Saturday, October 3, 2026
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नासा के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में तारों के बीच खोजा पानी 

नासा के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में तारों के बीच पानी की खोज की है। इसे जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप की मदद से देखा गया है। यह एक ऐसे बादल है जिनमें पूरे ब्रम्हांड में सबसे अधिक पानी मौजूद रहता है। यह अणुओं से बना एक बादल है, जो धूल, गैस और छोटे-छोटे अणुओं से मिलकर बना है।

यह पानी तारों के ग्रहों की छोटी कक्षा तक पहुंचाया जाता है। इन बादलों के भीतर, छोटे धूल कणों की सतहों पर पानी बनाने के लिए ऑक्सीजन के साथ हाइड्रोजन परमाणु जुड़े होते हैं। यह कार्बन मिथेन बनाने के लिए हाइड्रोजन के साथ जुड़ जाता है।

यह हाइड्रोजन के साथ नाइट्रोजन बॉन्ड से अमोनिया बनाते हैं। यह अणु धूल के कणों की सतह पर चिपकते हैं, जिससे लाखों वर्षों में बर्फीली परतें जमा करते हैं।

 

पंडित महिला की अंतिम यात्रा में शरीक हुआ मुस्लिम समुदाय

श्रीनगर : कश्मीरर घाटी में एक बार फिर से कश्मीरियत की मिसाल देखने को मिली है। सदियों से चले आ रहे आपसी भाईचारे की परंपरा को निभाते हुए मुस्लिम समुदाय के लोग त्राल में एक पंडित महिला की अंतिम यात्रा में शरीक हुए।

जानकारी के मुताबिक शुक्रवार तड़के कश्मीरी महिला पंडित कमलावती (80) का निधन उसके पैतृक गांव त्राल के नूरपुर में हो गया। वो काफी समय से बीमार चल रही थी। जैसे ही यह खबर फैली आस-पास के गांव के लोग परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट करने पहुंच गए।

उन्होंने अंतिम संस्कार की तैयारियों में हाथ बंटाया। इसके साथ ही अंतिम यात्रा में कांधा भी दिया। दु:ख की इस घड़ी में गांव की मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुईं। मृतक के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि देख कर अच्छा लगा कि आस-पास के इलाकों में रहने वाले दूसरे समुदाय के लोग भी न केवल हमारे दुख में शामिल हुए बल्कि हर काम में हाथ भी बंटाया।

उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानीय लोगों और पड़ोसियों की वजह से आज भी हम अपने घरों में महफूज हैं।

 

किंग खान पर भारी पड़े विराट कोहली, छीना नंबर वन का ताज

नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने बॉलीवुड के किंग खान कहे जाने वाले शाहरुख खान को पछाड़ते हुए नंबर एक का मुकाम हासिल कर लिया है। केवलब्रांड प्रमोशन करने के मामले में विराट कोहली शाहरुख समेत अन्य बॉलीवुड एक्टर्स  को काफी पीछे छोड़ दिया है।

144 मिलियन डॉलर के पार हुई ब्रांड वैल्यू
विराट कोहली की ब्रांड वैल्यू 144 मिलियन डॉलर के पार चली गई है। ऐप बेस्ड टैक्सी सर्विस उबर के ब्रांड अंबेसडर बन जाने के बाद कोहली की ब्रांडिंग से होने वाली रोजाना की कमाई 5 करोड़ रुपये के पार चली गई है। क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट का कप्तान बनने के बाद कोहली केवल ब्रांडिंग से रोजाना 4 करोड़ रुपये कमाते थे।

इन फिल्मी स्टार्स की यह है कमाई
कोहली के बाद शाहरुख खान 106 मिलियन डॉलर, दीपिका पादुकोण 93 मिलियन डॉलर, अक्षय कुमार 47 मिलियन डॉलर और रणवीर सिंह 42 मिलियन डॉलर कमाते हैं। यह स्टार्स भी विराट से काफी पीछे चल रहे हैं।

17 ब्रांड्स के हैं अंबेसडर 
विराट कोहली फिलहाल 17 ब्रांड्स के अंबेसडर हैं जिनमें ऑडी, मान्यवर, एमआरएफ टायर, बूस्ट हेल्थ ड्रिंक, जियोनी मोबाइल फोन शामिल हैं। कोहली फिलहाल पंजाब नेशनल बैंक के भी ब्रांड अंबेसडर हैं, जिससे वो इस वित्त वर्ष के बाद से नाता तोड़ देंगे। कोहली के इंस्टाग्राम पर 17 मिलियन से अधिक फॉलोवर्स हैं।

 

 

कानूनी लड़ाई जीती, बंगाल की पहली ट्रांसजेंडर देंगी यूपीएससी की परीक्षा

ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को समाज में तो भेदभाव का सामना करना ही पड़ता है, सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक जगहों पर भी उनके साथ कई बार वही रवैया अपनाया जाता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के अपने एक आदेश में ट्रांसजेंडर्स को कॉलेजों और सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करते वक्त ‘अन्य’ कैटिगरी के तहत आवेदन करने की सुविधा प्रदान कर दी है, लेकिन हकीकत में अभी इसका अनुपालन सही तरीके से नहीं हो पाया है, तभी तो पश्चिम बंगाल की रहने वाली ट्रांसजेंडर अत्री कर जैसे लोगों के लिए बंगाल पीसीएस और यूपीएससी की परीक्षा देने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है।

अत्री को काफी कोशिशों के बाद बंगाल पीएससी के एग्जाम में बैठने की इजाजत मिली। 28 वर्षीय अत्री पेशे से शिक्षिका  हैं। वह सिविल सेवक बनना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने तैयारी की। लेकिन 2017 में यूपीएससी का फॉर्म भरते वक्त वे हैरत में पड़ गईं। उन्होंने देखा कि फॉर्म में लिंग वाले विकल्प में सिर्फ पुरुष और स्त्री का ही कॉलम है। ऐसा ही पीसीएस की परीक्षा में भी हुआ था। बंगाल लोक सेवा आयोग ने सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया था। अत्री लोक सेवा के अधिकारियों के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचीं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने रेलवे में एक पद के लिए भी फॉर्म भरा था, जिसमें महिला और पुरुष के साथ ‘अन्य’ का भी विकल्प था। वहां पर हालांकि उन्हें जनरल कैटिगरी में रख दिया गया। अत्री इन दोनों मामलों को लेकर कोलकाता हाई कोर्ट पहुंचीं। कोर्ट ने बंगाल लोक सेवा आयोग और रेलवे चयन बोर्ड को फटकार लगाई। कोर्ट ने बंगाल लोक सेवा आयोग से कहा कि वह ‘अन्य’ का विकल्प उपलब्ध करवाए और रेलवे चयन बोर्ड अत्री को आरक्षित वर्ग में रखे। इस साल 29 जनवरी को पीसीएस की परीक्षा में अत्री को बैठने का मौका मिला। वह बंगाल की पहली ट्रांसजेंडर हैं जिसे सिविल सर्विस एग्जाम में बैठने का मौका मिला है। इसी के साथ ही वह 2018 की यूपीएससी की सिविल सर्विस प्रीलिम्स की परीक्षा में भी बैठेंगी।

वह रेलवे की परीक्षा देने  वाली भी पहली ट्रांसजेंडर थीं। वह बताती हैं कि इस छोटे से काम के लिए उन्हें काफी लंबा संघर्ष करना पड़ा। पहले उन्होंने लोक सेवा आयोग के चक्कर लगाए, लेकिन वहां के अधिकारी उन्हें सिर्फ आश्वासन देते रहे। इसके बाद मजबूर होकर उन्हें कोर्ट का रुख करना पड़ा। उन्होंने मानवाधिकार कानून नेटवर्क की मदद ली और कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। वह कहती हैं कि इस पूरे काम में काफी लंबा समय लगा और उन्हें मुश्किल भरे दौर देखने पड़े। कई बार तो ऐसा भी लगा कि धैर्य जवाब दे जाएगा और वह यह नहीं कर सकेंगी।

हुगली जिले के त्रिवेणी में रहने वाली अत्री एक प्राइमरी स्कूल में  शिक्षिका हैं। अपने हक की लड़ाई लड़ते हुए उन्हें स्कूल को भी सम्भालना करना पड़ा। कोर्ट पहुंचने के लिए उन्हें पांच घंटे का सफर करना पड़ता था और स्कूल को भी देखना पड़ता था। अत्री इंग्लिश ऑनर्स में ग्रैजुएट हैं। एक कोचिंग संस्थान ने उन्हें मुफ्त में सिविल सर्विस की कोचिंग कराने का भी वादा किया था, लेकिन कानूनी लड़ाई के बीच में वह भी छूट गया। वह कहती हैं कि अएगर एक पढ़े लिखे इंसान को अपने हक के लिए इतना संघर्ष करना पड़ता है को बिना पढ़े-लिखे ट्रांसजेंडर्स को किन हालातों में जीना पड़ता होगा।

 

इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर, कहा- इज्जत से मरना इंसान का हक

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि गरिमा के साथ मौत एक मौलिक अधिकार है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने निष्क्रिय इच्छा मृत्यु और लिविंग विल को कानूनन वैध ठहराया है। इस संबंध में अदालत ने विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी करते हुए कहा है कि जब तक सरकार इस संबंध में कानून नहीं बना देती, तब तक ये दिशानिर्देश लागू रहेंगे।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान पीठ ने 2005 में कॉमन कॉज नामक एनजीओ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याची की ओर से पेश मशहूर अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी थी कि मेडिकल एक्सपर्ट की राय में मरीज के ठीक होने की संभावना खत्म हो चुकी हो तो उसे जीवन रक्षक प्रणाली से हटाने की अनुमति दी जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो उसकी यंत्रणा बढ़ती ही जाएगी। सरकार ने भी निष्क्रिय इच्छा मृत्यु का समर्थन किया। याची और सरकार की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पिछले साल 11 अक्तूबर में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने 42 साल तक कॉमा में रही अरुणा शानबाग के मामले में सुनवाई करते हुए इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी थी, लेकिन इसके संबंध में कोई कानूनी प्रावधान न होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हुई थी। ताजा फैसले में गरिमा के साथ मृत्यु के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 में शामिल कर लिया गया है, जो हर नागरिक को जीने का अधिकार देता है।

अहम साबित हुआ अरुणा शानबाग केस

मरते हैं आरजू में मरने की, मौत आती है पर नहीं आती, मिर्जा गालिब के इस शेर का उल्लेख करते हुए जस्टिस मार्कंडेय काटजू और जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ ने 2011 में अरुणा शानबाग मामले में सुनवाई करते हुए निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की इजाजत दी थी। बाद में संसद से आईपीसी की धारा 309 (आत्महत्या की कोशिश) को खत्म करने की सिफारिश की थी।

करीब छह साल बाद  सुप्रीम कोर्ट ने  इच्छा मृत्यु को मंजूरी दे दी और  इसे कानूनी जामा पहनाने की लड़ाई में अरुणा शानबाग का केस अहम मोड़ साबित हुआ।  7 मार्च, 2011 को आए इस फैसले ने ठीक न होने की हालत में पहुंच चुके मरीजों एवं उनके परिजनों को राहत प्रदान करते हुए विशेष परिस्थितियों में इच्छा मृत्यु की अनुमति दी। मालूम हो कि मुंबई के किंग एडवर्ड्स मेमोरियल अस्पताल में नर्स अरुणा शानबाग के साथ 1973 में उसी अस्पताल के सोहनलाल वाल्मीकि नाम के वार्ड बॉय ने बलात्कार किया था। इसके बाद कुत्तों को बांधने वाली जंजीर से गला घोंटकर उसकी जान लेने की भी कोशिश की। दिमाग में ऑक्सीजन की सप्लाई न पहुंचने के कारण वह कॉमा में चली गई और 42 साल बाद 18 मई, 2015 को उसकी मौत हो गई।

हालांकि इससे पहले 26 अप्रैल, 1994 को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने भी इच्छा मृत्यु का समर्थन करते हुए आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) को असंवैधानिक करार दिया था। पीठ ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 में जीने के अधिकार के साथ मरने का अधिकार भी मौलिक अधिकार के रूप में निहित है लेकिन इसके दो साल बाद 21 मार्च, 1996 को पांच जजों की संविधान पीठ ने ज्ञान कौर बनाम भारत सरकार के मामले में इस फैसले को पलटते हुए कहा कि इच्छा मृत्यु और किसी की मदद से आत्महत्या देश में गैरकानूनी हैं।

 

 

अब रेलवे स्टेशनों पर सेल्फी खींचने के लिए बनाए जाएंगे प्वाइंट

आपको जल्द ही रेलवे स्टेशनों पर सेल्पी के लिए प्वाइंट्स बने दिख सकते हैं। भारतीय रेलवे ने सेल्फी प्वाइंट के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। जानकारी के मुताबिक दिसंबर 2018 तक देश के 70 रेलवे स्टेशनों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। यह सुविधा उन स्टेशनों पर उपलब्ध कराई जाएगी जहां पर लिफ्ट, एस्कीलेटर या इस तरह की दूसरी सुविधाएं मौजूद होंगी। पिछली कुछ घटनाओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यह कदम उठाया है।

आपको बता दें कि रेलवे स्टेशन डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन, निजी कंपनी के साथ मिलकर देश के 600 स्टेशनों के रिडिवलेपिंग के काम में जुट गए हैं। इसके अलावा 70 रेलवे स्टेशन ऐसे हैं जिनके विकास के लिए रेलवे खुद काम कर रहा है। इनमें लोनावाला, पुणे, मुंबई, नागपुर, लखनऊ, वाराणसी, जयपुर, दिल्ली और मैसूर का नाम शामिल है।

रेलवे बोर्ड के चेयरमेन अश्वनी लोहणी ने विभिन्न जोन्स के अधिकारियों को पत्र के माध्यम से कहा है कि यात्रियों बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए रेलवे प्रयासरत है। पूरे भारत वर्ष में 600 स्टेशनों को चिह्नित किया गया है जिनके विकास का काम आईआरएसडीसी और रेलवे विभाग मिलकर करेगा।

उन्होंने कहा कि 2018-19 के बजट में यात्रियों को सुविधा देने का जिक्र किया गया था। जहां लिफ्ट और एस्किलेटर जैसी सुविधाओं को जोड़ने का जिक्र किया गया है। डिआरएम को निर्देश दिए गए हैं कि वह संबंधित काम के लिए आर्किटेक्ट की नियुक्ति करें। रेलवे ने तय किया है कि कर्मशियल बिल्डिंग में तैयार करेंगे ताकि भविष्य में होटल और हॉस्पिटल जैसी सुविधा भी रेलवे द्वारा दी जा सके।

 

भारतीय पुरुषों में बढ़ रही है खूबसूरती की चाहत

अब तक सजना-संवरना महिलाओं का काम समझा जाता था. पुरुष तो शादी-ब्याह या कुछ खास समारोहों के मौके पर ही थोड़ा-बहुत इत्र-फुलेल और क्रीम लगा लेते थे. लेकिन भारत में अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारतीय पुरुष भी सजने-संवरने और सौंदर्य प्रसाधनों पर खर्च के मामले में महिलाओं से पीछे नहीं हैं। दिलचस्प बात यह है कि आम धारणा के विपरीत भारतीय पुरुष यह सब महिलाओं को आकर्षित करने के लिए नहीं करते। दूसरों से स्मार्ट और बेहतर दिखने की चाहत और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए लोग अब खुल कर ब्यूटी पार्लरों में जाकर अपनी जेबें ढीली कर रहे हैं। इसके साथ ही वे अब कास्मेटिक सर्जरी से भी नहीं हिचक रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय पुरुष हर साल सजने-संवरने पर 50 अरब रुपये की भारी–भरकम रकम खर्च कर देते हैं और यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।

स्टडी रिपोर्ट

मार्केट रिसर्च करने वाली कंपनी नीलसन के एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय पुरुष हर साल अपने सजने-संवरने की चाहत में पांच हजार करोड़ रुपये खर्च कर देते हैं। कुछ साल पहले तक इस बारे में कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। रिपोर्ट के मुताबिक पुरुष यह रकम महिलाओं को आकर्षित करने के लिए नहीं बल्कि दफ्तरों या कामकाज की जगह पर दूसरों से बेहतर व स्मार्ट दिखने के लिए करते हैं।

नीलसन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अब एक दशक पहले के मुकाबले पुरुष भारी तादाद में फेसवाश और क्रीम खरीद रहे हैं। वर्ष 2009 से 2016 के दौरान चेहरा साफ करने वाली क्रीमों (फेस क्रीम्स) की बिक्री में 60 गुनी वृद्धि हुई है। पुरुषों में सजने-संवरने की तेजी से बढ़ती चाहत की वजह से अब तमाम कंपनियां उनके लिए लगभग हर महीने नए-नए उत्पाद बाजार में उतार रही हैं। कुछ साल पहले तक पुरुषों की सौंदर्य प्रसाधन सामग्री के नाम पर एकाध फेसवाश और बोरोलीन क्रीम ही बाजार में उपलब्ध थी लेकिन अब ऐसे सैकड़ों उत्पाद उपलब्ध हैं। पुरुषों की सौंदर्य प्रसाधन सामग्री बनाने वाली कंपनियों के लिए साल 2017 तो वरदान साबित हुआ है।

तेजी से बढ़ता बाजार

पुरुषों की सौंदर्य सामग्री पर टेकसी के एक हालिया अध्ययन में कहा गया है कि 2020 तक इस बाजार के सालाना 20 से 22 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति सालाना आय में वृद्धि, शहरी मध्यवर्ग की आबादी बढ़ने और पुरुषों में सुंदर दिखने की बढ़ती चाहत के चलते यह बाजार तेजी से बढ़ रहा है। ऐसा सिर्फ महानगरों में ही नहीं छोटे-छोटे शहरों में भी हो रहा है। पुरुषों में इस बढ़ती चाहत को भुनाने के लिए अब टीवी पर भी पुरुष सौंदर्य प्रसाधनों के विज्ञापनों की भरमार हो गई है। पहले महज गोरे होने की क्रीम के विज्ञापन ही नजर आते थे लेकिन अब प्रचार के मामले में यह महिला सौंदर्य प्रसाधनों से पीछे नहीं है।

व्यापार संगठन एसोचैम की 2016 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारतीय सौंदर्य उत्पादों का बाजार साढ़े छह अरब अमेरिकी डॉलर का है जिसके वर्ष 2025 तक बीस अरब डॉलर होने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पुरुषों में सौंदर्य के प्रति बढ़ती जागरूकता की वजह से बीते पांच वर्षों में सौंदर्य प्रसाधन का बाजार 42 फीसदी से अधिक बढ़ा है। सौंदर्य प्रसाधनों पर भारतीय किशोरों का औसतन मासिक खर्च बीते एक दशक में तीन से चार गुना बढ़ गया है।

लुक को लेकर जागरुक

सौंदर्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की आबादी में से लगभग आधे लोगों के 18 से 30 साल के आयुवर्ग में होने के कारण आने वाले वर्षों में पुरुष सौंदर्य प्रसाधन सामग्री का बाजार तेजी से बढ़ने की संभावना है।एसोचैम ने भी अपनी एक स्टडी में खुलासा किया कि देश में 18 से 25 साल की उम्र वाले पुरुष अपने संजने-संवरने और सौंद्रय प्रसाधनों पर महिलाओं के मुकाबले ज्यादा खर्च करते हैं।

पहले पुरुषों के किट में कंघी, सेविंग के सामान, डियोडोरेंट और बालों में लगाने के जेल के अलावा कुछ और नहीं होता था। अब बाल काटने वाले ज्‍यादातर हेयर कटिंग सैलून अब पुरुषों के ब्यूटी पार्लर के रूप में बदल गए हैं। पुरुष अब अच्छे लुक के प्रति काफी जागरुक हैं। वह अपने शरीर को फिट रखने के साथ ही सजने-संवरने पर भी दिल खोल कर खर्च कर रहे हैं। ऑडिट कंपनी केपीएमजी के मुताबिक 2018 के अंत तक भारत में सौंदर्य प्रसाधन सामग्री का सालाना कारोबार बढ़ कर 800 अरब का आंकड़ा पार कर लेगा।

 

टल सकता है हार्ट अटैक का खतरा

चिकित्सकों का मानना है कि रोजाना 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत अचानक आए हार्ट अटैक से हो जाती है। भारत में ऐसे केस अन्य देशों की तुलना में ज्यादा देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि हॉर्ट अटैक का खतरा 99% तक टाला जा सकता है, अगर आप नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करवाते हैं।

उन्होंने कहा कि 30 की उम्र पार करने के बाद सभी को नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए। हॉर्ट अटैक के लक्षण को पहचानना बड़ी बात नहीं। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण से आसानी से पता चल जाता है कि शरीर में कहां क्या खामी है और समय रहते इन खामियों को दूर हार्ट अटैक जैसे खतरे से बचा जा सकता है।

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में हृदयरोग की आशंका अधिक

शोध में पता चला है कि महिलाओं में मानसिक तनाव के कारण हृदयरोग की आशंका पुरुषों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। जॉर्जिया स्थित इमोरी यूनीवर्सिटी में हुए शोध में हार्ट अटैक झेल चुकी महिला मरीजों के आंकड़ों पर अध्ययन किया गया।

इस अध्ययन में कहा गया है कि मानसिक तनाव के कारण मायोकॉर्डियल इस्कीमिया की समस्या हो जाती है। इसके कारण हृदय की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह असंतुलित हो जाता है। यह शोध अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित हुआ है।

इसमें कहा गया है कि हृदय की बीमारी से जूझ रही महिलाओं को उबरने के लिए पुरुषों की अपेक्षा गहन देखभाल की जरूरत होती है। मानसिक तनाव भी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के हृदय की सेहत को अधिक प्रभावित करता है। इससे पहले हुए शोध में यह तो साबित हुआ था कि मानसिक तनाव से महिलाओं को हृदय रोग का खतरा अधिक होता है, लेकिन किस हद तक यह स्पष्ट नहीं हुआ था।

प्रमुख शोधकर्ता वोइला वकारिनो का कहना है कि मायोकॉर्डियल इस्कीमिया में हृदय की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। यह हृदय की धमनियों के पूरी तरह अवरुद्ध होने के कारण हो सकता है। इस शोध के लिए हार्ट अटैक के कारण अस्पताल पहुंचने वाली 61 साल की उम्र की डेढ़ सौ महिलाओं और 156 पुरुषों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया।

डॉ. वकारिनो का कहना है कि महिलाएं इस्कीमिया के प्रति अधिक संवेदनशील इसलिए होती हैं क्योंकि उनकी छोटी रक्त धमनियों में प्रवाह बाधित हो जाता है। यह स्थिति अक्सर भावनात्मक तनाव के कारण उत्पन्न होती है। इस कारण महिलाओं में कोई लक्षण न होने के बावजूद इस्कीमिया की आशंका अधिक रहती है।

असंतुलित प्रवाह होता है दुश्मन

मायोकॉर्डियल इस्कीमिया के कारण हृदय की मांसपेशियों में रक्त प्रवाह असंतुलित हो जाता है। यह हृदय की धमनियों के पूरी तरह अवरुद्ध होने के कारण हो सकता है।

दिल के लिए खतरनाक हैं ये लक्षण

माना जाता है कि हार्ट अटैक इंसान को कभी भी आ सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हार्ट अटैक आने के संकेत महीने भर पहले से ही मिलने शुरू हो जाते हैं। हार्ट अटैक के पहले कई रोगियों ने हाथ, जबड़े, दांत या सिर में दर्द की शिकायत की है।

सीने में जलन या बदहजमी- अगर आपके सीने में लगातार जलन हो रही है या फिर आप बदजहमी की समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। ठीक ना होने वाली बदहजमी हार्ट अटैक का एक संकेत हैं।

सांस लेने में समस्या- सांस लेने में समस्या हो रही है या फिर पूरी तरह से सांस लेने के बाद भी आपको सांस की कमी महसूस हो रही है तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।

उल्टी- बार-बार उल्टी और पेट में दर्द भी हार्ट अटैक से पहले दिखने वाले लक्षणों में शामिल है।

कंधों में दर्द- हाथ के अलावा अगर लगातार आपके कंधों में दर्द हो रहा है या फिर अपर बैक में दर्द हो रहा है तो सावधान हो जाएं। हार्ट अटैक के पहले कई रोगियों में यह लक्षण दिखा है।

 

स्कूटी चलाते समय धूप से बचें इस तरह

अब गर्मियों का मौसम आ गया है, आपको अपना और अपनी त्वचा का खास ख्याल रखने की ज़रूरत है। हम में से लड़कियाँ कॉलेज या ऑफिस अपनी स्कूटी से जाती हैं। धूप से बचने की चाहे जितनी भी सलाह दी जाये पर ये तो सच है कि हम चाहे भी तो धूप में घर या किसी एक बंद कमरे में बैठे नहीं रह सकते और न ही हम धूप को तो कम नहीं कर सकते हैं। त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए कुछ ऐसा जरूर किया जा सकता है कि स्कूटी चलाते वक्त कम से कम प्रभाव पड़े।

स्कूटी चलाते हुए हमेशा हेलमेट लगाएं, लेकिन हेलमेट से बाल झड़ने की समस्या होने लगती है। हेलमेट में मोटे अस्तर के चलते ये पसीना ज़्यादा सोखता है, जिससे बैक्टीरिया पैदा होते हैं और ये आपके बालों की जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे बचने के लिए आप पहले स्कार्फ बांधे और फिर हेलमेट लगाएं। स्कार्फ को सिर्फ सिर पर ही नहीं पूरे चेहरे पर बांधे, ताकि आपकी त्वचा भी धूप से बच सके।

स्कूटी चलाते हुए सनग्लासेज़ आपको ना सिर्फ धूप से बचाएंगे, बल्कि धूल से भी आंखों की रक्षा करेंगे। ड्राइव करते हुए ऐसे सनग्लासेज़ चुनें, जो आपकी आंखों को पूरी तरह से ढ़कें।

गर्मियों में हम स्लीवलेस या हाफ स्लीव्ज़ कपड़े पहनते हैं लेकिन इससे हाथों पर टैनिंग होने लगती है आप कितना भी ग्लव्ज़ पहनें पर थोड़ा हिस्सा रह ही जाता है इसलिए स्कूटी चलाते वक्त समर कोट पहन लें। समर कोट हल्के फैब्रिक के होते हैं, जिससे आपको गर्मी भी नहीं लगेगी. अगर आप समर कोट नहीं खरीदना चाहती हैं तो अपनी किसी फुल स्लीव्ज़ कॉटन शर्ट को भी पहन सकती हैं।

सिर्फ हाथ ही नहीं, हथेलियों को भी धूप से बचाना ज़रूरी है. इसलिेए ग्लव्ज़ पहना करें। ग्लव्ज़ जितने सिंपल हो उतने अच्छा है, अजीब से प्रिंटेड ग्लव्ज़ आपके लुक को बिगाड़ सकते हैं।

गर्मियों में जूते या आगे से बंद फुटवेयर पहनना किसी को नहीं पसंद, लेकिन स्कूटी चलाते वक्त इंजन और सड़क की हीट से पैर की त्वचा खराब होने लगती हैं क्योंकि पैर धूप में रहते हैं। इससे बचने के लिए आप स्नीकर्स पहनें और अगर आप स्नीकर्स नहीं पहनना चाहती हैं तो क्लोज़ टो फुटवेयर ज़रूर पहनें। वैसे आप जुराबें भी पहन सकती हैं, लेकिन कॉलेज पहुंचने पर इसे उतार दें। इन सब चीज़ों के अलावा घर से निकलते हुए सनस्क्रीन लगाना कभी ना भूलें। अपनी त्वचा के हिसाब से सही SPF वाली सनस्क्रीन चुनें।

(साभार – फैशन 101)

दिल्ली की रेड लाइट में जन्मे बच्चों की ‘गुरु’ हैं ये महिला

वीडियो साभार – अमर उजाला टीवी

जिन बच्चों को उनके पिता का नाम नहीं मिला। जिन औलादों की मां अपने पास इस डर से नहीं रखती कि उनके बच्चे उस पेशे के बारे में ना जान पाएं। इन बच्चों का ललिता ना सिर्फ ख्याल रखती हैं बल्कि उन्हें शिक्षित भी करती हैं।