Monday, July 13, 2026
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91 साल की उम्र में ग्रेजुएट हुईं ये ‘दादी’

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91 साल की पकी उम्र। बेटी की मौत का सदमा। और, जिंदगी भर का इंतजार। लेकिन वो कहते हैं कि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। थाइलैंड की किमलान ने भी कुछ ऐसा ही करके दिखाया है। थाईलैंड की किमलान जिनाकुल ने 91 की उम्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। और, उनकी इस सफलता के पीछे छिपी है 10 सालों की लगातार मेहनत और अटूट इरादा।

किमलान जिनाकुल को उनकी शुरुआती पढ़ाई के दिनों में ही एक प्रतिभाशाली छात्रा के रूप में जाना जाता था। उनकी पढ़ाई भी उत्तरी थाइलैंड के लैंपेंग प्रांत के सबसे अच्छे स्कूल में हुई। लेकिन वह आगे की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी नहीं जा सकीं। उस दौर में यह मुमकिन नहीं था। परिवार के बैंकॉक पहुंचने के बाद उनकी शादी हो गई। इसके बाद उन्हें अपनी पढ़ाई का सपना छोड़ना पड़ा। किमलान कहती हैं, “मैं हमेशा से चाहती थी कि मेरे बच्चे पढ़ाई कर सकें, इसलिए जब वह यूनिवर्सिटी जाना चाहते थे तो मैंने उनका प्रोत्साहन किया।”

किमलान के पांच में से चार बच्चों के पास पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री है। यही नहीं, एक बच्चे ने तो अमरीका जाकर पीएचडी तक की पढ़ाई भी की है। किमलान ने अपने बच्चों के अनुभवों से प्रेरित होकर ही यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। और बीते बुधवार को अपनी डिग्री भी हासिल की।

किमलान की एक बेटी एक अस्पताल में काम कर रही थीं। किमलान की इस बेटी ने जब सुखोथाई थाम्माथिराट ओपन यूनिवर्सिटी में एक कोर्स ज्वॉइन किया तो किमलान ने भी दाखिला लेने का फैसला किया। पहली बार दाखिले के वक्त उनकी उम्र सिर्फ 72 साल थीं। लेकिन उनकी एक बेटी की मौत ने उन्हें कई सालों के लिए पढ़ाई से दूर कर दिया।
इसके बाद जब वह 85 साल की थीं तो उन्होंने ह्यूमन इकोलॉजी कोर्स में दाखिला लिया। उन्होंने कहा था कि ये कोर्स उन्हें एक अच्छी और खुशहाल जिंदगी जीने के बारे में बताएगा।
किमलान कहती हैं, “जब मैं सदमे से बाहर आई तो मैंने खुद पर इस कोर्स को पूरा करने का दबाव डाला। मैं आशा करती हूं कि मेरी बेटी की आत्मा ये देखकर खुश होगी।”


पढ़ाई के दौरान, किमलान हर रोज सुबह उठकर बौद्ध भिक्षुओं को दान करती हैं। इसके बाद मंदिर जाती हैं और फिर पढ़ने बैठती हैं। किमलान कहती हैं, “इसके लिए कभी भी लेट नहीं होते। मेरा दिमाग सीखने के लिए हमेशा जागा हुआ और तीक्ष्ण है। ये दुनिया कभी नहीं रुकती है। यहां हमेशा नई समस्याएं हैं और अगर नए विज्ञान सामने नहीं आए होते तो इस दुनिया ने समृद्ध होना बंद कर दिया होता।”
जब किमलान से पूछा गया कि उनकी सफलता का राज क्या है तो उन्होंने बताया कि दृढ़निश्चित्ता और महत्वाकांक्षा ने उन्हें इतना आगे आने में मदद की। “जब मैंने खुद से एक चैप्टर पूरा करने को कहा तो मैंने पूरी कोशिश की। मैंने मुख्य बिंदुओं को हाइलाइट किया जिन्हें मुझे याद करना था और इन्हीं चीजों ने स्टडी रिव्यू के दौरान मेरी मदद की।” किमलान बताती हैं, “जब मैं पास होती थी तो मैं खुश होती और जब फेल होती थी तो बुरा महसूस करती थीं। इसलिए मैं एग्जाम में भाग लेती रही जब तक मैं पास नहीं हो गई।”
किमलान कहती हैं कि अब अगर वो नौकरी की तलाश भी करें तो उन्हें नहीं लगता कि कोई भी उन्हें नौकरी देगा। ऐसे में वह अपने नाती-पोतों की देखभाल करना जारी रखेंगी।

क्रिकेटर सुषमा वर्मा बनीं डीएसपी, चेक भी मिला

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वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की हिस्सा रही क्रिकेटर सुषमा वर्मा पर हिमाचल सरकार आखिरकार मेहरबान हो ही गई। डीएसपी पद के साथ साथ सुषमा को पांच लाख का चैक दिया गया है। सीएम वीरभद्र सिंह ने खुद सुषमा को ये तोहफे दिए।

सीएम के निजी आवास पर सीएम से मिलने पहुंची सुषमा का यहां भी जोरदार स्वागत किया गया। उन्हें शॉल और टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। इसके बाद सीएम ने उन्हें डीएसपी के पद के साथ साथ पांच लाख का चैक भी भेंट किया।

सुषमा यह सम्मान पाकर काफी खुश दिखी। सुषमा ने बताया कि बचपन से ही उनका पुलिस में सेवा करने का सपना था, जो अब पूरा हुआ है। कहा कि वर्ल्ड कप फाइनल में हार का बदला वर्ष 2018 में टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर लेंगे।

कभी सुषमा ने हिमाचल पुलिस में भर्ती होने का सपना देखा था। कांस्टेबल भर्ती के लिए दौड़ भी लगाई लेकिन फिर इंटरव्यू में शामिल नहीं हो पाई थी। आज उन्हें इसी महकमे में बड़ा पद मिल गया। सुषमा ने इस सम्मान के लिए सीएम का आभार जताया। कहा कि इससे प्रदेश की अन्य महिला खिलाड़ी भी बेहतर करने को प्रेरित होंगी। इस दौरान सुषमा के पिता भोपाल वर्मा, डीजीपी सोमेश गोयल भी मौजूद रहे।

सुषमा शिमला सुन्‍नी तहसील के गढ़ेरी गांव की रहने वाली है। उसे बचपन से ही खेलों से लगाव था। समरहिल में हुए क्रिकेट ट्रायल ने एक वॉलीबॉल खिलाड़ी को ‌क्रिकेट खिलाड़ी बना दिया।

 

बालगोपाल को भाता है माखन मिश्री का भोग

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भगवान कृष्ण के जन्म दिवस को हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के पर्व के तौर पर मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी का उत्सव 14 और 15 अगस्त को है। हिन्दू तिथि  के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म श्रावण मास के आठवें दिन यानि अष्टमी पर मध्यरात्रि में हुआ था। श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है जिन्होंने देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया और मथुरावासियों को निर्दयी राजा कंस के शासन से मुक्त कराया।

भले ही श्रीकृष्ण के माता-पिता देवकी और वासुदेव थे लेकिन बचपन से ही उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद ने किया था। ऐसी भविष्यवाणी की गई थी कि देवकी और वासुदेव का आठवां पुत्र कंस की मृत्यु का कारण बनेगा। इस भविष्यवाणी को सच होने से रोकने के लिए राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और वासुदेव को बंदी बना लिया और कई सालों के लिए उन्हें कारागार में डाल दिया था। इतना ही नही इस दौरान देवकी ने जिन 6 संतानों को जन्म दिया कंस ने उनका भी वध कर दिया लेकिन श्रीकृष्ण के जन्म के समय वासुदेव बालकृष्ण को भगवान के निर्देशानुसार वृंदावन यशोदा और नंद को सौंप आए, जहां कृष्ण ने अपना बचपन बिताया और कुछ सालों बाद उन्होंने कंस का वध कर भविष्यवाणी को सही साबित किया।
वृंदावन में श्रीकृष्ण एक नटखट बालक थे, जिसे गांव में उनकी शरारतों के लिए जाना जाता था। श्रीकृष्ण को बचपन से ही मक्खन बेहद पंसद था। कहा जाता है कि मैया यशोदा हर रोज खुद अपने हाथों से माखन मिश्री बनाकर श्रीकृष्ण खिलाती थीं लेकिन श्रीकृष्ण को माखन इतना पंसद था कि वह पूरे गांव में मथा हुआ माखन चुराकर खाते थे। श्रीकृष्ण को माखन चुराने से रोकने के लिए एक बार उनकी मां ने उन्हें एक खंभे से बांध दिया था।
श्रीकृष्ण की इस शरारत के चलते उनका नाम माखन चोर पड़ा और जन्माष्टमी के पावन अवसर पर उनके भक्त मुख्य भोग के तौर पर उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाते हैं। इसके अलावा भगवान के लिए छप्पन भोग भी बनाया जाता है जिसमें 56 तरह की खाद्य सामग्री शामिल होती हैं। भगवान को भोग लगने के बाद इन सभी चीज़ों को भक्तों में बांटा जाता है और इस प्रसाद को ग्रहण करने बाद वे अपना व्रत तोड़ते हैं।
माना जाता है छप्पन भोग में श्रीकृष्ण के पंसदीदा व्यंजन होते हैं जिसमें अनाज, फल, ड्राई फ्रूट्स, मिठाई, पेय पदार्थ, नमकीन और आचार की श्रेणी में आने वाले आठ प्रकार की चीजें होती हैं। छप्पन भोग में सामान्य रूप से माखन मिश्री खीर और रसगुल्ला, जलेबी, रबड़ी, मठरी, मालपुआ, मोहनभोग, चटनी, मुरब्बा, साग, दही, चावल, दाल, कढ़ी, घेवर, चीला, पापड़, मूंग दाल का हलवा, पकोड़ा, खिचड़ी, बैंगन की सब्जी, लौकी की सब्जी, पूरी, बादाम का दूध, टिक्की, काजू, बादाम, पिस्ता जैसी चीजें शामिल होती हैं। अगर भक्त भगवान को छप्पन भोग प्रसाद में नहीं चढ़ा पाते हैं तो माखन मिश्री एक मुख्य भोग है जो आमतौर पर जन्माष्टमी के मौके पर श्रीकृष्ण को चढ़ाया जाता है।
माखन मिश्री बनाने में बेहद ही आसान है। इसे बनाने के लिए आपको सिर्फ बिना नमक वाली मलाई और मिश्री के दानों की जरूरत होती है। आप फुल क्रीम दूध से भी मलाई इकट्ठा कर सकते हैं।  कुछ दिनों तक आप दूध की मलाई को इकट्ठा करती रहें। जब आपके पास काफी सारी मलाई हो जाए तो इसे ठंडे पानी की मदद से मथे मलाई से मक्खन अलग होने लगेगा। मलाई को मथना जारी रखें जब तक मक्खन पूरी तरह अलग न हो जाए। मक्खन को इकट्ठा करके एक घंटे तक फ्रीज में ठंडा होने के लिए रख दें। कुछ मिश्री के दाने और ड्राई फ्रूट्स डालकर अब आप इसे भगवान को भोग लगा सकतेहैं।

नन्हे कान्हा की कहानी

क्या आपके घर में भी हैं लड्डू गोपाल

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देश-दुनिया में कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। घर-घर में तैयारी हो रही है कि इस बार क्या खास किया जाएगा। इस बीच, यदि आपके घर में भी लड्डू गोपाल हैं तो कुछ नियमों का पालन जरूर किया जाना चाहिए।

जन्माष्टमी तो भगवान कृष्ण का जन्मदिन है, लेकिन घर में जिस दिन लड्डू गोपाल का प्रवेश होता है और उनकी प्राण-प्रतिष्ठा होती है, हर साल उस दिन को भी भगवान कृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए।

कहा जाता है कि लड्डू गोपाल महज एक मूर्ति नहीं, बल्कि घर के सदस्य होते हैं। यहां तक कहा जाता है कि जिस दिन घर में लड्डू गोपाल का प्रवेश हो जाता है, उस दिन से वह घर लड्डू गोपाल जी का हो जाता है।

यही कारण है कि उनके साथ परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार होना चाहिए। जिस तरह परिवार के सदस्य सुबह नाश्ता, दोपहर और फिर रात में भोजन करते हैं, वैसे ही लड्डू भगवान को भी समय-समय पर नाश्ता और भोजन कराया जाना चाहिए।

लड्डू गोपाल को रोज स्नान कराएं। उन्हें साफ-स्वच्छ कपड़े पहनाएं। स्नान करवाते वक्त गर्म या ठंडे पानी बंदोबस्त जरूर करें।

जैसे परिवार के सदस्य सर्दियों में गर्म पानी से नहाते हैं, वैसी ही व्यवस्था लड्डू भगवान के लिए की जाना चाहिए। लड्डू भगवान को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं।

घर में यदि कोई खाने की चीज आती है, तो उसमें से लड्डू भगवान का हिस्सा भी जरूर अलग करें और सबसे पहले उन्हें भोग लगाएं।

भगवान को खिलौने प्रिय हैं। उनके लिए खिलौने लाते रहें और उनके पास रखें। उनके साथ खेले भी।

लड्डू भगवान को कोई नाम दें। आप उनके साथ कोई रिश्ता भी बना सकते हैं। उन्हें पुत्र, पिता, गुरु मान सकते हैं। इस आधार पर नाम दें और सुबह प्रेमपूर्वक उठाएं। रात को भी ऐसा ही सुलाएं।

 

अपराजिता बेस्ट फ्रेंड्ज जर्नलिस्ट

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अगर आप बनना चाहते हैं पत्रकार और चाहिए आपको एक मंच तो अपराजिता और बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी आपको दे रहे हैं एक मौका। हमें तलाश है युवा पत्रकारों की और आप बन सकते हैं फ्यूचर जर्नलिस्ट। अगर आप कुछ सकारात्मक लिखना चाहते हैं, कोई समस्या आपकी नजर में है या कोई है जिसे देखकर आपको लगता है कि उसकी कहानी आप सामने ला सकते हैं, आप किसी घटना पर लिखना चाहते हैं या इंटर्नशिप करना चाहते हैं तो आप हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। आपकी स्टोरी अपराजिता में आपकी तस्वीर के साथ प्रकाशित होगी। चयन साक्षात्कार और लेखन क्षमता के आधार पर होगा। आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने प्रश्न और सुझाव दे सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें –

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नोट – कृपया पत्रकारिता के प्रति गम्भीर युवा ही सम्पर्क करें। 

पत्रकारिता आज भी एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर खड़ी है

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भारतीय भाषा परिषद  के जन संचार माध्यम के स्नातकोत्तर अध्ययन केंद्र में पत्रकार, देश और सोशल मीडिया पर संगोष्ठी आयोजित की गयी। संगोष्ठी में आज के दौर में पत्रकारिता और सोशल मीडिया के बारे में चर्चा की गयी। संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार विश्‍वंभर नेवर ने कहा कि देश में हिंदी पत्रों के पाठकों में पहले से वृद्धि हुई है और पत्रकारिता भारत में आज भी एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर खड़ी है। उसका काम देशहित और अभिव्यक्ति की आजादी का प्रहरी होना है। वरिष्ठ पत्रकार हरिराम पांडेय ने कहा कि पत्रकार को सबसे पहले अपने भीतर देशभाव लाना होगा और पत्रकारिता के लिए बौद्धिक स्वतंत्रता जरूरी है। हालांकि पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा का प्रश्‍न भी महत्वपूर्ण है। संपादक जयकृष्ण वाजपेयी ने कहा कि टी. वी. के प्रसार के बावजूद हिंदी पत्रकारिता ने एक बड़ी भूमिका निभाई है और सोशल मीडिया में भी नागरिकों को अभिव्यक्ति का अवसर मिला है। हालांकि नकारात्मक चीजें सोशल मीडिया में ज्यादा स्थान घेर रही हैं। प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि सोशल मीडिया एक वैकल्पिक जगह है जिसे विपक्ष की भूमिका निभाना है और गलत प्रचारों से अपने को सुरक्षित रखना है। इस संबंध में सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं में जागरण की जरूरत है। जनसंचार विभाग (एम.ए.) के विद्यार्थियों ने कुछ सवाल रखे जिनका जवाब अतिथि वक्ताओं ने दिया।

अध्यक्षीय भाषण देते हुए डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि पहले पत्रकार समाज सुधारक, चिंतक और देश के नेता भी होते थे और सोशल मीडिया में स्थिति ये है कि पत्रकार का विलोप हो गया है। सोशल मीडिया वस्तुतः आभासी सामाजिक मीडिया है जहाँ यथार्थ से अधिक उत्तेजनात्मकता की प्रधानता है। इसका दुरुपयोग सूचना के राजनैतिक कारखाने कर रहे हैं। जनसंचार विभाग के शैक्षिक समन्वयक विनय बिहारी सिंह ने संचालन किया जबकि परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

रक्षाबंधन पर बहनों को शौचालय दे रहे हैैं भाई

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रक्षाबंधन का त्यौहार भाई और बहनों के बीच प्रेम का त्यौहार माना जाता है और इस मौके पर बहनें अपने भाइयों से किसी न किसी तोहफे की उम्मीद में रहती हैं। मगर उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के भाई इस बार अपनी बहनों को एक अनोखे उपहार के रूप में टॉयलट गिफ्ट करेंगे ताकि उनकी बहनों को शौच के लिए घर से बाहर न जाना पड़े। दरअसल खुले में शौच से मुक्त अभियान को सफल बनाने और स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए अमेठी जिले की स्वच्छता समिति ने ‘अनोखी अमेठी का अनोखा भाई’ कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के जरिए गांव के लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

इस सकारात्मक और महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत जिले की चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर (CDO) ने किया है। अमेठी में मुख्य विकास अधिकारी के तौर पर तैनात अपूर्वा दुबे ने बताया कि कई ब्लॉकों के 854 सदस्यों ने जिला समिति में अपने को भाई के रूप में पंजीकृत कराया है जो रक्षा बंधन के मौके पर अपनी बहनों को तोहफे में शौचालय देंगे।

मुख्य विकास अधिकारी अपूर्वा दुबे ने कहा कि पंजीकृत भाई अपने पैसे से शौचालय बनवाएंगे। इस अभियान की खास बात यह है कि अधिकारी की ओर से एक लकी ड्रॉ भी निकाला जाएगा। इस ड्रॉ में तीन प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। जिन लोगों को पुरस्कार मिलेगा उन्हें 50 हजार रुपये और मोबाइल फोन दिया जाएगा।

इस कार्यक्रम के तहत अप्लाई करने की लास्ट डेट 27 जुलाई थी और इस दिन तक कुल 854 भाइयों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया। शौचालय बनने के बाद 13 अगस्त को डिस्ट्रिक्ट लेवल के अफसरों की एक टीम पंजीकरण कराने वाले लोगों के घर जाकर जांच करेगी कि टॉयलट बनवाए गए हैं या नहीं। जिन लोगों के टॉयलट सबसे अच्छी हालत में होंगे उन्हें पुरस्कार दिया जाएगा। सत्यापन के बाद लिस्ट में शामिल भाइयों के बीच जिला मुख्यालय पर लकी ड्रॉ कराया जाएगा। ड्रॉ में जीतने वाले पहले प्रतिभागी को 50 हजार, दूसरे को 15 हजार व 6 हजार रुपये कीमत का एक मोबाइल फोन और तीसरे को 12 हजार रुपये व एक हजार रुपये कीमत का गिफ्ट प्रोत्साहन के रूप में दिया जाएगा।

शौचालय बनवाने की इस अनोखी पहल का आइडिया सोचने वाली युवा महिला आईएएस अपूर्वा दुबे अपने क्षेत्र में अक्सर ऐसे कार्यक्रम करवाती रहती हैं। इससे पहले वह बरेली और कानपुर देहात जिले की जॉइंट मजिस्ट्रेट रह चुकी हैं।

इस पहल की देखरेख करने वाली टीम में डीएम और सीडीओ के साथ ही डीपीआरओ को भी शामिल किया गया है। ये सभी अधिकारी अभियान की जांच करेंगे। शौचालय बनवाने की इस अनोखी पहल का आइडिया सोचने वाली युवा महिला आईएएस अपूर्वा दुबे अपने क्षेत्र में अक्सर ऐसे कार्यक्रम करवाती रहती हैं। अपूर्वा दुबे के इस कदम की तारीफ इलाके के अफसर भी कर रहे हैं।

इससे पहले अपूर्वा बरेली और कानपुर देहात जिले की जॉइंट मजिस्ट्रेट रह चुकी हैं। अपूर्वा दुबे ने कानपुर देहात के बच्चों को पौष्टिकऔर ताजा खाना उपलब्ध कराने की एक अनोखी पहल शुरू की थी। उन्होंने एक सरकारी स्कूल में किचन गार्डन बनवाया था। इस किचन गार्डन में कई तरह की सब्ज़ियां उगाई जाती है। फिर इन्हीं सब्ज़ियों से मिड डे मील का खाना तैयार कर बच्चों को परोसा जाता है।

(साभार – योर स्टोरी)

झंकार कर दो

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माखनलाल चतुर्वेदी

वह मरा कश्मीर के हिम-शिखर पर जाकर सिपाही,

बिस्तरे की लाश तेरा और उसका साम्य क्या?

पीढ़ियों पर पीढ़ियाँ उठ आज उसका गान करतीं,

घाटियों पगडंडियों से निज नई पहचान करतीं,

खाइयाँ हैं, खंदकें हैं, जोर है, बल है भुजा में,

पाँव हैं मेरे, नई राहें बनाते जा रहे हैं।

यह पताका है,

उलझती है, सुलझती जा रही है,

जिन्दगी है यह,

कि अपना मार्ग आप बना रही है।

मौत लेकर मुट्ठियों में, राक्षसों पर टूटता हूँ,

मैं, स्वयं मैं, आज यमुना की सलोनी बाँसुरी हूँ,

पीढ़ियाँ मेरी भुजाओं कर रहीं विश्राम साथी,

कृषक मेरे भुज-बलों पर कर रहे हैं काम साथी,

कारखाने चल रहे हैं रक्षिणी मेरी भुजा है,

कला-संस्कृति-रक्षिता, लड़ती हुई मेरी भुजा है।

उठो बहिना,

आज राखी बाँध दो श्रृंगार कर दो,

उठो तलवारों,

कि राखी बँध गई झंकार कर दो।

राखी बांधत जसोदा मैया

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                                                                  सूरदास

राखी बांधत जसोदा मैया ।
विविध सिंगार किये पटभूषण, पुनि पुनि लेत बलैया ॥
हाथन लीये थार मुदित मन, कुमकुम अक्षत मांझ धरैया।
तिलक करत आरती उतारत अति हरख हरख मन भैया ॥
बदन चूमि चुचकारत अतिहि भरि भरि धरे पकवान मिठैया ।
नाना भांत भोग आगे धर, कहत लेहु दोउ मैया॥
नरनारी सब आय मिली तहां निरखत नंद ललैया ।
सूरदास गिरिधर चिर जीयो गोकुल बजत बधैया ॥

 

वैज्ञानिक, शिक्षाविद यश पाल का निधन

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नयी दिल्ली : कॉस्मिक किरणों के अध्ययन एवं शिक्षा संस्थानों के निर्माण में अपने योगदान के लिए पहचाने जाने वाले मशहूर भारतीय वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद प्रोफेसर यश पाल का निधन हो गया। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘प्रोफेसर यश पाल के निधन से दुखी हूं। हमने एक वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद खो दिया जिन्होंने भारतीय शिक्षा में अपना बहमूल्य योगदान दिया है।’’ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष यशपाल ने अपना करियर टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च से शुरू किया था और उन्हें उनके योगदान के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च सम्मान पद्म् विभूषण से सम्मानित किया गया था ।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके निधन पर शोक जाहिर करते हुए कहा कि कॉस्मिक किरणों केअध्ययन , शिक्षा संस्था निर्माण और उल्लेखनीय प्रशासक के तौर पर उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें याद किया जाएगा।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने शिक्षाविद के निधन को एक बड़ी क्षति बताया। राहुल ने ट्वीट किया, ‘‘एक वैज्ञानिक एवं उत्साही शिक्षक, जो सीखने और सिखाने का महत्व समझते थे, प्रोफेसर यश पाल का निधन हमारे लिए एक बड़ी क्षति है।’’ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री हर्षवर्धन ने ट्वीट किया, ‘‘पूर्ण विज्ञान के लिए प्रोफेसर यश पाल आपका शुक्रिया। आपको जाता देखना काफी दुखद है, यह बेहद बड़ी क्षति है लेकिन आप हमेशा हमारे साथ रहेंगे। ओम शांति।’’