Saturday, October 3, 2026
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गणतंत्र दिवस का आनन्द तिरंगे स्वाद के साथ

तिरंगा ढोकला

सामग्री  : 1 कप सूजी, 1 कप दही , 1 चम्मच अदरक पेस्ट, 2 चम्मच तेल, नमक स्वादानुसार, 1 चम्मच ईनो, आवश्यकतानुसार पानी, 1 कप पालक प्यूरी, छोटा चम्मच खाने वाला नारंगी रंग, 2-3 हरी मिर्च, 1/2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर , 1 चम्मच सरसों के दाने, कुछ करी पत्ते, 2 चम्मच चीनी, 1 नींबू का रस

विधि : सबसे पहले सूजी, दही, नमक, अदरक का पेस्ट और पानी मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें। इस घोल को आधे घंटे के लिए छोड़ दें। अब इस घोल को 3 अलग-अलग बाउल में डालें। पहले बाउल के घोल में पालक प्यूरी, हरा धनिया और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर मिक्स कर लें। दूसरे बाउल में नारंगी रंग और लाल मिर्च डालकर मिक्स करें और तीसरे घोल को सफेद ही रहने दें।  अब ढोकला पैन को तेल से ग्रीज कर लें। पहला बैटर पैन में डालकर स्टीमर में पकाएं। जब ढोकला तैयार हो जाए तो इसे एक प्लेट में निकाल लें।  इसी तरह बाकी दोनों घोल को भी अलग-अलग बेक कर लें। इन्हें निकाल कर तिरंगे के रंग की तरह एक के ऊपर एक रखें। तड़के के लिए एक पैन में तेल डालें। जब वह गर्म हो जाएं, तो उसमें सरसों के दाने, कड़ी पत्ते और लंबे आकार में कटी हुई हरी मिर्च डालकर 1 मिनट तक भूनें। अब इसमें थोड़ा नमक, चीनी और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिक्स करें। इसमें पानी डालकर एक उबाल आने दें। फिर गैस बंद कर दें। तैयार तड़के को ढोकले पर अच्छी तरह डालें और स्लाइस में काट लें। आपका तिरंगा ढोकला तैयार है।

तिरंगा सैंडविच


सामग्री  : एक पैकेट सैंडविच की ब्रेड, 250 ग्राम बेसन, 2 उबले हुए आलू,2 प्याज, 1/2 कप कटा हुआ धनिया, 2 कटी मिर्च, आधा चम्मच अजवाइन, आधा चम्मच हल्दी, आधा चम्मच  सौंफ, आधा चम्मच राई, आधा चम्मच लालमिर्च, आधा चम्मच जीरा,  1 कटोरी टमाटर सॉस ,नमक स्वादानुसार

चटनी के लिए : हरा धनिया, पुदीना, अदरक, हरी मिर्च, नींबू, नमक, शक्कर, भुना जीरा।

विधि : पहले बेसन में हरा धनिया, मिर्च, सौंफ, हल्दी, अजवाइन और नमक डालकर घोल बना लें। अब उबले आलू में बारीक प्याज, नमक, हरी मिर्च और जीरा मिलाकर गूंथ लें। अब हरी चटनी की सामग्री मिलाकर मिक्सी में पीस लें। एक प्लेट पर ब्रेड रखें। उस पर हरी चटनी लगाएं। उस पर दूसरी ब्रेड रखकर आलू का मिक्सचर फैलाएं।  उस पर तीसरी ब्रेड रखकर टमाटर सॉस लगाएं और चौथी ब्रेड से ढंक दें। अब आराम से इसे बेसन के घोल में लपेटें। गर्म तेल में डालें। ब्राउन होने तक तलें।  अब इसे चार भाग में सैंडविच की तरह काट लें। लाजवाब तिरंगा ब्रेड सैंडविच को चटनी के साथ सर्व करें।

69वां गणतंत्र दिवस : ‘महिला शक्ति’ ने भारत को किया गौरवान्वित

नयी दिल्ली : आज देश अपना 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर भारत ने राजपथ पर अपनी सांस्कृतिक धरोहर एवं विविधताओं के साथ सैन्‍य और स्‍त्री शक्ति का ऐसा अद्भुत प्रदर्शन किया, जिसे देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा उठ गया होगा। इस मौके पर भारतीय इतिहास में पहली बार आसियान के दस देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक साथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और इस वजह से पहली बार परेड की शुरुआत आसियान देशों के राष्ट्रीय ध्वजों के साथ हुई।

पीएम मोदी ने सभी आसियान राष्‍ट्राध्‍यक्षों का स्‍वागत किया और राष्‍ट्रपति कोविंद रामनाथ की मौजूदगी में राष्‍ट्रध्‍वज फहराने के साथ ही पूरा राजपथ जन गण मन से गूंज उठा। परेड में पहली बार बीएसएफ की 30 महिला जवानों ने पांच मोटरसाइकिलों पर सवार 30 महिला जवानों ने अपने हैरतअंगेज करतब से देश को गौरवान्वित होने का मौका दिया। भारत की स्‍त्री शक्ति का इससे बेमिसाल प्रदर्शन और नहीं हो सकता। महिला जवानों की मोटरसाइकिल पर कलाबाजियां देख समारोह में मौजूद राष्‍ट्रपति समेत सभी गणमान्‍य जनों के चेहरे प्रफुल्लित हो उठे। महिला शक्ति के बाद राजपथ पर सभी की नजरें आसमान पर टिक गईं। वायुसेना के कई लड़ाकू विमानों ने आसमान में अपनी ताकत दिखाई। इनमें सुखोई, MK 4, सुपर हरक्यूलिस, ग्लोबमास्टर, सुखोई, जगुआर शामिल रहे।

 

गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि रहे ये 10 नेता, जानें आसियान देशों से भारत के संबंध

देश इस बार 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और इस बार खास वजह यह है कि आसियान देशों के नेता बतौर मुख्य अतिथि जश्न का हिस्सा बने। 10 देशों के नेताओं के भारत आने से इंडियन-आसियान समिट को मजबूती मिलेगी। आसियान देशों से भारत के हैं ये संबंध…

ब्रुनई

ब्रुनेई के साथ भारत के 1984 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। 2016 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ब्रुनेई यात्रा पर गए थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। ब्रुनेई से भारत द्वारा जिन वस्तुओं का आयात किया जाता है, उनमें मुख्य रूप से हर साल लगभग 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का कच्चा तेल है।

म्यांमार
मनमोहन सरकार के दौरान भारत-म्यांमार के बीच संबंध अधिक मजबूत हुए। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग योजना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण घटक के रूप में उभर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल म्यांमार की यात्रा की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए।

कंबोडिया
भारत-कंबोडिया के बीच संबंध प्राचीन हैं। दोनों देशों के बीच हाईड्रोग्राफ नेटवर्क स्टेशन स्थापित करने के लिए कामपोंग स्पियु में भूजल संसाधनों के अध्ययन पर समझौता जारी है। इसके अलावा कंबोडिया में सिएमरीप नदी बेसिन के लिए मास्टर प्लान बनाने पर भी समझौता हुआ था। भारत वहां राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति सुधारने को नई दिल्ली में कार्यशाला का आयोजन करता रहा है।

इंडोनेशिया
2016 में दोनों देशों के संबंधों ने नया मोड़ लिया। मोदी के आमंत्रण पर 2016 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति नई दिल्ली पहुंचे। दोनों नेताओं ने भारत और इंडोनेशिया के प्रसिद्ध जनों के समहू (ईपीजी) के द्वारा दृष्टि दस्तावेज-2025 सौंपे जाने के कदम का स्वागत किया। दस्तावेज में 2025 और उससे आगे के लिए द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर रूपरेखा की सिफारिश की गई है। दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष अन्वेषण समेत कई मुद्दों पर हस्ताक्षर हुए थे।

लाओस
दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध 1956 में स्थापित हुए थे। भारतीय सेना ने 2011, 2012 और 2013 में लाओस में यूएक्सओ व बारूदी सुरंग हटाने पर तीन प्रशिक्षण कैप्सूल का भी आयोजन किया था। दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक, रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग पर कई करार हैं। भारत लाओस को समय-समय पर आर्थिक मदद भी देता रहा है।

मलेशिया
पिछले साल मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक भारत पहुंचे थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच सात समझौते हुए। इसमें रेलवे नेटवर्क, भारतीयों के लिए वीजा नियमों में छूट, भारतीय टूरिस्ट वीजा समेत कई प्रमुख मुद्दों पर समझौता हुआ। डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मलयेशिया के सहयोग को भी कागजी रूप दिया गया था।

फिलीपींस
दोनों देशों के संबंध पिछले साल तब और मजबूत हुए जब बीते 36 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने फिलीपींस की यात्रा है। मोदी से पहले पहले 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आसियान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने फिलीपींस गईं थीं। मोदी भी आसियान शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लेने फिलीपींस पहुंचे थे। पिछले साल ही जुलाई में इंटरनेशनल राइस इंस्टिट्यूट को अपना साउथ एशियन रिजनल सेंटर वाराणसी में लगाने को मंजूरी दी गई थी।

सिंगापुर
सिंगापुर काफी समय से हिंद महासागर में भारत की भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर बल देता रहा है। 2005 में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत करोड़ों डॉलर का व्यापार दोनों देशों के बीच हर साल हो रहा है। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच दक्षिणी चीन सागर में पिछले साल समुद्री अभ्यास भी हुआ था। जिस पर चीन ने नाराजगी जताई थी।

थाईलैंड
भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग योजना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण घटक के रूप में उभर सकता है। 2016 में दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था, आतंकवाद से निबटने, साइबर सुरक्षा और मानव तस्करी से निबटने को सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया था। साथ ही रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में नजदीकी संबंध कायम करने की हामी भरी थी।

वियतनाम
वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन टैन डंग ने 2014 में भारत यात्रा की थी। वियतनाम भारत से आकाश मिसाइल खरीदने पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह सौदा जल्द हो सकता है। जिस पर चीन कई बार आपत्ति जता चुका है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच दक्षिण चीन सागर में तेल निकालने को लेकर भी समझौते हो सकते हैं।

 

तीन रंगों की सदाबहार छटा मगर अन्दाज कुछ अलग

गणतंत्र दिवस हमारा गौरव है…हमारे लोकतंत्र की उपलब्धि का दिन है। ऐसे दिन पर तिरंगे को  न सिर्फ हम सम्मान देते हैं बल्कि हमारा मन झूम उठता है और हम रंग उठते हैं इन तीन रंगों में। खासकर आप साड़ी पहनने के मूड में नहीं हैं और गणतंत्र के जश्न को तीन रंग में ढालना हो तो हमारा पहनावा बड़ी भूमिका निभाता है तो आइए हम बताते हैं कि तीन रंगों से कैसे आप खुद को सजा सकती हैं और बना सकती हैं तीन रंगों से सजा माहौल –

केसरिया जादू  है कमाल का – अनारकली पहनिये और उसके साथ हल्के जेवर….। अब आप हल्के जेवर पहनती हैं या भारी, यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है। हमारी सलाह यह है कि अगर परिधान हल्के हों तो गहने थोड़े भारी चल सकते हैं। राजस्थान या गुजरात का कोई फैब्रिक पहन सकती हैं जो चटकीले केसरिया रंग या ऐसे ही शेड में हो। कोशिश करें कि ओवर न हो

 

श्वेत रंग की सादगी –  पहनावा हमारे व्यक्तित्व का आईना है और आपका व्यक्तित्व ऐसा है कि आपको ज्यादा तामझाम पसन्द नहीं है तो आपके लिए सिर्फ एक सफेद परिधान काफी है। आप चाहें तो बिलुकल सफेद एक गाउन पहनिये और चाहें तो उस पर तिरंगे के किसी भी रंग की जैकेट या दुप्पटा ले सकती हैं।

अशोक चक्र का नीलापन – डेनिम का नीलापन आपके मूड को ताजा रखेगा। खासकर छुट्टी के दिन भी दफ्तर जाना हो या दोस्तो के साथ निकलना है तो आपके फैशन का फंडा डेनिम कुरते के साथ फिट बैठ सकता है। इसे आप सफेद लोअर के साथ पहन सकती हैं।

शस्य श्यामला हरा –  तिरंगे के तीन रंगों में जो हरा रंग है….वह सदाबहार है..हरियाली और खुशहाली का प्रतीक है। आखिर भारत को कृषि प्रधान देश जो कहा जाता है…गाँवों की मिट्टी की खुशबू इस रंग में बसी है। आप हरे रंग की कोई एक्सेसरीज पहनें। इंडो – वेस्टर्न पहनें या परम्परागत तरीके से…यह हर रूप  में फबता है।

फिर क्या देर है….डूब जाइये….जश्न में…..।

 

 

गणतंत्र दिवस का इतिहास जानकर हर भारतीय को होगा गर्व

भारतीय हर साल 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र दिवस मनाते हैं। संविधान को लागू करवाने में योगदान देने वाले और देश को लिए प्राण न्योछावर करने वाले महान पूर्वजों को याद कर श्रद्धांजलि देते हैं। लेकिन इसे हर बार मनाने की वजह जानते हैं आप? इसके पीछे हमारा गौरवशाली इतिहास तो है ही, लेकिन हम इसलिए ऐसा करते हैं ताकि हमारी नई पीढ़ी को पता चल सके कि विभिन्नताओं से भरे इतने बड़े देश एक धागे में हमारे राष्ट्रीय पर्व ही पिरोते हैं, और जिनसे हमारे अस्तिस्व और संस्कृति की पहचान जुड़ी है, उन्हें पारंपरिक तौर पर मनाते रहने से ही देश की खातिर कुछ भी कर गुजरने की जनभावना जाग्रत होती है, जिससे देश और मजबूत होता है। तो चलिए आपको बताते हैं भारत के गणतंत्र दिवस के इतिहास से जुड़े रोचक इतिहास के बारे में।

9 दिसंबर 1946 को संसद के संविधान सभागार में संविधान सभा उन दस्तावेजों को लेकर इकट्ठा हुई, जिनसे स्वतंत्र भारत सरकार की रीढ़ तय होनी थी। ढेरों उमीदों के साथ 292 सदस्यों में से 207 सदस्यों ने संसद के पहले सत्र में बहस शुरू की जो कि संविधान के समापन तक यानी तीन महीने तक चली।इससे पहले ब्रिटिश सरकार भारतीय नेताओं के लगातार आंदोलनों और हुकूमत के खिलाफ उठती जनभावनाओं से यह समझ चुकी थी कि भारत छोड़कर जाना ही होगा। आखिरकार ब्रिटिश सरकार ने शांति से सत्ता सौंपने में ही भलाई समझी और 1946 में एक कैबिनेट मिशन को भारतीय नेताओं से बात करने के लिए भेजा। दिशा निर्देशों के आधार पर प्रांतीय विधानसभा चुनाव कराए गए, जिससे 292 सदस्य चुने गए। इन सदस्यों को संविधान सभा का प्रतिनिधि बनना था। जो लोग चुने गए थे, उनमें सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू और पंडित जवाहर लाल नेहरू भी शामिल थे। इन लोगों के हाथ में बहुत बड़ा काम था। नेताओं ने संकल्प लिए, जिनके अंतर्गत क्षेत्रीय अखंडता, सामाजिक आर्थिक समानता, न्याय के कानून और अल्पसंख्यकों अधिकारों का ख्याल रखना था।

अगले 3 वर्षों में संविधान सभा के 165 दिनों 11 सत्र हुए। 9 दिसंबर 1949 को संविधान का ड्राफ्ट मंजूर हो गया। करीब एक महीने बाद 26 जनवरी 1950 को नए राष्ट्र को एक आधुनिक गणतंत्र बनाते हुए भारत का संविधान आधिकारिक रूप से लागू हो गया। संविधान के आधिकारिक प्रवर्तन के लिए चुनी जाने वाली तारीख भारतीय राष्ट्रवादियों की भावनाओं से जुड़ी थी। 31 दिसंबर 1931 को नेहरू ने लाहौर में पूर्ण स्वराज की मांग करते हुए जब तिरंगा लहराया था तो स्वतंत्रता की तारीख 26 जनवरी 1930 तय की गई थी। इसलिए जब संविधान लागू हुआ तो उसे ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ माना गया।

 

पद्म पुरस्‍कारों की घोषणा, धोनी, पंकज आडवाणी के साथ शारदा सिन्हा को भी पद्म भूषण

नयी दिल्ली : गणतंत्र दिवस की पूर्व संख्या पर सरकार ने देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है। इनमें कला, संस्कृति, खेल के साथ मानव सेवा और कुछ नया करने वालों को जगह दी गई है। इस बार 85 लोगों को पद्म अवॉर्ड दिया गया। इसमें से तीन लोगों को पद्म विभूषण, नौ लोगों को पद्म भूषण और 73 लोगों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

गृह मंत्रालय ने कहा कि इस साल सरकार को पद्म पुरस्कारों के लिए 15,700 से ज्यादा आवेदन मिले थे।

पद्म विभूषण पुरस्कार

1. इलैयाराजा, कला और संगीत

2. गुलाम मुस्तफा खान, कला और संगीत

3. परमेश्वरन परमेश्वरन, साहित्य एवं शिक्षा

पद्म भूषण पुरस्कार

1. पंकज आडवाणी, बिलियर्ड्स

2.महेंद्र सिंह धोनी (झारखंड), स्पोर्ट्स-क्रिकेट

3. फिलिपोस क्रिसोस्टम

4. एलेक्जेंडर कदाकिन, पब्लिक अफेयर्स

5. रामचंद्रन नागास्वामी

6. वेद प्रकाश नंदा, साहित्य एवं शिक्षा

7. लक्ष्मण पई, कला एवं पेंटिंग

8. अरविंद पारिखे, कला-संगीत

9. शारदा सिन्हा (बिहार), कला-संगीत

पद्मश्री पुरस्कार के लिए जिन नामों का चयन किया गया है, उनमें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र के लिए महाराष्ट्र के वैज्ञानिक व टायमेकर अरविंद गुप्ता को पुरस्कृत किया गया है। आईआईटी कानपुर से पढ़े लिखे गुप्ता पिछले करीब चार दशक से स्कूलों में खिलौने के जरिए शिक्षा के प्रचार प्रसार में जुटे है।

मेडिसिन के क्षेत्र में केरल की 75 वर्षीय लक्ष्मीकुट्टी को पुरस्कृत किया गया है। यह लंबे समय से आदिवासी क्षेत्र में सांप के कांटने से लोगों की जड़ी-बूटी देती है। यह अब तक 500 सौ हर्बल दवाईयां तैयार कर चुकी है।

इस क्षेत्र के लिए केरल के एम आर राजगोपाल को, कर्नाटक की 97 वर्षीय सुलगट्टी नरसम्मा और हिमाचल प्रदेश के 90 वर्षीय याशी धोडेन को भी पुरस्कृत किया गया है। महाराष्ट्र की रानी और अभय बंग को और नेपाल के आंखो के 62 वर्षीय सैंडक रूइत को भी पुरस्कृत किया गया है।

इसके अलावा आर्ट(पेंटिंग) के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के भज्जू श्याम को पुरस्कृत किया गया है। गोंड कला के गुरू के रुप में इनकी पहचान है।

सामाजिक क्षेत्र के लिए पश्चिम बंगाल के 99 वर्षीय सुंधाशु विश्वास और पश्चिम बंगाल की 75 वर्षीय महिला सुभाषिनी मिस्त्री को, खेल के क्षेत्र में महाराष्ट्र के मुरलीकांत पेटकर को सम्मानित किया गया है।

तैराकी के क्षेत्र में इन्होंने देश-दुनिया के कई बड़े पुरस्कार भी जीते है। विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नया काम करने वाले तमिलनाडु के राजगोपालन वासुदेवन को यह पुरस्कार दिया गया है। सामाजिक क्षेत्र के लिए और भी जिन लोगों को पुरस्कृत किया गया है, उनमें नागांलैंड की 84 वर्षीय महिला लेंटिना ओ टक्कर को, महाराष्ट्र के संपत रामटेके भी शामिल है। वहीं वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम कर रहे तमिलनाडु के सोमोलुस बाइटेकर को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।।

भगवत गीता के 700 श्लोकों का उर्दू में अनुवाद करने वाले उत्तर प्रदेश के लखनऊ के अनवर जलालपुरी को चुना गया। उनकी इस कवायद को सांप्रदायिक सदभाव बढ़ाने के रूप मे अहम माना जाता है। सूफी गायकी से पहचान बनाने वाले कर्नाटक के इब्राहिम सुतार को कला के क्षेत्र में सम्मान से नवाजा गया है। विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बिहार के मानस बिहारी वर्मा को चुना गया। वह देश के पहले सुपरसोनिक फाइटर तेजस के प्रोग्राम डाइरेक्टर थे। उन्हें विज्ञान पुरुष के रूप में जाना जाता है। सामाजिक क्षेत्र के लिए कर्नाटक के सितव्वा जोड्डती को, योगा के क्षेत्र में सउदी अरब की 38 वर्षीय महिला नऊफ मरवाई और तमिलनाडु के 98 वर्षीय वी.नानाम्मल को यह पुरस्कार दिया गया है।

 

 

 

 

इस साल तीन महिलाओं समेत 50 श्रमिकों को मिलेगा प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कार

नयी दिल्ली : सरकार ने 2016 के लिये प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कारों की आज घोषणा की। यह पुरस्कार विभागीय उपक्रमों, लोक उपक्रमों तथा निजी क्षेत्र की इकाइयों के 50 श्रमिकों को दिया जाएगा।सरकार ने 2016 के लिये प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कारों की आज घोषणा की। यह पुरस्कार विभागीय उपक्रमों, लोक उपक्रमों तथा निजी क्षेत्र की इकाइयों के 50 श्रमिकों को दिया जाएगा। श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हालांकि इस साल कुल 32 श्रम पुरस्कार दिये जाएंगे लेकिन यह पुरस्कार पाने वाले कर्मचारियों की संख्या 50 हैं। इसमें तीन महिलाएं शामिल हैं।

बयान के अनुसार 34 सार्वजनिक क्षेत्र से तथा 16 निजी क्षेत्र के श्रमिकों को यह पुरस्कार मिला है। श्रम पुरस्कार चार श्रेणी…श्रम रत्न पुरस्कार, श्रम भूषण पुरस्कार, श्रम वीर: श्रम वीरांगना और श्रम श्री : श्रम देवी पुरस्कार… में दिये जाते हैं। इस साल प्रतिष्ठित श्रम रत्न पुरस्कार के लिये कोई नामांकन उपयुक्त नहीं पाये गये। सेल, भेल तथा टाटा स्टील के 12 श्रमिकों को श्रम भूषण से पुरस्कृत किये जाने की घोषणा की गयी है। इसके तहत एक लाख रुपये नकद और सनद दिया जाता है।

नैवल डाकयार्ड, आर्डिनेंस फैक्टरी, राष्ट्रीय इस्पात निगम, टाटा स्टील, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, पारादीप फास्फेट लि., ब्रह्मोस एयरोस्पेस के 18 श्रमिकों को श्रम वीर : श्रम वीरांगना पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गयी है। इसके तहत 60,000 रुपये का नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र दिया जाता है। बयान के अनुसार सीमेंट कारपोरेशन आफ इंडिया, नैवल शिप रिपेयर यार्ड, टाटा मोटर्स, सुरत लिग्नाइट पावर प्लांट, लार्सन एंड टूब्रो लाइसफ आदि के 20 श्रमिकों को श्रम श्री : श्रम देवी पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गयी है। इसके तहत 40,000 रुपये तथा प्रमाण पत्र प्रदान किये जाते हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय हर साल प्रधानमंत्री श्रम अवार्ड की घोषणा करता है। ये पुरस्कार श्रमिकों के बेहतर कार्य, अनूठी क्षमता, उत्पादकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान आदि के लिये दिये जाते हैं।

 

बेटियों को भी बेटों की तरह देने होंगे समान अवसरः राष्ट्रपति

नयी दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देशवासियों को 69वें गणतंत्र दिवस की बधाई दी। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा कि गणतंत्र का दिन यह उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के महान प्रयासों और बलिदान को आभार के साथ याद करने का दिन है जिन्होंने अपना खून-पसीना एक करके, हमें आजादी दिलाई और हमारे गणतंत्र का निर्माण किया।

ये दिन हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को नमन करने का भी दिन है। देश के लोगों से ही लोकतंत्र बनता है। हमारे नागरिक, केवल गणतंत्र के निर्माता और संरक्षक ही नहीं हैं, बल्कि वे ही इसके आधार स्तंभ हैं।

हमारा हर नागरिक, हमारे लोकतंत्र को शक्ति देता है। राष्ट्रपति ने कहा कि  जहां बेटियों को बेटों की ही तरह शिक्षा, स्वास्थ्य और आगे बढ़ने की सुविधाएं दी जाती हैं, ऐसे समान अवसरों वाले परिवार और समाज ही एक खुशहाल राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

इनोवेटिव बच्चे ही एक इनोवेटिव राष्ट्र का निर्माण करते हैं। इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें एक जुनून के साथ जुट जाना चाहिए। हमारी शिक्षा-प्रणाली में रटकर याद करने और सुनाने के बजाय बच्चों को सोचने और तरह-तरह के प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमने साक्षरता को काफी बढ़ाया है। अब हमें शिक्षा के दायरे और बढ़ाने होंगे। शिक्षा-प्रणाली को ऊंचा उठाना, और उसके दायरे को बढ़ाना तथा 21वीं सदी की डिजिटल अर्थव्यवस्था, जीनोमिक्स, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन की चुनौतियों के लिए समर्थ बनाना हमारा उद्देश्य होना चाहिए।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि हमने खाद्यान्न उत्पादन में काफी बढ़ोतरी की है, लेकिन अभी भी कुपोषण को दूर करने और प्रत्येक बच्चे की थाली में जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है। यह हमारे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए और देश के भविष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

 

सुप्रीम कोर्ट में सीधे नियुक्त होने वाली पहली महिला वकील इंदु मल्होत्रा 

भारतीय न्यायिक व्यवस्था के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा को सीधे उच्चतम न्यायालय में बतौर जज नियुक्त कर दिया है। आजादी के बाद से भारत के इतिहास में अब तक सिर्फ 6 महिला जज ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची हैं। इंदु सातवीं ऐसी महिला होंगी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ जस्टिस आर भानुमति ही एकमात्र महिला जज हैं।

हालांकि उच्चतम न्यायालय में महिला जज की नियुक्ति का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। 1989 में पहली बार जस्टिस एम फातिमा बीवी को सुप्रीम कोर्ट में जज के बनाया गया था। उसके बाद जस्टिस सुजाता वी मनोहर, जस्टिस रूमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सुप्रीम कोर्ट में जज की जिम्मेदारी मिली।

इंदु काफी वरिष्ठ वकील हैं। वे बीते 30 साल से इस पेशे में हैं। 2007 में सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाली दूसरी महिला वकील के रूप के रूप में वह पदस्थ हुई थीं। इंदु का जन्म 1956 में बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने 1983 में इस पेशे में कदम रखा था। दिल्ली बार काउंसिल में उन्होंने अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर प्रैक्टिस शुरू की थी। 1998 में वह सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के रूप में क्वॉलिफाई हुई थीं। उन्होंने परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया था। जिसके लिए उन्हें न्याय दिवस पर मुकेश गोस्वामी मेमोरियल प्राइज भी मिला था।

इंदु को विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से भारत में मध्यस्थता तंत्र के संस्थानीकरण मुद्दे की समीक्षा करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का सदस्य बनाया गया था। उन्होंने ‘मध्यस्थता और सुलह का कानून और अभ्यास-2014’ नाम से एक किताब भी लिखी थी। जिसका अनावरण अप्रैल 2014 में किया गया था। इंदु के साथ-साथ कोलेजियम ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ को भी देश की सर्वोच्च अदालत में जज के लिए नामित किया है। जोसेफ उस बेंच का हिस्सा थे जिसने उत्तराखंड में 2016 में लगे राष्ट्रपति शासन को खारिज कर दिया था।

 

दंडकारण्य और लेह में है मां सरस्वती का निवास

मां सरस्वती जी के भारत में दो ही सबसे प्राचीन देवस्थल माने जाते हैं पहला आंध्र प्रदेश में है जो ऋषि वेद व्यास द्वारा बनाया गया था।

आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले के मुधोल क्षेत्र में है बासर गांव। गोदावरी के तट पर बने इस गांव में है विद्या के देवी मां सरस्वती जी का विशाल मंदिर। सरस्वती जी का ऐसा ही दूसरा मंदिर जम्मू कश्मीर के लेह में है।

बासर गांव स्थित मंदिर के विषय में कहते हैं कि महाभारत के रचयिता महाऋषि वेद व्यास जब मानसिक उलझनों से उलझे हुए थे तब शांति के लिए तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े, अपने मुनि वृन्दों सहित उत्तर भारत की तीर्थ यात्राए कर दंडकारण्य (बासर का प्राचीन नाम) पहुंचे। उन्होंने गोदावरी नदी के तट के सौंदर्य को देख कर कुछ समय के लिए यहीं पर रुक गए।

कहते हैं कि मां सरस्वती के मंदिर से थोडी दूर स्थित दत्त मंदिर से होते हुए मंदिर तक गोदावरी नदी में कभी एक सुरंग हुआ करती थी, जिसके द्वारा उस समय के महाराज पूजा के लिए आया-जाया करते थे।

ऐसा कहा जाता है कि यहीं वाल्मीकि ऋषि ने रामायण लेखन प्रारंभ करने से पूर्व मां सरस्वती जी को प्रतिष्ठित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। इस मंदिर के निकट ही वाल्मीकि जी की संगमरमर की समाधि बनी है।

मंदिर के गर्भगृह, गोपुरम, परिक्रमा मार्ग आदि इसकी निर्माण योजना का हिस्सा हैं। मंदिर में केंद्रीय प्रतिमा सरस्वती जी की है, साथ ही लक्ष्मी जी भी विराजित हैं। सरस्वती जी की प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में 4 फुट ऊंची है।

मंदिर में एक स्तंभ भी है जिसमें से संगीत के सातों स्वर सुने जा सकते हैं। यहां की विशिष्ट धार्मिक रीति अक्षरआराधना कहलाती है। इसमें बच्चों को विद्या अध्ययन प्रारंभ कराने से पूर्व अक्षराभिषेक हेतु यहां लाया जाता है और प्रसाद में हल्दी का लेप खाने को दिया जाता है।

मंदिर के पूर्व में निकट ही महाकाली मंदिर है और लगभग एक सौ मीटर दूर एक गुफा है। यहीं एक अनगढ़ सी चट्टान भी है, जहां सीताजी के आभूषण रखे हैं। बासर गांव में 8 ताल हैं जिन्हें वाल्मीकि तीर्थ, विष्णु तीर्थ, गणेश तीर्थ, पुथा तीर्थ कहा जाता है।