Thursday, April 2, 2026
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थरूर की भारी अँग्रेजी पर अमूल का दिलचस्प कार्टून, थरूर बोले- बटरली ऑनर्ड!

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नयी दिल्ली :  काँग्रेस  नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर अक्सर अंग्रेजी के भारी-भरकम और जटिल शब्दों का इस्तेमाल करते रहते हैं। इसके लिए टि्वटर पर लोग उन्हें निशाना भी बनाते रहते हैं। थरूर पिछली बार ‘रोडोमोंटेड’ शब्द को लेकर सोशल साइट पर निशाने पर आए थे। इसका मतलब डींगें हांकना होता है। अमूल ने इसको लेकर एक कार्टून बनाया है जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बनाया गया है। कंपनी ने अपने इसमें लिखा ‘थरूरॉरस एनीवन?’ खुद शशि थरूर भी इस विज्ञापन से प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सके। उन्होंने ‘बटरली ऑनर्ड’ ट्वीट कर कार्टून की तारीफ की है। उनका यह जवाब भी लोगों को भा गया।

अमूल आमतौर पर सामयिक मसलों पर कटाक्ष करते हुए कार्टून बनाता रहता है। अमूल का नया कार्टून सामने आते ही लोग उसकी तारीफ करने लगे थे। लेकिन, थरूर की ओर से इस पर दी गई प्रतिक्रिया ने भी लोगों को प्रभावित किया। अमूल ने ट्वीट किया, ‘टॉपिकल: सांसद का रोडोमोंटेड जैसे बड़े-बड़े शब्द ट्वीट करने के प्रति लगाव!’ इसके साथ लगाए गए कार्टून पर ‘अमूल: मधुर स्वाद के लिए छोटा शब्द!’ इसके सोशल होते ही बड़ी तादाद में लोग प्रतिक्रिया देने लगे। लोग इसकी तारीफ करने लगे। इनमें शशि थरूर भी शामिल थे। योगेश जोशी ने लिखा, ‘बेहतरीन! स्पॉट ऑन!’ कुलवंत सिंह द्राल ने कैटल क्लास पर थरूर द्वारा दिए गए बयान को याद करते हुए ट्वीट किया, ‘कैटल क्लास उनका एक अन्य शब्द है। मवेशी ही दूध देते हैं और दूध भी केवल अमूल का!’

शशि थरूर के बेहतरीन जवाब पर भी कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी। बहुत से लोगों ने उनकी खिंचाई भी की। वैभव भास्कर ने लिखा, ‘इतनी कठिन अंग्रेजी का प्रयोग मत किया करो साहब…एक ट्वीट में चार बार गूगल खोलना पड़ता है।’ सुंदर ने ट्वीट किया, ‘उस शिक्षा का क्या इस्तेमाल यदि इससे बेहतर तरीके से संवाद ही न हो सके और ऐसे शब्दों का प्रयोग सिर्फ पांडित्य दिखाने के लिए होता है।’ वहीं, सुदीप होरे ने ट्वीट किया, ‘कृपा करके क्या आप यह बता सकते हैं कि आप किस डिक्शनरी का इस्तेमाल करते हैं?’

 

मंदिर अध्यक्ष ने दी मस्जिद के लिए जमीन, लोगों ने सराहा

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जहां एक तरफ देश में हिंदू-मुस्लिम के नाम पर लोग आए दिन भड़काऊ भाषण या फिर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करते रहते हैं। वहीं दूसरी ओर कर्नाटक में एक हिंदू ने अपनी जमीन एक मस्जिद के विस्तार के लिए दान में देकर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, यह मामला दक्षिण कन्नड़ जिले का है जहां पर एलिया श्री विष्णुमूर्ती मंदिर के अध्यक्ष मोहन राय ने अपनी जमीन का 12 सेंट मस्जिद को दे दिया है जो कि उनकी संपत्ति के बराबर में है। ओलेमुंडोवू गांव के रहने वाले राय को मस्जिद प्रशासन ने धन्यवाद कहा है और उनके इस कदम की प्रशंसा की है। मस्जिद प्रशासन ही नहीं कई लोग राय के इस कदम की सराहना कर रहे हैं।

इस पर राय का कहना है कि राष्ट्र में हिंदू-मुस्लिम एकता और सामंजस्य से बढ़कर कुछ नहीं है। राय ने कहा कि “मस्जिद मेरी संपत्ति के बिलकुल बराबर में है और मस्जिद कमेटी को इसका विस्तार करने के लिए जमीन की आवश्यकता थी। बेशक हमारे अलग-अलग धर्म है लेकिन हमारा एक ही भगवान है। हम धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं कर सकते हैं और हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। मुझे जो दिया है वो भगवान ने दिया है और मैं उसी का भाग दान में दे रहा हूं।”

2018 होगा राजनीतिक लेखनी का वर्ष : प्रकाशक

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नयी दिल्ली : संस्मरणों से लेकर निबंधों तक 2018 में भारतीय राजनीतिज्ञों द्वारा लिखी गई कई पुस्तकें बाजार में आएंगी और अगला वर्ष राजनीतिक पुस्तकों का होगा।
सांसदों और अन्य राजनीतिज्ञों द्वारा लिखी गई कई पुस्तकें बाजार में आनी हैं। इस सूची में पूर्व मंत्रियों कपिल सिब्बल और शशि थरूर और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी द्वारा लिखी गई पुस्तकें शामिल हैं।
प्रकाशन समूहों के प्रतिनिधियों ने यहां कहा कि राजनीतिक लेखन भारत में बहुत अधिक लोकप्रिय हो रहा है।
रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपीश मेहरा ने कहा, ‘‘वर्ष 2018 में राजनीतिज्ञों की लिखी कई पुस्तकें आएंगी। इसमें से कुछ जीवनी हो सकती हैं, अन्य राजनीतिक स्थितियों या समीकरणों पर होंगी।’’ हार्पर कोलिंस के सीईओ अनंत पद्मनाभन ने कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि युवा इसमें :इस तरह के लेखन में: रूचि ले रहे हैं। अधिक युवा वोट कर रहे हैं, वे पढ़ना चाहते हैं और :राजनीति पर: बेहतर जानकारी रखना चाहते हैं।’’

 

7 जनवरी को कोलकाता में होगी ‘भैरव से भैरवी तक’ की संगीतमय यात्रा

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कोलकाता : आतंकवाद, सामाजिक भेदभाव, हिंसा आदि नकारात्मक तत्वों का सही जवाब भारतीय संगीत है, जो व्यक्ति को आपाधापी भरे जीवन में थोड़ा रुक कर आत्मशोध का अवसर देता है। ‘भैरव से भैरवी तक’ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की परंपराओं को विकसित करने के लिए है। इसकी शुरुआत कला की समृद्ध भूमि बनारस से 18 नवंबर 2017 से हुई है जो अहमदाबाद और कोलकाता से होते हुए ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोपीय देशों तक जारी रहेगी। यह बात शास्त्रीय संगीत के यशस्वी कलाकार पं.राजन मिश्र ने भारतीय भाषा परिषद में आयोजित एक प्रेस संवाद में कही। उन्होंने नई पीढ़ी में शास्त्रीय संगीत के प्रति रुचि पैदा करने के लिए सरकार से आहवान किया कि कक्षा छह तक संगीत की शिक्षा अनिवार्य की जानी चाहिए ताकि छोटी उम्र से ही विद्यार्थियों में संगीत प्रेम पैदा हो और वे सकारात्मक हों। पं.राजन मिश्र ने इस पर अफसोस जाहिर किया कि संगीत का सांस्कृतिक मूल्यों के रक्षण के लिए उपयोग करना चाहिए जबकि इसके लिए दूरवर्ती योजना नहीं बनाई जाती।

प्रसिद्ध तबलावादक पंडित कुमार बोस पंडित राजन-साजन मिश्र के संगीत दल के मुख्य अंग हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल संगीत कला का एक मुख्य केंद्र है। आगामी 7 जनवरी को ठाकुरबाड़ी जोड़ासांको में ‘भैरव से भैरवी तक’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है जो संगीत के माध्यम से भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों की रक्षा का भी एक उपक्रम है। इस अभियान की मुख्य संयोजक सलोनी गांधी ने विश्‍व में भारतीय संगीत का अलख नए सिरे से जगाने के लिए नई पीढ़ी का आहवान किया और कहा कि इस अभियान का उद्देश्य शास्त्रीय संगीत को आम लोगों तक पहुँचाना है। भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ.शंभुनाथ के एक प्रस्ताव के उत्तर में पं.राजन मिश्र ने कहा कि हिंदी कवि जयशंकर प्रसाद के कई गीत विभिन्न रागों में गाये गए हैं। यदि प्रायोजक सामने आएँ तो ऐसे कवियों की रचनाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए उन्हें संगीतबद्ध किया जा सकता है। इस कार्यक्रम की संयोजिका और जोगेशचंद्र चौधरी कॉलेज की विभागाध्यक्ष ममता त्रिवेदी ने सभी का स्वागत करते हुए छात्रों और युवाओं का फिल्मी गीतों की दुनिया से बाहर आकर अच्छे संगीत से जुड़ने का आहवान किया।

 

 

सर्दियों में परम्परागत परिधानों  का शाही मखमली अन्दाज है…वेलवेट

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सर्दियों में शादी हो तो फैशन और सर्दियों में अपना बचाव टेढ़ी खीर होता है। स्वेटर में तो आप अपना एथनिक स्टाइल नहीं दिखा पाएंगी. अगर आप किसी शादी में साड़ी या लहंगा पहन रही हैं तो इसके ऊपर स्वेटर पहनने से परिधान की खूबसूरती छुप जाती है और इनकी डिज़ाइन भी नहीं दिख पाती है। इससे बचने के लिए आप अपनी साड़ी या लहंगे के साथ वेलवेट ब्लाउज़ बनवाएं. वेलवेट फैब्रिक सर्दियों के लिए एकदम सही होता है। ये आपको ठंड से बचाने के साथ-साथ स्टाइलिश भी दिखाता है –

डिज़ाइनर्स भी विंटर वेंडिग्स के लिए वेलवेट फैब्रिक ही सजेस्ट करते हैं. वेलवेट ब्लाउज़ में भी आप कई तरह की डिज़ाइन्स बनवा सकती हैं।

आप ये हैवी एम्बेलिश्ड फुल स्लीव्ज़ वेलवेट ब्लाउज़ भी बनवा सकती हैं। नेक और स्लीव्ज़ पर एम्बेलिश्ड वर्क रखें। पीछे की डिज़ाइन में आप बैकलेस राउंड डिटेलिंग करवा सकती हैं। अपनी साड़ी या लहंगे के साथ कॉन्ट्रास्टिंग कलर का एम्ब्रॉएडर्ड वेलवेट ब्लाउज़ चुनें और उसे इस तरह राउंड नेक ज़िप डिज़ाइन में बनवाएं।

 

साड़ी के कॉन्ट्रास्टिंग कलर का वेलवेट ब्लाउज़ फैब्रिक लें और उसकी स्लीव्ज़ में साड़ी के बॉर्डर की डिज़ाइन लगवाएं। ये आपको ट्रेंडी लुक देगा। आप इसे डीप स्केवेयर नेक बनवा सकती हैं।

वेलवेट बेहद ग्रेसफुल लुक देता है। आप प्लेन वेलवेट ब्लाउज़ भी बनवा सकती हैं। इसे आप एक मैचिंग स्टोल से एक्सेसराइज़ करें और साथ में स्टेटमेंट ईयररिंग्स पहनें।

अगर आपको हैवी लुक चाहिए तो ये बोट नेक फुल स्लीव्ज़ ब्लाउज़ बनवाएं। इसकी स्लीव्ज़ में सिल्वर और नेक में गोल्डन फ्लोरल प्रिंट करवा सकती हैं।

 

नहीं रहे दिग्गज अभिनेता शशि कपूर

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मुंबई : रुपहले पर्दे पर अपनी रुमानी अदाओं से लोगों को दीवाना बनाने वाले दिग्गज अभिनेता शशि कपूर का आज निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे। अपने दौर में उन्होंने सभी अग्रणी अभिनेत्रियों के साथ काम किया।

अभिनेता-निर्माता ने यहां कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके भतीजे रणधीर कपूर ने बताया, ‘‘हां, उनका निधन हो गया। उन्हें किडनी से जुड़ी समस्या थी और वह कई वर्षों से डायलिसिस पर थे।’’ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित कई गणमान्य लोगों ने लोकप्रिय अभिनेता के निधन पर शोक जताया है।

कोविंद ने ट्वीट कर कहा, ‘‘भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के सुप्रसिद्ध अभिनेता शशि कपूर के निधन के बारे में जान कर बहुत दुख हुआ। सार्थक सिनेमा को उनका योगदान और भारतीय रंगमंच को शक्ति देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका हमेशा याद की जाएगी। उनके परिवार के प्रति मेरी शोक संवेदनाएं।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस खबर पर दुख का इजहार किया और सिनेमा एवं थियेटर में कपूर के योगदान को याद किया।

मोदी ने अपने शोक संदेश में कहा कि कपूर की बहुमुखी अभिनय क्षमता को फिल्मी पर्दे के अलावा रंगमंच पर भी देखा जा सकता है, जिसे उन्होंने शिद्दत से बढ़ावा दिया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा ‘‘कपूर के बेजोड़ अभिनय को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। उनके निधन की खबर सुनकर दुख हुआ। मैं कपूर के शोक संतप्त परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी शोक संवेदनायें व्यक्त करता हूं।’’ रणधीर कपूर ने बताया कि अभिनेता का अंतिम संस्कार कल सुबह किया जाएगा।

अस्पताल के डॉक्टर रामनारायण ने ‘पीटीआई’ को बताया, ‘‘शशि कपूर का आज शाम 5:20 बजे मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया।’’ केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने शशि के निधन को ‘एक युग का अवसान’ बताया।

ईरानी ने ट्वीट किया, ‘‘दिग्गज अभिनेता शशि कपूर जी के निधन से दुखी हूं। भारतीय सिनेमा में उनका योगदान स्मरणीय रहा है। शशि जी के निधन के साथ ही एक युग समाप्त हो गया है। उनके प्रियजन, साथियों और प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। उनकी आत्मा को शांति मिले। ओम शांति !

 

साहित्यकार ममता कालिया को 2017 का व्यास सम्मान

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हिंदी की जानी-मानी साहित्यकार ममता कालिया को वर्ष 2017 का प्रतिष्ठित ‘व्यास सम्मान’ देने की आज घोषणा की गई। ममता कालिया को उनके उपन्यास दुक्खम-सुक्खम के लिए यह सम्मान दिया जाएगा। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और साहित्यकार विश्वनाथ तिवारी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने यह निर्णय लिया है।

ममता कालिया को सत्ताइसवें व्यास सम्मान से नवाजा जाएगा। दुक्खम सुक्खम 2009 में प्रकाशित हुआ था। ममता कालिया ख्यात साहित्यकार हैं। दुक्खम सुक्खम के अलावा ‘बेघर’, ‘नरक-दर-नरक’, ‘सपनों की होम डिलिवरी’, ‘कल्चर वल्चर’, ‘जांच अभी जारी है’, ‘निर्मोही’, ‘बोलने वाली औरत’, ‘भविष्य का स्त्री विमर्श’ समेत कई  पुस्तकें हैं। उनकी कहानियां भी काफी चर्चित रही हैं।

उनकी कहानियों में मध्यवर्ग का अलग ही चित्रण मिलता है। अपने पात्रों का सजीव चित्रण करने वाली ममता कालिया की भाषा सहज और सरल होती है। यही कारण है कि उन्होंने अपनी समकालीन लेखिकाओं से अलग मुकाम बनाया है।

यह सम्मान दस वर्ष की अवधि में हिन्दी में प्रकाशित किसी रचना को दिया जाता है। 1991 में शुरू किया गया यह पुरस्कार की गई थी। पहला व्यास सम्मान डॉ राम विलास शर्मा को दिया गया था। इस साल दो नवंबर 1940 को वृन्दावन में जन्मी ममता कालिया को यह पुरस्कार दिया जाएगा। हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी ममता कालिया लिखती रही हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रजी में एम.ए. की डिग्री लेने के बाद उन्होंने मुंबई के एस.एन.डी.टी. विश्वविद्यालय में भी अध्यापन किया। बाद के कई वर्ष वह इलाहाबाद के एक डिग्री कॉलेज में प्राचार्य रहीं और यहीं से सेवानिवृत्त हुईं। उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा यशपाल कथा सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान एवं राम मनोहर लोहिया सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त उन्हें वनमाली सम्मान एवं वाग्देवी सम्मान से भी नवाजा गया है।

 

पत्थरबाजी करने वाली लड़की कश्मीर की फुटबॉल टीम की कप्तान

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जम्मू-कश्मीर की अफ्शा आशिक की कहानी हमारी पीढ़ी को प्रेरित करने की कूव्वत रखती है। सिर्फ 21 साल की उम्र में प्रदेश की फुटबॉल टीम का नेतृत्व करने वाली अफ्शा ने कश्मीर के बारे में लोगों की धारणा को बदलने में अहम भूमिका निभाई है। वह एक ऐसे समाज से आती हैं जहां महिलाओं को घर से बाहर यूं निकलना अच्छा नहीं माना जाता। लेकिन अफ्शां ने इस रूढ़िवादी सोच को दरकिनार रखते हुए अपनी ख्वाहिशों को तरजीह दी और आज वो अपने सपने पूरे करने की राह पर निकल पड़ी है। लेकिन यह सब बदला इसी साल 24 अप्रैल को। इसी साल 24 अप्रैल को अफ्शा अपने कोच और साथी फुटबॉलरों के साथ हाथ में पत्थर लेकर सड़क पर उतर आई थीं। उन्होंने बताया, ‘जम्मू और कश्मीर पुलिस ने हमारे साथ बुरा बर्ताव किया था। उन्होंने हमारी टीम की एक फुटबॉलर को थप्पड़ मार दिया था। जिसके विरोध में हमारे साथियों ने विरोध करने को कहा और हम सड़क पर उतरे थे।’ हालांकि अफ्शां खुद ही पत्थरबाजी का विरोध करती रही हैं। वे हमेशा से इसके खिलाफ रही हैं, लेकिन एक वाकए के बाद उन्हें हाथ में पत्थर लेकर सड़क पर उतरना पड़ा। वे कहती हैं, ‘सच कहूं तो मुझे हिंसक विरोध प्रदर्शनों से नफरत है। इससे हमारे युवाओं का ही नुकसान होता है। अगर युवा पीढ़ी का विकास नहीं होगा तो हम आगे नहीं बढ़ सकते।’ अफ्शां की फुटबॉलरों वाली जिंदगी आज से 4 साल पहले शुरू हुई थी तब वे 17 साल की थीं। अब वे प्रदेश के लिए खेलती हैं। पिछले साल वह राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला फुटबॉलर थीं। उनके कोच ने बताया कि अफ्शां बहुत बेहतरीन गोलकीपर है, लेकिन कम लड़कियां होने की वजह से उसे पुरुषों की टीम में प्रैक्टिस करना पड़ता है।

 

अफ्शां के सपने काफी बड़े हैं। वह भारत की नेशनल फुटबॉल टीम के लिए खेलना चाहती हैं और देश नाम रोशन करना चाहती हैं। जम्मू और कश्मीर के हालात पर वह कहती हैं कि राज्य में शांति की सख्त जरूरत है। वे कहती हैं कि यहां की बहुसंख्यक आबादी अमनपसंद है, लेकिन कुछ लोगों की वजह से यहां अशांति व्याप्त है और सुकून चाहने वाले लोगों की कोई सुनता नहीं है। वे कहती हैं कि यहां के विरोध प्रदर्शनों में युवाओं की मौत पर उन्हें रोना आता है। अफ्शां का एक छोटा भाई भी है। वह कहती हैं कि उसे कहीं भी बाहर भेजने से पहले वे दस बार सोचती हैं। अफ्शां ने अपनी 23 सदस्यीय फुटबॉल टीम के साथ देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उन्होंने कहा, ‘गृहमंत्री से मिलने का हमारा एक ही मकसद था कि जम्मू और कश्मीर का स्पोर्ट्स आगे जाए। वहां की सरकारी कई सारे पहल कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार के सपोर्ट के बगैर हम आगे नहीं बढ़ सकते।  आधे घंटे तक चली बैठक में गृहमंत्री से कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर में उचित खेल आधारभूत ढांचा तैयार किया जाता है तो युवा आतंकवाद और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से इतर अपने कौशल को निखारने के लिए प्रेरित होंगे और राज्य का नाम चमकाएंगे। उन्होंने कहा, ‘मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। मैं विजेता बनना चाहती हूं और राज्य व देश को गौरवान्वित करने के लिए कुछ करना चाहती हूं।’ अफ्शां अभी मुंबई के एक क्लब के लिए खेल रही है।

अवैध संबंध बनाने पर महिला भी होगी अभियुक्त ! 157 साल पुराने कानून पर पुनर्विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

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उच्चतम न्यायालय व्यभिचार पर औपनिवेशिक काल के एक कानून की संवैधानिक वैधता पर विचार करने के लिए शुक्रवार (8 दिसंबर) को तैयार हो गया। इस कानून में व्यभिचार के लिए सिर्फ पुरूषों को ही सजा देने का प्रावधान है जबकि जिस महिला के साथ सहमति से यौनाचार किया गया हो वह भी इसमें बराबर की हिस्सेदार होती है, लेकिन उसे दंडित करने का कोई प्रावधान नहीं है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि यदि पति अपनी पत्नी और एक दूसरे व्यक्ति के बीच संसर्ग की सहमति देता है तो यह व्यभिचार के अपराध को अमान्य कर देता है और महिला को महज एक वस्तु बना देता है जो लैंगिक न्याय और समता के अधिकार के संवैधानिक प्रावधान के खिलाफ है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के अनुसार जो कोई भी ऐसे व्यक्ति के साथ, जो कि किसी अन्य पुरुष की पत्नी है और जिसका किसी अन्य व्यक्ति की पत्नी होना वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है, उस पुरुष की सम्मति या मौनानुकूलता के बिना ऐसा मैथून करेगा जो बलात्कार के अपराध की कोटि में नहीं आता है वह व्यभिचार के अपराध का दोषी है। इस अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता में पांच साल की कैद और जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। हालांकि इस तरह के मामलों में पत्नी इस अपराध के उकसाने के लिए दण्डनीय नहीं होगी।

 

कोरियाई कंपनी मथुरा में 100 एकड़ में बनाएगी वर्चुअल कृष्णा थीम पार्क, 4-डी में दिखेंगी कृष्‍ण लीलाएं

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दक्षिण कोरियाई कंपनी ने बृज क्षेत्र में वर्चुअल कृष्णा थीम पार्क बनाने की इच्छा जताई है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने शनिवार को मुख्य सचिव व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक में निवेश के लिए आवेदन पत्र और विकास का प्रारूप सौंप दिया। कंपनी ने ग्रामीण क्षेत्रों में हाइटेक एग्रो फार्मिंग और यमुना के विकास पर भी निवेश की पेशकश की है।

वेस्ट टेक्नोलॉजी लिमिटेड, सियोल और इसकी जॉइंट वेंचर कंपनी इंडो-कैनेडियन फार्म्स एंड रिसोर्ट, पुणे मथुरा समेत बृज के चौरासी कोस क्षेत्र में बड़ा निवेश करने के लिए कई माह से प्रयास कर रही है।

मथुरा की सांसद हेमा मालिनी के साथ बैठक के बाद शनिवार को राज्य सरकार को इसका औपचारिक प्रस्ताव दिया गया। कंपनी के प्रतिनिधियों की मुख्य सचिव राजीव कुमार व प्रमुख सचिव पर्यटन अवनीश अवस्थी समेत कई अधिकारियों के साथ बैठक हुई।

जॉइंट वेंचर कंपनी के एमएडी विनय तिवारी ने बताया कि कोरियाई कंपनी के चेयरमैन केके किम पहले चरण में मथुरा-वृंदावन में सौ एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में वर्चुअल कृष्णा थीम पार्क बनाना चाहते हैं। इसमें भगवान कृष्ण की लीलाओं को 4-डी तकनीक से हूबहू देखा जा सकेगा। कंपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर सेवाएं देती है। उसके पास नई तकनीक और आर्थिक संसाधन हैं। कंपनी ने भारत में चरणबद्ध तरीके से दस वर्षों में 90000 करोड़ रुपये लगाने का प्रस्ताव बनाया है।

इसमें से 10 हजार करोड़ रुपये प्रदेश में ब्रज व आयोध्या में निवेश करने का प्रस्ताव है। कंपनी चाहती है कि पहले चरण में उप्र में जो निवेश हो उसका रिटर्न 30 से 35 वर्ष के अंदर हो जाए। बैठक में आगरा में विदेशी निवेश की भी चर्चा हुई। सियोल की कंपनी के प्रबंधन व तकनीशियन की टीम प्रजेंटेशन व स्थल चयन के लिए जल्द भारत आएगी।