Monday, July 13, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 772

किसी भी बच्‍चे को तीन किलोमीटर से अधिक दूर स्कूल न जाना पड़े: सुप्रीम कोर्ट

0

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बच्चों से स्कूल जाने के लिए तीन किलोमीटर या उससे लंबा रास्ता तय करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि शिक्षा के अधिकार को सार्थक बनाने के लिए मिडिल स्कूलों को इस तरीके से बनाए जाने का प्रयास किया जाना चाहिए कि किसी भी बच्चे को केवल स्कूल जाने के लिए इतना लंबा रास्ता तय नहीं करना पड़े।

सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे मामले पर सुनवाई कर रहा था जिसमें केरल के एक स्कूल को अपग्रेड करने की अनुमति मिलने का दूसरे स्कूल ने विरोध किया था।

जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने यह पाया कि पारापननगादी शहर में स्थित जूनियर प्राइमरी स्कूल से चौथी कक्षा पास करने वाले बच्चों को स्कूल जाने के लिए चीन-चार किलोमीटर या उससे भी ज्यादा लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

पीठ ने कहा, हम 10 से 14 वर्ष के बच्चों से स्कूल जाने के लिए तीन किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय करने की उम्मीद नहीं कर सकते।

संविधान की धारा 21 ए के तहत 14 वर्ष की उम्र तक शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है और अगर इस अधिकार को सार्थक बनाना है तो मिडिल स्कूलों को इस प्रकार से बनाने का प्रयास होना चाहिए कि बच्चे को स्कूल जाने के लिए तीन किलोमीटर या उससे अधिक दूर जाने की जरूरत नहीं पड़े।

 

सेना पुलिस में पहली बार शामिल होंगी महिलाएं, 874 भर्तियों को मंजूरी

0

नई दिल्ली.देश की रक्षा मंत्री निर्मला ने पद सम्भालते ही सेना में महिलाओं के आगमन का रास्ता साफ कर दिया है। आर्मी में महिला सैनिकों की संख्या बढ़ाने के लिए पहली बार मिलिट्री पुलिस में 874 महिलाओं की भर्ती को मंजूरी मिली है। इसके मुताबिक, हर साल 52 महिलाएँ पुलिस में शामिल होंगी। बता दें कि सेना प्रमुख विपिन रावत कहा था कि कश्मीर में ऑपरेशन के दौरान कई बार महिलाएं आतंकियों की ढाल बनकर सामने आ जाती हैं। इनसे निपटने के लिए भी मिलिट्री पुलिस में महिलाओं की जरूरत है।

अगले साल से शुरू होगी भर्ती…

शुक्रवार को लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी कुमार ने बताया कि अपराध और लैंगिक आरोपों की जांच के लिए लंबे वक्त से मिलिट्री पुलिस में महिला अफसरों की जरूरत महसूस हो रही थी। मिलिट्री पुलिस में शामिल होने वालीं महिला सैनिकों की ट्रेनिंग भी पुरुष सैनिकों की तरह 62 सप्ताह की होगी। भर्ती प्रक्रिया अगले साल से शुरू होगी, फिलहाल इसके ब्लू प्रिंट को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

कश्मीर में प्रदर्शनकारियों से निपटना आसान होगा: रावत

सेना प्रमुख विपिन रावत ने जोर देकर मिलिट्री पुलिस में महिलाओं की जरूरत की बात कही थी। वे 10 जून को देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी में पासिंग आउट परेड में शामिल हुए थे।
उन्होंने कहा था कि आमतौर पर जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन के दौरान जवानों के सामने महिलाएं ढाल बनकर सामने आ जाती हैं। लिहाजा, परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे निपटने के लिए हम सबसे पहले मिलिट्री पुलिस में महिला सैनिकों की भर्ती करेंगे। हमारे रैंक में जवान और सरदार साहेबान होते हैं। उस रैंक में भी महिला सैनिकों की जरूरत है।

क्या है मिलिट्री पुलिस?

नेवी, एयरफोर्स की तरह सेना की स्पेशल पुलिस है, जो 1942 में बनाई गई। इसके सैनिकों की ड्रेस में लाल टोपी और सफेद बेल्ट होता है। बाजू पर काला बैच लगा होता है।  मिलिट्री पुलिस का मुख्य काम जवानों के बीच अनुशासन बनाए रखना है ताकि सेना का स्तर और मनोबल बरकरार रहे। इसके अलावा कैंट एरिया में पुलिसिंग, युद्ध और शांति के दौरान जवानों के लिए सामान भेजने, युद्ध बंदियों की निगरानी, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सिविल पुलिस के साथ संयोजन की जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही सेना प्रमुख को सुरक्षा देना, आर्मी के डिविजनल कमांडर्स, कोर कमांडर्स, आर्मी कमांडर्स के लिए पायलट वाहन मुहैया कराने की जिम्मेदारी भी होती है। बता दें कि, फिलहाल सेना के मेडिकल, लीगल, एजुकेशनल, सिग्नल्स और इंजीनियरिंग विंग में महिलाओं की भर्ती अफसर रैंक पर होती है।

 

जीएसटी में मिली राहत, रोजमर्रा की 30 आवश्यक वस्तुओं की कीमतें घटीं

0

सरकार ने जीएसटी की दरों के बदलाव में इस बार गरीबों, दस्तकारों और मूर्तिकारों का ख्याल रखा है लेकिन लग्जरी कारों के शौकीनों का बोझ बढ़ा दिया है। जीएसटी काउंसिल 21 वीं बैठक में शनिवार को इडली-डोसा पेस्ट से लेकर किचन गैस लाइटर जैसी रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली लगभग 30 वस्तुओं की जीएसटी दरें कम करने तथा लग्जरी और एसयूवी कारों पर 2 से 7 प्रतिशत तक अतिरिक्त सेस लगाने का फैसला किया गया।

इसके अलावा खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग (केवीआईसी) के जरिये मिलने वाले वस्त्रों को करमुक्त रखा गया है।  जीएसटी की नई दरों के मुताबिक, 20 लाख रुपये तक सालाना टर्नओवर वाले दस्तकारों और लोक कलाकारों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट दे दी गई है। इसके साथ ही मिट्टी की बनी प्रतिमाओं को भी जीएसटी से मुक्त कर दिया गया।
नए फैसले के मुताबिक  15 मई तक के रजिस्टर्ड ट्रेड मार्क वाली चीजें बेचने वाली कंपनियों को पांच फीसदी जीएसटी देना होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हैदराबाद में जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद इन फैसलों का एलान किया। उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत टैक्स कलेक्शन काफी अच्छा रहा है और अब तक इससे 95,000 करोड़ रुपये आ चुके हैं।
ताकि गरीबों का भरोसा कायम रहे 
जीएसटी लागू करते वक्त कुछ वस्तुओं पर टैक्स की दरें बढ़ाने से सरकार पर गरीब विरोधी होने के आरोप लगने लगे थे। मसलन, मूर्तियों पर 30 फीसदी टैक्स लगा दिया गया था। इन खामियों को दूर करने के लिए सरकार ने दैनिक उपभोग की 30 वस्तुओं की जीएसटी दरें घटाते हुए रिटर्न फाइल करने की तारीख भी बढ़ाकर 10 अक्तूबर कर दी है, ताकि सरकार की गरीब हितैषी छवि पर लोगों का भरोसा कायम रह सके। ब्रांड-रहित खाद्य वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त रखा गया है जबकि ब्रांडेड और पैकेज्ड खाद्य वस्तुओं पर सिर्फ 5 फीसदी टैक्स लगाया गया है।

इनकी दरें हुई कम
भुने चने, इडली, डोसा घोल, सूखी हल्दी, कस्टर्ड पाउडर, खली, धूपबत्ती, धूप और इसी तरह की अन्य वस्तुओं, प्लास्टिक रेनकोट, रबर बैंड, राइस रबर रॉल्स, कंप्यूटर मॉनिटर, किचेन गैस लाइटर, झाड़ू, ब्रश आदि।

इंटर स्टेट-जॉब वर्क का टर्नओवर अगर 20 लाख तक है तो भी रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। सरकारी वर्क कांट्रेक्ट में टैक्स 18 फीसदी से घटा कर 12 फीसदी कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि इससे सरकार का काफी टैक्स बचेगा।

काउंसिल के फैसले के मुताबिक, मिड साइज कारों पर सेस 43 फीसदी से बढ़ कर 45 फीसदी हो गया है। इससे पहले इनकी जीएसटी दरें 48 फीसदी से घटकर 43 फीसदी हो गई थी। बड़ी व लग्जरी कारों पर टैक्स 43 से बढ़कर 48 फीसदी किया गया है। एसयूवी पर टैक्स 43 फीसदी से बढ़कर 50 फीसदी हो गया है। एसयूवी कीमत पर भी जीएसटी के बाद 11 फीसदी का फायदा हुआ है लेकिन इस बार इस पर 7 फीसदी सेस बढ़ा दिया गया है।

 

फिर छूट गया

0

अरुण भारद्वाज

आज फिर इस नकली चकाचौंध के बीच काम करते करते आँख लग गयी और पहुँच गया अपने गाँव।12-13 साल का नासमझ बच्चा 25 साल के गुलाम जवान की रूह से बाहर निकला।

पतली गली को चीरते हुए रोशन की दुकान से 2 मुंग के लड्डू लिए और साईकल के पुराने से टायर को छोटी सी डंडी से मारता हुआ, गंदे पानी वाले तालाब का रास्ता पार कर लोहे के दरवाजे को कूदकर पार किया।

उसने सरकारी स्कूल के खाली मैदान पर नजर दौड़ाई। स्कुल की छुट्टी हुए 1 घंटे से ऊपर हो गया था, स्कूल सुनसान था, कोई भी अभी तक खेलने आया नहीं था ।

‘कोई बात नहीं।’ उसने अपना टायर लिया और पीछे वाली दीवार कूद कर शमशान वाले रास्ते चल दिया। डर तो लग रहा था लेकिन इतने दिनों बाद वह ‘जिन्दा मुर्दों’ से  आजाद हुआ था तो वहाँ से भी भागता हुआ चला गया ,जाल के पेड़ से मीठी पील तोड़ी।

वही एक मुर्दे को जलते देखते हुए पील खाता गया । अनायास याद आया – समय कम है सब बच्चे खेलने आ गये होंगे मेरा इन्तजार हो रहा होगा । वो अपनी टीम का कप्तान था, फटाफट उसने टायर उठाया और दौड़ता हुआ स्कूल पहुँच गया। अभी तक कोई नहीं आया था।

अरे, आज ऐसा क्या हुआ जो कोई भी खेलने नहीं आया । दिमाग में कुछ आया, दरवाजे से छलांग लगाई और फुल्लू की गोलगप्पे वाली रेहड़ी पर उसने मिर्च दहीभल्ले बनाने के लिए कह दिया। फुल्लू ने रेडियो की आवाज तेज की।  मैच का टॉस हो रहा था ।

दही भल्ले की प्लेट हाथ में देते हुए फुल्लू ने कहा – आज धंधा मुश्किल से सौ रूपए होगा। सब घर में मैच देख रहे होंगे।  बड़ा दुःख हुआ मुश्किल से थोडा सा समय मिला, सबके साथ खेल भी नहीं पाया।

कोई बात नहीं आज दही भल्ले से काम चला लेता हूँ । जैसे ही मिर्च दही और भल्ले से भरी चम्मच मुँह तक लेकर गया आवाज आई “एक्शन”।

एक हीरोइन रो रोकर बोल रही थी मेरा पूरा बचपन छिन गया?

(लेखक अभी रश्मि शर्मा टेलिफ़िल्म्स में कार्यकारी निर्माता के तौर पर कार्यरत हैं। ” नीला भगवान ” नामक एक चर्चित उपन्यास लिख चुके हैं । यूटूब के लिए लघु फ़िल्में बनाते हैं और अख़बार – पत्रिकाओं के लिए लेख भी लिखते हैं। मूल रूप से हरियाणा निवासी, फ़िलहाल मुंबई में हैं।)

 

1993 बम धमाके : दो को मौत की सजा, सलेम को उम्रकैद

0

मुंबई : मुंबई की एक अदालत ने 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में आज ताहिर मर्चेंट और फिरोज अब्दुल राशिद खान को मौत की सजा सुनाई तथा प्रत्यर्पित करके भारत लाए गए गैंगस्टर अबू सलेम को उम्रकैद की सजा सुनाई।अदालत ने सलेम के अलावा इस मामले के संबंध में करीमुल्लाह खान को भी उम्रकैद की सजा सुनाई।
विशेष टाडा अदालत ने धमाकों के 24 साल बाद जून में इस मामले में मास्टरमाइंड मुस्तफा दोसा और सलेम समेत छह लोगों को दोषी ठहराया था। देश की वित्तीय राजधानी में हुए धमाकों में 257 लोग मारे गए थे।
बहरहाल, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी अब्दुल कयूम को छोड़ दिया। यह मुकदमे का दूसरा चरण था।
सभी सातों आरोपी कई आरोपों का सामना कर रहे हैं जिनमें आपराधिक षडयंत्र, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना और हत्या के आरोप शामिल हैं।

अदालत ने पहले कहा था कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित किया कि सलेम मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था और उसने अभिनेता संजय दत्त को तीन एके-56 राइफल, गोला बारुद और हथगोले दिए थे। संजय दत्त को बाद में शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था।
अदालत ने पहले कहा था कि दाउद के भाई अनीस इब्राहिम और दोसा का करीबी रहा सलेम दिघी से मुंबई खुद हथियार और गोला बारुद लेकर आया था।
अदालत ने कहा था, ‘‘यह इस साजिश की महत्वपूर्ण बात थी ताकि भारत के निर्दोष नागरिकों को आतंकित करने और उन्हें यातनाएं देने के लिए इन हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकें।’’ अबू सलेम, मुस्तफा दोसा, करीमुल्लाह खान, फिरोज अब्दुल राशिद खान, रियाज सिद्दिकी, ताहिर मर्चेंट और अब्दुल कयूम के मुकदमे मुख्य मामले से अलग चलाए गए।

 

गुरु महिमा

0

 

कबीर

गुरु सो ज्ञान जु लीजिये, सीस दीजये दान।
बहुतक भोंदू बहि गये, सखि जीव अभिमान॥१॥

व्याख्या: अपने सिर की भेंट देकर गुरु से ज्ञान प्राप्त करो | परन्तु यह सीख न मानकर और तन, धनादि का अभिमान धारण कर कितने ही मूर्ख संसार से बह गये, गुरुपद – पोत में न लगे।

गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय।
कहैं कबीर सो संत हैं, आवागमन नशाय॥२॥

व्याख्या: व्यवहार में भी साधु को गुरु की आज्ञानुसार ही आना – जाना चाहिए | सद् गुरु कहते हैं कि संत वही है जो जन्म – मरण से पार होने के लिए साधना करता है |

गुरु पारस को अन्तरो, जानत हैं सब सन्त।
वह लोहा कंचन करे, ये करि लये महन्त॥३॥

व्याख्या: गुरु में और पारस – पत्थर में अन्तर है, यह सब सन्त जानते हैं। पारस तो लोहे को सोना ही बनाता है, परन्तु गुरु शिष्य को अपने समान महान बना लेता है।

कुमति कीच चेला भरा, गुरु ज्ञान जल होय।
जनम – जनम का मोरचा, पल में डारे धोया॥४॥

व्याख्या: कुबुद्धि रूपी कीचड़ से शिष्य भरा है, उसे धोने के लिए गुरु का ज्ञान जल है। जन्म – जन्मान्तरो की बुराई गुरुदेव क्षण ही में नष्ट कर देते हैं।

गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि – गढ़ि काढ़ै खोट।
अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट॥५॥

व्याख्या: गुरु कुम्हार है और शिष्य घड़ा है, भीतर से हाथ का सहार देकर, बाहर से चोट मार – मारकर और गढ़ – गढ़ कर शिष्य की बुराई को निकलते हैं।

गुरु समान दाता नहीं, याचक शीष समान।
तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान॥६॥

व्याख्या: गुरु के समान कोई दाता नहीं, और शिष्य के सदृश याचक नहीं। त्रिलोक की सम्पत्ति से भी बढकर ज्ञान – दान गुरु ने दे दिया।

जो गुरु बसै बनारसी, शीष समुन्दर तीर।
एक पलक बिखरे नहीं, जो गुण होय शारीर॥७॥

व्याख्या: यदि गुरु वाराणसी में निवास करे और शिष्य समुद्र के निकट हो, परन्तु शिष्ये के शारीर में गुरु का गुण होगा, जो गुरु लो एक क्षड भी नहीं भूलेगा।

गुरु को सिर राखिये, चलिये आज्ञा माहिं।
कहैं कबीर ता दास को, तीन लोकों भय नाहिं॥८॥

व्याख्या: गुरु को अपना सिर मुकुट मानकर, उसकी आज्ञा मैं चलो | कबीर साहिब कहते हैं, ऐसे शिष्य – सेवक को तनों लोकों से भय नहीं है |

गुरु सो प्रीतिनिवाहिये, जेहि तत निबहै संत।
प्रेम बिना ढिग दूर है, प्रेम निकट गुरु कंत॥९॥

व्याख्या: जैसे बने वैसे गुरु – सन्तो को प्रेम का निर्वाह करो। निकट होते हुआ भी प्रेम बिना वो दूर हैं, और यदि प्रेम है, तो गुरु – स्वामी पास ही हैं।

गुरु मूरति गति चन्द्रमा, सेवक नैन चकोर।
आठ पहर निरखत रहे, गुरु मूरति की ओर॥१०॥

व्याख्या: गुरु की मूरति चन्द्रमा के समान है और सेवक के नेत्र चकोर के तुल्य हैं। अतः आठो पहर गुरु – मूरति की ओर ही देखते रहो।

गुरु मूरति आगे खड़ी, दुतिया भेद कुछ नाहिं।
उन्हीं कूं परनाम करि, सकल तिमिर मिटि जाहिं॥११॥

व्याख्या: गुरु की मूर्ति आगे खड़ी है, उसमें दूसरा भेद कुछ मत मानो। उन्हीं की सेवा बंदगी करो, फिर सब अंधकार मिट जायेगा।

ज्ञान समागम प्रेम सुख, दया भक्ति विश्वास।
गुरु सेवा ते पाइए, सद् गुरु चरण निवास॥१२॥

व्याख्या: ज्ञान, सन्त – समागम, सबके प्रति प्रेम, निर्वासनिक सुख, दया, भक्ति सत्य – स्वरुप और सद् गुरु की शरण में निवास – ये सब गुरु की सेवा से निलते हैं।

सब धरती कागज करूँ, लिखनी सब बनराय।
सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय॥१३॥

व्याख्या: सब पृथ्वी को कागज, सब जंगल को कलम, सातों समुद्रों को स्याही बनाकर लिखने पर भी गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते।

पंडित यदि पढि गुनि मुये, गुरु बिना मिलै न ज्ञान।
ज्ञान बिना नहिं मुक्ति है, सत्त शब्द परमान॥१४॥

व्याख्या: ‍बड़े – बड़े विद्व।न शास्त्रों को पढ – गुनकर ज्ञानी होने का दम भरते हैं, परन्तु गुरु के बिना उन्हें ज्ञान नही मिलता। ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं मिलती।

कहै कबीर तजि भरत को, नन्हा है कर पीव।
तजि अहं गुरु चरण गहु, जमसों बाचै जीव॥१५॥

व्याख्या: कबीर साहेब कहते हैं कि भ्रम को छोडो, छोटा बच्चा बनकर गुरु – वचनरूपी दूध को पियो। इस प्रकार अहंकार त्याग कर गुरु के चरणों की शरण ग्रहण करो, तभी जीव से बचेगा।

सोई सोई नाच नचाइये, जेहि निबहे गुरु प्रेम।
कहै कबीर गुरु प्रेम बिन, कितहुं कुशल नहिं क्षेम॥१६॥

व्याख्या: अपने मन – इन्द्रियों को उसी चाल में चलाओ, जिससे गुरु के प्रति प्रेम बढता जये। कबीर साहिब कहते हैं कि गुरु के प्रेम बिन, कहीं कुशलक्षेम नहीं है।

तबही गुरु प्रिय बैन कहि, शीष बढ़ी चित प्रीत।
ते कहिये गुरु सनमुखां, कबहूँ न दीजै पीठ॥१७॥

व्याख्या: शिष्य के मन में बढ़ी हुई प्रीति देखकर ही गुरु मोक्षोपदेश करते हैं। अतः गुरु के समुख रहो, कभी विमुख मत बनो।

अबुध सुबुध सुत मातु पितु, सबहिं करै प्रतिपाल।
अपनी ओर निबाहिये, सिख सुत गहि निज चाल॥१८॥

व्याख्या: मात – पिता निर्बुधि – बुद्धिमान सभी पुत्रों का प्रतिपाल करते हैं। पुत्र कि भांति ही शिष्य को गुरुदेव अपनी मर्यादा की चाल से मिभाते हैं।

करै दूरी अज्ञानता, अंजन ज्ञान सुदये।
बलिहारी वे गुरु की हँस उबारि जु लेय॥१९॥

व्याख्या: ज्ञान का अंजन लगाकर शिष्य के अज्ञान दोष को दूर कर देते हैं। उन गुरुजनों की प्रशंसा है, जो जीवो को भव से बचा लेते हैं।

साबुन बिचारा क्या करे, गाँठे वाखे मोय।
जल सो अरक्षा परस नहिं, क्यों कर ऊजल होय॥२०॥

व्याख्या: साबुन बेचारा क्या करे,जब उसे गांठ में बांध रखा है। जल से स्पर्श करता ही नहीं फिर कपडा कैसे उज्जवल हो। भाव – ज्ञान की वाणी तो कंठ कर ली, परन्तु विचार नहीं करता, तो मन कैसे शुद्ध हो।

राजा की चोरी करे, रहै रंक की ओट।
कहै कबीर क्यों उबरै, काल कठिन की चोट॥२१॥

व्याख्या: कोई राजा के घर से चोरी करके दरिद्र की शरण लेकर बचना चाहे तो कैसे बचेगा| इसी प्रकार सद् गुरु से मुख छिपाकर, और कल्पित देवी – देवतओं की शरण लेकर कल्पना की कठिन चोट से जीव कैसे बचेगा|

सतगुरु सम कोई नहीं, सात दीप नौ खण्ड।
तीन लोक न पाइये, अरु इकइस ब्रह्मणड॥२२॥

व्याख्या: सात द्वीप, नौ खण्ड, तीन लोक, इक्कीस ब्रह्मणडो में सद् गुरु के समान हितकारी आप किसी को नहीं पायेंगे |

आरबीआई ने जारी किए 200 और 50 रुपये के नए नोट

0

रिजर्व बैंक ने देश में पहली बार 200 के नोट जारी किए हैं। इसके साथ ही 50 रुपये के भी नए नोट जारी किए गए हैं। खास बात यह है कि इन नोटों के लिए दिल्ली में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ऑफिस के सामने लंबी लाइनें लग गई हैं। नए नोट लेने के लिए लोगों में जबर्दस्त उत्साह भी है। रिजर्व बैंक का कहना है कि बड़े नोटों के छुट्टे करवाने में परेशानी होती है इसलिए 200 रुपये का नोट काफी मददगारसाबित होगा। बैंक ने कहा कि 100 और 500 के बीच कोई नोट नहीं था इसलिए लोगों को मुश्किलें उठानी पड़ती थीं।

हालांकि अभी ये नए नोट आपके पास नहीं पहुंचेंगे क्योंकि इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है। इन नोटों का आकार पहले के नोटों से अलग है इस लिहाज से एटीएम की मशीन में नोटों के खांचे को दुरुस्त किया जाएगा। उसके बाद ही ये आम जनमानस तक पहुंच सकेंगे। इस 200 के नोट की कई सारी खासियतें हैं। जैसे दृष्टिबाधित लोगों को नोट पहचानने में आसानी होगी। नोट में अशोक स्तंभ, महात्मा गांधी और H का निशान बाहर की तरफ उभरा हुआ है। नोट के अगले हिस्से में दोनों किनारों पर विशिष्ट निशान भी हैं।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इससे पहले जारी सभी सीरीज के 50 रुपये के पुराने नोट चलते रहेंगे। इसका रंग फ्लोरोसेंट ब्लू है।

पिछले साल 8 नवंबर को सरकार ने नोटबंदी का फैसला कर के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया था। उस वजह से लोगों को लंबी लाइनों में भी लगना पड़ा था। इसके बाद से अब तक आरबीआई कई नए नोट जारी कर चुका है। इसके साथ ही सरकार ने 1 रुपये के नए नोटों की भी दोबारा छपाई शुरू की है। अभी पिछले सप्ताह ही रिजर्व बैंक ने 50 रुपये के नए नोट जारी करने का ऐलान किया था।

इस 50 रुपये के नोट में महात्मा गांधी (न्यू) सीरीज में आ रहे नए नोट के पिछले हिस्से पर हम्पी रथ की आकृति होगी, जो देश की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेगी। नोट पर आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इससे पहले जारी सभी सीरीज के 50 रुपये के पुराने नोट चलते रहेंगे। इसका रंग फ्लोरोसेंट ब्लू है। इसके इलावा रिजर्व बैंक जल्द ही 20 रुपये के नए नोट जारी करेगा। ये नोट महात्मा गांधी सीरीज 2005 के होंगे। इनकी डिजाइन मौजूदा चलन वाले 20 रुपये के नोटों की तरह ही होगी।

 

सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय के कौस्तुभ जयंती समारोह में दिखे संस्कृति और पर्यावरण के रंग

0

सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय ने अपने 75 साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर आयोजित विद्यालय के कौस्तुभ जयंती व पुरस्कार वितरण समारोह में रंगारंग कार्यक्रमों में सांस्कृतिक विविधता, सौहार्द तथा पर्यावरण संरक्षण का सन्देश भी नजर आया। कार्यक्रम में प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विभाग की ओर से नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गयी।

प्राथमिक स्तर पर प्रस्तुत की गयी नृत्य नाटिका में प्रकृति के विविध रंगों को बच्चों ने दर्शाया। इस नृत्य नाटिका की पटकथा को सँवारने में विद्यालय की प्राथमिक विभाग की इन्चार्ज रत्ना पाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं माध्यमिक व उच्च माध्यमिक की छात्राओं ने गंगा नदी की कहानी को नृत्य नाटिका में अभिव्यक्त किया जिसमें गंगा के जन्म, इतिहास के साथ सांस्कृतिक व सामाजिक विविधता में उसका योगदान ही नहीं बल्कि प्रदूषण का बढ़ता खतरा और पर्यावरण संरक्षण का सन्देश भी शामिल था।

गंगा नृत्य नाटिका की पटकथा को सँवारने और भावानुवाद करने के साथ ही मंच सज्जा से जुड़ी बारिकियों को बेहतर बनाने का दायित्व विद्यालय की टीचर इंचार्ज इन्द्रपाल कौर ने सम्भाला। कार्यक्रम की रूपरेखा के साथ ही परिधान के चयन ने प्रस्तुति को शानदार बना दिया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय तथा पार्षद स्मिता बक्सी उपस्थित थीं। कार्यक्रम में विद्यालय के अध्यक्ष तोलाराम जालान, उपाध्यक्ष हेमन्त कुमार जालान तथा सचिव नन्दलाल सिंघानिया समेत विद्यालय की शिक्षिकाएँ तथा पूर्व शिक्षिकाएँ भी उपस्थित थीं।

 

विद्यासागर विवि में मनाई गई त्रिलोचन एवं परसाई की जयंती

0

मिदनापुर : विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से हाल ही में कवि त्रिलोचन शास्त्री और व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जयंती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि त्रिलोचन और परसाई ने अपनी लेखनी से भारतीय समाज को नई दिशा दी है। संजय जायसवाल ने हरिशंकर परसाई और त्रिलोचन शास्त्री को प्रगतिशील बताते हुए कहा कि दोनों ने व्यवस्था के विरुद्ध अपनी रचना को प्रतिरोध का माध्यम बना

 

तस्वीरें ऐसी जिनमें रंगों को छुआ नहीं गया, फिर भी तपन साहा की तस्वीरें बोलती हैं

2

वो तस्वीर ही क्या जिसमें रंग न हो ! अच्छा कभी आपने कल्पना की है कि बगैर रंगों का इस्तेमाल किए भी तस्वीर बन सकती है और वह रंगों से भी भरी हो। यकीन नहीं होता मगर ये मुमकिन है और इसे मुमकिन किया है कोलाज चित्रकार तपन साहा ने।

हुगली में बंडेल के गान्धीनगर से कोलकाता गए। इस कला की बारीकियों को समझा। समझा कि किस तरह अखबारों, सिनेमा के पोस्टरों और पत्रिकाओं की कतरनों से एक तस्वीर जीवंत हो सकती है। तपन की कला से प्रभावित होकर प्रख्यात चित्रकार रामानन्द बंद्योपाध्याय ने उनका उत्साह बढ़ाया।

तब 90 का दशक था और तपन का कलात्मक सफर टेराकोटा के जेवर बनाने से शुरू हुआ। यह आसान नहीं था, मिट्टी को ढोकर लाना, उसे गूँथना, कलात्मक जेवर तैयार करना और फिर उसे बाजार तक पहुँचाना मगर तपन ने हार नहीं मानी।

मेहनत का फल मिला और तपन की कला मशहूर हो चली। 90 के दशक के अंतिम वर्षों में रंगीन कागज, सड़कों पर पड़े फिल्मों के पोस्टर और इन सारे पोस्टरों से बनने लगी खूबसूरत तस्वीरें, खूबसूरत चेहरे….उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, सत्यजीत राय, लता मंगेशकर, सुचित्रा सेन, रामकिंकर बेज, अमर्त्य सेन, से लेकर मनोरम प्राकृतिक दृश्य।

हर बार तपन ने प्रमाणित किया तस्वीरों में रंग का इस्तेमाल नहीं किया गया मगर इन तस्वीरों में बगैर इस्तेमाल किए ही कला के अनूठे रंग थे। हाल में इन तपन ने अपने सँग्रह की 50 तस्वीरों को लेकर एक तीन दिवसीय प्रदर्शनी आयोजित की। प्रदर्शनी का उद्घाटन मनसिज मजूमदार ने किया। प्रधान अतिथि के रूप में प्रसिद्ध चित्रकार वसीम कपूर उपस्थित थे।