Saturday, October 3, 2026
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महाशिवरात्रि का व्रत कर रहे हैं तो जरुर खाएं ये फलाहार

महाशिवरात्रि का व्रत काफी फलदायी माना जाता है। वैसे तो उपवास के दौरान फलाहार खाए जाते हैं, लेकिन शिवरात्रि पर कुछ खास तरह के भोजन का सेवन किया जा सकता है। शिवरात्रि में बिना नमक खाए आलस आता है और पूरे दिन थकान लगती है। ऐसे में महाशिवरात्रि के व्रत में क्‍या खाया जाए, इसके बारे में हमेशा होशियारी दिखाएं। उपवास के दौरान जितना हेा सके उतना ही फल और जूस का सेवन भी करें। यह शरीर में कैलरी की मात्रा को भी संतुलित रखता है और डिहाइड्रेशन जैसी समस्या का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। फलाहार में संतरा, खीरा, पपीता, सेब आदि फल लिए जा सकते हैं। आप चाहें तो मूंगफली, मखाना आदि भी ले सकते हैं। इसके अलावा दिनभर में 7-8 ग्लास पानी जरूर पीयें। इसके अलावा स्वास्थ्यवर्द्धक सिंघाड़ा, चटपटा फलाहारी उपमा, साबूदाने की शाही खीर या फिर चटपटी भुजिया सेव का भी सेवन व्रत के दौरान कर सकते हैं। अगर आप व्रत में कुछ नहीं खाना चाहते हैं तो दूसरे दिन हल्‍का भोजन ही खाएं। इससे आपका शरीर खाने को आराम से पचा पाएगा क्‍योंकि एक दिन न खाने के बाद अगर दूसरे दिन भारी भोजन कर लिया जाए तो पाचन क्रिया में बड़ी दिक्‍कत आ सकती है। तो आइये आगे बढें और जानें कि महाशिवरात्रि के व्रत में किन-किन चीजों का सेवन करना चाहिये।

 मखाना खाने से आती है ताकत

 

व्रत में मखाना का इस्तेमाल भी कई तरीके से किया जाता है। कोई इसकी खीर बनाकर खाना पसंद करते हैं तो कोई घी में फ्राइ करके सूखा ही खाना ज्यादा पसंद करते हैं। मखाने में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में पाए जाते है। ताकत के लिए दवाये मखाने से बनायी जाती हैं।केवल मखाना दवा के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता .इसलिए इसे सहयोगी आयुर्वेदिक औषधि भी कहते हैं।

आलू भी खाएं

हर व्रत में आलू एक विकल्प जरुर होता है। आप इसे उबाल कर फ्राई कर के खा सकते हैं। या फिर इसे दही के साथ खाया जा सकता है। पूरा दिन भूखें रहने के बाद आलू खाने से शरीर में गिरे हुए शुगर का लेवल बढता है और शरीर में उर्जा आती है।

 कुट्टू का आटा

व्रत के दौरान कुट्टू के आटे का फलाहार तो सभी करते हैं लेकिन इसका सेव व्रत में क्यों जरूरी है इसके बारे में आपने कभी सोचा है? धर्म और मान्यताओं से परे, सेहत के लिहाज से इसके सेवन का अपना महत्व है। कुट्टू के आटे की बनी चीजे न सिर्फ व्रत के दौरान तुरंत ऊर्जा देती हैं बल्कि आमतौर पर इसके सेवन से भी सेहत से जुड़ी कई समस्याएं दूर होती हैं।

साबूदाना भी है बेहतर

साबुदाना उस स्थिति में बेहद लाभकारी होता है, जब आपको पाचन में दिक्‍कत हों। पेट में किसी प्रकार की बीमारी होने पर भी साबुदाना लाभदायक होता है। यह ऊर्जा से भरपूर होता है, यही कारण है कि इसे उपवास के दिनों में खाया जाता है। बीमार लोग भी इसे आसानी से खाकर हजम कर सकते है

पाचन तंत्र के लिये बेहतर है सिंघाड़े का आटा

सिंघाड़ा शरीर के लिए मैंगनीज का अवशोषक करने में सक्षम होता है जिससे शरीर को मैंगनीज का भरपूर लाभ मिलता है। यह पाचन तंत्र के लिए बढ़ि‍या है। गर्भावस्था में सिंघाड़े का सेवन करना माता और शि‍शु के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

ठंडाई

पेट के लिये अच्‍छी यह पेट के लिये काफी अच्‍छी मानी जाती है। इसको पीने से शरीर को एनर्जी भी मिलती है। इसको पीने से पेट काफी ठंडा रहता है। इसमें बादाम, पिस्‍ता, काजू और अन्‍य कई तरह के ड्राई फ्रूट्स मिला कर इसे तैयार करें। दूध से बनी ठंडाई में काफी सारा कैल्‍शियम और प्रोटीन पाया जाता है।

संतरे का जूस

व्रत में संतरे के जूस का सेवन करें। यही नहीं आप अनाक का जूस भी पी सकते हैं।

दही, छाछ या लस्सी लें

ज्यादा से ज्यादा दही, छाछ, लस्सी आदि का सेवन फायदेमंद रहता है।

क्योंकि वेलेन्टाइन का मतलब सिर्फ रोमांस नहीं होता

वेलेंटाइन डे प्रेम का दिन है और हमारी दिक्कत यह है कि हम प्रेम का मतलब रोमांटिक रिश्तों तक सीमित कर देते हैं। हमारी फिल्मों से लेकर साहित्य तक में प्रेम की यही परिभाषा है और गीत भी ऐसे ही हैं मगर आप खुद विचार कीजिए कि क्या रोमांस में समेटकर पूरी जिन्दगी जीना मुमकिन है? यह सही है कि आपका साथी, आपका प्रेमी या आपकी प्रेमिका आपके जीवन में बेहद मायने रखते हैं मगर आप पूरी जिन्दगी इस एक रिश्ते में समेटकर नहीं जी सकते और न ही प्रेम का यह सच्चा स्वरूप है। प्रेम सृष्टि का विस्तार है जो आपको अपने उच्च स्तर तक ईश्वर तक ले जाने का रास्ता भी है तो आप ही सोचिए क्या ईश्वर आपको भावनायें सीमित करना सिखा सकते हैं? एक रिश्ता जो आपके पास है भी और नहीं भी है, उसके लिए उन तमाम चीजों को ठुकराना या खुद को संकुचित कर लेना आप इसे प्रेम कहेंगे या मोह कहेंगे। प्रेम कभी घृणा नहीं सिखाता और लोग अपने साथी को सम्पत्ति समझकर उसे बाँध लेना चाहते हैं तो यह आपकी कुंठा ही तो हुई। आप क्या 24 घंटे अपनी पत्नी, प्रेमी, पति या प्रेमिका के साथ रहते हैं या रह सकते हैं? प्रेम बाँधता नहीं, प्रेम बँधता नहीं, वह एक विशाल मानवीय दृष्टि है अपने तमाम बंधनों के बावजूद। प्रेम सिर्फ रोमांस नहीं है…प्रेम का अर्थ है मानवता से प्रेम। ये हम हैं जो इसमें अपनी कुंठा और घृणा डालते हैं और संदेह के आधार पर किसी का जीवन नर्क बनाकर कहते हैं कि ये हमने अपने प्रेम के लिए किया है। जो प्रेम हृदय को संवेदनशील न बनाये, दृष्टि को उदार न बनाये, वह प्रेम नहीं कुंठा है तो इस वेलेंटाइन डे पर प्रेम को एक नयी परिभाषा दीजिए। उन लोगों को अपने प्रेम के संसार में जगह दीजिए जो आपके साथ हैं और जिन्होंने आपको समझा है, जिनको आपकी जरूरत है। इस दिन आप अपने खास लोगों को, जिनसे आपका ज्यादा लगाव हो उनको भी आप प्यार का अहसास करवा सकते हैं।
आप जिन्हें हद से ज्यादा प्यार करते हैं उनके लिए भी आप वैलेंटाइन डे को खास बना सकते हैं। इनमें आपकी मां, पापा, घर के सदस्य, दोस्त, रिश्तेदार हो सकते हैं। उनको प्यार दीजिए जिनकी जिन्दगी में उपेक्षा है, अंधेरा है…देखिएगा आपको सुकून मिलेगा…हम आपको ऐसे ही खास लोगों के बारे में बता रहे हैं जिनके साथ आप इस दिन को खास बना सकते हैं –
माँ – पापा हैं खास
वैलेंटाइन डे पर आप अपने पार्टनर की बजाय अपनी मां और पापा को वैलेंटाइन होने का अहसास दिला सकते हैं। इसके लिए आप उन्हें बाहर डिनर करवाने लेकर जा सकते हैं या घर में उनके लिए खाना बना सकते हैं। उनकी पसंद का खाना बनेगा तो उन्हें और भी अच्छा लगेगा। इसके अलावा आप अपनी मां – पापा को इस दिन कोई खास गिफ्ट भी दे सकते हैं।


परिवार को वक्त दें
अक्सर ऑफिस और घर के काम में व्यस्त होने के कारण घरवालों को समय नहीं दें पाते है। ऐसे में आप वेलेंटाइन डे पर अपने ऑफिस से समय निकालने के साथ ही फोन या किसी दूसरे डिवाइस को दूर छोड़ दें और अपने परिवार वालों को समय दें। ऐसा करने से परिवार के सदस्यों और आपके बीच प्यार बढ़ेगा। वेलेंटाइन डे मौके पर आप अपने घरवालों के साथ मूवी देखने या बाहर साथ डिनर करने का प्लान भी बना सकते हैं।

बेस्ट फ्रेंड के साथ वक्त बितायें
इस दिन अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ आप टाइम बिता सकते हैं। ऐसा करने से उनको भी अच्छा महसूस होगा। आप वैलेंटाइन डे के मौके पर अपने बेस्ट फ्रेंड को फ्रेंडशिप बैंड भी तोहफे में सकते हैं। इसके अलावा आप अपने फ्रेंड के लिए सरप्राइज ट्रिप भी प्लान कर सकते हैं। दफ्तर में कोई सहयोगी आपका दोस्त हो तो अड्डा तो वहाँ भी जम सकता है।

वेलेंटाइन पर दिल की बात को बनाइये जायकेदार

वेलेंटाइन पिट्जा

सामग्री : 2 रेडीमेड पिज्जा बेस, 2-4 चम्मच पिज्जा सॅास, 2 बड़ा चम्मच छोटे टुकड़ों में कटे मोज्जरेला चीज,1 छोटे टुकड़ों मे कटी शिमला मिर्च, 2 छोटे टुकड़ों में कटे टमाटर,

विधि : सबसे पहले ओवन को 232 डिग्री सेंटीग्रेड पर प्री-हीट होने रखें। अब पिज्जा बेस को हार्ट शेप कटर से आकार में काट लें और तुरंत ही इनको बेकिंग शीट पर रखते जाएं। सभी पिज्जा बेस पर पिज्जा सॉस लगाएं और साथ ही इन पर शिमला मिर्च, टमाटर और चीज डालें।  तैयार बेस को प्री-हीटेड ओवन में 10 से 15 मिनट के लिए बेक करने रख दें । तय समय के बाद इसे बाहर निकालें और फटाफट सर्व करें।

एगलेस चॉकलेट वॉलनट ब्राउनी

सामग्री : 2 बड़े चम्मच मैदा, 2 बड़े चम्मच दूध, 2 बड़े चम्मच कोको पाउडर, एक बड़ा चम्मच पीनट बटर (ऐच्छिक), एक बड़े चम्मच कटे अखरोट, स्वादानुसार पिसी हुई चीनी,एक बड़ा चम्मच वेजिटेबल ऑयल

विधि  : सबसे पहले माइक्रोवेव सेफ डिश लें. इसमें मैदा, कोको पाउडर, चीनी और अखरोट डालकर मिक्स करें।  इसके बाद मैदे के मिश्रण में दूध, पीनट बटर और वेजिटेबल ऑयल डालकर अच्छी तरह चलाकर मिलाएं। मिश्रण को अच्छी तरह फेंटे और ध्यान रहे की इसमें गाँठ न पड़ें।अब माइक्रोवेव को हाई पर सेट करके मिश्रण को इसमें रख दें। इसे 1 से 2 मिनट तक माइक्रोवेव करें। इसके बाद ब्राउनी चेक करें जब वह अच्छी तरह तैयार हो जाए तो माइक्रोवेव बंद करके डिश को बाहर निकाल लें। लीजिए तैयार है चॉकलेट–वॉलनट ब्राउनी। इसका लुत्फ जब चाहें बच्चों के लिए या डेजर्ट स्पेशल में आइसक्रीम के साथ उठा लें।

 

प्रेम और प्रेम विवाह अपराध नहीं है, इस देश की संस्कृति है

अपराजिता फीचर डेस्क

ऑनर किलिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार गत 5 फरवरी को एक बार फिर सख्त  कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों द्वारा कानून अपने हाथ में लेने की वजह से खरी खोटी सुनाई है। कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वह जोड़े को इन खाप कार्रवाईयों से बचाए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने मामले की सुनवाई के दौरान साफ-साफ कहा कि अगर कोई दो वयस्‍क शादी करते हैं, तो कोई भी तीसरा व्यक्ति दखल नहीं दे सकता, चाहे वह परिवार वाला हो या समाज या फिर और कोई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह एक उच्चस्तरीय समिति बनाने पर विचार कर रहा है जिसके तहत अंतरजातीय और अंतरधर्म में शादी करने वाले जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही यह समिति जोड़े को खाप पंचायतों, अभिभावकों और रिश्तेदारों की सभी तरह की हिंसा से सुरक्षित रखने का काम करेगा। ये इस देश का दुर्भाग्य है कि अब अदालतें समाज के वहशीपने ये युवा पीढ़ी को बचाने के लिए उतरने पर मजबूर हैं। विचलित कर देने वाले आंकड़े बताते हैं कि 2014 से 2015 के दरमियान ‘ऑनर किलिंग’ में 800 फीसद का इजाफा हुआ है और आप कोई भी अखबार खोलें, ऐसा लगता है कि उसमें अंतर-सामुदायिक विवाह पर हत्या या हिंसा की एक नई रिपोर्ट जरूर देखने को मिल जाएगी।

प्रेम करना इस देश में गुनाह माना जाता है…और झूठी प्रतिष्ठा का हवाला देकर युवाओं को कभी अलग कर देना या फिर मार डालने को यहाँ भारतीय परम्परा माना जाता है। हाल ही में अंकित – सलीमा की प्रेम कहानी को जिस तरह से नोंच डाला गया और वह भी धर्म के नाम पर….वह वीभत्स ही था। इस कांड से मुझे रिजवानुर और प्रियंका की याद आ गयी। मेरा मानना है कि दो दिलों को अलग करने से बड़ा कोई पाप नहीं है। ये आश्चर्य है न कि लोग परम्परा की बात करते हैं, देवताओं की बात करते हैं मगर इनके शब्दकोष में वह शब्द ही नहीं है जो मनुष्य को मनुष्य बनाता है….और वह शब्द है प्रेम….इस देश में गंधर्व विवाह प्रेम विवाह का ही मूल रूप है और ऐसे कई प्रेम विवाह हुए हैं। विवाह की आधारशिला भले ही राज्य का विस्तार हो या राजनीति की माँग मगर विजातीय विवाह भी इसे देश में आदिकाल से होते आ रहे हैं। दरअसल, बात जब पुराणों की हो रही है तो हम आपको उदाहरण भी वहीं से देंगे और तथ्य है कि इस देश में विजातीय या यूँ कहें कि अंतरजातीय विवाह हमेशा से होते रहे हैं और स्वयंबर की परम्परा बताती है कि आपने परम्पराओं को अपने स्वार्थ के लिए किस कदर चालाकी से तोड़ा – मरोड़ा है। शांतनु याद हैं न….भरतवंशी….हस्तिनापुर के महाराजा जिनका विवाह पहले गंगा से हुआ था और बाद में सत्यवती से उन्होंने विवाह किया जो कि एक मत्स्यकन्या थी….। कभी ब्राह्मण कन्याओं से तो कभी तथाकथित निम्न कुल में भी विवाह करने से देवताओं को हिचक नहीं हुई। कृष्ण और जाम्बवती का विवाह इसका  उदाहरण है….जाम्बवती तो जाम्बवान की पुत्री थी जो रीछ थे..। कृष्ण वो थे जिन्होंने प्रेम को विविध रूपों में प्रतिष्ठित किया और महिलाओं का सम्मान किया….आपको उनकी रासलीला ही दिखती है तो ये आपका दृष्टिदोष हो सकता है। रुक्मिणी का पत्र पाकर उन्होंने रुक्मिणी की इच्छा का मान रखा और सुभद्रा और अर्जुन के विवाह के पीछे भी उनकी बड़ी भूमिका है। अब कृष्ण को भगवान बनाकर उनकी पूजा करने वाले उनकी इस राह पर क्यों नहीं चलते….ये तो वे ही जानें…। क्या प्रेम की पूजा सिर्फ किताबों और फिल्मों में ही होनी चाहिए….आप उसे खुद क्यों नहीं स्वीकार कर पाते? पांडु पुत्र भीम ने हिडिम्बा नामक राक्षसी से विवाह किया तो अर्जुन ने नागकन्या उलूपी से….क्या ये विजातीय विवाह नहीं है? शिवरात्रि आप खूब मनाते हैं तो क्या शिव – पार्वती की जोड़ी अंतरजातीय विवाह का उदाहरण नहीं है। ये वह देश है जिसने पूरी दुनिया को शून्य ही नहीं दिया बल्कि कामसूत्र भी दिया…..और उसके ज्वलंत उदाहरण हैं। ये वह देश हैं जहाँ राधा –कृष्ण के आदर्श को खोजा तो जाता है मगर जब आपके बच्चे इस राह पर चलना चाहते हैं तो आप सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आते हैं। उस समाज की बात करते हैं जिसका आपके बच्चों की जिन्दगी से कोई रिश्ता ही नहीं है। एक बात और ध्यान देने वाली है…इस तरह के मामलों में जान लड़कों की भी जाती है और कई बार तो दोनों को मार डाला जाता है।

अग्निमित्र (149-141 ई. पू.) शुंग वंश का दूसरा सम्राट था। वह शुंग वंश के संस्थापक सेनापति पुष्यमित्र शुंग का पुत्र था। पुष्यमित्र के पश्चात् 149 ई. पू. में अग्निमित्र शुंग राजसिंहासन पर बैठा। पुष्यमित्र के राजत्वकाल में ही वह विदिशा का ‘गोप्ता’ बनाया गया था और वहाँ के शासन का सारा कार्य यहीं से देखता था। आधुनिक समय में विदिशा को भिलसा कहा जाता है। ऐतिहासिक तथ्य अग्निमित्र के विषय में जो कुछ ऐतिहासिक तथ्य सामने आये हैं, उनका आधार पुराण तथा कालीदास की सुप्रसिद्ध रचना ‘मालविकाग्निमित्र’ और उत्तरी पंचाल (रुहेलखंड) तथा उत्तर कौशल आदि से प्राप्त मुद्राएँ हैं।

‘मालविकाग्निमित्र’ से पता चलता है कि, विदर्भ की राजकुमारी ‘मालविका’ से अग्निमित्र ने विवाह किया था। यह उसकी तीसरी पत्नी थी। उसकी पहली दो पत्नियाँ ‘धारिणी’ और ‘इरावती’ थीं। इस नाटक से यवन शासकों के साथ एक युद्ध का भी पता चलता है, जिसका नायकत्व अग्निमित्र के पुत्र वसुमित्र ने किया था। राज्यकाल पुराणों में अग्निमित्र का राज्यकाल आठ वर्ष दिया हुआ है।

चन्द्रगुप्त मौर्य ने हेलेना से विवाह किया था और यही हेलेना बिन्दुसार की माता बनीं। इसके अतिरिक्त कच – देवयानी, नल – दमयंती, पृथ्वीराज – संयोगिता से लेकर लैला -मजनूं, हीर – रांझा, सोहनी -महिवाल तक की कहानियाँ इसी भारत की देन हैं। आज भी सचिन – अंजलि, सारा – सचिन पायलट, गौरी – शाहरुख, राजीव – सोनिया जैसे तमाम उदाहरण हमारे सामने हैं तो उसे अपनाने में अहंकार को ठेस क्यों पहुँचनी चाहिए। ऐसे अनगिनत उदाहरण हमारे इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हमने यहाँ ऐसे उदाहरण दिये हैं जो हमारे देश में प्राचीन समय से बिखरे हुए अंतरजातीय और विजातीय विवाह की परम्परा को सामने लाने वाले हैं तो अगली बार प्रेम को भारतीय संस्कृति और परम्परा से काटकर देखने से पहले साहित्य और इतिहास पर नजर जरूर डालिये और उसके बाद सोचिए कि आप प्रेम को अपराध मानकर जब हत्या करते हैं तो क्या वह आपकी संस्कृति है या आपकी हठधर्मिता क्योंकि सच तो यह है कि हमारी संस्कृति ने हमें प्रेम करना ही सिखाया है और यह सामाजिक होते हुए भी व्यक्तिगत मसला है। जब यह व्यक्तिगत मसला है तो क्या समाज के नाम पर युवाओं की हत्या करना क्या पाप नहीं है? खुद को टटोलिए और भारतीय हैं तो भारत की उदार परम्पराओं को आत्मसात कर उस राह पर चलिए।

 

पीरियड्स…..बदलना तो होगा हमको

जूही कर्ण

आज गुड़िया स्कूल नही गयी,वह घर के एक कोने में चुपके से छिप कर बैठी थी,जैसे उसने कोई चोरी की हो।।पिताजी का खेत से वापस आने का समय हो चला था,गुड़िया घड़ी की ओर बार-२ देख रही थी जैसे वो चाह रही हो घड़ी का कांटा रुके जाये या फिर पिताजी आज देर से घर आये,बहरहाल,वो पल आ ही गया जिशका उसे इंतजार था,दरवाजे की कुंडी कोई खटखटाता है,गुड़िया की सांसे तेज चलने लगती है,धड़कन जोड़ो से धड़कने लगता है मानो पुलिस आयी हो चोर को पकड़ने ।।
दरवाजा खोलते ही वह पिताजी के लिए पानी लाने रसोई में(लंगड़ाते हुए) चली जाती है
पिताजी उससे पूछते है,गुड़िया आज तुम विद्यालय नही गयी,न घर साफ-सुथरा है,कल के बासी फूल भी पूजा घर में पड़ा हुआ है तुम ठीक तो हो न..??
गुड़िया नज़रे झुका कर कहती है जी पिताजी बस पेट में थोडा दर्द है,फिर वह खाना परोस कर एक तरफ आ जाती है ।।
खाना खाते -खाते पिताजी कहते हैं बेटा जरा आचार लाना,यह सुनते ही गुड़िया अचम्भ हो जाती है,और दौड़ते हुए घर के पीछे खेत के तरफ भाग जाती है ।।(क्योंकि आज उसे पीरियड था,उसकी सहेलियों ने उसे बता रखा था माहवारी के दिनों में अचार,नमक छूने से वह खराब हो जाते हैं,पूजा-पाठ भी नही किया जाता)
पिताजी भी खाना छोड़कर गुड़िया के तरफ दौड़ते है,अचानक उनके पैर रुक जाते है खेत में टँगे 2-3 पुराने कपड़े के टुकड़े थे जिस पर खून के धब्बे लगे हुए थे,जो हवा में लहराते हुए धूप की किरणों में सुख रहे थे ।। अब पिताजी सब कुछ समझ चुके थे,उनके आंखों से आँसू बहने लगे । अपने कदमों को पीछे मोड़कर वो बुदबुदाते हुए(मेरी बेटी बड़ी हो गयी) अपने कमरे में चले गयें,कमरे में एक पुरानी सी संदूक पड़ी थी,जिसे खोलकर वो एक सामान निकालते है,(उनकी पत्नी आखिरी दम छोड़ते हुए उनके हाथों में एक सामान दिया था,और कहा था जब मेरी बेटी बढ़ साल की हो जाये,उस दिन उसके हाथ में तुम यह दे देना,वह समान सैनेट्री पैड था),उसे ले कर वे गुड़िया के पास जाते है और समान देते हुए कहते है,ये लो तुम्हारी माँ ने तुम्हे देने को कहा था ।।
गुड़िया उत्साहित होकर जैसे ही उस समान को खोलती है,रोते हुए पिता के गले लग जाती है,गुड़िया की सारी लाज लज्जा जैसे बहती नदी में बह जाती है ।।
आज भी हमारे भारतवर्ष में लगभग 70% महिलाएं (सभी आयु वर्ग के) सैनेट्री पैड के इस्तेमाल के बारे में नही जानती,मासिक धर्म के समय वे पुराने कपड़े,राख आदि का इस्तेमाल करती हैं, जिस कारण देश में हर साल लाखों महिलाएं,”सवाईकल कैंसर” जैसे रोग से ग्रसित होकर मर जाती हैं,वे लोकलाज के डर से भी इससे दूरी बनाए रखती हैं ।। आज हम सभी युवाओं को ग्राम-घरों में जाकर माहवारी के दिनों में पैड के इस्तेमाल के बारे में प्रचार करनी चाहिए,स्कूल-कॉलेज में जाकर छात्राओं को जागरूक करनी चाहिए ।।
“हम बदलेंगे तभी हमारा देश बदलेगा

जब एक पुरुष ने जीती महिला सौंदर्य प्रतियोगिता

22 साल की एक फैशन मॉडल ‘मिस वर्चुअल कज़ाकिस्तान’ के फाइनल राउंड में पहुंच गईं, लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि वो एक महिला नहीं बल्कि पुरुष हैं।

अरीना अलीयेवा (असली नाम, ईले डियागिलेव) ‘मिस वर्चुअल कज़ाकिस्तान’ के लिए की जा रही ऑनलइन प्रतियोगिता के फ़ाइनल में पहुंचे। उनकी तस्वीर को लोगों से 2000 से अधिक वोट मिले।

इस स्तर पर पहुंचने के बाद अलीयेवा को ‘मिस वर्चुअल शमकंद’ बना दिया गया। शमकंद दक्षिणी कज़ाकिस्तान प्रांत की राजधानी है लेकिन अलीयेवा की ये खुशी थोड़ी देर के लिए थी क्योंकि आयोजकों ने ग़लत जानकारी देने के आधार पर उन्हें अयोग्य करार दिया। ये क्षेत्रीय उपाधि और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए अब आयोजकों ने ईकेरिम तमिरखानोवा के नाम का प्रस्ताव दिया है जिन्हें 1,975 वोट मिले थे।

प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने के दो दिन बाद ईले डियागिलेव ने खुद स्वीकार किया कि वो महिला नहीं हैं और अरीना अलीयेवा “उनकी टीम का प्रोजेक्ट” था।

वो कहते हैं, “अधिकतर महलाएं सोचती हैं कि खूबसूरत दिखना ही सबसे हम बात है और खूबसबूरत दिखना मुश्किल कम है। लेकिन मैंने अपने दोस्तों से कहा था कि पुरुष भी महिला से खूबसूरत हो सकता है।”

“मैं फैशन जगत में तब से हूं जब मैं 17 साल का था, मैं मॉडल का काम करता हूं। मैं मेकअप के ज़रिए खुद को आसानी से बदल सकता हूं और इसीलिए मैंने एक फोटोग्राफर, हेयरस्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट को बुलाया और बस अरीना की तस्वीर तैयार थी।”

“मैं फाइनल में पहुंचा तो मुझे खुद बेहद आश्चर्य हुआ।”

आम तौर पर लोगों ने इंस्टाग्राम पर आयोजित इस प्रतियोगिता को काफी पसंद किया है। कईयों ने डियागिलेव को एक अपवाद बताया और कहा कि वो “कई महिलाओं से कहीं अधिक खूबसूरत हैं।

लेकिन सभी लोगों ने सकारात्मक टिप्पणियां नहीं की. इंस्टाग्राम के एक यूज़र ने कहा, “ये एक और मामला है जब ऐसी प्रतियोगिताओं को कमतर कर देखते हैं और कहते हैं कि ‘आपने एक देश के तौर पर हमें अपमानित किया है।”

एक व्यक्ति ने लिखा, “मुझे लगता है कि ये प्रचार का एक तरीका है और लोग इसके बाद प्रतियोगिता के बारे में बात करेंगे।”

(साभार – बीबीसी हिन्दी)

राजनीति की गलियों से इश्क के मकां तक….सचिन – सारा का प्यार

वर्ष 2004 में मकर संक्रांति का त्योहार गुजर चुका था। दिल्ली में ठंड जोरों पर थी. 20, केनिंग लेन में गहमागहमी थी। अगले दिन यहां ऐसी शादी होने वाली थी, जिसपर सत्ता के गलियारों की भी खास नजर थी. 15 जनवरी को ये घर शादी का गवाह बना। दूल्हा थे सचिन पायलट और दूल्हन सारा अब्दुल्ला. ये घर था दौसा से कांग्रेस सांसद रमा पायलट का… लोग कम थे. सुरक्षा ज्यादा. सारा के पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला लंदन में थे। भाई उमर अब्दुल्ला अंपेडिसाइटस के इलाज के लिए दिल्ली के बत्रा हास्पिटल में भर्ती हो चुके थे यानि वधू पक्ष की ओर से किसी ने शादी में शिरकत नहीं की।
ये शादी अब्दुल्ला परिवार को मंजूर नहीं थी। जिस देश में रोज धर्म और जातियों के नाम पर तलवारें खिंचती हों, उसमें ये शादी कुछ नहीं बल्कि काफी अलग और खास थी. क्योंकि लड़का हिन्दू था और लड़की मुसलमान।
शादी हुई. सचिन और सारा पति-पत्नी बन गए। शादी को अब 14 साल हो चुके हैं। दोनों के दो बेटे हो चुके हैं. कभी सियासत में कदम नहीं रखने की बात करने वाले सचिन अब देश के संभावनाशील युवा नेता के रूप में धाक जमा चुके हैं। सारा सामाजिक कामों में व्यस्त रहती हैं। दोनों परफेक्ट कपल हैं. दोनों की शादी को कोई फिल्मी स्टाइल वाली शादी कहता है तो कोई इसे प्यार की मिसाल मानता है। वैसे दोनों के प्यार और शादी की कहानी बेहद खूबसूरत लवस्टोरी लगती है।

आसान नहीं थी डगर
ये प्रेम कहानी इतनी आसान थी नहीं। मोड़ इतने टेढ़े और मुश्किल थे कि उन पर संतुलन बनाकर चलना और मंजिल तक पहुंच पाना मुश्किल ही नहीं असंभव सा लग रहा था। सारा और सचिन पायलट को शादी के कुछ ही महीनों बाद रॉन्डिवू विद सिमी ग्रेवाल शो में आमंत्रित किया गया। दोनों शादी के बाद पहली बार किसी टीवी शो पर गए थे। सारा ने कहा, ‘हम दोनों के परिवारों में दोस्ताना था और मेल-मुलाकातें होती रहती थीं. लिहाजा हम दोनों एक दूसरे को बचपन से ही जानते थे।’

लेकिन ये प्रेम कहानी शुरू कब हुई? शायद शादी के तीन साल से कुछ अधिक समय पहले। वो दोनों लंदन में थे. किसी पारिवारिक क्रार्यक्रम में मिले थे… और एक दूसरे के प्रति आकर्षण महसूस किया था। दोनों नजदीक आए। रोमांस शुरू हुआ। तब तक सचिन लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी कर भारत आ चुके थे। अब सारा पढ़ाई के लिए लंदन में थीं।

दोनों परिवारों में हुआ तगड़ा विरोध
दोनों ने महसूस किया कि वो एक दूसरे के लिए ही बने हैं। उन्हें लगने लगा कि अब शादी कर लेनी चाहिए। ये बात अब घर में बतानी थी। उन्हें अंदाजा तक नहीं था कि जब वो अपने परिवारों के सामने ये सब बताएंगे तो विरोध की चिंगारियां भी निकलने लगेंगी।

सारा ने सिमी ग्रेवाल से कहा, “हम दोनों के पिता अच्छे दोस्त थे। लंबे समय से एक दूसरे को जानते थे। लेकिन दिक्कतें शुरू हो गईं. दोनों परिवारों में विरोध हुआ। सबकुछ बहुत कठिन हो गया था। ऐसा लगने लगा कि शायद हम शादी कर ही नहीं पाएं। हमें भी नहीं मालूम था कि क्या कुछ कैसे होगा। कैसे रास्ता बनेगा। हम कुछ गलत नहीं कर रहे थे। हमारे सामने दो रास्ते थे या तो सबको खुश करें और इंतजार करें या फिर ये तय करें कि जो करना है तो कर लिया जाए।”

हैरान करने वाला था अब्दुल्ला परिवार का रुख
सचिन तो अपने परिवार को मनाने में सफल हो गए, लेकिन सारा के लिए ये बिल्कुल संभव नहीं हो सका। उनके पिता और भाई दोनों ने प्रेम विवाह किया था। पिता ने कैथोलिक क्रिश्चियन महिला से शादी की थी तो भाई ने सिख से। उनके घर में धर्म की कहीं कोई कट्टरता जैसा माहौल नहीं था, लेकिन पिता और भाई को ये रिश्ता कतई मंजूर नहीं था। हालांकि सचिन को अब्दुल्ला परिवार में पसंद किया जाता था।

एक कश्मीरी पत्रकार कहते हैं, “अब्दुल्ला परिवार को शायद लग रहा था कि जम्मू कश्मीर के मुसलमान पसंद नहीं करेंगे कि उनके परिवार की लड़की एक हिन्दू से शादी करे।”

यहां तक की अब्दुल्ला परिवार के मित्रों के लिए ये हैरानी की बात थी, क्योंकि इस परिवार को हमेशा से खुले दिमाग वाला माना जाता रहा था। मित्रों के लिए ये अचरज की बात थी कि फारूक शादी के इतने खिलाफ क्यों हैं। मीडिया में तब यहां तक खबरें आईं कि फारूक शादी होने पर बेटी से रिश्ता तोड़ लेंगे। हालांकि अब्दुल्ला परिवार की कड़वाहट कुछ ही महीनों में खत्म हो गई। दोनों परिवारों में रिश्ते सामान्य हो गए। फारूक उसके बाद कई बार सचिन के साथ राजनीतिक मंच पर भी नजर आए.

शादी के दिन अब्दुल्ला परिवार का नहीं होना यही जाहिर भी कर रहा था। शादी को लेकर सारा प्रतिबद्ध थीं। लिहाजा शादी हुई। शादी के समय सचिन एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर रहे थे। समय का फेर देखिए कि शादी के कुछ ही महीनों बाद लोकसभा चुनाव हुए। सचिन को राजनीति में आना पड़ा। उन्होंने राजस्थान की दौसा सीट से चुनाव लड़ा। 26 साल की उम्र में वह बड़े अंतर से जीत हासिलकर लोकसभा पहुंचे। यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल में वह कॅरपोरेट मामलों के मंत्री बनाए गए।

मंत्रालय में तब उनके पर्सनल सेक्रेटरी (नाम नहीं देने का अनुरोध) रहे एक शख्स ने इस दंपति को करीब से देखा। वह कहते हैं, “ऐसा लगता है कि दोनों एक दूसरे को खूब समझते हैं। आमतौर पर राजनीति में रहने पर परिवार के लिए समय बहुत कम हो जाता है, लेकिन मैंने कभी सारा मैडम को शिकायत करते नहीं देखा।” उन्होंने एक वाकया बताया, “सचिन सर के पहले बेटे का पहला बर्थ-डे था। हर कोई वर्थ-डे में आया था, लेकिन सर नहीं पहुंच सके. मौसम की वजह से फ्लाइट टल गई। इसी तरह दूसरे बर्थ-डे पर भी हुआ सारा मैडम ने कोई शिकायत नहीं की. वह काफी समझदार हैं.”

वह कहते हैं,  “एक कपल के रूप में मुझे अगर दोनों को नंबर देना हो तो दस में दस नंबर दूंगा।” वह सारा पायलट से जुड़ा एक और वाकया बताया, “सचिन पायलट के घर पर काम करने वाले एक सर्वेंट के नवजात बेटे के दिल में छेद था। सारा खुद उसे लेकर एम्स में डॉक्टर को दिखाने गईं। साथ सचिन सर को भी ले गईं।”

सारा और सचिन के दो बेटे हैं- आरान और विहान. सारा ने पिछले कुछ सालों में महिलाओं के लिए समाजसेवा करके अपनी एक पहचान बनाई है। वह जानी मानी योगा इंस्ट्रक्टर भी हैं. सचिन राजस्थान की राजनीति में व्यस्त हैं। हाल ही में वहां तीन सीटों पर हुए उपचुनावों में कांग्रेस की जीत का सेहरा सचिन के सिर ही बंधा है।

(साभार)

भगवान शिव-पार्वती की पुत्री….अशोक सुंदरी

भगवान शिव की एक पुत्री भी थीं। जिनका नाम था ‘अशोक सुन्दरी’ इनका विवाह राजा नहुष से हुआ था। अशोक सुंदरी देवकन्या हैं, इस बात का उल्लेख पद्मपुराण में मिलता है, अशोक सुंदरी को भगवान शिव और पार्वती की पुत्री बताया गया है।

दरअसल माता पार्वती के अकेलेपन को दूर करने हेतु कल्पवृक्ष नामक पेड़ के द्वारा ही अशोक सुंदरी की रचना हुई थी। पद्म पुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती विश्व में सबसे सुंदर उद्यान में जाने के लिए भगवान शिव से कहा। तब भगवान शिव पार्वती को नंदनवन ले गए, वहां माता को कल्पवृक्ष से लगाव हो गया और उन्‍होंने उस वृक्ष को लेकर कैलाश आ गईं।

कल्पवृक्ष मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष है, पार्वती ने अपने अकेलेपन को दूर करने हेतु उस वृक्ष से यह वर मांगा कि उन्‍हें एक कन्या प्राप्त हो, तब कल्पवृक्ष द्वारा अशोक सुंदरी का जन्म हुआ। माता पार्वती ने उस कन्या को वरदान दिया कि उसका विवाह देवराज इंद्र जैसे शक्तिशाली युवक से होगा।

एक बार अशोक सुंदरी अपने दासियों के साथ नंदनवन में विचरण कर रहीं थीं तभी वहां हुंड नामक राक्षस का आया। जो अशोक सुंदरी के सुंदरता से मोहित हो गया और उसने अशोक सुंदरी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा।

लेकिन अशोक सुंदरी ने अपने भविष्य के बारे में बताते हुए विवाह के बारे में भी बताया कि उनका विवाह नहुष से ही होगा। यह सुनकर राक्षस ने कहा कि वह नहुष को मार डालेगा। ऐसा सुनकर अशोक सुंदरी ने राक्षस को शाप दिया कि उसकी मृत्यु नहुष के हाथों ही होगी। वह घबरा गया जिसके चलते उसने नहुष का अपहरण कर लिया।

उस समय नहुष काफी छोटे थे। नहुष को राक्षस हुंड की एक दासी ने बचाया। इस तरह महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में नहुष बड़े हुए और उन्होंने हुंड का वध किया। इसके बाद नहुष तथा अशोक सुंदरी का विवाह हुआ तथा वह ययाति जैसे वीर पुत्र तथा सौ रूपवती कन्याओं की अशोक सुंदरी माता बनीं।

 

वृन्दावन में हैं अनोखा मंदिर……प्रेम मंदिर

प्रेम मंदिर उतर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले की प्रसिद्ध नगरी वृंदावन में एक स्थित एक विशाल और खूबसूरत मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज ने भगवान कृष्ण और राधा के मन्दिर के रूप में करवाया था। इस मंदिर का निर्माण पूरे विश्व में प्रेम प्रेम का सन्देश देने के लिए भगवान श्रीकृष्ण व राधा रानी की दिव्य प्रेम लीलाओं की साक्षी वृंदावन नगरी में करवाया गया था। ये मंदिर लीलाधर श्री कृष्ण को समर्पित है. ये एक धर्मिक और आध्यात्मिक परिसर है जो मथुरा जिले के वृन्दावन के बाहरी इलाके में 54-एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस दिव्य मंदिर की निर्माण नींव जनवरी 2001 में श्री कृपालु जी महाराज द्वारा रखी गयी थी। इस मंदिर के निर्माण कार्य को समाप्त होने में 11 वर्ष का समय और लगभग 100 करोड़ की धनराशि का व्यय हुआ था। प्रेम मंदिर का उद्घाटन समारोह 15 फरवरी से 17 फरवरी 2012 के मध्य आयोजित किया गया था।
इस मंदिर के निर्माण में इटैलियन करारा संगमरमर का प्रयोग किया गया है। प्रेम मंदिर के भव्य भवन का निर्माण राजस्थान और उत्तर प्रदेश के हज़ारो शिल्पकारों ने मिल कर किया था. इस पुरे मंदिर का मंदिर का निर्माण सफ़ेद संगमरमर द्वारा किया गया है जिसकी रोशनी सफेद दूधिया रंग की है। प्रेम मंदिर दिल्ली-आगरा-कोलकाता के NH – 2 पर छटीकरा से लगभग 3 किलोमीटर वृंदावन की ओर भक्तिवेदांत स्वामी मार्ग पर स्थित है।
वृंदावन का ये मंदिर भारतीय शिल्पकला का एक अनूठा और नायाब उदाहरण है। यहाँ के पूज्य देवता श्री राधा गोविन्द (राधा कृष्णा) और सीता राम है। प्रेम मंदिर के नजदीक 73000 वर्ग फीट के क्षेत्रफल में फैला एक स्तंभ रहित, गुबंद आकार के सत्संग कक्ष (hall) का निर्माण किया गया है जिसमे एक समय से 25000 व्यक्ति समा सकते है।

इतिहास :-सं 1946, में जब कृपालु महाराज मात्र 24 वर्ष के थे, उन्होंने वृंदावन में एक विशाल मंदिर के निर्माण करने की शपथ ली थी। अपने अन्य दोस्त, गरगरा के श्री राम शंकर शर्मा, मानगढ़ के श्री लक्ष्मी नारायण और इटौरा के श्री सूर्य भूषण के साथ श्री महाराज जी मंदिरों के दर्शन करने के लिया वृंदावन गए। उस समय ये सभी मित्र संस्कृत व्याकरण का अध्ययन कर रहे थे। जब उन्होंने रंग जी मंदिर को देखा तो उन्होंने अपने मन में विचार किया की मुझे भी वृंदावन में एक विशाल मंदिर का निर्माण करना चाहिए। महाराज जी की ये बात सुनकर उनके मित्र उनका उपहास करने लगे और कहने लगे की मंदिर बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं है।
कई बार उनके दोस्तों को ये एहसास हुआ था की वो कोई साधारण बालक नहीं है, बल्कि एक दैवीय शक्ति वाले व्यक्ति है लेकिन इस बार उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की वास्तव में उनके लिए ये संभव है। 14 जनवरी 2001 को हज़ारो भक्तों की उपस्थिति में उन्होंने इस दिव्य मंदिर की नींव रखी। लगभग 12 वर्ष का समय और 1000 से अधिक श्रमिकों की मेहनत के बाद प्रेम मंदिर को एक आकार डिजाइन दिया गया। इसके अलावा छैनी और हथोड़े की मदद से इस विशाल मंदिर के भीतरी परिसर को तराशा गया था। इसके अतिरिक्त श्री राधा कृष्ण की अद्भुत लीलाओं को तराशने के लिए कुछ रोबोटिक्स मशीनों का भी प्रयोग किया गया था। इस तरह की विशेष मशीनों का प्रयोग इससे पूर्व भारत में नहीं किया गया था। वृंदावन स्थल का विकास स्वयं श्री कृपालु जी महाराज द्वारा किया गया था जिनका खुद का आश्रम वृंदावन में ही स्थित है।

वास्तुकला और डिजाइन :-

इस मंदिर का निर्माण और इसकी कल्पना केवल और केवल महाराज द्वारा की गयी थी। महाराज के विचार और दृष्टिकोण को प्रसिद्ध सोमपुरा परिवार के महान मूर्तिकार श्री सुमन राय त्रिवेदी और उनके पुत्र श्री मनोज सुमन राय त्रिवेदी द्वारा दोहराया गया जिन्हे गुजरात के महान मंदिर सोमनाथ के रचयता का सम्मान (गौरव) दिया जाता है। वृंदावन में स्थित श्री राधा कृष्ण और सीता राम का ये अनोखा मंदिर प्राचीन भारतीय कला और वास्तुकला को प्रदर्शित करता है। प्रेम मंदिर का पूर्ण निर्माण इटैलियन पत्थर से किया गया है, जिसमे अद्भुत नक्काशी और परिष्कृत शिल्पकला और कीमती पत्थरो से जडे हुए नमूने देखने को मिलते है।
ये मंदिर वृंदावन की एक अद्वितीय आध्यात्मिक संरचना है। इस मंदिर के ध्वज को मिलाकर इसकी ऊँचाई 125 फीट. है जिसमे 190 फीट लम्बा और 128 फीट चौड़ा चबूतरा है. मंदिर के चबूतरे पर एक परिक्रमा मार्ग का निर्माण किया गया है जिसके द्वारा श्री कृष्ण राधा की लीलाओं के 48 स्तंभों की खूबसूरती का दृश्य देखा जा सकता है जिनका निर्माण मंदिर की बाहरी दीवारों पर किया गया है। मंदिर की दीवारें 3.25 ft. मोटी है। मंदिर की गर्भ गृह की दीवार की मोटाई 8 फीट है जिस पर एक विशाल शिखर, एक स्वर्ण कलश और एक ध्वज रखा गया है। मंदिर की बाहरी परिसर में 84 स्तंभ है जो श्री कृष्ण की लीलाओं को प्रदर्शित करते है जिनका उल्लेख श्रीमद्भगवद में किया गया है।

 

किशोरों और युवाओं की समस्या सुलझायेगी सिनी की टीनलाइन

 

हम जो सोचते हैं और जो कहना चाहते हैं या कई बार हमारे साथ कुछ ऐसा होता है जिसकी शिकायत हम पहुँचाना चाहते हैं। ऐसा बच्चों के साथ भी होता है और किशोरावस्था में भी होता है…।किशोरावस्था मतलब टीनेजर्स…एक ऐसी उम्र जो उलझन भरी होती है जिसकी अपनी समस्यायें होती हैं, दिक्कतें होती हैं। दरअसल, 13 से 19 साल के भीतर हमारे शरीर में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं और आवाज भी बदल जाती है…मगर अपनी बात समझा पाना बहुत बार टीनेजर्स के लिए मुश्किल हो जाता है क्योंकि न तो आप छोटे रह ।जाते हैं और न ही इतने बड़े हो पाते हैं कि अपने फैसले खुद ले सकें। ये एक आम समस्या है मगर टीनेजर्स का एक बड़ा वर्ग है जो हमारे आस – पास है और बहुत सी समस्याओं से जूझ रहा है क्योंकि उसके पास हमारी तरह शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और समाज में आगे बढ़ने की सुविधा और पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यही स्थिति युवाओं की भी है जबकि इस उम्र में भी मार्गदर्शन की जरूरत पड़ती है। इन सारी समस्याओं से निपटने के लिए बहुत सी संस्थायें काम कर रही हैं और इनमें ही शामिल है सिनी। सिनी ने हाल ही में किशोरों और कम उम्र के युवाओं के लिए देश की पहली टॉल फ्री हेल्पलाइन सेवा शुरू की। सिनी ने यह नयी परिसेवा अपने 43वें स्थापना दिवस पर यह परिसेवा शुरू की जिसका उद्घाटन राज्य की स्वास्थ्य राज्य मंत्री चन्द्रिमा भट्टाचार्य ने किया।

दरअसल सिनी ने 2002 में टीनलाइन शुरू की थी जो कि एक काउंसिलिंग सेवा थी। इसके तहत युवाओ कों स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य के साथ मनोसामाजिक यानि साइको सोशल, भावनात्मक और पारिवारिक समस्याओं से संबंधित परामर्श दिये जाते थे। काउंसिलिंग इस उम्र में युवाओं को समस्याओं को पहचानकर उनका निवारण करने में सहायक होती है। इससे वे सामाजिक. मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत होकर आगे बढ़ पाते हैं  और खुद को अभिव्यक्त कर पाते हैं। सिनी द्वारा हाल में पेश की गयी टॉल फ्री टेलि काउंसिलिंग सेवा इसी टीनलाइन के कार्यों का विस्तार है। आप टॉल फ्री नम्बर (1800-121-5323) पर अपनी समस्यायें बता सकते हैं।

सिनी की असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. इन्द्राणी भट्टाचार्य ने बताया कि इस हेल्पलाइन पर युवाओं के अतिरिक्त अभिभावकों पर भी परामर्श दिया जायेगा जिससे वे अपने बच्चों को समझकर उनकी समस्यायें सुलझा सकें।

आरम्भिक तौर पर यह काउंसिलिंग 5 दिनों तक यानि सोमवार से शुक्रवार (सुबह 9.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक) 10 साल से 24 साल तक के किशोरों और युवाओं को दी जायेगी। सिनी टीनलाइन अभिभावकों को भी परामर्श देगी। इसके अतिरिक्त फेस टू फेस काउंसिलिंग सेवा भी जारी रहेगी यानि आप अपनी समस्यायें मिलकर बता सकते हैं और सलाह भी ले सकते हैं।

सुनना तो जरूरी है

हमारी समस्याओं का समाधान एक ही है कि हम सुनें और बात करें। जरूरी है कि बच्चों और टीनेजर्स व युवाओं की बात सुनी जाये तो कहीं न कहीं आपको भी अपने अभिभावकों को सुनना होगा, समझना होगा क्योंकि जुड़ने का रास्ता तो यही है और जुड़कर आगे बढ़ना ही समाधान भी है।