Tuesday, March 24, 2026
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पाकिस्तान के ‘बजरंगी भाईजान’ ने खोज निकाला नानक का परिवार

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देश के ‘बजरंगी भाईजान’ को तो जानते ही हैं, हम आपको मिलवाते हैं पाकिस्तान के ‘बजरंगी भाईजान’ से, जिसने भारत में नानक सिंह का परिवार खोज निकाला। पंजाब के अमृतसर के नानक सिंह की कहानी सलमान खान की मूवी बजरंगी भाईजान से मिलती-जुलती असल कहानी है। बस फर्क इतना है कि यहां बजरंगी भाईजान पाकिस्तान का है।

नानक सिंह 32 साल से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में कैद है। लेकिन अब उसके परिजनों को नानक की रिहाई की आस है। पाकिस्तान के पूर्व सांसद और इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता राय अजीज उल्ला खां ने इस परिवार से नानक की रिहाई संबंधी दस्तावेज मंगवाए हैं। अजीज ने दावा किया है वह नानक के लिए हर लड़ाई लड़ेंगे। परिवार ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी नानक की रिहाई की गुहार लगाई है।

बात 1985 की है। अजनाला सेक्टर में रावी दरिया से सटा स्थित गांव बेदी छन्ना में रहने वाला सात साल का नानक भैंस चराते समय पाकिस्तान की सीमा में चला गया। पाक रेंजर्स ने नानक के साथ-साथ उनकी कई भैंसें जब्त कर ली। भैंसें लौटानी न पड़ें, इसलिए नानक सिंह के बारे में पाक रेंजर्स मुकर गए। बीएसएफ ने पाक रेंजर्स से शिकायत भी की लेकिन कोई माकूल जवाब नहीं मिला। पाकिस्तान के गांवों में भी नानक की गुमशुदगी की मुनादी हुई थी।

सूची में गलत लिखा था नाम

1999 में थाना रमदास पुलिस को पाकिस्तान जेलों में बंद 145 भारतीय कैदियों की सूची मिली। इसमें नानक का नाम कानक लिखा था और यह 71वें नंबर पर  था। लिस्ट में कानक लिखा होने से उसकी तस्दीक पाकिस्तान ने नहीं की। नानक के पाकिस्तान में होने की खबरें कई बार पाकिस्तान से छूटे भारतीय कैदियों से आई।

पिता रतन सिंह व मां रानो कहती हैं कि एक बार नानक को देखने की हसरत है, उसके बाद सांस टूट जाए कोई गम नहीं है। नानक का छोटा भाई बलदेव और दोनों छोटी बहनें रज्जी व नानो ने बताया हमने एक बार फिर से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से नानक को रिहा करवाने के लिए गुहार लगाई है।
राय अजीज उल्ला खां ने नानक के बारे में दस्तावेज मंगवाए हैं। उन्होंने वादा किया है कि वह पाकिस्तान की जेल से नानक की रिहाई सुनिश्चित करवाएंगे।
सुरिंदर कोछड़, इतिहासकार और शोधकर्ता

 

ड्राइविंग के दौरान न करें ये 5 गलतियां

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ड्राइविंग के दौरान लोग कुछ ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिसका उन्हें पता भी नहीं चलता लेकिन कार धीरे-धीरे डैमेज होती रहती है। इस आलेख में हम आपको कुछ ऐसी ड्राइविंग टिप्स देने जा रहे हैं जिसको अपनाकर आप अपनी कार को खराब होने से बचा सकती हैं। ये गलतियां छोटी हैं लेकिन इनके परिणाम गंभीर, हम ऐसा क्यूं बोल रहे हैं आइए आपको बताते हैं।

बहुत से लोग मैनुअल कार की ड्राइविंग के दौरान अपना बायां हाथ गियर लीवर पर टिकाकर रखते हैं। यहां हाथ टिकाने में आपको एक अलग तरह का सुकून मिलता है लेकिन बताते चलें कि यह हाथ रखने की सही जगह नहीं है। गियर बॉक्स ड्राइविंग के दौरान अलग-अगल एंगल में अनगनित बार हिलता है और यह इसका स्वभाव है। जब आपका हाथ इस पर टिका रहता है तो इसका मूवमेंट रुक जाता है। इसके कारण इसके संचालन प्रक्रिया में लगे उपकरण घिसकर निष्क्रिय होने लगते हैं। इसलिए आपको सलाह है कि जब ड्राइव करें तो अपने हाथ को हमेशा स्टीयरिंग व्हील पर रखें इससे आप भी सेफ रहेंगे और गाड़ी भी। गियर लीवर पर हाथ तभी जाना चाहिए जब आपको शिफ्टिंग की जरूरत हो।

आलस्य एक ऐसी चीज है जो मनुष्य जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। जहां पर आराम मिला बस उसी पर लोग चलने लगते हैं और यह भी नहीं सोचते ये कितना सही है। हम यहां ज्ञान नहीं बांट रहे बल्कि ड्राइविंग के दौरान की जाने वाली एक ऐसी गलती के ओर आपको इंगित कर रहे हैं जिससे आप अपनी गाड़ी का क्लच घिसकर अपना फालतू का खर्च बढ़ा रहे हैं। क्लच का प्रयोग सिर्फ गियर शिफ्टिंग के लिए किया जाना चाहिए। लेकिन लोग क्‍लच के सहारे बार-बार की शिफ्टिंग से बचने के लिए अपना बायां पैर पूरी ड्राइविंग के दौरान क्लच पर टिकाकर रखते हैं। आपकी ड्राइविंग में क्लच की सिर्फ इतनी भूमिका है कि आप गियर को गाड़ी के गति के हिसाब से शिफ्ट करें। यहां पैर रखने से गाड़ी की क्लच असेंबली पूरी तरह से बहुत कम समय में डैमेज हो जाती है और इसके बदलवाने में काफी खर्चा आता है। अगर आप ऐसा करती हैं तो इसे पढ़ने के बाद कृपया ऐसा न करें आपकी गाड़ी सेफ रहेगी।

अक्सर लोग पहाड़ी ड्राइविंग के दौरान रोल बैक यानी कि पीछे लुढ़कने से बचने के लिए क्लच को दबाकर रखते हैं, या फिर हाफ क्लच लेकर खड़े हो जाते हैं। यह बिलकुल गलत है। ऐसा करके एक बार फिर आप गाड़ी के महंगे पुर्जे की जिंदगी खत्म कर देते हैं। अगर आप ऐसी परिस्थिति में ड्राइव कर रहे हों तो हैंडब्रेक का प्रयोग करें न कि क्लच दबाएं।
ये भी एक गलत ड्राइविंग का अंदाज जिसका अहसास आपको नहीं होता लेकिन इसका दुष्प्रभाव कार पर जरूर पड़ता है। अगर आप चौथे गियर में 30 किमीप्रघं की गति पर ड्राइव करेंगी तो रिजल्ट क्या होगा? जरा सोचिए। जवाब आपको खुद ब खुद मिल जाएगा। लेकिन कई बार लोग स्पीड ब्रेकर से गुजरते वक्त बस क्लच के सहारे बिना गियर ‌शिफ्टिंग के गाड़ी को निकाल लेते हैं। यह तरीका एकदम गलत है। अगर आपकी गाड़ी की गति धीमी हो रही है तो लोवर गियर शिफ्टिंग बेहद जरूरी है। सही शिफ्टिंग का अनुसरण करके आप अपने इंजिन के तनाव को कम कर सकती हैं।

अक्सर देखा जाता है कि भारी यातायात में या फिर लंबी लाल बत्ती पर लोग बेधड़क अपनी गाड़ी को गियर में डाले हुए क्लच पर पैर रखकर खड़े रहते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो यह तरीका गलत है। ऐसा करके क्लच की बियरिंग जो सिर्फ सहज शिफ्टिंग के लिए बनाई गई है वह खराब होने लगती है। इसीलिए जब कभी आप देर तक खड़ें हो तो गाड़ी को न्यूट्रल में ही रखें क्यूंकि शिफ्टिंग में समय नहीं लगता और यह एक अच्छी ड्राइविंग आदत के लिए जरूरी भी है।
 

 

चुनावों में मोदी की नोटबंदी ने पाया अव्वल दर्जा

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पांचों राज्यों के चुनावी परिणाम जहां इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि तीन साल बाद भी मोदी लहर अभी भी बदस्तूर कायम है वहीं वह प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी के निर्णय पर भी मुहर लगाते दिख रहे हैं।

पांचों राज्यों में जिस तरह से भाजपा ने प्रदर्शन किया है उससे साफ जाहिर हो रहा है कि प्रधानमंत्री के नोटबंदी के निर्णय को जनता ने सकारात्मक रूप से लिया है।

खास बात ये है कि यही वो मुद्दा था जिसे विपक्षी दलों ने चुनावों में भाजपा के खिलाफ धारधार हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था ऐसे में साफ है कि विपक्ष का यह वार उसे उल्टा पड़ गया। इससे पहले भी नोटबंदी के निर्णय पर जनता महाराष्ट्र, गुजरात और उडीसा के निकायों चुनावों में अपनी मुहर लगा चुकी है।

नवंबर में प्रधानमंत्री मोदी ने जब अचानक नोटबंदी का निर्णय लिया था तब इसे प्रधानमंत्री का मास्टर स्ट्रोक कहा गया था। एक दो को छोड़कर अधिकतर विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के इस निर्णय की जमकर आलोचना की थी यहां तक की संसद में भी सरकार को विपक्षी दलों के जबरदस्त प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था।

हालांकि सरकार भी इस मुद्दे पर हमेशा फ्रंटफुट पर ही रही और सभी मंचों पर इसे जनता के हित में साबित करने का ही प्रयास किया। हालांकि नोटबंदी को लेकर सरकार को उस समय थोड़ी निराशा भी हुई जब उसे कालेधन पर मन मुताबिक परिणाम निकलते नहीं मिलते दिखे।

इसी मुद्दे को विपक्षी दलों ने पूरा तूल दिया और नोटबंदी के दौरान गई लोगों की जानों और आम जनता को हुई परेशानी को चुनावी मुद्दा बना लिया। लेकिन विपक्ष के तमाम वारों को झेलते हुए प्रधानमंत्री अकेले दम इस मुद्दे पर सरकार और अपने निर्णय का बचाव करते रहे।

मोदी ने जनता के बीच अपने इस निर्णय को भ्रष्टाचार को खत्म करने वाला और आम जनता के हितों से जोड़ने वाला निर्णय साबित करने का प्रयास किया। चुनावी रैलियों में भी मोदी ने इस मुद्दे को भावनात्मक रूप देकर आम जनता से जोड़ने का पूरा प्रयास किया।

चुनावों के परिणाम बता रहे हैं कि मोदी अपनी मुहिम में कामयाब होते दिख रहे हैं। जनता ने नोटबंदी जैसे उनके कड़े निर्णय पर खुले मन से अपनी मुहर लगा दी है। खास बात ये है कि विपक्षी दलों ने भी नोटबंदी को चुनावों में भाजपा के खिलाफ बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भाजपा के खिलाफ साम्प्रदायिकता के बाद विपक्ष ने नोटबंदी को ही सबसे ज्यादा भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल किया। लेकिन चुनावों के परिणाम बता रहे हैं कि जनता ने इस मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों को सिरे से नकार दिया है।

खास बात ये है कि इससे पहले जनता भाजपा के इस मुद्दे पर हाल ही में हुए महाराष्ट्र निकाय चुनाव, गुजरात निकाय चुनाव, उड़ीसा के निकाय चुनावों और चंडीगढ़ के निकाय चुनावों में भी अपनी मुहर लगा चुकी है जहां भाजपा शानदार प्रदर्शन करते हुए विपक्षियों पर भारी पड़ी है।

 

इस बेटी ने साइकिल से किया बड़ा अविष्कार, वैज्ञानिक हुए हैरान

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9वीं कक्षा में पढ़ने वाली इस छात्रा ने ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसकी खूबियां देख वैज्ञानिक भी हैरान हैं। इस मॉडल से देश में नई क्रांति आ सकती है। अब इस छात्रा को राष्ट्रपति भवन तक से बुलाया गया। आइए जानते हैं आखिर क्या खास बनाया है इस बेटी ने-

4 से 10 मार्च तक राष्ट्रपति भवन में फेस्टिवल ऑफ इनोवेशन -2017 का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय इंस्पायर अवार्ड प्राप्त भारत के 60 नन्हें वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। हिमाचल की ओर से दीपिका का तैयार मॉडल भी प्रदर्शित किया जाएगा जो पहले से चर्चा में आ गया था।

नन्हीं वैज्ञानिक दीपिका ने अपने एक सामान्य साइकिल के मॉडल से वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है। मॉडल के माध्यम से मोबाइल चार्जिंग, शारीरिक व्यायाम, योगा, बिजली उत्पादन और संग्रहण और वाटर लिफ्टिंग आदि तकनीक विकसित की गई हैं।
यानि सिर्फ कुछ पैडल चलाने भर से ही बिजली पैदा होगी, साथ ही एक जगह स्टोर भी होगी। यही नहीं इसी दौरान वाटर लिफ्टिंग की क्रिया भी होती रहेगी।

यदि इस तकनीक को विकसित किया जाता है तो एक साथ कम लागत और कम समय में कई सारे काम करने संभव होंगे। विज्ञान के क्षेत्र में नवीनतम और अत्याधुनिक तकनीक का अनुसंधान कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी दीपिका जून माह में जापान भी जाएगी।

दीपिका हिमाचल के बिलासपुर स्थित शहीद अश्विनी कुमार स्मारक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला झंडूता में नौवीं कक्षा की छात्रा है। उसका कहना है कि उसके जीवन का उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में नवीन खोज कर भारत का नाम विज्ञान गुरु के रूप में चर्चित करने का है।

 

 

यूपी-उत्तराखंड में मोदी की सुनामी, पंजाब में कैप्टन का जादू, गोवा-मणिपुर में त्रिशंकु

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा का स्कोर भले ही 2-3 का ही रहा लेकिन सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पार्टी ने अप्रत्याशित और अभूतपूर्व बहुमत हासिल किया है। मोदी मैजिक और अमित शाह की सोशल इंजीनियरिंग ने साबित कर दिया कि अब जाति-धर्म का वोट बैंक नहीं, विकास कार्य मायने रखता है। यही वजह रही कि मुस्लिम क्षेत्रों में भी प्रचंड मोदी मत ने ‘सबका’(सपा-बसपा-कांग्रेस) वर्चस्व तोड़ दिया और प्रदेश के 31 जिलों में ‘सबका’ सूपड़ा साफ कर दिया। यूपी में 311 सीटें (सहयोगी दलों को मिलाकर 325) जीतकर भाजपा राष्ट्रपति चुनाव और राज्यसभा में अटके कुछ अहम बिल की तरफ बुलंद हौसले के साथ कदम बढ़ाएगी।

इन दो राज्यों में मिली ऐतिहासिक जीत ने पार्टी के गोवा और पंजाब में बुरे प्रदर्शन की टीस को कम कर दिया है। इस जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें सवा सौ करोड़ आबादी पर भरोसा है। जीत के लिए उन्होंने कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत और मतदाताओं का आभार जताया। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के जादू ने उत्तराखंड की सत्ता गंवाने के पार्टी के गम को कम किया है। मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी की पंजाब में सत्ता हासिल करने और गोवा में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीदों पर झाड़ू फेर दिया है। पांच में से तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में जहां मतदाताओं ने स्पष्ट जनादेश दिया है, वहीं गोवा और मणिपुर में त्रिशंकु विधानसभा के पक्ष में फैसला सुना कर मतदाताओं ने किसी एक पार्टी पर विश्वास नही किया।

भाजपा को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चमत्कारी जीत हासिल हुई है। यूपी में इस बार राम लहर से भी बड़ी साबित हुई मोदी लहर में सपा को अपनी सत्ता तो बसपा को अपनी साख गंवानी पड़ी है। भाजपा वर्ष 2014 में मिले मत को बरकरार रखने में भी कामयाब रही है। लोकसभा चुनाव में पार्टी और उसके सहयोगी को 337 सीटों पर बढ़त हासिल थी। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 324 सीटें हासिल की है। सपा को 55 तो बसपा को महज 19 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।

इसी प्रकार 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में भाजपा ने 57 सीटें हासिल कर कांग्रेस को करारा झटका दिया है। पंजाब में कांग्रेस ने आप के साथ-साथ सत्तारूढ़ भाजपा-शिअद गठबंधन को करारा झटका दिया है। चुनाव नतीजों ने आप के किसी पूर्ण राज्य में सत्ता हासिल करने और भाजपा-शिअद गठबंधन का सत्ता बचाने का सपना चकनाचूर कर दिया है। खुद को नंबर एक पार्टी मान कर चल रहे आप को महज 20 तो शिअद-भाजपा गठबंधन को महज 18 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।

गोवा के नतीजे सत्तारूढ़ भाजपा के लिए झटका साबित हुए हैं। 40 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस 17 सीटें हासिल कर सरकार बनाने की स्थिति में है। यहां सारा दारोमदार अब 10 सीटें जीतने वाले अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों के रुख पर है। मणिपुर में सत्तारूढ़ कांग्रेस बहुमत से दूर रह गई है। हालांकि पार्टी यहां सबसे बड़े दल के रूप में उभरने में सफलता हासिल की है।


अखिलेश ने स्वीकारी हार, सौंपा इस्तीफा


यूपी में करारी हार के बाद अखिलेश यादव ने हार स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही इस्तीफा देने राजभवन पहुंचे। यहां उन्होंने राज्यपाल राम नाईक को इस्तीफा सौंपा।
लखनऊ में प्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाली सरकार हमसे बेहतर काम करें और जब तक ऐसा नहीं होता है हमारा काम बोलेगा। उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रखने के संकेत दिए और कहा कि ये अच्छा है कि दो युवा नेता साथ आए हैं।
अखिलेश ने कहा कि बसपा नेता ने ईवीएम पर सवाल उठाया है और जब सवाल उठा है तो सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। वहीं चुनाव आयोग ने मायावती की इस माँग को खारिज कर दिया है। सपा नेता ने कहा कि बीजेपी ने प्रचार के दौरान लोगों के दरवाजे बंद कराके कहा है कि नोटबंदी का पैसा गरीबों को मिलेगा। हम देखेंगे कि गरीबों को कितना पैसा मिलता है। हमसे अच्छा काम करे आने वाली सरकार। हमने यूपी को आगे बढ़ाने का काम किया है।

यूपी का सीएम चुनने के लिए रविवार को बीजेपी की बैठक
यूपी विधानसभा चुनाव में 300 से ज्यादा सीटों पर जीत की ओर बढ़ रही बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी मुख्यालय में कहा कि यूपी में मुख्यमंत्री पद के लिए नेता का चुनाव रविवार शाम को किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योग्यता के आधार पर मुख्यमंत्री का चुनाव किया जाएगा।
उऩ्होंने कहा कि यूपी का सीएम मैं नहीं बनूंगा, लेकिन पहली बैठक में मध्यम वर्ग के किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पार्टी मुख्यालय आएंगे और उनका स्वागत किया जाएगा।
दूसरी ओर मौजूदा विधानसभा चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन ने विरोधियों को हैरत में डाल दिया है। सफलता का आलम ऐसा है‌ कि यूपी और उत्तराखड में तो मोदी लहर राम लहर से भी बड़ी होती दिख रही है। इतनी बड़ी सफलता की उम्‍मीद तो खुद भाजपा नेताओं ने भी नहीं की होगी, लेकिन राजनीति में कब क्या चमत्कार हो जाए कोई नहीं कह सकता।

देश की सियासत की दिशा बदलने वाले उत्तर प्रदेश के चुनाव में बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबको धो दिया है। बीजेपी ने 312 सीटें जीत ली हैं। सपा-कांग्रेस को सिर्फ 55 सीटें मिली हैं, जबकि बसपा को मात्र 19 सीटें हासिल हुई हैं। राष्ट्रीय लोक दल ने 1 सीट पर जीत हासिल की है। दूसरी ओर अपना दल ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 9 सीटों पर जीत हासिल की है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 4 सीटें मिली हैं। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल को 1 सीट, अन्य का आंकड़ा 3 का रहा है।
वोट प्रतिशत ज्यादा पर सीटें कम 
उत्तर प्रदेश में सपा के 21.8 प्रतिशत मतों के मुकाबले बसपा को 22.2 प्रतिशत वोट मिले हैं लेकिन सीटों के मामले में बसपा अपने प्रतिद्वंद्वी दल सपा से लगभग एक तिहाई  जीत ही दर्ज कर पाई। इसी तरह रालोद को 1.8 प्रतिशत और अपना दल को 1.0 वोट मिले लेकिन रालोद एक सीट ही नसीब हुई जबकि अपना दल 9 सीटें जीतने में  कामयाब रही।

उत्तर प्रदेश में वोट प्रतिशत 
भाजपा 39.7
बसपा 22.2
सपा 21.8
कांग्रेस 6.2
रालोद 1.8
अपना दल 1
सुहेलदेव भासपा 0.7
———-
यूपी – हारे दिग्गज
लक्ष्मीकांत वाजपेयी, मेरठ, भाजपा
अपर्णा यादव, लखनऊ कैंट, सपा
गायत्री प्रजापति, अमेठी, सपा
माता प्रसाद पांडे, इटवा, सपा
कुंवर जितिन प्रसाद, तिलहर, कांग्रेस

70 सीटों वाले उत्तराखंड में भी मोदी का मैजिक खूब चला है। बीजेपी ने 56 सीटों पर जीत हासिल की है और उसे 1 सीट पर बढ़त हासिल है। दूसरी ओर सत्ताधारी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। उसे मात्र 11 सीटें मिली हैं, जबकि अन्य के खाते में 2 सीट आई हैं।

उत्तराखंड – हारे दिग्गज
हरीश रावत, मुख्यमंत्री (किच्छा व हरिद्वार ग्रामीण)
किशोर उपाध्याय, सहसपुर (कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष)
अजय भट्ट, रानीखेत (भाजपा प्रदेश अध्यक्ष)
पंजाब के नतीजे यूपी के ठीक उलट रहे हैं। कांग्रेस ने 117 में से 77 सीट जीत ली हैं। बीजेपी को 3 जबकि शिरोमणि अकाली दल को 15 सीट मिली है। इसके अलावा छुपा रुस्तम मानी जा रही आम आदमी पार्टी को 20 सीट पर जीत मिली है। लोक इंसाफ पार्टी ने 2 सीटों पर जीत हासिल की है।
पंजाब – हारे दिग्गज
भगवंत मान, जलालाबाद, आप (सांसद)
गुरप्रीत घुग्गी, बटाला, आप

उत्तर पूर्व के राज्य मणिपुर में भी कांग्रेस को बढ़त मिली है। पार्टी ने 28 सीटों पर जीत हासिल की है। साथ ही एक सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं, बीजेपी को 21 सीटों पर जीत मिली है जबकि एक सीट पर उसे बढ़त है। विधानसभा की 59 सीटों वाले इस राज्य में एनपीएफ को 4 सीटें, लोक जनशक्ति पार्टी को 1, टीएमसी को 1, नेशनल पीपुल्स पार्टी को 4 और अन्य के खाते में 1 सीट आई है।
आयरन लेडीइरोम को 90 वोट
इंफाल। मणिपुर विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। ‘आयरन लेडी’ वोटरों को अपनी ओर खींचने में पूरी तरह नाकाम रही। शर्मिला ने थाऊबल सीट से राज्य के सीएम ओकराम इबोबी सिंह को चुनौती दी थी। उन्हें महज 90 वोट ही मिले। वहीं, विजेता इबोबी को 18,649 वोट मिले। इस सीट पर दूसरे नंबर पर भाजपा के एल बसंता सिंह रहे, जिन्हें 8,179 वोट मिले।

गोवा में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर रही है। कांग्रेस 17 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। बीजेपी नेता और  मुख्यमंत्री रहे लक्ष्मीकांत पारेसकर चुनाव हार गए हैं। वहीं बीजेपी को 13 सीटों पर जीत मिली है। इसके अलावा एनसीपी को 1, महाराष्ट्रवादी गोमांतक को 3, गोवा फॉरवर्ड पार्टी को 3 अन्य को 3 सीटें मिली हैं। बता दें कि गोवा में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी 21 सीटें चाहिए होती हैं।
गोवा – हारे दिग्गज
लक्ष्मीकांत पार्सेकर, मुख्यमंत्री, (मांद्रे)

किसने क्या कहा, एक नजर

यूपी सीएम का फैसला रविवार को: शाह 
विधानसभा चुनाव परिणामों को मोदी सरकार के कामकाज पर जनता का मुहर बताते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी आजादी के बाद सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में यूपी-उत्तराखंड में किसी भी दल को इस कदर जीत हासिल नहीं हुई है। यूपी-उत्तराखंड में भाजपा को मिला अप्रत्याशित बहुमत आजादी के बाद की सबसे बड़ी जीत है। यूपी के मुख्यमंत्री के सवाल पर शाह ने कहा कि रविवार को पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक होगी जिसमें यह फैसला किया जाएगा।

यूपी की जनता बुलेट ट्रेन चाहती है: अखिलेश 
उत्तर प्रदेश में करारी हार से बौखलाए निवर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तंज कसा कि यूपी की जनता शायद बुलेट ट्रेन चाहती है। हार स्वीकार करने के बजाय उन्होंने कहा, ‘जनता को एक्सप्रेसवे पसंद नहीं आया और वह बुलेट ट्रेन चाहती है। उन्हें हमसे बेहतर काम करने वाला चाहिए। उम्मीद करता हूं कि यूपी में बुलेट ट्रेन आएगी।’

भाजपा ने वोटिंग मशीन में गड़बड़ी की: मायावती 
भाजपा को 300 से अधिक सीटों पर मिली जीत पर शंका जाहिर करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ है, वरना भाजपा को मुस्लिम मतदाता वोट दे ही नहीं सकते। भाजपा ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया, फिर भी 18 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं वाले राज्य के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भाजपा की जीत गले नहीं उतरती। उन्होंने दोनों राज्यों में पुरानी पद्धति यानी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती दी।

58 फीसदी आबादी और 52 फीसदी जीडीपी वाले 14 राज्यों में भाजपा
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जीत का परचम लहराने के साथ ही भाजपा देश की 58 फीसदी आबादी और 52 फीसदी जीडीपी वाले 14 राज्यों पर काबिज हो गई है। नतीजे आने से पहले भाजपा का शासन 43 फीसदी आबादी पर ही था। वहीं कांग्रेस और यूपीए के शासन वाले राज्यों की संख्या 7 पर सिमट गई है। गोवा और मणिपुर में यदि कांग्रेस को सत्ता मिलती है तो यह संख्या 9 हो जाएगी। फिलहाल देश की 17 फीसदी आबादी पर ही कांग्रेस का शासन है।

दो मुख्यमंत्री हारे 
भाजपा की आंधी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण दोनों सीटों से हार गए हैं। हरिद्वार ग्रामीण सीट पर उन्हें भाजपा के यतीश्वरानंद ने जबकि किच्छा सीट पर भाजपा के ही राजेश शुक्ला ने महज 92 वोटों से पराजित किया। हालांकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट रानीखेत से हार गए। वहीं, गोवा में मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर सहित छह मंत्री चुनाव हार गए हैं। यहां सिर्फ दो मंत्रियों को जीत नसीब हुई। मैंडरेम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार दयानंद सोप्ते ने पार्सेकर को 7000 वोटों से हराया।

 

पुरुषों के लिए भी जरूरी है सेहत का ध्यान रखना

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यह सच हैै कि महिलाएं अपनी सेहत पर अक्सर ध्यान नहीं देतीं मगर यह बात पुरुषों पर भी उतनी ही लागू होती है। समय रहते बीमारी को पहचान लिया जाए तो उससे जानलेवा बनने से रोका जा सकता है। याद रहे कि परिवार के लिए आपके अन्य सदस्य जितना महत्व रखते हैं कि उतनी ही अहमियत आपकी भी है और आपका स्वस्थ रखना भी उतना ही जरूरी है। अगर आप चाहते हैं कि आप जिंदगीभर स्वस्थ रहें तो ये 7 टेस्ट जरूर करवाएं –

प्रोस्टेट कैंसर- स्किन कैंसर के बाद पुरुषों में होने वाला ये सबसे आम कैंसर है। अगर समय रहते इस बीमारी का पता लगा लिया जाए तो इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सकता है। इसको पहचानने के लिए 2 टेस्ट किए जाते हैं- डिजिटल रेक्टम टेस्ट और प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन ब्लड टेस्ट।

टेस्टीकुलर कैंसर- इस कैंसर से पुरुषों का रिप्रोटेक्टिव ग्लैंड प्रभावित होता है। इस बीमारी की चपेट में 20 से 54 साल की उम्र वाले पुरुष आते हैं। इसलिए जब भी आप रूटीन चेकअप करवाने जाएं तो टेस्टीकुलर टेस्ट करवाना न भूलें।

हाई ब्लड प्रेशर- उम्र बढ़ने के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी बढ़ने लगता है। ये मोटापे और लाइफस्टाइल से भी जुड़ा होता है। ये आपके दिल के लिए काफी खतरनाक हो सकता है इसलिए समय-समय पर अपने ब्लड प्रेशर की जांच जरूर करवाते रहें।

कोलेस्ट्रॉल लेवल- शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने से दिल की बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक भी आ सकता है। ब्लड टेस्ट से आपके शरीर में मौजूद खतरनाक कोलेस्ट्रॉल का पता लगाया जा सकता है।

डायबिटीज- ये बीमारी अपने साथ कई बीमारियां लेकर आती है जैसे दिल की समस्याएं, स्ट्रोक, किडनी से जुड़ी समस्याएं, अंधापन, नर्व डैमेज और नपुंसकता। अगर समय रहते डायबिटीज का पता लगा लिया जाए तो इन सब बीमारियों से बचा जा सकता है। इसे पहचानने के लिए ब्लड शुगर टेस्ट, ग्लुकोज टॉलरेंस टेस्ट और A1C  टेस्ट किया जाता है। 45 साल की उम्र के बाद हर तीन महीने में इस टेस्ट को जरूर करवाएं।

HIV टेस्ट- HIV का पता ब्लड टेस्ट से लगाया जा सकता है। इसमें सबसे पहला टेस्ट  ELISA या EIA होता है। कई बार इससे एचआईवी वायरस का पता नहीं चल पाता। इसलिए पुष्टि के लिए वेस्टरेन ब्लॉट एसे नाम का दूसरा टेस्ट किया जाता है।

ग्लूकोमा- ये बीमारी आंखों की नसों को प्रभावित करती है जिससे आप अंधे हो सकते हैं। ये किसी भी उम्र के इंसान को प्रभावित कर सकती है इसलिए 40 से कम उम्र के लोगों को हर 2 साल में एक बार, 40-64 साल के लोगों को साल में एक बार और 65 से ऊपर के लोगों को हर 6 महीने में ये टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

 

विधवाओं के जीवन में उर्जा का नया संचार करती है बृज की होली

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बृज की होली सबसे निराली है यहाँ हर बार अलग अंदाज में होली का आयोजन किया जाता है यहां आश्रय सदनों में रहने वाली विधवा महिलाएं प्रिय कन्हाई के साथ होली खेलती हैं जिससे उनके जीवन में इस नई परंपरा के माध्यम से उर्जा भरने का काम किया जाता है।

श्रीधाम वृंदावन में वर्तमान में करीब 2000 विधवा महिलाएं हैं। इनके जीवन दुख का सागर बन गया है। ऐसे में इन्हें कुछ नई अनुभूति कराने के लिए सुलभ इंटरनेशनल ने नई पहल को कदम बढ़ाया है। संगठन की ओर से गोपनाथ मंदिर में फूलों की होली का आयोजन किया गया। इसमें परंपरागत रूप से पहले रासलीला समारोह हुआ जिसमें सभी विधवाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया वहीं उन्होंने होली के दौरान कान्हा पर रंग-बिरंगे फूल बरसाकर उन्हें होली रस से सराबोर कर दिया।

सुलभ इंटरनेशनल संस्था के अनुसार विधवाओं के जीवन में होने जा रहे इस बदलाव से वह बेहद खुश हैं। आखिर सदियों पुरानी प्रथा को दरकिनार कर वह इस बार होली खेली विधवाओं ने होली खेलने की अपनी इच्छा जब इनकी देखभाल कर रही संस्था सुलभ इंटरनेशनल के सामने जाहिर की तो संस्था के संस्थापक डॉ.बिंदेश्वरी पाठक ने सहमति जता दी। परंपरागत रासलीला कार्यक्रम के लिए संस्था की ओर से व्यापक तैयारी की गयी बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सुलभ इंटरनेशनल नामक संस्था आश्रय सदनों की विधवा-वृद्धाओं को बेहतर जिंदगी व्यतीत करने के लिए सुविधाएं प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है।

ये विधवाएं मंदिरों में जाकर भीख न मांगें, इसके लिए कई प्रयास किये जा रहे है इसी के तहत इस होली का आयोजन किया गया कई वर्षों से अपनों का तिरस्कार और समाज की बेरुखी झेल रही इन महिलाओं में इस बार की भले ही इनके जख्म न भर पाए लेकिन इतना जरूर है की इनके जीवन में नयी उर्जा जरूर भर देगी।

 

होली से पहले जान लें ये महत्वपूर्ण और रोचक बातें

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इस साल होली 13 मार्च (सोमवार) को मनाई जाएगी। यदि मुहुर्त की बात की जाए तो पारंपरिक रूप से रंगों का यह त्यौहार इस वर्ष रविवार की शाम से शुरू हो जाएगी। वैसे भी उमंग, उल्लास और खानपान का यह उत्सव दो दिन तक मनाया जाता है. पहले दिन होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका-दहन कहते हैं. होली के दूसरे दिन को धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता है. इस दिन लोग एक-दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल फेंकेते हैं और घर-घर जाकर लोगों को रंग लगाते हैं. आइए जानते हैं, इस बेजोड़ पर्व से जुड़ी कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य और रोचक बातें:

भारतीय पंचांग और ज्योतिष के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा यानी होली के अगले दिन से चैत्र शुदी प्रतिपदा की शुरुआत होती है और इसी दिन से नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है. इसलिए होली पर्व नवसंवत और नववर्ष के आरंभ का प्रतीक है। प्रचलित मान्यता के अनुसार यह त्योहार हिरण्यकशिपु की बहन होलिका के मारे जाने की स्मृति में मनाया जाता है। होलिका को आग से न जलने का वरदान था, उसने विष्णु भक्त प्रह्लाद को अग्नि में जला कर मारने की कोशिश की थी। होलिका जल गयी, प्रह्लाद बच गये. तभी से होली मनाने की प्रथा चल पड़ी।

क्या आप जानते हैं, होली एक बहुत हे प्राचीन उत्सव है. इसका आरम्भिक शब्द रूप होलाका था। पहले यह शब्द भारत में पूर्वी भागों में काफी प्रचलित था. जैमिनि और शबर जैसे ऋषियों ने ग्रन्थों में लिखा है कि होलाका सभी आर्यो द्वारा विधिवत सम्पादित होना चाहिए।

प्राचीन काल में होली के दिन यानि फाल्गुन की पूर्णिमा को महिलाओं द्वारा परिवार की सुख समृद्धि के लिए पूर्णिमा के चांद की पूजा करने की परंपरा थी। वैदिक काल में इस दिन नवात्रैष्टि यज्ञ किया जाता था। इसे वसंतोत्सव के रूप में काफी हर्ष-उल्लास और नए अन्न के साथ मनाया जाता था।

होली केवल रंगों का ही त्योहार नहीं है, बल्कि ओर सामाजिक और धार्मिक त्योहार भी है। इसे सभी बड़े उत्साह से मनाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें जातिभेद-वर्णभेद का कोई स्थान नहीं होता है। लकड़ियों और कंडों आदि का ढेर लगाकर मंत्र उच्चारण से होलिकापूजन किया जाता है, फिर होलिका जलायी जाती है।

होली के अवसर पर लोग स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं, जिसमें गुझिया, मालपुआ, दही-बड़ा खास व्यंजन हैं. लोग नाचते-गाते हैं और ढोल बजाकर होली के गीत गाते हैं। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं।

होली के अवसर पर मथुरा के वृंदावन में अद्वितीय मटका समारोह का आयोजन किया जाता है। समारोह में दूध और मक्खन से भरा एक मिट्टी का मटका ऊंचाई पर बांधा जाता हैं और लड़के मटके तक पहुंचने के लिए जी-तोड़ कोशिश करते हैं। इस आयोजन को जीतने वाले को इनाम भी दिया जाता हैं।

होली पर भरभोलिए जलाने की भी परंपरा है भरभोलिए गाय के गोबर से बने ऐसे उपले हैं, जिनके बीच में छेद होता है। इनकी माला बनाई जाती है, जिसमें सात भरभोलिए होते हैं। इस माला को भाइयों के सिर से अनिष्ट को उतारा जाता है और होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला दी जाती है।

प्राचीन कवि हेमाद्रि ने होली के लिए बृहद्यम का एक श्लोक उद्धृत किया है, जिसमें होलिका-पूर्णिमा को हुताशनी कहा गया है। लिंग पुराण में आया है- फाल्गुन पूर्णिमा को फाल्गुनिका कहा जाता है, यह बाल-क्रीड़ाओं से पूर्ण है और लोगों को विभूति, ऐश्वर्य देने वाली है।

होली का त्यौहार हो और यदि बरसाना के लठमार होली की चर्चा न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. बरसाना के लठमार होली न केवल अपनी रोचक परंपरा बल्कि मस्ती और उमंग के पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। कृष्ण और राधा के प्रेम जुड़ी यहां की होली में नंदगांव के पुरूष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं। पुरुषों को हुरियार और महिलाओं को हुरियारिन कहा जाता है। जब मस्ती से भरे नंदगांव के पुरुषों टोलियां पिचकारियां लिए बरसाना पहुंचती हैं, तो बरसाने की हुरियारिन महिलाएं उनपर खूब लाठियां बरसाती हैं। वैसे तो हुरियारों को इससे बचना होता है, लेकिन यदि लठ का वार खा भी लिया, तो कोई भी हरियर उफ़ तक नहीं बोलता है, हंसता ही रहता है।

 

 

होली खेलें मगर सम्भलकर

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रंग खेलना सबको पसन्द है मगर इस दौरान अपना ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। बाल और त्वचा का पूरा ध्यान रखते हुए ही होली खेलें तो बुद्धिमानी है। इससे आप होली का आनंद भी उठा सकेंगे और होली का मजा भी किरकिरा नहीं होगा। अगर आप रंगों की मस्ती में सराबोर होने जा रही हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें –

कुछ लोग होली खेलने के पहले बाल यह सोचकर नहीं धुलते हैं कि रंग खेलने से बाल गंदे होने ही हैं, लेकिन पहले से गंदे बाल में रंग लगने से आपके बालों को और नुकसान पहुंच सकता है और बाल रुखे हो सकते हैं, इसलिए बाल धुलकर, सुखाने के बाद बालों में अच्छी तरह से तेल लगाकर ही होली खेलने निकलें।

होली खेलने निकलने से पहले सनस्क्रीन क्रीम लगाना नहीं भूलें, क्योंकि तेज धूप में आपकी त्वचा झुलस सकती हैं और रंग काला पड़ सकता है।

बाजार में उपलब्ध सिंथेटिक रंगों में हानिकारक केमिकल और शीशा भी हो सकता है, जिससे आपकी त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है इसलिए त्वचा और बालों पर अच्छे से तेल लगाएं और हो सके तो प्राकृतिक रंगों या घर पर बने टेसू के फूल वाले रंग से होली खेलें। कानों के पीछे, उंगिलयों के बीच में भी तेल अच्छे से लगाएं और नाखूनों पर नेल पॉलिश लगाना नहीं भूलें। बालों में नारियल तेल डालकर अच्छे से मसाज करें, इससे आपके बाल रूखे भी नहीं होंगे।

शरीर के अधिकांश हिस्सों को रंगों से बचाने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, सूती रंग के ही कपड़े पहनें, क्योंकि भीगने पर सिंथेटिक कपड़े शरीर से चिपक जाते हैं और आपको उलझन महसूस हो सकती है।

फलों और सब्जियों के छिलकों को सुखाकर उसमें टेल्कम पाउडर और संतरे के सूखे छिलकों के पाउडर को मिलाकर होली खेलना एक अच्छा विकल्प है। इसमें हल्दी पाउडर, जिंजर रूट पाउडर व दालचीनी पाउडर भी मिलाए जा सकते हैं, जो आपकी त्वचा के लिए हानिकारक साबित नहीं होंगे, लेकिन इन पाउडर को जोर से त्वचा पर मले नहीं, क्योंकि इससे लालिमा, खरोंच या दानें पड़ सकते हैं और त्वचा में जलन हो सकती है।

होली खेलने के बाद सौम्य फेसवॉश या साबुन का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि हार्श साबुन से त्वचा रूखी हो सकती है, नहाने के बाद मॉइश्चराइजर और बॉडी लोशन जरूर लगाएं।

बालों को सौम्य हर्बल शैम्पू से अच्छी तरह से धुलें, ताकि अभ्रक युक्त और केमिकल वाले रंग बालों से अच्छी तरह से निकल जाएं, शैम्पू के बाद बालों का रूखापन दूर करने के लिए एक मग पानी में एक नींबू का रस मिलाकर धो लें या फिर बीयर से भी बाल धुला जा सकता है, इससे आपके बाल मुलायम रहेंगे।

 

विदेशों में भी खूब मनायी जाती है होली

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होली का त्योहार आने वाला है। सोमवार 13 मार्च को रंगों का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। लेकिन शायद आप नहीं जानते होंगे कि भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में होली या होली से मिलता जुलता त्योहार मनाया जाता है।

साउथ कोरिया- यहां हर साल मड फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। आपको बता दें कि यहां पर लोग होली मिट्टी और कीचड़ से खेलते हैं।

स्पेन- यहां 2 तरह की होली मनायी जाती है। एक ग्रीज से तो दूसरी टमाटर से। स्पेन में कैजकमोराज नामक फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है जिसमें ग्रीज से होली खेली जाती है। तो वहीं विश्व प्रसिद्ध टोमैटीना फेस्टिवल में टमाटर से होली खेली जाती है।

जर्मनी- यहां मनाये जाने वाले ऑक्टोबरफेस्टा त्योहार में लोग बियर से होली खेलते है। यहां लोग धड़ल्ले से बियर पीने के साथ ही एक दूसरे पर जमकर बियर फेंकते भी हैं।

थाईलैंड- यहां हर साल चियांग माई में द वॉटर फेस्टिवल आयोजित किया जाता है और होली खेली जाती है। इस फेस्टिवल के दौरान पानी की बहुत मात्रा में बर्बादी होती है।

जापान- फुकाग्वा हेचिमैन फेस्टिवल। यह पानी का पर्व है, जो अगस्त में मनाया जाता है। इसमें लोग एक-दूसरे पर बाल्टियों से पानी फेंकते हैं। वैसे, इस पर्व का प्रचलित नाम मिजु-केके मत्सुरी है, जिसका मतलब है पानी फेंकने का उत्सव।

बेल्जियम- यहां की होली भारत जैसी ही होती है और लोग इसे मूर्ख दिवस के रूप में मनाते हैं। यहां पुराने जूतों की होली जलायी जाती है।