Monday, July 13, 2026
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अब बस एक मिस्ड कॉल पर सुनिए दादी-नानी की कहानियां 

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दादी-नानी की कहानियां केवल कुछ किस्से और फंतासियां भर नहीं हैं, वो एक परंपरा हैं। एक ऐसी विरासत जो खेल-खेल में ही बच्चों में अच्छे संस्कारों और आदर्शों को प्रोजेक्ट करती है। जैसे-जैसे संयुक्त परिवार का ढांचा चरमरा रहा है, बच्चों के पास से ये सारे मौके भी छूटते जा रहे हैं। आज की पीढ़ी के बच्चों को खुद नहीं मालूम वो कितनी बड़ी चीज से हाथ धो बैठ रहे। आज के आधुनिक समाज में दादी-नानी की कहानियां और किस्से पूरी तरह से विलुप्त होते जा रहे हैं। अब न तो दादी-नानी की कहानियां रह गई हैं और न ही आज के बच्चों में कहानियां पढ़ने या सुनने की प्रवृत्ति है। ऐसे में बच्चों में बचपना कहीं खोता जा रहा है।

लोगों की चिंताएं जाहिर हैं। कुछ महीनों पहले राजस्थान सरकार ने इस बाबत एक योजना शुरू की थी जिसमें दादी-नानी की उम्र की महिलाओं को सरकारी स्कूल में आमंत्रित किया जा रहा है। ये महिलाएं हर शनिवार बच्चों को कहानियां सुनाती हैं। इसी कड़ी में एनजीओ प्रथम बुक्स ने हाइटेक होते हुए मिस्ड कॉल पर कहानियां सुनाने की अनोखी पहल शुरू की है। एनजीओ की ओर से जारी नंबर 8033094244 पर मिस्ड कॉल देकर मुफ्त में कहानी सुनी जा सकती है। इस प्रोजेक्ट को राजस्थान, मई में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और यूपी में शुरू किया जा रहा है। एनजीओ के पास 2000 कहानियों का भंडार है।

मिस्ड कॉल देने के दो मिनट के अंदर कॉलबैक आएगी। हिंदी के लिए 1 और अंग्रेजी के लिए 2 दबाकर संबंधित भाषा में कहानी सुनी जा सकेगी। एक कॉल पर दो कहानी और एक नंबर से 40 कहानी सुनी जा सकेंगी। इसके साथ ही कहानी सुनने के बाद मोबाइल पर एक मैसेज आएगा। जिसमें अगर आप कहानी को सेव करना चाहते हैं तो उसके लिए इंटरनेट का एक लिंक दिया होगा। उस लिंक पर क्लिक करते ही सुनी गई कहानी लिखित रूप में आ जाएगी। ये सभी कहानियां www.storyweaver.org.in पर मुफ्त में भी पढ़ी जा सकती हैं।

बॉलीवुड सितारों की होगी आवाज

एनजीओ के सीईओ हिमांशु गिरी व रीजनल मैनेजर अभिषेक खन्ना के मुताबिक, ‘इन कहानियों को रेडियो मिर्ची ने हमें डब करवाकर दिया है। इसमें कुछ कहानियां बॉलिवुड की सिलेब्रिटीज की आवाज में भी हैं। इसमें तुषार कपूर, दिया मिर्जा समेत कई ऐक्टर शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है कि बच्चों में पढ़ने और सुनने की संस्कृति को विकसित किया जाए।’

प्रथम बुक्स के मुताबिक, ‘राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा राज्यों में ये प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है। अब इसे यूपी में भी शुरू किया जा रहा है। चार राज्यों में इसे खूब पसंद किया गया।’ एनजीओ ने यूपी सरकार को इस पायलट प्रॉजेक्ट की रिपोर्ट के साथ प्रपोजल भी भेजा है ताकि स्थाई तौर पर एक ऐसा नंबर शुरू किया जाए जिसमें ज्यादा से ज्यादा बच्चों को यह सुविधा मिले।

पहली बार दिल्ली पुलिस के पोस्टर पर दिखेगी महिला कमांडो

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दिल्ली पुलिस अपनी प्रचारात्मक  गतिविधियों के लिए पोस्टर गर्ल तलाश ली है। ये एक महिला कमांडो हैं जिनका नाम है चिएवेलू थेले। एक बड़ी बात ये भी है कि वो नागालैंड की रहने वाली हैं। दरअसल, उत्तर पूर्व की रहने वाली 41 लड़कियां पहली बार दिल्ली पुलिस का हिस्सा बनीं हैं, जिन्हें स्पेशल कमांडो ट्रेनिंग दी जा रही है। ये महिला कमांडो 15 अगस्त पर दिल्ली की सुरक्षा के लिए तैयार हो रही हैं। इन्हीं कमांडो में से सर्वश्रेष्ठ कमांडो रही थेले को दिल्ली पुलिस ने अपनी पोस्टर गर्ल भी चुना है। अभी तक दिल्ली पुलिस के पोस्टरों में पारंपरिक तस्वीरें ही होती थी।

दिल्ली पुलिस ने एक साथ दो सरहानीय काम किए हैं, एक तो महिला कमांडो को अपने पोस्टर का प्रतिनिधि बनाकर दूसरा उत्तर-पूर्वी राज्य से आई एक कमांडो को दिल्ली पुलिस में इतना सम्मान देकर। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली की जनता को एक बड़ा संदेश दिया है कि किसी और राज्य से आए लोगों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिल्ली राज्य में गाहे-बगाहे उत्तर-पूर्वी राज्य से आए लोगों के साथ बदसलूकी के केस आते रहते हैं। चलिए अब और विस्तार से जानते हैं इस जबर महिला कमांडो के बारे में…

‘स्पेशल 41’, ये उत्तर-पूर्वी राज्यों की लड़कियों का वो दस्ता है जो पहली बार दिल्ली पुलिस का हिस्सा बन स्पेशल कमांडो ट्रेनिंग ले रहा है। ये लड़कियां 15 अगस्त पर दिल्ली की सुरक्षा के लिए तैयार हैं। नागालैंड की रहने वाली सी थेले ने कभी सोचा भी नहीं था कि वो दिल्ली पुलिस का हिस्सा बनेंगी। अपने घर से हज़ारों मील दूर थेले न सिर्फ दिल्ली पुलिस में भर्ती हुई बल्कि उन्होंने अपनी सामान्य ट्रेनिंग के बाद खुद को विशेष कमांडों ट्रेनिंग के लिए तैयार किया। ट्रेनिंग के दौरान करतब करना उनके बाएं हाथ का खेल है।

दिल्ली में महिला फिदायीन के हमले के खतरे को देखते हुए भी इनकी तैयारी अहम है। अहम बात ये है कि इन लड़कियों को जो अधिकारी प्रशिक्षण दे रहे हैं, वो सारे ही उत्तर भारतीय हैं।

पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में ये वो हर जोखिम उठा रही हैं जो इन्हें एक विशेष कमांडो बनाता है। किसी खतरे की स्थिति में ऊंची इमारत से उतरना हो या चढ़ना, इसमें इन्हें महारत हो चुकी है। किसी बड़े गैंगस्टर से निपटना हो या किसी आतंकी से, इन कमांडोज को ऐसे तैयार किया गया है कि वो उन्हें सेकेंडों में धूल चटा दें। दिल्ली में महिला फिदायीन के हमले के खतरे को देखते हुए भी इनकी तैयारी अहम है।

थेले के मुताबिक, ‘हम यहां इसीलिए पुलिस में भर्ती हुए हैं कि हम दिल्ली वालों को सुरक्षा दे सकें। उन्हें ये बताएं कि हम भी आपकी तरह हैं आपके साथ हैं, कोई भेदभाव न हो।’ अहम बात ये है कि इन लड़कियों को जो ऑफिसर्स ट्रेनिंग दे रहे हैं, वो सारे ही उत्तर भारतीय हैं। इन महिला कमांडोज को हिंदी नहीं आती थी, दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिंदी सीखने में मदद की वहीं ट्रेनर्स ने भी इन महिलाओं की संस्कृति को समझाया है।

ये एक बहुत ही सुंदर उदाहरण है कि भारत के अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग बोली भाषा, संस्कृति होने के बावजूद हम सब कैसे एक साथ मिलजुल कर रह सकते हैं। इन महिला कमांडोज की दिल्ली में तैनाती से शायद वो समाज भी बने जहां उत्तर पूर्व के लोगों से भेदभाव की कोई जगह न हो। दिल्ली पुलिस अपनी इस पहल के लिए बहुत सारी तारीफ की हकदार है।

(साभार – योर स्टोरी)

 

नहीं रहे प्रसिद्ध कवि चंद्रकांत देवताले

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साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध कवि चंद्रकांत देवताले का सोमवार देर रात निधन हो गया। उनका अंतिम संस्‍कार दोपहर ढाई बजे लोधी रोड शमशान घाट पर होगा। देवताले 81 वर्ष के थे. उनकी बेटी अनुप्रिया देवताले ने बताया कि वह एक माह से बीमार थे। उनका इलाज चल रहा था लेकिन उन्‍हें बचाया नहीं जा सका। देवताले को उनकी कविता-संग्रह ‘पत्थर फेंक रहा हूं’ के लिए साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार दिया गया था। देवताले की कविता की जड़ें गांव-कस्बों और निम्न मध्यवर्ग के जीवन में हैं। उनका जन्म 1936 में गांव जौलखेड़ा, जिला बैतूल, मध्य प्रदेश में हुआ था. उनकी शुरुआती शिक्षा इंदौर से हुई जबकि पीएचडी सागर यूनिवर्सिटी, सागर से की। साठोत्तरी हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर देवताले की प्रमुख कृतियों में हड्डियों में छिपा ज्वर, दीवारों पर खून से, लकड़बग्घा हंस रहा है, हर चीज आग में बताई गई थी, आदि प्रमुख हैं। देवताले को उनकी रचनाओं के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था. जिनमें माखन लाल चतुर्वेदी पुरस्कार, मध्य प्रदेश शासन का शिखर सम्मान आदि प्रमुख हैं।

जन्माष्टमी की मिठास और आजादी का स्वाद

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इमरती

 सामग्री – ढाई कप धुली हुई उड़द दाल, तीन कप चीनी, पौने दो कप पानी, एक बड़ा चम्मच केसरिया रंग/जलेबी कलर, आधा बड़ा चम्‍मच इलायची पाउडर, आधा किलो घी, आधा बड़ा चम्मच नींबू का रस

विधि –  सबसे पहले उड़द की दाल 5-6 घंटे तक पानी में भिगोकर रख दें। तय समय बाद दाल को एक-दो बार पानी डालकर अच्छी तरह हथेलियों से मसलकर धो लें। अब सिलबट्टे या फिर मिक्सर में डालकर महीन पीस लें। अगर मिक्सर में पीस रहे हैं तो इसमें आधा कप से थोड़ा कम पानी मिला लें। (ऐसा करने से दाल अच्छी तरह पिस जाएगी।  पिसी हुई दाल को एक बड़े बर्तन में निकाल लें और इसमें जलेबी कलर मिला लें।  इस दाल को तब तक फेंटे जब तक यह फूलकर नरम न हो जाए। दाल नरम है या नहीं इसे चेक करने के लिए इस पर एक बूंद पानी गिराएं। अगर पानी दाल पर ठहर जा रहा है तो समझिए मिश्रण इमरती के लिए तैयार है। अब इस दाल को 4-5 घंटे के लिए छोड़ दें ताकि इसमें खमीर उठ जाए। एक कड़ाही में चीनी और पानी डालकर मीडियम आंच पर चढ़ा दें। जब इसमें उबाल आ जाए तो नींबू का रस डाल दीजिए. इससे चाशनी की गंदगी ऊपर आ जाएगी। इस गंदगी को कड़छी की सहायता से निकाल दें। इसे 10-12 मिनट तक और पकने दें. कड़छी से थोड़ी चाशनी लेकर उंगली और अंगूठे के बीच रख चेक करें। अगर इसमें एक तार बन रही है तो समझिए चाशनी तैयार है। इस बात का खास ध्यान रखें कि चाशनी गाढ़ी नहीं होनी चाहिए। आंच बंद कर दें।  अब एक कड़ाही में घी डालकर मध्यम आंच पर गरम होने के लिए रखें. जब यह गरम हो जाए आंच धीमी कर दें। अब दाल में इलायची पाउडर डालकर एक बार फिर से अच्छे से फेंट लें। एक मोटे कपड़े के बीचोंबीच छोटा सा छेजद कर लें. इस पर कड़छी से दाल का मिश्रण भर लें. (आप चाहें तो सॉस बॉटल का इस्तेमाल कर सकती हैं। गरम घी में इमरती डालकर मध्यम आंच पर तल लें। इसे घी में 4-5 मिनट तक तलें ताकि यह अच्छी तरह से क्रिस्प हो जाए।  इसके इमरती को चाशनी में डालते जाएं।  इसी तरीके से दाल के मिश्रण से जलेबी तल लें.

 

माखन मिश्री

सामग्री – 1 किलो दही, 250 ग्राम मिश्री, एक बड़ा चम्मच बारीक कटे हुए पिस्ता,2-3 कप पानी

विधि – सबसे पहले एक बड़े बर्तन में दही डाल लें। अगर आपके पास मथनी है तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. नहीं तो ब्लेंडर का उपयोग कर सकते हैं। दही को ब्लेंडर से फेंटते जाएं और इससे निकलने वाले मक्खन को एक कटोरी में रखते जाएँ। दही से मक्खन निकालते वक्त इसमें थोड़ा-थोड़ा करके पानी डालते जाएंगे तो मक्खन आसानी से निकल जाएगा।- जब दही से पर्याप्त मात्रा में मक्खन निकल मथने की प्रक्रिया बंद कर दें। अब निकाले गए मक्खन में मिश्री और पिस्ता डालकर मिला लें। लीजिए तैयार माखन मिश्री प्रसाद।

 

 

 

हरी मटर की बर्फी

 

सामग्री- 1 कप हरी मटर, 1/2 कप छिले बारीक कटे पिस्‍ते (पानी में गरम कर के उसे छील लें और महीन काट लें), 3 चम्‍मच घी, 2 कप मावा, 3/4 कप शक्‍कर, 3/4 चम्‍मच हरी इलायची पावडर

विधि – सबसे पहले एक मिक्‍सर जार में हरी मटर और थोड़ा सा पानी डाल कर उसे पीस लें। फिर नॉन स्‍टिक पैन में घी गरम करें, उसमें पिसी मटर डालें और लगातार चलाते हुए उसका पानी खतम कर लें। फिर पैन में मावा डाल कर अच्‍छी तरह से मिक्‍स करें। उसके बाद इसमें शक्‍कर मिलाएं और चलाएं। अब दूसरी ओर एक एल्‍युमीनियम की ट्रे पर घी लगाएं। फिर इसमें हरी इलायची और आधे पिस्‍ते डाल कर मिक्‍स करें। इस मिश्रण को ट्रे पर डालिये और फैलाइये। ऊपर से बाकी के बचे हुए पिस्‍ते डालिये और बर्फी को ठंडा होने के लिये रख दीजिये। जब बर्फी ठंडी हो जाए, तब उसे फ्रिज में रख दीजिये और बाद में उसे निकाल कर चाकू से काट कर परोसें।

फूड बैंक बनाने की तैयारी में सरकार, अब बर्बाद नहीं होगा बचा खाना

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शादी समारोह आयोजन का खाना अब बर्बाद होने के बजाय जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा। सरकार विदेशों की तर्ज पर पहली बार फूड बैंक बनाने की तैयारी कर रही है,जहां बचा हुआ खाना जमा करके इसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की व्यवस्था रहेगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण इस बैंक की अवधारणा पर आम लोगों से भी सुझाव मांगेगा।

अथॉरिटी के सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि शादी, पार्टी या बड़े आयोजनों में बचा हुआ खाना अक्सर बर्बाद हो जाता है। लेकिन अब यह खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाकर उनकी मदद की जा सकती है।
इस कार्य में एनजीओ भी मदद करेंगे। फिलहाल देश के कई शहरों में एनजीओ अपने स्तर पर  जरूरतमदों को पार्टियों का बचा हुआ खाना मुहैया करवाते हैं, लेकिन इस खाने की कोई जांच नहीं होती कि यह कितना सेहतमंद है।

लेकिन नई योजना के तहत सबसे पहले रेगुलेशन तैयार होगा, जिसमें पूरी गाइडलाइन बनेगी। इसे तैयार होने में दो से तीन महीने लगेंगे। इसी रेगुलेशन के तहत एनजीओ को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। खाना लेने के बाद उसकी जांच की होगी, तभी इसे जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा।

 

नौकरी छोड़ अपना काम शुरू करना चाहते हैं ज्यादातर भारतीय: अध्ययन

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नयी दिल्ली – एक अध्ययन के अनुसार भारतीय कामगारों में उद्यमिता महत्वाकांक्षा सबसे अधिक है और आधे से अधिक यानी 56 प्रतिशत लोग अपनी मौजूदा नौकरी छोड़कर खुद का काम शुरू करने की इच्छा रखते हैं।

रेंडस्टेड वर्कमोनिटर सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसके अनुसार 83 प्रतिशत भारतीय कामगार उद्यमी बनने की इच्छा रखते हैं जबकि वैश्विक स्तर पर यह औसत 53 प्रतिशत है।

रेंडस्टेड इंडिया के प्रबंध निदेशक व सीईओ पॉल डुपिस ने कहा,स्थिर ​कारोबारी माहौल, एफडीआई सीमा बढ़ाने संबंधी बाजारोन्मुखी सुधारों, जीएसटी के कार्यान्वयन तथा मेक इन इंडिया व डिजिटल इंडिया जैसी पहलों से नयी आकांक्षा व महत्वाकांक्षा वाला भारतीय वर्ग पल्वित हो रहा है।

सर्वेक्षण के अनुसार 45-54 वर्ष आयुवर्ग में 37 प्रतिशत लोग ही अपना खुद का काम शुरू करना चाहते हैं जबकि 25-34 वर्ष आयु वर्ग में 72 प्रतिशत तथा 35-44 प्रतिशत आयुवर्ग में 61 प्रतिशत लोग अपना काम शुरू करना चाहते हैं।

सर्वेक्षण में शामिल लगभग 86 प्रतिशत ने संकेत दिया है कि भारत में स्टार्टअप शुरू करने के लिए अनुकूल माहौल है। वहीं 84 प्रतिशत का कहना है कि भारत सरकार देश में नये स्टार्टअप का समर्थन कर रही है।

 

नेपाल की संसद में नया कानून पारित, पीरियड्स के दौरान घर में रह सकेंगी महिलाएं

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नेपाल की संसद ने एक कानून पारित कर उस प्राचीन हिंदू परंपरा पर रोक लगा दी है जिसके तहत पीरियड्स के दौरान महिलाओं को घर से बाहर रखा जाता है। नए कानून के तहत महिलाओं को पीरियड्स के दौरान घर से बाहर रहने के लिए मजबूर करने की परंपरा को मानने के लिए बाध्य करने वालों को तीन महीने की सजा या तीन हजार नेपाली रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

नेपाल के कई इलाकों में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अपवित्र माना जाता है। देश के कई दूरस्थ इलाकों में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को घर के बाहर बनी झोपड़ी या कोठरी में रहने के लिए मजबूर भी किया जाता है। इसे चौपदी प्रथा कहते हैं। चौपदी प्रथा के तहत पीरियड्स से गुजर रही महिलाओं के साथ अछूतों की तरह बर्ताव किया जाता है और उन्हें घर के बाहर रहना पड़ता है।

बीते महीने घर के बाहर बनी झोपड़ी में सो रही एक किशोरी की सांप के काटने से मौत हो गई थी। 2016 में भी चौपदी प्रथा का पालन करते हुए दो किशोरियों की मौत हुई थी। इनमें से एक ने ठंड से बचने के लिए आग जलाई थी जिसके धुएं से दम घुटकर उसकी मौत हो गई थी जबकि दूसरी महिला की मौत की वजह पता नहीं चल सकी थी।

इस परंपरा पर दस साल पहले ही देश के सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी, लेकिन इसके बावजूद कई इलाकों, विशेषकर पश्चिमी नेपाल के कई गांवों में ये अब भी जारी है। चौपदी प्रथा के जारी रहने की एक वजह ये भी थी कि ऐसा करने वालों को दंडित करने के लिए कोई कानून नहीं था। हालांकि नए कानून को लागू होने में भी एक साल तक का समय लग सकता है।

 

पीवी सिंधु ने आंध्रप्रदेश में डिप्टी कलेक्टर का पदभार संभाला

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2016 रियो ओलंपिक के बैडमिंटन में सिल्वर मेडल जीतने वाली स्टार भारतीय महिला शटलर पीवी सिंधु ने आंध्रप्रदेश में डिप्टी कलेक्टर का पद ग्रहण किया। भारत की शीर्ष खिलाड़ी सिंधु ने गोलापुडूी में राज्य सचिवालय में कार्यभार संभाला।

इस अवसर पर सिंधु के साथ उनके माता-पिता भी मौजूद थे। सिंधु को पिछले महीने ही राज्य सरकार ने ग्रेड-1 अधिकारी के रूप में नियुक्ति पत्र सौंपा था, मुख्यमंत्री एन। चंद्रबाबू नायडू ने स्वयं उन्हें यह पत्र सौंपा था। उन्हें 30 दिनों के अंदर पद ग्रहण करने को कहा गया था। सिंधु ने भूमि प्रशासन के मुख्य आयुक्त (सीसीएलए) के कार्यालय में पद ग्रहण किया। उन्होंने प्रमुख आयुक्त अनिलचंद्र पुनेथा को रिपोर्ट किया।
सिंधु ने कहा कि अभी उनका पूरा ध्यान बैडमिंटन पर ही टिका है और आने वाले समय में वो ट्रेनिंग लेकर अपने काम की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएंगी।
गौरतलब है कि सिंधू की नियुक्ति ग्रुप-1 में हुई है।  सिंधू ने इसके लिए सरकार का धन्यवाद दिया और कहा कि  उनका फोकस खेल पर ही रहेगा। पिछले साल रियो ओलंपिक में पदक जीतने के बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने सिंधू को तीन करोड़ रुपये का पुरस्कार, अमरावती में हजार वर्ग गज का प्लाट और ग्रुप-1 की नौकरी देने का प्रस्ताव पारित किया था। सिंधू की सीधी नियुक्ति के लिए राज्य सरकार ने बजट सत्र में नियमों में संशोधन भी किया था।

वार्डरोब में शामिल कीजिए और अपनाइए अपने देश की धरोहर

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भारत बहुत सारे क्राफ्ट और खूबसूरत परिधानों और कला से परिपूर्ण है। हमारा हर राज्य अपने आप में खास है, हर राज्य का परिधान, टेक्सटाइल और कला काफी खूबसूरत है। चमचमाते ब्रांडेड कपड़ों के बीच अनगिनत कारीगर अपनी मेहनत से हमारी धरोहरों को नया आयाम दे रहे हैं और सारी दुनिया इनको सराह भी रही है। तो आप क्यों पीछे रहें। देश में बनी चीजों को जिन्दगी में शामिल करने का मतलब अपने देश को आगे बढ़ाना भी है। इसकी शुरुआत खुद आप भी कर सकती हैं। अपनाइए अपने देश की धरोहर को, टेक्सटाइल के क्षेत्र में हम ऐसी ही कुछ प्रिंट्स, डिजाइन और फैब्रिक की जानकारी आपको दे रहे हैं जिनको अपनाकर आप भीड़ में अलग दिख सकती हैं क्योंकि आजादी एक दिन का मामला नहीं है –

बांधनी  बांधनी टाई और डाई टेक्नीक है. ये राजस्थान का फेमस ट्रेंड है. साड़ी, दुपट्टे और कुर्ते में बांधनी प्रिंट बेहद खूबसूरत लगता है. प्लेन सूट के साथ बांधनी दुपट्टा परफेक्ट लगता है।

इकत  इकत आपको क्लासी और एलीगेंट लुक देगा। इसमें धागे को टाई करके डाई किया जाता है। ओडिशा का ऑड़ियन इकत इन दिनों रैंप पर भी खूब धूम मचा रहा है।

 

कांजीवरम  कांजीवरम साड़ियां तमिलनाडू के मंदिरों के शहर कांचीपुरम की देन हैं। ये अपने गोल्ड और सिल्वर ब्रोकेड, सिल्क एम्ब्रॉएडरी हैवी थ्रेड वर्क के लिए जानी जाती हैं। कांजीवरम साड़ियां काफी महंगी आती हैं और बाजार में ये आसानी से मिल जाती हैं. ये साड़ी बेहद लोकप्रिय हैं। आपकी मम्मी की वॉर्डरोब में भी एक ना एक कांजीवरम साड़ी तो होगी ही।

चिकनकारी – लखनऊ के सिर्फ टूंडे कबाब ही नहीं चिकनकारी वर्क भी बेहद फेमस है। कुर्ते से लेकर चिकनकारी साड़ी तक, आप कुछ भी कैरी कर सकती हैं। पहले ये एम्ब्रॉएडरी सफेद धागे से की जाती थी. लेकिन अब लाइट ब्लू, पिंक जैसे रंगों में भी उपलब्ध हैं।

कलमकारी – कलमकारी डिज़ाइन आपके लुक को और भी खास और खूबसूरत बना देता है। ये हैंड-प्रिंटेड या ब्लॉक-प्रिंटेड कॉटन टेक्सटाइल का एक टाइप है, जो इंडिया और ईरान में बनाया जाता है। इसके नाम ‘कलमकारी’ का मतलब है Pen (कलम) से ड्रॉइंग (कारी)।

(साभार फैशन 101)

दुनिया भर में 18 करोड़ लोगों ने देखा आईसीसी महिला विश्व कप

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दुनिया भर से करीब 18 करोड़ दर्शकों ने हाल में समाप्त हुए आईसीसी महिला विश्व कप टूर्नामेंट के मुकाबलों को देखा जिसमें मिताली राज की अगुवाई वाली भारतीय टीम फाइनल में इंग्लैंड से हारकर उप विजेता रही थी।

भारत में करीब 15.6 करोड़ लोगों ने टूर्नामेंट के मुकाबले देखे जिसमें से आठ करोड़ दर्शक ग्रामीण क्षेत्र से थे जबकि फाइनल देखने वाले लोगों की संख्या 12.6 करोड़ रही। भारत के शानदार प्रदर्शन से देश में महिला क्रिकेट मुकाबले देखने वाले लोगों में 500 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

आईसीसी मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार 2013 में पिछले चरण की तुलना में मैच देखने के घंटों में भी करीब 300 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई।

विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘‘सभी क्षेत्रों में दर्शकों में काफी वृद्धि हुई है लेकिन 2013 की तुलना में दक्षिण अफ्रीका में मैचों के घंटे में आठ गुना इजाफा हुआ और भारत में इसमें काफी बढ़ोतरी हुई विशेषकर ग्रामीण इलाकों में। ’’ आईसीसी के मुख्य कार्यकारी डेविड रिचर्डसन ने कहा, ‘‘हम महिला विश्व कप के असर को देखकर काफी खुश हैं। हमें लगा कि महिला क्रिकेट के लिये यह समय सही था जिससे हम खेल के दर्शकों में बढ़ोतरी कर सकते हैं और ये संख्यायें इसकी पुष्टि करती हैं।