Monday, April 6, 2026
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पद्म पुरस्कार : मंत्री हो या राज्यपाल, किसी की सिफारिश नहीं चली

नयी दिल्ली : आठ राज्य सरकारों, सात राज्यपालों और14 केन्द्रीय मंत्रियों ने पद्म पुरस्कारों के लिए जिन लोगों के नाम की सिफारिश की थी उनमें से किसी को भी इस साल दियेजाने वाले पद्म पुरस्कारों की सूची में स्थान नहीं मिलाहै । पद्म पुरस्कार20 मार्च और दो अप्रैल को प्रदान किये जाएंगे।

गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक साल2018 के पद्म पुरस्कारों के लिये राज्य सरकारों, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, केन्द्रीय मंत्रियों, केन्द्रीय राज्य मंत्रियों, पद्म पुरस्कार से सम्मानित हस्तियों, अन्य व्यक्तियों तथा संगठनों की ओर से कुल35,595 लोगों के नाम की सिफारिश की गई थी। पुरस्कारों की घोषणा25 जनवरी को की गई थी।

जिन नामों की सिफारिश की गई उनमें से केवल 84 प्रमुख व्यक्तियों को इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान के लिये चुना गया। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अंतिम सूची में स्थान हासिल करने वाले अधिकांश व्यक्तियों का चयन दस सदस्यीय चयन समिति द्वारा किया गया। चयन समिति ने ऐसे‘‘ गुमनाम नायकों’’ को चुना जिन्होंने अपना सारा जीवन गरीब लोगों के लिये काम करने में बिता दिया अथवा वंचित समुदाय की पृष्ठभूमि से संबंधित होने के बावजूद उन्होंने अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की।

चयन समिति ने हालांकि तमिलनाडु, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान और दिल्ली की संस्तुतियों को अस्वीकार कर दिया। तमिलनाडु ने पद्म पुरस्कारों के लिये छह नामों की सिफारिश की थी, जबकि हरियाणा ने पांच नामों की, जम्मू कश्मीर ने नौ, कर्नाटक ने44, उत्तराखंड ने15, बिहार ने चार, राजस्थान ने चार और दिल्ली ने कुल सात नामों की सिफारिश की थी।

सात राज्यों के राज्यपालों में से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने11 संस्तुतियां, हरियाणा के कप्तान सिंह सोलंकी ने सात संस्तुतियां, जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा ने चार संस्तुतियां, उत्तर प्रदेश के राम नाईक ने10 संस्तुतियां, गुजरात के ओ पी कोहली ने दो, केरल के पी सदाशिवम ने दो, पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी की एक संस्तुति को पद्म पुरस्कारों की सूची में स्थान नहीं मिला।

प्रेस ट्रस्ट की ओर से गृह मंत्रालय के दस्तावेजों की पड़ताल के मुताबिक इसी प्रकार सात केन्द्रीय मंत्रियों अरुण जेटली की एक संस्तुति, मेनका गांधी की ओर से चार संस्तुतियां, प्रकाश जावेडकर की छह, राम विलास पासवान की चार, सुरेश प्रभु की12, थावर चंद गहलोत के16 नामों की संस्तुतियों को भी इस साल के पद्म पुरस्कारों की सूची में समाहित नहीं किया गया।

केवल जनजातीय मामलों के मंत्री जुआल ओराम की कुल दस संस्तुतियों में से एक नाम की सिफारिश को चयन समिति ने पद्म पुरस्कार के लिये स्वीकार किया। इसी प्रकार चयन समिति ने आठ केन्द्रीय राज्य मंत्रियों अर्जुन राम मेघवाल( चार संस्तुतियां), अश्विनी कुमार चौबे( दो संस्तुति), सी आर चौधरी( तीन), गिरिराज सिंह( दो संस्तुति) , महेश शर्मा( आठ संस्तुतियां) , मुख्तार अब्बास नकवी( दो संस्तुतियां) और राम कृपाल यादव( चार संस्तुतियां) में से किसी नाम को इस साल के पुरस्कारों के लिये चयनित नहीं किया।

रिटायर होने के बाद सुधरती है पुरुषों की सेहत

पेरिस :  सेवानिवृत्ति को कुछ लोग जीवन में आए ठहराव के तौर पर देखते हैं, मगर एक शोध में रिटायरमेंट को पुरुषों की सेहत के लिए अच्छा बताया गया है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि इससे महिलाओं की सेहत पर कोई खास असर नहीं पड़ता है, क्योंकि वे यूं भी सेहतमंद तरीके से जीती हैं।

पेरिस-सोर्बोन यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद महिलाओं की सेहत खास प्रभावित नहीं होती है। प्रोफेसर क्लॉडिया सेनिक ने कहा कि बहुत लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट के बाद उनकी सेहत में गिरावट आ जाएगी।

आईजेडए इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स द्वारा प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि रिटायरमेंट के बाद संज्ञानात्म शक्ति में गिरावट आने लगती है। इसके अलावा किसी भी शख्स की भागदौड़ कम होने से उसे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। प्रोफेसर सेनिक ने कहा कि जो रिटायरमेंट के बाद भी काम करते रहे, उनकी सेहत अपने हमउम्र लोगों से बेहतर थी।

इस अध्ययन के लिए 50 से 75 साल के महिलाओं और पुरुषों के आंकड़ों का 14 साल तक अध्ययन किया। हर वर्ष इन लोगों ने आठ पैमानों पर अपनी सेहत की जानकारी अध्ययनकर्ता टीम के साथ साझा की। शोधकर्ताओं का कहना था कि महिलाएं अपनी सेहत के संदर्भ में सही फैसले लेने में पुरुषों के मुकाबले अधिक समर्थ थीं।
 

घर से शुरू कीजिए अपना काम और कीजिए कमाई

आजकल नौकरी मिलना आसान नहीं है। डिग्रियाँ धरी की धरी रह रही हैं और जरूरतें बढ़ रही हैं। दरअसल, काम करना पैसे कमाने के लिए ही नहीं बल्कि अपनी पहचान और विश्वास को नया मुकाम देने के लिए भी जरूरी है। लड़कियों के मामले में अक्सर यह होता है कि शादी और बच्चों के बाद उनके लिए वक्त निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है। आमतौर पर लड़कियों में शादी के पहले हुनर सीखने की चाहत होती है मगर आपका यही गुण और हुनर आपके काम आ सकता है। कोई जरूरी नहीं है कि काम करने के लिए आपको 10 से 5 की नौकरी ही करनी होगी। आप अपनी सुविधा के अनुसार ही अपना काम शुरू कर सकती हैं और कमा भी सकती हैं और इनको शुरू करने के लिए भारी – भरकम निवेश की भी जरूरत नहीं है –

ऑनलाइन बेचें घरेलू प्रोडक्ट-  अगर आप छोटे शहर में रह रही हैं जहाँ आवागमन की सुविधा नहीं है और आपको ऑनलाइन काम करना आता है तो आप रोजमर्रा की चीजें, फैशन ज्वेलरी से लेकर कॉस्मेटिक्स जैसी बड़ी वैरायटी रख सकती हैं। बाजार से थोड़ा सा किफायती रखेंगी तो बिक्री और बढ़ सकती है। आप त्योहारों को ध्यान में रखकर भी सामान रख सकती हैं। इसके साथ ही आस – पास की महिलाओं या कारीगरों के उत्पाद भी बेच सकती हैं। यदि आपके पास देसी या घर में बना उत्पाद है तो आप उसे ऑनलाइन बेचकर अच्छा पैसा कमा सकती हैं। उदाहरण के लिए नवरात्रि आ रही हैं तो ऐसे गाय के गोबर से बने उपले और मिट्टी के बर्तन ऑनलाइन बेच सकते हैं। इसके अलावा आप घर में बनकर तैयार होने वाली अन्य चीजें भी ऑनलाइन बेच सकते हैं।

ट्ययूशन करें – अगर आपको पढ़ना और पढ़ाना पसंद है तो आपके लिए पार्ट टाइम ट्यूशन देने का काम बढि़या हो सकता है। यह काम आप बिना एक रुपए की लागत के ही शुरू कर सकते हैं। कई युवा ऐसे होते हैं जो पढ़ाना चाहते हैं, प्रतिभाशाली हैं मगर काम नहीं मिलता। आप उनको साथ लेकर काम भी कर सकती हैं और उनकी आर्थिक सहायता भी कर सकती हैं। चाहें तो छोटे बच्चों को सम्भालने के लिए भी युवाओं की मदद ले सकती हैं।

टिफिन सेवा-  आजकल ज्यादातर नौकरी करने वाले लोगों को अच्छा खाना नहीं मिल पाता। सबको तलाश है कि उन्हें घर का बना खाना मिले जो शुद्ध हो और किफायती भी। ऐसे में यदि आप कुछ हजार रुपए इन्वेस्ट कर टिफिन सेवा शुरू कर सकती हैं तो आपके लिए यह बढि़या का हो सकता है। अपने नेटवर्क दायरे के हिसाब से आप में ज्यादा से ज्यादा कमाई कर सकते हैं। यह आप पर है अगर आप अपनी आस – पास की महिलाओं को इस काम में लगायें और डिलिवरी का दायित्व बेरोजगार युवाओं को दें।

टाइपिंग करें – स्कूल में बड़े प्रोजेक्ट मिलते हैं, कॉलेज में प्रोजेक्ट और नोट्स बनाने पड़ते हैं, थिसिस लिखनी पड़ती है और किताबें भी लिखनी पड़ती हैं मगर आज की व्यस्त जिन्दगी में फुरसत नहीं मिलती। यहाँ तक कि प्रोफेसरों को भी इसकी जरूरत पड़ती है। बस यही आपके लिए अवसर है। हिन्दी, अँग्रेजी या क्षेत्रीय भाषा का ज्ञान और टाइपिंग आती है तो आपके लिए यह कमाने का जरिया है। शुल्क प्रति पेज हो सकता है। अगर आपको एक्सेल आता है तो यह आपके लिए दोहरा फायदा होगा।

अनुवादक बनें – यदि आपको हिन्दी के अलावा किसी अन्य भाषा में भी अच्छी पकड़ है तो आप अनुवादक का काम तलाश सकते हैं। घर बैठे पार्ट टाइम अनुवाद करने का काम कर आप हजारों रुपए कमा सकते हैं। चाहें तो खुद की एक अनुवाद एजेंसी भी बना सकते हैं जिसमें अन्य साथियों को जोड़कर  अनुवाद करने का काम शुरू कर सकते हैं।

योग टीचर बनें- यदि आपको योग करना आता है तो आप सुबह-शाम की योग क्लासेस भी चला सकते हैं। अपने काम का ऑनलाइन प्रचार कर आप इसे और ज्यादा भी बढ़ा सकते हैं।

घूमें और लिखें – घूमने और लिखने का शौक है तो यह भी एक जरिया है कमाने का। आजकल जितनी तेजी से पत्रिकाएं और वेबसाइट्स आ रही हैं, लिखने वालों की माँग भी बढ़ रही है। आपका यह हुनर आपको अच्छी कमाई देगा।

विश्व बैंक रिपोर्ट: भारत का जीएसटी दुनिया में सबसे जटिल कर प्रणाली

नयी दिल्ली : विश्व बैंक का कहना है कि भारत की वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली दुनिया की सबसे जटिल कर प्रणालियों में से एक है। इसमें न केवल सबसे उच्च कर दर शामिल है बल्कि इस प्रणाली में सबसे अधिक कर के स्लैब भी हैं। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि भारत उच्च मानक जीएसटी दर मामले में एशिया में पहले और चिली के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर है।

वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “भारतीय जीएसटी प्रणाली में कर की दर दुनिया में सबसे अधिक है। भारत में उच्चतम जीएसटी दर 28 प्रतिशत है। यह 115 देशों में दूसरी सबसे ऊंची दर है, जहां जीएसटी (वैट) प्रणाली लागू है।” भारतीय जीएसटी प्रणाली को जो चीज और जटिल बनाती है वह विभिन्न श्रेणियों की वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होने वाली अलग-अलग जीएसटी दरों की संख्या है।

पाकिस्तान और घाना की श्रेणी में भारत
विश्व बैंक ने बुधवार को इंडिया डेवलपमेंट अपडेट की छमाही रिपोर्ट जारी की थी। इसमें विश्व बैंक ने भारत में लागू जीएसटी को पाकिस्तान और घाना की श्रेणी में रखा है। रिपोर्ट के अनुसार 115 देशों में भारत में टैक्स रेट दूसरा सबसे ऊंचा है। रिपोर्ट में शामिल देशों में भारत की तरह ही अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू है। दुनिया के 49 देशों में जीएसटी के तहत एक और 28 देशों में दो स्लैब हैं। भारत समेत पांच देशों में इसके अंतर्गत पांच स्लैब बनाए गए हैं। भारत के अलावा इनमें इटली, लक्जम्बर्ग, पाकिस्तान और घाना जैसे देश शामिल हैं। भारत को छोड़कर चारों देशों की अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है।

टैक्स रेट कम करने की सलाह
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में टैक्स रेट कम करने के साथ ही कानूनी प्रावधानों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की सलाह दी है। साथ ही विश्व बैंक ने टैक्स रिफंड की धीमी रफ्तार पर भी चिंता जताई है। इसमें इसका असर पूंजी की उपलब्धता पर पड़ने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कर प्रणाली के प्रावधानों को अमल में लाने पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विश्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर भविष्य में स्थिति में सुधार आने की उम्मीद जताई है।

जीएसटी में पांच स्लैब
भारत सरकार द्वारा 1 जुलाई, 2017 को अमल में लाए गए जीएसटी के ढांचे में पांच स्लैब (0, 5, 12, 18 और 28 फीसदी) बनाए गए हैं। सभी वस्तुओं और सेवाओं को इसी दायरे में रखा गया है। सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी के दायरे से बाहर भी रखा है और कुछ पर काफी कम टैक्स लगाए गए हैं। जैसे सोने पर तीन फीसती तो कीमती पत्थरों पर 0.25 फीसदी की दर से कर लगाया गया है। वहीं, शराब, पेट्रोलियम उत्पाद, रीयल एस्टेट पर लगने वाला स्टाम्प ड्यूटी और बिजली बिल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

सरकार का स्लैब घटाने का वादा
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 12 और 18 फीसदी वाले स्लैब को एक करने का वादा किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कर अदा करने में सुधार और राजस्व में वृद्धि के बाद ही यह कदम उठाया जाएगा। पिछले साल नवंबर में जीएसटी काउंसिल की गुवाहाटी बैठक में 28 फीसदी के स्लैब को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया था। पहले इसके दायरे में 228 वस्तुओं एवं सेवाओं को रखा गया था, जिसे 50 तक सीमित कर दिया गया।

रिपोर्ट में कर सुधार प्रस्तावित करने के शुरूआती दिनों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया गया लेकिन यहां कहा गया है कि जीएसटी को लागू करने की प्रक्रिया की शुरुआत समझा जाना चाहिए अंत नहीं।

उन्होंने कहा, “उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया पर सक्रियता दिखाते हुए सरकार कायार्न्वयन चुनौतियों को लेकर बहुत सतर्कता बरत रही है और जीएसटी को अधिक सरल और कुशल बनाने के लिए कदम उठा रही है।”

विश्व बैंक के अनुसार, शुरुआत बाधाओं के बावजूद जीएसटी कर संबंधी अवरोधों से लेकर व्यापार अवरोधों पर दूरगामी प्रभाव डाल रहा है जो इसे लागू करने के प्राथमिक लक्ष्यों में से एक था।

 

 

गणगौर पर लीजिए रंगीले राजस्थान का अनोखा स्वाद का आनंद

राजस्थानी कढ़ी

 

सामग्री : 50 ग्राम बेसन, 250 मिली. छाछ, स्वादानुसार नमक, 1/2 लीटर पानी

कढ़ी में छोंक लगाने के लिए : 1 बड़ा चम्मच तेल (या घी), 1 छोटा चम्मच राई, 20 कढ़ी पत्ते, 1 छोटा चम्मच पिसी हुई लाल मिर्च, 4 साबुत सूखी लाल मिर्च

विधि – सबसे पहले एक भारी पैंदे वाले बर्तन में बेसन और छाछ डालकर अच्छी तरह मथ लीजिये ताकि बेसन के गुठले न रहें। अब इसमें पानी डालकर तेज आँच पर 1 उबाल आने तक लगातार चलाते रहिये। जब कढ़ी में 1 उबाल आ जाये तो इसे मध्यम आँच पर करीब 20 मिनट पकने दीजिये और बीच बीच में चलाते रहिये। इस दौरान इसमें स्वादानुसार नमक भी डाल दीजिये। 20 मिनट में कढ़ी पककर तैयार हो जायेगी. तब इसे छौंकिये। इसके लिए एक पैन में 1 बड़ा चम्मच तेल गर्म कीजिये। इसमें छोंकने की सभी सामग्री डालिये और तुरंत कढ़ी पर छौंक दीजिये। राजस्थान की स्वादिष्ट कढ़ी तैयार है। इसे प्रसिद्ध राजस्थानी व्यंजन चूरमा, दाल, बाटी के साथ गर्मागर्म परोसिये या फिर चावल, खिचड़ी, रोटी और परांठे के साथ परोसिये।

 

मावा कचौड़ी

सामग्री- मैदा – 1 कप घी, 2 टीस्‍पून काजू और बादाम, 2 चम्‍मच, दरदरे पिसे हुए मावा, 1/3 कप छोटी इलायची, 4, दरदरा पिसी पाउडर चीनी, 1/3 कप शक्‍क्‍र,1 कप गार्निश के लिये बादाम, 4 बारीक पतले कटे काजू, 2 छोटे छोटे कटे हुई छोटी इलायची, घी

विधि- सबसे पहले मैदा, घी और पानी की मददे से आटा गूथ लें। आटे को ज्‍यादा नरम ना करें। इसे 20 मिनट के लिये कपड़े से ढांक कर रख दें। भरावन बनाने के लिये मावा को हाथों से मसल कर पैन में डाल कर हल्‍का ब्राउन कर के भूनिये। फिर इसमें पिसा काजू और बादाम मिश्रण डाल कर चलाइये। अब इसे अलग निकाल कर इसे ठंडा हो जाने के बाद इसमें शक्‍कर और आधा इलायची पावडर मिलाइये। कचौड़ी बनाने की विधि – गूथे आटे में से छोटी छोटी लोइयां तोड़ कर उसे बेल कर उसके बीच में 1- 1 1/2 चम्‍मच भरावन रख लीजिये। फिर आटे को चारों ओर से कपड़ कर भरावन को बंद कर दें। अब कचौड़ी को हल्‍के से दोनों हथेलियों से दबा कर हल्‍का सा फैला दें। इसी तहर से सारी कचौडियां बनाएं और गरम घी में गोल्‍डन ब्राउन होने तक तल लीजिये। कचौडियों को धीमी और मध्‍यम आंच पर ही तलें। जब कचौडियां तल उठें तब इन्‍हें एक किनारे निकार कर चीनी की चाशनी तैयार कीजिये। गरम चाशनी में इलायची पावडर मिलाइये। फिर उसमें कचौडियों को डिप कीजिये और कुछ समय बाद निकाल कर प्‍लेट में सजाइये। ऊपर से सूखे कटे मेवे कचौडी पर गार्निश कीजिये और सर्व कीजिये।

 

नवरात्रि पर बनायें कुछ खास

साबूदाना लड्डू

 सामग्री – 1 कप साबूदाना, 1 कप कसा नारियल, 1 कप शक्कर,  1 कप घी, 4 छोटी इलायची,1 बड़ा चम्मच कसे काजू , 1 बड़े चम्मच बादाम

विधि : कढ़ाई में साबूदाना डाल के सूखा ही धीमी आंच पर भूनें। जब साबूदाना थोडा फूल के बड़ा और हल्का सुनहरा रंग का हो जाये और कुरकुरा हो जाये तब गैस बंद कर दे और साबूदाना को ठंडा होने दे। ठंडा होने के बाद मिक्सी में डाल के बारीक पाउडर बना लें। अब एक कढाई में कद्दूकस करा हुआ नारियल डाल के भूनें। जब नारियल हल्का सुनहरा हो जाये तो उसमे साबूदाना पाउडर, शक्कर मिला के गैस बंद कर दें। अब एक छोटे पैन में घी डाल के गरम करें। जब घी गरम हो जाये तो उसमें कटे हुए मेवे डाल दें। 1-2 मिनट भूनने के बाद साबूदाने के मिक्सचर को पैन में डाल दें। इसके बाद इलाइची पाउडर भी डाल दें और मिश्रण को अच्छे से मिला लें। जब मिक्चर हल्का गरम हो तभी उसके लड्डू बना लें। लड्डू ठन्डे होने के बाद उन्‍हें एक एयरटाइट डिब्बे में भर के रख लें और जब मन करे, यह व्रत का मीठा खाना इस्‍तेमाल करें।

 

केले का कवाब

सामग्री : 4 कच्चे केले, 1 कप कुट्टू का आटा, 1 छोटा टुकड़ा कसी अदरक, 2 चम्मच पिसी और भुनी हुई खड़ी धनिया, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 3 पिसी हुई छोटी इलायची, आधा चम्मच नींबू का रस, 2 हरी मिर्च, 1 बड़ा चम्मच बारीक कटी हरी धनिया, घी, सेंधा नमक/नमक स्वादानुसार।

विधि : कच्चे केले के कबाब बनाने के लिए सबसे पहले केलों को पानी में डाल कर उबाल लें। उबले हुए केलों को छीलकर एक बर्तन में रख लें। उबले हुए केलों में अदरक, इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह से मैश कर लें। इसके बाद इसमें 1/4 कप कुट्टू का आटा, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, हरी मिर्च, हरा धनिया, नींबू का रस और सेंधा नमक/नमक अच्छी तरह मिक्स करके गूंथ लें। अब इस मिश्रण के मनचाहे आकार के कबाब बना लें और उन्हें बचे हुए सूखे कुट्टू के आटे में लपेट लें।  अब गैस पर एक कड़ाही में घी गर्म करें। घी गर्म होने पर उसमें एक बार में तीन से चार केले के कबाब डालें और लाइट ब्राउन होने तक उलट-पुलट कर फ्राई कर लें। केले के कबाब तैयार हैं।

 

चैत्र नवरात्रि को कहते हैं  ‘राम नवरात्रि’ 

आज से (18 मार्च) चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है। इसका समापन 26 मार्च को होगा। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र साल में 4 बार आते हैं। इन चारों नवरात्रों में दो नवरात्र (चैत्र नवरात्र और शरद नवरात्रि) का ही धूमधाम से मनाया जाता है। शरद नवरात्रि को महा नवरात्रि कहा जाता है। यह नवरात्र सिंतबर-अक्टूबर में आते हैं। इस नवरात्रि के दशवें दशहरा मनाया जाता है। वहीं चैत्र नवरात्र मार्च-अप्रेल में मनाया जाता है।

शरद नवरात्रि के 10वें दिन को दशहरे के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है इस दिन भगवान राम ने रावण पर जीत पाई थी। वहीं चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन को भगवान राम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। जिसे राम नवमी के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र नवरात्रि को राम नवरात्रि भी कहा जाता है। इस नवरात्र के बाद गर्मियों की शुरुआत मानी जाती है।

होना चाहिए पेड़ पौधों का स्थान

शास्त्रों के मुताबिक सबसे पहले भगवान रामचंद्र ने समुंद्र के किनारे नौ दिन तक दुर्गा मां का पूजन किया था और इसके बाद लंका की ओर बढ़े थे। जिसके बाद उन्होंने युद्ध में विजय भी प्राप्त की थी। पुराणों में नवरात्रों की महिमा का बहुत गुणगान मिलता है। स्वयं ब्रह्मदेव ने मां के नवरात्रों की महिमा बृहस्पति देव को बताते हुए उस ब्राह्मण पुत्री के बारे में कथा सुनाई जिसने सबसे पहले देवी दुर्गा के नवरात्र का उपवास रखा था। नवरात्रों में घर में पूजा से पहले सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। माना जाता है नवरात्र के दिनों में दुर्गा मां कैलाश छोड़कर धरती पर अपने भक्तों के साथ रहती हैं। साल 2018 में चैत्र नवरात्रि 18 मार्च को शुरू हो रहे हैं और यह 25 मार्च तक रहेंगे। 26 मार्च को नवरात्र का व्रत तोड़ा जाएगा।

 

इतिहास का साक्षी है हिन्दू नववर्ष

चैत्र नवरात्र की शुरुआत आध्यात्म का चरमोत्कर्ष होता है। देवी आराधना के इन दिनों में भक्त अपनी कामनापूर्ति के लिए कई जतन करते हैं, लेकिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का यह दिन कई ऐतिहासिक और पौराणिक घटनाओं का भी गवाह है। इन घटनाओं से कहीं नई शुरुआत हुई तो कभी युग परिवर्तनकारी घटना से इतिहास की धारा बदल गई। नजर डालते हैं कुछ ऐसी ही खास जानकारियों पर –

1 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 117 साल पहले सूर्योदय से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी।

2 रावण वध के बाद अयोध्या लौटने पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ था।

3 शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात नवरात्र का पहला दिन यही है।

4 सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।विक्रम संवत को राजा विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने के बाद 57 ईस्वी पूर्व प्रारंभ किया था।

5 यह सिखों के द्वितीय गुरु श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस है।

6 स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं कृणवंतो विश्वमआर्यमका संदेश दिया।

7 सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल का प्रगटोत्सव इसी दिन हुआ था।

8 ज्येष्ठ पांडुपुत्र युधिष्ठिर का राज्याभिषेक आज के ही दिन हुआ था।

9 विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना था।

10 वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंध से भरी होती है।

11 शुभ मुहूर्त होने की वजह से किसी भी कार्य का आरंभ इस दिन किया जा सकता है।

12 आंध्र प्रदेश में इसको उगादीयानी युग का प्रारंभ के नाम से भव्यता के साथ मनाया जाता है।

13 महाराष्ट्र में इसको गुड़ी पड़वाके नाम से मनाया जाता है।

14 सिंध प्रांत में इस पर्व को चेती चांदयानी चैत्र का चांद के नाम से मनाते हैं इसलिए सिंध से विभाजन के बाद भारत आए लोग भी भारत में इस पर्व को इसी नाम से मनाते हैं।

15 जम्मू-कश्मीर में इसको नवरेहके नाम से मनाते हैं।

सरकार ने महिलाओं के लिए लॉन्च किया सैनिटरी नैपकिन, एक पैड की कीमत सिर्फ 2.50 रुपये

नयी दिल्ली :   अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने देश की महिलाओं के हितों का ख्याल रखते हुए बड़ा कदम उठाया। सरकार ने 2.50 रूपये के दर पर महिलाओं को सैनेटरी नैपकिन मुहैया कराने का ऐलान किया है।

केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री अनंत कुमार ने सुविधा योजना का ऐलान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जनऔषधी परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत 100 प्रतिशत बॉयोडीग्रेब्ल सैनिटरी नैपकिन मुहैया कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि कम कीमत में देश के सभी जनऔषधि केंद्रों पर यह सैनेटरी नैपकिन बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगी।

अनंत कुमार के अनुसार इस नैपकिन की कीमत मात्र 2.50 रूपये तय किया गया है। यानी मात्र 2.50 रूपये में महिलायें जनऔषधि केंद्रों से सैनिटरी नैपकिन खरीद सकेंगी।  28 मई, 2018 को अंतर्राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता दिवस से देश के सभी जन-औषधि केंद्रों पर सुविधा नैपकिन बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा। उन्होंने बताया स्वच्छ सैनिटरी नैपकिन के अभाव में देश की अधिकांश महिलाओं को तमाम बीमारियों के संक्रमण का शिकार होना पड़ता है।

नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) 2015-16 के रिपोर्ट के अनुसार 15 से 24 वर्ष के उम्र की 58 प्रतिशत महिलाएं लोकल एवं कामचलाऊ नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं। जो कि बीमारी के संक्रमण से उनका बचाव कर पाने में सक्षम नहीं हैं। शहर में भी 74 प्रतिशत महिलाओं को ही हाइजेनिक नैपकिन उपलब्ध हो पाता है।

कुमार के अनुसार देहात में महज 48 प्रतिशत महिलाओं को ही स्वच्छ एवं शुद्ध नैपकिन नसीब हो पाता है। पॉपुलर ब्रांड न होने की वजह से ग्रामीण इलाकों में बेहतर नैपकिन उपलब्ध नहीं हैं। जिसकी वजह से महिलाओं को तमाम तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वंचित महिलाओं के लिए भी सरकार उनकी स्वच्छत्ता, सुविधा और स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखेगी।

 

मशहूर अदाकार शम्मी का 89 साल की उम्र में निधन

मु्ंबई : 200 से अधिक फिल्मों और टेलीविजन पर प्रसारित होने वाली कुछ लोकप्रिय धारावाहिकों में काम करने वाली मशहूर अभिनेत्री शम्मी का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। वह अपनr हास्य प्रतिभा के लिए भी जानी जाती थी। वह 89 साल की थीं।
एक पारसी परिवार में जन्मी शम्मी का नाम नरगिस रबादी था। उन्होंने‘ उस्ताद पेड्रो’ , ‘ भाई- बहन’, ‘ दिल अपना और प्रीत परायी’, ‘ हाफ टिकट’, ‘ जब जब फूल खिले’, ‘ इत्तेफाक’, ‘ द बर्निंग ट्रेन’, ‘ कुदरत’, ‘ आवारा बाप’, ‘ स्वर्ग’, ‘ शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी’ और अन्य फिल्मों में काम किया था।
उन्होंने‘ देख भाई देख’, ‘ जबान संभाल के’, ‘ श्रीमान श्रीमति’, ‘ कभी ये कभी वो’ और‘ फिल्मी चक्कर’ जैसे कुछ लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में भी काम किया था। शम्मी ने फिल्म निर्माता- निर्देशक सुल्तान अहमद से शादी की थी लेकिन सात साल साथ रहने के बाद उन्होंने तलाक ले लिया। अभिनेता अमिताभ बच्चन ने उनके निधन पर सोशल मीडिया में शोक व्यक्त किया है। बच्चन ने ट्वीटर पर लिखा है, ‘‘ प्रतिभाशाली अभिनेत्री शम्मी आंटी… का निधन हो गया। उन्होंने फिल्म जगत में कई साल का योगदान दिया और प्यारी परिवारिक दोस्त थीं। लंबे समय से बीमार और बुजुर्ग थीं। दुखद है… धीरे- धीरे सभी लोग छोड़ कर जा रहे हैं… ।’’ सुनील दत्त की बेटी और कांग्रेस की पूर्व सांसद प्रिया दत्त ने भी शम्मी के निधन पर दुख जताया।