Saturday, October 3, 2026
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सम्मानित किये गये संगीतज्ञ पद्मश्री विजय किचलू

कोलकाता : भारतीय भाषा परिषद द्वारा प्रख्यात संगीतज्ञ पं. विजय किचलू को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पंडित विजय किचलू ने कहा कि संगीत का साहित्य से गहरा संबंध है। एक-दूसरे के बिना दोनों अधूरे हैं। इसलिए संगीतकारों को साहित्य के शब्दों का महत्व समझना चाहिए। पंडित विजय किचलू को सारी दुनिया शास्त्रीय संगीत के संरक्षक और संवर्द्धक के रूप में जानती है। उन्होंने संगीतकारों की कई पीढ़ियों को प्रशिक्षित करवाया। उन्हें संगीत नाटक के महत्तर फैलोशिप से सम्मानित करने के बाद हाल में राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री भी प्राप्त हुई। भास्कर मित्र ने पंडित किचलू का परिचय विस्तार से देते हुए उनके कई पहलुओं के बारे में अवगत कराया। भारतीय भाषा परिषद में आयोजित उनके सम्मान समारोह में इसकी अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने अपने भावोद्गार व्यक्त करते हुए नगरवासियों की ओर से उन्हें सम्मानित किया। प्रसिद्ध संगीतज्ञ होलिकोत्सव के अवसर पर श्रीमती अबंती भट्टाचार्या ने ठुमरियों का गायन किया और अपनी संगीतमय प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रीमती बिमला पोद्दार ने होली को प्रेम और उमंग का त्यौहार बताते हुए सभी को धन्यवाद दिया। समारोह का संचालन सुशील कान्ति ने किया।

 

समसामायिक मुद्दों को उठाता नाटक आखिरी रात

प्रोसिनियम आर्ट सेन्टर में “आखिर रात ” नाटक का प्रदर्शन यू .एल टी.नाट्य संस्था ने किया । नाटककार योगराज के इस  नाटक को एस. एम. राशिद ने निर्देशित किया । यह नाटक एक जेलर और कैदी के संबंधों पर आधारित है। मुल्क के एक बड़े समाजसेवी की हत्या के मामले में गिरफ्तार एक राजनीतिक कैदी है जिसे सुबह फांसी होने वाली है ,लेकिन जेल का मुलाजिम पादरी हमदर्दी रखता है और वह कैदी द्वारा की गयी हत्या के कारण जानना चाहता है लेकिन जेलर अपने वसुलो का पक्का है। उसके लिए मुल्क अहम है और वह कानून के अलावे कुछ नहीं सुनना चाहता और  कानूनी फैसले पर अमल करता है ।।दोनों में एक बहस शुरु हो जाती है अंततः जेलर जो खु़द एक बेहतर नर्म दिल इंसान है पादरी की बात मान लेता है ।


अपने जोखिम पर उसे अपने पास बुलाता है और शुरू हो जाती हत्या की राज जानने की मुहिम ।कैदी पढ़ा लिखा राजनैतिक नेता रहा है, वह हत्या के राज को छिपाता चला जा रहा है लेकिन आखिर में जेलर के सामने अपना  गुनाह स्वीकार लेता।फिर जेलर सवाल उठता है कि यह हत्या क्यों की गई ?  पादरी की  और हमदर्दी बढ़ जाती है। इधर जेलर कानून के आगे विवश पड़ जाता  है ।  फिर  बहस शूरू हो जाती है  और मालूम होता है कि समाजसेवी नेता देश के साथ एक सौदेबाजी में शामिल  था और इस छोटे नेता फंसाना चाहता था तभी इसने हत्या कर दी।
लेकिन इस केस की सरकारी और जांच हो रही थी और  अचानक कोर्ट का फैसला आता है कि  कैदी को रिहा कर दिया गया । पादरी की  और हमदर्दी बढ़ जाती है ,और इधर जेलर कानून के आगे वह विवश पड़ जाता है ।
उर्दू भाषा में यह नाटक कहीं कहीं बहुत नाटकियता पैदा करता है। कलाकारों ने बहुत सहजता और काव्यात्मक और संवेदनशीलता से निभाया है । नाटक में जेलर का चरित्र बहुत द्वंद  भरा है ,जिसे जीतेन्द्र सिहं ने बहुत खुबसूरती से निभाया  है ,उनका संवादों को दृश्यबंध के साथ बोलना,चलना प्रभावित करता है ।पादरी के रूप में शकील अहमद और समाजसेवी की बेटी की भूमिका में सदफ़ अयूब ने भी अच्छा अभिनय किया । पुराने अभिनेता प्रताप जयसवाल ने भी कैदी के चरित्र में ठीक ठाक रहे। नाटक का संगीत और इफ्केट ठीक रहा लेकिन परिधान पर निर्देशक को ध्यान देना होगा ।
निर्देशक एस.एम.राशिद ने बिना तामझाम  पैदा किये एक वर्तमान समाजिक  राजनैतिक मुद्दे पर नाटक प्रस्तुत किया ।

वरिष्ठ पत्रकार नीलाभ मिश्रा का निधन

नयी दिल्ली :  वरिष्ठ पत्रकार एंव नेशनल हेराल्ड के प्रधान संपादक नीलाभ मिश्रा का आज चेन्नई के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे। वह गंभीर रूप से बीमार थे और यकृत की पुरानी बीमारी की जटिलताओं से जूझ रहे थे। उन्हें इस महीने की शुरूआत में उन्हें चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था और इसके पहले कि उनका यकृत प्रतिरोपित हो पाता, उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मिश्रा के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें एक ऐसा व्यक्ति बताया जिसने हमेशा मजबूती के साथ सच्चाई का पक्ष रखा। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ वे संपादकों के संपादक थे। ऐसा व्यक्ति जिसने मजबूती के साथ सच बोला। संस्थान निर्माता थे। नीलाभ मिश्रा के आज सुबह दुखद निधन पर उनके परिजन, मित्रों, सहकर्मियों तथा प्रशांसकों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।’’

 

युद्धक विमान मिग-21 उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं अवनी चतुर्वेदी

अवनी चतुर्वेदी, ऐसी पहली भारतीय महिला, जिन्होंने अकेले जामनगर वायुसेना स्टेशन से युद्धक विमान मिग- 21 बाइसन उड़ाकर नया इतिहास रच दिया है। होनहार बिरवान के होत चीकने पात, यह कहावत अवनी चतुर्वेदी पर भी चरितार्थ होती है। सतना (मध्य प्रदेश) के कोठी कंचन गांव में पैदा हुईं एवं बाद में इसी राज्य के रीवा जिले में जा बसीं चौबीस वर्षीय अवनी बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में अव्वल रही हैं। उनके पिता दिनकर चतुर्वेदी मध्य प्रदेश सरकार के वाटर रिसोर्स डिपार्टमेंट में एक एग्जिक्युटिव इंजीनियर और मां गृहिणी हैं। उनके भाई सेना में कैप्टन हैं और मामा रिटायर्ड कर्नल। भाई निरभ कविताएं लिखते हैं, उनसे ही अवनी को कविताएं लिखने का भी शौक है।

इसके अलावा उनकी चित्रकारी, टेनिस आदि में ही दिलचस्पी नहीं, अपने कस्बाई अतीत में वह सखी-सहेलियों के साथ मेंहदी रचाने से लेकर अन्य हर तरह की सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल हुआ करती थीं। स्नातक तक उनकी पढ़ाई-लिखाई वनस्थली (राजस्थान) में एवं लड़ाकू विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दो चरणों में हैदराबाद की वायु सेना अकादमी और बिदार (कर्नाटक) में मिला। अभी उनके प्रशिक्षण का तीसरा चरण पूरा होना है।

उसके बाद वह लड़ाकू जेट विमान सुखोई, तेजस आदि भी उड़ाने लगेंगी। शुरू से ही सेना में जाने की ठान चुकी अवनी छात्र जीवन में एनसीसी में हमेशा भाग लेती रही हैं। वनस्थली की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह जून-जुलाई 2016 में वह फ्लाइंग ऑफिसर चुन ली गईं। लड़ाकू विमान उड़ाने के प्रशिक्षण के दौरान उनके साथ भावना कांत और मोहना सिंह भी रहीं। तीनों को एक साथ भारतीय वायु सेना के लड़ाकू स्क्वाड्रन में भर्ती मिली थी। उस समय देश के रक्षा मंत्री थे मनोहर पर्रिकर। अवनी अपनी सफलता का श्रेय मुख्यतः पिता को देती हैं, जिनसे उन्हें जीवन के उन्नत पथ पर आगे बढ़ने की बचपन से ही प्रेरणा मिलती रही थी। इंडियन एयरफोर्स की फ्लाइंग ऑफिसर अवनी के मन में कभी वायु सैनिक बनने का जज्बा सैन्य अधिकारी मामा और भाई की संगत से पैदा हुआ था। वह देश की सुर्खियों में उस वक्त आईं, जब हाल ही में उन्होंने गुजरात के जामनगर में अपनी पहली ट्रेनिंग में अकेले मिग-21 बाइसन फाइटर प्लेन उड़ाया। यह भारतीय वायु सेना और पूरे देश के लिए एक विशेष उपलब्धि रही। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 2015 में महिलाओं को फाइटर पायलट में शामिल करने का फैसला किया था।

अब तक विश्व के चार देशों अमेरिका, पाकिस्तान, ब्रिटेन और इजरायल में महिलाओं को फाइटर पायलट बनने के अवसर सुलभ रहे हैं। देश की वायुसेना में पहला महिला सशक्तीकरण हुआ 19 फरवरी 2018 को, जब अवनी ने सफलतापूर्वक अपना मिशन पूरा कर यह इतिहास रचा। बताते हैं कि जिस वक्त वह मिग में सवार हुईं, अनुभवी फ्लायर्स और प्रशिक्षकों ने जामनगर एयरबेस के एयर ट्रैफिक कंट्रोल और रन-वे पर लगातार अपनी आंखें साधे रखी थीं। अवनी की कामयाबी को इसलिए भी विशेष दर्जा मिला क्योंकि ‘बाइसन’ की तकनीकि लैंडिंग और टेक-ऑफ में फर्राटे की स्पीड होती है, जिसे नियंत्रित करते हुए आकाश में छलांग लगाना कोई हंसी-खेल नहीं रहता है।

मोहना और भावना के साथ अवनी चतुर्वेदी को उड़ाकू विमान उड़ाने का कठिन प्रशिक्षण अक्तूबर 2016 से दिया जा रहा था। अवनी की उड़ान से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी दिल गर्व से भर उठा। उन्होंने ‘मन की बात’ में कहा – ‘कल्पना चावला कोलंबिया अंतरिक्षयान दुर्घटना में वह हमें छोड़ कर चली गई लेकिन दुनिया भर के युवाओं को प्रेरणा दे गईं। उन्होंने अपने जीवन से संदेश दिया कि नारी शक्ति के लिए कोई सीमा नहीं है। वह कहते हैं कि अवनी ने भारतीय वायुसेना के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है। उनकी इस उपलब्धि से प्रदेशवासियों, विशेषकर विन्ध्यवासियों का मान बढ़ा है। वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ बताते हैं कि उड़ान के लिए कठिन अभ्यास के बावजूद इन तीनों प्रशिक्षुओं का प्रदर्शन अन्य पायलटों की तरह ही पूरी तरह कुशल रहा। हॉक एडवांस जेट ट्रेनर पर उड़ान भरने से लेकर बाइसन तक अवनी का यह सफर काफी चुनौतियों भरा रहा।

 

 

जिमनास्टिक वर्ल्ड कप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं अरुणा

मेलबर्न : भारतीय जिमनास्ट अरुणा रेड्डी ने मेलबर्न में चल रहे जिमनास्टिक वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 22 साल की अरुणा महिला वॉल्ड ईवेंट में तीसरे स्थान पर रहीं। कांस्य पदक जीतने के साथ ही वो जिमनास्ट में मेडल जीतने वाली पहली महिला बन गई हैं। रेड्डी ने मेडल राउंड में 13.649 का स्कोर किया। वहीं भारत की प्रांति नायक छठे स्थान पर रहीं।

टूनार्मेंट में अरुणा के अलावा स्लोवाकिया की ट्जासा क्लिसलेफ ने 13.800 के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि मेजबान ऑस्ट्रेलिया की एमिली व्हाइटहेड ने 13.699 का स्कोर कर रजत पदक पर कब्जा जमाया।

 

हिन्दी को जल्द ही सपोर्ट करेगा गूगल असिस्टेंट

गूगल असिस्टेंट जल्द ही हिन्दी को सपोर्ट करेगा। गूगल ने बताया कि असिस्टेंट सॉफ्टवेयर इस साल के अंत तक 30 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध होगा। गूगल अपने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) को मजबूत करने के लिए प्रयास कर रहा है।

गूगल ने अपने ब्लॉग में लिखा, ‘इस साल के अंत तक गूगल असिस्टेंट 30 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध होगा। इसके बाद इसकी पहुंच 95 फीसदी एंड्रॉयड यूजर्स तक हो जाएगी।’

गूगल असिस्टेंट अभी हिन्दी के सिर्फ कुछ चुनिंदा कीवर्ड को सपोर्ट करता है। उदाहरण के लिए आप गूगल असिस्टेंट ‘बिहार की राजधानी’ और ‘खिचड़ी की रेसिपी’ पूछ सकते हैं। कंपनी की ओर से बताया गया कि पहले इसमें मल्टीलिंगुअल ऑप्शन केवल इंग्लिश, फ्रेंच और जर्मन में उपलब्ध होगा। इसके बाद यह दूसरी भाषाओं को भी सपोर्ट करने लगेगा। इस वक्त गूगल को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के मामले में अमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।

गूगल असिस्टेंट क्या है?
गूगल असिस्टेंट एक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित सॉफ्टवेयर है, जो डिवाइस के स्पीकर्स से जुड़ा रहता है। अब इस सॉफ्टवेयर में 30 भाषाओं को सपोर्ट करने की क्षमता जोड़ी जाएगी। गूगल असिस्टेंट इस वक्त 8 भाषाओं को सपोर्ट करता है।

 

‘सदमा’ दे कर ‘चांदनी’ हुई मौन

मुम्बई : करीब चार दशकों तक अपने दमदार अभिनय और दिलकश अदाओं से सिने प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली वरिष्ठ अभिनेत्री श्रीदेवी का दुबई में बीती रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। ‘‘सदमा’’, ‘‘चांदनी’’, ‘‘लम्हे’’ से लेकर ‘‘इंग्लिश विंग्लिश’’ और ‘‘मॉम’’ आदि फिल्मों में तक विविधतापूर्ण किरदारों को पर्दे पर सजीव बनाने वाली श्रीदेवी 54 वर्ष की थीं।
फिल्म निर्माता बोनी कपूर से विवाह करने वाली श्रीदेवी की दो पुत्रियां… जाह्नवी और खुशी हैं। वर्ष 2013 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित की जा चुकीं श्रीदेवी ने अपने अभिनय की शुरूआत चार साल की उम्र में तमिल फिल्म ‘‘थुनाइवन’’ से 1969 में की। मलयालम, तेलुगु ओर कन्नड़ फिल्मों में अभिनय की अपनी सफल पारी के बाद श्रीदेवी दक्षिण भारतीय फिल्मों का एक लोकप्रिय चेहरा बन गईं।
बॉलीवुड में उन्होंने अपना कदम फिल्म ‘‘सोलवां सावन’’ से रखा। यह फिल्म 1978 में आई लेकिन श्रीदेवी को पहचान नहीं दे पाई। पांच साल बाद श्रीदेवी फिल्म ‘‘हिम्मतवाला’’ में अभिनेता जीतेंद्र के साथ आईं और इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी।‘‘हिम्मतवाला’’ के बाद श्रीदेवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और नायक प्रधान फिल्मों के दौर में उन्होंने ‘‘मवाली’’ (1983), ‘‘तोहफा’’ (1984), ‘‘मिस्टर इंडिया’’ (1987), ‘‘चांदनी’’ (1989), ‘‘चालबाज’’ (1989), ‘‘लम्हे’’ (1991) और ‘गुमराह’ (1993) जैसी फिल्में दीं। बॉक्स ऑफिस पर हिट कहलाने वाली इन फिल्मों के बीच उनकी फिल्म ‘‘सदमा’’ एक अलग पहचान रखती है। यह फिल्म 1983 में आई थी।

फिल्म ‘‘जुदाई’’ में उन्होंने अनिल कपूर और उर्मिला मातोंडकर के साथ काम किया। इसके बाद ही श्रीदेवी ने अनिल कपूर के बड़े भाई बोनी कपूर से विवाह किया और करीब 15 साल तक रूपहले पर्दे पर नजर नहीं आईं। इस लंबे अंतराल में अपनी दो बेटियों की परवरिश करने के बाद श्रीदेवी साल 2012 में गौरी शिंदे के निर्देशन में बनी ‘‘इंग्लिश विंग्लिश’’ में नजर आईं। इस फिल्म में श्रीदेवी अपनी ‘‘ग्लैमर क्वीन’’ की छवि से बिल्कुल अलग, मध्यम वर्गीय गृहणी की भूमिका में नजर आईं जो इंग्लिश बोलने की चाहत इसलिए रखती है कि उसका परिवार उसकी अहमियत समझे।

बीते साल वह ‘‘मॉम’’ फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दिकी ओर अक्षय खन्ना के साथ दिखाई दीं। उन्होंने अभिनेता शाहरूख खान की आगामी फिल्म ‘‘जीरो’’ में एक अतिथि भूमिका के लिए भी शूटिंग की। यह फिल्म दिसंबर में रिलीज होगी। श्रीदेवी ने अपनी अंतिम श्वांस दुबई में ली जहां वह अपने परिवार के साथ अपने भतीजे मोहित मारवाह के विवाह समारोह में शामिल होने गई थीं।

श्रीदेवी के परिवार से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि विवाह समारोह के बाद कुछ संबंधी दुबई से भारत लौट आए थे, लेकिन श्रीदेवी और उनकी छोटी बेटी खुशी दुबई में रूक गई थीं। श्रीदेवी की बड़ी बेटी जाह्नवी अपनी पहली फिल्म की शूटिंग की वजह से मुंबई में ही थीं।

 

वो चेहरा नकली है, ये खूबसूरती आपकी अपनी है….

प्यारी लड़कियों,

हमें पता है कि आप सुन्दर दिखना चाहती हैं और इसके लिए आप बहुत कोशिशें करती हैं…अपने वेतन और अपनी पॉकेट मनी का बड़ा हिस्सा आप अपने कपड़ों और मेकअप पर खर्च कर देती होंगी…फिऱ भले ही इसके बाद महीने का खर्च आपको अपने मम्मी – पापा से माँगकर ही क्यों न चलाना पड़े।

चेहरे के पीछे है यह चेहरा

खूबसूरत बनाने वाली हर चीज पर आपकी नजर होती है और कब यह आपका तनाव बन जाती है, खुद आपको पता ही नहीं चलता…। आपको पता ही नहीं चलता कि कब आपके हँसते हुए चेहरे की चमक कोई ब्रांडेड लिपस्टिक की ख्वाहिश छीन लेती है।

आप परदों पर चमकते चेहरों को देखती हैं और वैसी ही खूबसूरती पाने के लिए कमर कस लेती हैं। तो हमने सोचा कि हम आपको उन चेहरे की चमक और उनकी हकीकत दिखा दें….जिनको देखने के बाद शायद आपको खुद पर नाज हो…होना भी चाहिए।

दिक्कत है कि ऐसा है नहीं। आप डायटिंग करने लगती हैं…आप हर वो चीज छोड़ देती हैं जो आपको बहुत प्यारी थीं। आपकी कमर की चर्बी कम होती जाती है और आपको पता ही नहीं चलता है कि कब वह कुपोषण में तब्दील हो जाता है। आप अपनी त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए महँगे से महँगा फेसपैक लगाती हैं, कई बार आप इसके लिए किसी विशेषज्ञ से ज्यादा विज्ञापन पर भरोसा करती हैं मगर क्या आपको नहीं लगता कि हर रंग की अपनी खूबसूरती होती है और नकली आवरण ओढ़कर प्राकृतिक खूबसूरती नहीं पायी जा सकती है।

आप अपनी पूरी ताकत और ऊर्जा बस सुन्दर बनने के पीछे खर्च कर देती हैं और इस बीच आपको याद भी नहीं रहता है कि आपमें इतनी खूबियाँ हैं कि आपको नकली चेहरा ओढ़ने की जरूरत ही नहीं है। हर रंग खूबसूरत है….जी हाँ…साँवला रंग भी बेहद खूबसूरत होता है…आपको त्वचा के पोषण पर ध्यान देने की जरूरत है। खुद को भूखा रहकर और तमाम मेकअप और तामझाम के बाद आयी सुन्दरता की जरूरत आपको नहीं है।

बगैर मेकअप के सितारे

प्रतिभा और सफलता आपको खूबसूरत बनाती है, जब आपके विचार चमकते हैं तो आपके चेहरे पर वह चमक आती है। जब आपकी आँखों में सच्चाई और आत्मविश्वास की चमक होती है तो आपको महँगे आईलाइनर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

प्रकृति के करीब जाइए और कभी अपनी माँ – दादी – नानी को गौर से देखिए…..उनकी खूबसूरती को महँगे सौंदर्य प्रसाधनों की जरूरत नहीं पड़ी थी। आपका दिल साफ होगा तो उसकी चमक आपकी निश्चल हँसी में दिखायी पड़ेगी…अपने – आप को स्वीकार करना सीखिए…..खूबसूरती की पहली चमक तो वहीं से आ सकती है।

खूबसूरती विचारों में, आत्मनिर्भरता में, विश्वास में, प्रतिभा में, सच मे, साहस में, कुरीतियों को तोड़ने में है,सबको आगे ले जाने में है।

यकीन मानिए, अगर आपके पास ये सब है तो आपसे सुन्दर कोई नहीं है। कोई नहीं….खुश रहिए….खुद से प्यार कीजिए…खूबसूरती तो यूं ही आ जायेगी।

  • आपकी दोस्त

बॉलीवुड अभिनेत्रिय़ों की खूबसूरती पर सोनम कपूर के आर्टिकल का अनुवाद

पुनीत शुक्ला  की फेसबुक वॉल से अपराजिता ने साभार यह पत्र लिया है। इसका हिन्दी अनुवाद अजीत भारती ने किया है…ये आपके लिए है और आपको ये ध्यान से पढ़ना चाहिए क्योंकि ये आपको मौका देगा कि आप खुद से प्यार कर सकें।   खासकर इस स्वीकार करने और उसे सामने लाने का साहस जो सोनम ने दिखाया है, उसके लिए वह बधाई की पात्र हैं।            

टीनएज लड़कियो, अगर सुबह जगकर अपने बेडरूम के शीशे में खुद को जब देखती हो और ये सोचती हो कि आख़िर तुम उन तमाम सेलिब्रिटीज़ की तरह क्यों नहीं दिखती, तो ये जान लो कि कोई भी लड़की बिस्तर छोड़ते ही वैसी नहीं दिखती। मैं तो नहीं दिखती, न ही कोई भी और हिरोइनें जिन्हें तुम फ़िल्मों में देखती हो। (बियॉन्से भी नहीं, मैं कसम खाकर कह रही हूँ।)

अब असली बात जान लो: हर पब्लिक आयोजन में जाने से पहले, मैं अपने मेकअप की कुर्सी में बैठकर 90 मिनट का समय देती हूँ। तीन से छः लोग मेरे बाल और मेकअप पर काम करते हैं, जबकि एक आदमी मेरे नाख़ून तराशता रहता है। हर सप्ताह मेरी भवें सँवारी जाती हैं, उनकी थ्रेडिंग और ट्वीज़िंग की जाती है। मेरे शरीर के कई हिस्सों पर ‘कन्सीलर’ लगा होता है जिसके बारे में मैं कभी सोच नहीं सकती थी कि इन्हें छुपाने की ज़रूरत होती होगी!

मैं हर रोज सुबह 6 बजे जग जाती हूँ, और 7:30 बजे तक जिम में होती हूँ। लगभग 90 मिनट का समय हर सुबह, और कई शाम सोने से पहले भी, व्यायाम के लिए होता है। मैं क्या खाऊँ, क्या नहीं खाऊँ, ये बताने के लिए किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखा जाता है। मेरे फ़ेसपैक में मेरे भोजन से ज्यादा चीज़ें होती हैं। मेरे कपड़ों को चुनने के लिए लोगों की एक पूरी टीम है।

इतने के बाद भी जब मैं ‘फ़्लॉलेस’ नहीं दिखती तो फोटोशॉप पर खूब काम किया जाता है।

मैंने पहले भी कहा है, और फिर से कहूँगी कि किसी मॉडल/सेलिब्रिटी को वैसा दिखाने के लिए कई लोगों की एक पूरी फ़ौज, बहुत ज्यादा पैसा, और काफ़ी समय लगता है। ये न तो वास्तविक है, न ही कोई ऐसी चीज है जिसको पाने की कोशिश करनी चाहिए।

खुद में विश्वास करो। ऐसा बनने की सोचो जहाँ तुम खूबसूरत, उन्मुक्त और खुश रहो, जहाँ तुम्हें एक खास तरीक़े का बनने की कोई ज़रूरत न हो।

और हाँ, अगली बार से जब भी किसी तेरह साल की बच्ची को किसी मैगजीन कवर पर चमकती बॉलीवुड सेलिब्रिटी की तस्वीर को ललचायी निगाहों से देखती देखो तो उसी वक्त उसे ये बता कर उसका भ्रम तोड़ दो।

उसको बता दो कि वो कितनी ख़ूबसूरत है। उसकी सुंदर मुस्कुराहट की बातें करो, उसकी हँसी, उसकी बुद्धि या उसके आत्मविश्वास की बात करो।

उसके भीतर ये विचार पनपने मत दो कि उसमें कोई कमी है, या उसमें कुछ ऐसा नहीं है जो पोस्टर, बिलबोर्ड आदि पर लगी तस्वीर में दिखती सेलिब्रिटी में है। उसको अपने लिए ऐसे मानक बनाने से रोको जो उसके लिए ही नहीं, उन तारिकाओं के लिए भी बहुत ऊँचे हैं।
❤
– सोनम कपूर (हिन्दी अनुवाद: अजीत भारती)

मुस्लिम पिता ने अनाथ हिंदू लड़के को लिया गोद फिर हिंदू रीति रिवाजों से की शादी

हमारे समाज में बच्चों को जितना प्यार दिया जाता है उससे कहीं ज्यादा उनपर बंदिशे भी लगा दी जाती हैं। बच्चे के पैदा होने से लेकर उसकी पढ़ाई-लिखाई, पसंद नापसंद, शादी और रहने के तरीके तक में मां-बाप का पूरा दखल होता है। लेकिन उत्तराखंड में एक पिता ने अपने गोद लिए बेटे को उसके मन मुताबिक और उसके धर्म के अनुसार शादी की। यह अनोखी शादी देहरादून में हुई जहां मोइनुद्दीन ने अपने गोद लिए बेटे राकेश रस्तोगी का विवाह हिंदू रीति रिवाजों से किया। मोइनुद्दीन ने राकेश को 12 साल की उम्र में गोद लिया था।

मोइनुद्दीन की दो बेटियां और एक और बेटा भी है, लेकिन वह राकेश को ही बड़ा बेटा मानते हैं। एएनआई के मुताबिक राकेश को घर में हिंदू धर्म को मानने की पूरी आजादी थी। घर में सभी हिंदू त्यौहार मनाए जाते हैं और हिंदू देवी-देवताओं की पूजा भी की जाती है। राकेश के पालन-पोषण में भी मोइनुद्दीन ने कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन जब बात शादी की आई तो मुश्किल आ खड़ी हुई। कोई भी हिंदी परिवार मोइनुद्दीन के यहां अपनी बेटी भेजने को राजी नहीं था। लेकिन बाद में मोथरोवाला के आत्माराम चौहान अपनी बेटी सोनी की शादी राकेश के साथ करने को राजी हो गए।

हालांकि मोइनुद्दीन ने आज से 15 साल पहले जब राकेश को गोद लिया था तो उनके परिवार वालों और करीबियों ने उन्हें ताने दिए थे और ऐसा न करने को कहा था। लेकिन मोइनुद्दीन ने सिर्फ अपने दिल की सुनी। उन्होंने बताया कि उनका परिवार ईद की तरह ही होली और दिवाली मनाता है। राकेश ने भी कहा कि उसे कभी नहीं लगा कि वह एक मुस्लिम परिवार में पला बढ़ा है। आत्माराम जब रिश्ते के लिए मोइनुद्दीन के घर आए तो वे घर का नजारा देखकर हैरान रह गए। एक मुस्लिम के यहां हिंदू बेटे का रहना और उसे अपने धर्म के मुताबिक काम करने के लिए मिली पूरी आजादी देखकर आत्माराम को खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने फौरन अपनी बेटी का ब्याह राकेश के साथ करने के लिए हां बोल दिया।

 सब कुछ तय होने के बाद पिछले सप्ताह शुक्रवार को राकेश की बारात आत्माराम के यहां गई और पूरे हिंदू रीति रिवाजों के साथ शादी संपन्न हुई। इस अनोखी शादी का स्वागत भी धूमधाम तरीके से किया गया। इस शादी में प्रशासन के भी कई अधिकारी शामिल हुए। बाद में जब सोनी ब्याहकर मोइनुद्दीन के घर आई तो वहां भी लोगों ने उसका पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया। घर में रिसेप्शन में मोइनुद्दीन ने मेहमानों के लिए शाकाहारी खाना ही परोसा। हिंदू मुस्लिम एकता की इस मिसाल से वाकई पूरे देशवासियों को काफी कुछ सीखने की जरूरत है।
(साभार – योर स्टोरी)