Saturday, October 3, 2026
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स्त्री के संघर्ष की गाथा

 डॉ. साधना झा

आहत हुआ

भरी सभा में

याज्ञवल्क्य का अहम् जब

ब्रह्मवादिनी गार्गी के प्रश्नों से !

एक स्त्री से !

सहज नहीं होता पराजित होना कभी ।

फिर ?

बनाए गए नियम

गढ़े गए मिथक

देवी का !

धरती का !

त्यागमयी ममतामयी कल्याणी का ।

और ?

उलझकर रह गई वह

आचार संहिता के शब्द-जाल में !

पहचान खो गई उसकी

संस्कारों के मोह-पाश में !

टूट गए सारे उसके

रंगीन सपने सजे सुनहरे पंख ।

 

फिर ?

शुरू हुई स्त्री की

अंतहीन संघर्ष की गाथा !

                                                             

 

 

महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड मशीन लगाने वाला पहला रेलवे स्टेशन बना भोपाल

महिलाओं को पीरियड्स के वक्त सार्वजनिक जगहों और खासकर सफर करते हुए काफी मुशिकलें उठानी पड़ती हैं। यह समस्या तब और बढ़ जाती है जब सफर रेलवे से हो रहा हो। क्योंकि तब सैनिटरी नैपकिन का जुगाड़ करने में खासी मुश्किल होती है। लेकिन भोपाल रेलवे स्टेशन देश का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन बन गया है जहां पर सैनिटरी पैड डिस्पेंसर मशीन लगाई गई है। महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया। इस मशीन का नाम हैपी नारी रखा गया है। इसे इसी साल नव वर्ष पर 1 जनवरी को इंस्टाल किया गया था। एक अच्छी बात और हुई कि मशीन का उद्घाटन रेलवे अधिकारियों की मौजूदगी में सबसे सीनियर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अंजलि ठाकुर द्वारा कराया गया।

स्टेशन पर लगी इस मशीन से सिर्फ 5 रुपये डालकर दो नैपकिन निकाले जा सकेंगे। स्थानीय संहठन ‘आरुषि’ के प्रयासों से यह मशीन लगाई गई जिसमें एक बार में 75 सैनिटरी नैपकिन डाली जा सकती हैं। इसके लिए एक महिला कर्मचारी को भी ट्रेंड किया गया है जो इसे खाली होने पर दोबारा भरेगी। भोपाल रेलवे स्टेशन पर शीघ्र ही इन नैपकिन को डिस्पोज करने वाली मशीन भी लगाई जाएगी। हैपी नारी मशीन के लगाते ही वहां पर 9 घंटे के भीतर ही वेंडिंग मशीन से 600 से ज्यादा नैपकिन निकाली गईं। इससे साबित होता है कि देशभर के रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक जगहों पर इसकी कितनी जरूरत है।

रेलवे स्टेशन पर लगी इस मशीन से सबसे ज्यादा ट्रेन पर सफर करने वाली महिलाओं और आसपास के स्लम इलाके में रहने वाली महिलाओं ने सैनिटरी नैपकिन निकाला। रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि तीन दिन के भीतर 2,000 सैनिटरी नैपकिन निकाले गए। महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन उनका सही से अमल नहीं हो पाता है। मई 2017 में केरल ऐसा पहला राज्य बना था जिसने सरकारी स्कूलों में सैनिटरी नैपकिन के लिए वेंडिंग मशीन इंस्टॉल की थी।

इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने परिसर में ऐसी ही मशीन लगाने के आदेश दिये थे ताकि महिला वकीलों और फरियादियों को पीरियड्स की वजह से दिक्कतें न उठानी पड़ें। कोर्ट ने इसके लिए 10 लाख रुपये भी स्वीकृत किए थे, जिसमें 3 वेंडिंग मशीन और 3 डिस्पोजिंग मशीनें लगाई गई थीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी 2015 में चार सैनिटरी मशीन डिस्पेंसर्स मशीन लगाई थीं। एक ऐसे देश में जहां आज भी महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैलाई जाती हैं और उस पर बात करने से दूर भागा जाता है वहां ऐसी पहलों का स्वागत तो होना ही चाहिए।

 

फिल्मफेयर से नवाजे गए इरफान खान और विद्या बालन

फिल्मफेयर के 63वें संस्करण के आयोजन के दौरान बॉलीवुड की कई बड़े सितारे नजर आए। इरफान खान को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और विद्या बालन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।

मुंबई में 20 जनवरी की रात को जियो फिल्मफेयर के 63वें संस्करण का रंगारंग आयोजन किया गया। बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां इस दौरान नजर आईं। इरफान खान को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और विद्या बालन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर अवार्ड मिला। क्रिटिक कैटेगरी में बेस्ट एक्टर राजकुमार राव और बेस्ट एक्ट्रेस जायरा वसीम बनीं। फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ को बेस्ट फिल्म (पॉपुलर) और ‘न्यूटन’ को बेस्ट फिल्म (क्रिटिक) का अवार्ड दिया गया।

फिल्मफेयर अवार्ड 2017 की पूरी लिस्ट

  • बेस्ट ऐक्टर (पॉपुलर) का फिल्मफेयर अवॉर्ड फिल्म ‘हिन्दी मीडियम’ के लिए अभिनेता इरफान खान को दिया गया।
  • फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ के लिए विद्या बालन को बेस्ट एक्ट्रेस (पॉपुलर) का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।
  • राजकुमार राव को बेस्ट एक्टर (क्रिटिक) का फिल्मफेयर अवार्ड फिलम ‘ट्रैप्ड’ के लिए मिला।
  • बेस्ट एक्ट्रेस (क्रिटिक) का फिल्मेयर अवार्ड सिक्रेट सुपरस्टार के लिए जायरा वसीम ने जीता है।
  • फिल्म‘ हिंदी मीडियम’ ने जीता 2018 की बेस्ट फिल्म (पॉपुलर) का फिल्मफेयर अवार्ड।
  • फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ के लिए अश्विनी अय्यर तिवारी ने बेस्ट डायरेक्टर (पॉपुलर) का फिल्म फेयर अवार्ड जीता है।
  • फिल्म ‘न्यूटन’ को बेस्ट क्रिटिक फिल्म का फिल्मफेयर अवार्ड मिला है।
  • बप्पी लहरी को फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला है।
  • बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का अवार्ड ‘द डेथ इन द गंज’ की कोंकणा सेन शर्मा को मिला।
  • राजकुमार राव को फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ के लिए बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल (मेल) का फिल्मफेयर अवार्ड मिला है।
  • मेहर विज को फिल्म ‘सिक्रेट सुपरस्टार’ फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल (फीमेल) का फिल्मफेयर अवार्ड मिला है।
  • बेस्ट डायलॉग का फिल्मफेयर अवार्ड फिल्म ‘शुभ मंगल सावधान के लिए हितेश कैवल्य ने जीता है।
  • बेस्ट स्क्रीप्ले का फिल्मफेयर अवार्ड शुभाषीस भूटियानी ने जीता है। उन्होंने मुक्ति भवन की स्क्रिप्ट लिखी है।
  • बेस्ट ओरिजिनल स्टोरी का फिल्मफेयर अवार्ड अमित वी मासुरकर को जाता है। उन्होंने फिल्म ‘न्यूटन’ की कहानी लिखी है।
  • बेस्ट म्यूजिक एल्बम का फिल्मफेयर अवार्ड प्रीतम को जग्गा जासूस के लिए मिला है।
  • अरिजीत सिंह को बेस्ट प्लैबैक सिंगर (मेल) का अवार्ड। उन्हें बदरीनाथ की दुल्हनिया फिल्म के ‘रोके ना रुके नैना’ गाने के लिए यह अवार्ड मिला।
  • फिल्मफेयर बेस्ट प्लेबैक सिंगर (फीमेल) का अवार्ड जीता है मेघना मिश्रा ने। यह अवार्ड उन्हें फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के ‘नच दी फिरा’ गाने के लिए दिया गया।
  • फिल्मफेयर बेस्ट लिरिक्स का अवार्ड अमिताभ भट्टाचार्य को फिल्म ‘जग्गा जासूस’ के लिए मिला।
  • बेस्ट एक्शन का अवार्ड फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ फिल्म के लिए टॉम स्ट्रदर को मिला है।
  • बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर का अवार्ड प्रीतम को फिल्म ‘जग्गा जासूस’ के लिए मिला है।
  • बेस्ट कोरियोग्राफी का अवार्ड विजय गांगुली और रुएल को फिल्म ‘जग्गा जासूस’ के गाने गल्ती से मिस्टेक के लिए मिला है।

फिल्मफेयर अवार्ड मिलने के बाद कई अभिनेताओं, अभिनेत्रियों और अन्य कलाकारों ने ट्वीट अपनी खुशी जताई।

आज भी प्रेरक और प्रासंगिक हैं नेताजी के ये विचार

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्‍म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा (तब के उड़ीसा) के कटक में हुआ था। महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से सुभाष चंद्र बोस सहमत नहीं थे। ‘नेताजी’ के नाम से मशहूर सुभाष चंद्र बोस ने भारत को आजादी दिलाने के मकसद से 21 अक्टूबर 1943 को ‘आजाद हिंद सरकार’ की स्थापना की और ‘आजाद हिंद फ़ौज’ का गठन किया। नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुंचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ दिया। सुभाष चंद्र बोस के विचार बहुत क्रांतिकारी थे और उनकी बातें आज भी किसी के भी तन-मन में जोश भर सकती हैं. उनके जन्‍मदिवस के मौके पर हम आपको उनके ऐसे ही 10 विचारों के बारे में बता रहे हैं –

1. तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा।

2. याद रखिए सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है।

3. ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिले, हमारे अंदर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।

4. एक सैनिक के रूप में आपको हमेशा तीन आदर्शों को संजोना और उन पर जीना होगा: सच्चाई, कर्तव्य और बलिदान। जो सिपाही हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहता है, जो हमेशा अपना जीवन बलिदान करने को तैयार रहता है, वो अजेय है। अगर तुम भी अजेय बनना चाहते हो तो इन तीन आदर्शों को अपने ह्रदय में समाहित कर लो।

5. सफलता, हमेशा असफलता के स्‍तंभ पर खड़ी होती है।

6. मेरा अनुभव है कि हमेशा आशा की कोई न कोई किरण आती है जो हमें जीवन से दूर भटकने नहीं देती।

7. जिस व्यक्ति के अंदर ‘सनक’ नहीं होती वो कभी महान नहीं बन सकता लेकिन उसके अंदर, इसके अलावा भी कुछ और होना चाहिए।

8. जो अपनी ताकत पर भरोसा करते हैं, वो आगे बढ़ते हैं और उधार की ताकत वाले घायल हो जाते हैं।

9. हमारा सफर कितना ही भयानक, कष्टदायी और बदतर हो, लेकिन हमें आगे बढ़ते रहना ही है. सफलता का दिन दूर हो सकता हैं, लेकिन उसका आना अनिवार्य ही है।

10. मां का प्यार सबसे गहरा होता है- स्वार्थरहित. इसको किसी भी तरह से मापा नहीं जा सकता।

तुझे पाना चाहता हूँ- फिर से

 अरुण भारद्वाज

देखता हूँ या सोचता हूँ, बैठता हूँ या जागता हूँ।

तेरी सूरत सामने आ जाती है,तेरी मूरत सामने आ जाती है।।

आज साल भर बाद तुम्हारी रेसिपी से बने नमक को देखकर……हाँ उस स्पेशल नमक को देखकर,जिसे तुम 2-3 मसाले मिलाकर बनाती थी। तुझे पाना चाहता हूँ – फिर से।

कितने दिनों बाद तुम्हारी गुम हुई पेनड्राइव अचानक सामने आ गई और उसी के साथ तेरी हर याद सामने आ गई। उसकी हल्की मीठी आवाज मेरे कानों मे गूँजी- देखो ‘ARRY’ वाले फ़ोल्डर में सिर्फ़ तुम्हारी और मेरी फोटो है, सम्भाल कर रखना, घर जा रहे हो फ़ोल्डर हिडेन कर देती हूँ, याद आए तो फोटो देख लेना।

चाय की 4 बजे वाली हिचकी भी तो गवाह है कि तुमने मुझे याद किया होगा।

देखो लिव इन को डेढ़ साल हो गए, डिसीजन  तो लेना ही पङेगा ना, उसने चाय में वो हल्का सा स्वादिष्ट नमक डालकर एक टक ताकते हुए कहा। जवाब देने से बचने के लिए मैं उठकर अपनी चाय के कप के साथ बालकनी में तुम्हारी पसन्द वाली आरामकुर्सी पर बैठ गया। वो भी मेरे बाजू मे रखे टेबल पर आकर बैठ गई और उसने मेरी आँखों में आँखें डालकर अपनी भवें सिकोड़ी। अब तो मुझे बोलना ही पङा- पीहू ! तुम फिर से सीरियस हो रही हो, तुम्हारी मेरी जो बात हुई थी “भूलो मत”।  उसके तुरन्त जवाब से मैं झनाझना गया था ।

देखो जो तुमने कहा था वो मुझे याद है और रिश्ते ऐसे कॉन्ट्रैक्ट पर नही चलते। किसी दिन छोड़कर चली गई न तो कभी वापस नहीं आऊँगी।

लेकिन मै तुम्हें वापस पाना चाहता हूँ – फिर से।

तेरे बिना अब कुछ अच्छा नही, तू नहीं तो मैं कुछ भी नही।

मेरी सांसें तेरा पीछा करती है, दिल की हर धङकन में तू धङकती है।।

तू मेरे पास नहीं है तो लगता है पास कहीं तू रहती है।

आज फिर तुम्हें पाने की ख्वाहिश दिल में जाग रही है।

न चाहते हुए भी ‘ARRY’ वाला फ़ोल्डर भी खुल ही गया और तेरी याद की एक और तह खुल गई। जो तुमने अपनी जुल्फ़ों से आधा मुँह छिपाकर ठुड्डी वाले तिल का फोटो भेजा था न वही मेरी आँखो के सामने था।

“अरे यार पीहू तुम इंटर्नशिप  के टाइम कितनी मोटी थी।”

अरे….देखो मैं मोटी कभी नहीं थी। उसने चुलबुले अन्दाज में गुस्सा दिखाकर फिर कहा और तुम्हारे कहने से मै मोटी नही हो जाऊँगी। उस टाइम थोड़ी हेल्दी थी बस।

अब जब खोजने चला तो हर जगह तेरी याद थी,रसोई में,कमरे में, बेड पर, तकिये मे……… हाँ ये वही तकिया था जिसे तुम हटाकर मेरा हाथ अपने सिर के नीचे रख लेती थी और कहती थी मुझे ऐसे ही नींद आएगी। वैसे तुम्हें तो बिना मुझसे चिपके नींद नही आती थी फिर तुम मुझसे दूर कैसे चली गयी।

यार पीहू…अंडा नही खाया जाता मुझसे, मै अपने ट्रेनर को बोल दूँगा… बिना अंडे वाली डाइट बता दो। तुम्हारे उसी जादुई नमक ने मेरी डाईट में अंडा भी मिला दिया।

मुझे पता है तुम वो स्पेशल नमक बनाने फिर से नहीं आओगी,

लेकिन मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ – फिर से।

शायद तुम अपनी जिन्दगी में खुश हो, और थोड़े दिनों मे तुम्हारी किसी शुक्ला,तिवारी,शर्मा या झा से शादी हो जाएगी लेकिन क्या तुम्हें मेरी याद नही सताएगी। कितना इजी  था ना “दिल पर पत्थर रखकर” गाना बजाया और ब्रेकअप कर लिया, 2 दिन का डिप्रेशन  और सबकुछ खत्म।

लेकिन यार पीहू तेरी गोद मे सिर रखकर सोना चाहता हूँ- फिर से।

तुझे पाना चाहता हूँ- फिर से।

बसन्त की खूबसूरती बढ़ा देता है पीला रंग

हिन्दू धर्म में पीले रंग को शुभ माना गया है। पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है। यह सादगी और निर्मलता को भी दर्शाता है। वसंत पंचमी के पर्व पर वैसे भी चटख पीला रंग उत्साह और विवेक का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ सफेद रंग से जुड़ी शांति भी शामिल हो जाती है। वसंत का अर्थ है वसंत और पंचमी का मतलब है पांचवा जिस दिन यह त्योहार मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व हर साल माघ महीने के पांचवे दिन होता है।कई समुदायों के बीच बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन को बच्चों के पढ़ने और लिखने की शुरूआत के रूप में बेहद ही शुभ माना जाता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा कर प्रार्थना की जाती है। यह त्योहार वसंत ऋतु आने का सूचक है। इस मौके पर लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और स्वादिष्ट मौसमी व्यंजनों का मजा लेते हैं। कई लोग इस पर्व के अवसर पर पतंग उड़ाते है या अन्य खेल खेलते हैं। इस त्योहार पर पीले रंग का बहुत महत्व है, बसंत का रंग पीला होता है जिसे बसंती रंग के नाम से जाना जाता है। जोकि समृद्धि, ऊर्जा, प्रकाश और आशावाद का प्रतीक है. यही कारण है कि लोग इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और पीले रंग के व्यंजन बनाते हैं।

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व है। दरअसल, बसंत ऋतु में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नजर आती है। इसे ध्यान में रखकर इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनकर वसंत पंचमी का स्वागत करते हैं। इस द‍िन सूर्य उत्तरायण होता है, जो यह संदेश देता है कि हमें सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए।

सभी ऋतुओं में बसंत ही ऐसी ऋतु है जिसमें सभी ऋतुओं की अपेक्षा धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इस दौरान फसल पकती है। पेड़-पौधों में नई कोपलें फूटती हैं। वसंत को ऋतुओं का राजा कहा गया है। वसंत पंचमी यानी प्रकृति के उत्सव का दिन। मां सरस्वती की आराधना का यह पर्व मंद-शीतल वायु के प्रवाह, प्रकृति की पीली चुनरी के साथ नए उत्साह के संचार का संदेश लाता है। बसंत पंचमी के दिन सिर्फ कपड़े ही नहीं बल्कि खाने में भी पीले रंग की चीजें बनायी जाती हैं। इसमें पीले रंग के चावल, पीली पूरियां, पीले लड्डू और केसर की खीर शामिल है। एक शोध के अनुसार, पीले रंग के कपड़े पहने से दिमाग का सोचने समझने वाला हिस्सा अधिक सक्रिय हो जाता है जो इंसान के अंदर उर्जा पैदा करता है। पीला रंग इंसान को खुशी और उमंग प्रदान करता है।

 

परिवार और समाज के खिलाफ जाकर कराई विधवा मां की शादी

समय बदल रहा है और इस बात तस्दीक करती है यह घटना। जयपुर की एक लड़की जिसने परिवार और समाज के खिलाफ जाकर अपने विधवा मां की शादी करवाई।

संहिता अग्रवाल जयपुर की रहने वाली हैं। साल 2016 में इनके पिता मुकेश गुप्ता की दिल का दौरा पड़ने के कारण मृत्यु हो गई थी। इनकी मां गीता पेशे से एक अध्यापिका हैं। पति की मौत के बाद गीता का जीवन काफी खाली हो गया था। वे अकेली रहने लगी थीं और डिप्रेशन का शिकार हो गईं थी।

स्थिति और चिंताजनक हो गई जब बेटी संहिता को काम के सिलसिले में गुड़गांव शिफ्ट होना पड़ा। संहिता बताती हैं, ‘मुझे मां को वहां अकेला छोड़ना काफी बुरा लगता था। मैं वीकेंड्स में उनके पास चली जाती थी लेकिन मुझे लगने लगा था कि मेरा घर छोड़ने का फैसला स्वार्थपूर्ण था।’ संहिता ने अगस्त 2017 से अपनी 53 वर्षीय मां के लिए पार्टनर खोजना शुरू कर दिया था।

संहिता आगे कहती हैं, ‘हर किसी को एक साथी की तलाश होती है। मैंने अपनी मां के नाम की प्रोफाइल एक मैट्रीमोनियल वेबसाइट पर बनाई। मां को मैंने सितंबर में इस बारे में बताया। वे थोड़ी घबरा गईं। घर वालों का रिएक्शन भी अजीब था।’

अक्टूबर में पेशे से रेवेन्यू इंस्पेक्टर केजी गुप्ता ने वेबसाइट पर दिए संहिता के नंबर पर कॉल किया और गीता के शादी करने की इच्छा जताई। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी की मृत्यु कैंसर के कारण 2010 में हो गई थी और वे दो बच्चों के पिता हैं।

पहले तो गीता ने शादी से इंकार कर दिया लेकिन नवंबर में डॉक्टर्स ने गीता को हिस्टरेक्टमी के सर्जरी का सुझाव दिया। इसमें गर्भाशय को शरीर से बाहर निकाला जाता है. गीता की सर्जरी के दौरान तीन दिनों तक केजी गुप्ता मौजूद रहे और गीता का हर तरह से ख्याल रखने की कोशिश की। उनके इस कदम से गीता ने दोबारा शादी करने का विचार किया.

संहिता बताती हैं कि फैसला इतना आसान नहीं था. 2017 दिसम्बर में गीता ने दोबारा शादी कर ली। लोगों ने दबी जुबान में इसका विरोध किया लेकिन संहिता दोबारा से अपनी मां को खुश देखना चाहती थीं। उनके इस कदम की खूब प्रशंसा हो रही है।

 

कहानियों को सब तक पहुँचाने की कोशिश है…..सुनो कहानी

अनिमेष जोशी

फेसबुक, सरीखा माध्यम बहुत बड़ा वर्चुअल अड्डा है…! जहां हम सब भांति – भांति के अनुभवों से दो – चार होते है। ये माध्यम किसी भी तरह की सूचनाओं को बड़े फलक तक ले जाने का एक महत्वपूर्ण टूल भी है। इस माध्यम ने बहुत से लोगों से जुड़ने का मौका दिया। जो इस माध्यम का खूबसूरत पहलू है…इला से नबम्बर २०१६ के आस-पास जुड़ना हुआ। फिर हम गाहे-बगाहे कहानियों पर खूब बातें करने लगे…जहाँ मुझे ज्ञात हुआ कि इला ने समकालीन कहानियाँ कम पढ़ी है…लेकिन समकालीन को जानने व समझने की रूचि उनमेँ लगीं.और मैंने उन्हें कुछ कहानियाँ पढ़ने के लिए भेजी। ये सिलसिला कुछ महीनों तक चलता रहा…इसी सिलसिले के आधार पर हमें समकालीन हिन्दी कहानियों को केंद्र में रखकर कुछ करने का विचार आया। एक बहुत बड़ा वर्ग हैं जो आज नेट इस्तेमाल करता है…और उस वर्ग को साहित्य से जोड़ने के लिए आज साउंड क्लाउड और यू ट्यूब सबसे उपयोगी टूल हैं। हमने सोचा कि कहानियों को रिकॉर्ड कर यू ट्यूब पर डाला जाए…इस तरह के उपक्रम की शुरुआत हम लोगों ने ‘कथा कथन’ नामक यू ट्यूब चैनल पर कुछ कहानियाँ डाल कर की, जो भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने का एक मंच हैं लेकिन, कुछ समय बाद हमें लगा कि एक चैनल क्यों न ऐसा शुरू किया जाए जिसका फोकस हिंदी कहानियों पर ही  हो…। उसी आइडिया का नाम -“सुनो कहानी” है… जहाँ समकालीन लेखकों के साथ स्थापित लेखकों की भी कहानियाँ आप सुन सकेंगे… हर शुक्रवार आप एक नई कहानी से रूबरू होंगे। इस मुहिम में उन लेखकों की भी कहानियां समय-समय पर सुनाई जाएगी जो शायद कहीं छपे नहीं हो! हर उपक्रम को पूरा करने के लिए एक टीम की भी जरूरत रहती है, तो ‘सुनो कहानी’ की छोटी सी टीम इस प्रकार हैं-
इला जोशी
अनिमेष जोशी
मयंक सक्सेना
अनुज श्रीवास्तव
आलोक कुमार
अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक पर जाए-
https://www.youtube.com/channel/UCW_xd1Eyin-kqVeAbLBe2kA

दो पूर्व छात्राओं ने अपने स्कूल की हजारों छात्राओं को मिलवा दिया

माधवी श्री

सुबह अगर आँख खुले और दो दशक से ज्यादा हो चुके अपने स्कूल के दिनों की सहपाहियों को आप धड़ा – धड़ एक के बाद एक आप मिलने लगे तो दो चीजों का आप तहे दिल से शुक्रिया अदा करेगे – एक फेसबुक जो मीलों दूर बैठे आपको आपके अपनों से मिलवाता है और उनका जिन्होंने  इस स्कूल  रीयूनियन यानी पुनर्मिलन का सफल आयोजन किया।

आज फेसबुक के इस युग में जहाँ लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे है वही कई सकारात्मक लोग इसका इस्तेमाल  हज़ारों दिलों को जोड़ने के लिए भी  कर रहे है।  ऐसा ही कुछ नाम बालिका शिक्षा सदन की कुछ पूर्व छात्राओं ने किया।  अपने देश से दूर सिंगापुर में बैठी अनु चोमल शर्मा ने एक फेसबुक पेज के माध्यम से अपने स्कूल की पूर्व छात्राओं को जोड़ने की कोशिश की।  वही कोलकाता में ज्योति केडिया भी यही काम  दूसरे फेसबुक पेज के माध्यम से कर रही थी।  बाद में दोनों लड़कियों ने फैसला किया कि वे इसे एक पेज में बदल देगी और इसी एक पेज के माध्यम से सभी बालिका शिक्षा सदन की पूर्व छात्राओं को जोड़ेगी।

दो लोगो से शुरू हुई यह यात्रा 30  दिसंबर 2017 को 550 लड़कियों के रीयूनियन में बदल गयी ।  फेसबुक पेज के माध्यम से कुछ ही दिनों में  रीयूनियन फेसबुक पेज की सदस्यता” रीयूनियन” के बाद 1500 से बढ़ कर से 2500 के लगभग पहुँच गयी। करीब डेढ़ – दो साल के कठिन परिश्रम और 15 -25 पूर्व छात्राओं की  व्यवस्थापक की  भूमिका के कारण और स्कूल की प्रधानाध्यापिका श्रीमती शर्मिष्ठा चटर्जी के दिशानिर्देश में पूरे कार्यक्रम को मूर्त रूप दिया गया।  मुख्य भूमिका अनु चोमल , ज्योति केडिया ,श्वेता केडिया , ज्योति नाहटा , वृजबाला खेतान , कविता भानुका ,सरिता अग्रवाल , पूजा  जायसवाल , शालिनी झंवर , पूनम साव और दिव्या तिवारी ने निभाई कार्यक्रम के आयोजन में ।  इस रीयूनियन में 1968 से की  पूर्व छात्राओं ने शिरकत की वही कई पुरानी स्कूल की शिक्षिकाओं को खोज – खोज कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर  पूर्व छात्राओं ने रंगा -रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये।

1948 में इस स्कूल का निर्माण कोलकाता में  गिरधारी लाल मेहता , राधा किशन कानोड़िया , रघुनाथ प्रसाद खेतान , डी पी काजरिया , आई सी केजरीवाल और बैजनाथ तापड़िया ने करवाया था।  इस बालिका विद्यालय ने उत्तर कोलकाता में कई लड़कियों के जीवन में महत्वपूर्ण दिशा देने का काम किया है ।

आगे भी इस रीयूनियन को हर वर्ष आयोजित किये जाने  का संकल्प है।  इस रीयूनियन के माध्यम से स्कूल के रखरखाव और उसके तरक्की के लिए भी प्रयास किये जाने की योजना है।  फिलहाल देश – विदेश में फ़ैल चुकी इस स्कूल की छात्राये इस रीयूनियन से काफी खुश है और आनेवाले समय में अपना – अपना योगदान देने की योजना बना रही है।

(लेखिका स्कूल की पूर्व छात्रा और फिलहाल दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार हैं)

 

 

 

 

 

 

 

मैत्रेयी पुष्पा को मिलेगा भारतीय भाषा परिषद का कृतित्व समग्र पुरस्कार

 

भारतीय भाषा परिषद की कार्यसमिति ने 4 भारतीय भाषाओं के वरिष्ठ साहित्यकारों को एक-एक लाख रुपए का कृतित्व समग्र सम्मान और इक्कीस-इक्कीस हजार रुपये का युवा पुरस्कार देने का सर्वसम्मति से निर्णय ले लिया  है। हिन्दी में कृतित्व समग्र सम्मान इस बार वरिष्ठ लेखिका मैत्रेयी पुष्पा को प्रदान किये जायेंगे ये पुरस्कार विद्वानों को 10 मार्च परिषद के सभागार में प्रदान किए जाएंगे। कृतित्व समग्र सम्मान और युवा पुरस्कार प्रति वर्ष बारी-बारी से 4 भारतीय भाषाओं को दिए जाते हैं। यह घोषणा की जा रही है कि इस बार ये पुरस्कार हिंदी, तमिल, गुजराती और उड़िया भाषाओं के  निम्नलिखित साहित्यकारों को प्रदान किए जाएंगे –

कृतित्व समग्र सम्मान –  (एक-एक लाख रुपए का)

  1. (हिंदी) श्री मैत्रेयी पुष्पा
  2. (तमिल) श्री मालव व्ही. नारायणन
  3. (गुजराती) श्री सीतांशु यश्शचंद्र
  4. (ओड़िया) श्रीमती ममता दाश

युवा पुरस्कार (इक्कीस-इक्कीस हजार रुपए का)

  1. (हिंदी) श्री अनुज लुगुन
  2. (तमिल) श्री हरिकृष्णन
  3. (गुजराती) श्री राम मोरी
  4. (ओड़िया) श्री रंजन प्रधान

पुरस्कृत लेखकों को नगद राशि के अलावा अंगवस्त्र, स्मृति फलक आदि देकर पूरी गरिमा से सम्मानित किया जाता है। सम्मान समारोह के अवसर पर ‘भारतीय भाषाएँ – सांस्कृतिक संवाद की परंपरा’ विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी 10-11 मार्च को आयोजित है जिसमें देश के कई विद्वान भाग लेंगे।

भारतीय भाषा परिषद भारतीय भाषाओं और साहित्य के विकास और प्रोत्साहन के लिए कार्य कर रही देश की प्रतिनिधि सांस्कृतिक संस्था है। इसकी स्थापना 1974 में हुई थी। 1980 में कृतित्व समग्र सम्मान की शुरुआत हुई। इसके बाद 2007 से युवा पुरस्कार भी शुरू कर दिया गया। हिंदी, तमिल, संस्कृत, बांग्ला, मराठी, पंजाबी, राजस्थानी आदि विभिन्न भारतीय भाषाओं में अब तक सौ से अधिक वरिष्ठ और युवा साहित्यकार पुरस्कृत किए जा चुके हैं। यह कार्य भारतीय भाषाओं के बीच सद्भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रेरित है।