Friday, July 10, 2026
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श्रीकांत ने रचा इतिहास, दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी बने

नयी दिल्ली : किदाम्बी श्रीकांत इतिहास रचते हुए विश्व बैडमिंटन महासंघ ( बीडब्ल्यूएफ ) द्वारा जारी की गयी सूची में दुनिया के पहले नंबर के पुरुष एकल खिलाड़ी बन गए। आधिकारिक रैंकिंग शुरू होने के बाद वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गये हैं। आधुनिक समय में कंप्यूटर द्वारा तैयार की जाने वाली रैंकिंग प्रणाली शुरू किए जाने से पहले महान खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण को एक समय विश्व का नंबर एक खिलाड़ी माना जाता था। इस तरह श्रीकांत  साइना नेहवाल के बाद दूसरे भारतीय बन गए जिसे यह सम्मान हासिल हुआ है। साइना 2015 में महिलाओं की एकल रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर पहुंची थी। श्रीकांत ने यह उपलब्धि पिछले साल के अपने शानदार प्रदर्शन के बाद हासिल की और उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। गोपीचंद अकादमी  में प्रशिक्षण पाने वाले श्रीकांत ने कहा , ‘‘ मैं पहली बार विश्व नंबर एक बनने और प्रकाश सर के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाला पहला भारतीय पुरूष बनने पर निश्चित रूप से खुश हूं। ’उन्होंने कहा , ‘‘ यह गोपी सर , मेरे परिवार , मेरे दूसरे कोच एवं सहयोगी स्टाफ , मेरी टीम गोस्पोट्र्स फाउंडेशन , मेरे प्रायोजकों और इन तमाम वर्षों में मुझमें विश्वास दिखाने वाले हर इंसान की कड़ी मेहनत का परिचायक है। मौजूदा विश्व चैंपियन विक्टर एक्सेलसेन चोट के कारण बैडमिंटन से दूर रहे और पिछला साल अप्रैल में जीता गया अपना मलेशिया ओपन का खिताब बरकरार रखने में नाकाम रहे और इसके बाद दूसरे स्थान पर खिसक गए।
इस साल मलेशिया ओपन राष्ट्रमंडल खेलों के कारण आगे खिसका दिया गया है। विक्टर को जनवरी में टखने की चोट के कारण इंडोनेशिया मास्टर्स से बीच में ही हटना पड़ा था और इसके बाद वह इंडिया ओपन , ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप , यूरोपियन चैंपियनशिप में भी नहीं खेल पाए। बैडमिंटन कोर्ट से दूर रहने के कारण उन्होंने अपने कुल 77,130 अंकों में से 1,660 अंक गंवा दिए जिससे उनके अंक 75,470 हो गए जबकि श्रीकांत ने कुल 76,895 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल कर लिया। पिछले साल इंडोनेशिया , ऑस्ट्रेलिया , डेनमार्क और फ्रांस में एक के बाद एक चार खिताब जीतकर रैंकिंग में इतने ऊपर आए। उन्होंने मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में मलेशिया के महान बैडमिंटन खिलाड़ी ली चोंग वेई को सीधे गेम में हराकर भारत को मिश्रित टीम का स्वर्ण पदक भी दिलाया। इस 25 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा , ‘‘ यह एक शानदार साल रहा लेकिन मेरे और भी कई लक्ष्य हैं एवं इस समय मेरा ध्यान बड़ी प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने तथा और उपलब्धियां हासिल करने पर है। राष्ट्रमंडल खेल चल रहे हैं और इस साल एशियाई खेल भी हैं। ’2014 में बैडमिंटन के महानतम खिलाड़ी लिन डैन को हराकर चाइना ओपन का खिताब जीतने वाले श्रीकांत ने कहा , ‘‘ मेरा लक्ष्य दो साल के बाद तोक्यो ओलंपिक में देश के लिए गौरव हासिल करना भी है। मैं मुझमें विश्वास करने के लिए सबका आभार जताता हूं और उम्मीद करता हूं कि और भी भारतीय उत्कृष्टता की तरफ बढ़ने की अपनी कोशिश जारी रखेंगे। भारतीय बैडमिंटन संघ ( बीएआई ) के अध्यक्ष हेमंत विश्व सरमा ने श्रीकांत की तारीफ करते हुए कहा ‘‘ यह भारतीय बैडमिंटन के लिए शानदार है और मेरा मानना है कि श्रीकांत की बेहतरीन उपलब्धि से दूसरे खिलाड़ी अच्छे प्रदर्शन और रैंकिंग में ऊपर जाने का लक्ष्य बनाने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा , ‘‘ मैं उन्हें बधाई देना चाहूंगा और विश्वास करता हूं कि वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। ’दूसरे भारतीयों में ओलंपिक रजत पदक विजेता पी वी सिंधु इस समय तीसरे स्थान पर जबकि साइना नेहवाल 12 वें स्थान पर हैं। वहीं एच एस प्रणय एक पायदान का सुधार करते हुए 11 वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

गलती हो तो कह दीजिए…आई एम सॉरी

प्यार में तकरार आम बात है। कभी यह नोंक-झोंक आसानी से टल से जाती है तो कभी साथी थोड़ा ज्यादा नाराज हो जाता है। ऐसे में सामने वाले को समझदारी के साथ बात को संभालने की जरूरत होती है और गलती होने पर माफी माँग लेने में कोई बुराई नहीं है। अगर आप नहीं जानते कि अपने साथी से माफी कैसे माँगी जाए तो जरा यहाँ ध्यान दें –
झगड़े की कोई एक वजह नहीं होती यह किसी भी बात पर हो सकता है। ऐसे में अपने पार्टनर से अपनी तरफ से उस बात को फिर ना छेड़ने की जिम्मेदारी लें और सॉरी कहें। इससे बात भी संभल जाएगी और साथी की नाराजगी भी खत्म हो जाएगी।
अगर आप सोच रहे हों कि सभी बातें करने के बाद आखिर में माफी मांगे तो ऐसा ना करें। जितनी जल्दी और सीधे तौर पर पार्टनर से माफी मांगेगे उतना ही बेहतर होगा। ऐसा करने से दोनों के बीच का विवाद और खराब होने के बजाय सही वक्त पर सुलझ सकेगा।
सिर्फ सॉरी बोलने के बजाय जरूरी है पार्टनर से बात की जाए ताकि झगड़ा पूरी तरह से खत्म हो सके। इससे सबसे बड़ा फायदा होगा कि आप दोनों को एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और आगे से ऐसे झगड़े होने के खतरे कम हो जाएंगे।
इसका मतलब है जब तक आप सच में गलती महसूस ना करें तब तक पार्टनर से माफी न माँगें। अगर आप ऐसा करेंगे तो जल्द ही फिर झगड़ा होने का खतरा बना रहेगा। इसी के साथ ही आपके साथी को ये सॉरी बहुत बचकाना हरकत लगेगी, जिससे आपका इंप्रेशन और खराब होगा।
आपको जब भी लगे कि हर बार झगड़ा और माफी माँगने के बावजूद कहीं कुछ ना कुछ गलत हो रहा है तो वक्त निकाल कर बात करें। इससे आप दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े खत्म होंगे।

आप कैसे मनाते हैं अपने रूठे दोस्तों, परिजनों और साथियों को, हमें बताएँ
(साभार)

केरल में महिलाओं के लिए होगा ‘‘शी कोरिडोर’’

तिरूवनंतपुरम : केरल में एक नगर निकाय सिर्फ महिलाओं के लिए एक ऐसा गलियारा बनाने पर काम रहा है जहां महिला शौचालय , नैपकिन वेंडिंग मशीन , सीसीटीवी कैमरे और दीवारों पर महिलाओं की कामयाबी की गाथा बयां करने वाले चित्र लगे होंगे। अगर सबकुछ योजना के मुताबिक हुआ तो तिरूवनंतपुरम में जल्द ही एक ऐसा मार्ग तैयार होगा जहां महिलाएं सुरक्षित अनुभव कर सकती हैं। नगर निगम गवर्मेंट वूमन्स कॉलेज जंक्शन से यहां वज़हुथाकॉड के बीच सरकारी कोटनहिल गर्ल्स हायर सकेंडरी स्कूल तक ‘ शी कॉरिडोर ’ स्थापित करने की तैयारी कर रही है।
वूमन्स कॉलेज और कोटनहिल स्कूल शहर के बीचों बीच स्थित लड़कियों के प्रतिष्ठित संस्थान हैं। महिलाओं को खास सुविधाओं की पेशकश करने के अलावा इसका मकसद सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा को भी रेखांकित करना है। उपमहापौर राखी रविकुमार ने बताया कि पहल का मकसद यहां महिला निवासियों के मन में सुरक्षा की भावना को बिठाना है।
राखी ने कहा कि इस परियोजना का मकसद राज्य की राजधानी को आदर्श महिला सुविधा अनुकूल शहर में तब्दील करना और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देना है। महिलाओं को हमारे शहरों में स्वतंत्र और सुरक्षित महसूस करना चाहिए। उन्होंने बताया कि गलियारे में सड़क के दोनों ओर महिलाओं के बैठने की सुविधा होगी और इस पूरे मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों की नजर होगी। इस मार्ग पर एफएम रेडियो , महिला शौचालय और नेपकिन वेंडिंग मशीनें भी होंगी। राखी ने बताया कि इस परियोजना के लिए दो करोड़ रुपये निश्चित किए गए हैं।

सेक्स वर्कर्स को भी मिलेगी शिक्षा, दिल्ली पुलिस ने उठाया जिम्मा

नई दिल्ली: सेक्स वर्कर्स के लिए एक अच्छी खबर आई है। सरकार की तरफ से उन्हें शिक्षित करने के लिए परियोजना तैयार की गई है। इसके तहत दिल्ली पुलिस द्वारा रेड-लाईट एरिया और जीबी रोड से छुड़ाई गई सेक्स वर्कर को पढ़ाया जाएगा।   13 महिलाओं को दिल्ली पुलिस की विशेष संस्था स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रन द्वारा दिल्ली के बदनाम रेड-लाईट एरिया, जीबी रोड से मुक्त कराया गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत एक विशेष परियोजना में इन लड़कियों को एक महीने के लिए अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण दिया गया।
दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता में वंचित लड़कियों को सहयोग एवं कौशल प्रशिक्षण देना और उन्हें आजीविका के व्यावहारिक साधन उपलब्ध कराना इस विशेष परियोजना का उद्देश्य है।
स्पेशल प्रोजेक्ट के बारे में कौशल मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं सीवीओ राजेश अग्रवाल ने कहा, “सेक्स वर्कर्स का शोषण दयनीय स्थिति में है. इन्हें अपने काम के चलते भेदभाव के नजरिए से देखा जाता है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत इन लड़कियों को कौशल प्रदान करने और उन्हें बेहतर आजीविका उपलब्ध कराना इस परियोजना का मकसद है ताकि वे बेहतर और गरिमामय जीवन जी सकें।”
अग्रवाल ने कहा, “दिल्ली पुलिस के साथ हमारे संयुक्त प्रयासों के माध्यम से हम सेक्स वर्कर्स को सुरक्षा प्रदान कर उन्हें आजीविका के गरिमामय साधन देना चाहते हैं।”
जुवेनाईल जस्टिस कमेटी की चेयरमैन न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता ने कहा, “मानव तस्करी एक गंभीर मुद्दा है। हमारा मानना है कि राष्ट्रीय कौशल विकास योजना की यह विशेष परियोजना अन्य पीड़ितों को भी आगे आने के लिए प्रोत्साहित करेगी और उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर तलाशने में मदद करेगी. इस परियोजना के माध्यम से हम इन लड़कियों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकेंगे।

65वें राष्ट्रीय पुरस्कार : विनोद खन्ना को दादा साहब फाल्के पुरस्कार, श्रीदेवी बनीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री,

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय फिल्मों के निर्णायक मंडल ने अभिनेता विनोद खन्ना को दादा साहेब फाल्के और अभिनेत्री श्रीदेवी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार देने की घोषणा की। दोनों ही कलाकारों को यह पुरस्कार मरणोपरांत दिया जाएगा। निर्णायक मंडल के प्रमुख शेखर कपूर ने बताया कि असमी फिल्म ‘ विजय रॉकस्टार्स ’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और मलयाली फिल्म ‘ भयानकम ’ के लिए जयराज को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया जाएगा। बंगाली फिल्म ‘ नगर कीर्तन ’ में शानदार अभिनय के लिए रिद्धी सेन ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अपने नाम किया है। ‘ न्यूटन ’ को साल के सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फिल्म के लिए चुना गया है। वहीं एस एस राजमौली की ‘ बाहुबली : द कनक्लुजन ’ को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का पुरस्कार दिया जाएगा। खन्ना का पिछले साल 27 अप्रैल को 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। वहीं इस साल 25 फरवरी को श्रीदेवी (54) के निधन से पूरे देश सकते में आ गया था।

65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की ये रही पूरी लिस्ट

बेस्ट एक्टर – ऋद्धि सेन (नगर कीर्तन)
बेस्ट एक्ट्रेस – श्रीदेवी (मॉम)
बेस्ट फिल्म – विलेज रॉकस्टार्स (असमिया भाषा)
दादा साहेब फाल्के – विनोद खन्ना
इंटरटेनर फिल्म ऑफ द ईयर – बाहुबली (द कन्क्लूजन)
बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस – दिव्या दत्ता (इरादा)
बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर – फहाद फाजिल (तोंडीमुथलम दृक्शयम)
बेस्ट डायरेक्टर – जयराज
बेस्ट हिंदी फिल्म – न्यूटन
बेस्ट तेलगु फिल्म – गाजी
बेस्ट लद्दाखी फिल्म – वॉकिंग विद द विंड
बेस्ट तमिल फिल्म – टू लेट
बेस्ट बंगाली फिल्म – मयूरक्षी
बेस्ट कन्नड़ फिल्म – हेब्बत रामाक्का
बेस्ट मलयालम फिल्म – थोंडीमुथलम दृक्शियम
बेस्ट उड़िया फिल्म – हेलो आर्सी
बेस्ट मराठी फिल्म – कच्चा लिंबू
बेस्ट गुजराती फिल्म – दह..
बेस्ट असम फिल्म – इशू
बेस्ट एक्शन डायरेक्शन अवार्ड – अब्बास अली मोगुल (बाहुबली- द कन्क्लूजन)
बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर – ए आर रहमान (‘कात्रु वेलियिदाई’ के लिए)
बेस्ट लिरिक्स – जे एम प्रहलाद
बेस्ट कोरियोग्राफर – गणेश आचार्य (‘गोरी तू लठ्ठ मार…’ गाने के लिए)
बेस्ट जूरी अवार्ड – नगर कीर्तन
बेस्ट मेक-अप आर्टिस्ट – राम रज्जक (नगर कीर्तन)
बेस्ट प्रोडक्शन डिजाइन – संतोष रमन (टेक ऑफ)
बेस्ट स्क्रीन प्ले –
* स्क्रीनप्ले राइटर (ओरिजनल) – संजीव पजहूर (तोंडीमुथलम दृक्शयम)
* स्क्रीनप्ले राइटर (एडाप्टेड) – जयराज (भयानकम)
* डायलॉग्स – संबित मोहंते (हेलो अर्सी)
बेस्ट सिनेमेटोग्राफी – ‘भयानकम’
बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर – शशा तिरुपति (‘कात्रु वेलियिदाई’ गाने के लिए)
बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट – बनिता दास (विलेज रॉकस्टार्स)

छत्तीसगढ़ में 27 साल बाद सुलझा राम मंदिर विवाद

नई द‍िल्‍ली : देश में अयोध्या के राम मंदिर का मुद्दा तो अब तक अनसुलझा है, लेकिन छत्तीसगढ़ में एक राम मंदिर का विवाद अब 27 साल बाद सुलझा गया है। इसके लिए ग्रामीणों ने 27 साल तक कड़ी मेहनत की. इस बीच निर्माण समिति के संरक्षक, महासचिव सहित करीब 10 सदस्य दिवंगत हो गए।
सोमवार को मंदिर निर्माण समिति के सचिव राजेंद्र निगम ने खास बातचीत में कहा कि ग्राम नर्रा के ग्रामवासियों ने राम-जानकी मंदिर का निर्माण 1991 में शुरू किया था, लेकिन नायब तहसीलदार बाहबाहरा ने 12 सितंबर 1991 को मंदिर निर्माण पर रोक लगावा दी, जिसके विरोध में ग्रामवासियों ने श्रीराम-जानकी मंदिर समिति नर्रा का गठन किया।

निगम ने कहा कि इन्हीं विवादों के बीच बागबाहरा विकासखंड के बीजेपी मंडल अध्यक्ष शांति शुक्ला, गिरधर सारडा और अनिल कालिया ने देवउठनी एकादशी के दिन मंदिर स्थल में यज्ञ कर संकल्प लिया कि मंदिर निर्माण के गतिरोध दूर करने हर संभव प्रयास और आंदोलन करेंगे. रायपुर जिले के तात्कालीन प्रभारी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने मंदिर भूमि के व्यवस्थापन की अनुशंसा की और संरक्षक डॉ. रमेश अग्रवाल, महामंत्री हरिशंकर निगम के हस्ताक्षर युक्त आवेदन को अग्रेसित किया।
परिणामस्वरूप कलेक्टर रायपुर ने भूमि आबंटित करने का आदेश दिया। अपर कलेक्टर रायपुर के आदेश राजस्व मामला क्रमांक 54/अ59 वर्ष 1992-93 के अनुसार 8 हजार एक सौ वर्गफूट भूमि खसरा नंबर 797/1 (क) का टुकड़ा 797/1 (ख) आबंटित कर श्रीराम-जानकी मंदिर समिति को प्रदान किया।

पूर्व-पश्चिम दिशा में 100 फुट लंबा और उत्तर-दक्षिण दिशा में 81 फुट चौड़ी भूमि व्यवस्थापन में दिया गया। निगम ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद गांव के कुछ नागरिकों ने मंदिर निर्माण में बाधा पहंचायी, जिसके कारण ग्रामीणों ने सहयोग करने से इंकार कर दिया था, जिसे अब जाकर सहयोग लेकर निर्माण पूर्ण कराया गया।
भूमि प्रदान करने की कार्रवाई के तहत हल्का नंबर 112/59 में तत्संबंधी अभिलेख नायब तहसीलदार बागबाहरा भीखम चंद्र साहू से रिकॉर्ड दुरुस्त किया गया। 25 मई 1993 को संबंधित पटवारी हल्का नंबर 112/59 के पटवारी रसिक कुमार राणा ने आबंटित भूमि नापकर मंदिर समिति को कब्जा दिया। मंदिर समिति के अध्यक्ष और महासचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से कब्जा लेकर औपचारिकता पूरी की।
विवाद के बाद अब जाकर मंदिर निर्माण पूर्ण हुआ है और राम, लक्ष्मण, जानकी की 6 फुट की विशाल मूर्ति और हनुमान की लगभग 3 फुट मूर्ति की स्थापना मंगलवार को विधिवत आध्यात्मिक परंपरा के अनुसार की जाएगी।

पंडित राजेंद्र शर्मा नंदनी नगर अछोटी (दुर्ग) मंदिर में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा करेंगे। ग्राम नर्रा में इस अवसर पर 8 से 15 अप्रैल तक देवी भागवत किया जा रहा है और प्रात: 9 बजे प्रतिदिन यज्ञ होता है. मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में प्रमुख यजमान सोहन लाल पटेल-फूलेश्वरी पटेल, नवीन पटेल-दुर्गा पटेल होंगे।
विधायक खल्लारी संरक्षक डॉ. रमेश अग्रवाल, अध्यक्ष महेंद्र कुमार दिवाकर, उपाध्यक्ष अशोक जैन, महामंत्री हरिशंकर निगम, कोषाध्यक्ष सोहनलाल पटेल, सचिव राजेंद्र निगम, कार्यकारिणी सदस्य किसान सिंह दीवान, धनऊराम निषाद, कृष्ण कुमार निगम, मोतीराम पटेल, मांगीलाल पटेल, गोविंदलाल नागपुरे बिंद्रावन, शंभु ब्यौहार, लाल खान, रज्जाक खान, पीली बाई दीवान, शांति देवी निगम और 8 अन्य सदस्यों की समिति बनाई गई, जिन्होंने रोक के विरुद्ध जनांदोलन चलाया था।

पुरुषों को भी होती है रजोनिवृति और ये इसके लक्षण, कारण व उपचार 

रजोनिवृत्ति को हमेशा महिलाओं में उम्र के साथ आने वाले हार्मोन संबंधी बदलावों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ऐसा पुरुषों में भी हो सकता है। यह समस्या तब होती है, जब पुरुषों के अंडकोष से टेस्टोस्टेरोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं होता। दरअसल टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों के विकास में अहम भूमिका अदा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब हार्मोन का स्तर कम हो जाता है तो पुरुषों में मानसिक और शारीरिक बदलाव आते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में एंड्रोपॉज या रजोनिवृत्तिकी शुरुआत हो जाती है। टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में हर साल 2 से 3 प्रतिशत की कमी आती है। और 49 साल की उम्र तक टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बहुत कम हो जाता है। पुरुषों में रजोनिवृत्ति के लक्षण थकान, मिजाज में बदलाव, बाल झड़ना, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का कम होना और वजन बढ़ जाना आदि हो सकते है। आइए जानें इसके लक्षणों के बारे में।
पुरुष रजोनिवृति के लक्षण – युवावस्था में तेज रफ्तार गड़ियां, तीखा-सनसनाता संगीत, तेज गति की जीवन-शैली और संघर्ष करने की प्रवृत्ति ज्यादा नजर आती है, लेकिन पुरुष की रजोनिवृति होने पर वह इन सबसे दूर होने लगता है। पुरुष की रजोनिवृति के साथ ही स्वभाव की उग्रता, गुस्सा और तीखापन कम होता जाता है मगर चिड़चिड़ाहट बढ़ जाती है। खतरों की तुलना में सुरक्षा को ज्यादा तवज्जो दी जाने लगती है। याद्दाश्त कम होती है और भावुकता बढ़ने लगती है। पुरुष अपनी युवावस्था में कभी भी इतना कोमल, इतना भावुक नहीं रहता है, जितना की रजोनिवृति में होने लगता है। इस दौरान पुरुषों में सेक्सुड़अल डिजायर बढ़ जाती है। वे सेक्स के बारे में ज्यादा सोचने लगते हैं। उन्हें लगता है कि वे एक बार फिर पहले से ज्यादा रोमांटिक हो गए है। यह वही दौर है जब ज्यादातर पुरुष शादीशुदा होते हुए भी दूसरी महिलाओं से संबंध बनाने के लिए प्रेरित होते हैं। महिलाओं की तरह इनमें शारीरिक बदलाव नहीं होते लेकिन डिप्रेशन, थकान, मिजाज में बदलाव, ध्यान केंद्रित न कर पाना और वजन बढ़ना जैसे लक्षण पाए जाते हैं।
पुरुष रजोनिवृति पर शोध  – कुछ पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ-साथ चिड़चिड़ापन, और झल्लाहट अधिक बढ़ती जैती है। इसकी एक वजह पुरुष रजोनिवृत्ति भी हो सकती है। कुछ अनुसंधानों से पता चला है कि लगभग एक तिहाई पुरुष इस स्थिति का सामना करते हैं। कुछ वर्ष पूर्व स्विडेन के कुछ शोधकर्ताओं ने एक शोध में पाया कि पचपन वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में पसीना आने या गर्मी महसूस करने के लक्षण होना एक आम बात है। लिंकोपिंग विश्विद्यालय के वैज्ञानिकों के इस दल का यह भी बताया था कि सीजीआरपी के नाम से जाना जाने वाला प्रोटीन पुरुषों और महिलाओं दोनों में इस प्रकार के लक्षणों का कारण हो सकता है। दरअसल इस प्रोटीन की मौजूदगी से रक्त कोशिकाएं फैल जाती हैं जिससे पसीना अदिक आता है। लेकिन इसी दौरान कुछ सेक्स हार्मोनों में कमी भी आती है। वैज्ञानिकों का कहना था कि यदि इस प्रोटीन के स्तर पर नियंत्रण कर लिया जाए तो रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाली तमाम परेशानियों से बचा जा सकता है। इस शोध में पचपन वर्ष से अधिक आयु के 1800 से अधिक पुरुषों से बातचीत कर उनसे पूछा गया कि क्या उनमें वे मेनोपॉज़ के दौरान पाए जाने वाले लक्षण हैं। उन्होंने पाया कि जिन पुरुष में सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन की कमी पाई गई यह लक्षण उनमें अधिक थे। उनकी मांसपेशियां कमजोर पड़ गई थीं, उन्हें कम भूख लगती थी और वे थकान का अनुभव करते थे।
पुरुष रजोनिवृत्ति की पहचान – पुरुष रजोनिवृत्ति की पहचान करने के लिए डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करता है व लक्षणों के बारे में पूछता है। वह कुछ अन्य नैदानिक ​​परीक्षण कराने के लिए भी कह सकता है जो इसका कारण हो सकती हैं। इसके बाद वह कुछ रक्त परिक्षण कराने को भी कह सकता है जो कि टेस्टोस्टेरोन स्तर को मापने में सहायक हो सकते हैं।
पुरुष रजोनिवृत्ति का उपचार – यदि टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होता है तो टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी सेक्स में कमी (कामेच्छा में आई कमी), अवसाद और थकान जैसे लक्षणों से राहत देने में मदद कर सकती है। लेकिन महिलाओं में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की तुलना में टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी संभावित जोखिमों और साइड इफेक्ट वाली होती है। उदाहरण के लिए टेस्टोस्टेरोन बदलने से, प्रोस्टेट कैंसर और खराब हो सकता है। यदि आप या आपका कोई प्रीय एण्ड्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी पर विचार कर रहा है तो इसके बारे में अधिक जानने के लिए पहले चिकित्सक से बात करें।
आपका चिकित्सक आपको जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की सलाह दे सकता है जैसे एक नया आहार या व्यायाम कार्यक्रम, या पुरुष रजोनिवृत्ति के लक्षणों में से कुछ को कम करने के लिए अन्य अवसादरोधी दवाएं आदि।
यूं तो यह एक स्वभाविक प्रक्रिया है लेकिन इस समस्या के साइड इफेक्टज से बचने के लिए पुरुषों को एक्स्रसाइज करना चाहिए क्योंकि टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के कम होने से मांसपेशियां और हड्डियाँ प्रभावित होती हैं तथा टाइप टू डायबिटिज होने की आशंका बढ़ जाती है।
(साभार ओन्‍ली माई हैल्‍थ डॉट कॉम)

पोस्ट ऑफिस में हैं ये विश्वसनीय 9 बचत-निवेश योजनाएं

नई दिल्ली: देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ निजी क्षेत्रों के बैंक तमाम बचत योजनाओं के साथ ग्राहकों को लुभावने ऑफर देते रहते हैं लेकिन इस सबके बावजूद देखा जाता है कि पोस्ट ऑफिस या कहें के डाकघर से जुड़ी बचत योजनाओं को सरकार का समर्थन प्राप्त रहता है और इस कारण इनका कोई मेल नहीं मिलता। वैसे भी अब बैंक कस्बों तक अपनी पहुंच बनाने में कामयाब हुए हैं जबकि डाकघर से जुड़ी सुविधाओं डाकिए के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचती रही है। लोगों का विश्वास हमेशा से इस पर बना रहा है और पीपीएफ से लेकर तमाम अन्य सरकारी योजनाओं में लोग निवेश करते हैं लाभ उठाते हैं।
डाकघर बचत योजनाएं (Post Office Saving Schemes) यानी पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम में युवाओं से लेकर बुजुर्ग का विश्वास बना हुआ है। बढ़िया रिटर्न और सुरक्षा के मामले में इनके सामने कोई नहीं टिकता है। इसके पीछे कई कारण हैं।
सबसे अहम कारण इन योजनाओं के पीछे केंद्र सरकार का हाथ होना यानि यहां से जो योजनाओं लोगों तक पहुंचती हैं उसकी गारंटी केंद्र सरकार की होती है।
डाकघर की लगभग सभी योजनाएं, चाहे वह सामान्य बचत खाता हो, या आरडी अकाउंट या एफडी अकाउंट, सभी में बेहतर ब्याज मिलता है।। अकसर देखा गया है कि रिटायरमेंट के साथ ही कई कर्मचारी यहां पर अपना पैसा जमा कराते हैं ताकि बाकी की उम्र ब्याज से रही आय से काट सकें।
डाकघर की कई योजनाओं में जमा रकम और ब्याज पर सरकार टैक्स नहीं लगाती है। यह भी लोगों के इस ओर आकर्षित होने का एक महत्वपूर्ण कारण है। कुछ योजनाओं में टैक्स में छूट भी मिलती है. बता दें कि कुछ योजनाओं में आंशिक रूप से तो कुछ योजनाओं में मैच्योरिटी और ब्याज पर टैक्स नहीं लगता।
मेहनत से कमाए धन को लेकर लोग काफी सजग रहते हैं. बाजार में तमाम जोखिम भरे निवेशों को देखा जाए तो लोग हमेशा सुनिश्चित आए और सुरक्षित निवेश की ओर ज्यादा झुकते हैं। यह तो सर्वविदित है कि पोस्ट ऑफिस विभाग केंद्र सरकार के अधीन है। इसमें जमा रकम की सुरक्षित है क्योंकि केंद्र इसके लिए गारंटी देती है. यह तो तय है कि लोगों का पैसा यहां डूबता नहीं है।
अकसर देखा गया है कि अच्छी आय वाले लोगों को लुभाने में निजी क्षेत्र काफी अग्रणी भूमिका निभाता जबकि कम आय वाले लोगों को अच्छे निवेश के अवसर उपलब्ध कम ही होते हैं। ऐसे में सरकार का काम होता है कि वह जनहितकारी योजनाएं लाएं। सरकार के पास पोस्ट ऑफिसों जैसी ताकत हैं जिसकी पहुंच लगभग देश के हर गांव में है. इसलिए सरकार कम आय वाले लोगों के लिए भी बचत और निवेश की योजनाओं का लाभ लेकर आती है।
ऑफिस की बचत योजनाएं (Post Office Savings Schemes) – जानकारी के अनुसार पोस्ट ऑफिस निम्नलिखित 9 बचत योजनाएं चला रहा है-
राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र (National Savings Certificates (NSC)
15 वर्षीय पीपीएफ अकाउंट (15 year Public Provident Fund Account (PPF)
पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना अकाउंट (Post Office Monthly Income Scheme Account (MIS)
5 वर्षीय पोस्ट ऑफिस आरडी अकाउंट (5-Year Post Office Recurring Deposit Account (RD)
पोस्ट ऑफिस एफडी अकाउंट (Post Office Time Deposit Account (TD)
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizen Savings Scheme)(SCSS)
पोस्ट ऑफिस बचत खाता (Post Office Savings Account)
किसान विकास पत्र (Kisan Vikas Patra (KVP)
सुकन्या समृद्धि योजना खाता (Sukanya Samriddhi Accounts)

बचत योजनाओं पर मिल रही ब्याज दर
बचत खातों पर 4 फीसदी सालाना, 6 साल की आरडी पर 6.9 फीसदी सालाना, टीडी अकाउंट पर 1 साल के लिए 6.60%, 2 साल के लिए 6.7%, 3 साल के लिए 6.90%, 5 साल के लिए 7.40% की दर से ब्याज मिलता है।
एमआईएस पर 7.3 फीसदी, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम पर 8.3 फीसदी की दर से, पीपीएफ पर 7.6 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है। एनएससी 7.6 फीसदी देते हैं, सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.1 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है जबकि एसकेवीपी पर 7.3 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है।

यह सिनेमा का अच्छा दौर है : पंकज त्रिपाठी

लखनऊ : फिल्म ‘‘न्यूटन’’ के लिये ​राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजे गये अभिनेता पंकज त्रिपाठी का कहना है कि भारतीय दर्शक अब बदल रहे हैं, उन्हें अच्छी लोकेशन, बड़े सितारे और आलीशान सेट की बजाय सीधी सादी अच्छी कहानी वाली फिल्में पसंद आ रही हैं, अब कहानी ही फिल्म की असली हीरो बन चुकी है और इस लिहाज से यह सिनेमा का अच्छा दौर है, जिसकी वजह से हम जैसे कलाकारों को भी अब इज्जत मिलने लगी है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके में निष्पक्ष चुनाव करवाने के विषय पर आधारित ‘न्यूटन’ में एक असिस्टेंट कमांडेंट का किरदार निभाने वाले पंकज त्रिपाठी का मानना है कि इस फिल्म को ऑस्कर में भेजने के लिए चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि अब हिंदी सिनेमा बदल रहा है।

राष्ट्रीय पुरस्कार :स्पेशल मेंशन: हासिल करने वाले पंकज ‘फुकरे’, ‘मसान’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘ओमकारा’, ‘गुंडे’, ‘निल बटे सन्नाटा’, ‘अनारकली ऑफ आरा’ और ‘मांझी: द माउंटेन मैन’ जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके हैं।

राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से उत्साहित पंकज कहते हैं कि वह आने वाले समय में इसी तरह मेहनत करके अच्छी फिल्मों का हिस्सा बने रहेंगे। हालांकि वह कमर्शियल फिल्में भी करते रहेंगे।

निर्माता निर्देशक अनुभव सिन्हा की फिल्म ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई ​है’ की शूटिंग के सिलसिले में लखनऊ आए पंकज ने ‘‘भाषा’’ से खास बातचीत में कहा, ‘‘ मैं ‘करीब 20 साल से फिल्म इंडस्ट्री से किसी न किसी तौर पर जुड़ा हूं मुझे इस बात की खुशी है कि मुझे न्यूटन जैसी फिल्म के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, जिसे नये लोगों की टीम के साथ बनाया गया था और किसी को ख्वाबो ख्याल में भी गुमान नहीं था कि यह फिल्म आस्कर के लिये भी भारत की प्रविष्ठि के तौर पर चुनी जाएगी। हालांकि राष्ट्रीय सम्मान पाने की खुशी दुनिया के हर पुरस्कार से बड़ी है । ‘ बिहार के गोपाल गंज के एक छोटे से गांव के रहने वाले पंकज त्रिपाठी पूरी तरह से मिट्टी से जुड़े अभिनेता हैं। उनके घर में आज भी चूल्हे पर खाना बनता है। उन्होंने आज के इस मुकाम पर पहुंचने के लिये काफी संघर्ष किया है । अभिनेता बनने की चाह लेकर वह बिहार से दिल्ली आये और 2001 में नेशनल स्कूल आफ ड्रामा में दाखिला लिया। इस दौरान वह थियेटर आदि से जुड़ रहे और 2004 में मुंबई गये ।

उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से गर्व के साथ ही अपने देश के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी भी बढ़ गयी है । अब फिल्मों का चयन करते समय अच्छी भूमिकाओं और मनोरंजन के साथ ही इस बात का भी ध्यान रखूंगा कि उसमें कोई सामाजिक संदेश भी हो।’’

लखनऊ को अपने लिए भाग्यशाली बताते हुए अभिनेता ने कहा कि पिछले साल उनकी दो हिट फिल्मों ‘बरेली की बर्फी’ और ‘निल बटे सन्नाटा’ की शूटिंग उत्तर प्रदेश में हुई थी और अब जब वह लखनऊ में अपनी अगली फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं तो उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिल गया ।

अपनी आने वाली फिल्मों के बारे में त्रिपाठी ने बताया कि ‘‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है’ के अलावा दक्षिण के मशहूर अभिनेता रजनीकांत के साथ ‘काला’ और करन जौहर के साथ फिल्म ‘ड्राइव’ कर रहे हैं ।

डिजिटल बदलाव से 2021 तक देश की जीडीपी में 154 अरब डॉलर जुड़ेंगे : माइक्रोसॉफ्ट

नयी दिल्ली : देश में आ रहे डिजिटल बदलावों से भारत के सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी ) में 2021 तक 154 अरब डॉलर जुड़ेंगे। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने यह बात कही।
माइक्रोसॉफ्ट और आईडीसी की रपट ‘ एशिया प्रशांत में डिजिटल बदलाव के आर्थिक प्रभाव को खोलना ’ में कहा गया है कि एशिया प्रशांत की अर्थव्यवस्थाओं में डिजिटल बदलावों में तेजी आई है।
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के अध्यक्ष अनंत माहेश्वरी ने कहा , ‘‘2017 में भारत में करीब चार प्रतिशत जीडीपी डिजिटल उत्पादों और सेवाओं के जरिये आई। इन उत्पादों व सेवाओं का सृजन डिजिटल प्रौद्योगिकियों मसलन मोबिलिटी , क्लाउड , इंटरनेट आफ थिंग्स ( आईओटी ) और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस ( एआई ) के जरिये हुआ।’’
उन्होंने कहा कि अनुमान है कि अगले चार साल में देश के करीब 60 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद का डिजिटल बदलावों के रुख से मजबूत जुड़ाव होगा।
माहेश्वरी ने कहा कि भारत में डिजिटल बदलाव काफी तेजी से आ रहे हैं। संगठन लगातार एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां लगा रहे हैं। इससे डिजिटल बदलाव आधारित वृद्धि और तेजी होगी। यह अध्ययन 15 अर्थव्यवस्थाओं के मध्यम और बड़े आकार के संगठनों के 1,560 लोगों के विचारों के आधार पर तैयार किया गया है।