Saturday, October 3, 2026
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महिला चल संपत्ति नहीं है, पति उसे अपने साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली :  सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि पत्नी ‘चल संपति या एक वस्तु’ नहीं है और साथ रहने की इच्छा होने के बावजूद पति इसके लिए पत्नी पर दवाब नहीं बना सकता है। एक महिला की तरफ से पति पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए दायर आपराधिक केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी है। महिला ने अपने आरोप में कहा था कि पति चाहता है कि वह उसके साथ रहे लेकिन वह स्वयं उसके साथ नहीं रहना चाहती है।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने अदालत में मौजूद व्यक्ति से कहा, ‘वह एक चल संपत्ति नहीं है। आप उसे मजबूर नहीं कर सकते। वह आपके साथ नहीं रहना चाहती हैं। आप कैसे कह सकते हैं कि आप उसके साथ रहेंगे।’ पीठ ने महिला के वकील के जरिए पति के साथ नहीं रहने की इच्छा वाले बयान के दृष्टिगत व्यक्ति से पत्नी के साथ रहने के निर्णय पर ‘पुनर्विचार’ करने को कहा। अदालत ने व्यक्ति से कहा, ‘आपके लिए इस पर पुनर्विचार बेहतर होगा’।

व्यक्ति की ओर से पेश वकील से पीठ ने कहा, ‘आप (व्यक्ति) इतना गैरजिम्मेदार कैसे हो सकते हैं? वह महिला के साथ चल संपत्ति की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वह एक वस्तु नहीं है’। इस मामले की अगली सुनवाई आठ अगस्त को होगी।

सानिया मिर्जा का खुलासा- ‘मेरे बच्चे का सरनेम मलिक नहीं मिर्जा मलिक होगा’

नयी दिल्ली  :  भारत की स्टार टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने साफ किया है कि जब भी उनके बच्चे होंगे, तो उनका सरनेम मलिक नहीं होगा। सानिया ने 2010 में पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी की थी। सरनेम को लेकर सानिया ने जो बात कही है, वो आपका दिल जीत लेगी।
सानिया ने बताया कि वो और शोएब एक बेटी चाहते हैं और जब भी परिवार बढाने के बारे में सोचेंगे तो उनके बच्चे का सरनेम मिर्जा मलिक होगा। सानिया ने गोवा फेस्ट 2018 में लैंगिक पक्षपात पर बातचीत के दौरान कहा, ‘मैं आपको एक राज की बात बताती हूं। मेरे पति और मैंने इस पर बात की है और हमने तय किया है कि जब भी हमारा बच्चा होगा तो उसका सरनेम मिर्जा मलिक होगा। वो भी एक बेटी चाहते हैं।’
सानिया ने लैंगिक पक्षपात के अपने अनुभव के बारे में कहा कि उनके कुछ रिश्तेदार उनके पिता से कहते थे कि उनके बेटा होना चाहिए ताकि खानदान का नाम आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा, ‘हम दो बहनें हैं और हमें कभी नहीं लगा कि एक भाई भी होना चाहिए। हमारे रिश्तेदार हमारे पिता से कहते थे कि उनके एक बेटा होना चाहिए तो हम उनसे लड़ते थे। मैंने शादी के बाद भी सरनेम नहीं बदला और हमेशा ये सानिया मिर्जा ही रहेगा।’

42 साल की सुष्मिता सेन ने शेयर की 6 पैक एब्स की तस्वीरें

मुम्बई : कहा जाता है कि खूबसूरती न कोई सीमा होती है और न ही कोई उमर, बस देखने का नजरिया होना चाहिए। यह कहावत सुष्मिता सेन के साथ बहुत ही सटीक है। 42 साल की सुष्मिता ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर और वीडियो शेयर किया है। सुष्मिता द्वारा इस तस्वीर को शेयर करते ही बस चंद मिनटों फैंस के कमेंट की और शेयर की बाढ़ आ गई।
बता दें कि सुष्मिता अपने फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती हैं। अपनी फिगर मेटेंन करने के वह जिम से लेकर घर पर कई घंटे मेहनत करती रहती हैं।सुष्मिता की सबसे लेटेस्ट तस्वीर देखें तो उसमें वो काफी खूबसूरत दिख रही हैं।

इस तस्वीर में उन्होंने ब्लैक कलर की बिकनी पहनी हुई हैं और अपनी फिट बॉडी से सबको इंस्पायर करती दिखाई दे रही हैं। सुष्मिता ने जो तस्वीरें शेयर की हैं उसमें 6पैक एब्स को बखूबी देखा जा सकता है। यहीं नहीं इस वायरल तस्वीर से अंदाजा लगया जा सकता है कि वह फिटनेस मेटेन करने के लिए वह कितनी ज्यादा मेहनत करती हैं। सुष्मिता के इस पिक्स को शेयर करते ही बस चंद मिनटों फैंस के कमेंट की और शेयर की बाढ़ आ गई। बता दें कि सुष्मिता अपने फिटनेस को लेकर काफी अवेयर रहती हैं। अपनी फिगर मेटेंन करने के वह जिम से लेकर घर पर कई घंटे मेहनत करती रहती हैं। सुष्मिता ने जो तस्वीरें शेयर की हैं उसमें 6पैक एब्स बनाने के लिए एक साल से लगातार मेहनत भी कर रही हैं। सुष्मिता सेन के इस एब्स की पिक देखकर फैंस तारीफें कर रहे है। यहां तक कि एक फैंस ने उनके सामने शादी करने का प्रस्ताव भी रख दिया है।

हर साल दुनिया में 15 करोड़ लोग बीमारियों के कारण हो रहे गरीब

नई दिल्ली : 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र ने इस बार विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम ‘सबको स्वास्थ्य बीमा’ रखी है। दुनिया की एक अरब से अधिक आबादी के पास कोई स्वास्थ्य बीमा न होने का अनुमान है। महंगे इलाज के चलते आर्थिक पक्ष पर टूटने वाले एक तिहाई से अधिक भारत में रहते हैं। अच्छी बात यह है कुछ डॉक्टर गरीबों का मुफ्त इलाज कर उनके हमदर्द बन रहे हैं। 6.3 करोड़ भारतीय हर वर्ष इलाज का खर्च उठाते उठाते गरीबी के गर्त में चले जाते हैं
भारतीय सबसे ज्यादा प्रभावित
2011-2012 में 18 प्रतिशत भारतीय घरों ने बीमारियों के चलते आर्थिक तंगी का सामना किया। वहीं घर की कुल मासिक आय का 6.9 प्रतिशत हिस्सा बीमारियों के उपचार में खर्च होता है। वहीं शहरी क्षेत्र में इसका आकड़ा 5.5 प्रतिशत है। 72 प्रतिशत रकम दवाइयां खरीदने में जाती है।

आँकड़े परेशान करते हैं
भारत में पैदा होने वाले हर 1000 शिशु में से 34 की मौत साल भर के भीतर हो जाती है, 39 बच्चे पांच साल से कम उम्र में दम तोड़ देते हैं। हर 1000 में से 174 भारतीय महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान हो जाती है। 2020 तक मातृ मृत्यु दर 100 पर लाने का लक्ष्य है।

बड़े रोग का बढ़ता प्रकोप
2016 में 61.8 प्रतिशत अनुमानित मौतें भारत में एनसीडी के कारण हुई। वहीं 1990 के दशक में यह आकड़ा 37.9 प्रतिशत था। जिमें केरल और गोवा में एनसीडी का प्रकोप सबसे ज्यादा था।
89.5 प्रतिशत बोझ सीधे मरीज की जेब पर
स्वास्थ्य बीमा योजनाओं से अस्पतालों तक मरीज की पहुंच तो बढ़ी है, लेकिन बीमारियों से पड़ने वाला आर्थिक बोझ नहीं घटा है। एक अनुमान के मुताबिक 89.5} औसतन कुल निजी इलाज का खर्च आज भी सीधे तौर पर भारतीय मरीजों की जेब से जाता है। बीमित राशि इलाज के खर्च के अनुरूप न होना और अस्पतालों में शुल्क तय न होना मुख्य कारण है। स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का लाभ सिर्फ भर्ती होने पर मिलना भी बड़ी वजह
देश में गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा
फरवरी 2018 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शुरू की, जिसके तहत 10 करोड़ गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये का सालाना स्वास्थ्य बीमा मिलेगा।

प्रोफेशनल इंग्लिश सीखने के लिए बेहतर हैं ये कोर्स

आजकल बड़ी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी पाने के लिए अंग्रेजी सबसे जरूरी चीज है। इंटरव्यू से लेकर मीटिंग, बैठक और प्रेजेंटेशन में भी अंग्रेजी की अहम भूमिका होती है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के क्लाइंट कई देशों से होते हैं। ऐसे में उनसे संवाद स्थापित करने की भाषा अंग्रेजी ही होती है, इसलिए अंग्रेजी के कम्युनिकेशन स्किल बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर अच्छी कंपनी में नौकरी करना चाहते हैं या कर रहे हैं तो अंग्रेजी की इस दीवार को गिराने के लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। अब ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे प्रोफेशनल अंग्रेजी कम्युनिकेशन संबंधित शॉर्ट टर्म कोर्स मौजूद है जो खराब अंग्रेजी की परेशानी को दूर कर सकते हैं।  एस्पायरिंग माइंड के एक सर्वे के अनुसार हमारे देश में इंजीनियरिंग कॉलेजों से निकलने वाले 97 फीसदी ग्रेजुएट्स को अंग्रेजी बोलनी नहीं आती जो कि कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने के लिए अनिवार्य है। इंजीनियरिंग देश में युवाओं का सबसे पसंदीदा स्ट्रीम है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में स्नातकों को अंग्रेजी न आना बड़ी समस्या है। सर्वे के अनुसार स्पोकेन इंग्लिश के आधार पर 51 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स जॉब के लायक नहीं है। वहीं, सालाना ग्रेजुएट होने वाले 6 लाख इंजीनियरों में से सिर्फ 2.9 फीसदी ही फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने में सक्षम होते हैं। भारत के बहुलतावादी समाज में एक दूसरे की संस्कृति और मूल्यों को समझने में भी अंग्रेजी भाषा का महत्व है। देश के कई राज्यों की अपनी भाषा है और वहां का कामकाज स्थानीय भाषा में ही होता है। अलग-अलग भाषाओं को बोलने वाले भारतीय समाज में अंग्रेजी अभी भी सेतु का काम कर रही है। वैश्वीकरण के दौर में दुनिया के साथ कदमताल करने के लिए अंग्रेजी भाषा ज्ञान को अपनाने के लिए आज का युवा संकोच नहीं करता। रोजगार की भाषा के रूप में अंग्रेजी भाषा के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ा है इसलिए भाषा कोई भी सीखनी चाहिए…बगैर अपनी भाषा की उपेक्षा किए –

‘स्पीक इंग्लिश प्रोफेशनली : इन पर्सन, ऑनलाइन एंड ऑन द फोन’

अगर आप बेहतर इंग्लिश बोलना चाहते हैं तो कोर्सेरा का यह कोर्स आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेगा। ‘स्पीक इंग्लिश प्रोफेशनली : इन पर्सन, ऑनलाइन एंड ऑन द फोन’ कोर्स आपके प्रोफेशनल अंग्रेजी संवाद को बेहतर करने के लिए केंद्रित है। ये एक पांच हफ्ते का कोर्स है। इस कोर्स में आप स्वयं को बेहतर तरीके से प्रजेंट करना सीखेंगे। आप ग्रुप डिस्कशन में सबके सामने पूरे आत्मविश्वास से बोलने के स्किल सीखेंगे। ग्रुप डिस्कशन के दौरान कैसे लोगों से सहमत हों, असहमत हों, अपनी बातों को पूरी सपष्टता के साथ रखें और अपनी बातों को निष्कर्ष पेश करना भी इस कोर्स में सिखाया जाएगा। इसके अलावा आप फोन पर जानकारी देने और किसी के आग्रह का जवाब देने के तरीकों से भी रूबरू होंगे। इस कोर्स में आप ऑफिस में चलने वाले रोजमर्रा के सभी संवादों के दौरान बोलने का स्किल सीखेंगे, जैसे इंटरव्यू देने या लेने के दौरान कैसे बात करें, सेल्स प्रेजेंटेशन कैसे दें, क्लाइंट से कैसे बात करें आदि। इस कोर्स को करने के बाद आपका उच्चारण, प्रवाह, शब्दकोश का ज्ञान बढ़ेगा। इसके अलावा विभिन्न संस्कृतियों के लोगों के साथ घुलना-मिलना और बात करने के तरीके भी सीख सकेंगे। इस कोर्स को जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा डिजाइन किया गया है। इस कोर्स के बाद आपको सर्टिफिकेट भी मिलेगा।
कोर्सेरा का राइट प्रोफेशनल ईमेल इन इंग्लिश कोर्स
अगर आपको ऑफिस में काफी सारे ईमेल लिखने होते हैं तो ये कोर्स आपके लिए एकदम सही है। ये कोर्स आपको प्रभावित करने वाले बिजनेस ईमेल लिखना सिखाता है। इस कोर्स को करने से आपकी ग्रामर और शब्दकोश के ज्ञान में बढ़ोतरी होगी। क्रॉस कल्चर लोगों से ईमेल पर संवाद करने के लिए सिखाये जाने वाले स्किल्स से आप विभिन्न लोगों से बेहतरीन तरीके से कॉरपोरेट संवाद कर सकेंगे। आप हर ईमेल के महत्व और टोन को समझते हुए उसके अनुसार रिप्लाई करना सीखेंगे। इस कोर्स में आप हर दिन 4 से 5 मेल लिखना और उन्हें रिवाइज करना सीखेंगे। इसके अलावा ईमेल लिखने से संबंधित क्विज और अन्य छात्रों के ईमेल भी रिवाइज करने को भी मिलेगा। इस कोर्स को करने के लिए आपको हर हफ्ते 3 से 4 घंटे का समय देना पड़ेगा।
फ्यूचर लर्न का इंग्लिश फॉर वर्कप्लेस कोर्स
ये कोर्स उन लोगों के लिए है जो कार्यस्थलों पर संवाद के लिए अपनी अंग्रेजी बेहतर करना चाहते हैं। इसके अलावा नौकरी तलाश करने और इंटरव्यू देने वाले लोगों के लिए भी यह कोर्स बेहतरीन है। ये कोर्स चार हफ्ते का है और इसमें हर हफ्ते आपको कम से कम दो घंटे का समय देना होगा। ये कोर्स मुफ्त किया जा सकता है। इस कोर्स का फोकस कार्यस्थलों पर बोले जाने वाली अंग्रेजी पर होगा। इसमें विडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग के जरिए लोगों को नौकरी की तलाश करना, नौकरी के लिए आवेदन करना, इंटरव्यू के लिए खुद को तैयार करना, नई नौकरी में अपने सहकर्मियों से बातचीत करना और ऑफिशियल कार्यों के दौरान संवाद करना या ईमेल करना सिखाया जाएगा। इस कोर्स के दौरान अनुभवी शिक्षक आपकी अंग्रेजी की दक्षता की जांच कर उसे सुधारने और बेहतर करने के लिए सुझाव देेंगे। इसके लिए शिक्षक सही तरीके से बोलने और लिखने के लिए मार्गदर्शन करेंगे। यह कोर्स लैंग्वेज सिलेबस के अनुसार नहीं बल्कि कार्यस्थलों पर इस्तेमाल की जाने वाली अंग्रेजी पर फोकस करता है। आपके अभ्यास के लिए छोटे क्विज और डिस्कशन भी करवाएंगे। पूरे कोर्स के दौरान आपसे आपके विचार, सोच और सवाल अन्य प्रतिभागियों के साथ साझा करने के लिए कहा जाएगा।
माई इंग्लिश (ब्रिटिश काउंसिल)
माई इंग्लिश एक इंटरेक्टिव ऑनलाइन कोर्स है जिसे ब्रिटिश काउंसिल के शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जाता है। ये कोर्स अंग्रेजी बोलने में प्रवाह, स्पष्टता और आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करता है। ये एक छह हफ्ते का कोर्स है जिसे लाइव ऑनलाइन कक्षाओं और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों द्वारा संचालित किया जाता है। इस कोर्स से अंग्रेजी के कम्युनिकेशन स्किल में सुधार होता है और आप असल जिंदगी की परिस्थितियों में खुद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर पाते हैं। हर हफ्ते आपको सिर्फ 2 घंटे के लिए ऑनलाइन क्लास ज्वाइन करनी होती है। इससे स्पीकिंग और राइटिंग स्किल्स में सुधार होता है और आपको शिक्षक से निजी फीडबैक भी मिलता रहता है। छह हफ्तों में लगभग 50 घंटे की कक्षाएं पूरी करनी होती हंै। इस कोर्स को तीनों भागों में बांटा गया है प्री इंटरमीडिएट, इंटरमीडिएट और अपर इंटरमीडिएट स्तर। इस कोर्स की कीमत 9,500 रुपए है।
प्रोफेशनल इंग्लिश फॉर नॉन नेटिव स्पीकर : राइटिंग इन इंग्लिश
ये ऑनलाइन राइटिंग कोर्स स्टैनफोर्ड लैंग्वेज सेंटर द्वारा चलाया जाता है। ये कोर्स नॉन नेटिव स्पीकर यानी अंग्रेजी देशों से ताल्लुक न रखने वाले अंग्रेजी भाषियों के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। इस कोर्स में लगभग हर प्रोफेशन से जुड़े लेखन कार्यों के बारे में पढ़ाया और अभ्यास कराया जाता है। कार्यालयों के कामकाज में इस्तेमाल में आने वाले फॉर्मल मैसेज से लेकर ईमेल व चिट्ठी, प्रपोजल बनाने से लेकर प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने जैसे लेखन कार्यों के बारे में इस कोर्स में विस्तृत पढ़ाई कराई जाती है। इसमें शब्दकोश अभ्यास, वाक्यों की संरचना, संपादन और प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने जैसे असाइनमेंट भी दिए जाते हैं।
बिजनेस इंग्लिश (उदेमी)
बिजनेस इंग्लिश कोर्स ऑनलाइन लर्निंग वेबसाइट उदेमी द्वारा संचालित की जाती है। जो भी अंग्रेजी के प्रोफेशनल ज्ञान को सुधारना चाहते हैं उनके लिए ये कोर्स बेहद कारगर साबित हो सकता है। इस कोर्स में कामकाज के दौरान पेश आने वाली विभिन्न परिस्थितियों में अंग्रेजी बोलने, लिखने, सुनने के बारे में बताया जाता है। इसके अलावा व्याकरण और शब्दकोश पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। ये कोर्स आपको बिजनेस की दुनिया के फ्रेज, स्लैंग, एक्सप्रेशन, ईमेल और फीडबैक देने के तरीकों के बारे में बताता है।
इंप्रूव प्रोफेशनल इंग्लिश (ऑक्सफोर्ड ऑनलाइन क्लासेज)
ये कोर्स ऑक्सफोर्ड ऑनलाइन क्लासेज द्वारा ऑफर किया जा रहा है। इस कोर्स में आपको प्रेजेंटेशन, मीटिंग, बातचीत, कॉन्फ्रेंस, कॉल, ईमेल लिखने और अन्य सभी कार्यालय के कार्यों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अंग्रेजी का अभ्यास कराया जाता है। हर प्रतिभागी के लिए पर्सनलाइज्ड (व्यक्तिगत) कक्षाओं का संचालन किया जाता है ताकि उनकी सभी समस्याओं का समाधान किया जा सके।
बिजनेस इंग्लिश लंदन स्कूल
लंदन स्कूल का बिजनेस इंग्लिश कोर्स आपको ऐसी अंग्रेजी भाषा सीखने में मदद करता है जो कार्यस्थल पर बातचीत करने और संवाद करने के लिए बेहद जरूरी है। बिजनेस और प्रोफेशनल परिस्थितियों में आत्मविश्वास से अंग्रेजी बोलना सिखाने के लिए इस कोर्स को डिजाइन किया गया है। प्रोफेशनल मीटिंग, डिस्कशन, कॉन्फ्रेंस और कॉल में धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलना बेहद जरूरी है। यह कोर्स छह महीने का होता है। इसमें लगभग 150 घंटे का लर्निंग कंटेंट है। इस कोर्स को आप किसी भी इंटरनेट सुविधायुक्त डिवाइस से कर सकते हैं।

(साभार )

50 लाख तक आय वालों को भरना होगा सहज फॉर्म, कुछ को नहीं करनी होगी ई-फायलिंग

नई दिल्ली : केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आंकलन वर्ष 2०18-19 के लिए एक पेज का आयकर रिटर्न फॉर्म 1 (आईटीआर) जारी किया जिसका उपयोग 50 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले करदाता कर सकेंगे। आयकर विभाग ने कहा कि आंकलन वर्ष 2018-19 के लिए एक पेज का सहज फॉर्म जारी किया गया है जो उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है। उसने कहा कि करीब तीन करोड़ करदाता इस एक पेज के सहज फॉर्म का उपयोग करेंगे। इसका उपयोग ऐसे करदाता कर सकते हैं जिनका वेतन, एक आवासीय संपत्ति/ब्याज सहित अन्य मद से 50 लाख रुपये तक की वार्षिक आय है। वेतन और आवसीय संपत्ति को तर्कसंगत बनाया गया है। फॉर्म 16 में दिये गये वेतन तथा आवासीय संपत्ति का उल्लेख करना होगा। इसके साथ ही आईटीआर फॉर्म दो को भी तर्कसंगत बनाया गया। ऐसे व्यक्ति या अविभाजित हिन्दू परिवार आईटीआर फॉर्म दो भर सकेंगे जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन को छोड़कर होगी। ऐसे व्यक्ति या हिन्दु अविभाजित परिवार जिनकी आय व्यवसाय या प्रोफेशन से है, उन्हें आईटीआर फॉर्म तीन या आईटीआर फॉर्म चार भरना होगा। प्रवासियों को रिफंड हासिल करने के लिए एक विदेशी बैंक खाते के बारे में बताना होगा ताकि उसके रिफंड भेजा जा सके। आंकलन वर्ष 2017-18 में विशेष अवधि के दौरान नकद जमा कराने के संबंध में जानकारी मांगी गयी थी, लेकिन आंकलन वर्ष 2018-19 के फॉर्म में इस कॉलम को हटा दिया गया है। आईटीआर फॉर्म भरने के तौर-तरीकों में पिछले वर्ष की तुलना में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सभी आईटीआर फॉर्म ऑनलाइन भरना होगा। सिर्फ उन्हीं को आईटीआर फॉर्म 1 सहज और आईटीआर फॉर्म 4 सुगम हार्ड कॉपी में भरकर जमा करने की अनुमति होगी जिनकी आयु वित्त वर्ष में 8० वर्ष हो गयी है या ऐसे व्यक्ति या अविभाजित हिन्दु परिवार जिनकी वार्षिक आय पांच लाख रुपये तक होगी और वे रिटर्न का दावा नहीं करेंगे।

पत्नी के ट्रोल होने के बाद अक्षय ने बनवाया मोबाइल शौचालय

मुम्बई :   अभिनेता अक्षय कुमार ने पत्नी टि्वंकल खन्ना ने कुछ महीने के बाद मशहूर जुहू समुद्र तट के निकट एक मोबाइल शौचालय लगवाया है। दरअसल, टि्वंकल ने कुछ महीने पहले मुंबई में एक अन्य समुद्र तट पर एक व्यक्ति के खुले में शौच करते हुए तस्वीर ट्वीट की थी। नगरपालिका आयुक्त प्रशांत गायकवाड़ ने बताया कि पिछले सप्ताह अभिनेता ने बृहन्नमुंबई नगर निगम (बीएमसी) को एक आवेदन भेजकर शौचालय लगाने और इसका पूरा खर्च वहन करने का प्रस्ताव दिया था। हमने उनकी पहल का स्वागत किया और जुहू समुद्र तट के निकट शौचालय लगाया। अभिनेता ने शौचालय के पूरे 10 लाख रुपये का खर्च वहन किया। मोबाइल शौचालय का इस्तेमाल निशुल्क किया जा सकेगा। अगर कोई इसके रख-रखाव के लिए आगे आएगा, तब भुगतान और इस्तेमाल के आधार पर सुविधा मुहैया कराई जा सकेगी। पिछले साल अगस्त में अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना ने उपनगर अंधेरी में वर्सोवा समुद्र तट के निकट खुले में शौच का मुद्दा टि्वटर पर उठाया था।

ये है पुरुषों के तनाव की जड़ और समाधान

तनाव मनःस्थिति से उपजा विकार है। मनःस्थिति एवं परिस्थिति के बीच असंतुलन एवं असामंजस्य के कारण तनाव उत्पन्न होता है। तनाव एक द्वन्द है, जो मन एवं भावनाओं में गहरी दरार पैदा करता है। तनाव अन्य अनेक मनोविकारों का प्रवेश द्वार है। उससे मन अशान्त, भावना अस्थिर एवं शरीर अस्वस्थता का अनुभव करते हैं। ऐसी स्थिति में हमारी कार्यक्षमता प्रभावित होती है और हमारी शारीरिक व मानसिक विकास यात्रा में व्यवधान आता है। हम आपको पुरुषों में तनाव के कुछ प्रमुख कारणों और उससे निजात पाने के तरीके बता रहे हैं –

तनाव, खासकर अगर यह पुराना है, एक निरंतर मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक अतिप्रवाह का कारण बनता है, जो अंततः एक दीर्घ अवसाद में विकसित होता है।
समाधान – अपनी समस्याओं को लेकर घुटते न रहें। आप जिनके करीब हैं, फिर वह आपके दोस्त हो, परिवार का सदस्य हो या जीवन साथी,खुलकर बात करें। अगर बोल नहीं पाते तो लिखें। जरूरत पड़े तो किसी मनोचिकित्सक से बात करें या फिर इससे जुड़ी किताबें पढ़ें।

वित्तीय कठिनाइयों जो मानव अनुभवों का कारण बनती हैं और तनाव पैदा करती हैं। कार्यस्थल के नुकसान (बर्खास्तगी) पुरुषों में अवसाद के सबसे सामान्य कारणों में से एक माना जाता है।
समाधान – हर अंत में शुरुआत होती है। मुश्किल है कि स्थितियों को अपने हिसाब से ढालना मगर नामुमकिन नहीं है। अगर शादीशुदा हैं तो इस कठिनाई से निकालने में आपकी पत्नी मदद कर सकती है मगर जरूरी है कि आप न तो इसे अहं का मुद्दा बनायें और न तो इसे अपनी कमजोरी समझें। उसे बगैर किसी कुंठा के आत्मनिर्भर बनने में मदद करें। भारतीय पत्नी की पारम्परिक छवि के उलट उसे अपने सहचर के रूप में देखें..जो आपके साथ रहती है। आप बच्चों और घर को सम्भालने में मदद कर सकते हैं। घर से ही कोई काम शुरू कर सकते हैं। यह एक स्थिति है जो हमेशा नहीं रहती, सकारात्मक रहें,,,,आने वाला समय आपका ही है। अपनी पहचान का दायरा बढ़ाएं, अपडेट रहे..अपने क्षेत्र की नयी जानकारी से रूबरू रहें…आपकी वर्तमान नौकरी से भी अच्छी नौकरी मिल सकती है…इसलिए नो चिंता।

गलत पोषण, विशेष रूप से शराब का उपयोग अक्सर शरीर में पोषक तत्वों की कमी की ओर जाता है। इसी समय, अगर किसी व्यक्ति को विभिन्न समस्याओं से परेशान किया जाता है, तो समय के साथ-साथ इस तरह की जिंदगी आगे बढ़ जाती है, जिससे रोगी की हालत खराब हो जाती है।
समाधान – आप परिवार के लिए कमाते हैं मगर इसके लिए आपको अपनी सेहत का ध्यान खुद रखना होगा। हर चीज के लिए बच्चों, पत्नी और परिवार पर निर्भर न रहें और न अपने हर काम के लिए इंतजार करें। खुद करें, खाएँ, खुश रहें और अगर दूसरों के लिए करें…तो और भी अच्छा। समय – समय पर शरीर परीक्षण करवाते रहें और खुद अपने डॉक्टर न बनें। अच्छी खुराक लें और डॉक्टर की सलाह के साथ लें।

पति/पत्नी और बच्चों के लिए जिम्मेदारी की भावना पुरुषों में अवसाद का कारण बन सकती है। खासकर जब परिवार अक्सर संघर्ष कर लेता है और सामान्य वैवाहिक स्थिति आदर्श से बहुत दूर है। इसके अलावा कार्यस्थल या परिवार में लगातार संघर्ष भी परेशान करता है।
समाधान – दोस्त आपके टॉनिक हैं मगर भूलकर भी नशे में गम उड़ाने की कोशिश न करें। जीवनसाथी और बच्चों से बात करें…अगर काम पर भी हों तो कोशिश करें कि बात होती रहे। आजकल तो व्हाट्सऐप का जमाना है…बगैर अपने काम में बाधा डाले सम्पर्क बनाए रखना आसान है। किसी से भी बहुत ज्यादा उम्मीदें न पालें और न ही ये उम्मीद करें कि कोई आपके लिए अपनी पूरी जिंदगी दाँव पर लगा दें। यह फिल्मों में होता है…असली जिन्दगी में नहीं।

पुरुषों में तथाकथित प्रसवोत्तर अवसाद एक बच्चे के जन्म के बाद होता है, जब पत्नी का अधिकतर ध्यान अब पति को नहीं दिया जाएगा, लेकिन बच्चे को इसके अलावा, स्थिति तब और भी जटिल हो जाती है जब, जन्म देने के बाद, पति के यौन संबंध नहीं होते हैं।
समाधान – ये बात आपको समझनी होगी कि बच्चे के बाद आपकी जिंदगी बदलेगी और प्राथमिकताएं भी बदलेंगी। ये दौर महिलाओं के लिए भी आसान नहीं होता। बच्चे की परवरिश में आप पत्नी की मदद कर सकते हैं। यह सही है कि दाम्पत्य जीवन में यौन संबंधों की जरूरत पड़ती है मगर शादी सिर्फ जिस्मानी रिश्तों का नाम नहीं है…आपसी विश्वास और साझेदारी की भावना भी आप दोनों को पास ला सकती है। वैसे भी बेमन से बनाए गए संबंध भी आपको सुख नहीं देंगे तो अच्छा है न कि आप जीवनसाथी में एक दोस्त देखें और उसका साथ दें क्योंकि घर – परिवार और वह बच्चा आपका भी है।

घर के प्रदूषण को दिखायें बाहर का रास्ता

आजकल प्रदूषण की वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही इससे सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों से ग्रसित होने की आशंका बढ़ जाती है। बाहरी प्रदूषण के साथ घर के अंदर का प्रदूषण भी खतरनाक होता है। लेकिन कुछ चीजों और उपायों का अपनाकर इस मुसीबत से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि कौन-से उपायों की मदद से घर के अंदर का प्रदूषण कम किया जा सकता है।

1. घर के अंदर पौधों को लगाने से ना सिर्फ घर की सुंदरता बढ़ती है। बल्कि स्वस्थ और साफ हवा भी मिलती है। पौधें ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं और घर में दूषित हवा की मात्रा को कम करते हैं। मनी प्लांट, नाग पौधा और एरेका पाम जैसे भारतीय पौधों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. घर के अंदर धूम्रपान (स्मोकिंग) नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे घर के अंदर की हवा विशुद्ध होती है और हवा में प्रदूषण के कण बढ़ जाते हैं।

3. घर की दीवारों पर कम वाष्पशील कार्बनिक यौगिक वाले रंगों का इस्तेमाल करें क्योंकि ज्यादा वाष्पशील कार्बनिक यौगिक वाले रंगों के अंदर मौजूद विषाक्त पदार्थ सामान्य तापमान के अंदर ही हवा में घुलकर नुकसान पहुंचाते हैं।

4. घर के अंदर पानी टपकने की समस्या नहीं होने दें। क्योंकि इससे फंगस, फफूंदी और जगह सड़ जाने जैसी समस्या होने लगती है। जो अस्थमा, साइनस (एक प्रकार का सिरदर्द) और घरघराहट जैसी समस्याओं को और बढ़ाते हैं। इसलिए नियमित अंतराल पर घर की मरम्मत करवाते रहें।

5. विद्युत उपकरणों पर ध्यान रखना बहुत जरूरी है क्योंकि फ्रिज और ओवन जैसे उपकरण हानिकारक गैस का उत्पादन करते हैं। जिससे घर का वातावरण दूषित हो सकता है। इसके लिए विद्युत उपकरणों का नियमित रखरखाव काफी अहम है।

6. घर के अंदर साफ-सफाई करना महत्वपूर्ण होता है लेकिन साफ-सफाई करते हुए अधिकतर बार छोटी और कोने वाली जगहों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जिससे वहां पर कीटाणु एकत्रित होने लगते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए साफ-सफाई करते हुए फर्नीचर के नीचे, घर के कोनों, छोटी-छोटी जगहों पर भी अच्छी तरह सफाई करें।

7. रोजाना घर की खिड़कियां कम से कम 5-10 मिनट तक खुली रखें। क्योंकि पर्याप्त धूप और हवा ना लगने से घर के अंदर दूषित कणों और वायु-संचालन में कमी आ जाती है और घर का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है।

8. कीटनाशकों की जगह बायो-फ्रेंडली उत्पादों का इस्तेमाल करें। विषाक्त उत्पादों का इस्तेमाल कम करने से घर के अंदर हवा में दूषित कणों की मात्रा कम हो जाती है।

ड्राइविंग क्षमता पर असर डालता है आपका मानसिक स्वास्थ्य

नयी दिल्ली : मानसिक स्वास्थ्य विकार में व्यक्ति को किसी काम पर ध्यानकेंद्रित होने, सक्रिय होने या सोच-समझकर काम करने में परेशानी होती है। इस बीमारी को ध्यान आभाव सक्रियता विकार (एटेंशन डेफीसिट हाइपर एक्टीविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी)) कहा जाता है। एक शोध में सामने आया है कि मानसिक स्वास्थ्य से आपकी ड्राइविंग (वाहन चलाने की) कुशलता पर भी असर पड़ता है और गलतियां होने की संभावनाएं भी अधिक होती है।
पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 16 से 19 साल के किशोरों पर अध्ययन किया। जिसमें पाया गया कि इस उम्र के किशोरों में ज्यादा उम्र के लोगों के मुकाबले वाहन चलाते समय घातक दुर्घटना होने की संभावना अधिक होती है। क्योंकि व्यस्क लोगों का मानसिक स्वास्थ्य ज्यादा मजबूत होता है। अध्ययनकर्ताओं ने एक प्रश्नावली के जरिए भी किशोरों से आंकडें एकत्रित किए। इस प्रश्नावली में वाहन चलाते हुए मोबाइल इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति और वाहन पर सवारियों की संख्या जैसे प्रश्न पूछे गए। इसके बाद किशोरों से प्रयोगात्मक ड्राइव करने के लिए कहा गया, जिसमें विभिन्न दुर्घटना परिदृश्यों का सामना करवाया गया। अध्ययन के अंत में पाया गया कि जिन किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य कमजोर था, उनमें दुर्घटना से बचने की क्षमता और ड्राइविंग कुशलता में कमी देखी गई।