Thursday, October 1, 2026
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पृथ्वी शॉ अंडर-19 विश्व कप में करेंगे भारत का नेतृत्व

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नयी दिल्ली : मुंबई के उदीयमान बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को अलगे साल होने वाले अंडर-19 विश्व कप के लिये चुनी गयी 16 सदस्यीय भारतीय टीम का कप्तान चुना गया है। बीसीसीआई के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी ने आज एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘ जूनियर टीम के चयनकर्ताओ ने आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप 2018 के लिये टीम का चयन किया हैं। सोलह देशों के बीच होने वाला यह टूर्नामेंट 13 जनवरी से तीन फरवरी 2018 तक न्यूजीलैंड में खेला जायेगा।’’ पिछले साल की उपविजेता भारतीय टीम ने इस खिताब को 2000, 2008 और 2012 में जीता है। गत वर्ष बांग्लादेश हुए विश्व कप के फाइनल में भारतीय टीम वेस्टइंडीज के हाथों हार गयी थी।

भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया (1988, 2002 & 2010) ने भी इस खिताब को तीन बार अपने नाम किया है। टूर्नामेंट की तैयारियों के लिये बेंगलुरु में अभ्यास शिविर लगाया जायेगा। चौधरी ने कहा, ‘‘ विश्व कप की तैयारियों के लिये आठ से 22 दिसंबर तक बेंगलुरु में अभ्यास शिविर का आयोजन किया जायेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ शॉ के अलावा बंगाल के पॉरेल को उनकी टीमों से रणजी मैच खेलने की छूट दी गयी है और वे 12 दिसंबर से शिविर में जुड़ेंगे।’’ भारत अंडर-19 टीम: पृथ्वी शॉ (कप्तान), शुभम गिल (उप-कप्तान), मंजोत कालरा, हिमांशु राणा, अभिषेक शर्मा, ऋयान पराग, आर्यण जुयाल (विकेटकीपर), हार्विक देसाई (विकेटकीपर), शिवम मावी, कमलेश नागरकोटि, इशान पॉरेल, अर्शदीप सिंह, अनूकुल रॉय, शिवा सिंह, पंकज यादव।

स्टैंडबाई खिलाड़ी : ओम भोसले, राहुल चहर, निनाद राथवा, उर्विल पटेल और आदित्य ठाकरे ।

मीराबाई चानू ने विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा

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नयी दिल्ली : साईखोम मीराबाई चानू विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में पिछले दो दशक से अधिक समय में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गयी। उन्होंने अमेरिका के अनाहेम में यह कारनामा करके रियो ओलंपिक के खराब प्रदर्शन की टीस मिटायी।

भारतीय रेलवे में कार्यरत चानू ने स्नैच में 85 किलो और क्लीन एंड जर्क में 109 किलो वजन उठाया। उन्होंने 48 किलो वर्ग में कुल 194 किलो वजन उठाकर नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया।

वर्ष 2014 राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता चानू ने कहा, ‘‘आज मैंने जो भी हासिल किया है, वह मेरे कोच विजय शर्मा के मार्गदर्शन के बिना संभव नहीं हो पाता। मैंने और मेरे कोच ने शीर्ष स्तर पर सफलता हासिल करने के लिये कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘रियो ओलंपिक में मैं पदक नहीं जीत सकी थी, वो निराशाजनक था। मैंने रियो में गलतियां की थी और मैं अब भी इससे दुखी हूं। इस पदक ने वो निराशा खत्म कर दी हे। मैं अपनी कमजोरियों पर काम करूंगी और अगले साल राष्ट्रमंडल व एशियाई खेलों तथा तोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने की कोशिश करूंगी। ’’ पोडियम पर खड़े होकर तिरंगा देखकर खुशी से उनके आंसू निकल गए। उनसे पहले ओलंपिक कांस्य पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी ने 1994 और 1995 में विश्व चैम्पियनशिप में पीला तमगा जीता था।

भारतीय भारोत्तोलन महासंघ के महासचिव सहदेव यादव ने अनाहेम से पीटीआई से कहा, ‘‘हमें 24 साल के बाद भारोत्तोलन में पदक मिला, यह एक शानदार उपलब्धि है। बल्कि यह ओलंपिक से ज्यादा बड़ी उपलब्धि है क्योंकि विश्व चैम्पियनशिप में काफी कठिन, काफी मजबूत खिलाड़ियों का पूल होता है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं मीराबाई और कोच विजय शर्मा दोनों को ही इस बड़ी उपलब्धि के लिये बधाई देना चाहूंगा। कोच ने उन्हें बहुत अच्छी तरह ट्रेनिंग दी और वह उसकी सफलता के लिये श्रेय के हकदार हैं।

फूल और अन्य कचरे से बनेगी हवन सामग्री

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नयी दिल्ली : दिल्ली में विभिन्न समारोहों, धार्मिक स्थलों, होटलों और शमशान घाटों से निकलने वाले फूल और अन्य पूजा सामग्री के कचरे से हवन सामग्री बनाने का अभियान निगमबोध घाट से शुरू किया गया है।

केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हर्षवर्धन ने आज निगमबोध घाट पर हरित कचरा पुनर्चक्रण मशीन का उद्घाटन करते हुये कहा कि धार्मिक स्थलों से फूल और अन्य पूजा सामग्री को नदी में प्रवाहित करने से रोकते हुये हवन सामग्री बनाने से पर्यावरण को लाभ होगा। निगमबोध घाट पर फूल और पूजा सामग्री का सबसे ज्यादा हरित कचरा निकलता है।

यहां प्रतिदिन निकलने वाले हरित कचरे का इस मशीन से निस्तारण कर खाद बनायी जायेगी। स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ी संस्था क्लीन इंडिया वेंचर्स द्वारा विकसित की गयी यह मशीन सांसद निधि से लगायी गयी है। मशीन से बनी हवन सामग्री को निशुल्क वितरित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इससे नगर निगमों को भी ट्रकों में भरकर पूजा सामग्री लैंडफिल साइट तक भेजने की जिम्मेदारी से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने इस मशीन को धार्मिक स्थलों के अलावा मंडियों और होटलों सहित उन सभी स्थानों पर लगाने की जरूरत पर बल दिया जहां से नियमित तौर पर हरित कचरा निकलता है।

वैज्ञानिकों ने रोबोट को बना दिया नेता, 2020 में लड़ेगा चुनाव

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मेलबर्न : वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला कृत्रिम बुद्धि वाला राजनीतिज्ञ विकसित किया है जो आवास, शिक्षा, आव्रजन संबंधी नीतियों जैसे स्थानीय मुद्दों पर पूछे गए सवालों के जवाब दे सकता है। इतना ही नहीं, उसे 2020 में न्यूजीलैंड में होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार बनाने की तैयारियां भी जोरों पर हैं । इस आभासी राजनीतिज्ञ का नाम ‘सैम’ (एसएएम) रखा गया है और इसके रचनाकार न्यूजीलैंड के 49 वर्षीय उद्यमी निक गेरिट्सन हैं। उन्होंने कहा ‘‘ऐसा लगता है कि फिलहाल राजनीति में कई पूर्वाग्रह हैं … प्रतीत होता है कि दुनिया के देश जलवायु परिवर्तन एवं समानता जैसे जटिल मुद्दों का हल नहीं निकाल पा रहे हैं।’’ कृत्रिम बुद्धि वाला राजनीतिज्ञ फेसबुक मेसेन्जर के जरिए लोगों को प्रतिक्रिया देना लगातार सीख रहा है। गेरिट्सन मानते हैं कि एल्गोरिदम में मानवीय पूर्वाग्रह असर डाल सकते हैं। लेकिन उनके विचार से पूर्वाग्रह प्रौद्योगिकी संबंधी समाधानों में चुनौती नहीं हैं।

‘टेक इन एशिया’ की खबर में कहा गया है कि प्रणाली भले ही पूरी तरह ‘‘सटीक’’ न हो, लेकिन यह कई देशों में बढ़ते राजनीतिक एवं सांस्कृतिक अंतर को भरने में मददगार हो सकती है।

न्यूजीलैंड में साल 2020 के आखिर में आम चुनाव होंगे। गेरिट्सन का मानना है कि तब तक सैम एक प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने के लिए तैयार हो जाएगा।

 

सर्दियों में पुरुष रखें अपनी त्वचा का ख्याल

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सर्दियों में ठंडी हवाओं की वजह से त्वचा की नमी गायब हो जाती है और त्वचा का रूखापन बढ़ जाता है। ऐसा सिर्फ महिलाओं ही नहीं बल्कि पुरुषों की त्वचा के साथ भी होता है। पुरुषों की त्वचा महिलाओं की स्किन से थोड़ी अलग होती है। इसलिए दोनों की स्किन के लिए ट्रीटमेंट भी अलग-अलग होते हैं। पुरुषों को सर्दियों के दौरान अपनी त्वचा में नमी बरकरार रखने के लिए सही ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे त्वचा में बिना किसी तरह का नुकसान पहुंचे नमी को बरकरार रखा जा सके। तो चलिए जानते हैं कि सर्द हवाओं के बीच पुरुष अपनी त्वचा को नम कैसे रखें।

अगर आपकी त्वचा शुष्क है तो सर्दियों में इसे हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए आप नेचुरल फेस मॉइश्चराइजर्सर का इस्तेमाल कर सकते हैं। नहाने के बाद और सोने से पहले दिन में दो बार मॉइश्चराइजर लगाने से त्वचा की नमी बरकरार रहती है।

सर्दियों में होंठ रूखे होकर फटने लगते हैं। ऐसे में केमिकलयुक्त लिप बाम के इस्तेमाल की जगह ऑर्गेनिक लिप बाम का इस्तेमाल करना चाहिए। दिन भर में कई बार और सोने से पहले लिप बाम लगाने से होंठ सर्दियों में भी नर्म बने रहते हैं।

सर्दियों में त्वचा की ऊपरी परत कसी हुई होती है। ऐसे में रेजर से शेविंग करने से कटने-पिटने का खतरा बढ़ जाता है। खास तौर पर अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो आपको शेविंग में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। सर्दियों में शेविंग के लिए इलेक्ट्रिक ट्रिमर का इस्तेमाल ज्यादा सही रहता है। इससे कटने-छिलने की आशंका कम होती है।

सन्सक्रीम का इस्तेमाल गर्मियों में सूरज की पराबैगनी किरणों से बचने के लिए किया जाता है। लेकिन सर्दियों में भी अगर आप तीस मिनट या उससे ज्यादा वक्त के लिए बाहर रहते हैं तो आपको अपनी त्वचा पर सन्सक्रीम लगा लेना चाहिए।

अल्ट्रा मॉइश्चराइजिंग हैंड लोशन सर्दियों में आपके फटे हाथों से निजात दिलाने में मदद करता है। इसके लिए एख ऐसे नेचुरल हैंड लोशन का इस्तेमाल करें जो स्किन को हाइड्रेटेड रखे और त्वचा पर कोई तैलीय परत न छोड़े।

 

जहां मांगती हैं भीख, वृद्ध महिला ने उसी मंदिर को दान किए 2.5 लाख रुपये

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भारत में मंदिरों में उद्योगपतियों, अमीरों और सेलिब्रिटी द्वारा कीमती चीजें दान करने की खबरें तो आती रहती हैं, लेकिन जब कोई भिखारी ऐसा करे तो सबका हैरान हो जाना स्वाभाविक है। कर्नाटक के मैसूर में एक भिखारी महिला ने 2.5 लाख रुपये दान कर दिए। आश्चर्य की बात ये थी कि ये महिला उसी मंदिर के सामने भीख मांगा करती हैं। 85 की उम्र में पहुंच चुकीं एम वी सीतालक्ष्मी प्रसन्ना अंजनेय स्वामी मंदिर के सामने भीख मांगती हैं। इसके पहले वे घर-घर जाकर काम किया करती थीं। लेकिन शारीरिक रूप से अक्षम हो जाने के बाद उन्होंने मंदिर के सामने भीख मांगना शुरू कर दिया।

सीतालक्ष्मी ने मंदिर में सुविधाओं को बढ़ाने में अपना योगदान देने के लिए हनुमत जयंती के वक्त श्रद्धालुओं के प्रसाद के लिए ये पैसे दान किए हैं। इस मंदिर में हजारों लोग दान करते रहते हैं। लेकिन जब लोगों को पता चला कि एक भिखारी महिला ने मंदिर में ढाई लाख रुपये दान किए हैं तो लोग अब उसका आशीर्वाद लेने के लिए उमड़ पड़े।

कुछ दिन पहले गणेश उत्सव के दौरान उन्होंने 30,000 रुपये दान किए थे। इस बार वह मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन को अपने साथ बैंक ले गईं और 2 लाख रुपये और निकलवा कर दिए। इस तरह से उन्होंने कुल ढाई लाख रुपये दान किए। सीतालक्ष्मी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘श्रद्धालुओं से मुझे जो भी भीख मिलती है उसे मैं बैंक में जमा कर देती हूं। मेरे लिए भगवान ही सबकुछ हैं। इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं मंदिर को पैसा दान कर दूंगी।’ उन्होंने बताया कि मंदिर से ही उनकी देखभाल होती है। मंदिर में काम करने वाली राजेश्वरी हफ्ते में एक दिन उन्हें स्नान करवाती हैं। सीता ने बताया कि इसलिए उन्होंने अपनी सारी सेविंग्स मंदिर को दान करने का फैसला किया।

सीता ने बताया कि उनकी एकमात्र इच्छा है कि हर ‘हनुमत जयंती’ के वक्त सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद मिले। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन एम बासवराज ने बताया, ‘वह सबसे अलग हैं और कभी किसी श्रद्धालु से पैसे नहीं मांगतीं। श्रद्धालु जो कुछ भी देते हैं वो उसे सहर्ष स्वीकार कर लेती हैं। वे मंदिर को दान देने में भी आगे रहती हैं। मंदिर में एक उत्सव के दौरान उन्हें एमएलए वासु ने सम्मानित भी किया था। मंदिर को दिए उनके दान को देखकर लोगों ने उन्हें और लोगों ने औऱ दान देना शुरू कर दिया। कुछ लोग तो उन्हें 100-100 रुपये देकर चले जाते हैं।’ उन्होंने बताया कि कई लोग तो उन्हें पैसे देने के साथ ही उनका आशीर्वाद लेकर जाते हैं। मंदिर के लोग भी उनका पूरा ख्याल रखते हैं।

कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट में काम करने वाले आर मरियप्पा ने कहा, ‘जब मैंने उनकी दयालुता के बारे में सुना तो दंग रह गया। उन्हें सलाम करने का मन किया।’ सीतालक्ष्मी के भाई कुगेशन ने बताया कि वे उनका अच्छे से ख्याल रखते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले सीता एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थीं। जिसके बाद उनका अच्छे से इलाज कराया गया तब जाकर ठीक हुईं। हालांकि वे भी घर पर रहना नहीं चाहतीं। वे काफी सुबह मंदिर चली जाती हैं और वहां से देर शाम को ही वापस लौटती हैं।

भारत में भिखारियों की अच्छी खासी तादाद है। हमें हर शहर में भिखारियों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल जाती है। लेकिन भिखारियों की ऐसी कहानी कम ही सुनने को मिलती है। एक डेटा के मुताबिक भारत में लगभग 4 लाख भिखारी हैं। इस लिस्ट में पश्चिम बंगाल का नाम सबसे ऊपर आता है जहां 81,000 भिखारी हैं। वहीं लैंगिक आधार पर देखें तो पुरुष भिखारियों की संख्या 2.2 लाख है तो वहीं महिला भिखारियों की संख्या 1.91 है। पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश 65,835 और उसके बाद आंध्र प्रदेश 30,218 का नंबर आता है। बिहार में 29,723 तो वहीं मध्य प्रदेश में 28,695 भिखारी हैं।

(साभार – योर स्टोरी)

जानें मेनोपॉज के  चार लक्षण

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मेनोपॉज हम महिला के जीवन का अनिवार्य हिस्सा है। 40 या फिर 50 साल की उम्र के आसपास हर महिला के साथ एक ऐसी अवस्था आती है जब उनके अंडाशय में अंडों का निर्माण कम या फिर बंद हो जाता है। यह मासिक चक्र की समाप्ति का संकेत होता है। इसके बाद प्रेग्नेंसी की भी संभावनाएं खत्म हो जाती हैं। ऐसे में आप किस तरह से इस घटना की पहचान करें कि आप मीनोपॉज के दौर से गुजर रही हैं? आज हम आपको मेनोपॉज के कुछ सामान्य लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपको इसका आसानी से पता चल जाएगा और इन लक्षणों के बारे में आपका जानना भी बहुत जरूरी है।

वेजिनल ड्राइनेस – वेजिनल ड्राइनेस की समस्या यूं तो किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन यह मेनोपॉज का भी एक महत्वपूर्ण लक्षण होता है। मेनोपॉज में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन का प्रोडक्शन काफी कम हो जाता है। ऐसे में वेजिनल वॉल्स पर नमी की पतली सतह पर काफी प्रभाव पड़ता और इस वजह से वेजिनल ड्राइनेस की समस्या उत्पन्न होती है। इसकी वजह से चिड़चिड़ापन और संबंध बनाने के दौरान वेजिनल एरिया में दर्द की समस्या होती है।

नींद संबंधी समस्या – मेनोपॉज स्लीपिंग डिसऑर्डर का भी कारक होता है। इस दौरान या तो नींद नहीं आती है और अगर आ भी जाए तो आप काफी देर तक सोती रहती हैं।

कामेच्छा में कमी – मेनोपॉज की वजह से कई शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। ऐसे में क्लिटोरियल रिएक्शन काफी समय लेता है। योनि का रूखापन और संबंध बनाने के दौरान तकलीफ की वजह से कामेच्छा में भी कमी आती है।

तनाव और मूड स्विंग की समस्या – मेनोपॉज के दौरान सबसे आम समस्या होती है मूड स्विंग। हार्मोन्स में बदलाव की वजह से महिलाओं में बार-बार मन बदलने की समस्या होती है। इसके अलावा इस दौरान वे तनाव की समस्या से भी गुजरती हैं।

 

सर्दी में गरमाहट लाए सूप का स्वाद

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ब्रोकोली बादाम का सूप

सामग्री : एक बड़ा चम्मच मक्खन, एक कटा हुआ प्याज, एक कटी हुई) ब्रोकोली, तीन बड़ा चम्मच पिसा हुआ बादाम, दो कप वेजिटेबल स्टॉक. आधा कप दूध, नमक स्वादानुसार, एक बड़ी चम्मच काली मिर्च पाउडर, पांच बड़े चम्मच दही, दो बड़ा चम्मच बारीक कटा हुआ बादाम

विधि : सबसे पहले मीडियम आंच में एक पैन में मक्खन गरम करने के लिए रखें। मक्खन के गरम होते ही प्याज को हल्का भून लें।  प्याज के हल्का नर्म होते ही ब्रोकोली डालकर भूनें। पिसा हुआ बादाम, वेजिटेबल स्टॉक, नमक और काली मिर्च पाउडर मिलाएं। पहला उबाल आने का इंतजार करें, और पहला उबाल आते ही 10 मिनट तक ढककर पकाएं ताकि ब्रोकोली अच्छे से पक जाए और फिर आंच बंद कर दें। उबली हुई ब्रोकोली को ठंडा कर ब्लेंडर में डालकर अच्छे से पेस्ट बना लें। मध्यम आंच कर दोबारा पैन गरम करें और तैयार पेस्ट को पैन में डालकर दूध के साथ पकाएं और आंच बंद कर दें। दूसरी ओर एक दूसरे पैन में मक्खन गरम करने के लिए रखें। मक्खन के गरम होते ही बारीक कटे बादाम भून लें और आंच बंद कर दें। तैयार है ब्रोकोली बादाम का सूप. कटोरी में डालकर दही और भुने बादाम से गार्निश कर सर्व करें।

गाजर अदरक का सूप

 

सामग्री : 400 ग्राम कटी हुई गाजर, 1 छोटी कटोरी कटा हुआ अदरक, 2 छोटा चम्मच तेल, 1 छोटा चम्मच जीरा, 1 छोटा चम्मच अजवाइन, चुटकी भर हींग, 1 छोटा चम्मच नमक, 2 छोटा चम्मच चीनी, 2 छोटा चम्मच नींबू का रस, 1/4 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर

विधि : मध्यम आंत पर कड़ाही में तेल डालकर गरम होने के लिए रखें. जब यह गरम हो जाए तो इसमें जीरा, अजवाइन और हींग डालकर भूनें। फिर इसमें काली मिर्च, कटी हुई गाजर और अदरक डालकर 10 मिनट तक पकाएं।  आधा लीटर पानी के साथ भुनी हुई गाजर, अदरक को पीस लीजिये और पतला घोल बना लें। एक बार फिर कड़ाही में गाजर और अदरक मिश्रण डालकर मध्यम आंच पर पकने के लिए रखें. अब इसमें नमक और चीनी डालकर 10 मिनट तक आंच धीमी करके पकाएं। कुछ देर पकाने के बाद नींबू का रस डालकर आंच बंद कर दें। गाजर और अदरक सूप तैयार है। इसे गरमागरम सूप सर्व करें और खुद भी पीयें।

 

कुँवर नारायण की दो कविताएँ

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कुंवर नारायण

अबकी बार लौटा तो

अबकी बार लौटा तो
बृहत्तर लौटूंगा
चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं
कमर में बांधें लोहे की पूँछे नहीं
जगह दूंगा साथ चल रहे लोगों को
तरेर कर न देखूंगा उन्हें
भूखी शेर-आँखों से

अबकी बार लौटा तो
मनुष्यतर लौटूंगा
घर से निकलते
सड़को पर चलते
बसों पर चढ़ते
ट्रेनें पकड़ते
जगह बेजगह कुचला पड़ा
पिद्दी-सा जानवर नहीं

अगर बचा रहा तो
कृतज्ञतर लौटूंगा

अबकी बार लौटा तो
हताहत नहीं
सबके हिताहित को सोचता
पूर्णतर लौटूंगा

 

अयोध्या, 1992

हे राम,
जीवन एक कटु यथार्थ है
और तुम एक महाकाव्य !

तुम्हारे बस की नहीं
उस अविवेक पर विजय
जिसके दस बीस नहीं
अब लाखों सर – लाखों हाथ हैं,
और विभीषण भी अब
न जाने किसके साथ है.

इससे बड़ा क्या हो सकता है
हमारा दुर्भाग्य
एक विवादित स्थल में सिमट कर
रह गया तुम्हारा साम्राज्य

अयोध्या इस समय तुम्हारी अयोध्या नहीं
योद्धाओं की लंका है,
‘मानस’ तुम्हारा ‘चरित’ नहीं
चुनाव का डंका है !

हे राम, कहां यह समय
कहां तुम्हारा त्रेता युग,
कहां तुम मर्यादा पुरुषोत्तम
कहां यह नेता-युग !

सविनय निवेदन है प्रभु कि लौट जाओ
किसी पुरान – किसी धर्मग्रन्थ में
सकुशल सपत्नीक….
अबके जंगल वो जंगल नहीं
जिनमें घूमा करते थे वाल्मीक !

 

 

80 प्रतिशत भारतीय महिलाएं व्यवसाय के लिए खुद जुटाती हैं पैसे

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महिला उद्यमियों के लिए एक ही जगह सारा ज्ञान उपलब्ध कराने वाले sheatwork.com द्वारा भारत में महिला उद्यमियों की स्थिति पर पेश रिपोर्ट के मुताबिक गोवा, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, राजस्थान और पश्चिम बंगाल महिला उद्यमियों के लिए सबसे अधिक केंद्रित योजनाओं की पेशकश करने वाले शीर्ष 5 राज्य बनकर उभरे हैं। महिला उद्यमियों के लिए इन स्कीमों का ज़ोर मुख्य रूप से वित्तीय सहायता पर केंद्रित है जिसके बाद इसमें महिला उद्यमियों के लिए प्रशिक्षण और कौशल निर्माण पर ज़ोर दिया गया है। शिक्षा क्षेत्र में सबसे अधिक महिला उद्यमी दर्ज किए गए जिसके बाद वित्तीय सेवाओं, बीमा, पशुधन, वनोपज और लॉजिंग के क्षेत्र में महिलाओं ने उपक्रम लगाए हैं। इस अनुसंधान की प्रकृति सहायक है और यह इंटरनेट एवं अन्य ऑनलाइन पब्लिक फोरम पर उपलब्ध सूचना पर आधारित है।इस रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि देशभर में करीब 80 प्रतिशत महिला उद्यमी, वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं का मामूली उपयोग कर अपने कारोबार का स्वयं वित्त पोषण कर रही हैं। पश्चिम बंगाल के साथ ही दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में सबसे अधिक संख्या में महिला उद्यमी हैं जिनमें ज्यादातर के पास छोटे एवं मझोले आकार के कारोबार हैं। इसका श्रेय अधिक साक्षरता दर के साथ ही उस क्षेत्र में आमतौर पर महिला सशक्तिकरण को दिया जा सकता है। पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नगालैंड में महिला उद्यमियों की तादाद अपेक्षाकृत कम है, लेकिन पुरुष-महिला अनुपात के लिहाज़ से महिला उद्यमियों की संख्या काफी मजबूत है।

sheatwork की संस्थापक रूबी सिन्हा का कहना है, संयुक्त राष्ट्र ने अपने सहस्त्राब्द विकास लक्ष्यों में से एक लक्ष्य के तौर पर लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन के तौर पर परिभाषित किया है और महिला उद्यमशीलता को प्रोत्साहन एवं सहयोग का श्रेय काफी हद तक इसे दिया जा सकता है। जहां भारत में वर्षों से केन्द्र और राज्य सरकारों के साथ ही स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा इस दिशा में काफी प्रयास किए गए हैं, महिला उद्यमशीलता को लेकर जागरूकता और प्रोत्साहन के स्तर में अब भी काफी कमी है। इस रिपोर्ट के पीछे हमारा उद्देश्य यह समझना है कि आज भारत में महिला उद्यमशीलता किस स्थिति में है और मौजूदा व्यवस्था और महिला उद्यमियों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का कैसे बेहतर उपयोग किया जा सकता है एवं अधिक से अधिक महिलाएं अपना खुद का उद्यम शुरू करें, इसके लिए इसे कैसे और बढ़ाया जा सकता है।

जहां भारत में महिला उद्यमशीलता के लिए काफी लंबा सफर तय करना है, सही दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। कई ऐसी केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय स्कीमें उपलब्ध हैं जो न केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती हैं, बल्कि अपने विकास केंद्रों के जरिये प्रशिक्षण और व्यवहारिक ज्ञान भी उपलब्ध कराती हैं। महिलाओं के विकास पर सरकार के विशेष ध्यान दिए जाने के साथ सामाजिक, सांस्कृति और आर्थिक माहौल तेज़ी से बदल रहा है जिसमें महिला उद्यमशीलता फल फूल सकता है।

sheatwork क्या है?

महिला उद्यमियों के लिए एक ही जगह सभी ज्ञान उपलब्ध कराने वाले sheatwork.com का लक्ष्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली महिलाओं के लिए एक मार्गदर्शक और गाइड बनकर उनके उद्यम लगाने के सपने को साकार करना है। यह उद्यमशीलता के सभी संबंधित क्षेत्रों के बारे में सूचना और जागरूकता बढ़ाने का एक स्टोर हाउस है। दुनियाभर से आकांक्षी महिलाएं इस देश में और दुनियाभर में मौजूद विकल्पों का पता लगा सकती हैं जिनसे उन्हें अपना कारोबार शुरू करने में मदद मिल सकती है और साथ ही वे अपना कारोबार बढ़ा सकती हैं। महिला उद्यमियों को शिक्षित करने, प्रशिक्षित करने, सहयोग करने और साथ ही उन्हें प्रेरित करने के लिए यहां कई अनूठे कारोबार विचार, स्टार्टअप फंडिंग के रास्ते, मार्केटिंग, कानूनी सहायता, मार्गदर्शकों से संपर्क, विभिन्न राज्यों की स्कीमोंध् अंतरराष्ट्रीय स्कीमों की जानकारी, पाठ्यक्रम, सम्मेलन, कार्यशाला, सफलता की कहानियां और समाचार एवं वीडियोज़ उपलब्ध हैं।