Wednesday, April 1, 2026
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लेखक बने नवाजुद्दीन सिद्दीकी

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नयी दिल्ली :बड़े पर्दे पर अपने अभिनय का जौहर दिखाने के बाद अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अब हाथों में कलम थाम ली है।

‘‘एन आर्डिनरी लाइफ : ए मेमॉयर’’ पुस्तक को अभिनेता ने पत्रकार एवं लेखिका रितुपर्णा चटर्जी के साथ मिलकर लिखा है।
अभिनेता ने इस किताब में अपने जीवन के अन्छुए पहलुओं और शोहरत की गलियों तक पहुंचने के अपने सफर को बयां किया है।
नवाजुद्दीन ने आज सोशल मीडिया पर पुस्तक की एक तस्वीर साझा करते हुए अपने प्रशंसकों से पहले से ही पुस्तक का आर्डर करने की अपील की।
उन्होंने लिखा, ‘‘और अब समय है एक नयी भूमिका निभाने का। ‘‘एन आर्डिनरी लाइफ : ए मेमॉयर’’ के लेखक के रूप में, रितुपर्णा चटर्जी के साथ।’’ पुस्तक के कवर पर नवाजुद्दीन नजर आ रहे हैं और लिखा है ‘‘कोई नहीं जानता कि एक किसान की संतान को इंडस्ट्री (फिल्म) में आने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है। जिंदगी में यह हासिल करना, केवल एक दूरस्थ सपना ही हो सकता है।’’ किताब के अक्तूबर में बाजार में आने की संभावना है।

 

रेलमंत्री पीयूष गोयल का दावा, एक साल में सभी मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग होंगी खत्म

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कोलकाता : नवनियुक्त रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि देश में सभी मानवरहित रेलवे क्रॉसिंगको खत्म करने के लक्ष्य को एक साल के भीतर हासिल कर लिया जाएगा।

शुरुआत में इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। आईआईएम-कलकत्ता के एक कार्यक्रम में रेलमंत्री ने कहा कि, रेलवे में सभी मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को तीन साल में खत्म करने का लक्ष्य रखा था लेकिन मैंने उन्हें कहा है कि हम इसे एक साल में क्यों नहीं कर सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में करीब पांच हजार मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग हैं। इनसे कुल 30 से 35 फीसदी रेल दुघर्टनाएं होती हैं। इन्हें अगले एक साल में खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने रेल की पटरियों को मैनुअल रख-रखाव कम करने के लिए तकनीक के प्रयोग की वकालत की। रेल पटरियों के मैनुअल रख-रखाव में अधिक मैनपावर की जरूरत होती है।

 

‘महिला को छम्मकछल्लो कहना उसका अपमान’

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ठाणे, : हिंदी भाषा के शब्द ‘छम्मकछल्लो’ का इस्तेमाल बॉलीवुड के गाने में तो आपको लुभावना लग सकता है लेकिन असली जिंदगी में इस शब्द का इस्तेमाल करने पर आप कानूनी परेशानी में फंस सकते हैं। ठाणे की एक अदालत ने कहा है कि इस शब्द का इस्तेमाल करना ‘‘एक महिला का अपमान करने’’ के बराबर है।

शाहरूख खान अभिनीत फिल्म ‘रॉ वन’ के एक हिट गाने में इस शब्द का इस्तेमाल हो चुका है।एक मजिस्ट्रेट ने पिछले सप्ताह शहर के एक निवासी को ‘‘अदालत के उठने तक’’ साधारण कैद की सजा सुनाई थी और उसपर एक रूपए का जुर्माना लगाया था।

आरोपी के एक पड़ोसी ने उसे अदालत में घसीटा था। पड़ोसी महिला की शिकायत के अनुसार, नौ जनवरी 2009 को जब वह अपने पति के साथ सैर से लौट रही थी, तब उसे एक कूड़ेदान से ठोकर लग गई। महिला ने कहा कि यह कूड़ेदान उक्त आरोपी ने सीढ़ियों पर रखा था।

आरोपी इस दंपति पर चिल्लाने लगा और उन्हें कई चीजें कहने के बीच उसने महिला को ‘‘छम्मकछल्लो’’ कहकर पुकारा। इस शब्द से गुस्साकर महिला ने पुलिस से संपर्क किया लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। तब महिला ने अदालत का रूख किया।

आठ साल बाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट आर टी लंगाले ने उनके मामले को उचित ठहराते हुए कि आरोपी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 509 :शब्द, इशारे या किसी गतिविधि से महिला का अपमान: के तहत अपराध किया है।

मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा, ‘‘यह एक हिंदी शब्द है। अंग्रेजी में इसके लिए कोई शब्द नहीं है। भारतीय समाज में इस शब्द का अर्थ इसके इस्तेमाल से समझा जाता है। आम तौर पर इसका इस्तेमाल किसी महिला का अपमान करने के लिए किया जाता है। यह किसी की तारीफ करने का शब्द नहीं है, इससे महिला को चिढ़ होती है और उसे गुस्सा आता है।’’

 

तलाक के खौफ से आजाद शाजदा ने शौहर को भेजा ‘खुला’

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अब मुस्लिम महिलाएं तलाक  के खौफ से बाहर निकलकर खुला (जब बीवी शौहर को तलाक दे) का इस्तेमाल करने से भी नहीं डर रहीं। ताजा मामला राजधानी का है। यहां की शाजदा खातून ने अपने शौहर को खुलानामा भेजा है।

बाकायदा मीडिया के सामने शाजदा ने 12 साल के निकाह को तोड़ने का एलान किया। शाजदा ने कहा-जिंदगी दुश्वार हो गई थी। अब मैं आजाद हूं। अगर इसके कोई आड़े आता तो मैं और बड़ा फैसला ले सकती थी।

शाजदा का मायका कानपुर के फूलबाग में है। शाजदा ने कहा, 12 साल पहले यानी 2005 में हाता मुस्तफाबाग लालबाग के जुबेर से निकाह हुआ। मैं मध्यमवर्गीय परिवार से थी। शौहर जुबेर अली भी मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते थे। शाजदा का आरोप है कि ससुरालवालों ने निकाह के बाद से ही परेशान करना शुरू कर दिया।

सब सहती रही। सोचा परिवार में सुधार होगा। पर, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कई बार लड़ाई-झगड़ा होने के बाद मायके गई। मायके की माली हालात ऐसी नहीं कि वहां ताउम्र रह सकूं। पर, कितना सहती…।

शाजदा का आरोप है कि जुल्म ज्यादतियों के बीच पति से छुटकारा पाने के लिए नदवा की शरई अदालत में आवेदन किया। पर वहां से खुला की इजाजत नहीं दी गई। इंसाफ के लिए फिरंगी महल की दारुलकजा अदालत में पेश हुई। वहां से भी नाउम्मीदी मिली। लिहाजा मुस्लिम वीमेंस लीग की महासचिव नाइश हसन की मदद ली और शौहर को 6 अगस्त को खुलानामा (तलाकनामा) भेज दिया।

मैं अपना सहारा खुद बनूंगी
जिंदगी कैसे चलेगी इस सवाल पर शाजदा कहती हैं, मैं बीएड हूं। यहां एक निजी स्कूल में पढ़ाती हूं। मैं किसी के भरोसे नहीं रहना चाहती। अपना सहारा खुद बनूंगी। मुझे अपने परिवार (मायके) वालों की मदद करना है। क्योंकि उन्होंने मेरा हर मौके पर साथ दिया।

तो लेती बड़ा फैसला
शाजदा कहती हैं, अगर खुला के तहत शौहर से छुटकारा न मिलता तो बड़ा फैसला लेती। ये बड़ा फैसला क्या होता, इस सवाल पर वह कहती हैं-मैं इस मसले पर कोई समझौता नहीं करती। सारे रास्ते बंद ही हो जाते तो मजहब ही बदल लेती।

 

गंदगी और  सफाईकर्मियों पर वृत्तचित्र बनाने वाली भारती को धमकियां, 12 केस दर्ज

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चेन्नई. तमिलनाडु की दिव्या भारती को रोज धमकी भरे फोन आ रहे हैं। रेप, एसिड अटैक और हत्या तक की धमकियां दी जा रही हैं। उनके खिलाफ 12 केस दर्ज किए गए हैं। उन्हें राज्य छोड़ने तक पर मजबूर किया गया। आरोप ये है कि उन्होंने जातीय और सामुदायिक नफरत भड़ाकाने की कोशिश की। इन आरोपों के पीछे है, उनकी बनाई एक डॉक्युमेंट्री फिल्म और एक यूट्यूब वीडियो। दरअसल भारती ने तमिल भाषा में एक डॉक्युमेंट्री फिल्म बनाई है, काक्कूस। इसका मतलब है, टॉयलेट।

भारती के मुताबिक, जिस गंदगी को हम देखना तक नहीं चाहते देश के करीब 8 लाख लोग रोज उसे हमारे लिए अपने हाथों से साफ कर रहे हैं, मेनहोल में उतर रहे हैं। इस गंदगी के बीच ही उनका पूरा जीवन निकल जाता है और इसी में उनकी मौत हो जाती है। यही फिल्म का विषय है।

2013 में सुप्रीम के कोर्ट के आदेश के बाद देश में हाथ से मैला सफाई पर प्रतिबंध है। अगर कोई ऐसा करवाता है तो 5 साल की जेल का प्रावधान है। इसके बावजूद हाथ से मैला साफ करना जारी है।

फिल्म इस साल 26 फरवरी को पहली बार चेन्नई में रिलीज हुई। एक कल्चरल ग्रुप ने इसकी अगली स्क्रीनिंग चार मार्च को नागरकोइल में रखी। लेकिन ऐसा हो नहीं सका, क्योंकि विरोध के कारण तिरुनेलवल्ली में पुलिस को लगा कि इससे कानून व्यवस्था का संकट पैदा हो सकता है।

इसके बाद कोयम्बटूर में फिल्म का प्रदर्शन होना था, लेकिन इस पर भी रोक लग गई। कई तरह की आपत्तियां इस पर लगाई जाती रहीं। कभी कहा गया कि फिल्म का प्रमाणपत्र  नहीं लिया गया है तो कभी कहा गया कि भारती नक्सली बैकग्राउंड से हैं। लेकिन 13 जुलाई के बाद बड़ा बदलाव आया।

अन्ना यूनिवर्सिटी के 15 सेनेटरी कर्मचारियों ने डीन के खिलाफ पुलिस में अमानवीय व्यवहार की शिकायत की। अगले दिन इन सभी को नौकरी से हटा दिया गया। इन लोगों ने यूनिवर्सिटी के गेट पर प्रदर्शन शुरू किया तो पुलिस ने इन्हें खदेड़ दिया।

#वीडियो यूट्यूब पर अपलोड

– भारती बताती हैं, जब उन्हें यह पता चला तो उन्होंने इन कर्मचारियों से बात की और उसका वीडियो यूट्यूब पर अपलोड कर दिया। कुछ ही दिनों में इसे 8 हजार व्यू मिले। इसके बाद उन्हें लोगों के धमकी भरे फोन आने लगे और वीडियो हटाने की चेतावनियां दी जाने लगीं।

26 जुलाई को भारती को मदुरै के पुलिस कमिश्नर के आफिस से फोन आया और उन्हें ऑफिस आने के लिए कहा गया। वे इसके लिए राजी भी हो गईं, लेकिन इसके पहले कि वे पहुंचती पुलिस उनके घर पहुंची और गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी 2009 के एक केस में बताई गई। तब भारती मदुरै के लॉ कॉलेज में फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट थीं। हॉस्टल के एक स्टूडेंट की सांप के काटने से मौत हो गई थी और स्टूडेंट्स ने उसके परिवार को मुआवजा देने के लिए आंदोलन किया था।

आठ साल बाद इस केस को रहस्यमयी तरीके से भारती के लिए निकाल लिया गया। हालांकि उसी दिन उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। अगले दिन दलित पल्लर कम्युनिटी की रिप्रेजेंटेटिव पुथिया तमिलागम राजनीतिक पार्टी के नेता के कृष्णास्वामी ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया और कहा कि काक्कूस से उनके समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। भारती ने 29 जुलाई को पुलिस में शिकायत की। भारती बताती हैं कि इसके बाद से लगातार धमकी भरे फोन आ रहे हैं।

#काक्कूस नाम रखने के पीछे की घटना

भारती कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी हैं और एक बार 2015 में वे एक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं थी। सीवर की सफाई के दौरान दो सफाई कर्मियों की मौत हो गई थी। इसी दौरान उन्हें एक समस्या पर फिल्म बनाने का विचार आया था।

फिल्म का नाम काक्कूस रखने के पीछे वे घटना बताती हैं। बात 2016 की है। उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी थी। बालमुरुगन नाम के एक सफाईकर्मी की सेप्टिक टेंक में सफाई के दौरान जहरीली गैसे से मौत हो गई थी। उसकी दो बेटियां थी। जब भारती उसके परिवार से मिलने पहुंची तो पता चला कि लोग इन सफाईकर्मियों के बच्चों को काक्कूस कहकर बुलाते हैं। इसके बाद उन्होंने फिल्म का नाम काक्कूस कर दिया।

#दो चेन गिरवी रखीं

भारती के पति काला गोपाल ने फिल्म बनाने में उनकी मदद की। संसाधन के नाम पर उनके पास 9 हजार रुपए का कैमरा था। 30 हजार रुपए का लोन लेने के लिए उन्होंने अपनी दो चेन गिरवी रखीं। इसके अलावा 30 हजार रुपए क्राउड फंडिंग से जुटाए। दो वर्षों तक तमिलनाडु भर में घूमे और सफाई कर्मचारियों से बात की। इस दौरान 25 शहरों और कस्बों में वे गए।

भारती बताती हैं कि फिल्म की शूटिंग के दौरान कई बार गंदगी देखकर उन्हें उल्टी तक हो जाती थी। 14 जून को यू्ट्यूब पर जारी होने के बाद से अब तक इस फिल्म को करीब चार लाख बार देखा जा चुका है। अंग्रेजी सबटाइटल के साथ जारी फिल्म का सब्जेक्ट है- सीवरेज, मेनहोल और टॉयलेट की सफाई करने वाले लोगों का जीवन।

 

राम जेठमलानी ने वकालत से लिया संन्यास

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नयी दिल्ली, : जानेमाने अधिवक्ता राम जेठमलानी ने आज सात दशक लंबे वकालत के करियर से संन्यास लेने की घोषणा की ।

94 वर्षीय जेठमलानी ने सात दशक लंबे वकालत के करियर से संन्यास लेने की घोषणा करते हुए शासन के मौजूदा स्तर को विपत्ति करार दिया और कहा कि वह भ्रष्ट राजनेताओं के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘देश अच्छी स्थिति में नहीं है। पिछली और मौजूदा दोनों सरकारों ने देश को बहुत बुरी तरह नीचा दिखाया है।’’ जेठमलानी ने कहा, ‘‘इस बड़ी विपत्ति से उबारने की जिम्मेदारी बार के सदस्यों की और सभी अच्छे नागरिकों की है।’’ उन्होंने कहा कि इन लोगों को इस बात के लिए भरसक प्रयास करने चाहिए कि सत्ता में बैठे लोगों को जल्द से जल्द बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

वह भारत के नये प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को सम्मानित करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

इस मौके पर जेठमलानी ने कहा, ‘‘मैं यहां आपको केवल यह कहने आया हूं कि मैं अपने पेशे से संन्यास ले रहा हूं लेकिन जिंदगी रहने तक नयी भूमिका अपना रहा हूं। मैं भ्रष्ट राजनेताओं से लड़ना चाहता हूं जिन्हें सत्ता के पदों पर लाया गया है और मुझे उम्मीद है कि भारत की स्थिति अच्छी शक्ल लेगी।’’

 

किसी भी बच्‍चे को तीन किलोमीटर से अधिक दूर स्कूल न जाना पड़े: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बच्चों से स्कूल जाने के लिए तीन किलोमीटर या उससे लंबा रास्ता तय करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि शिक्षा के अधिकार को सार्थक बनाने के लिए मिडिल स्कूलों को इस तरीके से बनाए जाने का प्रयास किया जाना चाहिए कि किसी भी बच्चे को केवल स्कूल जाने के लिए इतना लंबा रास्ता तय नहीं करना पड़े।

सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे मामले पर सुनवाई कर रहा था जिसमें केरल के एक स्कूल को अपग्रेड करने की अनुमति मिलने का दूसरे स्कूल ने विरोध किया था।

जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने यह पाया कि पारापननगादी शहर में स्थित जूनियर प्राइमरी स्कूल से चौथी कक्षा पास करने वाले बच्चों को स्कूल जाने के लिए चीन-चार किलोमीटर या उससे भी ज्यादा लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

पीठ ने कहा, हम 10 से 14 वर्ष के बच्चों से स्कूल जाने के लिए तीन किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय करने की उम्मीद नहीं कर सकते।

संविधान की धारा 21 ए के तहत 14 वर्ष की उम्र तक शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है और अगर इस अधिकार को सार्थक बनाना है तो मिडिल स्कूलों को इस प्रकार से बनाने का प्रयास होना चाहिए कि बच्चे को स्कूल जाने के लिए तीन किलोमीटर या उससे अधिक दूर जाने की जरूरत नहीं पड़े।

 

सेना पुलिस में पहली बार शामिल होंगी महिलाएं, 874 भर्तियों को मंजूरी

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नई दिल्ली.देश की रक्षा मंत्री निर्मला ने पद सम्भालते ही सेना में महिलाओं के आगमन का रास्ता साफ कर दिया है। आर्मी में महिला सैनिकों की संख्या बढ़ाने के लिए पहली बार मिलिट्री पुलिस में 874 महिलाओं की भर्ती को मंजूरी मिली है। इसके मुताबिक, हर साल 52 महिलाएँ पुलिस में शामिल होंगी। बता दें कि सेना प्रमुख विपिन रावत कहा था कि कश्मीर में ऑपरेशन के दौरान कई बार महिलाएं आतंकियों की ढाल बनकर सामने आ जाती हैं। इनसे निपटने के लिए भी मिलिट्री पुलिस में महिलाओं की जरूरत है।

अगले साल से शुरू होगी भर्ती…

शुक्रवार को लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी कुमार ने बताया कि अपराध और लैंगिक आरोपों की जांच के लिए लंबे वक्त से मिलिट्री पुलिस में महिला अफसरों की जरूरत महसूस हो रही थी। मिलिट्री पुलिस में शामिल होने वालीं महिला सैनिकों की ट्रेनिंग भी पुरुष सैनिकों की तरह 62 सप्ताह की होगी। भर्ती प्रक्रिया अगले साल से शुरू होगी, फिलहाल इसके ब्लू प्रिंट को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

कश्मीर में प्रदर्शनकारियों से निपटना आसान होगा: रावत

सेना प्रमुख विपिन रावत ने जोर देकर मिलिट्री पुलिस में महिलाओं की जरूरत की बात कही थी। वे 10 जून को देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी में पासिंग आउट परेड में शामिल हुए थे।
उन्होंने कहा था कि आमतौर पर जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन के दौरान जवानों के सामने महिलाएं ढाल बनकर सामने आ जाती हैं। लिहाजा, परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे निपटने के लिए हम सबसे पहले मिलिट्री पुलिस में महिला सैनिकों की भर्ती करेंगे। हमारे रैंक में जवान और सरदार साहेबान होते हैं। उस रैंक में भी महिला सैनिकों की जरूरत है।

क्या है मिलिट्री पुलिस?

नेवी, एयरफोर्स की तरह सेना की स्पेशल पुलिस है, जो 1942 में बनाई गई। इसके सैनिकों की ड्रेस में लाल टोपी और सफेद बेल्ट होता है। बाजू पर काला बैच लगा होता है।  मिलिट्री पुलिस का मुख्य काम जवानों के बीच अनुशासन बनाए रखना है ताकि सेना का स्तर और मनोबल बरकरार रहे। इसके अलावा कैंट एरिया में पुलिसिंग, युद्ध और शांति के दौरान जवानों के लिए सामान भेजने, युद्ध बंदियों की निगरानी, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सिविल पुलिस के साथ संयोजन की जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही सेना प्रमुख को सुरक्षा देना, आर्मी के डिविजनल कमांडर्स, कोर कमांडर्स, आर्मी कमांडर्स के लिए पायलट वाहन मुहैया कराने की जिम्मेदारी भी होती है। बता दें कि, फिलहाल सेना के मेडिकल, लीगल, एजुकेशनल, सिग्नल्स और इंजीनियरिंग विंग में महिलाओं की भर्ती अफसर रैंक पर होती है।

 

जीएसटी में मिली राहत, रोजमर्रा की 30 आवश्यक वस्तुओं की कीमतें घटीं

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सरकार ने जीएसटी की दरों के बदलाव में इस बार गरीबों, दस्तकारों और मूर्तिकारों का ख्याल रखा है लेकिन लग्जरी कारों के शौकीनों का बोझ बढ़ा दिया है। जीएसटी काउंसिल 21 वीं बैठक में शनिवार को इडली-डोसा पेस्ट से लेकर किचन गैस लाइटर जैसी रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली लगभग 30 वस्तुओं की जीएसटी दरें कम करने तथा लग्जरी और एसयूवी कारों पर 2 से 7 प्रतिशत तक अतिरिक्त सेस लगाने का फैसला किया गया।

इसके अलावा खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग (केवीआईसी) के जरिये मिलने वाले वस्त्रों को करमुक्त रखा गया है।  जीएसटी की नई दरों के मुताबिक, 20 लाख रुपये तक सालाना टर्नओवर वाले दस्तकारों और लोक कलाकारों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट दे दी गई है। इसके साथ ही मिट्टी की बनी प्रतिमाओं को भी जीएसटी से मुक्त कर दिया गया।
नए फैसले के मुताबिक  15 मई तक के रजिस्टर्ड ट्रेड मार्क वाली चीजें बेचने वाली कंपनियों को पांच फीसदी जीएसटी देना होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हैदराबाद में जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद इन फैसलों का एलान किया। उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत टैक्स कलेक्शन काफी अच्छा रहा है और अब तक इससे 95,000 करोड़ रुपये आ चुके हैं।
ताकि गरीबों का भरोसा कायम रहे 
जीएसटी लागू करते वक्त कुछ वस्तुओं पर टैक्स की दरें बढ़ाने से सरकार पर गरीब विरोधी होने के आरोप लगने लगे थे। मसलन, मूर्तियों पर 30 फीसदी टैक्स लगा दिया गया था। इन खामियों को दूर करने के लिए सरकार ने दैनिक उपभोग की 30 वस्तुओं की जीएसटी दरें घटाते हुए रिटर्न फाइल करने की तारीख भी बढ़ाकर 10 अक्तूबर कर दी है, ताकि सरकार की गरीब हितैषी छवि पर लोगों का भरोसा कायम रह सके। ब्रांड-रहित खाद्य वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त रखा गया है जबकि ब्रांडेड और पैकेज्ड खाद्य वस्तुओं पर सिर्फ 5 फीसदी टैक्स लगाया गया है।

इनकी दरें हुई कम
भुने चने, इडली, डोसा घोल, सूखी हल्दी, कस्टर्ड पाउडर, खली, धूपबत्ती, धूप और इसी तरह की अन्य वस्तुओं, प्लास्टिक रेनकोट, रबर बैंड, राइस रबर रॉल्स, कंप्यूटर मॉनिटर, किचेन गैस लाइटर, झाड़ू, ब्रश आदि।

इंटर स्टेट-जॉब वर्क का टर्नओवर अगर 20 लाख तक है तो भी रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। सरकारी वर्क कांट्रेक्ट में टैक्स 18 फीसदी से घटा कर 12 फीसदी कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि इससे सरकार का काफी टैक्स बचेगा।

काउंसिल के फैसले के मुताबिक, मिड साइज कारों पर सेस 43 फीसदी से बढ़ कर 45 फीसदी हो गया है। इससे पहले इनकी जीएसटी दरें 48 फीसदी से घटकर 43 फीसदी हो गई थी। बड़ी व लग्जरी कारों पर टैक्स 43 से बढ़कर 48 फीसदी किया गया है। एसयूवी पर टैक्स 43 फीसदी से बढ़कर 50 फीसदी हो गया है। एसयूवी कीमत पर भी जीएसटी के बाद 11 फीसदी का फायदा हुआ है लेकिन इस बार इस पर 7 फीसदी सेस बढ़ा दिया गया है।

 

फिर छूट गया

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अरुण भारद्वाज

आज फिर इस नकली चकाचौंध के बीच काम करते करते आँख लग गयी और पहुँच गया अपने गाँव।12-13 साल का नासमझ बच्चा 25 साल के गुलाम जवान की रूह से बाहर निकला।

पतली गली को चीरते हुए रोशन की दुकान से 2 मुंग के लड्डू लिए और साईकल के पुराने से टायर को छोटी सी डंडी से मारता हुआ, गंदे पानी वाले तालाब का रास्ता पार कर लोहे के दरवाजे को कूदकर पार किया।

उसने सरकारी स्कूल के खाली मैदान पर नजर दौड़ाई। स्कुल की छुट्टी हुए 1 घंटे से ऊपर हो गया था, स्कूल सुनसान था, कोई भी अभी तक खेलने आया नहीं था ।

‘कोई बात नहीं।’ उसने अपना टायर लिया और पीछे वाली दीवार कूद कर शमशान वाले रास्ते चल दिया। डर तो लग रहा था लेकिन इतने दिनों बाद वह ‘जिन्दा मुर्दों’ से  आजाद हुआ था तो वहाँ से भी भागता हुआ चला गया ,जाल के पेड़ से मीठी पील तोड़ी।

वही एक मुर्दे को जलते देखते हुए पील खाता गया । अनायास याद आया – समय कम है सब बच्चे खेलने आ गये होंगे मेरा इन्तजार हो रहा होगा । वो अपनी टीम का कप्तान था, फटाफट उसने टायर उठाया और दौड़ता हुआ स्कूल पहुँच गया। अभी तक कोई नहीं आया था।

अरे, आज ऐसा क्या हुआ जो कोई भी खेलने नहीं आया । दिमाग में कुछ आया, दरवाजे से छलांग लगाई और फुल्लू की गोलगप्पे वाली रेहड़ी पर उसने मिर्च दहीभल्ले बनाने के लिए कह दिया। फुल्लू ने रेडियो की आवाज तेज की।  मैच का टॉस हो रहा था ।

दही भल्ले की प्लेट हाथ में देते हुए फुल्लू ने कहा – आज धंधा मुश्किल से सौ रूपए होगा। सब घर में मैच देख रहे होंगे।  बड़ा दुःख हुआ मुश्किल से थोडा सा समय मिला, सबके साथ खेल भी नहीं पाया।

कोई बात नहीं आज दही भल्ले से काम चला लेता हूँ । जैसे ही मिर्च दही और भल्ले से भरी चम्मच मुँह तक लेकर गया आवाज आई “एक्शन”।

एक हीरोइन रो रोकर बोल रही थी मेरा पूरा बचपन छिन गया?

(लेखक अभी रश्मि शर्मा टेलिफ़िल्म्स में कार्यकारी निर्माता के तौर पर कार्यरत हैं। ” नीला भगवान ” नामक एक चर्चित उपन्यास लिख चुके हैं । यूटूब के लिए लघु फ़िल्में बनाते हैं और अख़बार – पत्रिकाओं के लिए लेख भी लिखते हैं। मूल रूप से हरियाणा निवासी, फ़िलहाल मुंबई में हैं।)