Saturday, October 3, 2026
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भारतीय छात्रा ने जीता एंटरप्राइजिंग स्टूडेंट अवार्ड

नयी दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए जाने वाले स्कूल एंटरप्राइज चेलेंज का वर्ष 2017 का पुरस्कार भारतीय छात्रा परिधि पुरी ने जीता है। ब्रिटेन के ‘‘टीच ए मैन टू फिश ’’ नामक चैरिटी संगठन ने इस पुरस्कार के लिए परिधि के नाम का चयन किया । स्कूल एंटरप्राइज चैलेंज प्रतियोगिता में 110 से अधिक देशों के छह हजार से भी अधिक स्कूलों ने भाग लिया और जजों के अंतरराष्ट्रीय पैनल ने विजेताओं का चयन किया। इस कार्यक्रम के तहत छात्रों और अध्यापकों की सहायता , स्कूल की स्थापना और उसका प्रबंधन तथा बच्चों का सर्वांगीण विकास किस प्रकार सुनिश्चित किया जाए, इस पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यह पूरा अभियान स्कूल को एक बेहतर शिक्षण प्रशिक्षण मंच के रूप में विकसित करने से जुड़ा होता है। साथ ही इसमें शिक्षा को बच्चों की क्षमता और उनकी नजर से समझने की कोशिश की जाती है।
सामाजिक जिम्मेदारी तथा सतत विकास इस कार्यक्रम का मूल मंत्र है जिसमें विश्लेषणात्मक कौशल, कड़ी मेहनत, सामूहिक प्रयास को आधार बनाकर काम किया जाता है। इस कार्यक्रम में छात्र समाज के सक्रिय हिस्से के रूप में भाग लेते हैं। साथ ही छात्र अपने स्कूल के संचालन के कामकाज से हर स्तर पर जुड़े होते हैं । ‘‘ टीच ए मैन टू फिश’’ नामक इस संगठन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निक काफ्का का कहना है,‘‘हम युवा बेरोजगारी की समस्या और सीखने के संकट से निपटने के लिए इस कार्यक्रम को चला रहे हैं ।’’  परिधि पुरी पूर्वी दिल्ली के एहल्कान इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा हैं ।

 

चायवाले की कमाई 12 लाख रुपये महीना

पुणे : नरेंद्र मोदी जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री उम्मीदवार बने थे, तो उस वक्त उन्हें चायवाला कहकर ट्रोल किया गया था। जीत के बाद मोदी ने खुद कहा कि देखें ये चायवाला किस पद तक पहुंचा है। इस बार भी एक चायवाला चर्चा में है, लेकिन पीएम मोदी नहीं ये पुणे का रहने वाला आम आदमी है और उसकी महीने की कमाई सुर्खियों में बनी हुई है।

दरअसल, एक चाय बेचने वाले की मासिक कमाई पर चर्चा मुश्किल ही होती है, लेकिन अगर वही चायवाला महीने के लाखों कमाता हो तो ये बेहद आर्श्चयजनक है। ऐसा ही मामला महाराष्ट्र के पुणे से सामने आया है, जहां एक नवनाथ येवले की कमाई 12 लाख रुपये है।
दरअसल, येवले टी हाउस के को फाउंडर नवनाथ येवले की पहचान इस कदर बढ़ रही है कि वे अपने ब्रांड को इंटरनेशनल लेवल पर भी पॉपुलर करना चाहते हैं। इसी संदर्भ में येवले ने अपने प्रतिद्वंदी के लिए एक नया बेंचमार्क बना दिया है।
नवनाथ के मुताबिक उनके टी हाउस से लोगों को अच्छा रोजगार मिल रहा है। पुणे में येवले टी हाउस की तीन ब्रांच है और हर ब्रांच में 12 लोग काम करते हैं। नवनाथ ने कहा कि उनका बिजनेस बढ़ता जा रहा है और वे जल्द ही इसे इंटरनेशनल ब्रांड बना देंगे। कमाई की वजह से येवले हाउस लोगों की नजर में बना हुआ है और बताया जा रहा है कि लोग इससे जुड़कर कमाई का जरिया बनाना चाहते हैं।

 

सीरिया युद्ध से प्रभावित बेसहारा बच्चों के लिए भगवान बने ‘खालसा ऐड’ के सदस्य

सीरिया एक बार फिर से युद्ध की विभीषिका झेलते हुए खबरों में है। पिछले सात सालों से लगातार चल रहे इस युद्ध में लाखों नागरिकों की जान जा चुकी है। जब भी मीडिया के जरिए वहां युद्ध से प्रभावित बच्चों की तस्वीरें आती हैं, दिल दहल उठता है। सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे वाले पूर्वी घोउटा इलाके में सीरियाई सरकार के हवाई हमले में सात दिनों में करीब 500 नागरिकों की मौत हो गई है। काफी लंबे समय से चल रहे संघर्ष में अब तक लाखों लोग मारे जा चुके हैं और हजारों बच्‍चे अनाथ हो चुके हैं। इन बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है।

इस स्थिति में मानवता की मदद करने के लिए इंटरनेशनल एनजीओ ‘खालसा ऐड’ युद्ध प्रभावित इलाकों में जाकर काम कर रहा है। वे खाने का इंतजाम करने से लेकर कपड़े, रहने और स्वास्थ्य की देखभाल कर रहे हैं। खालसा ऐड 2014 से सीरिया गृहयुद्ध से प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है। संगठन की ओर से बताया गया कि सीरिया के अलावा ग्रीस और लेबनान में भी ऐसे ही युद्ध प्रभावित पीड़ितों की मदद की जा चुकी है।

सीरिया गृहयुद्ध में लाखों बच्चे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। उन्हें भावनात्मक सहयोग देने से लेकर उनके खाने पीने का इंतजाम खालसा ऐड के सदस्य कर रहे हैं। संगठन ने तुर्की में भी शरणार्थी बच्चों के लिए 14 टन खाना और पैरों में पहनने के लिए चप्पल-जूते भिजवाए हैं। इस एनजीओ की स्थापना रविंद्र सिंह ने 1999 में की थी। वे कोसोवो शरणार्थियों की हालत देखकर द्रवित हो उठे थे और कुछ करने का फैसला ले लिया था। अब तक यह संगठन कई देशों में काम कर के लाखों लोगों की मदद कर चुका है।

बीते साल बांग्लादेश और म्यांमार बॉर्डर पर रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए भी खालसा ऐड ने खाने-पीने का इंतजाम किया था। श्रीलंका में जब बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई थी तो खालसा ऐड ने वहां पर कम्यूनिटी किचन की स्थापना की थी। हमारी दुनिया को खालसा ऐड जैसे संगठनों और इंसानियत की सेवा करने वाले लोगों की सख्त जरूरत है। खालसा ऐड दुनिया के उन कुछ एनजीओ में शामिल है जो बिना किसी भेदभाव के कहीं भी मदद करने पहुंच जाते हैं।

(साभार – योर स्टोरी)

50 करोड़ से ऊपर के एनपीए खातों की जांच से होगी बैंकिंग तंत्र की सफाई: फिक्की

 

नयी दिल्ली : सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को 50 करोड़ रुपये से अधिक के सभी एनपीए खातों की जांच करने के सरकार के आदेश से बैंकिंग प्रणाली की “जरुरी” सफाई के साथ-साथ पारदर्शी जोखिम प्रबंधन तंत्र सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उद्योग मंडल फिक्की ने आज यह बात कही।
सरकार ने धोखाधड़ी और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों का पता लगाने के लिये बैंकों को यह आदेश दिया है। हालांकि, फिक्की ने कहा कि इस कदम को सावधानी से उठाने की जरुरत है और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि जांच कर्ज वितरण और व्यवसायिक भावना को प्रभावित नहीं करे।
वित्त मंत्रालय ने संभावित धोखाधड़ी का पता लगाने के लिये सार्वजनिक बैंकों को सभी एनपीए या फंसे कर्ज खातों की जांच करने के निर्देश दिये हैं और मामलों की रिपोर्ट सीबीआई को देने के लिये कहा है। यह निर्देश अरबपति आभूषण कारोबारी नीरव मोदी और उसके सहयोगियों द्वारा पीएनबी के साथ 12,700 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद आए।
फिक्की अध्यक्ष राशेष शाह ने कहा, “सरकार और रिजर्व बैंक के निरंतर प्रयासों के साथ सार्वजनिक बैंकों को तत्काल प्रभाव से अपने जोखिम प्रबंधन अभ्यास को मजबूत करना चाहिये। इसके साथ ही मौजूदा एनपीए खातों पर कार्रवाई, पारदर्शिता के लिए प्रभावी समयबद्ध कार्य योजना और एक मजबूत जोखिम प्रबंधन प्रणाली इन बैंकों के लिये आवश्यक है।”  उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर आईबीए के माध्यम से एनपीए समाधान के प्रति सरकार की रणनीति धोखाधड़ी और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में मदद करेगी।

 

सीआरपीएफ ने शुरू की बाइक एंबुलेंस, नक्सल प्रभावित बस्तर में बीमारों की करेंगे मदद

बस्त्तर :  छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों में जुटी रहनेवाली सीआरपीएफ ने बस्तर क्षेत्र के सुदूर जंगल के इलाकों में रहने वाले लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए एक बाइक एम्बुलेंस की पहल की है। सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों के साथ मेडिकल टीमें मोटरसाइकिलों में सवाल होकर बीजापुर जिले के लगभग 70 गांवों में बीमार और घायलों की मदद करती हैं, जिसकी सीमा दंतेवाड़ा से सटी हुई है और वह तेलंगाना और महाराष्ट्र के साथ भी अपनी सीमा साझा करता है।
सीआरपीएफ के 85 वें बटालियन के कमांडेंट सुधीर कुमार ने कहा, “हमें कुछ साल पहले नक्सल विरोधी गश्ती और अभियान के लिए यह मोटरबाइक मिले थे क्योंकि उग्रवादियों के लिए चार पहिया वाहन को निशाना बनाना आसान था। फिर हमने सोचा कि इन दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल स्थानीय बीमार लोगों की मदद के लिए क्यों नहीं किया जाए?” स्थानीय लोगों को मेडिकल मदद पहुंचा रही सीआरपीएफ की यह बटालियन बीजापुर में तैनात है।

 

कविता से अगर लय-छंद छोड़ा जाए तो किसी बड़े उद्देश्य के लिए छोड़ा जाए– नरेश सक्सेना

कोलकाता :  वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना मानते हैं कि कविता का कोई एक तरीका नहीं, परंतु उसकी एक संरचना अवश्य होती है, लेकिन कोई आलोचक उस संरचना के बारे में नहीं बताता है। कविता से अगर लय – छंद छोड़ा जाये तो किसी बड़े उद्देश्य के लिए ही छोड़ा जाये। नीलांबर कोलकाता द्वारा आयोजित ‘कविता जंक्शन’ के एक वर्ष पूरे होने पर आयोजित साहित्यिक अड्डे में उन्होंने उक्त बातें कही। इस अड्डे के आरंभ में नरेश सक्सेना की कविता ‘गिरना’ पर एक विडियो फिल्म दिखाया गया, कविता की आवृत्ति स्मिता गोयल और फिल्म निर्देशन ममता पांडेय एवं विशाल पांडेय ने किया। इस अड्डे में 17 कवियों ने कविता पाठ किया। नीलकमल, विमलेश त्रिपाठी, शैलेन्द्र शांत, विजय गौड़, निर्मला तोदी, यतीश कुमार, आशा पांडेय, कल्पना झा, सुषमा त्रिपाठी, रेवा टिबरेवाल, ऋतु तिवारी, राहुल राजेश, आनंद गुप्ता, संजय जायसवाल, ऋतेश पांडेय, संजय राय, ममता पांडेय, मंटू कुमार साव, जुली जाह्नवी। नरेश सक्सेना ने इन सभी कवियों की कविताओं पर बात की। कार्यक्रम का संचालन आशा पांडेय ने किया और धन्यवाद ज्ञापन संस्था के अध्यक्ष विमलेश त्रिपाठी ने।

 

कृष्ण व राधा के जीवन के प्रसंगों पर राखी बैद की एकल कला प्रदर्शनी

कोलकाताः मुंबई की चित्रकार राखी बैद की एकल कला प्रदर्शनी भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की अवनिंद्रनाथ टैगोर गैलरी में सम्पन्न हुई। प्रदर्शनी का संयोजन सिटी आर्ट फैक्ट्री की ओर से किया गया, जिसके क्यूरेटर शांतनु रॉय हैं। प्रदर्शनी का उद्घाटन  करने के बाद मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय ख्याति के फ़िल्मकार सुदीप रंजन सरकार ने कहा कि ज़िन्दगी की आपाधापी व तनावपूर्ण कार्यों के बीच इन रंगों का सान्निध्य सुकून देता है और हमें नये सिरे से तरोताज़ा करता है। विशेष अतिथि व प्रख्यात वरिष्ठ मूर्तिकार शंकर घोष ने कहा कि राखी बैद के कुशल कलाकार हैं और वे जानती हैं कि रंगों के ज़रिये कैसे अपनी बात कही जाये। लेखक-चित्रकार डॉ.हृदय नारायण सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन सदैव से कलाकारों को आकृष्ट करता रहा है, उनके जीवन में जितने शेड्स हैं वे किसी अन्य पौराणिक पात्र में नहीं। जलरंगों के विशेष तौर पर चर्चित मुंबई के चित्रकार समीर मंडल ने राखी बैद को एक महत्वपूर्ण चित्रकार बताया। प्रदर्शनी का नाम कृष्णांश था जिसमें श्रीकृष्ण व राधा से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को चित्रकार राखी बैद ने खूबसूरती से उकेरा है और रंगों से उन्हें और अर्थवान बनाया है। यह राखी बैद की ग्यारहवीं एकल कला प्रदर्शनी थी। उन्होंने साठ से अधिक सामूहिक कला प्रदर्शनी में हिस्सेदारी की है।

शहीद पायलट के अंतिम संस्कार में नवजात बच्ची को लेकर पहुंची पत्नी

देश की रक्षा करने के लिए सेना के जवान कितने त्याग करते हैं, इसका अंदाजा शायद ही आपको हो। घर-परिवार और अपने सगे संबंधियों से हमेशा दूर रहकर अपनी पूरी जिंदगी बिताने वाले जवानों के लिए यह देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा। जवानों के साथ ही उनके परिवार को भी त्याग करना पड़ता। अपने सपूत या पति से हमेशा दूर रहकर उनकी मां और पत्नी किस परिस्थिति में रहते होंगे, इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। और यही जवान जब देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे देते हैं तो परिवार को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। इसीलिए उनकी हिम्मत और हौसले की दाद देनी होगी। कुछ ऐसी ही स्थिति असम में जान गंवाने वाले इंडियन एयरफोर्स के विंग कमांडर दुष्यंत वत्स के अंतिम संस्कार में देखने को मिली।

भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर दुष्यंत वत्स की जान 15 फरवरी को माजुली जिले में माइक्रोलाइट विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से चली गई थी। उनके साथ विमान में एक और पायलट की भी जान गई थी। वत्स के अंतिम संस्कार की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में दुष्यंत वत्स की पत्नी मेजर कुमुद डोगरा अपने पति के अंतिम संस्कार में जाते हुए दिख रही हैं। इस तस्वीर में मेजर कुमुद की गोद में उनकी पांच दिन की बच्ची भी है। इस दृश्य को देखकर वहां अंतिम संस्कार में मौजूद सभी लोगों की आंखे नम हो गईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विंग कमांडर वत्स अपनी बच्चों को भी नहीं देख सके थे।

मेजर कुमुद सेना में नर्सिंग ऑफिसर हैं। इंडियन एयरफोर्स का माइक्रोलाइट वायरस SW-80 बीते 15 फरवरी को दोपहर 1 बजे के करीब क्रैश हो गया था। एयरक्राफ्ट ने जोरहट एयरफोर्स स्टेशन से लगभग 11.30 बजे अपनी उड़ान भरी थी। यह चॉपर दोपहर में रूटीन के अनुसार जोरहाट एयरबेस से उड़ा था। लगभग 12.45 के आसपास विमान ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल से अपना संपर्क खो दिया। तेजपुर में रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल हर्षवर्धन पांडेय ने इस दुर्घटना में विंग कमांडर जे पॉल जेम्स और दुष्यंत वत्स की मौत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

हादसे के बाद चॉपर का मलबा घटनास्थल के पास देखा गया था, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए। अधिकारियों के अनुसार, एयरक्राफ्ट हादसा तकनीकी खामियों के कारण हुआ था। हादसे के वक्त वहां मौजूद लोगों ने बताया कि क्रैश होने से पहले एयरक्राफ्ट में आग लग गई थी। यह जगह जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर है। इंडियन एयरफोर्स की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और विंग कमांडर के शव को अपने कब्जे में लिया। इसके पहले 6 अक्टूबर 2017 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में एक एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई थी।

त्वचा को न लगे होली के रंगों की नजर

बिना रंगों के होली का कोई मजा नहीं होता हैं मगर कई बार होली खेलते समय सिंथेटिक रंगों की वजहों से चेहरे पर रुखापन और रेशेज की समस्‍या रह जाती है। होली खेलने के कई दिनों तक चेहरे से सिंथेटिक या केमिकलयुक्‍त कलर जाने में कई दिन लग जाते हैं। लेकिन अगर आप भी अपने चेहरे पर मौजूद होली के रंगों से छुटकारा पाना चाहते है तो उसके लिए घरेलू उपायों से आप चेहरे पर चढ़ा रंग उतार सकते हैं।

होली के पर्व पर रंग न लगे तो त्यौहार का मजा नहीं आता, लेकिन कई बार यह रंग आपके लिए समस्या का कारण बन जाते है। होली खेलते समय कोई भी रंगों के दुष्प्रभावों के बारे में नहीं सोचता। जिसका जहां मन करता है, जैसे मन करता है वहीं रंग लगा देता है।

कपड़ों और अन्य हिस्सों तक तो ठीक है लेकिन जब यह रंग आपकी त्वचा पर लग जाता है तो ये किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं होता। होली में इस्तेमाल किये जाने वाले रंगों में केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है जो त्वचा के लिए हानिकारक होते है।

बेसन का फेसपैक

बेसन हर रसोई में पाया जाने वाला सामान्य घरेलू उत्पाद है जिसकी मदद से त्वचा संबंधी बहुत सी परेशानियों को आसानी से दूर किया जा सकता है। चेहरे से होली के रंग हटाने के लिए बेसन, चोकर, दूध और नींबू के रस की कुछ बूंद को एक साथ मिलाकर मिश्रण बना लें। अब इस पैक का इस्तेमाल अपनी स्किन के हर उस हिस्से पर करें जहां रंग लगा है। लगाने के बाद जब यह पैक हल्का सूखने लगे तो हाथों से हल्का गीला करते हुए पैक को रगड़कर छुड़ाने लगे। जब यह पूरी तरह से हट जाए तो साबुन और पानी से अपना फेस धो लें।

मुल्तानी मिटटी

बालों से रंग निकालने के लिए पानी में मुल्तानी मिटटी मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें। अब इस पेस्ट को बालों में लगायें। सूखने का इंतजार करें। सूख जाने के बाद बालों को अच्छी तरह से धोकर साफ़ कर लें। चेहरे से रंग हटाने के लिए मुलतानी मिट्टी में गुलाबजल और दही मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकती है।

दाल का स्‍क्रब

अलग अलग दालों को मिलाकर इसें थोड़ा पीस लें। अब इसमें थोड़ा चावल का पाउडर मिला लें। अब इस पाउडर में थोडा सा दूध या दही मिला लें और नींबू का रस डालें। अब इसे चेहरे पर 5 से 10 मिनट तक के लिए लगाकर रखें। उसके बाद गीले कपडे़ से हल्‍के हाथों से स्क्रब करें।

खीरा और गुलाब जल का बना पैक

त्वचा से होली के रंग छुड़ाने के लिए आप खीरे, गुलाबजल और एप्पल साइडर विनेगर से बने पैक का भी इस्तेमाल कर सकते है। खीरें के रस में कुछ बूंदे गुलाबजल और एक चम्मच सेब के सिरके के साथ मिला कर लें। अच्छे से मिलाने के बाद पेस्ट को अपने चेहरे पर लगायें। कुछ मिनट इन्तजार करने के बाद पानी से साफ़ कर लें।

सरसों के दानों का पेस्ट

सरसों के दानों को पीस लें। अब उसमे थोडा सा सरसों का तेल मिला लें और इस पेस्ट को अपने चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर 5 से 7 मिनट तक रगड़ें। रगड़ने के बाद पानी से साफ़ कर लें और किसी माइल्ड साबुन से नहा लें। कलर निकल जाएगा।

 गेहूं का आटा

गेहूं के आटे में हल्दी, दूध और गुलाबजल डालकर आता गूँथ लें। अब इस आटे का थोड अथोदा हिस्सा लेकर उसे अपने चेहरे और शरीर पर रगड़ें। 2 से 3 बार इसका इस्तेमाल करें और फिर अच्छे से नहा लें। त्वचा से रंग छूट जाएगा।

पपीते का फैसपैक

होली खेलने के बाद पपीते का गूदा निकालकर इसे चेहरे पर मल लें। अब कुछ देर बाद चेहरा धो लें। होली खेलने से पहले ध्‍यान इन बातों का ध्‍यान रखें नाखूनों को रंगों से बचाने के लिए उनपर ट्रांसपेरेंट नेल लगा लें। इसे आपको होली खेलने से पहले करना होगा। पैरों के नाखूनों के लिए आप उनपर जैतून का तेल या ट्रांसपेरेंट नेल पेंट किसी भी उपाय का इस्तेमाल कर सकती है।

होली खेलने के लिए ज्यादा गाढे रंगों का इस्तेमाल न करें। स्प्रे आदि के इस्तेमाल से बचें यह त्वचा और बालों दोनों के लिए नुकसानदेह होता है। होली खेलने से पहले पूरे शरीर और बालों में अच्छे से सरसों और नारियल का तेल लगा लें। और पुराने कपडे ही पहनें।

रंगों का है एक धार्मिक और आध्यात्मिक संसार

जरा सोचिए अगर रंग न होते….कैसी होती धरती और कैसा होता संसार…सब फीका। रंग सुन्दर हैं मगर वे सिर्फ सुन्दर नहीं है बल्कि उनका अपना एक अलग संसार है और हर एक रंग का अपना महत्व है और मतलब भी। एक रंग की जगह दूसरा रंग नहीं ले सकता….वैसे ही जैसे सूरज नीला अच्छा नहीं लगेगा और धरती बस लाल।  वैसे, इंद्रधनुष के सात रंगों को ही रंगों का जनक माना जाता है। ये सात रंग क्रमशः लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला तथा बैंगनी हैं। रंगों की उत्पत्ति का मुख्य स्त्रोत सूर्य है। सूर्य के प्रकाश में विभिन्न रंग मौजूद हैं। जिनके कारण ही इंद्रधनुष का जन्म होता है।

रंगों का धार्मिक महत्व: रंगों के विज्ञान को समझकर ही हमारे ऋषि-मुनियों ने धर्म में रंगों का समावेश किया है। पूजा के स्थान पर रंगोली बनाना रंगों के मनोविज्ञान को भी प्रदर्शित करता है। कुंकुम, हल्दी, अबीर, गुलाल, मेंहदी के रूप में पांच रंग हर पूजा में शामिल हैं। धर्म ध्वजाओं के रंग, तिलक के रंग, भगवान के वस्त्रों के रंग भी विशिष्ठ रखे जाते हैं। ताकि धर्म-कर्म के समय हम उन रंगों से प्रेरित हो सकें और हमारे अंदर उन रंगों के गुण आ सकें।

आध्यात्मिक महत्त्व: आध्यात्मिक क्षेत्र में रंगों को सर्वाधिक महत्त्व का वर्णन ‘थियोसोफिकल सोसायटी’ ने दिया है। सोसायटी के अनुसार, मानव शरीर के अतिरिक्त एक सूक्ष्म शरीर भी होता है, जो चारों तरफ़ अण्डाकृति चमकीले धुंध से घिरा रहता है। आध्यात्मिक दृष्टि से उत्पन्न होने से इस अण्डाकृति में विभिन्न रंग दृष्टिगोचर होते हैं, जिनके आधार पर किसी शरीर के विषय में विभिन्न प्रकार की जानकारी मिल सकती है।

वास्तु में महत्त्व: शुभ रंग भाग्योदय कारक होते हैं और अशुभ रंग भाग्य में कमी करते हैं। विभिन्न रंगों को वास्तु के विभिन्न तत्त्वों का प्रतीक माना जाता है। नीला रंग जल का, भूरा पृथ्वी का और लाल अग्नि का प्रतीक है।

 

(साभार – नयी दुनिया )