Friday, March 27, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 778

अनोखा हिंदू मंदिर, जहां होती है मुस्लिम महिला की पूजा..

0

इस दुनिया में एक ऐसा गांव भी है जहां हिंदू और मुस्लिम की एकता की अनोखी मसाल है। इस गांव में एक हिंदू मंदिर में मुस्लिम महिला की पूजा की जाती है। यह गांव गुजरात के अहमदाबाद से करीब 40 किमी दूर झूलासन है। यहां हिंदू और मुस्लिम एकता के रूप में मुस्लिम महिला की पूजा की जाती है।

डोलानाम की मुस्लिम महिला

​ ऐसी मान्यता है कि सैकडों साल पहले ‘डोला’ नाम की एक मुस्लिम महिला ने उपद्रवियों से अपने गांव को बचाने के लिए बड़ी साहस से उनसे लड़ाई की। अपने गांव की रक्षा करते करते ‘डोला’ ने अपनी जान दे दी। कहा जाता है कि मरने के बाद डोला का शरीर एक फूल में बदल गया था और बलिदान के चलते लोगों ने फूल के ऊपर ही मंदिर बनवा दिया।

सुनीता विलियम्स भी यहां आ चुकी हैं

गांव के लोग आज भी मानते हैं कि डोला आज भी न सिर्फ उनके गांव की रक्षा कर रही है बल्कि लोगों के दुख और दर्द को भी दूर करती है। इस मंदिर को डॉलर माता मंदिर के नाम से भी जानते है। क्योंकि इस गांव में 1500 से अधिक लोग अमेरिकी हैं। आपको बता दें कि सुनीता विलियम्स जब अंतरिक्ष यात्रा पर गई थी तब इस मंदिर में एक अखंड ज्योति जलाई थी जो लगातार 4 महीने तक जलती रही थी।

समाज को बदलने में जुटे संवेदनशील आईपीएस अधिकारी रवि कृष्ण

बदन पर खाकी, कंधों पर कानून और व्यवस्था का बोझ, ललाट पर मुस्कान और मन में कुछ कर गुजर जाने का हौसला… यह पहचान है उस आईपीएस ऑफिसर की जो लोगों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं है। उसकी वर्दी लोगों को डराती नहीं, बल्कि पास बुलाती है और उनमें प्रेरणा का बीज बो देती है। वह बेसहारों का सहारा, जरूरतमंदों की जरूरत और दृष्टिहीन लोगों की आंखों की रौशनी है। वास्तव में वह आंखों में रौशनी भरने का काम करता है। भारतीय पुलिस सेवा का वह जांबाज एक पूरे के पूरे गांव के लिए पालनहार की भूमिका में है, उसने एक गांव गोद ले रखा है।

देश-समाज में ऐसे कम ही लोग होते हैं जो अपनी नौकरी से इतर सामाजिक सरोकारों के लिए निस्वार्थ काम करें। आज के जमाने में जहां लोग अपने काम का ढिंढोरा पीटकर वाहवाही लूटने में वक्त जाया करते हैं, वह है कि पूरी तन्मयता से लोगों की भलाई में ही अपना अस्तित्व देखता है। इस आईपीएस ऑफिसर जैसा हर अधिकारी हो जाए तो इस देश को बदलने में देर न लगे। आगे की स्लाइड्स में पढ़े दयावान ऑफिसर की पूरी कहानी और उसके जरिये चलाई जा रही बेहद सार्थक मुहिम…

जरायम की धरती को स्वर्ग बनाने की ठानी और चल पड़े…

भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी रवि कृष्ण आंध्रप्रदेश के रायलसीमा मंडल में आने वाले कुरनूल जिले में तैनात हैं। रवि कृष्ण पुलिस सेवा के अलावा खुद की चलाई जा रही एक मुहिम में व्यस्त हैं। वह लोगों को जागरुक करते हैं और उन्हें ‘नेत्रदान’ करने के लिए प्रेरित करते हैं।

पिछले वर्ष रवि कृष्ण ने खुद नेत्रदान करने की शपथ ली, तब से वह लोगों के बीच जाकर उन्हें नेत्रदान की अहमियत बताते हैं। रवि कृष्ण की मुहिम के चलते अब तक करीब डेढ़ लाख लोग ‘नेत्रदान’ कर चुके हैं।

रवि कृष्ण पुलिस अधिकारी बनने से पहले केनरा बैंक में डेटा कंपनी ऑपरेटर का काम करते थे। उन्होंने एक ऐसे गांव को गोद लिया जो अपनी अपराध गाथाओं के लिए जाना जाता था। कपाटराला गांव में दिन-दहाड़े लोगों की हत्या हो जाना आम बात थी। इस गांव के 21 लोग अब भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। लेकिन रवि कृष्ण ने जरायम की धरती को स्वर्ग बनानी की ठानी है और वह काफी हद तक सफल भी हो रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रविकृष्ण के प्रयासों से जिले कलेक्टर ने 60 लाख रुपयों का अनुदान एक स्कूल में इमारत बनाने के लिए दिया है। उनकी कोशिशों से गांव की सड़कें भी बनाई जा रही हैं और गांव में साक्षरता दर सुधारने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं।
मुहिम के लिए गाना लिखकर भी गाते हैं रविकृष्ण

रवि कृष्ण लोगों को आगे बढ़कर नेत्रदान करने के लिए अपने लिखे और गाए गानों से भी प्रेरित करते हैं। उन्होंने ‘कल्लनू दानम चेयी, नी चूपनू दानम चेयी’ गाना लिखा और गाया। गाना यू ट्यूब पर वायरल हुआ। इसका मतलब होता ‘आंखें दान करें, रौशनी दान करें’। कुरनूल के ब्लाइंड स्कूलों में नियमित आने-जाने के कारण रवि कृष्ण को यह गाना लिखने की प्रेरणा मिली।

रविकृष्ण जिस काम में लगे हैं, उससे उन्हें लोकप्रियता तो मिल ही रही है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह हैं कि उनके प्रयासों से एक बड़े इलाके किस्मत बदल रही है, जो शायद पीएम मोदी की न्यू इंडिया मुहिम में जान भरेगी। वास्तव में रवि कृष्ण जैसे पुलिस ऑफिसर ही लोगों के सच्चे ऑफिसर कहलाते हैं।

 

देश में पहली बार मां के गर्भाशय का 21 वर्षीय बेटी में किया गया सफल प्रत्यारोपण

0

डॉक्टरों की टीम ने गर्भाश्य का सफल प्रत्यारोपण करने का दावा किया है। भारत में यह अपनी तरह की पहली गर्भाश्य प्रत्यारोपण  सर्जरी है। एक महिला के गर्भाश्य को उसकी 21 वर्षीय बेटी में प्रत्यारोपित किया गया है।

यहां ग्लैक्सी केयर लैपरोस्कोपी इंस्टीट्यूट में डॉक्टर शैलेश पुंतांबेकर के नेतृत्व में 12 डॉक्टरों की टीम ने इस सर्जरी को बृहस्पतिवार को 12 बजे दोपहर को शुरू किया और यह सर्जरी रात्रि 9 बजकर 15 मिनट पर समाप्त हुई।

डॉक्टर पुंतांबेकर का कहना है कि युवती का जन्म बगैर गर्भाश्य के हुआ था और मरीज चाहती थी कि उसकी अपनी संतान हो। इसके लिए वह गोद लेने या सेरोगेसी को तैयार नहीं थी। इसके बाद उसे गर्भाश्य प्रत्यारोपण के बारे में जानकारी मिली और फिर उसने हमसे संपर्क किया और सर्जरी के विकल्प को स्वीकार कर लिया।
सौभाग्य से उसकी मां का गर्भाश्य चिकित्सीय रूप से स्वस्थ था और वह अपनी बेटी को अपना गर्भाश्य देने को तैयार हो गई। गर्भाश्य प्रत्यारोपण के बाद युवती को निगरानी में रखा गया है और कुछ दिनों तक वह इंटेंसिव केयर यूनिट में रहेगी। डॉक्टर पुंतांबेकर ने कहा कि यह भारत में पहला गर्भाश्य प्रतिरोपण है। दुनिया में पहली बार गर्भाश्य का सफल प्रतिरोपण स्वीडन में 2013 में किया गया था। दुनिया में अब तक इस प्रकार की 25 सर्जरी हो चुकी हैं।

फोर्ब्स के ‘गेम चेंजर्स’ में अंबानी टॉप पर, जियो ने बदली इंटरनेट की दुनिया

0

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी फोर्ब्स की ‘ग्लोबल गेम चेंजर्स’ की सूची में सबसे ऊपर है। इस सूची में उन लोगों के नाम शामिल हैं जो अपने कंपनियों में बदलाव कर करोड़ो लोगों की जिंदगियां बदल रहे हैं। फोर्ब्स की दूसरी वार्षिक सूची में 25 ‘निडर बिजनेस प्रमुख’ के नाम शामिल है, जो मौजूदा चीजों में आक्रमकता के साथ बड़े बदलावों की कोशिश करते हैं। उनके इन प्रयासों का प्रभाव दुनिया भर में करोड़ो लोगों के जीवन पर पड़ता है।

60 वर्षीय मुकेश अंबानी भारत में इंटरनेट क्रांति लेकर आए, जिसकी वजह से वो इस सूची में टॉप पर हैं। फोर्ब्स ने अपनी टिप्पणी में कहा, “तेल और गैस के उद्योगपति ने देश के टेलिकॉम मार्केट में बड़ा कदम रखा। कौड़ी के दामों पर इंटरनेट सेवाएं देकर रिलायंस ने मात्र 6 महीनों में 10 करोड़ लोगों को अपने से जोड़ा। उन्होंने इंटरनेट सेवा की दिशा ही बदल दी।”

रिलायंस जियो की आपार सफलता के बाद फोर्ब्स ने कहा कि जो भी कुछ डिजिटल हो सकता है, वो हो रहा है। इस मामले में भारत किसी मुल्क से पीछे नहीं है। इस सूची में घरेलु उपकरणों की कंपनी डायसन के संस्थापक जेम्स डायसन, अमेरिका की इंवेस्टमेंट मेनेजमेट कंपनी ब्लैकरॉक के सह-संस्थापक लैरी फिंक, साउद अरब के राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान, स्नैपचैट के सह-संस्थापक इवान स्पीगल और अफ्रीकी बिजनेस टायकून क्रिस्टो वीजे शामिल हैं।

18 साल के भारतीय छात्र ने बनाया दुनिया का सबसे छोटा सेटेलाइट

0

तमिलनाडु के पल्लापत्ती के रहने वाले 18 साल के रिफथ शरूक ने साइंस की दुनिया में बड़ा कारनामा करके दिखाया है। रिफथ ने दुनिया का सबसे छोटा सेटेलाइट बनाकर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हास‌िल की है। रिफथ के बनाए दुनिया के इस सबसे छोटे सेटेलाइट को नासा 21 जून को लांच करेगा। जिसका वजन सिर्फ 64 ग्राम है।

रिफथ ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर इस सेटेलाइट का नाम ‘कलामसैट’ रखा है। भारतीय छात्र का बनाया हुआ यह पहला प्रायोगिक सैटेलाइट होगा, जिसे नासा साउडिंग रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजेगा। इस सैटलाइट को एक ‘क्यूब्स इन स्पेस’ नाम के एक कॉम्पिटिशन के माध्यम से चुना गया। जिसका आयोजन ‘नासा’ और ‘आई डूडल लर्निंग’ नाम के एक ऑर्गनाइजेशन ने संयुक्त रूप से किया था।

रिफत ने कहा कि इस सैटेलाइट के मिशन की समय सीमा 240 मिनट की होगी। यह छोटा सेटेलाइट अंतरिक्ष के सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण वातावरण में 12 मिनट चलेगा। सैटेलाइट के बारे में रिफत का कहना है, ‘सैटेलाइट का मुख्य काम थ्रीडी प्रिंटेड कार्बन फाइबर की क्षमता को डेमोनस्ट्रेट करना है।’ रिफत ने कहा कि उसका सैटेलाइट रेनफोर्स्ड कार्बन फाइबर पॉलीमर से बना हुआ है। उन्होंने कहा, ‘हमने कुछ कंपोनेंट्स विदेश से मंगाए और कुछ अपने देश से ही मिले हैं।’

जब एक स्त्री को दूसरी स्त्री की ज़रूरत होती है

0

एक ख़ुशहाल जीवन जीने के लिए हमें प्यार, अपनापन, साथ… जैसी न जाने कितनी ही छोटी-छोटी बातों की आवश्यकता होती है. ऐसे में कितने ही मामलों में एक स्त्री को दूसरी स्त्री की ही बेहद ज़रूरत महसूस होती है, ख़ासकर शॉपिंग करते समय। आइए, और भी वजहों के बारे में जानते हैं –

तनावमुक्त रहने के लिए –महिलाओं से जुड़ी ऐसी कई बातें होती हैं, जिसे वे चाहकर भी पुरुषों से शेयर नहीं कर पातीं। ऐसे नाज़ुक समय में उन्हें किसी नारी के साथ की ही बहुत ज़रूरत होती है। फिर चाहे वो पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ी कोई समस्या या संवेदनशील मुद्दा हो, पीरियड्स की प्रॉब्लम्स हों या फिर आपसी अहम् की बात हो, पति-पत्नी की आपसी कहा-सुनी हो, पारिवारिक सास-बहू, ननद-जेठानी से जुड़े वाद-विवाद हों या अविवाहित बेटी से तनाव… इन तमाम विषयों पर अपनी क़रीबी स्त्री से ही बात कर एक स्त्री ख़ुद को काफ़ी हल्का महसूस करती है। एक नारी को नारी के साथ की ज़रूरत ख़ासतौर पर तनाव मुक्त होने, मन को हल्का करने यानी तनाव को दूर करने के लिए होती ही है.।

जब ज़िम्मेदारी भरा कार्य करना हो- तीज-त्योहार हो या शादी-ब्याह, तब महिलाओं का साथ ही माहौल को ख़ूबसूरत व आकर्षक बनाता है। हमारे यहां शादी की रस्में और ज़िम्मेदारियां काफी होती हैं, जहां पर न जाने कितने काम ऐसे होते हैं, जो महिलाओं को ही करने होते हैंय़ ऐसे में एक स्त्री को दूसरी स्त्री का साथ मिल जाने पर मानो सोने पे सुहागा वाली स्थिति हो जाती है. वैसे इस तरह के कार्यों में हर किसी की अपनी बहुत सारी जवाबदेही होती है, पर दो नारी के साथ भर से भी कई काम आसानी से हो जाते हैं।

जो सच कह सके –हम चाहे कितने ही अच्छे और समझदार हों, पर हम सभी में कुछ-न-कुछ कमी तो होती ही है। स्त्री के इस पहलू को एक स्त्री ही बेहतर ढंग से कह व समझ पाती है। अतः हमें अक्सर ऐसे शख़्स की ज़रूरत होती है, जो हमसे कड़वा सच कहने की हिम्मत रखता हो, जो बिना लाग-लपेट के हमारी अच्छी-बुरी दोनों ही बातों के बारे में हमें स्पष्ट रूप से बता सके, जो सही मायने में शुभचिंतक-आलोचक हो।

ममता और बच्चे –  मातृत्व सुख का सौभाग्य एक स्त्री को ही मिलता है, इसलिए जाने-अनजाने में सहेजने, संवारने, परवरिश करने जैसे गुण उसमें स्वाभाविक रूप से होते हैं। हरेक स्त्री अपने इस स्वभाव को कभी मां, तो कभी बहन-बेटी, सहेली आदि के रूप में जीती है। वो अपने रिश्ते की इस पौध को प्यार व स्नेह के खाद-पानी से सींचती है। उसका यह नैसर्गिक गुण ताउम्र उसके साथ रहता है और रिश्तों के कई नए आयाम लिखता है।

जब जीवनसाथी से सब कुछ कहना न हो मुमकिन –एक पत्नी अपने पति से अपना सब कुछ कह-सुन ले, यह संभव नहीं. उस पर यह ज़रूरी भी नहीं कि पति महोदय के पास अपनी पत्नी की आपबीती सुनने-समझने के लिए वक़्त हो। ऐसे में पत्नी की कोई बेस्ट फ्रेंड या फिर कोई क़रीबी महिला ही उसकी सबसे बड़ी राज़दार होती है. वैसे भी यह कहां तक उचित है कि किसी एक शख़्स से ही हम सब कुछ कहने-सुनने की अपेक्षा रखें।

सुखद लंबी आयु के लिए –हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, स्त्रियों के लंबे जीवन जीने में उनकी टेंशन फ्री लाइफ की बहुत बड़ी भूमिका रही है. और ऐसा जीवन जीने में किसी स्त्री का साथ होना व एक अच्छी सोशल लाइफ जीना काफ़ी मायने रखता है यानी घर-गृहस्थी, सामाजिक कार्यक्रम, फेस्टिवल आदि में आपका एक्टिव होना, महिलाओं का संग-साथ, उन्हें हेल्दी, ख़ुशमिज़ाज और ख़ुशहाल लंबा जीवन जीने में मदद करता है। ये सभी बातें आपके हर दिन को ख़ुशगवार व ऊर्जा से भर देती हैं.

लक्ष्य के सहयोग में मदद के लिएःकहते हैं, हर कामयाब पुरुष के पीछे किसी स्त्री का सहयोग होता है. लेकिन यही बात महिलाओं पर भी लागू होती है। एक स्त्री के आगे बढ़ने, अपने लक्ष्य को पूरा करने, उद्देश्यपूर्ण जीवन की सार्थकता में भी किसी दूसरी स्त्री का भरपूर सहयोग रहा है। नारी को उसके लक्ष्य की ओर बढ़ने में प्रोत्साहित करने में नारी का भी उल्लेखनीय योगदान रहता है। समय-समय पर एक मां, बहन, सहेली या फिर कोई ऐसी स्त्री, जो बेहद क़रीबी होती है, स्त्री को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

समुद्र तट की सफाई में जुटी है हंगरी की महिला

0

मुंबई : हंगरी की एक महिला जुजैना फेराओ हर रविवार को पास ही स्थित पालघर जिले के वसई में रणगांव बीच पर जाती हैं और उसकी सफाई में जुट जाती है।

बीच की सफाई के इस अभियान के दौरान उनके साथ मौजूद रहते हैं, उनके पति और वसई निवासी लिस्बन, तीन साल का बेटा लुशियस और 19 माह की बेटी नाशा।

जुजैना ने कहा, ‘‘मैं भारत को अपना देश मानती हूं और मेरा मानना है कि हमें इसे साफ-सुथरा रखने के लिए हर प्रयास करना चाहिए।’’ जुजैना ने कहा, ‘‘हंगरी में समुद्र तट नहीं हैं लेकिन इसमें कई नदियां और झीलें हैं। मैं पिछले चार साल से भारत में रह रही हूं और मेरा मानना है कि लोगों को समुद्र तटों को साफ रखना चाहिए।’’ उन्होंने पीटीआई भाषा को बताया, ‘‘कुछ दिन, ये काफी परेशानी भरा होता है । समुद्र तट पर बहुत ज्यादा कचरा होता है। मैं बीच पर एक ऐसा साफ-सुथरा स्थान ढूंढना चाहती थी, जहां मेरे बच्चे खेल सकें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने बच्चों को यह सिखाना चाहते हैं कि वे अपने आसपास देखें और पर्यावरण की देखभाल करें। उन्होंने सड़क पर गंदगी न करना और कचरा इधर-उधर न फेंकना सीख लिया है।’’ जुजैना के पति लिस्बन फेराओ ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान में पूरा यकीन रखते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी पत्नी प्रकृति प्रेमी है। इसलिए वह सप्ताह में कम से कम एक बार बीच पर जरूर जाती है।’’

रवीना ने मां को लिखा भावुक खत, पढ़कर आंखें हो जाएंगी नम

0

अपनी मां को मदर्स डे विश करने के लिए बॉलीवुड सितारे भी उन्हे खत लिखकर विश कर रहे हैं। ऐसा ही एक खत रवीना टंडन ने अपनी मां के लिए लिखा है जिसे हम आपके सामने ला रहे हैं। बेहद भावुक खत लिखकर रवीना ने कुछ इस तरह अपनी मां का शुक्रिया अदा किया है।

डियर मॉम,

मैंने जबसे आंखें खोली हैं मुझे याद है कि मैंने अपने सामने दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला को अपने सामने पाया है। वो तुम थी और तुम हो मॉम। मैने अपने बचपन से तुम्हे अभी तक, बढते हुए और बूढा होते हुए सुंदरता और सुखद अहसास के साथ देखा है। मां तुमने ही मुझे जीवन में खूबसूरती के साथ जीना सिखाया है। मैंने तुम्हे हर रुप में देखा है चाहे वो दयालु हो, मजबूरी हो या कठोरता हो।

मैंने तुम्हे हमेशा सबकी चिंता करते देखा है चाहे वो जानवर, पक्षी या प्रकृति का कोई भी जीव।तुमने हमेशा से हमें सिखाया है कि अनाथालयों में मदद करनी चाहिए, तुमने हमें अपने पैरों पर खड़ा करने और अपनी आवाज बुलंद करने के लिए प्रेरित किया है। मैंने आपसे बहुत कुछ सीखा है, में जो कुछ भी हूं बस आपका ही हिस्सा  हूं।

आज भी मुझे याद है कि जब मेरी बेटी ने पहली बार आंखे खोली थीं, हम हॉस्पिटल में थे। मैं उसके साथ 1.30 बजे लेटी थी और वो दिव्य, परी के समान चेहरा मेरी तरफ देख रहा था। अचानक से मुझे अपनी जिंदगी के शुरुआती विद्रोही दिन याद आ रहे हैं। मुझे आज भी याद है कि मैंने आपको 2 बजे रात में जगा दिया था और मैंने आपको बताया था कि मैं आपको सॉरी बोलना चाहती हूं। जब आपने मुझसे पूछा किसलिए मैंने आपको बताया कि मेरी वजह से आपको कई पूरी रातों में जगना पड़ा था।

मैं उसके लिए भी माफी मांगना चाहती हूं जब मैनें हमारी बहस के दौरान आपके चेहरे पर वो दरवाजा पटक दिया था। मैं आपसे हजारों बार मांफी मांगना चाहती हूं क्योंकि मैं जानती हूं कि मैंने आपको बहुत बार दुख पंहुचाया है।जब मैं अपने दोस्तों के घर पार्टी में जाती थी तब आप तो आप मेरे देर रात तक वापस लौटने तक जगती रहती थी या जब मैं रोती थी और आप मेरे दरवाजे पर बैठी रहती थीं। हम भले ही चाहें कितनी बार ही अपने घर वालों से माफी क्यों न मांग लें वो कभी भी पर्याप्त नहीं होगा।

आप मेरी असफलताओं के समय में मुझे हिम्मत देने के लिए हमेशा मेरे साथ थीं। एक साधारण सा ध्यान इसके लिए पर्याप्त नहीं होगा।मैंने पहली बार शैंपेन आपके और पापा के साथ ही पी थी। मैंने बीयर भी पहली बार आप दोनों के साथ ही पी थी। उन रातों में जब हम साथ होते थे और क्रश के बारे में बात करते थे। मुझे याद है कि जब मैंने पहली बार अपने क्रश के बारे में बताया था तो आपने भी मुझे अपने पहले क्रश हॉलीवुड हीरो “टोनी कोर्टिश” के बारे में बताया था। मुझे आपकी तरफ से हमेशा इस बात की आजादी होती थी कि ” मैं तुम्हारे साथ हूँ और तुम जो चाहों वो मेरे साथ डिस्कस कर सकती हो।

 

आतंकियों को ठेंगा दिखा शहीद फैयाज की राह पर चल पड़े कश्मीरी युवा

1

श्रीनगर : आतंकी संगठन और अलगाववादी लाख कोशिशें कर लें, लेकिन शहीद लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की दिखाई राह पर कश्मीर नौजवान चल पड़ा है। देशसेवा के लिए भर्ती रैली हो या खेलकूद का मैदान। युवा देश सेवा और खुद को राष्ट्र के साथ जोड़े रखने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा। यहां के नौजवानों ने साबित कर दिया है कि उनका रोल मॉडल बुरहान वानी नहीं, बल्कि लेफ्टिनेंट उमर फैयाज हैं।

बुधवार को शोपियां के हरमेन क्षेत्र में लेफ्टिनेंट फैयाज का शव गोलियों से छलनी मिला था। उमर दक्षिण कश्मीर में युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए थे, उन्हें देखकर कई युवकों ने फौज में शामिल होने की राह पकड़ी तो कई अभिभावकों ने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए सेना के स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया। पिछले चार दिनों में पंद्रह हजार लड़के-लड़कियों ने कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में पुलिस का सिपाही बनने के लिए दौड़ लगाई है।

शनिवार को श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में पहले दिन दो हजार से ज्यादा लड़के-लड़कियां पुलिस में सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहनने की उम्मीद में पहुंच गए। बख्शी स्टेडियम के बाहर खड़े सीआरपीएफ अधिकारी और जवान हैरान थे कि आखिर यह क्या हो रहा है। आतंकियों के एजेंडे से गुमराह होकर पत्थर उठाने वाले आज कैसे बदल गए हैं। स्टेडियम में मौजूद एक नौजवान हाशिम ने कहा कि मैं शहीद उमर के जिला कुलगाम से ही हूं।

मुझे पिछले साल पता चला था कि एक लड़का एनडीए से फौजी अफसर बनकर निकला है। मैंने भी फौज में अफसर बनने के लिए सीडीएस का पेपर दिया था। पास नहीं कर पाया। उसके बाद मैंने राज्य पुलिस में सब इंस्पेक्टर का फार्म भरा है। उम्मीद है कि मैं भर्ती जरूर हो जाऊंगा। एक अन्य युवक मकबूल बोला कि यह भीड़ उसी फरमान का नतीजा है।

सड़क पर पत्थर न हो, कोई मासूम उमर फैयाज की तरह न मरे इसीलिए तो यहां आए हैं। अगर आतंकियों के फरमान का डर होता तो हमारे मां-बाप घर से निकलने देते। डर है, इसीलिए तो हमारे घर वाले चाहते हैं कि फोर्स का हिस्सा बनो ताकि यह डर हमेशा के लिए खत्म हो।

मिस्टर कश्मीर के लिए युवाओं ने दिखाया दमखम

डिस्टि्रक बाडी बिल्डिंग एसोसिएशन श्रीनगर की ओर से आयोजित मिस्टर कश्मीर में कई युवाओं ने अपनी प्रतिभा दिखाई। मंच पर आकर हरके युवा ने प्रदर्शन किया।

राष्ट्रविरोधी नहीं राष्ट्रभक्त हैं युवा: आईजी

आइजीपी कश्मीर एसजेएम जिलानी ने कहा कि यहां जिस तरह से आम नौजवानों को आतंकी, राष्ट्रविरोधी, पाकिस्तान समर्थक प्रचारित किया जा रहा है, असलियत बिल्कुल उल्टी है। कश्मीरी नौजवान आतंकी नहीं है, वह राष्ट्रविरोधी नहीं राष्ट्रभक्त है। वह पुलिस और फौज को अपना दुश्मन नहीं मानता।

एक लाख से अधिक युवाओं ने किया आवेदन

राज्य पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि इस समय पुलिस संगठन के विभिन्न विभागों में सब इंस्पेक्टर की 698 पदों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। पूरी रियासत में एक लाख से ज्यादा लड़के-लड़कियों ने आवेदन किया था। छंटनी के बाद 67218 आवेदकों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है। जम्मू संभाग के 31496 और कश्मीर संभाग के 35722 अभ्यर्थी हैं। कुल 67218 अभ्यर्थियों में से 64625 ने एग्जीक्यूटिव व आ‌र्म्ड पुलिस के लिए आवेदन किया है। इनमें 58584 लड़कें और 6041 लड़कियां हैं। सिर्फ 2530 ने टेलीकम्यूनिकेशन विंग में सब इंस्पेक्टर के पदों पर आवेदन किया है।

 

महिला वनडे में सर्वाधिक विकेट झटकने वाली गेंदबाज बनीं झूलन

0

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मंगलवार को तीन विकेट लेने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया की कैथरीन फिट्जपैट्रिक के वनडे में सर्वाधिक विकेट लेने का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

कैथरीन का 109 वनडे मैचों में सर्वाधिक 180 विकेट झटकने का विश्व रिकॉर्ड था। 34 वर्षीया झूलन ने दक्षिण अफ्रीका की रायसीबी नटोजाखे को आउट कर अपना 181वां विकेट पूरा किया। झूलन ने इस मुकाबले में 7.3 ओवर की गेंदबाजी में 20 रन खर्च करते हुए कुल तीन विकेट अपने नाम किए।

वर्ष 2002 में वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाली झूलन 2007 में ‘आईसीसी महिला क्रिकेटर ऑफ द ईयर’ बनी थीं। वह 2010 में अर्जुन अवॉर्डी और 2012 में पद्मश्री विजेता भी रह चुकी हैं। झूलन ने 153 वनडे में यह उपलब्धि हासिल कीं। वह टेस्ट (40), वनडे  (181) और टी-20 (50) में मिलाकर कुल 271 विकेट अपने नाम कर चुकी हैं। वह भारत की ओर से सर्वाधिक विकेट झटकने वाली गेंदबाज हैं।

पश्चिम बंगाल की नादिया जिले की रहने वाली झूलन ने अपनी शानदार गेंदबाजी से कई मैच जिताए हैं। वनडे में झूलन की श्रेष्ठ गेंदबाजी 31 रन देकर छह विकेट है जबकि टेस्ट की एक पारी में 25 रन देकर पांच विकेट है। झूलन ने बल्ले से भी कई बार उपयोगी योगदान दिए हैं। उन्होंने 10 टेस्ट में दो अर्द्धशतक लगाए हैं जबकि वनडे में भी उनके नाम एक अर्द्धशतक है।