दुनिया के कई देश कृषि के कचरे से बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। ऐसे में भारतीय इससे कहां पीछे रहने वाले। जी हां, आईआईटी खड़गपुर के विज्ञानियों ने प्याज के छिलके से बिजली बनाने वाली एक सस्ती डिवाइस का इजाद किया है। यह डिवाइस शरीर के मूवमेंट से ग्रीन बिजली उत्पन्न कर सकती है। इस बिजली का इस्तेमाल पेसमेकर, स्मार्ट गोलियां और पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों में किया जा सकता है।पश्चिम बंगाल स्थित आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर भानू भूषण खातुआ ने कहा कि गैर-विषाक्त, बायोडिग्रेडेबल और बायोकॉम्पसिबेटेड डिवाइस प्याज के छिलकों से उपयुक्त पाइजेइलेक्ट्रिक गुणों का फायदा उठाते हैं।
पाइजेइलेक्ट्रिक सामग्री में रोजमर्रा के यांत्रिक ऊर्जा को बिजली में बदलने की क्षमता होती है। विज्ञानियों ने अपने नए शोध में सस्ते दर पर बिजली उत्पादन करने में सफलता पाई है। एक आम व्यक्ति इस डिवाइस की मदद से प्याज के छिलकों से काफी किफायती बिजली का उत्पादन कर सकता है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने प्याज के छिलके से बनाई बिजली
अंतरिक्ष में तैरने वाले पहले एस्ट्रोनॉट ब्रूस नहीं रहे
अंतरिक्ष में तैरने वाले पहले एस्ट्रोनॉट ब्रूस एमसीकैंडलेंस का कैलिफोर्निया में 80 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी मृत्यु के कारण का खुलासा नहीं किया गया है। ब्रूस फरवरी 1984 में पूरी दुनिया में चर्चा में आ गए थे, जब यान स्पेस शटल चैलेंजर से दूर होकर अंतरिक्ष में स्पेस वॉक करने की तस्वीरें सामने आई थीं। ब्रूस ने कुल 312 घंटे अंतरिक्ष में बिताए थे, जिनमें चार घंट वह सिर्फ अपने स्पेस सूट के सहारे अंतरिक्ष में रहे।
अपने पहले स्पेस वॉक के दौरान ब्रूस अंतरिक्ष यान से करीब 300 फुट की दूरी तक गए थे। उन्होंने कहा था कि वह इस मिशन को लेकर डरे नहीं थे क्योंकि वह इसके लिए बेहद प्रशिक्षित किये जा चुके थे। 2006 में अपने एक इंटरव्यू में ब्रूस ने कहा था, मैं वहां जाने के लिए बेचैन था। मैं बेहद शांत महसूस कर रहा था। उन्होंने बताया था कि वह चांद पर कदम रखने वाले पहले इंसान नील आर्मस्ट्रांग जैसा कुछ करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने पहली स्पेस वॉक की।
देश में 8 करोड़ लोगों ने की हवाई यात्रा
नयी दिल्ली : सरकार ने बताया है कि देश में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और साल 2016-17 में कुल 15.8 करोड़ यात्रियों ने हवाई सफर किया। लोकसभा में एंटो एंटोनी के प्रश्न के लिखित उत्तर में नागर विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने पिछले तीन वर्षों का आंकड़ा पेश किया और कहा कि देश में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2016-17 में 15.84 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की। इसी तरह 2015-16 में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या 13.49 करोड़ रही।
मंत्री की ओर से पेश आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2014-15 में 11.58 करोड़ लोगों ने यात्रा की थी।
अटल बिहारी वाजपेयी की दो कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी

क़दम मिलाकर चलना होगा
बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।
हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।
उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।
सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढ़लना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।
कुछ काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।
हरी हरी दूब पर

हरी हरी दूब पर
ओस की बूंदे
अभी थी,
अभी नहीं हैं|
ऐसी खुशियाँ
जो हमेशा हमारा साथ दें
कभी नहीं थी,
कहीं नहीं हैं|
क्काँयर की कोख से
फूटा बाल सूर्य,
जब पूरब की गोद में
पाँव फैलाने लगा,
तो मेरी बगीची का
पत्ता-पत्ता जगमगाने लगा,
मैं उगते सूर्य को नमस्कार करूँ
या उसके ताप से भाप बनी,
ओस की बुँदों को ढूंढूँ?
सूर्य एक सत्य है
जिसे झुठलाया नहीं जा सकता
मगर ओस भी तो एक सच्चाई है
यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है
क्यों न मैं क्षण क्षण को जिऊँ?
कण-कण मेँ बिखरे सौन्दर्य को पिऊँ?
सूर्य तो फिर भी उगेगा,
धूप तो फिर भी खिलेगी,
लेकिन मेरी बगीची की
हरी-हरी दूब पर,
ओस की बूंद
हर मौसम में नहीं मिलेगी|
25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है क्रिसमस
25 दिसंबर को हर साल क्रिसमस डे के रुप में मनाया जाता है। इस साल भी ढेर सारी खुशियों और सेलिब्रेशन को लेकर क्रिसमस का त्योहार आ गया है। ईसाई समुदाय की मान्यता के अनुसार क्रिसमस से रौशनी का आरंभ होता है। इस दिन को यीशू मसीह के जन्मदिवस के रुप में मनाया जाता है। इस उत्सव पर अपने प्रियजनों को गिफ्ट्स देना, चर्च में आयोजन और सजावट करना शामिल होता है। क्रिसमस की पूर्व संध्या यानि 24 दिसंबर की शाम को ही इस पर्व का उल्लास अपने चरम पर पहुंच जाता है। इसी के साथ इस दिन पेड़ सजाने की परंपरा है और गिफ्ट्स, लाइट आदि से सजे हुए पेड़ को क्रिसमस ट्री के नाम से जाना जाता है।
25 दिसंबर को ईसाई समुदाय के लोग यीशू मसीह के जन्मदिवस के रुप में मनाते हैं। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि इस दिन ईसा मसीह का का जन्म नहीं हुआ था। चौथी शताब्दी से पहले ईसाई समुदाय इस दिन को त्योहार के रुप में नहीं मनाते थे, लेकिन चौथी शताब्दी के बाद इस दिन ईसाईयों का प्रमुख त्योहार मनाया जाने लगा। माना जाता है कि यूरोप में गैर ईसाई समुदाय के लोग सूर्य के उत्तरायण के मौके पर त्योहार मनाते थे। इस दिन सूर्य के लंबी यात्रा से लौट कर आने की खुशी मनाई जाती है, इसी कारण से इसे बड़ा दिन भी कहा जाता है। इस दिन की प्रमुखता देखते हुए ही ईसाई समुदाय ने इस दिन को ईशू के जन्मदिन के रुप में चुना। क्रिसमस से पहले ईस्टर का पर्व ईसाई समुदाय का प्रमुख त्योहार माना जाता था।
क्रिसमस का त्योहार पूरे विश्व में लोग धूमधाम से मनाते हैं। ईसाई समुदाय के साथ गैर ईसाई समुदाय के लोग भी इस दिन इकठ्ठे होते हैं और एक दूसरे को गिफ्ट्स देते हैं। भारत में पाइन के पेड़ों की जगह लोग आम और केले के पेड़ों को भी सजाया जाता है। बच्चे इस दिन गिफ्ट्स पाने के लिए बहुत ही उत्सुक रहते हैं। क्रिसमस के दिन बच्चों में सांता क्लॉज को लेकर उत्सुकता रहती है। सांता निकोलस को सांता क्लॉज के नाम से जाना जाता है। इनका जन्म ईसा मसीह की मृत्यु के लगभग 280 साल बाद मायरा नामक जगह पर हुआ था। उन्हें लोगों की मदद करना और सेवा करना बेहद पसंद था, वो यीशू के कदमों पर चलते थे। इसी कारण वो यीशू के जन्मदिन पर रात के अंधेरे में बच्चों को गिफ्ट दिया करते थे।
मजेदार केक के साथ कीजिए सांता का स्वागत
बिस्कुट केक

सामग्री : 150 ग्राम पारले जी बिस्कुट, 5-6 हाइड एंड सीक बिस्कुट, डेढ़ चम्मच बेकिंग पाउडर, एक तिहाई कप चीनी, डेढ़ कप दूध, 2 बड़े चम्मच बारीक कटे बादाम, 1 बड़ा चम्मच तेल
विधि : एक गहरे माइक्रोवेव के बर्तन को तेल से चिकना कर लें। पारले जी बिस्कुट और हाइड एंड सीक बिस्कुट को छोटे टुकडो में तोड़ लें। इसमें चीनी मिलाकर मिक्सर में पीसकर बारीक पाउडर बना लें। एक बड़े बर्तन में दूध लें फिर बिस्कुट का पाउडर धीरे-धीरे करके मिलाते जाएं और गाढ़ा पेस्ट बना लें। मिश्रण न ज्यादा गाढ़ा हो और न ही बहुत पतला. अगर दूध कम लगे तो और मिला सकते हैं। बिस्कुट के घोल में बेकिंग पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें। कटे हुए आधे बादाम मिला के घोल को माइक्रोवेव के बर्तन में डाल दें। माइक्रोवेव को हाई पावर मोड पर सेट करके केक का बर्तन रखकर 5 मिनट तक बेक कर कर लें। तय समय के बाद टूथपिक या कांटे वाला चम्मच डालकर चेक करें अगर टूथपिक साफ बाहर आ जाये तो केक अच्छी तरह बेक हो गया है. अगर नहीं बेक हुआ है इसे 1-2 और बेक करने के लिए रखें। केक को बाहर निकालकर 5-6 मिनट तक ठंडा होने दें. फिर चाकू से केक को छोटे टुकड़ों में काट लें। बचे हुए कटे बादाम से सजाकर परोसें।
एगलेस मग केक

सामग्री : 3 चम्मच मैदा, डेढ़ चम्मच बगैर चीना का कोको पाउडर, 3 चम्मच पिसी चीनी, 1/8 चम्मच बेकिंग सोडा, 1/8 चम्मच नमक, 3 चम्मच पकाने का तेल, 3 चम्मच दूध, 1/4 चम्मच वनीला एसेंस, 1 चम्मच चोको चिप्स
विधि : एक कॉफी मग में मैदा, चोको पाउडर, नमक और बेकिंग सोडा डालकर अच्छी तरह मिक्स करें। अब इसमें ऑयल, दूध और वनीला एसेंस डालकर अच्छी तरह फेंट लें। पेस्ट क्रीमी रहना चाहिए। इसके ऊपर चोको चिप्स डाल दें और माइक्रोवेव में इसे 600 वॉट्स पर 1 मिनट के लिए बेक करें और फिर इसे चेक करें और जरूरत पड़ने पर 1 मिनट के लिए और बेक करें। अगर आप ओवन इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसे 185 डिग्री सेंटीग्रेट पर प्रीहीट करें और केक को उसमें 10-15 मिनट तक बेक कर लें। माइक्रोवेव एगलेस मग केक तैयार है. अब जब मन करे इसे आसानी से बनाएं।
नोट : ओवन प्रूफ मग इस्तेमाल करें। चोको चिप्स आप अपनी मर्जी के अनुसार डाल सकते हैं.
धर्मांधता के विरुद्ध और मानवता के पक्ष में 23वां हिंदी मेला कल 26 दिसंबर से
कोलकाता : 23वां हिंदी मेला नाट्य प्रतियोगिता के साथ 26 दिसंबर से राममोहन हाल, मानिकतला में शुरू हो रहा है। बाकी छह दिनों के सांस्कृतिक कार्यक्रम पास के फेडरेशन हाल में है। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित यह मेला सात दिवसीय है। इस साल का फोकस धर्मांधता के विरुद्ध आवाज उठाने वाले महान साहित्यकारों राहुल सांकृत्यायन और शिवपूजन सहाय की 125वीं महा जयंती और कवि त्रिलोचन की जन्मशती पर है। इन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन 31 दिसंबर को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि केदारनाथ सिंह करेंगे। गौरतलब है कि शिवपूजन सहाय कोलकाता से प्रकाशित ‘मतवाला’ और ‘मारवाड़ी सुधार’ पत्रिकाओं के संपादन से जुड़े हुए थे।
इस बार हिंदी युवा कवि उत्सव में पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से 50 से अधिक कवि भाग लेंगे, जिसकी अध्यक्षता मानिक बच्छावत करेंगे। 30 दिसंबर को युवा कवि उत्सव अहिंसा और मानवता को समर्पित है। सात दिनों के हिंदी मेले में काव्य आवृत्ति (27 दिसंबर), चित्रांकन, हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता (28 दिसंबर), काव्य संगीत, लोकगीत, आशु भाषण (29 दिसम्बर), युवा कवि उत्सव, काव्य नृत्य (30 दिसंबर), राष्ट्रीय संगोष्ठी (31 दिसंबर) और संस्कति उत्सव समापन और पुरस्कार वितरण (1 जनवरी) का कार्यक्रम है। मिशन के संयुक्त सचिव डॉ. राजेश मिश्र और प्रो. संजय जायसवाल ने बताया कि हिंदी मेले में 70 से अधिक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के दो हजार से अधिक विद्यार्थी और युवा भाग लेंगे। इस वर्ष ‘युगल किशोर सुकुल पत्रकारिता सम्मान’ वरिष्ठ पत्रकार श्री राधाकृष्ण प्रसाद को दिया जाएगा।
अंधा युग आधुनिक युग के सांस्कृतिक पतन की कथा है
कोलकाता : धर्मवीर भारती की कालजयी कृति ‘अंधा युग’ पर चर्चा करते हुए बताया गया कि यह बहुचर्चित काव्य-नाटक आणविक मिसाइलों की होड़, सांप्रदायिक हिंसा और सत्ता लोलुपता का अनावरण करता है। उसकी जितनी ऐतिहासिक महत्ता है उससे अधिक वर्तमान अर्थवत्ता है। ‘धर्मयुग’ के यशस्वी संपादक धर्मवीर भारती ने इसमें बढ़ती अनास्था और मूल्यहीनता के दौर में मूल्य आधारित आचरण का पक्ष लिया है।
भारतीय भाषा परिषद के ‘कालजयी कृति विमर्श’ की पहली कड़ी के रूप में महाभारत पर आधारित इस काव्य-नाटक पर चर्चा करते हुए मुजफ्फरपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रेवती रमण ने कहा कि ‘अंधायुग’ आधुनिक युग का सत्ता विमर्श है जिसमें प्रहरियों का संवाद लोकतंत्र के लिए स्पेस बनाता है। इस नाटक में गांधारी ने कृष्ण को मृत्यु का शाप दिया और अश्वत्थामा, युयुत्सु, संजय जैसे चरित्रों ने उनकी प्रभुता पर संदेह व्यक्त किया है। फिर भी कृष्ण ने किस तरह दूसरों के पाप को अपने माथे ले लिया और उन्होंने विध्वंस के समानांतर सृजन में अपनी ज्योति का आश्वासन दिया यह नाटककार ने दिखाया है। जालान गर्ल्स कॉलेज के प्रो. विवेक सिंह ने कहा कि महाभारत में किसी को भी स्याह और सफेद की तरह देखा नहीं जा सकता। उत्तर बंग विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मनीषा झा ने कहा कि अंधायुग में यह संदेश है कि संस्कृति की रक्षा करके मनुष्य अपने भीतर मौजूद पशुता और विकृति से कैसे ऊपर उठे।
अध्यक्षीय वक्तव्य रखते हुए डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि महाभारत में कौरव और पांडव दोनों ही न्याय और नैतिकता का पक्ष छोड़कर हिंसा का आश्रय लेते हैं। युधिष्ठिर के अर्धसत्य से ही विकृत मानसिकता वाले अश्वत्थामा का जन्म होता है। आज जब संपूर्ण राष्ट्र धृतराष्ट्र जैसा हो गया है, महाभारत के समय की तरह आज के समय को भी ‘पोस्ट ट्रुथ’ का समय कहा जा सकता है और हिंसा की जगह कृष्ण की वंशी की जरूरत महसूस हो सकती है।
अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. कुसुम खेमानी ने युवाओं और विद्यार्थियों का आहवान किया और कहा कि परिषद द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र का लाभ उठाते हुए हिंदी भाषा ज्ञान और अभिव्यक्ति क्षमता का विकास करें। पीयूषकांत राय ने संगोष्ठी का संचालन करते हुए कहा कि उन कालजयी कृतियों पर चर्चा जरूरी है जिन्हें भुला दिया गया है। परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार ने धन्यवाद दिया
रहस्यलोक में ले जाने वाली कलाकृतियों का जादू
अपराजिता की ओर से

अभिज्ञात के नाम से प्रख्यात डॉ. हृदय नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं जो देश केे प्रतिष्ठित अखबारों और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। कवि और लेखक होने के साथ गीतकार और अभिनेता भी हैं। बतौर चित्रकार यह उनकी प्रतिभा का एक और शानदार रूप है…मीडिया की आपाधापी के बीच इतना कुछ कर लेना अपने -आप में करिश्मा है। हाल ही में इनके चित्रों की प्रदर्शनी लगी। प्रदर्शनी की कुछ तस्वीरें और जानकारी हम दे रहे हैं…। अभिज्ञात जी की सृजनात्मकता और भी प्रसारित हो…अपराजिता की शुभकामना है –
रहस्यलोक में ले जाने वाली कलाकृतियों का जादू
भोपाल की कलाकार सबा इफ़्तिखार और कोलकाता के डॉ.हृदय नारायण सिंह की पेंटिंग्स सिटी आर्ट फैक्ट्री के तत्वावधान में हाल ही में मिथ, होटल हिन्दुस्तान इंटरनेशनल, कोलकाता में प्रदर्शित हुई। इसमें सबा की इनिग्मा सिरीज की पेंटिंग्स शामिल थीं। कलाकृति शृंखला नाम के मुताबिक ही एक रहस्यलोक और गूढ़प्रश्नों के प्रति लोगों की उत्सुकता जगाता है। इन पेंटिंग के सम्बंध में सबा कहती हैं-पुराने और जर्जर दरवाज़ों के पीछे मेरे रिश्ते और कीमती यादें हैं।

इन दरवाज़ों को खोलकर तब तक कोई नहीं आ सकता जब तक मैं न चाहूं। हालांकि दरवाज़े, खिड़कियां और ताले बंद हुए हैं और जर्जर दिखायी देते हैं लेकिन फिर भी खूबसूरत हैं और मज़बूती से खड़े हैं। लोगों को वहम हो सकता है कि इनके पीछे बंदिशें हैं लेकिन उनके पीछे मेरी आज़ादी महफूज़ है।
फाइनआर्ट्स में बरकतुल्ला यूनिवर्सिंटी से फ़ाइनआर्ट्स में गोलमैलिस्ट सबा ने कई कलारूपों का फ्यूजन किया है। देश- विदेश की कई कलाप्रदर्शनियों में उनकी कृतियां प्रदर्शित हुई हैं।डॉ.हृदय नारायण सिंह की कैनवास पर एक्रेलिक से बनी कलाकृतियों में अमूर्त व मूर्तन का तादात्म्य प्रभावित करता है। सुर्ख गाढ़े वहल्के दोनों तरह के रंगों के प्रयोग में समान रूप से सिद्धहस्त हैं। उनकी कृतियों में दुःख के कई रूप दिखते हैं तो कोमल अनुभूतियां भी हैं।

डॉ. सिंह का अपनी कला के बारे में कहना है कैंसर से जूझती मां की ओर मृत्यु के बढ़ते अदृश्य कदमों की आहटों को सुननेऔर मौत की अमूर्त आकृतियों को देखने की कोशिश में एक ऐसे संसार को महसूस किया जो आसपास है पर अनुद्घाटित है। मां कीअस्वस्थता और उसके दुख से निजात के लिए उस ईश्वरीय सत्ता के आगे में नतमस्तक हुआ जिसे मेरी बौद्धिकता सदैव नकारतीरही थी। रहस्य, भय, विस्मय, अलौकिकता और जीवन से जुड़ी घटनाओं के पूर्व अमूर्त संकेत , कभी रंगों, कभी रोशनी, कभीछाया के तौर पर मेरी मनोभूमि में समा गये और वे अवचेतन में मेरी पेंटिंग्स व रंगों के चयन में अपनी अबूझ भूमिका निभाते लगतेहैं। मुझे लगता है कैनवास एक प्लेनचिट है जिसके आगे बैठते ही परिचित-अपरिचित रूपाकारों, रंग व रेखाएं, रोशनी व अधेरेअनायास चले आते हैं। पहले मेरी कला में बाहर की ही दुनिया थी अब बाहर और भीतर का संसार गड्डमड्ड है और वहीं मेरी कला मेंप्रकट होता है।

अमूर्तन के प्रति दिलचस्पी उस अदृश्य को देखने और खोजने का भी यत्न है जो ईश्वर की अदृश्य सत्ता से मेलखाता है। कुछेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों में भागीदारी। साहित्य सृजन से भी जुड़ा रहने के कारण एक कोमलता औरस्निग्ध भाव रंगों के चयन और स्पर्श में शामिल है।
आर्ट शो में शामिल द वूमेन, दे फैंसी, बॉडी विद दि सोल, नेचर एंड वूमेन, दसाफ्ट आदि कलाकृतियों में लोगों ने दिलचस्पी ली। डॉ.सिंह कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में पीएच.डी हैं। कला कीऔपचारिक शिक्षा उन्होंने इंडियन आर्ट कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल तथा रियलिस्टिक आर्टिस्ट होरीलाल साहू से ली है।
रब ने बना दी अनुष्का और विराट की जोड़ी
मुंबई : भारत के सबसे चर्चित प्रेमी जोड़े – हिंदी फिल्म अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली – ने अपनी शादी की योजनाओं को लेकर जारी रहस्य एवं मीडिया अटकलों को खत्म करते हुए 11 दिसम्बर को जीवन भर के लिए एक दूसरे का हाथ थाम लिया।
दोनों ने इटली के टस्कनी में अपने परिवार के लोगों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में एक निजी समारोह में शादी की।
अनुष्का और कोहली ने ट्विटर पर विवाह समारोह की तस्वीरें डालते हुए लिखा, ‘‘आज हमने हमेशा के लिए एक दूसरे के प्यार में बंधने का वादा किया। हमें आपसे यह खबर साझा करते हुए बहुत खुशी हो रही हैं।’’ अनुष्का ने इस मौके पर सब्यसाची द्वारा तैयार किया गया लहंगा पहना था और बेहद खूबसूरत लग रही थीं। वहीं विराट ने सब्यसाची द्वारा ही डिजाइन की गयी एक शेरवानी पहनी थी।
दोनों ने एक जैसे ट्वीट में कहा, ‘‘हमारे प्रशंसकों एवं शुभचिंतकों के परिवार के प्यार और समर्थन के साथ यह खूबसूरत दिन और भी खास हो जाएगा।’’ अनुष्का और विराट ने हिंदू रीति रिवाज से शादी की। दोनों 21 दिसंबर को नयी दिल्ली में एक प्रीतिभोज की मेजबानी करेंगे और इसके बाद 26 दिसंबर को फिल्म जगत के दोस्तों एवं क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए मुंबई में एक और भोज देंगे।
अनुष्का और विराट के बीच चार साल से प्रेम संबंध चल रहे थे। दोनों मीडिया में शादी को लेकर जारी चर्चाओं के बावजूद विवाह की योजनाओं पर चुप थे।
अक्तूबर में एक अखबार ने अपनी खबर में कहा था कि यह जोड़ी इटली में शादी कर सकती है।
विराट को जब श्रीलंका के खिलाफ बाकी एकदिवसीय श्रृंखला के लिए विराम दिया गया तब यह अटकलें तेज हो गयीं।
अनुष्का और विराट दोनों 29 साल के हैं। दोनों पहली बार एक विज्ञापन फिल्म की शूटिंग के दौरान मिले थे। अभिनेत्री के प्रतिनिधि ने एक बयान में कहा कि दोनों इस महीने के आखिर में मुंबई के वर्ली स्थित अपने नये घर में चले जाएंगे।




