Thursday, March 26, 2026
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कहीं आपको अखरता तो नहीं ऐसी चीजों पर खर्च करना

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पुरुष और महिलाओं में अंतर होता है। इसे असमानता न भी कहा जाए मगर आदतें और सोच इन दोनों को एक –दूसरे से अलग करते हैं। हालाँकि आजकल पुरुष खुद को बदलकर संवेदनशील बनने की कोशिश कर रहे हैं मगर कुछ चीजें ऐसी हैं जिन पर खर्च करना उनको समय और पैसे, दोनों की बर्बादी लगता है। अब ये अलग बात है कि झिक – झिक से बचने के लिए वे बात को टाल जाएं या फिर अपनी साथी को भीतर छोड़कर मॉल के बाहर इंतजार करें मगर ये खर्च उनको खटकता जरूर है। दरअसल, मेंस एक्सपी ऑनलाइन लाइफस्टाइल पत्रिका ने अपने अध्ययन के बाद ऐसी ही कुछ चीजों की जानकारी दी, जिन पर खर्च आप पुरुषों को बिलकुल नहीं भाता। अब हम यह दावा तो कर नहीं सकते कि ये बिलकुल सही है या हम आपका दिमाग पढ़ सकते हैं, इसका फैसला तो आपके हाथ है तो पढ़िए और खुद समझिए

किसी भी पुरुष के लिए महँगी फिल्म देखना किसी चुनौती से कम नहीं होता। सप्ताहांत पर टिकट और भी महंगे हो जाते हैं इसलिए वे सप्ताह के किसी एक दिन ही फिल्म देखना पसंद करते हैं।

सिनेमा हॉल में पुरुषों  को पॉपकार्न खरीदकर खाना फालतू खर्च लगता है। वे फिल्म खत्म होने के बाद बाहर से जो मन करता है खा लेते हैं लेकिन हॉल के अंदर मंहगे पॉपकॉर्न खाना पसंद नहीं करते।

आप होटल में जाकर खाना तो खा लेते हैं लेकिन आपको सर्विस टैक्स देना पसंद नहीं होता। या सर्विस टैक्स दे भी दें तो टिप देने से बचते हैं।

अगर पुरुषों को घंटों अपनी बाइक या कार कहीं पार्क करनी है तो उसके लिए पार्किंग चार्ज देना उनकी मजबूरी बन जाती है लेकिन वहीं अगर थोड़ी देर के लिए उन्हें पार्किंग करनी पड़े तो वे इस खर्चे से बचते हैं।

ज्यादातर पुरुष ऐसी जगह जाना पसंद करते हैं जहां पर पैसा कम खर्च हो। इसके लिए वे गर्लफ्रेंड को लेकर किसी ऐतिहासिक जगह या पार्क ले जाते हैं जिससे उनका पैसा बच सके।

पुरुष खाने पीने की चीजों पर बहुत ही सोच समझकर खर्च करते हैं। वे लड़कियों की तरह चाट वगैरह के बहुत ज्यादा शौकीन नहीं होते इसलिए किसी भी ठेले पर खाने से बचते हैं।

 

नोटिस पीरियड में वेतन कटने पर नहीं देना होगा आयकर

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नौकरी कर रहे व्यक्ति को आयकर विभाग ने राहत दे दी है। अब नोटिस पीरियड नहीं देने के कारण अगर कोई कंपनी पैसा काटती है तो फिर उस व्यक्ति को आयकर नहीं देना पड़ेगा।

आयकर अपीलीय प्राधिकरण ने इस बारे में आदेश देते हुए कहा है कि अब कोई भी कंपनी ऐसे किसी भी व्यक्ति काआयकर नहीं काट सकेगी। इस मामले से जुड़ी दो कंपनियों के विवाद को निपटाते हुए प्राधिकरण ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है कि कंपनी दोनों तरफ से उस व्यक्ति को आर्थिक रुप से नुकसान पहुंचाएं।

प्राधिकरण की अहमदाबाद बेंच ने आदेश देते हुए कहा था कि व्यक्ति को मिलने वाले वेतन पर ही टैक्स काट सकते हैं और उन पर टैक्स नहीं लगेगा जिनको नोटिस पीरियड सर्व नहीं करने के कारण काटा गया है।

आयकर के एक्ट में है यह प्रावधान
इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार वेतन पर टैक्स देय होता है, वो चाहे कंपनी अपने कर्मचारियों को दे अथवा नहीं देती है। जब कोई कर्मचारी संस्थान नोटिस पीरियड देने के बजाए सीधे इस्तीफा दे देता है, तो कंपनी वेतन में से पैसे काट लेती है। लेकिन आयकर अधिकारी इस तरह की कटौती को नहीं मानते हैं और वो नेट सैलरी पर इनकम टैक्स लगाते हैं।

प्राधिकरण ने माना रियल इनकम का कंसेप्ट
इनकम टैक्स अपीलीय प्राधिकण ने कहा कि जिस वेतन के भाग को कंपनी ने पहले ही काट लिया है, उस पर आयकर काटना सही नहीं है। इसलिए आयकर अधिकारी उस राशि को कुल टैक्स राशि देय का हिस्सा नहीं मान सकते है।

 

नॉनवेज से भी ज्यादा प्रोटीन देते हैं ये शाकाहारी आहार

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कुछ लोग सोचते हैं कि प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट जैसे जरूरी पोषक तत्व सिर्फ नॉनवेज खाने से ही मिल सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आप शाकाहारी हैं तो ऐसी बहुत सी खाने की चीजें हैं जिनसे आप नॉनवेज के बराबर या उससे ज्यादा मात्रा में ये पोषक तत्व प्राप्त कर सकते हैं।

आटा
गेंहू की रोटी तो सभी खाते हैं। इसमें प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में होता है। इसके अलावा इसमें विटामिन बी1, बी2, बी3, ई और मैग्नीशियम जैसे जरूरी तत्व भी मौजूद होते हैं जो मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं।

राजमा
राजमा प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। इसमें प्रोटीन के साथ-साथ कार्बोहाइड्रेट, कैलोरी और विटामिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं।

दूध
दूध अपने आप में एक पूरा आहार है। इसलिए जरूरी नहीं कि प्रोटीन के लिए आप मांस-मछली का ही सेवन करें। एक गिलास दूध पीने से भी आपको ये सारे पोषक तत्व मिल जाते हैं और आप दिन भर फ्रेश महसूस करते हैं।

सोयाबीन
सभी जानते हैं कि शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का सबसे अच्छा स्त्रोत सोयाबीन है। इसे लोग नाश्ते में अंकुरित करके भी खाते हैं। 100 ग्राम सोयाबीन में 36 ग्राम प्रोटीन होता है।

मनोज वाजपेयी ने कहा- मैं हीरो नहीं, रचनात्मक अभिनेता बनना चाहता था

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मनोज वाजपेयी ने कहा कि मुझे लगता है कि मेरी यात्रा दिलचस्प और रंगीन रही। जहां मैं जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों लोगों से मिला। बॉलीवुड एक्टर मनोज वाजपेयी रचनात्मक अभिनेता  बनना चाहते थे।

पर्दे पर कलाकार के रूप में अपनी बहुमुखी प्रतिभा को साबित करने वाले अभिनेता मनोज वाजपेयी ने बताया कि वह कभी भी बॉलीवुड स्टार बनना नहीं चाहते थे, बावजूद इसके वह खुद को रचनात्मक अभिनेता के तौर पर स्थापित करना चाहते थे। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने कभी पर्दे पर छवि बनाने की कोशिश की है? इस पर मनोज ने यहां एक साक्षात्कार में आईएएनएस से कहा, “नहीं मैंने कभी ऐसा नहीं किया क्योंकि मेरा ऐसा लक्ष्य नहीं था। मैं खुद को कभी भी हीरो नहीं, बल्कि रचनात्मक अभिनेता बनाना चाहता था। मैं भूमिकाओं के साथ प्रयोग करने पर जोर देता हूं।” उन्होंने कहा, “इसलिए जब भी मैं पटकथा पढ़ता हूं तो मैं यह जरूर देखता हूं कि इससे पहले मैंने ऐसा कभी नहीं किया।” यह पूछे जाने पर कि क्या वह कोई भूमिका तैयार कर रहे हैं खासतौर पर जब वह धारावाहिकों का हिस्सा नहीं बने।

वाजपेयी ने कहा, “मुझे लगता है कि मेरी यात्रा दिलचस्प और रंगीन रही। जहां मैं जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों लोगों से मिला।” पुरस्कार जीतना बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करता है? इस पर उन्होंने कहा, “मैं पुरस्कार प्राप्त करते हुए विनम्र हूं इसलिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं, लेकिन अगर यह मुझे नहीं मिलता तो मुझे निराश नहीं होना चाहिए। पुरस्कार की वजह से पटकथाओं की पेशकश और मेहनताना बढ़ जाता है। मेरे लिए अच्छी कहानी प्रेरणा है।”

बता दें कि कुछ दिनों पहले अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कहा था कि शाहरुख खान के पास एक फिल्मी स्टार होने का करिश्मा है, जबकि उनके पास यह नहीं है। मनोज ने फिल्म ‘नाम शबाना’ के प्रचार के दौरान दिए साक्षात्कार में कहा, “शाहरुख जैसे सितारे का हर जगह क्रेज है। उनकी एक झलक देखकर लोग दीवने हो जाते हैं।

इस बात ने मुझे हमेशा हैरान किया कि ऐसा कैसे हो सकता है? यह गढ़ा जा सकता है..चाहे आप इसके साथ पैदा हुए हों या नहीं हुए हों। मनोज कहते हैं, अगर मैं हवाई अड्डे पर खड़ा होता हूं तो लोग मुझे देखकर क्रेजी नहीं होंगे, लेकिन अगर शाहरुख खड़े होते हैं तो बात ही कुछ और होती है, क्योंकि उनके पास स्टार करिश्मा है और यह मेरे पास नहीं है।

 

देश भर के स्कूलों में पहली से 12वीं कक्षा का बदलेगा पाठ्यक्रम

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देश भर के स्कूलों में पहली बार पहली से 12वीं कक्षा तक के सभी विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश के तहत एनसीईआरटी की टीम विषयों को रिव्यू करने में जुट गई है। एनसीईआरटी की टीम को एक साल में रिव्यू रिपोर्ट देनी होगी। खास बात यह है कि पाठ्यक्रम को मार्केट डिमांड और स्किल डेवलेपमेंट के आधार पर तैयार करना होगा, ताकि विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ रोजगार भी मिल सके। खास बात यह है कि पाठ्यक्रम में नोटबंदी, जीएसटी के चलते जीडीपी ग्रोथ आदि को भी शामिल किया जाएगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, एनसीईआरटी ने इसके लिए बाकायदा टीम गठित कर दी हैं। इसके साथ ही देशभर के सभी राज्यों के सचिव को पत्र लिखकर उनसे राय भी मांगी जा रही है। इस संबंध में 24 अप्रैल को एक बैठक होगी।

सूत्रों का कहना है कि पहली से लेकर 12 कक्षा तक सभी विषयों में एक साथ बदलाव पहली बार होने जा रहा है। दस साल पहले पाठ्यक्रम में जो बदलाव हुआ था, उसका स्तर छोटा था। उसमें महज कुछ नए विषयों को शामिल किया गया था। विशेषज्ञ की टीम पाठ्यक्रम में से उन विषयों को हटा देगी, जिसकी जरूरत नहीं है। ऐसे विषय शामिल करने पर सहमति बनी है, जिनसे छात्र को सिर्फ पास होने तक ही नहीं, बल्कि आगे रोजगार से जुड़ने में भी मदद मिल सके।

गौरतलब है कि इससे पहले एनसीईआरटी ने करीब दस साल पहले पाठ्यक्रम में बदलाव किया था। हालांकि पाठ्यक्रम में किसी विषय या पाठ में कोई आपत्तिजनक सामग्री शामिल होने पर शिकायतों के आधार पर उसमें बदलाव किया जाता रहा है।

इकोनॉमिक्स, साइंस, गणित और राजनीति शास्त्र में काफी बदलाव 
राजनीति शास्त्र, इकोनॉमिक्स, , सांइस और गणित में सबसे अधिक बदलाव देखने को मिलेंगे। क्योंकि राजनीति शास्त्र में देश समेत दुनिया के  राजनैतिक बदलाव को शामिल किया जाएगा। जबकि अर्थशास्त्र में छात्र कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि नोटबंदी को भी शामिल करने की योजना है। जीएसटी बिल पास होने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव की बात भी शामिल होगी।

जैकी श्रॉफ ने शॉर्ट फिल्म ‘खुजली’ से की वापसी, नीना गुप्ता के साथ जबरदस्त है कैमिस्ट्री

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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ और नीना गुप्ता एक बार फिर वापस आ गए हैं। किसी फिल्म में नहीं बल्कि टैरिबली टाइनी टॉकीज की एक शॉर्ट फिल्म में।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ और नीना गुप्ता एक बार फिर वापस आ गए हैं। किसी फिल्म में नहीं बल्कि टैरिबली टाइनी टॉकीज की एक शॉर्ट फिल्म में। इस फिल्म से आपको हाल ही में विक्रम भट्ट निर्देशित शॉर्ट फिल्म माया, जिसमें बीडीएसएम के बारे में दिखाया गया था, की याद आ जाएगी। फिल्म कुछ-कुछ उसी बारे में है। फिल्म में जैकी एक ऐसे कॉमन मैन के किरदार में है जिसे खुजली की समस्या है और वह उससे काफी परेशान है। उनका एक बेटा भी है जो कि अपने माता-पिता से थोड़ा परेशान है। एक बार जब जैकी अपनी खुजली से परेशान होकर क्रीम ढूंढने अपने बेटे के कमरे में जाते हैं तो उन्हें उसके रूम में हैंड कफ्स मिलती है। इन्हीं हैंडकफ्स के बारे में बातें करते हुए दोनों मियां-बीवी किस तरह काम को ह्यूमर से जोड़ते हैं यही शॉर्ट फिल्म की कहानी है।

31 मार्च को यूट्यूब पर रिलीज की गई इस फिल्म को अब तक 3 लाख 13 हजार लोग देख चुके हैं। इसके अलावा 6 हजार लोगों ने इस वीडियो को लाइक किया है। फिल्म को लिखा और निर्देशित किया है सोनम नायर ने और क्रिएटिव प्रोडक्शन किया है शारायना राजगोपाल ने। 15 मिनट और 16 सेकेंड की यह फिल्म हालांकि आखिरी के 4 मिनटों में थोड़ी बोर करने लगती है। लेकिन बावजूद इसके जैकी श्रॉफ को लंवे वक्त बाद एक्टिंग करते देखना दिलचस्प है। इससे पहले जैकी श्रॉफ फिल्म धूम-3 में आमिर खान के पिता के तौर पर देखा गया था।

इसके अलावा जैकी जल्द ही राम गोपाल वर्मा निर्देशित शॉर्ट फिल्म सरकार-3 में भी जल्द ही नजर आएंगे। राम गोपाल वर्मा की सरकार 3 जल्द ही रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन अहम किरदार में नजर आएंगे। लेकिन रिलीज से पहले ही यह फिल्म मुश्किल में आ गई है। दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने निर्देशक राम गोपाल वर्मा को 20 मार्च से पहले फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर नीलेश गिरकार के लिए स्पेशल स्क्रिनिंग रखने का आदेश दिया है। गिरकार ने 30 जनवरी को हाईकोर्ट को अपील करते हुए दावा किया था कि वो उन्होंने सरकार 3 की स्क्रिप्ट लिखी है। इसके बावजूद राम गोपाल वर्मा ने उनका उचित आभार व्यक्त नहीं किया है।

 

जब हाथों से एक महिला ने रोक दिया टैंक

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वेनेज़ुएला में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान आगे बढ़ते एक भारी-भरकम दंगारोधी टैंक को एक महिला ने रोक दिया। आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के बाद भी ये महिला टैंक के सामने डटी रही।

राष्ट्रपति निकोलस माडुरो की आर्थिक नीतियों से नाराज़ लोग काराकास शहर के फ़्रांसिस्को फख़ार्डो मार्ग पर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी को बताया कि इस दौरान सबको आश्चर्यचकित करते हुए एक महिला सीधे टैंक से सामने खड़ी हो गई।

वेनेज़ुएला की सोशल मीडिया में टैंक का रास्ता रोकने और उसे कुछ कदम पीछे हटने के लिए मजबूर करने वाली इस महिला को ‘बहादुर’ और ‘साहसी’ कहा गया।

हालांकि एल नेशनल नाम के अख़बार के फ़ेसबुक पन्ने पर इस बारे में छपी एक ख़बर पर जहां कुछ लोगों ने उन्हें ‘ग़ैर-ज़िम्मेदार’ बताया है, कुछ ने उन्हें ‘लेडी लिबर्टी’ कहा है।

ये महिला अपने गले में देश का झंडा लपेटे हुए थीं। उन्होंने झंडे के ही रंग की टोपी पहनी थी और अपनी पीठ पर एक बैग लिए हुए थीं।

ना तो उनके पास हेलमेट थी, ना मास्क और ना ही सुरक्षा के लिए कुछ और। उनके पास बस एक गमछा था जिससे वो शायद आंसू गैस के असर से थोड़ी राहत पा सकती थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, “वो शांत थी और प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों के नज़दीक थी। पहले सुरक्षाबलों ने पानी की बौछार की। फिर वहां लगी दीवारें हटाने के लिए टैंक सामने आया और तब ये महिला उसके सामने खड़ी हो गई. जैसे-जैसे टैंक पीछे हटता गया, वो आगे बढ़ती गई।”

मीडिया के एक व्यक्ति ने महिला को वहां से हटाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। कुछ तस्वीरों में महिला आंसू गैस के कारण अपनी आंखें पोछती नज़र आई।

कुछ समय बाद मोटरसाइकल पर आए पुलिसवालों ने उन्हें वहां से हटाया। उन्हें गिरफ्तार किया गया या नहीं इस बारे में अधिकारियों ने अब तक कोई जानकारी नहीं दी है।

वेनेज़ुएला की टेलीविज़न पत्रकार कैरन फेरीरा ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में महिला के बारे में बताया है कि वो सुरक्षित हैं।

उन्होंने लिखा है, “सुरक्षा कारणों से मैं उनकी पहचान नहीं बता सकती, लेकिन वो अपने घर पहुंच गई हैं और ठीक हैं।”

अब हिन्दी में भी कर सकेंगे पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन

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अब हिन्दी में पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। विदेश मंत्रालय ने इसके लिए पासपोर्ट वेबसाइट पर सेवा को शुरू कर दिया है। इससे उन लोगों को पासपोर्ट के लिए आवेदन करना आसान हो जाएगा, जिनको अंग्रेजी भाषा में पासपोर्ट का आवेदन करना मुश्किल काम लगता था।

ऐसे करना होगा आवेदन

जो लोग हिन्दी में पासपोर्ट के लिए आवेदन करना चाहते हैं उनको पासपोर्ट विभाग की वेबसाइट पर जाना होगा। इसके बाद अपने आप को रजिस्टर करना होगा। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस करने के बाद दिए गए ई-फार्म को अपने लैपटॉप या फिर डेस्कटॉप पर डाउनलोड करना होगा। इसके बाद इस फॉर्म को भरना होगा और पूरा फॉर्म भरकर के अपलोड करना होगा। इसके बाद ऑनलाइन तरीके से फीस जमा करनी होगी। इसके बाद डॉक्यूमेंट्स की जांच और पुलिस वेरिफिकेशन होने के बाद आपके पास पासपोर्ट पहुंच जाएगा।

नहीं जमा होगा भरे हुए फॉर्म का प्रिंटआउट
पासपोर्ट विभाग ने कहा है कि आवेदकों को फॉर्म का प्रिंटआउट लेकर आने की जरुरत नहीं है, क्योंकि इसको किसी भी सेवा केंद्र पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा हाल ही में आधिकारिक भाषा पर आधारित संसदीय कमिटी की नौवीं रिपोर्ट में भाषा को लेकर किए गए सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद यह कदम उठाया गया है। 2011 में इस रिपोर्ट को सरकार को सौंपा गया था। समिति ने सुझाव दिया था कि पासपोर्ट ऑफिस में हिन्दी और अंग्रेजी में फॉर्म उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

 434 बच्‍चों को बचाया आरपीएफ की इस सब-इंस्‍पेक्‍टर ने!

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रेखा मिश्रा, रेलवे प्रोटक्‍शन फोर्स में सब-इंस्‍पेक्‍टर हैं। रेखा की ड्यूटी छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर रहती है। जून 2016 में एक दिन उन्‍होंने स्‍कूल यूनिफॉर्म में तीन बच्चियों को देखा जो चेन्‍नई एक्‍सप्रेस से प्‍लेफॉर्म 15 पर उतरी थीं।

रेखा ने उनके पास जाकर पूछा कि क्‍या उन्‍होंने कोई परेशानी है, तीनों उन्‍हें घूरने लगीं। तब रेखा को लगा कि शायद वे उनकी बात समझ ही नहीं पा रहीं। फिर उन्‍होंने तीनों बच्चियों के बारे में मैसेज सर्कुलेट किया। फिर लोकल पुलिस स्‍टेशन की मदद से उनके माता-पिता को खोज निकाला। यही नहीं रेखा मिश्रा उन बच्चियों के साथ ही पुलिस स्‍टेशन में सोती थीं, जिससे उन्‍हें कोई परेशानी ना हो। वे उन्‍हें अपनी जिम्‍मेदारी समझने लगी थीं।

क्‍यों खास हैं रेखा 
32 साल की रेखा मिश्रा ने 2014 में आरपीएफ ज्‍वाइन की थी. उसके बाद से लोग उन्‍हें सीएसटी स्‍टेशन पर काम करने वाली मेहनती ऑफिसर के तौर पर जानते हैं। वे अब तक 434 बच्‍चों को बचा चुकी हैं जिसमें से 45 लड़कियां हैं। रेखा बताती हैं कि इनमें से ज्‍यादातर बच्‍चे वे होते हैं जो घर से भागकर आते हैं। उनके घर से भागने के पीछे का कारण माता-पिता द्वारा पिटाई, मायानगरी में करियर बनाना या फिर फेसबुक दोस्‍तों से मिलना तक होता है.बता दें कि इस साल मार्च अंत तक रेखा और उनके सहकर्मियों ने 162 बच्‍चों को बचाया है। रेखा बताती हैं कि आने वाले महीने उनके लिए चुनौती भरे हैं क्‍योंकि स्‍कूलों की छुटि्टयों के दौरान ज्‍यादा बच्‍चे स्‍टेशन पर पाए जाते हैं।

 

फ्लि‍पकार्ट ने किया रिटर्न पॉलिसी में बदलाव, अब हर प्रोडक्‍ट पर नहीं मिलेगा रिफंड

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देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लि‍पकार्ट ने बेचे जाने वाले कई लोकप्रिय वस्तुओं के लिए रिटर्न पॉलिसी को कड़ा कर दिया है। इससे कंपनी और विक्रेताओं को बोर्ड पर ऑपरेशन लागत में कटौती करने में मदद मिलेगी। लेकिन इसके कुछ ग्राहकों को भी असर पड़ेगा। देश के सबसे बड़े ईकॉमर्स बाजार अब पॉपुलर प्रोडक्टों पर अधिक समय तक ऑफर रिर्टन नहीं करेगी, जिसमें मोबाइल उपकरण, पर्सनल केयर, कंप्यूटर और कैमरा उपकरण, ऑफिस उपकरण और इसके अलावा बिग टिकट आइटम जैसे मोबाइल्स फोन, फर्नीचर शामिल है।

प्रोडक्‍ट रि‍टर्न पॉलि‍सी में बदलाव से भड़के काफी सेलर्स ने फ्लि‍पकार्ट पर प्रोडक्‍ट्स बेचने से इनकार कर दिया है। वहीं, सेलर्स का आरोप है कि कंपनी की लगातार बदलती रिटर्न पॉलि‍सी से उन्‍हें काफी नुकसान हो रहा है। रिटर्न पॉलि‍सी में एकतरफा बदलावों से सेलर्स नाराज दिख रहे हैं। बि‍जनेस की लागत में तेजी से इजाफे से परेशान फ्लि‍पकार्ट अब प्रोडक्‍ट रि‍टर्न होने पर शिपिंग चार्ज लेगा। ज्‍यादातर कैटेगरी में रि‍टर्न की रेंज 8 से 10 फीसदी तक रखी गई है।

फ्लिपकार्ट के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ग्राहक-अनुकूल रिफंड नीति का पालन करती है। “हमारे ग्राहक 1,800 में से 1500 प्रोडक्ट कैटेगरी को सेल्प सर्विस के द्वारा रिफंड कर सकते हैं।  फ्लिपकार्ट एक डेली बेसिस पर लगभग 25 हजार का रिफंड करता है जिनमें से 60 प्रतिशत तत्काल हैं जहां ग्राहकों को अपना पैसा वापस पाने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता है।”

बहरहाल, कंपनी की नई रिटर्न पॉलिसी के मुताबिक अब इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स समेत कई प्रोडक्ट्स को 30 के बजाए सिर्फ 10 दिन के अंदर ही रिटर्न किया जा सकेगा।