Saturday, October 3, 2026
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100 शीर्ष प्रभावशाली शख्सियतों में शामिल हुईं दीपिका पादुकोण

मुम्बई : दीपिका  पादुकोण टाइम्स मैगजीन द्वारा जारी शीर्ष 100 प्रभावशाली शख्सियतों में शामिल की गयी हैं। अब रणवीर ने एक बार फिर खूबसूरत दीपिका को उनके काम और उनकी सफलता के लिए प्रोत्साहित किया है। रणवीर दीपिका की तारीफ करते हुए उन्हें क्वीन कहते हैं। दरअसल, दीपिका को टाइम्स मेगजीन द्वारा सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले 100 लोगों में से एक चुना गया है। इसके चलते दीपिका ने अपनी एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें इस बात की जानकारी दी गई है। दीपिका ने इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा है- क्या सम्मान मिला है। दीपिका के इस पोस्ट पर रणवीर कमेंट करते हैं। रणवीर लिखते हैं-‘क्वीन’। भारतीय फिल्म इंडस्‍ट्री में से केवल दीपिका ही इस लिस्ट मेंं शामिल हैं।

दीपिका के अलावा भारतीय क्रिकेट सनसनी विराट कोहली और ओला कैब के को-फाउंडर भावीश अग्रवाल ने भी इस लिस्ट में जगह बनाई है। मैगजीन की कलाकारों की लिस्‍ट में निकोल किडमैन, स्टर्लिंग के ब्राउन, रयान कुगलर और गेल गेडट भी हैं। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से गायिका रिहाना, जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और आयरलैंड के भारतीय मूल के प्रधानमंत्री लियो वराडकर भी शुमार हैं।

भगोड़ों की संपत्ति होगी जब्त, अध्यादेश को मिली कैबिनेट की मंजूरी

मिली जानकारी के मुताबिक, इस अध्यादेश के जरिये भारत से बाहर की संपत्तियों को संबंधित देश के सहयोग से जब्त किया जा सकेगा। अपराध करके विदेश भागने वालों को अदालत में दोषी ठहराये बिना भी उनकी संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है। विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे कई आर्थिक अपराधियों के देश से बाहर खिसक जाने के बीच यह कदम उठाया जा रहा है। इसके जरिए सरकार संदेश देना चाहती है कि देश को आर्थिक नुकसान पहुंचा कर विदेश भाग जाने वाले अब बच नहीं पाएंगे। इस अध्यादेश के प्रावधान उन आर्थिक अपराधियों पर लागू होंगे जो विदेश भाग गए और भारत लौटने से इनकार करते हैं। यह कानून उन लोगों के खिलाफ इस्तेमाल होगा जिन पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया हो और वे इसे वापस नहीं कर रहे हों। इसमें यह भी प्रावधान है कि ऐसे भगोड़े आर्थिक अपराधी की संपत्ति को उसके दोषी ठहराये जाने से पहले ही जब्त किया जा सकेगा और उसे बेचकर कर्ज देने वाले बैंक का कर्ज चुकाया जायेगा। इस तरह के आर्थिक अपराधियों के मामले की सुनवाई मनी लांड्रिंग कानून के तहत होगी।

टैक्सी, ऑटो चलाने के लिए कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस अब अनिवार्य नहीं

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने कमर्शियल टैक्सी, ऑटो चलाने वाले करोड़ों लोगों को राहत देते हुए बड़ा फैसला किया है। अब ऐसे ड्राइवर्स अपने निजी ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए भी कमर्शियल गाड़ियां जैसे कि ई-रिक्शा, बाइक, तिपहिया और छोटे लोडर वाहन चला सकेंगे।
इनको लेना होगा कमर्शियल लाइसेंस
हालांकि सरकार ने ट्रक,बस और अन्य हैवी कमर्शियल वाहनों को चलाने के लिए पहले की तरह कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस लेना होगा। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने के लिए आदेश दिया था।
लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार
सरकार के इस कदम लाखों लोगों को रोजगार मिल सकेगा। अभी तक कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस न होने की वजह से लोग इस तरह के कारोबार में नहीं आ पाते थे। कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए लोगों को कम से कम एक साल का इंतजार करना पड़ता था। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से आरटीओ ऑफिस में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।
सड़कों पर बढ़ जाएगी गाड़ियों की संख्या
हालांकि सरकार के इस कदम से पहले से बेहाल सड़कों पर गाड़ियों की संख्या काफी बढ़ जाएगी, क्योंकि ऐसी गाड़ियों को चलाने वाले लोग काफी संख्या में वाहन लेकर निकलेंगे। लेकिन सरकार को लगता है कि इससे सड़क पर निजी वाहन कम होंगे, जब टैक्सी व ऑटो की उपलब्धता काफी बढ़ जाएगी। अभी भी देश के छोटे-बड़े शहरों में ई-रिक्शा और ऑटो की काफी संख्या हो गई है, जिसके चलते कई बार जाम लग जाता है।

अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला बारबरा बुश का निधन

वॉशिंग्टन : अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला और एक अन्य पूर्व राष्ट्रपति की मां बारबरा पियर्स बुश का निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थी। ह्यूस्टन में अपने घर में जब उन्होंने अंतिम सांस ली तो उनके साथ उनके पति पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज हर्बर्ट वॉकर बुश और बेटा एवं पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज वॉकर बुश परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मौजूद थे। उनके पति के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है , ‘‘ अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला और पारिवारिक साक्षरता की पुरजोर समर्थक रहीं बारबरा पियर्स बुश का 92 वर्ष की आयु में  17 अप्रैल 2018 को निधन हो गया। ’’ बुश और बारबरा ने 73 साल पहले शादी की थी। वह 16 साल की उम्र में पहली बार बुश से मिली थीं और उस समय वह स्कूल में पढ़ती थी। उन्होंने वर्ष 1945 में शादी की जब नौसैन्य अधिकारी बुश छुट्टी लेकर आए।

जापान की मेयर ने की सूमो रेसलिंग में महिलाओं को बराबरी की माँग

टोक्यो : महिलाओं के साथ यूं तो हर देश में भेदभाव किया जाता है। फिर चाहे बात हो पढ़ाई की, नौकरी की या किसी खेल क्षेत्र की। कई नौकरियों में तो यह तक कह दिया जाता कि उसके लिए केवल पुरुष ही आवेदन कर सकते हैं। ऐसी ही एक परंपरा जापान की भी है। यहां 400 साल पहले शुरू हुआ खेल सूमो रेसलिंग जापान का सबसे पुराना और पवित्र खेल माना जाता है। इसमें शुरू से ही ये परंपरा रही है कि रिंग (दोह्यो) में महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकतीं। लेकिन इस परंपरा के खिलाफ अब जापान के तकाराजुका शहर की मेयर तमोको नाकागावा ने आवाज उठाई है मगर मेयर होने के बावजूद उनको अन्दर नहीं जाने दिया गया और उन्होंने रिंग के बाहर भाषण देकर अपनी बात रखी।
उनके मुताबिक वह इस पुरुष प्रधान परंपरा को नहीं मानती हैं, महिलाओं को आखिर क्यों इस रिंग से दूर रखा जाता है। उनहोंने कहा कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए वह हर 6 महीने में याचिका दायर करती रहेंगी। तमोको ने आगे कहा कि वह चाहती हैं कि इस मामले पर स्थिति साफ हो जानी चाहिए। सूमो एसोसिएशन को अब महिलाओं की आवाज सुननी होगी और इस मामले में हर स्तर पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसी वजह नहीं है कि महिलाओं को रिंग में अभ्यास करने से रोका जाए।

तमोको के ऐसा कहने के बाद एसोसिएशन ने भी बयान दिया है। एसोसिएशन के मुताबिक यह परंपरा शुरू से रही है कि महिलाओं को रिंग में प्रवेश करने से रोका जाए। इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। इसके बाद एसोसिएशन ने मेयर को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह इस विषय पर कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और इस समस्या का हल निकालेंगे। एसोसिएशन के जवाब को सुनने के बाद तमोको ने कहा कि अगर महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं दिया गया तो वह आंदोलन शुरू कर देंगी।
गौरतलब है कि करीब 15 दिनों पहले सूमो टूर्नामेंट के दौरान एक घटना घटी थी जिसके बाद तमोको ने महिलाओं के लिए आवाज उठाई। हुआ ये कि 6 अप्रैल को क्योटो में एक टूर्नामेंट चल रहा था। तब मायजुरु के मेयर रिंग में खड़े होकर भाषण देते वक्त बेहोश हो गए। तो उनकी मदद के लिए कुछ महिलाएं रिंग के अंदर पहुंच गईं। जिसके बाद एसोसिएशन ने माइक पर अनाउंसमेंट कर महलाओं को रिंग से बाहर जाने को कहा और इसे अपवित्र मानते हुए रिंग में बहुत सारे नमक का छिड़काव किया।
बता दें यह खेल जापान में 16वीं सदी में शुरू हुआ था। जिसका पहला मुकाबला 1684 में हुआ। तभी से वहां यह परंपरा चली आ रही है कि महिलाएं रिंग में प्रवेश नहीं कर सकतीं। इस रिंग का व्यास 4.55 मीटर का होता है और यह 6.7 मीटर के आयताकार प्लैटफॉर्म के अंदर ही रहता है।

नहीं रहे सच्चर कमेटी के अध्यक्ष जस्‍टिस राजेन्‍द्र सच्‍चर

नयी दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सच्चर कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस राजेन्द्र सच्चर का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 94 साल के थे और फिलहाल बीमार चल रहे थे। जस्टिस राजेन्द्र सच्चर की पहचान एक न्यायाधीश के साथ ही शीर्ष मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर होती है, जिन्होंने अल्पसंख्यकों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति पर बहुचर्चित रिपोर्ट पेश की थी, जिसे सच्चर कमेटी रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है। अपनी इस रिपोर्ट में जस्टिस राजेन्द्र सच्चर ने भारत में मुस्लिम समुदाय के सामने आ रही परेशानियों का जिक्र किया था। साथ ही इस रिपोर्ट में उन्होंने देश में मुस्लिमों की स्थिति सुधारने के उपाय भी सुझाए थे। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में भारत में मुस्लिमों की स्थिति अनुसूचित जाति और जनजाति से भी बदतर बतायी गई थी।
जस्टिस राजेन्द्र सच्चर ने अपना न्यायिक कॅरियर साल 1950 में शिमला में एक वकील के तौर पर शुरु किया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सिविल, आपराधिक और राजस्व संबंधी मामलों की प्रैक्टिस की। साल 1972 में राजेन्द्र सच्चर को दिल्ली हाईकोर्ट में 2 साल के लिए एडिशनल जज नियुक्त किया गया। जज राजेन्द्र सच्चर ने राजस्थान हाईकोर्ट के जज के तौर पर भी काम किया। साथ ही वह सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य कार्यकारी न्यायाधीश के तौर पर भी काम कर चुके थे। जज राजेन्द्र सच्चर अपने न्यायिक कॅरियर के दौरान ही सामाजिक मुद्दों पर काफी मुखर रहे। 1990 में रिपोर्ट ऑन कश्मीर सिचुएशन के लिए भी वह चर्चा में रहे। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अजीज मुशाबेर अहमदी द्वारा मानवाधिकार के मुद्दों पर गठित की गई एडवाइजरी कमेटी के सदस्य भी नियुक्त किए गए। इस कमेटी की अध्यक्षता खुद मुख्य न्यायाधीश ने की थी।

जस्टिस राजेन्द्र सच्चर संसद में महिलाओं को आरक्षण देने के समर्थक भी थे। उनका मानना था कि महिलाओं को संसद में आरक्षण देने से कानूनी मामलों में लैंगिक भेदभाव खत्म हो सकता है। साल 2003 में जज राजेन्द्र सच्चर और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने इराक में अमेरिका द्वारा किए गए हमले की आलोचना की थी। मानवाधिकार के क्षेत्र में किए गए काम के लिए जस्टिस राजेन्द्र सच्चर हमेशा याद किए जाएंगे। देश में मुसलमानों की स्थिति पर उन्होंने 403 पेज की बहुचर्चित सच्चर कमेटी रिपोर्ट पेश की थी। सच्चर कमेटी का गठन साल 2005 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार द्वारा किया गया था। इसके अगले साल यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई। 7 सदस्यीय सच्चर कमेटी ने देश में मुसलमानों की तरक्की में आने वाली रुकावटों का बखूबी वर्णन किया था और उनके समाधान का रास्ता भी सुझाया।

‘गगन शक्ति’ में दिखा भारत का दम, 72 घंटे में 5000 फाइटर जेट ने भरी उड़ान

नयी दिल्ली : पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के साथ एयर कॉम्बैट ऑपरेशन में इजाफा करते हुए पिछले हफ्ते केवल तीन दिनों के अंदर भारत के 5,000 फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी थी। भारतीय वायु सेना अब फाइटर जेट्स को अरुणाचल प्रदेश की चीन और लद्दाख से लगी पूर्वी सीमाओं पर शिफ्ट कर रहा है ताकि इससे वहां ताकत बढ़ाई जा सके। यह अभ्यास दो तरफा युद्ध के चलते नहीं बल्कि गगन शक्ति अभ्यास के तहत किया गया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- यह साल 1986-1987 के ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स और साल 2001-2002 में ऑपरेशन पराक्रम के बाद हुआ अब तक का सबसे बड़ा अभ्यास है। उस समय भारत संसद पर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ युद्ध करने के लिए लगभग तैयार हो गया था। पाकिस्तान और चीन सीमा पर संभावित खतरे से निपटने के लिए कम से कम 42 फाइटर स्क्वाड्रोन्स की जरूरत है, लेकिन अभी भी भारतीय खेमे में केवल 31 है। इसके बावजूद भी वायु सेना इस अभ्यास की मदद से खुद को तैयार कर रही है। गगन शक्ति अभियान के तहत वायुसेना ने 15,000 अधिकारियों को युद्ध की ट्रेनिंग दी है। 1100 एयरक्राफ्ट ने हवा में करतब दिखाए। इस अभियान में 550 एयरक्राफ्ट ने हिस्सा लिया जिसमें फाइटर जेट, सुखोई 30, देश में बने 8 तेजस शामिल थे। सैन्य आक्रमण करने वाले हर तरह के 5000 एयरक्राफ्ट्स ने हिस्सा लिया।
अभ्यास के दौरान फाइटर्स ने शानदार प्रभावशीलता दर दर्ज की। केवल 48 घंटों के अंदर पूर्वी क्षेत्र से पश्चिमी क्षेत्र में एयरक्राफ्ट को शिफ्ट किया गया। इस अभ्यास में 46 एयरबेस को शामिल किया गया। दो तरफा युद्ध की स्थिति में 42 फाइटर जेट की आवश्यकता होती है लेकिन इस अभ्यास में 31 को शामिल किया गया।
सीमा पर लगभग 1,150 सैनिकों, विमानों, हेलीकॉप्टर और ड्रोन्स के साथ-साथ सैकड़ों एयर-डिफेंस मिसाइल, रडार, निगरानी के लिए और दूसरी इकाइयों को हाई-वोल्टेज अभ्यास के लिए तैनात किए गए हैं। यह अभ्यास भारतीय सेना और नौसेना की सक्रिय भागीदारी के साथ ही भूमि-हवाई-समुद्री लड़ाकू अभियानों के लिए हो रही है।
वायुसेना ने जरूरत पड़ने पर 83 प्रतिशत सेवा क्षमता को प्राप्त करने के लिए व्यवस्थित तरीके से काम किया है। इसके तहत किसी निश्चित समय पर विमान संचालन की उपलब्धता रहेगी। इसके अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और बेस रिपेयर डिपो जैसे रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ शांत समय में 55 प्रतिशत से 60 प्रतिशत सेवाक्षमता हासिल की गई।
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बिरेंद्र सिंह धनोआ ने कहा- इस अभ्यास के जरिए हमारा लक्ष्य परिचालन क्षमता और असल युद्ध जैसी स्थिति से निपटने को लेकर खुद को तैयार करने का है। इसके साथ ही उच्च गति ऑपरेशन को बनाए रखने की हमारी क्षमता की जांच करना है। इसका किसी भी देश के लिए उद्देश्य नहीं है।

कार के लिए ऋण लेने जा रहे हैं तो इन बातों का रखें ख्‍याल

कार इंसान की मूल जरुरतों में शामिल हो गई है। कोई इंसान अगर पहले अपना घर ले लेता है तो उसका अगला ख्वाहिश कार ही होती है। अगर, आप नई कार खरीदने के लिए बैंक से ऋण लेने की योजना बना रहे हैं तो कुछ अहम बातों का ख्‍याल जरूर रखें। सिर्फ ब्‍याज दरों को देखते हुए ऋण लेने का फैसला लेना सहीं नहीं होगा। हम आपको बता रहे हैं कि ऑटो लोन के चयन के लिए किन बातों पर ध्‍यान देना चाहिए –
सबसे पहले अलग – अलग फाइनेंसर्स से पता करा लें कि आपको कितना ऋण मिल सकता है।
इसके बाद यह जरूर पता कर लें कि कार की कीमत का कितने फीसदी ऋण मिल सकता है। इसमें कोशिश करें कि कुल कीमत का कम से कम 20 फीसदी अपनी जेब से दें।
अब यह देखें कि 80 प्रतिशत या उससे अधिक का जो ऋण किया जाएगा, यह कार की एक्स शोरूम कीमत पर किया जाएगा या ऑन रोड कीमत पर।
अलग अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करें, जिस बैंक से आप लेनदेन करते हैं और आपके और उस बैंक के मौजूदा संबंध हैं तो वह आपको सबसे बेहतर दर पर लोन दे सकता है।
ब्याज दर के अलावा, अन्य फीस की तुलना करें, जैसे प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोझर चार्ज, पार्ट-प्रीपेमेंट फीस इत्यादि।
कुछ लोग समय से पहले ही ऋण बंद करा देते हैं, तो ऐसी स्थिति के लिए ऐसे बैंक का चुनाव करें जो कम प्रीपेमेंट चार्ज और फाइलक्लोजर चार्ज लेता हो।
ऋण 1 साल से 7 साल तक के लिए ही ठीक होता है। अगर इससे ज्यादा के साथ जाएंगे तो ईएमआई तो कम आएगी लेकिन कुल ब्याज ज्यादा चुकाना पड़ेगा।
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपकी कुल मासिक ईएमआई आपकी कुल कमाई के 35 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
समय पर ऋण का पूरा भुगतान करने के बाद बैंक एक नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देता है। जो तीन महीने के लिए मान्य होता है। इसकी एक कॉपी इंश्योरेंश कंपनी में जमा कराकर इंशयोरेंस में से बैंक का नाम हटवा दें। इसके अलावा एक कॉपी RTO ऑफिस में जमा कराकर गाड़ी की नई आरसी केवल अपने नाम से बनवा लें।

कचरे से निपटने में नाकाम हैं एशिया-प्रशांत के देश, मिट्टी की हालत गंभीर

इंदौर : वैश्विक आबादी का करीब 60 प्रतिशत बोझ उठाने वाले एशिया-प्रशांत क्षेत्र में खुले स्थानों पर ठोस कचरे के भण्डारण और निपटारे से आबो-हवा और जन-जीवन पर दिनों-दिन खतरा बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र क्षेत्रीय विकास केंद्र (यूएनसीआरडी) की हालिया रिपोर्ट में इस विषय पर गहरी चिन्ता जाहिर की गयी है। यष्ह रिपोर्ट इंदौर में नौ से 12 अप्रैल के बीच संपन्न एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आठवीं “3 आर फोरम” के अध्यक्षीय सार के रूप में जारी की गयी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि खुले स्थानों पर कष्चरे के ढेर लगाने और इसे खुले में ही जलाने से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में मिट्टी की सेहत गिरते-गिरते गंभीर स्थिति में पहुंच गयी है । अपशिष्ट निपटान की इस अनुचित प्रवृत्ति से मनुष्यों, जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के साथ समूचे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है ।

रिपोर्ट में कहा गया, “रिकॉर्ड देखने से पता चलता है कि (दुनिया में) ठोस कचरे के 50 सबसे बड़े भराव क्षेत्रों में से 35 प्रतिशत से ज्यादा स्थल अकेले एशिया-प्रशांत इलाके में हैं।” बहरहाल, रिपोर्ट में इस बात को भी रेखांकित किया गया है कि ठोस कचरे की गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिये 3 आर (रिड्यूज, रीयूज और रीसाइकिल) फॉर्मूले के आधार पर भारत, चीन, आॅस्ट्रेलिया, जापान और कोरिया गणराज्य में उम्दा उदाहरण पेश किये गये हैं। “3 आर” फॉर्मूले से आशय कचरे के उत्पादन को घटाने, पुराने सामान को अलग-अलग तरीकों से दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाने और रीसाइकिंिलग के जरिये पुरानी चीजों से नये उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देने से है ।
आठवीं 3 आर फोरम के मेजबान मुल्क के प्रयासों का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि “स्वच्छ भारत मिशन” के तहत नगरीय और कस्बाई क्षेत्रों में शत प्रतिशत ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने के लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के नगरीय निकायों के 73 प्रतिशत से ज्यादा वॉर्डों में घर-घर से कचरा जमा किया जा रहा है। इन निकायों के 36 प्रतिशत से ज्यादा वॉर्डों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग जमा किया जा रहा है, ताकि इसके निपटारे में सुविधा हो।

आठवीं 3 आर फोरम के विशेष सत्र के दौरान एशिया-प्रशांत क्षेत्र के महापौरों ने एक ऐतिहासिक घोषणा पत्र को भी अपनाया। इसके जरिये संकल्प लिया गया कि पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील जगहों और पर्यटन स्थलों में प्लास्टिक से बनी चीजों के अवैध निपटान पर “पूर्ण प्रतिबंध” की दिशा में आगे बढ़ा जायेगा। मिट्टी, हवा और पानी को स्वच्छ बनाने के लिये जरूरी कदमों पर आधारित इस 11 सूत्रीय दस्तावेज को “इंदौर 3 आर घोषणापत्र” नाम दिया गया।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आठवीं 3 आर फोरम में 45 देशों के करीब 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत का आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय, जापान का पर्यावरण मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र क्षेत्रीय विकास केंद्र (यूएनसीआरडी) इसके आयोजन में सहभागी थे।

वैदिक संस्कृति ने सिखाया पृथ्वी और प्रकृति से प्रेम करना

अशोक “प्रवृद्ध
वैदिक संस्कृति का प्रकृति से अटूट सम्बन्ध है। वैदिक संस्कृति का सम्पूर्ण क्रिया -कलाप प्राकृत से पूर्णतः आवद्ध है। वेदों में प्रकृति संरक्षणअर्थात पर्यावरण से सम्बंधित अनेक सूक्त हैं। वेदों में दो प्रकार के पर्यावरण को शुद्ध रखने पर बल दिया गया है –

आन्तरिक एवं बाह्य। सभी स्थूल वस्तुऐं बाह्य एवं शरीर के अन्दर व्याप्त सूक्ष्म तत्व जैसे मन एवं आत्मा आन्तरिक पर्यावरण का हिस्सा है। आधुनिक पर्यावरण विज्ञान केवल बाह्य पर्यावरण शु्द्धि पर केन्द्रित है। वेद आन्तरिक पर्यावरण जैसे मन एवं आत्मा की शुद्धि से पर्यावरण की अवधारणा को स्पष्ट करता है।

बाह्य पर्यावरण में घटित होने वाली सभी घटनायें मन में घटित होने वाले विचार का ही प्रतिफल हैं। भगवद् गीता में मन को अत्यधिक चंचल कहा गया है –
चंचलं ही मनः ……। (भगवद् गीता 6:34)।

ऐतेरेयोपनिषत् के अनुसार ब्रह्मांड का निर्माण पाँच तत्वों पृथ्वी, वायु, आकाश, जल एवं अग्नि को मिलाकर हुआ है – इमानि पंचमहाभूतानि पृथिवीं, वायुः, आकाशः, आपज्योतिषि। (3:3)। इन्हीं पाँच तत्वों के संतुलन का ध्यान वेदों मै रखा गया है। इन तत्वों में किसी भी प्रकार के असंतुलन का परिणाम ही सूनामी, ग्लोबल वार्मिंग, भूस्खल, भूकम्प आदि प्राकृतिक आपदायें हैं वेदों में प्राकृति के प्रत्येक घटक को दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया है। प्रथम वेद ऋग्वेद का प्रथम मन्त्र ही अग्नि को समर्पित है

– ऊँ अग्निमीले पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्। (ऋग्वेद 1.1.1)
ऋतं ब्रह्मांड का सार्वभौमिक नियम है।

इसे ही प्राकृति का नियम कहा जाता है। यह ब्रह्मांड की सभी गतियों एवं अस्तित्व का कारण
नियंता है। ऋग्वेद के अनुसार –

सत्येनोत्तभिता भूमिः सूर्येणोत्तभिता द्यौः
त्रृतेनादित्यास्तिठन्ति दिवि सोमो अधिश्रितः
ऋग्वेद (10:85:1)
भावार्थ – देवता भी ऋतं की ही उत्पति हैं एवं ऋतं के नियम से बंधे हुए हैं। यह सूर्य को आकाश में स्थित रखता है। वेदों में वरूण को ऋतं का देवता कहा गया है। वैसे तो वरूण जल एवं समुद्र के
देवता के रूप में जाना जाता है परन्तु मुख्यतया इसका प्रमुख कार्य इस ब्रह्मांड को सुचारू पूर्वक चलाना है। ऋग्वेद के अनुसार वरूण अपने ऊपर स्थित सिंहासन से सभी अद्भुत चीजों को देखता है, जो हो चुकी हैं एवं जो होने वाली हैं
– अतो विश्वान्यद्धुता चिकित्वों अभि पश्यति।
ड्डतानि या च कत्र्वा। (ऋग्वेद 1:25:11)।

असंतुलन की स्थिति में ही वरूण अथवा ऋतं उपरोक्त वर्णित विभिन्न प्रकार की आपदाओं द्वारा पृथ्वी एवं ब्रह्माण्ड में संतुलन स्थापित करता है। आइये वेदों में वर्णित सृष्टि के मुख्य तत्वों के महत्व को जानें।

वैदिक साहित्य में पृथ्वी तत्व को माता कहकर सम्मानित किया गया है –
द्यौर्मे पिता जनिता नाभिरत्र बन्धुर्मे माता पृथिवी महीयम्। (ऋग्वेद1:164/33)।

अर्थात् द्याव (आकाश) मेरे पिता हैं, बन्धु वातावरण मेरी नाभि है, और यह महान् पृथ्वी मेरी माता है। ऋग्वेद में आकाश व पृथ्वी की पिता एवं माता के रूप में स्तुति करते हुए सभी प्राणियों की रक्षा की कामना की गई है
– पिता माता च भुवनानि रक्षतः (1:160:2)।

अथर्ववेद के भूमिसूक्त में भी पृथ्वी माता के रूप में पूजनीय है।
– माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः (12:1:12)।
पृथ्वी पर विराजमान जीव एवं वनस्पति के महत्व को वेदों द्वारा स्वीकार कर उनके संरक्षण की आवश्यकता विभिन्न मन्त्रों के द्वारा की गई है।

ऋग्वेद में वनस्पतियों से पूर्ण वनदेवी की पूजा की गई है –
आजनगन्धिं सुरभि बहवन्नामड्डषीवलाम्
प्राहं मृगाणां मातररमण्याभिशंसिषम्
(ऋग्वेद 10:146:6)
भावार्थ – अब मैं वनदेवी (आरण्ययी) की पूजा करता हूँ जो कि मधुर सुगन्ध से परिपूर्ण है और सभी वनस्पतियों की माँ है और बिना परिश्रम किये हुए भोजन का भण्डार है। ऋग्वेद में औषधि सूक्त में वनस्पति को माँ कहकर वानस्पतिक औषधि के महत्व को स्वीकारा गया है –
शतं वो अम्ब धामानि सहस्रमत वो रूहः।
अधा शतक्रत्वो यूयमिमं मे अगदं ड्डत।
(ऋग्वेद 10:97:2)


भावार्थ – हे माँ, हजारों तुम्हारे जन्म स्थान हैं और हजारों तुम्हारे प्रकार हैं। नाना प्रकार की तुम्हारी शक्तियाँ हैं। मेरे इस रोगी को रोग से मुक्त करो। ऋग्वेद में ही पवित्र घास को मनुष्य के दोहन से बचाने का निर्देश दिया गया है
– मा नो बर्हिः पुरूसता निदे कर्यूयं पात
स्वस्तिभिः सदा नः (7:75:8)।

अगली पीढ़ी का खजाना इसी वनस्पति एवं पानी को कहा गया है
– पुरूणि रत्ना दधतौ नयस्मे अनु
पूर्वाणि चख्यथुर्युगानि। ऋग्वेद 7:70:4।

इस प्रकार ऋग्वेद वनों को विनाश से बचाने का निर्देश देता है – वनानि नः प्रजहितानि (8:1:13)। पद्म
पुराण में तो एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान माना गया है –
दशपुत्रसमो दु्रमः (1:44:455)।
तात्पर्य यह है कि अपने पुत्र के समान ही हमे वृक्षों की देखभाल करनी चाहिए। यजुर्वेद प्रार्थना करता है कि मैं पृथ्वी सम्पदा को हानि न पहुँचाऊँ
– पृथिवी मातर्मा हिंसी मा अहं त्वाम् (10:23)।

जल की महत्ता एवं उपयोगिता का महिमामंडन वेदों में अत्यधिक हुआ है। शतपत ब्राह्मण में इसे अमृत कहा गया है
– अमृत वा आपः (1:9:3:7)।
केवल वैदिक संस्कृति में ही नदियों को माँ एवं इनके जल को मोक्ष का माध्यम कहा गया है। पदम् पुराण जल प्रदूषण की कड़ी शब्दों में भर्त्सना करता है –

सुकूपानां तड़ागानां प्रपानां च परंतप।
सरसां चैव भैत्तारो नरा निरयगामिनः।।
(पदम् पुराण 96:7:8)
भावार्थ – वह व्यक्ति जो तालाब, कुओं अथवा झील के जल को प्रदूषित करता है, नरकगामी होता है।
वर्तमान समय में जल प्रदूषण से उत्पन्न बीमारियां किसी नरक से कम नहीं हैं। हमारी सभ्यता नदियों को नाली एवं गन्दगी द्वारा प्रदूषित करने की नहीं रही है, परन्तु आज हमारी नदियां नाम मात्र के लिए पवित्र रह गयी हैं।

वायु शरीर के अन्दर प्राण के रूप में व्याप्त है
– वायुर्ड वा प्राणो भूत्वा शरीरमाविशत्। -तैत्तिरीयोपनिषत् (2:4)।
ऋग्वेद में वायु को प्राणदायिनी औषधि के रूप में सराहा गया है जो कल्याण एवं आनन्द
लाती है
– वात आ वातु भेषतं शंभु मयोभु नो हृदे। (10:186:1)।
वैदिक संस्कृति लोग वायु के महत्व से भलिभाँति परिचित थे। सुखी एवं दीर्घ जीवन हेतु उन्होंने शुद्धि एवं प्रदूषण रहित वायु पर बल दिया है।

अन्ततोगत्वा हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि वेद केवल धर्म एवं आस्था का विषय न होकर एक विज्ञान भी है। पृथ्वी एवं अन्तरिक्ष के कण-कण की पूजा जहाँ एक ओर परमात्मा की सर्वव्यापकता के दृष्टान्त को प्रतिपादित करती है, वहीं दूसरी ओर स्वस्थ पर्यावरण की कल्पना को भी मूर्त रूप देती है। ईशावस्योपनिषत् के निम्न श्लोक द्वारा हमें समझना होगा कि इस जगत में व्याप्त समस्त वस्तुएँ ईश्वर द्वारा ही प्रदत्त हैं। इस धरा पर जीवित रहने के लिए इनमें संतुलन आवश्यक है। अतः हम उतना ही उपयोग करें जितनी हमें आवश्यकता है –

ईशा वास्यमिदँ सर्वं यत्किच जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुंजीथा मा गृधः कस्य स्वि(नम्।।
(ईशावास्योपनिषद् 1)

(साभार – हिन्दी मीडिया डॉट इन)