाता है वैसा ही दर्शकों को पता चलता है। इस कारण दर्शक की अपनी कल्पना के कारण फिल्म में दिलचस्पी बढ़ती है। फिल्म के अंत में क्रेडिट टाइटल्स के साथ वो घटनाक्रम दिखाया गया है।
अनिरुद्ध अपनी बात कहने में सफल रहे हैं जिसके लिए उन्होंने फिल्म बनाई। यह फिल्म केवल महिलाओं या लड़कियों के लिए नहीं बल्कि पुरुषों के लिए भी है। मीनल के किरदार के जरिये अनिरुद्ध ने दिखाया है कि महिलाओं को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
अनिरुद्ध ने कई बातें दर्शकों की समझ पर भी छोड़ी है। मसलन उन्होंने अमिताभ को मास्क पहने मॉर्निंग वॉक करते दिखाया है जो दिल्ली के प्रदूषण का हाल बताता है और राजनीतिक प्रदूषण की ओर भी इशारा करता है। फिल्म में एक किरदार मेघालय में रहने वाली लड़की का है जो बताती है कि उसे आम लड़कियों की तुलना में ज्यादा छेड़छाड़ का शिकार बनना होता है और यह हकीकत भी है।
फिल्म में दो कमियां लगती हैं। अमिताभ के किरदार के बारे में थोड़ा विस्तार से बताया गया होता तो बेहतर होता। साथ ही फिल्म को थोड़ा सरल करके बनाया जाता तो बात ज्यादा दर्शकों तक पहुंचती।
कुछ दिनों बाद अमिताभ बच्चन 74 वर्ष के हो जाएंगे, लेकिन अभी भी उनके पास देने को बहुत कुछ है। ‘पिंक’ में इंटरवल के बाद वे उन्हें ज्यादा अवसर मिलता है जब फिल्म अदालत में सेट हो जाती है। अमिताभ की स्टार छवि को निर्देशक ने उनके किरदार और फिल्म पर हावी नहीं होने दिया है और बच्चन ने भी अपने अभिनय में इसका पूरा ख्याल रखा है। फिल्म के दो-तीन दृश्यों में तो अमिताभ ने अपने अभिनय से गजब ढा दिया है। खासतौर पर उस सीन में जब वे किसी महिला के ‘नो’ के बारे में बताते हैं। वे कहते हैं कि नहीं का मतलब ‘हां’ या ‘शायद’ न होकर केवल ‘नहीं’ होता है चाहे वो अनजान औरत हो, सेक्स वर्कर हो या आपकी पत्नी हो।
तापसी पन्नू का कद ‘पिंक’ के बाद बढ़ जाएगा और उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में गंभीरता से लिया जाएगा। मीनल की दबंगता और झटपटाहट को उन्होंने अच्छे से पेश किया है। फलक के रूप में कीर्ति कुल्हारी प्रभावित करती हैं। एंड्रिया छोटे रोल में अपना असर छोड़ती है। पियूष मिश्रा वकील के रूप में अमिताभ के सामने खड़े रहे और जोरदार मुकाबला किया।
फिल्म का बैकग्राउंड म्युजिक उम्दा है और कई जगह खामोशी का अच्छा उपयोग किया गया है।
जरूरी नहीं है कि हर फिल्म मनोरंजन के लिए ही बनाई जाए। कुछ ऐसी फिल्में भी होती हैं जो अपनी शानदार स्क्रिप्ट और जोरदार अभिनय के कारण आपकी सोच को प्रभावित करती हैं, ‘पिंक’ भी ऐसी ही फिल्म है। जरूर देखी जानी चाहिए।
बैनर : राइजि़ग सन फिल्म्स प्रोडक्शन
निर्माता : रश्मि शर्मा, रॉनी लाहिरी
निर्देशक : अनिरुद्ध रॉय चौधरी
संगीत : शांतनु मोइत्रा
कलाकार : अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, पियूष मिश्रा, अंगद बेदी, कीर्ति कुल्हारी, एंड्रिया तारियांग
(साभार – वेब दुनिया)

मुझे हर दिन छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ता था: तापसी पन्नू

0

हाल में रिलीज़ हुई फ़िल्म पिंक में मुख्य किरदार निभाने वाली तापसी पन्नू कहती हैं कि ये फ़िल्म समाज की सच्चाई के करीब है इसलिए लोगों को भा रही है.

वो कहती हैं, “देखिए यह फ़िल्म सच्चाई के क़रीब है, इसलिए हिट हो रही है और लोगों के दिलो को छू रही है. मुझे अपने कॉलेज के दिनों में लगभग हर दिन छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ता था और तब चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती थी.”

तापसी के मुताबिक, “हमारा समाज इसी तरह का है कि आप किसी लड़के को पलट कर जवाब नहीं दे सकते क्योंकि इसमें बदनामी लड़की की ही होगी लेकिन आज हालात अलग हैं और आज किसी तरह की़ प्रताड़ना सहन करना ग़लत होगा. अगर आपके साथ कुछ ग़लत हो रहा हो तो पलट के जवाब दो, क्योंकि चुप रहना ही सबसे बड़ी कमज़ोरी है.”

तापसी ने पुरुषों से भी अनुरोध किया कि एक औरत उनके घर और देश की 50 फ़ीसदी हिम्मत है ऐसे में उनपर हावी ना हों, बल्कि उनका साथ दें ताकि समाज तरक्क़ी कर सके.

फ़िल्म में एक दमदार किरदार निभा रही कीर्ति कुल्हरि भी मानती हैं कि चाहे वो महिला हो या पुरूष हर किसी को प्यार, रिश्ते और सेक्स को ज़ाहिर करने का हक़ है. अगर किसी ने इन जज्बातों को महसूस किया है तो क्या बुराई है? लड़का हो या लड़की, उसकी वर्जिनिटी उसका निजी मामला है लेकिन भारत में हम इस मामले को सामाजिक और नैतिकता के कठघरे में खड़ा कर देते हैं.”

इस फ़िल्म के अचानक चर्चा में आ जाने से इस फ़िल्म की महिला कलाकारों को ज़रा भी हैरानी नहीं है.

कीर्ति कहती हैं, “हम जब सेट पर पहुंचे और अपने डॉयलॉग समझे, हमें वहां दूसरे लोगों के चेहरे और भाव देख कर समझ आ गया था कि यह फ़िल्म कुछ ऐसा कह रही है जो अलग है.”

तापसी आगे कहती हैं, “इस फ़िल्म के कलाक़ार होने के बावजूद इस फ़िल्म को देखने के बाद हम भावुक हुए, रोए, क्योंकि यह सारा भेदभाव, किसी न किसी शक्ल में हमारे साथ होता है.”

फ़िल्म में मेघालय से आई अभिनेत्री एंड्रिया तरांग भी हैं जो बताती हैं, “उत्तर-पूर्व भारत से होने की वजह से वैसे ही मुझे ज़्यादा भेदभाव झेलना पड़ता है और फिर एक लड़की होना भी अपने आप में मुश्किल है ऐसे में इस फ़िल्म से मैं ख़ुद को एक दर्शक के तौर पर जोड़ पाती हूं.”

फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अनुभव को लेकर तापसी और कीर्ति तो ज़्यादा डरे हुए नहीं दिखे लेकिन आंद्रिया ने कहा, “मैं एक बार भी उनकी आंखो में आंखे नहीं डाल पाई और मैं इतना घबरा रही थी उनके आगे कि कोर्ट रुम के सीन में मैं उनको देखती ही नहीं थी.”

तीनों ही महिलाएं इस फ़िल्म के बाद अपने आसपास आए लोगों के बर्ताव में भी बदलाव महसूस कर रही हैं और वो कहती हैं कि ऐसी फ़िल्मों की भारत जैसे समाज को बड़ी ज़रूरत है जहां अभी भी लड़की का जींस पहनना गुनाह माना जाता है औऱ बेटी को पराया धन या बोझ समझा जाता है.

 

कामकाजी महिलाओं के लिए दिल्ली निचले स्थान पर, सिक्किम अव्वल

0

वाशिंगटन, : भारत में महिलाओं के कार्य करने की स्थिति के लिहाज से पूर्वोत्तर का छोटा राज्य सिक्किम जहां पहले स्थान पर है, वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सबसे निचले पायदान पर है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

यह रिपोर्ट अमेरिका के प्रमुख शोध संस्थान सेंटर फॉर स्ट्रेटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज :सीएसआईएस: तथा नाथन एसोसिएट्स ने संयुक्त रूप से तैयार की है। रिपोर्ट में सिक्किम को सर्वाधिक 40 अंक जबकि दिल्ली को केवल 8.5 अंक मिले हैं जो राष्ट्रीय राजधानी की स्थिति को बयां करता है।

राज्यों की रैंकिंग चार मुख्य तत्वों..कारखानों, खुदरा क्षेत्र तथा आईटी उद्योग में महिलाओं के कामकाजी घंटे पर कानूनी प्रतिबंध, यौन उत्पीड़न जैसे महिला कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले अपराध को लेकर राज्य की आपराधिक न्याय व्यवस्था की त्वरित प्रतिक्रिया, कुल कर्मचारियों में महिला कामगारों का प्रतिशत तथा राज्य की स्टार्टअप और औद्योगिक नीतियों में महिला उद्यमियों के लिये प्रोत्साहन..के आधार पर की गयी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘लेकिन कार्य करने के लिहाज से पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम सबसे आगे है। इसकी वजह महिला कार्यबल की उंची भागीदारी, महिलाओं के कामकाजी घंटे को लेकर पाबंदी का न होना तथा महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर कार्रवाई की उच्च दर है।’’ इस सूची में सिक्किम के बाद तेलंगाना :28.5 अंक:, पुडुचेरी :25.6:, कर्नाटक :24.7 अंक:, हिमाचल प्रदेश :24.2: आंध्र प्रदेश :24.0:, केरल :22.2 अंक:, महाराष्ट्र :21.4 अंक:, तमिलनाडु :21.1 अंक: तथा छत्तीसगढ़ :21.1: का स्थान है।

 

ब्रिटिश आर्मी में ट्रांसजेंडर पहली महिला के तौर देगी फ्रंटलाइन पर सेवा

0

लंदन.24 साल की ट्रांसजेंडर ब्रिटिश आर्मी की फ्रंटलाइन में सेवा पाने वाली पहली महिला बनी है। कोले एलेन नाम की इस ट्रांसजेंडर महिला ने वर्ष 2012 में स्कॉट गार्ड ज्वाइन किया था। तब वह पुरुष थी। पिछले महीने ही महिला बनने के लिए उसने हॉर्मोन थेरेपी लेना शुरू किया। नाम बदलकर कोले एलेन रखा।

उसे पहले लगा था कि ऐसा करने के बाद वह आर्मी में नहीं रह पाएगी। लेकिन जब उसने करियर ऑफिसर से बात की, उसे कहा गया कि वह अपने उसी राइफलमैन और आर्म ट्रक की ड्राइवर की भूमिका में रह सकती है जिसमें पहले थी।
एलेन ने कहा कि आर्मी में उसके नाम व लिंग परिवर्तन को लेकर सारे पेपर वर्क पूरे किए जा चुके हैं। बस नया पासपोर्ट आना बाकी है, जो जल्दी ही हो जाएगा। ब्रिटिश आर्मी इसी साल फ्रंटलाइन में महिलाओं को शामिल करने वाली थी। लेकिन इसकी आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही आर्मी को इस भूमिका में पहली महिला मिल गई।

फील्ड आर्मी के कमांडर जनरल सर जेम्स एवरर्ड ने कहा कि ग्राउंड क्लोज कॉम्बैट यूनिट में पहली महिला को पाकर आर्मी गर्व महसूस कर रही है।

 

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजनाः सभी के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम

0
  • अजय महमिया

  • ajay-mahmiaप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बलिया में 1 मई, 2016 को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरूआत की थी। बाद में 14 अगस्त, 2016 को पश्चिम बंगाल में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इस योजना को कोलकाता में नजरूल मंच से शुरू किया गया। देशभर के गांवों को धुआं रहित बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार बनाने की दिशा में यह पहल की गई थी। अब यह योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाओं को सम्मान देने के अवसर के रूप में पहचान बना चुकी है। हर घर को एलपीजी कनेक्शन देने वाली यह योजना महिलाओं को एक विशेष पहचान तो देती ही है साथ ही धुआंरहित वातावरण, प्रदूषण में कमी और स्वस्थ जीवन देने में भी मील का पत्थर साबित हो रही है।

पश्चिम बंगाल में लगभग 2 करोड़ 3 लाख परिवार हैं, जिनमें से 1 करोड़ 6 लाख परिवारों को इस योजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परिवारों को 2019 तक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत लाना है। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के राज्य में दस बॉटलिंग प्लांट हैं और वर्तमान एलपीजी ग्राहकों के लिए इनकी संयुक्त क्षमता 990 टीएमटीपीए है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लक्ष्य को देखते हुए सभी तेल विपणन कंपनियां आने वाले दिनों में अपनी बॉटलिंग क्षमता को बढ़ाएंगी, जिससे कि एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती हुई मांग को पूरा किया जा सके। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में पहले ही साढ़े छह लाख से ज्यादा लोग प्रतीक्षा सूची में हैं। सरकार ने सभी तेल कंपनियों को आदेश जारी कर सिलेंडरों, रेगुलेटरों और सहायक उपकरणों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

इस योजना को अधिक कारगर बनाने और बड़े स्तर पर लागू करने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत लाभान्वितों को एलपीजी कनेक्शन बांटने के लिए विशेष उज्ज्वला मेलों का आयोजन भी किया जा रहा है। 15 अगस्त से 17 अगस्त, 2016 के बीच सभी एलपीजी वितरण केन्द्रों पर इन मेलों का आयोजन किया जा रहा है। सरकार के आदेश के अनुसार 70वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर स्थानीय स्वतंत्रता सैनानी, पूर्व सैनिक और शहीद सैनिकों की विधवाओं को इन मेलों में आमंत्रित किया गया है।

इस योजना का मुख्य मंत्र है- स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन- महिलाओं को मिला सम्मान। राष्ट्रीय स्तर पर अगले तीन सालों में गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को पांच करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए जाएंगे। साथ ही यह योजना इन परिवारों को हर कनेक्शन पर 1600 रुपए की आर्थिक मदद भी देती है। इस योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया के नाम पर कनेक्शन दिया जाएगा। तेल विपणन कंपनियां चूल्हे और सिलेंडर के पहले भराव पर ईएमआई की सुविधा भी प्रदान करेंगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों में इस्तेमाल होने वाले हानिकारक ईंधनों की जगह स्वच्छ और अधिक प्रभावी एलपीजी ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। विशेष तौर पर ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए बीपीएल परिवार की महिला के नाम पर ही इस योजना के अंतर्गत कनेक्शन दिया जाएगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय योजना के अंतर्गत पहचाने गए बीपीएल परिवारों का डाटा सामाजिक, आर्थिक जनगणना में उपलब्ध करा रहा है। इस योजना को आगे ले जाने और इसे जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने के लिए तेल विपणन कंपनियों ने जिला नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। ये अधिकारी इस योजना को हर जिले में लागू कराने में वाहक का काम करेंगे।

pm-modi-ji-1462097162

केन्द्र सरकार ने उज्ज्वला योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू कराने के लिए पहले ही 2016-17 वित्त वर्ष में दो हजार करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। चालू वित्त वर्ष में सरकार लगभग 1 करोड़ 5 लाख बीपीएल परिवारों को एलपीजी कनेक्शन देगी। अगले तीन सालों में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने आठ हजार करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। गिव इट अप अभियान के तहत एलपीजी सब्सिडी में बचाई गई राशि इस योजना में इस्तेमाल की जा रही है। देश के इतिहास में पहली बार है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस तरह की आसाधारण योजना लागू की है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लक्ष्य महिलाओं को हानिकारक ईंधन से छुटकारा दिलाकर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में आगे ले जाना है। इस योजना का अन्य उद्देश्य हानिकारक ईंधन से होने वाली मृत्यों की संख्या में कमी लाना है और साथ ही लोगों को अस्वच्छ ईंधन से घर में होने वाले वायु प्रदूषण से बचाना है।

गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की महिला उज्ज्वला योजना केवाईसी आवेदन पत्र को भरकर इस योजना के लिए आवेदन कर सकती है। ऐसे आवेदकों को जरूरी दस्तावेजों के साथ दो पेज का आवेदन पत्र भरना होगा। इस आवेदन पत्र में पत्राचार विवरण, जन धन और अन्य बैंक खाता नंबर, आधार कार्ड नंबर इत्यादि भरना होगा। आवेदकों को किस तरह का सिलेंडर चाहिए यह बात भी इस फॉर्म में उल्लेखित करनी होगी, जैसे कि 14.2 किलोग्राम या फिर 5 किलोग्राम का सिलेंडर। उज्ज्वला योजना के लिए केवाईसी एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड कर जरूरी दस्तावेजों के साथ नजदीकी एलपीजी आउटलेट पर जमा किया जा सकता है। इस फॉर्म के साथ जमा होने वाले जरूरी दस्तावेजों में निकाय अध्यक्ष या पंचायत प्रधान द्वारा जारी बीपीएल प्रमाण पत्र, बीपीएल राशन कार्ड, वोटर आई कार्ड या आधार कार्ड जैसे एक फोटो पहचान पत्र और आवेदक की हाल ही में खिंची गई पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं।

भारत में 24 करोड़ से भी ज्यादा परिवार रहते हैं जिनमें से लगभग 10 करोड़ परिवार अभी भी एलपीजी गैस से वंचित हैं और इन लोगों को खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयला और गोबर पर निर्भर रहना पड़ता है। प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना की शुरुआत के बाद यह योजना मई में उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात और जून 2016 में उत्तराखंड, ओडिशा और बिहार में लागू की गई। पिछले रविवार को पश्चिम बंगाल में इस योजना के राज्य स्तर पर लागू होने से पहले ही पिछले महीने इस योजना का शुभारंभ मध्य प्रदेश में किया गया था। (पीआईबी)

( लेखक *उप-निदेशक (मीडिया एवं कम्युनिकेशन), पीआईबी, कोलकाता है)

 

 

 बंगलुरु की यह २२ वर्षीया ऑटो चालक कर रही है आईएएस की तैयारी

0

बंगलुरु की भागती भीड़ में एक औरत चुपचाप लोगों की इस धारणा को बदलने में लगी है कि कोई भी पेशा किसी लिंग विशेष के लिए नही होता। और कई पेशे ऐसे हैं जो महिलाओं के लिए भी उतने ही स्वीकार्य हैं जितने की पुरुषो के लिए।

२२ वर्षीय येलम्मा अपना गुज़ारा ऑटो रिक्शा चला कर करती है । इसके साथ ही अपने सपनो को पूरा करने के लिए वो आईएएस की तैयारी भी कर रही है।

१८ वर्ष की उम्र में ही येलम्मा की शादी जबरन एक फूल वाले से कर दी गयी थी। आज उसके पति इस दुनिया में नही हैं और वो एक बच्चे की माँ है। उसने तय किया कि वह रिश्तेदारों के भरोसे न रह कर  अपने और अपने बच्चे की परवरिश खुद करेगी ।

उसने किराए पर एक ऑटोरिक्शा लेकर अपने देवर से रिक्शा चलाना सीखा।  उसके औरत होने के कारण ऑटोवाले उसे अपना ऑटो किराए पर देने में हिचकिचाते थे  और ज्यादातर लोग मना कर देते थे। आखिरकार एक मैकेनिक, उसे १३० रूपये प्रतिदिन के हिसाब से अपना ऑटो किराए पर देने के लिए तैयार हो गया। वो अब हर दिन सुबह ६ बजे से रात के ८ बजे तक ऑटो चलाती है। इसी बीच में वह अखबार और पत्रिकाएँ भी बाँटती है। फिलहाल वह बारहवीं की परीक्षा की तैयारी कर रही है। उसका उद्देश्य ‘आई ए एस’ की तैयारी करना है। वो चाहती है कि देश की नौकरशाह प्रणाली का हिस्सा बन कर वह अपने जैसी दूसरी महिलाओं की मदद कर सकेगी।

वो कहती है कि हालाँकि पुरुष ऑटो ड्राईवर उस से खुश नही हैं ( उनका कहना है की येल्लमा उनके ग्राहक छीन लेती है ) पर उसके ग्राहकों में उसे बस उत्सुकता और सदभाव ही मिलता है। वो लोग उसे प्रोत्साहित भी करते हैं और मीटर से अधिक पैसे भी दिया करते हैं। येलम्मा हर दिन लगभग ७०० से ८०० रूपये कमा लेती है , किराया और इंधन के पैसे भरने के बाद उसके पास लगभग आधे पैसे बचते हैं।

(साभार – द बेटर इंडिया)

नवरात्र 2016 पर है इस बार कई अच्‍छे महासंयोग

0

16 वर्ष बाद फिर नवरात्र में विशेष संयोग बन रहा है। दूज तिथि लगातार दो दिन होने के कारण शारदीय नवरात्र नौ की जगह 10 दिन का होगा। श्राद्ध पक्ष समाप्त होते ही, शारदीय नवरात्र आरंभ हो रहे हैं। 1 अक्टूबर से नवरात्र आरंभ होंगे। इस बार दुर्गा जी अश्व पर आएंगी और भैंसा पर बैठकर जाएंगी।

शारदीय नवरात्र अश्विन मास के शुक्ल पक्ष से आरंभ होंगे। इस बार गजकेशरी योग में शारदीय नवरात्र होंगी। ऐसा इसीलिए कि गुरु व चन्द्रमा एक साथ कन्या राशि में लग्न स्थान में होने से गजकेशरी महासंयोग बन रहा है।

शारदीय नवरात्र में शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। 1 अक्टूबर से शुरू होकर शारदीय नवरात्र उत्सव 10 अक्टूबर तक रहेगा।

विशेष यह है कि इस बार मां दुर्गा का आगमन अश्व से होगा व गमन भैंसा पर होगा, जो अति शुभ है। देवीपुराण में उल्लेखित है कि नवरात्र में भगवती के आगमन व प्रस्थान के लिए वार अनुसार वाहन बताए गए हैं।

देवी भागवत में नवरात्र के प्रारंभ व समापन के वार अनुसार मां दुर्गा के आगमन प्रस्थान के वाहन इस प्रकार बताए हैं।

आगमन वाहन- रविवार व सोमवार को हाथी, शनिवार व मंगलवार को घोड़ा, गुरुवार व शुक्रवार को पालकी, बुधवार को नौका आगमन होता है।

प्रस्थान वाहन-रविवार व सोमवार भैसा, शनिवार और मंगलवार को सिंह, बुधवार व शुक्रवार को गज हाथी गुरुवार को नर वाहन पर प्रस्थान करती हैं।

शनिवार के दिन हस्त नक्षत्र में घट स्थापना के साथ शक्ति उपासना का पर्व काल शुरु होगा। शनिवार के दिन हस्त नक्षत्र में यदि देवी आराधना का पर्व शुरू हो, तो यह देवीकृपा व इष्ट साधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

10 दिन विशेष, 11 अक्टूबर को मनेगा दशहरा

  • 1 अक्टूबर- घटस्थापना, गजकेशरी योग।
  • 2 अक्टूबर- द्वितीया, द्विपुष्करयोग
  • 3 अक्टूबर- द्वितीया,रवियोग
  • 4 अक्टूबर- तृतीया,रवियोग
  • 5 अक्टूबर- चतुर्थी,रवियोग, अमृतसिद्धियोग
  • 6 अक्टूबर- पंचमी षष्ठी, सर्वार्थ सिद्धियोग,रवियोग
  • 7 अक्टूबर- षष्ठी रवियोग
  • 8 अक्टूबर – पर्जन्य सप्तमी,सरस्वती पूजन
  • 9 अक्टूबर- महाष्टमी रवियोग सर्वार्थ सिद्धियोग
  • 10 अक्टूबर – महानवमी, रवियोग

 

कैदी गढ़ रहे हैं मां दुर्गा की प्रतिमा

0

कोलकाता अलीपुर जेल के कैदी आगामी दुर्गा पूजा त्यौहार के लिए शक्ति की देवी दुर्गा की प्रतिमा को बनाने में लगे हुए हैं। दो पूजा आयोजकों द्वारा दिये गये समय के अनुसार प्रतिमा बनाने के कार्य को पूरा करने के लिए चंदन चंद्रा के नेतृत्व में जेल के कैदियों का दल पिछले एक माह से दिन-रात काम में लगा हुआ है।

अलीपुर जेल के अधीक्षक स्वरूप मंडल ने कहा, ‘‘हर साल हम लोग अपने जेल परिसर में दुर्गा पूजा का आयोजन करते हैं। पिछले वर्ष अलीपुर जेल के लिए चंदन और उनकी टीम द्वारा बनायी गयी प्रतिमा इतनी अच्छी थी कि कुछ आयोजकों ने उससे मूर्ति बनवाने का निर्णय किया।’’ चंदन और उनके दल के सदस्य अलीपुर जेल के लिए भी मूर्ति बनाने के काम में जुटे हैं।
मंडल के अनुसार चंदन को अलग वार्ड आवंटित किया गया है और प्रतिमा बनाने के लिए उपकरण और कच्चे माल मुहैया कराये गये हैं।
जेल अधिकारियों के अनुसार हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया चंदन पश्चिमी मिदनापुर जिले का रहने वाला है और पिछले 10 वषरें से अधिक समय से जेल में है।
अधिकारियों के अनुसार कैदी बिना कोई शुल्क लिये काम कर रहे हैं और दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए उन्हें जो रूपये मिलेंगे, उसे कैदी कल्याण कोष में जमा किया जायेगा।