Tuesday, March 24, 2026
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आपकी सेहत से जुड़ा मामला है योनि से निकलने वाला स्त्राव

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अधिकाँश महिलाएं जो युवावस्था में पहुँच चुकी हैं उन्हें योनि से होने वाले स्त्राव का अनुभव आता ही है तथा यह बिलकुल सामान्य है। योनि से आने वाली दुर्गंध के प्रमुख कारण योनि से होने वाला स्त्राव सफ़ेद या दूधिया तरल पदार्थ होता है जो योनि और गर्भाशय की ग्रंथियों द्वारा स्त्रावित किया जाता है तथा इसका मुख्य कार्य बैक्टीरिया तथा मृत कोशिकाओं को बाहर निकालना है ताकि योनि स्वस्थ रहे। अधिकांश मामलों में योनि से होने वाला स्त्राव पूरी तरह सामान्य होता है। हालाँकि इसके गाढ़ेपन, बदबू, रंग आदि के द्वारा हम जान सकते हैं कि चिंता करने का समय आ गया है। हालाँकि योनि को स्वस्थ रखने और योनि को शुष्कता से बचाए रखने के लिए बहुत थोड़े स्त्राव की आवश्यकता होती है परन्तु यदि यह असामान्य दिखे तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अत: योनि से होने वाले स्त्रावों के बारे में बताया गया है जिनके बारे में आपको जानना बहुत आवश्यक है।

ओवल्युशन (डिम्ब उत्सर्जन) योनि से होने वाले स्त्राव का मुख्य कारण ओवल्युशन है। यदि आप देखती हैं कि यह स्त्राव पतला, चिकना और सफ़ेद है तो इसका अर्थ है कि आपका डिम्ब उत्सर्जित हो रहा है और महीने के इस समय के दौरान आपके गर्भवती होने की संभावना अधिक होती है।

गर्भावस्था योनि से होने वाले स्त्राव का एक अन्य कारण गर्भावस्था है। यदि स्त्राव की मात्रा अधिक है तथा यह पीले रंग का है तो यह आपके गर्भवती होने का संकेत हो सकता है।

लेबर(प्रसव पीड़ा) यदि आप गर्भवती हैं तथा आप देखती हैं कि स्त्राव बलगम के जैसा है और अधिक मात्रा में हो रहा है तो इसका अर्थ है कि आपको जल्द ही प्रसव पीड़ा शुरू होने वाली है।

यीस्ट संक्रमण योनि से होने वाले स्त्राव का एक अन्य कारण यीस्ट इन्फेक्शन (संक्रमण) हो सकता है। यह बैक्टीरिया के कारण होता है जिसमें स्त्राव गाढ़ा, सफ़ेद होता है तथा इसमें गंदी बदबू भी होती है।

क्लैमाइडिया संक्रमण असामान्य योनि स्त्राव का एक अन्य कारण यौन संक्रमित बीमारियाँ भी हो सकती हैं जिसे क्लैमाइडिया कहा जाता है। इसमें झागदार, पीला स्त्राव होता है तथा साथ साथ योनि में खुजली भी होती है।

लैंगिक उत्तेजना योनि से होने वाले स्त्राव का एक कारण लैंगिक उत्तेजना भी है। जब किसी स्त्री में कामोत्तेजना जागृत होती है तो उसकी योनि से स्त्राव शुरू हो जाता है। यह स्त्राव पतला, साफ़ होता है तथा यह बहुत ही सामान्य बात है।

डिहाईड्रेशन यदि आप डिहाईड्रेटेड हैं और उचित मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन नहीं कर रहे हैं तो इसके कारण पीले, गाढ़े रंग का स्त्राव हो सकता है जो स्वास्थ्य के ठीक न होने का संकेत है। अत: तरल पदार्थों का अधिक मात्र में सेवन करें और स्वयं को हाईड्रेटेड रखें।

नगरोटा : आर्मी अफसरों की पत्नियों की बहादुरी से एक बड़ा हादसा टला!

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जम्मू के नगरोटा आर्मी बेस में हुए दो बड़े आतंकी हमले  में 7 जवानो समेत 2 अफसर शहीद हो गए और 8 जवान घायल हुए। पर ये हादसा और भी भयावह हो सकता था यदि सेना के दो अफसरों की पत्नियों ने हिम्मत न दिखाई होती।

एनकाउंटर के दौरान जब ये आतंकी आर्मी क्वार्टर्स में घुसने की कोशिश कर रहे थे तो इन दो महिलाओं ने अपनी सूझ बुझ और दिलेरी से इन्हें रोका। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ हमले के दौरान ये दोनों महिलायें अपने नवजात शिशुओं के साथ अपने क्वार्टर में मौजूद थी। हमले की जानकारी होते ही इन दोनों ने घर का सारा सामान  इकठ्ठा किया और आर्मी क्वार्टरर्स के मुख्य दरवाज़े के आगे लगाकर आतंकियों के क्वार्टर्स में घुसने का रस्ता बंद कर दिया।

हथियारों से लैस ये आतंकी पुलिस की वर्दी में आये थे। आर्मी हेडक्वार्टर से 3 किमी दूर एक आर्मी यूनिट पर इन आतंकियों ने सबसे पहले हमला किया। इसके बाद इनका इरादा आर्मी क्वार्टर्स में घुसने का था ताकि ये आर्मी अफसरों के परिवार वालो तथा कुछ अफसरों को भी बंदी बना सके।

पीटीआई से बात करते हुए एक सेना के अफसर ने कहा, “सेना के इन दो अफसरों की पत्नियों ने उस वक़्त अपने अदम्य साहस का परिचय दिया जब हमले के दौरान इनके पति नाईट ड्यूटी पर थे। उन्होंने आर्मी क्वार्टर्स के मुख्य द्वार पर घर का सारा सामान रखकर रस्ता बंद कर दिया। इससे आतंकवादियों के लिए घर में दाखिल होना मुश्किल हो गया।”

सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष मेहता के मुताबिक, हमले के वक्त दो इमारतों में बने फैमिली क्वार्टर्स में 12 जवान, दो महिलाएं और दो बच्चे मौजूद थे। बाद में सिक्युरिटी फोर्सेस ने इन सभी को सुरक्षित वहां से निकाल लिया।

 

स्टाइल को नहीं लगेगी सर्दियों की नजर

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ठंड यानि सर्दियों का मौसम जहाँ हम अपने फैशन और कपड़ो को लेकर काफी कॉन्शियस हो जाते है, की अब क्या पहने और क्या नहीं पहने? आज हर लड़की हर कोई अपने ग्लैमरस लुक के साथ रहना चाहती है| ट्रेंडी लुक पाने के लिए आपको स्वेटर्स भी ऐसा पहनने की जरुरत होती है| जिससे आपका लुक स्टाइलिश लगे|

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अकसर हमने लोगो को यही कहते सुना है की ठंड के दिनों में स्टाइलिस्ट दिखना थोड़ा मुश्किल है|  हम आपको बताएंगे कि कैसे ठंड के दिनों में भी फैशनेबल दिख सकती हैं। आप फैशनेबल स्वेटर्स, हाई हील्स और मैचिंग दस्ताने से आप अपने लुक एक दम परफेक्ट बना सकती है।

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स्वेटर्स में आई हुई नयी वैरायटी के बारे में आप जानकर खुश हो जायेंगी  क्योंकि आज कल टर्टल नेक, स्ट्रेच क्रीप वी नेक और भी कई लेटेस्ट फैशन में शामिल हो चुके है। गोल गले का पैटर्न भी फिर से आ गया है। लड़की के लिए स्वेटर्स पैटर्न के थ्री फोर्थ स्लीव्स के कुर्ते अभी काफी ट्रेंड में है। प्रिंटेड लॉन्ग स्वेटर्स, कॉलनेक डॉलमेन स्वेटर्स के साथ ही स्वेटर्स में ट्यूनिक और ट्विस्टेड रिब्ड भी स्टाइलिश लगता है|

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अल्ट्रा कोजी और साइड पॉकेट वाले स्वेटर्स

स्टाइलिश रहना आज हर कोई चाहता है, तो हाल ही में चल रहे हाथ से बुने हुए ओपन फ्रंट लॉन्ग स्वेटर को आप पहन कर खुद में आरामदायक महसूस कर सकती है, इसके नीचे आप जीन्स, लेगिंग्स या फिर डिज़ाइनर सलवार भी पहन सकती है। अगर इनमे साइड पॉकेट्स के बारे में बात करे तो ऐसे पैटर्न आपके स्टाइल को पूरा करता है।

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हाथो से बुने स्वेटर्स और शॉल

वक्त चाहे कितना भी बदले मगर हाथ से बुने स्वेटरों में जो अपनापन और गरमाहट मिलती है, उसका कोई विकल्प नहीं है और यही वजह है कि ये सदाबहार हैं। लेटेस्ट ट्रेंड्स में इन्हे भी खूब पसंद किया जा रहा है और पहना जा रहा है। इसके अतिरिक्त शॉल आपका साथ साड़ी से लेकर जींस पहनने में भी देगी।

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स्टाइलिश ग्लव्स

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हम खुद को ठंड में बचाने के लिए स्टाइलिस्ट स्वेटर्स, जैकेट्स, पुलोवेर्स तो पहनते है, लेकिन अपने हाथो के लिए पहने गए ग्लव्स के इस्तेमाल से हमारा पूरा फैशन ख़राब हो जाता है लेकिन आज कल कई ऐसे नए फैशन के दस्ताने यानि ग्लव्स मार्किट में आ चुके है, जिन्हे आप आसानी से कैरी कर सकती है।  कई मशूर हस्तियों को ध्यान में रखते हुए मार्किट में कई प्रकार के दस्ताने मिल रहे है।  जिन्हे पहन कर आप और भी ज्यादा फेशनेबल दिख सकती है। अगर आपकी हाईट लम्बी है, तो इसके लिए आप मार्किट में मिल रहे लॉन्ग ग्लव्स को भी अपने हाथो पर पहन कर अपने लुक को और बेहतर बना सकती है। सिर्फ इतना ही नहीं आप अपने पसंदीदा डिज़ाइन और ड्रेस के मैचिंग के ग्लव्स को भी खरीद सकती है|

 

गीता में छुपा है जीवन का सार, छिपी है जीवन की राह

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गीता में जीवन का सार है. श्री कृष्ण ने महाभारत युद्ध में अर्जुन को कुछ उपदेश दिए थे, जिससे उस युद्ध को जीतना पार्थ के लिए आसान हो गया। यहां दिए गए गीता के कुछ उपदेशों को अपने जिंदगी में शामिल करके आप भी अपने लक्ष्य को पाने में सक्षम होंगे..

भगवान प्रत्येक इंसान से विभिन्न मुद्दों पर सवाल करते हैं और उन्हें मायावी संसार को त्यागने को कहते हैं। उनका कहना है कि पूरी जिंदगी सुख पाने का एक और केवल एक ही रास्ता है और वह है उनके प्रति पूरा समर्पण।

तुम क्यों व्यर्थ चिंता करते हो? तुम क्यों भयभीत होते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा का न कभी जन्म होता है और न ही यह कभी मरता है।

जो हुआ वह अच्छे के लिए हुआ, जो हो रहा है वह अच्छे के लिए हो रहा है और जो होगा वह भी अच्छे के लिए ही होगा। भूत के लिए पश्चाताप मत करो, भविष्य के लिए चिंतित मत हो, केवल अपने वत्र्तमान पर ध्यान लगाओ।

तुम्हारे पास अपना क्या है जिसे तुम खो दोगे? तुम क्या साथ लाए थे जिसका तुम्हें खोने का डर है? तुमने क्या जन्म दिया जिसके विनाश का डर तुम्हें सता रहा है? तुम अपने साथ कुछ भी नहीं लाए थे। हर कोई खाली हाथ ही आया है और मरने के बाद खाली हाथ ही जाएगा।

जो कुछ भी आज तुम्हारा है, कल किसी और का था और परसों किसी और का हो जाएगा। इसलिए माया के चकाचौंध में मत पड़ो। माया ही सारे दु:ख, दर्द का मूल कारण है।

परिवर्तन संसार का नियम है। एक पल में आप करोड़ों के स्वामी हो जाते हो और दूसरे पल ही आपको ऐसा लगता है कि आपके पास कुछ भी नहीं है।

न तो यह शरीर तुम्हारा है और न ही तुम इस शरीर के हो। यह शरीर पांच तत्वों से बना है- आग, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश। एक दिन यह शरीर इन्हीं पांच तत्वों में विलीन हो जाएगा।

अपने आप को भगवान के हवाले कर दो। यही सर्वोत्तम सहारा है। जो कोई भी इस शत्र्तहीन सहारे को पहचान गया है वह डर, चिंता और दु:खों से आजाद रहता है।

पवित्र गीता के बारे में कुछ विद्वानों की राय
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जब भी मैं भगवद्गीता पढ़ता हूं तो पता चलता है कि भगवान ने किस प्रकार संसार की रचना की है। इसके सामने सब कुछ फीका लगता है।

महात्मा गांधी
जब भी मैं भ्रम की स्थिति में रहता हूं, जब भी मुझे निराशा का अनुभव होता है और मुझे लगता है कि कहीं से भी कोई उम्मीद नहीं है तब मं भगवद्गीता की शरण में चला जाता हूं। ऐसा करते ही मैं अथाह दु:खों के बीच भी मुस्कराने लग जाया करता हूं। वे लोग जो गीता का अध्ययन और मनन करते हैं उन्हें हमेशा शुद्ध विचार और खुशियां मिला करती हैं और प्रत्येक दिन वे गीता के नए अर्थ को प्राप्त करते हैं।

हर्मन हीज
भगवद्गीता का सबसे बड़ा आश्चर्य जीवन की बुद्धिमानी के बारे में रहस्योद्घाटन करना है जिसकी मदद से मनोविज्ञान धर्म के रूप में फलता फू लता है।

आदि शंकर 
भगवद्गीता के स्पष्ट ज्ञान को प्राप्त करने के बाद मानव अस्तित्व के सारे उद्देश्यों की पूर्ति हो जाती है। यह सारे वैदिक ग्रंथों का सार तत्व है।

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भगवद्गीता को पूरी तरह समझने के लिए अपनी आत्मा को इस काम में लगाना होगा।

 

दी भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज में कम्युनिक2016

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दी भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज के विद्यार्थियों के नेतृत्व में आयोजित हर वर्ष की तरह कम्युनिक 2016 का आयोजन18 नवंबर को किया गया। इसमें कोलकाता के12कॉलेजों ने भाग लिया जिनमें दी भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज, श्री शिक्षायतन कॉलेज, जे डी बिरला कॉलेज, आशुतोष कॉलेज,डिपार्टमेंट अॉफ लॉ, कलकत्ता युनिवर्सिटी, दी विवेकानंद कॉलेज, जादवपुर युनिवर्सिटी, दी गोयनका कॉलेज और दी आई बी एस प्रमुख रहे।

इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में अपनी प्रतिभा को उभारने का अवसर देना है। दी भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज ने इस कार्यक्रम को एक मंच प्रदान किया जिसमें रचनात्मक लेखन, वादविवाद,पंख की कलम, ससंद से सड़क तक, भारतीय पार्लियामेंट का मॉडल जैसे विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों की टीमों ने दिनभर भाग लिया। यह आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य में एक अच्छा नागरिक बनने का अवसर देता है।
भवानीपुर कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ.सुमन मुखर्जी ने उद्घाटन सत्र में दिए अपने भाषण में सभी कॉलेज के विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया एवं डीन प्रो दिलीप शाह, श्री चंपकलाल दोशी ने शुभकामनाएं दीं।कम्युनिक2016में जे डी बिआई, बीकॉम,जेडीबीआई बीबीए कॉलेज के विद्यार्थियों ने द्वितीय रैंक प्राप्त किया।जबकि भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज का तीसरा रैंक रह।
पुरस्कार वितरण समारोह में फिल्म जगत के प्रसिद्ध कलाकार जायेद खान ने प्रमुख अतिथि बतौर विजीत विद्यार्थियों को ट्रॉफी प्रदान की।अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं  भाषण से जायेद खान ने विद्यार्थियों को बहुत प्रभावित किया। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज का सभागार छात्र छात्राओं से भरा हुआ था। विद्यार्थियों की सृजनात्मक ता और प्रतिभा को निखारने का यह सुनहरा अवसर है,खान ने कहा।
जेडबीआई के विद्यार्थियों ने कहा कि यह आयोजन बहुत ही सफल रहाऔर सीखने को मिला जो जीवन में यादगार भी बन जाता है। पुरस्कार समारोह में डीन प्रोफेसर दिलीप शाह, प्रोफेसर दिव्येश, प्रोफेसर विजय कोठारी एवं डॉ वसुंधरा मिश्र ,प्रोफेसर कौशिक सक्रिय रहे।कार्यक्रम का संयोजन करने में दृष्टि लखानी और स्वाति तिवारी टीम का संयुक्त योगदान रहा जो सराहनीय रहा।

 

फिल्में खुद अपने नायक बनाती हैं और खुद ही बदलते समय के साथ उसे तोड़ भी देती हैं

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शहर की सुपरिचित संस्था साहित्यिकी की ओर से भारतीय भाषा परिषद के सभाकक्ष में 23 नवंबर 2016 को  शाम पांच बजे “फिल्मों के आईने में सामाजिक नैतिकता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अतिथियों का स्वागत साहित्यिकी की सचिव डा. किरण सिपानी ने किया। प्रमुख वक्ता कवि कथाकार श्री विजय गौड़ ने फिल्मों के दृश्यों के माध्यम से बड़े रोचक ढंग से अपनी बात रखते हुए कहा कि फिल्म अपने आप में एक यथार्थ है। फिल्म में कथा और नाटक दोनों है।फिल्में वैज्ञानिक सत्य को हमारे सामने रखती हैं। नैतिकता एक दृष्टिकोण है ..सामाजिक संरचना को देखने परखने का। एक जमाने में अमीर आदमी बुरा और गरीब अच्छा होता था। फिल्मकार दादा साहब फाल्के, वी शांताराम, राजकपूर, राज खोसला, शक्ति सामंत, सत्यजित रे आदि ने..आवारा, जागते रहो, बूट पालिस, सुजाता, बंदिनी, दो बीघा जमीन, नीचा नगर आदि फिल्मों में इसी तथ्य को उजागर किया गया है। मृणाल सेन की भुवन सोम ने इस गरीब आदमी को बिल्कल नये रूप में सामने रखा।।

विजय गौड़ ने कहा कि हमारी  फिल्में लगातार एक हीरो की तलाश करती हैं जो आकर हमें अपनी तमाम मुसीबतों से छुटकारा दिला दे। कभी यह हीरो यंग्री यंग मैन तो कभी पुलिस अधिकारी और आज कोर्ट के रूप में सामने आता है। फिल्मों में सामाजिक नैतिकता के स्वरूप को श्री गौड़ ने फिराक,  पिंक ,लक्ष्मी, पार्च्ड, अलीगढ़ और ईरानी फिल्म हाना मरवम लबार्फ के माध्यम से व्याख्यायित किया। उन्होंने कहा कि फिल्मों ने आधुनिकता की संगति में प्रगतिशीलता के नये मानक गढ़े।  फिल्में आर्थिक स्वतंत्रता के सवाल को यौनिक स्वतंत्रता तक ले जाती हैं । फिल्में खुद अपने नायक बनाती हैं और खुद ही बदलते समय के साथ उसे तोड़ती भी हैं। आज कोर्ट को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

अध्यक्षता करते हुए श्रीमती विद्या भंडारी ने कहा कि फिल्में समाज का आईना होती हैं और जो समाज में घटित होता है उसे ही फिल्में दिखाती हैं।

इस संगोष्ठी में साहित्यिकी परिवार के सदस्यों के अलावा नगर के साहित्यिक अभिरुचि के बहुत से लोग ने शिरकत की। श्री नवल, विमल शर्मा, डा. आशुतोष, अल्पना नायक, इतु सिंह, मोनालिसा मुखर्जी , मीनाक्षी सांगेनेरिया, आदित्य गिरी, बालेश्वर राय आदि ने संगोष्ठी में भाग लिया।

कार्यक्रम का संयोजन और संचालन गीता दूबे और धन्यवाद ज्ञापन वाणीश्री बाजोरिया ने किया।

वुमंस एशिया कप: भारत ने पाक को हराकर छठी बार जीती ट्रॉफी, मिताली के 73 रन

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भारतीय महिला टीम ने पाकिस्तान को 17 रन से हराकर लगातारी छठी बार टी-20 वुमंस एशिया कप चैंपियनशिप जीत ली। भारत की तरफ से मिताली राज ने बेहतरीन बैटिंग करते हुए 85 बॉल्स पर 73 रन बनाए। उन्होंने सात चौके और एक छक्का लगाया। वो ओपन आईं और नॉट आउट रहीं। भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया। 20 ओवर में पांच विकेट पर 121 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान की टीम इतने ही ओवरों में 104 रन ही बना सकी। उसने इस स्कोर के लिए भी 6 विकेट खो दिए। झूलन ने कहा- ये लम्हा बहुत खास…

– मैच के बाद झूलन गोस्वामी ने कहा- ये बहुत खास लम्हा है। मिताली ने बेहतरीन बैटिंग की। ये इसलिए भी खास हो जाता है क्योंकि विकेट अच्छा नहीं था लेकिन हमने छोटे से स्कोर को अच्छे तरीके से डिफेंड किया।

– पाकिस्तान की तरफ से लेफ्ट आर्म स्पिनर अनम अमीन दो विकेट लिए। सना मीर और सईद को एक-एक विकेट मिला। पाकिस्तान ने भी अच्छी शुरुआत की। कप्तान बिस्माह मारुफ ने 25 रन बनाए। लेकिन इसके बाद उनके विकेट लगातार गिरते रहे।

– बता दें कि ग्रुप स्टेज के मैच में भी भारत ने पाकिस्तान को हराया था। वुमंस एशिया कप के पिछले 32 मैचों में टीम इंडिया कोई मैच नहीं हारी है। ये लगातार दूसरी बार है जब पाकिस्तान टीम भारत से फाइनल में हारी है।

– चैंपियनशिप में भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और होस्ट थाईलैंड ने शिरकत की।

– यह 6th वुमंस एशिया कप था। और खास बात ये है कि हर बार इसे भारतीय महिला टीम ने ही जीता।
– एक वक्त पाकिस्तान का स्कोर 14वें ओवर में 3 विकेट पर 75 रन था। लेकिन अनुजा पाटिल ने पाकिस्तान की कप्तान को अपनी ही बॉल पर कैच कर मैच का रुख बदल दिया। इसके बाद प्रीति बोस और एकता बिष्ट ने एक-एक विकेट लेकर मैच भारत के पक्ष में कर दिया। झूलन ने 19 रन देकर एक विकेट लिया।
– मिताली ने 73 जबकि झूलन गोस्वामी ने 17 रन बनाए। इसके अलावा टीम की बैटिंग लाइन अप कुछ खास नहीं कर सकी।

जीत के बाद वीरेंद्र सहवाग और बीसीसीआई चीफ अनुराग ठाकुर ने टीम को जीत पर बधाई दी।

 

हर्बल चाय बनाते वक्‍त ना करें ये गलतियां

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हालाँकि हर्बल टी बनाते समय हम में से अधिकाँश लोग गलतियां करते हैं और इनके बारे में हम अभी भी अनजान हैं। हमारी इन गलतियों के कारण हम इनसे अधिकतम स्वास्थ्य लाभ नहीं ले पाते। इसके अलावा बनाने की विधि गलत होने के कारण इसके कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। हम आपको उन गलतियों के बारे में बताएँगे जिन्हें हर्बल टी बनाते समय नहीं करना चाहिए। जब हर्बल टी को सही तरीके से बनाकर पीया जाता है तभी हमें इसका पूरा फायदा होता है। हर्बल टी में विटामिन्स और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विश्व भर में किये गए अध्ययनों और खोजों में विभिन्न हर्बल टी से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताया गया है। यहाँ कुछ उन गलतियों के बारे में बताया गया है जो अक्सर हम हर्बल टी बनाते समय करते हैं तो आप ऐसी गलतियाँ न करें –

दूध न मिलाएं: जब वज़न घटाने के लिए हर्बल टी बनाई जाती है और उसमें दूध मिलाया जाता है तो यह प्रभावकारी नहीं होती। दूध में उपस्थित पोषक तत्वों के कारण वज़न कम करने में बाधा आती है। इसके अलावा दूध और तुलसी का प्रयोग एक साथ नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं

कभी भी शक्कर न मिलाएं: हर्बल टी में शक्कर मिलाने से उसमें कैलोरीज़ बहुत बढ़ जाती हैं। इस कारण हर्बल टी पीने का उद्देश्य पूरी तरह ख़तम हो जाता है। अत: इसमें कभी भी शक्कर न मिलाएं बल्कि स्वाद के लिए आप शहद और गुड मिला सकते हैं।

इसे फिर से गर्म न करें: हर्बल टी को पुन: गर्म करने से उसमें उपस्थित प्राकृतिक हर्बल गुण ख़त्म हो जाते हैं। अच्छा होगा कि आप ताज़ी बनी हुई चाय पीयें तभी इसे पीने का उद्देश्य पूरा होता है।

इसे हमेशा न पीते रहें: हर्बल टी इसलिए नहीं है कि जब भी आपका दिल करे आप इसे पी लें। इसके सेवन का एक निश्चित समय होता है। उदाहरण के लिए तुलसी की चाय सुबह पीने से पाचन अच्छे से होता है। किसी भी हर्बल टी का उपयोग करने से पहले अच्छा होगा कि आप डॉक्टर की सलाह ले लें।

चाय बनाते समय कभी ढक्कन न लगायें: हरबल टी बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि ढक्कन खुला हुआ हो और पानी भाप बनकर उड़ रहा हो। आयुर्वेद के अनुसार ऐसा करने से हर्बल टी से स्वास्थ्य को मिलने वाले लाभ बढ़ जाते हैं।

आप योगा, रस्सा कूदी, डांस या जंपिग कर सकते हैं. या फिर आप कोई स्पोर्ट्स भी ज्वॉइन कर सकते हैं. इससे आपकी कैलारी बर्न होगी और आप आसानी से वजन बढ़ने से रोक सकते हैं.

वर्कआउट करते रहें- बेशक विंटर्स में मौसम बहुत ठंडा रहता है, आपका रजाई में से निकलने का मन नहीं करता, आप लेजी फील करते हैं लेकिन इन सबके बावजूद आपको वजन भी कम करना है. तो आप एकदम सुबह-सुबह उठने के बजाय शाम में एक्सरसाइज कीजिए. जी हां, सुबह के बजाय शाम को भी एक्सरसाइज करने का आपको फायदा होगा. इतना ही नहीं, आप बाहर एक्सरसाइज नहीं करना चाहते तो घर में ही कर लीजिए. घर पर आप योगा, रस्सा कूदी, डांस या जंपिग कर सकते हैं. या फिर आप कोई स्पोर्ट्स भी ज्वॉइन कर सकते हैं. इससे आपकी कैलारी बर्न होगी और आप आसानी से वजन बढ़ने से रोक सकते हैं.

 

सुबाशिनी संकरन – देश की पहली महिला आईपीएस, जिनके जिम्मे है मुख्यमंत्री की सुरक्षा!

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सुबाशिनी संकरन देश की पहली महिली IPS अधिकारी हैं, जिन्हें आजाद भारत में किसी मुख्यमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा दिया गया है। इस वर्ष के जुलाई महीने में सुबाशिनी ने यह जिम्मेदारी संभाली।

सुबाशिनी को असम के मुख्यमंत्री, श्री सर्बनान्दा सोनोवाल की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है।

सुबाशिनी ने बताया, “शुरुआत में तो लोगो के लिए ये बिलकुल नयी बात थी। पर धीरे धीरे लोग इस बात के आदि हो गए कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी एक महिला पर है।”

किसी भी मुख्यमंत्री की सुरक्षा का काम बेहद पेचीदा होता है। इसमें श्रम के साथ-साथ तीव्र बुद्धि की भी आव्यशकता होती है। सुबाशिनी को भी अपने काम में हमेशा सतर्क रहना होता है। दिन के करीब 18 घंटे वे अपने काम में व्यस्त होती है। मुख्यमंत्री के दौरों के दौरान उनके पुरे सफ़र के हर पल की जानकारी रखना, अन्य सुरक्षा कर्मियों से हर वक़्त संपर्क में रहना और उन्हें समय समय पर उपयुक्त हिदायतें देना; ये सब उनके काम का हिस्सा है।

तमिलनाडु के तंजावुर शहर की रहने वाली सुबाशिनी एक मध्यम  वर्गीय परिवार से है। इससे पहले उनके परिवार से किसी ने भी इस क्षेत्र में कदम नहीं रखा था। सुबाशिनी के पिता एक निजी फर्म में काम करते हैं और उनकी माँ एक गृहणी है। उनके दादा एम. राजगोपालन ने 1950 में ‘मोटर इंडिया’ और ‘टेक्सटाइल मैगजीन’ के नाम से दो पत्रिकाएं शुरू की थीं, जो आज भी प्रकाशित होती हैं। 1980 में सुबाशिनी के घरवाले मुबंई आ गए थे और फिर उनकी पढाई मुंबई में ही हुई। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी, दिल्ली से अपने मास्टर्स और एमफिल की पढाई पूरी की। जेएनयू में रहकर ही उन्होंने IPS की तैयारी भी की।

हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पुलिस अकैडमी में IPS के प्रशिक्षण के बाद सुबाशिनी की पोस्टिंग उनकी इच्छा के मुताबिक़ असम में कर दी गयी।

असम बेहद चुनौती भरा राज्य है। क़ानूनी गैरव्यवस्था, अपराधियों के साथ जवाबी कार्रवाई, सांप्रदायिक तनाव, स्मगलिंग, जानवरों का अवैध शिकार और ड्रग्स; असम इन सभी गंभीर मसलो से जूझ रहा है।

ऐसी विलक्षण परिस्थितियों में, इतने खतरनाक परिवेश में मुख्यमंत्री की हर प्रकार से सुरक्षा करना बहुत जोखिम भरा काम है। पर सुबाशिनी इससे पहले गुवाहाटी के अजारा पुलिस चौकी में असिस्टेंट सुपरिंटेन्डेंट ऑफ़ पुलिस और उसके बाद बिस्वनाथ जिले और सिलचर तथा तेजपुर जिले में एडिशनल सुपरिंटेन्डेंट के तौर पर काम कर चुकी है। उनके इन अनुभवों की वजह से उन्हें अपने वर्तमान काम में काफी आसानी हो रही है।

इसके अलावा चार साल से असम में रहकर उन्होंने असामी भाषा भी बोलनी सीख ली है, जो उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ है।

यदि आप उनसे उनके अनुभवों का निचोड़ पूछे तो वे कहती है, “जब ज़रूरत हो तभी बोलो, और जब ज़रूरत हो सख्त कार्यवाही करो… हाँ पर कानून में रहते हुए।”

अपने अदम्य साहस और जी तोड़ मेहनत से यहाँ तक पहुंची सुबाशिनी देश की सभी लड़कियों के लिए एक मिसाल है!

 

पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर ने कहा, हम मारति जितने ही भारतीय हैं

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चीन के उल्लेखनीय स्वामित्व को लेकर ओलाचना झेल रही पेटीएम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी विजय शेखर शर्मा ने जोर देकर कहा कि ई-कामर्स तथा भुगतान प्लेटफार्म उतनी ही भारतीय है जितनी मारति है। हमें भारत की कहानी का प्रतिनिधित्व करने को लेकर गर्व है।

शर्मा ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘हम मारति जितने ही भारतीय हैं। हम प्रत्येक रूप में भारतीय हैं।
कभी सरकार के नियंत्रण वाली मारति की बहुलांश हिस्सेदारी इस जापानी कार कंपनी सुजुकी मोटर कार्प के पास है। सुजुकी के पास मारति की 56.21 प्रतिशत हिस्सेदारी है और यह इसकी एकमात्र प्रवर्तक है।
पेटीएम ने हाल में सरकार के नोटबंदी के कदम की सराहना की है। कंपनी ने इस बारे में अखबारांे में बड़े-बड़े विज्ञापन छापे हैं जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर है। पेटीएम कही सबसे बड़ी शेयरधारक चीन की कंपनी अलीबाबा है। अलीबाबा दुनिया की सबसे बड़ी ई-कामर्स कंपनी है।
शर्मा ने कहा कि पेटीएम दुनिया के सामने भारतीय कंपनी के रूप में जाती है और जो भारत का ‘गौरव’ है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए हमारे ग्राहक, देश का कानून और नियामक महत्वपूर्ण हैं। अलीबाबा समूह और उसकी सहयोगी एंट फाइनेंशियल ने पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस में पिछले साल 68 करोड़ डालर का निवेश किया था। इस तरह देश की सबसे बड़ी मोबाइल वॉलेट आपरेटर में उसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो गई है। हालिया रपट में कहा गया है कि चीन की निवेशक पेटीएम में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है।