Tuesday, March 24, 2026
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अब आजमाइए मिनरल मेकअप

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मिनरल मेकअप बाज़ार में नया फैशन है और अब अधिकाँश लोग आम तौर पर उपयोग में लाये जाने वाले मेकअप के बजाय मिनरल मेकअप को चुनते हैं। हम सभी नियमित तौर पर मेकअप को प्राथमिकता देते हैं, परन्तु क्या आपने कभी मिनरल मेकअप के बारे में सुना है? जी हां, मिनरल मेकअप बाज़ार में नया फैशन है और अब अधिकाँश लोग आम तौर पर उपयोग में लाये जाने वाले मेकअप के बजाय मिनरल मेकअप को चुनते हैं। मेकअप विशेषज्ञों द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला यह मिनरल मेकअप सबसे अच्छा होता है। तो यदि आपने अभी तक मिनरल मेकअप के बारे में नहीं सुना है तो इसे खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें।

  1. मुंहासों वाली त्वचा के लिए उपयुक्त विशेषज्ञों के अनुसार मिनरल मेकअप उन लोगों के लिए बहुत लाभदायक है जिन्हें मुंहासों या खुजली वाली त्वचा की समस्या है। सामान्यत: ऐसे लोग जिन्हें मुंहासों की समस्या होती है वे मेकअप करना पसंद नहीं करते क्योंकि इसे त्वचा पर जलन, एलर्जी और खुजली होने की संभावना होती है। हालाँकि मिनरल मेकअप का उपयोग करना एक सस्ता विकल्प है क्योंकि इसमें ऐसे उत्पाद होते हैं जिनसे त्वचा को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता।
  2. शुष्क त्वचा के साथ जुड़ा हुआ मिथक आम तौर पर लोगों में यह झूठी धारणा फ़ैली हुई है कि यदि शुष्क त्वचा वाले लोग मिनरल मेकअप का उपयोग करते हैं तो उनकी त्वचा और अधिक शुष्क हो जाती है। हालाँकि यह पूरी तरह से आपके चुनाव पर निर्भर करता है कि आप मिनरल मेकअप का चुनाव करें अथवा नहीं। परंतु सच यह है कि मिनरल मेकअप से त्वचा शुष्क नहीं होती। यदि आपकी त्वचा पहले से ही शुष्क है तो त्वचा पर हाईड्रेटिंग स्प्रे का उपयोग करें ताकि त्वचा पूरे समय हाईड्रेटेड बनी रहे।
  3. त्वचा के लिए बहुत हेल्दी आपको एक बहुत महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखना चाहिए कि शुद्ध मिनरल मेकअप तेल से बंधता है पानी से नहीं। जब तक इसमें कोई केमिकल न हो तब तक यह आपकी स्किन पर कोई प्रभाव नहीं डालता। बाज़ार में उपलब्ध अधिकाँश सस्ते मिनरल फाउंडेशन में केमिकल्स का उपयोग किया जाता है जो आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  4. रोम छिद्रों को बंद नहीं करता जहाँ तक मिनरल मेकअप का सवाल है यह रोम छिद्रों को बंद नहीं करता। मिनरल मेकअप लगाने के बाद भी त्वचा अच्छी तरह से सांस ले सकती है जिसके कारण रोम छिद्र बंद नहीं होते क्योंकि चेहरे पर प्राकृतिक तेल उपस्थित होता है। मिनरल मेकअप त्वचा के रोम छिद्रों को बंद नहीं करता जिनके कारण चेहरे पर मुंहासे नहीं आते।
  5. सन डेमेज अधिकाँश विशेषज्ञ यह दावा करते हैं कि मिनरल मेकअप का उपयोग करना त्वचा के लिए लाभदायक होता है क्योंकि यह यूवीए और यूवीबी किरणों से त्वचा की रक्षा करता है। गर्मियों में मिनरल मेकअप का उपयोग करना सुरक्षित होता है। अधिकाँश मिनरल मेकअप में उच्च मात्रा में टाईटेनियम डाइऑक्साइड पाया जाता है जो सूर्य की नुकसानदायक किरणों से त्वचा की रक्षा करता है। यह एक उत्कृष्ट एसपीएफ एजेंट की तरह काम करता है।
  6. शेल्फ लाइफ हम सभी को इस बात की चिंता बनी रहती है कि हमारा मेकअप कितनी देर तक रहेगा। जब आप मिनरल मेकअप की बात करते हैं तो यह बहुत लम्बे समय तक टिकता है। मिनरल मेकअप की शेल्फ लाइफ भी बहुत अधिक होती है इसलिए आपको एक साल के बाद इसे फेंकने की आवश्यकता नहीं होती। मिनरल मेकअप बहुत सरल और साफ़ होता है जो बैक्टीरिया को बढ़ने नहीं देता। क्योंकि मिनरल मेकअप में ऑर्गेनिक पदार्थ होते हैं अत: यह बैक्टीरिया को बढ़ने नही देता और इसकी शेल्फ लाइफ भी अच्छी होती है।
  7. अधिक समय तक प्रभाव दिखाने वाला इस बात का ध्यान रखें कि मिनरल मेकअप की न केवल शेल्फ लाइफ अधिक होती है बल्कि इसका त्वचा पर प्रभाव भी अधिक समय तक रहता है। आम तौर पर किया जाने वाला मेकअप 6 घंटों तक रहता है जबकि मिनरल मेकअप अधिक समय तक बना रहता है, लगभग 10-12 घंटों तक। एक्स्ट्रा कवरेज के लिए आप चेहरे पर गाढ़े फाउंडेशन का उपयोग कर सकते हैं ताकि ये अधिक समय तक बना रहे।

महाराष्ट्र का ऐसा हनुमान मंदिर जहां पूजा करती हैं एक महिला पुजारी 

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महाराष्ट्र के बोरेगांव में वर्षों से एक महिला पुजारी हनुमानजी की पूजा-अर्चना कर रही हैं। बोरेगांव एक छोटा गांव है, जहां रहने वाले लोगों की जनसंख्या कम है। यह गांव मुंबई से पूर्व दिशा में 430 किमी दूर है।

42 वर्षीय शारदाबाई गुराओ, हनुमानजी के इस मंदिर में नियमित आरती वर्षों से करती आ रही हैं। बोरेगांव में मुस्लिम धर्म को मानने वाले अनुयायी भी रहते हैं। जो हनुमान मंदिर में शाम को होने वाली आरती और हिंदू धार्मिक त्योहारों में शामिल होते हैं। इस तरह यह गांव साम्प्रदायिक सद्भावना की मिसाल पेश करता है।

अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक बोरेगांव में रहने वाली ग्रामीण अंबिका गाडवरे बताती हैं, ‘उस समय मंदिर परिसर में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन हिंदू है और कौन मुस्लिम।’

वर्षों पहले बोरेगांव की ग्राम पंचायत ने शारदाबाई को सर्वसम्मति से मंदिर का पुजारी नियुक्त किया था। वैसे, बोरेगांव की आबादी 1,570 है लेकिन यहां मुस्लिम धर्म के अनुयायी 115 हैं।

हनुमान मंदिर की पुजारी इस गांव की एक माहिला है जो कन्नड़ भाषा भी बोलती हैं। शारदाबाई बताती हैं, ‘जिस तरह शनि शिंगणापुर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि वह भी वहां पूजा कर सकती है। यह काबिलेतारीफ है।’

गोरेगांव मे ही रहने वाले ओमकांत गाडवरे बताते हैं, ‘शारदाबाई अविवाहित हैं। जब 10 वर्ष की आयु से हनुमान मंदिर की पूजा कर रही हैं, वजह थी उनके पिता का देहांत हो जाना। शारदा बाई के दो भाई भी हैं। वह रोज मंदिर की सफाई करती हैं और इसके बाद रामभक्त हनुमानजी की आरती करती हैं।’

शारदाबाई जब 8 वर्ष की थीं तब वह एक पेड़ के ऊपर से गिर गईं जिसमें उनकी कोहनी में काफी चोट आई। जिसके कारण उनका एक हाथ टूट गया।

शारदाबाई बताती हैं कि इसके बाद शादी का कोई प्रस्ताव भी नहीं आया। पिता की मृत्यु बचपन में ही हो चुकी थी। घर की जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने पुजारी बनना ही स्वीकार कर लिया। मेरे पिता इस मंदिर के पुजारी थे। पिता की मृत्यु के बाद भाई खेतों में काम करता तो उसे मंदिर की पूजा करने का वक्त नहीं मिलता था। ऐसे में पुजारी के तौर पर मंदिर की पूजा करनी शुरू कर दी।

हर रोज सुबह 7 बजे शारदाबाई मंदिर की पूजा शुरू करती हैं। मंदिर में शाम की पूजा 4.30 बजे होती है। जब शारदाबाई बीमार होती हैं या कोई अन्य काम आ जाता है तो उनका भाई भी यहां पूजा करते हैं।

 

पोएला बोएशाख पर बनाएं कुछ खास

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आलू पोस्‍तो

सामग्री- 4 से 6 लोगों के लिए आलू पोस्‍तो बनाने के लिए हमे चाहिए 500 ग्राम आलू, 75 ग्राम पोस्ता, 2-3 साबुत लाल मिर्च, 2 ग्राम कलौंजी, 6-7 हरी मिर्च, 5 ग्राम हल्दी, 75 ग्राम सरसों का तेल, स्वादानुसार नमक

विधि- आलू पोस्‍तो बनाने के लिए सबसे पहले आलू को छील कर अच्‍छी तरह धो लें इसके बाद आलू का चौकोर टुकड़ों में काट लें। आलू काटने के बाद एक पैन में तेल डालकर गर्म करें और उसमें हरी मिर्च और कलौंजी डालकर भूंज लें जब मसाला थोड़ा भूरा हो जाए तो उसमें आलू के पीस डालकर अच्‍छी तरह से फ्राई कर लें। बाद में पोस्‍ता दाना और थोड़ा पानी डालकर उसे धीमी आंच पर ढक कर पकाएं। जब पोस्‍ता दाना पक जाए तो गर्मा-गर्म हरी धनिया और मिर्च के साथ परोसें ।

बंगाली स्‍टाइल की गोभी मलाई करी

सामग्री- 1 फूल गोभी, 2 चम्‍मच प्‍याज पेस्‍ट, 1 चम्‍मच अदरक लहसुन पेस्‍ट, 2 चम्‍मच टमैटो प्‍यूरी,1 चम्‍मच हरी मिर्च पेस्‍ट, 1 चम्‍मच जीरा पाउडर, 1 चम्‍मच धनिया पाउडर, 1/2 चम्‍मच हल्‍दी पाउडर, 1 कप नारियल दूध, 1 चम्‍मच जीरा, नमक स्‍वादानुसार, 2 चम्‍मच तेल, 2 चम्‍मच धनिया

 विधि- फूल गोभी को छोटे टुकड़ों में काट कर उसे गरम पानी में नमक डाल कर 10 मिनट तक भिगो कर रख दें। फिर इसे छान कर अलग रखें। अब कढाई में 1 चम्‍मच तेल डाल कर उसमें गोभी को गोल्डन ब्राउन होने तक फ्राई कर लें। गोभी को प्‍लेट में निकाल कर बाहर रख दें। अब दुबारा कढाई में तेल डालें, जब गरम हो जाए तब उसमें जीरा डालें। 2 मिनट के बाद उसमें प्‍याज पेस्‍ट डाल कर पकाएं। फिर अदरक-लहसुन पेस्‍ट , हल्‍दी पाउडर, हरी मिर्च पेस्‍ट, जीरा पाउडर, धनिया पाउडर डाल कर 5 मिनट पकाएं। अब इसमें टमैटो प्‍यूरी डाले और 3 मिनट पकाएं। इसके बाद फूलगोभी , नमक और नारियल का दूध डाल कर मिक्‍स करें। कढाई को ढंक दें और आंच को बिल्‍कुल धीमा कर दें। बीच-बीच में इसे चलाती रहें और जब हो जाए तब आंच को बंद कर दें। अब इस डिश को कटी हरी धनिया डाल कर सर्व करें।

 

विदेशी लेखकों, एक्टरों और राजनयिकों को आसान और मजेदार तरीकों से हिंदी सिखा रहीं पल्लवी सिंह

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भाषा मानवता का पुल है, हमें जोड़ती है। वैश्वीकरण के इस दौर में हम दुनियां भर में आवास-प्रवास करते रहते हैं, हमारे देश में भी लाखों विदेशी आते हैं और उनकी मुहब्बत कहिए या कौतुहल कि उनमें से अधिकतर यहीं बस जाते हैं। ऐसे लोग हमेशा भाषा का अवरोध झेलते हुए देश में रहने के बाद भी अलग-थलग से नज़र आते हैं। इन्हें हमसे जोड़ने के लिए संवाद अनिवार्य है और संवाद के लिए समान भाषा जरूरी होती है।

इसी जरूरत को अपना मिशन बनाते हुए एक इंजीनियर विदेशियों को हिंदी सिखा रही है। उसके छात्रों में तमाम लोग हैं जो इसे जल्द से जल्द सीखकर व्यवहारिक अड़चनों से मुक्ति पा लेना चाहते हैं और जुड़ जाना चाहते हैं भारतीयों से।

पल्लवी सिंह ने दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन से बी टेक की पढाई पूरी करते ही महसूस कर लिया था कि इंजीनियरिंग उनकी पसंद का क्षेत्र नहीं है। 2009 में उन्हें कुछ नहीं पता था कि भविष्य में वो क्या करेंगीं। कुछ विकल्पों के साथ उन्होंने अपनी पढाई जारी रखी और खाली वक़्त में फ्रेंच भाषा सीखने के लिए डिप्लोमा कर लिया क्योंकि उन्हें भाषाएँ सीखने का शौक था।

फ्रेंच भाषा सीखते समय उन्हें कोर्स में सरंचनात्मक अव्यवस्था नज़र आई।

“जिस तरह से हमें फ्रेंच सिखाया जा रहा था, उससे हम फ्रेंच को उस तरह से नहीं बोल सकते थे, जैसे कोई फ़्रांस में रहने वाला बोलता है। मैं चाहती थी कि मुझे कोई फ्रेंच व्यक्ति मिले जिससे मैं हर दिन बातचीत कर के इसे बेहतर सीखूं।” पल्लवी याद करते हुए बताती हैं।

जब पल्लवी के दिमाग में ये बात आई तो इसके साथ एक और विचार आया कि भारत में रहने वाले दूसरे देशों के लोग भी हिंदी के बारे में ऐसा सोचते होंगे। इसके जबाब की तलाश में पल्लवी दिल्ली विश्वविद्यालय में एक अफ्रीकन छात्र से मिली और वो उनका हिंदी सीखने वाला पहला छात्र बन गया।

इस शुरुआत के बाद जल्दी ही पल्लवी को दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अन्य विदेशी छात्रों ने जाना और हिंदी सीखने की कड़ी में जुड़ते गए। इस तरह पल्लवी ने अगस्त, 2011 में अपनी पहली औपचारिक कक्षाओं की शुरुआत ‘हिंदी लेसन्स’ के नाम से कर दी। अपनी बी. टेक की पढाई पूरी करने के बाद पल्लवी ने अपने पसंदीदा विषय मनौविज्ञान में दाखिला ले लिया।

दिल्ली में एक साल तक सफलता पूर्वक हिंदी सिखाने की कक्षाएं चलाने के बाद 2012 में पल्लवी मुम्बई आ गयीं और मनौविज्ञान में आगे की पढाई जारी रखी। इसी दौरान हिंदी सिखाने का सिलसिला जूनून में बदल रहा था। और पल्लवी ने मुम्बई में हिंदी सीखने के लिए छात्रों की ख़ोज शुरू कर दी।

” एक बार जब मैं अपने अफ़्रीकन स्टूडेंट्स को रंगों के नाम हिंदी में बता रही थी तो एक छात्र ने बताया कि अब वो समझा कि लोग उसे ‘कालू’ क्यों कहते हैं। उसने सीख लिया था कि अंग्रेजी के ब्लैक को हिंदी में काला कहते हैं। मुझे बहुत दुःख हुआ और शर्मिंदगी महसूस हुई लेकिन तब मुझे समझ आया कि जो मैं कर रही हूँ, वो इन स्टूडेंट्स के लिए जरूरी है,” पल्लवी बताती हैं।

पल्लवी की मुम्बई में धमाकेदार शुरुआत तब हुई जब उन्हें अमेरिकी वाणिज्य दूतावास ने कुछ आप्रवासियों को हिंदी सिखाने के लिए संपर्क किया। और तब से पल्लवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अब तक पल्लवी भारत में रहने वाले 600 विदेशियों को हिंदी सिखा चुकी हैं।

पल्लवी अभी तक कई राजनयिक अभियानों का हिस्सा रही हैं जहां उन्हें मल्टीनेशनल कंपनियों ने अपने स्टाफ और परिवार के सदस्यों को हिंदी सिखाने के लिए नियुक्त किया है।

पल्लवी टेड-एक्स के मंच पर बोल चुकी हैं और राज्यसभा टेलीविजन की सबसे युवा मेहमान हैं, जिन्हें गुफ़्तगू कार्यक्रम में इंटरव्यू किया गया।

पल्लवी ने विदेशी डेलीगेट्स, टूरिस्ट और विदेश से भारत आए बॉलीवुड सितारों के साथ मॉडलों और आधिकारिक राजनयिकों के साथ भारतीय नागरिकों से विवाह करने वाले विदेशिओं को भी हिंदी सिखाई है।

उनके छात्रों की लिस्ट में लेखक विलियम डेलरिम्पल और बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस, नटालिया डि लुसिओ और लुसिंडा निकोलस शामिल हैं।

उनसे हिंदी सीखने वाले जाने माने लेखक और इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल कहते हैं,
“पल्लवी सिंह एक शानदार हिंदी टीचर हैं जो भाषा सिखाने के उबाऊपन या बोझ जिसमें व्याकरण सीखना फिर क्रिया और लिंग जैसी प्रक्रियाओं को मजेदार बना देती हैं।”

वैसे पल्लवी हमेशा ऐसे लोगों से घिरी रहती हैं, जो उनके काम को सराहते हैं, लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं।

” मेरी एक विदेशी स्टूडेंट्स एकबार मुझसे मेरी फीस कम करने को लेकर मोलभाव करती रही, क्योंकि उनको लगता है, कि भारत में किसी भी चीज को लेकर मोलभाव करना जरूरी है। इससे चीजें सस्ती मिल जाती हैं। ऐसे अनुभवों से हंसी आती है लेकिन मैं समझती हूँ कि ये मानसिक धारणा तोड़नी जरूरी है,” पल्लवी एक अनुभव बताती हैं।

कुछ ऐसी घटनाएं हैं जिन्हें सुनकर पल्लवी को गर्व होता है, उनमें से एक का जिक्र करते हुए पल्लवी बताती हैं।

“एक बार मेरी एक विदेशी छात्र ऑटो में जा रही थी, तभी एक बाइक वाले ने ऑटो वाले से हिंदी में कोई पता पूछा, लेकिन ड्राइवर पता नहीं बता पाया तो उस स्टूडेंट ने बाइक वाले को वो पता हिंदी में समझा दिया। और आसपास के लोगों के लिए ये चौंकाने वाला दृश्य था। हालांकि ये छोटी-छोटी घटनाएं हैं लेकिन उन सबके लिए ये बड़ी बात है जिन्हें हमेशा घूरा जाता रहा है और विदेशी समझकर अजीब तरह के व्यवहार होते रहते हैं। ये मुझे मेरे काम को लेकर उत्साहित करता है।”

पल्लवी के हिंदी लेसंस में ऐसी रचनात्मक पद्धतियाँ हैं जो उन्हें एकदम अलग बनाती हैं।

सबसे पहली चीज तो ये कि उनके पास कोई क्लासरूम नहीं है। पल्लवी हिंदी सिखाने या तो अपने छात्रो के घर जाती हैं या फिर किसी कैफे में  कॉफ़ी की चुस्कियों के साथ हिंदी सिखाई जाती है।

“मेरी हर हिंदी क्लास एक शो है, जिसमें बातचीत को मजेदार बनाकर खुशनुमा माहौल बनाया जाता है। जहां तमाम गतिविधियों के माध्यम से कार्ड, बोर्ड और टीचिंग टूल की सहायता से पढाई को फन बनाते हुए क्लास को जीवन्त बनाया जाता है,” पल्लवी कहती हैं।

पल्लवी ने हिंदी सिखाने का अपना मॉडल बनाया है जो उनके स्टूडेंट्स के फीडबैक पर आधारित है, इसकी सहायता से वे ये दावा करती हैं कि कोई भी घंटे भर की 25 क्लासों में हिंदी बोलना सीख सकता है। हालाँकि वो ये मानती हैं कि युवाओं को सिखाना एक चुनौती का काम है क्योंकि वे अपनी ज़िन्दगी की तमाम समस्याओं में उलझे रहते हैं, ज़िन्दगी के रस्ते तय करने के लिए खुद ही संघर्ष कर रहे इन युवाओ का पूरा ध्यान सीखने पर लगाना मुश्किल होता है। पल्लवी के अनुसार सीखने की कोई उम्र नहीं होती। युवाओं को सिखाने की सबसे अच्छी बात ये है कि वे उसे अच्छे से सुनते हैं और एक ही जगह ध्यान बनाए रखने का समय ज्यादा होता है।
हिंदी सिखाने के लिए किताबों की बजाय पल्लवी ने अलग-अलग तरह के खेल और परस्पर बातचीत की गतिविधियाँ ईजाद की हैं जिससे सीखना मजेदार बन जाता है।

इस टेक्नोलॉजी के ज़माने में तमाम एप्लीकेशन हैं जो हिंदी सिखाने का दावा करते हैं, पर पल्लवी का मानना है कि कोई भी टेक्नोलॉजी मानवीय संवादों का स्थान नहीं ले सकती। पल्लवी अपने आपको खुशनसीब मानती हैं कि वे ऐसे वक़्त में पैदा हुईं हैं जब भारत आर्थिक और वैश्विक जगत में तरक्की कर रहा है।
युवाओं को सन्देश पर 26 वर्षीय इंजीनियर से हिंदी शिक्षक बनी पल्लवी कहती हैं,

” मेरे पास खोने के लिए बहुत कुछ था, मैं वो कोई भी दूसरा इंसान हो सकती थी जो कुछ नहीं करता। पर मैंने जोखिम उठाया, मुझे लगता है आप जिस काम को प्यार करते हैं उसके लिए आपको भी जोखिम उठाने चाहिए।”

हम सलाम करते हैं पल्लवी के जोखिम को और उस प्रयास को जो दुनियां को जोड़ने का काम कर रहा है। बाहर से आने वाले लोगों को इस देश में बेहतर और आसान जीवन बनाने के उनके इस अभियान से हमारी भाषा हिंदी की उन्नति  निहित है।

(साभार – द बेटर इंडिया)

नहीं रहीं सुरों की महारानी किशोरी अमोनकर

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जानीमानी शास्त्रीय संगीत गायिका किशोरी अमोनकर गत सप्ताह निधन हो गया। वे 84 वर्ष की थीं।

10 अप्रैल 1932 को मुंबई में जन्मीं किशोरी अमोनकर को हिंदुस्तानी संगीत की अग्रणी गायिकाओं में से एक माना जाता है।

ख्याल, ठुमरी और भजनों को शास्त्रीय संगीत से सराबोर करने वाली किशोरी अमोनकर ने अपनी माता मोघूबाई कुर्दिकर से संगीत की शिक्षा हासिल की जो स्वयं एक नामी गायिका थीं।

संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को स्वीकार करते हुए भारत सरकार ने किशोरी अमोनकर को वर्ष 1987 में पद्म भूषण और साल 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

कैंसर ने दृष्टि छीनी, पर आईएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं नागपुर की भक्ति घटोळे!

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नागपुर की भक्ति घटोळे की नौ साल की उम्र में ही कैंसर ने दृष्टि छीन लीं, लेकिन फिर भी उनके सपने और जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया और आज भक्ति सफलता के स्तम्भ स्थापित करते हुए अपने आइएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं।

नागपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में घटोळे परिवार के लिए गर्व के पल हैं क्योंकि उनके परिवार की सबसे छोटी बेटी को स्नातक के प्रथम वर्ष में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है। भक्ति राजनीती विज्ञान से स्नातक की पढाई कर रही हैं। भक्ति नेत्रहीन हैं पर पूरे आत्मविश्वास से मंच पर सम्मान ग्रहण करने पहुँचती हैं।

जन्म से दुनियां न देख पाने से ज्यादा मुश्किल होता है, देखते-देखते एक दिन अचानक कुछ न देख पाना। जिसने जन्म से ही दुनियां नहीं देखी वो अपनी अलग दुनियां रच लेते हैं, पर जिसने दुनियां के सारे रंग देखे हों फिर उसे सिर्फ अँधेरे के रंग से सबकुछ रचना हो तो बात अलग होती है।

नागपुर की भक्ति घटोळे के साथ ऐसा ही हुआ। लेकिन उन्होंने न सिर्फ़ सपने देखे बल्कि उनको पूरा करने कि दिशा में आगे बढ़ रही हैं। २१ साल की भक्ति के लिए ये सफर बहुत लंबा रहा है और आने वाला सफर भी उन्होंने लम्बा चुना है। भक्ति आई ए एस बनने के अपने सपने की ओर बढ़ रही हैं।

“ये सब कभी भी इतना आसान नहीं रहा, पर मुझे कभी अधूरापन नहीं महसूस हुआ। हाँ मेरा दिव्यांग होना कई बार बाधा बनता है, लेकिन ये कभी मुझे अपने सपने पूरे करने से नहीं रोक सकता। जिंदगी खूबसूरत है और मैं इसे पूरी तरह जीना चाहती हूँ।” भक्ति उत्साहित होकर कहती हैं।

जब वो नौ साल की थीं तो खतरनाक नेत्र-कैंसर से उनकी आँखों की रौशनी चली गई। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक बच्ची के लिए रंग बिरंगी दुनियां में पूरी तरह से अँधेरा छा गया।

छः महीने की उम्र में डॉक्टरों ने भक्ति की दायीं आँख में कैंसर होने की पुष्टि की थी। तमाम कोशिशों के बाबजूद डॉक्टर्स उनकी दायीं आँख को नहीं बचा पाए, लेकिन उन्होंने सुनिश्चित किया कि खतरनाक कैंसर दूसरी आँख तक न पहुँच पाए। पर दुर्भाग्य से कैंसर दूसरी आँख तक भी पहुँच गया।

जब भक्ति सात साल की हुईं तो कैंसर ने उनकी दूसरी आँख पर भी आक्रमण कर दिया। उनकी छोटी सी दुनियां में उथल-पुथल मच गयी। राष्ट्रीय बीमा कंपनी में विकास अधिकारी पिता रमेश घटोळे और माँ सुषमा अपनी दोनों बेटियों को लेकर गाँव से नागपुर शहर में बस गए ताकि भक्ति के उपचार में कोई चूक न हो। नागपुर से परिवार को चेन्नई और हैदराबाद जाने की जब भी जरूरत पड़ी, उन्होंने कोई मौका नहीं छोड़ा। एक लंबे इलाज के दौरान लगभग 25 कीमोथेरेपी कराने के बाबजूद भक्ति को अपनी बाईंं आँख भी खोनी पड़ी।

“मैं तब सात साल की थी और बहुत कुछ देख चुकी थी। इसलिए जब मेरी बायीं आँख भी चली गई तब मैं बुरी तरह हार गयी। मैंने सबसे बात करना बंद कर दिया। मैंने डॉक्टरों के पास और मन्दिरों में जाना बंद कर दिया। मैं बस सबकुछ छोड़ना चाहती थी। इसी समय मेरा परिवार मुझे नागपुर में योग अभ्यास मंडल में ले गया। मैंने योग और ध्यान का अभ्यास शुरू किया और इससे मुझे फायदा होने लगा। धीरे-धीरे मेरे व्यक्तित्व में सकारात्मकता आने लगी और मैंने अपनी ज़िन्दगी को ज्यों का त्यों स्वीकारना शुरू कर दिया,” भक्ति याद करते हुए बताती हैं।

स्कूल के शुरुआती वर्ष उलझन भरे रहे। भक्ति अपने उपचार की वजह से निरन्तर स्कूल नहीं जा पाईं, पर अपनी बड़ी बहन की सहायता से उन्होंने ब्रेल लिपि सीखनी शुरू की। भक्ति की ज़िन्दगी में टर्निंग पॉइंट तब आया जब उन्हें अपनी टीचर जिन्यासा कुबड़े मिलीं। जिन्यासा कुबड़े खुद भी नेत्रहीन हैं और नेत्रहीन स्टूडेंट्स को अपनीं सस्था आत्मदीप के माध्यम से कम्प्यूटर की ट्रेनिंग देती हैं।

“मैंने ब्रेल सीख ली थी पर सच्चाई ये थी कि मैं इसे इतना पसंद नहीं करती थी। जब मैंने कम्प्यूटर प्रयोग करना सीखा तो मेरी पूरी दुनियां बदल गई। चीजें मेरे लिए आसान हो गई। कम्प्यूटर मेरे लिए अलादीन का चिराग बन गया। अब मैं अपने ज्यादातर काम बिना किसी की मदद के खुद ही कर लेती हूँ। मैं अपना ई-मेल लिख सकती हूँ, सोशल मीडिया अकाउंट चलाती हूँ और इंटरनेट प्रयोग करती हूँ। और अब तो मैं अपने एग्जाम भी कम्प्यूटर के जरिये लिखती हूँ। आखिरी बार दसवीं कक्षा में मुझे एग्जाम लिखने के लिए सहायक की जरूरत पड़ी थी,”भक्ति उत्साहित होकर बताती हैं।

भक्ति ने एसएससी के दसवीं बोर्ड परीक्षा में 94 फीसदी अंक प्राप्त किए और दिव्यांगों की श्रेणी में राज्य में टॉपर रहीं।

यही सिलसिला जारी रखते हुए भक्ति 12 वीं में नागपुर जिले में 88 फीसदी अंकों के साथ दूसरी टॉपर रहीं। उनकी सफलता का सिलसिला कॉलेज में भी बना रहा। अपने इस शानदार सफर का श्रेय भक्ति अपने परिवार को देती हैं।

“मेरे माता-पिता, मेरी बहन और हमारे बड़े परिवार के सारे सदस्य हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। मैं संयुक्त परिवार का हिस्सा हूँ और ये मेरे लिए एक बड़े सपोर्ट सिस्टम के रूप में हमेशा खड़ा रहा। वे निरन्तर मुझे बेहतर इंसान बनाने में लगे रहे,” भक्ति कहती हैं।

(साभार – द बेेटर इंडिया)

एयर इंडिया शुरू करेगी एविएशन यूनिवर्सिटी, ऑफर होंगे ये कोर्स

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एयर इंडिया एक एविएशन यूनिवर्सिटी बनाने की तैयारी में है, जहां एवीएशन से जुड़े अलग-अलग फील्ड की ट्रेनिंग दी जा सके साथ ही लम्बे वक्त में कंपनी के लिए रेवेन्यू का भी श्रोत बन सके। भारत सरकार के अधीन ऑपरेट करने वाली कंपनी पिछले कुछ समय से अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए अलग-अलग रास्ते अपनाने को कार्यरत है। उन्हीं में से एक आइडिया के तहत एक एवीएशन यूनिवर्सिटी बनाने की तैयारी है।

कंपनी का कहना है कि, एक ऐसा संस्थान स्थापित करने की तैयारी है जहां पायलट, केबिन क्रू, ऑपरेशन सहित इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए ट्रेनिंग दी जा सके।

एयर इंडिया के सीएमडी अश्विनी लोहानी ने बताया कि, “हम एक वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं साथ ही साथ इसे पूरे कमर्शियल स्तर पर रन करना चाहते हैं।”

इसके अलावे कंपनी ने एजुकेशनल कंस्लटेंट्स इंडिया लिमिटेड से भी इस बाबत संपर्क किया है और अपने हैदराबाद स्थित ट्रेनिंग सेंटर को यूनिवर्सिटी में बदलने की संभावनाओं पर राय मांगी है। इडीसीआइएल 2-3 महीनों के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। रिपोर्ट में दिए गए सुझावों के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
कोई भी एयर लाइन कंपनी पायलट को ट्रेनिंग के लिए भेज सकेंगी

साथ ही अश्विनी लोहानी ने बताया कि, “जरूरत पड़ने पर कोई भी एयर लाइन कंपनी अपने पायलट को ट्रेनिंग के लिए हमारे सेंटर पर भेज सकेंगी। शुरूआती प्लान के मुताबिक यूनिवर्सिटी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स ऑफर करेगी। इसके बाद डिग्री प्रोग्राम की भी तैयारी है।”

हमारा लोकतंत्र काफी मजबूत है : शबाना आजमी

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कोलकाता : देश में जन आंदोलन को लेकर आशावादिता जाहिर करते हुये अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा कि भारत बेहद मजबूत लोकतंत्र है और जब भी जरूरत खड़ी होती है लोग इसके लिये लड़ते हैं।

शबाना ने शुक्रवार को एक चर्चा के दौरान कहा, ‘‘हमारा बेहद मजबूत नागरिक समाज है, बेहद मजबूत लोकतंत्र है जो जब भी जरूरत होती है तब अपनी पूरी ताकत से लड़ता है। इसलिये यह महिलाओं को चर्चा के लिये ज्यादा अवसर देती है।’’ शबाना से जब मोरल पुलिसिंग, लड़कियों के लिये ड्रेस कोड, तीन तलाक पर बहस और रोमियो स्क्वॉड जैसे मुद्दों पर उनकी राय मांगी गयी तो उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक ऐसा देश है जहां बेहद विविधताओं वाले लोग एक साथ रहते हैं और यह हमारी बहुधर्मी, बहुभाषायी और बहुसांस्कृतिक समाज में समाहित है।’

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महिला एंकर ने पढ़ी अपने पति की मौत की खबर

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के एक समाचार चैनल की एक महिला एंकर ने आज अपने पति की मौत की खबर पढ़ी। पति की दुर्घटना में मौत हो जाने की जानकारी मिलने के बाद भी महिला ने खबर पढ़ना जारी रखा।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित समाचार चैनल आईबीसी 24 की महिला एंकर सुप्रीत कौर को अपने पति की मौत की जानकारी आज खबर पढ़ने के दौरान मिली। आईबीसी 24 चैनल के आउटपुट एडिटर अंशुमान शर्मा ने भाषा को बताया कि आज सुबह जब सुप्रीत कौर चैनल में समाचार पढ़ रही थी, तभी दुर्घटना की एक खबर दिखाई गई।
दुर्घटना की खबर महासमुंद जिले के पिथौरा से थी। सुप्रीत ने इस दौरान महासमुंद जिले के संवाददाता से लाइव बातचीत की तथा घटना के संबंध में जानकारी ली।
शर्मा ने बताया कि जब संवाददाता ने जानकारी दी कि ट्रक की टक्कर से एक एसयूवी :डस्टर: वाहन में सवार पांच लोगों में से तीन की मौत हो गई है तथा दो अन्य घायल हुए हैं और सभी पीड़ित भिलाई के निवासी हैं। तब सुप्रीत को अपने पति को लेकर अंदेशा हुआ क्योंकि उनके पति हषर्द गावड़े अपने मित्रों के साथ डस्टर वाहन से ही महासमुंद की ओर निकले थे।
इसके बावजूद सुप्रीत ने समाचार पढ़ना जारी रखा। बाद में जब वह स्टूडियो से बाहर निकलीं तब उन्हें जानकारी मिली कि इस दुर्घटना में उनके पति की मौत हो चुकी है।

अंशुमान शर्मा ने बताया कि इसके बाद दफ्तर के अन्य सहयोगियों ने सुप्रीत को उनके घर पहुंचाया।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सुप्रीत कौर के पति हषर्द गावड़े के निधन पर दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर सुप्रीत कौर के जज्बे को सलाम किया जिन्होंने इस दुखद घड़ी में भी साहस के साथ अपना कर्तव्य निभाया।

मलाला बनेंगी संयुक्त राष्ट्र की सबसे युवा ‘शांतिदूत’

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई को संयुक्त राष्ट्र के शांति दूत के रूप में चुना है। यह विश्व के किसी नागरिक को संयुक्त राष्ट्र के मुखिया की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने घोषणा की कि मलाला दुनियाभर में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगी।

पाकिस्तानी मूल की मलाला यूसुफजई को अधिकारिक तौर पर एक समारोह में सोमवार को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। 19 वर्षीय मलाला युसुफजई पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में कुछ वर्ष पहले किशोरावस्था में सभी बच्चों को शिक्षा के अधिकार लिए अभियान चला रही थीं। लेकिन तालिबान आतंकियों को उनका यह काम रास नहीं आया और उन्होंने मलाला के स्कूल जाते वक्त बस में चढ़कर उन्हें गोली मारी थी जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं।

गुटेरेस ने कहा कि गंभीर खतरे के बावजूद मलाला ने महिलाओं, लड़कियों और सभी लोगों के अधिकारों के लिए अटल प्रतिबद्धता दिखाई। संयुक्त राष्ट्र के अन्य शांति दूतों में अभिनेता माइकल डगलस और लियानार्दो डिकैप्रियो जैसी बड़ी हस्तियां शामिल हैं। मलाला सबसे कम उम्र की युवा होंगी जिन्हें इस काम के लिए चुना गया है।