Saturday, April 11, 2026
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कहता है ‘मदर्स हैपिनेस इंडेक्स’ –  शहरों में 70 फीसदी मांएं हैं खुश नहीं 

नयी दिल्ली : रोजमर्रा के कामों और परेशानियों में हम इतना उलझ जाते हैं कि हम अपनी मां को भूल जाते हैं। लेकिन वह फिर भी हमारे लिए, हमारी खुशियों के लिए लगातार संघर्ष करती है। हमें लगता है कि हमारी मां खुश हैं लेकिन अगर आंकड़ों की मानें तो ऐसा बिल्कुल नहीं है।
मॉम्सप्रेस (महिलाओं के लिए यूजर जेनेरेटिड वेबसाइट) ने एक सर्वे किया है। जिसमें करीब 1200 माओं (कामकाजी और घरेलू) को शामिल किया गया था। इस ‘मॉम्स हैपिनेस सर्वे’ में दिल्ली, मुंबई, बंगलूरु और कोलकाता की महिलाएं शामिल थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहरों में रहनेवाली 70 फीसदी मां ऐसी हैं जो खुश नहीं हैं। इसका कारण उन्हें मिलने वाली कम प्रशंसा और अवास्तविक अकांक्षाएं हैं। यानि उन्हें उनके किए गए काम और संघर्ष के लिए छोटी सी प्रशंसा तक नहीं मिल पाती है।

वहीं कामकाजी महिलाओं को भी इसमें शामिल किया गया था। जांच में पता चला कि उनकी खुशी उनके नियोक्ताओं से उन्हें मिलने वाले सहयोग पर निर्भर करती है। इसके अलावा उनकी खुशी उनके परिवार के सुख और कार्यस्थल पर उनकी उपयोगिता पर भी निर्भर करती है। मॉम्सप्रेस के सीईओ विशाल गुप्ता का कहना है कि सभी माओं को घर के साथ-साथ कार्यस्थल पर भी प्रशंसा मिलनी चाहिए।
ये हैं मां की नाखुशी की वजह

– 73 फीसदी माताएं सोचती हैं कि वे अच्छी मां नहीं हैं।

– जरूरत से ज्यादा चिंता करना।

– खुद की खुशियों के लिए कोई प्रयास ना करना।

– परिवार की इच्छाएं पूरी करने के लिए खुद की इच्छाएं भूल जाना।

इन पांच बातों पर करती हैं सबसे ज्यादा चिंता

घर की छोटी से लेकर बड़ी हर परेशानी की सबसे ज्यादा चिंता मां को ही रहती है। आंकड़ों से पता चलता है कि मां घर में बनने वाले खाने, बच्चों की परीक्षाएं, अनुशासन, अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों को लेकर भी चिंतित रहती हैं।
ये बातें रिपोर्ट में आई सामने

– 57 फीसदी माताएं बच्चे के जन्म के बाद काम पर जाना मुश्किल समझती हैं।

– 41 फीसदी माताएं कार्यस्थल पर मिलने वाले सहयोग से खुश हैं।

– 70 फीसदी माताएं महीने के आखिर में पति के साथ वित्तीय मामलों पर विचार विमर्श करती हैं।

– 91 फीसदी माताएं ऐसी हैं जिनके खुद के स्वतंत्र बैंक अकाउंट हैं।

– 76 फीसदी मां कहती हैं कि वह बिना किसी की आज्ञा के अपनी निजी आवश्यकताओं पर खर्च करती हैं।

– 27 फीसदी नाखुश माताओं को बीते एक साल में एक बार भी प्रशंसा नहीं मिली।

– 90 फीसदी माताओं को 3 महीने पहले ही प्रशंसा मिली थी।

– व्हाट्सएप और फेसबुक पर तकरीबन रोज 2 घंटे व्यतीत करती हैं।

मातृसत्ता का अभिनव प्रतीक है कामाख्या मंदिर

असम के गुवाहाटी में सुंदर नीलाचल पहाड़ियों के शीर्ष पर, आपको सबसे पुराने शक्ति पीठों में से एक, तांत्रिक देवी को समर्पित प्राचीन कामाख्या मंदिर मिलेगा। यह मंदिर माँ कामाख्या को समर्पित 108 शक्ति पीठों में से एक है। यदि आप यहाँ मुख्य मंदिर परिसर में चारों तरफ देखेंगे तो आपको 10 छोटे छोटे मंदिर दिखाई देंगे जो देवी माँ काली के 10 रूपों को समर्पित हैं –जो नाम निम्न हैं, माँ काली, देवी धूमावती, बगलामुखी, तारा, मातंगी, भैरवी, कमला, छिन्नमस्ता, भुवनेश्वरी और त्रिपुरा सुन्दरी।

पुराण कथा का वृतांन्त

देवी कामाख्या की उत्पत्ति

कामाख्या शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘काम’ से हुई है, जिसका अर्थ है प्रेम या प्रेम इच्छा। प्रेम के देवता कामदेव का एक अभिशाप के कारण का पुरूषत्व भंग हो गया था। उन्होंने मां शक्ति की योनि और गर्भ की उपासना की जिसके फलस्वरूप वह शाप से मुक्त हुए। उन्होंने अपनी शक्ति को पुन: प्राप्त कर लिया और ‘कामाख्या’ देवी के मंदिर की स्थापना की तभी से वहाँ पर उनकी पूजा की जाने लगी। कुछ ऐतिहासिक अध्ययनों से  यह भी पता चला है कि कामख्या मंदिर एक ऐसा स्थान है जहां भगवान शिव और देवी सती के बीच प्रेम की शुरूआत हुई थी।

 

मंदिर में अपूर्ण सीढ़ियां:

नरका नाम के एक असुर या दानव को देवी कामख्या से प्रेम हो गया था। उसने उनसे विवाह करने की इच्छा प्रकट की। देवी कामाख्या को नरका में कोई रुचि नहीं थी, उन्होंने उससे एक शर्त रखी कि वह मंदिर में नीलाचल पहाड़ी के नीचे से एक रात में ही सीढ़ियों का निर्माण करे। यदि उसने सीढ़ी का निर्माण कर लिया तो वह निश्चित रूप से उससे विवाह करेंगी। नरका ने इस शर्त को स्वीकार कर लिया और एक रात में ही सीढ़ी का निर्माण करने के लिए सभी तरह से कोशिश करने लगा। बस जब वह सीढ़ियों के निर्माण का कार्य पूरा ही होने वाला ही था यह देखकर माँ कामख्या परेशान हो गई और उस असुर को रोकने के लिए एक चाल चली। उन्होंने एक मुर्गे को वश में करके उसकी आवाज निकाली, ताकि उस दैत्य को रात्रि के समाप्त होने का अनुभव हो। नरका को ऐसा लगा कि वह सुबह होने से पहले सीढ़ीयाँ बनाने के कार्य को पूरा नहीं कर सकता और उसने आधी बनी हुई सीढ़ीयां ही छोड़ दी। इसी कारण आज भी, सीढ़ी अधूरी हैं और इन्हें मेखेलौजा पथ के नाम से जाना जाता है। अधिकांश तीर्थ यात्री मंदिर तक पहुंचने के लिए इन सीढ़ियों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कारों और बसों द्वारा मंदिर तक पहुंँचने के लिए एकपतला और मोड़दार रास्ता भी है।

देवी शक्ति की कोई भी मूर्ति नहीः

यह एक ऐसा मंदिर है जहाँ आपको माँ शक्ति की भी कोई मूर्ति नहीं मिलेगी। यहाँ पर मंदिर में गुफा के एक कोने में देवी की योनि की गढ़ी हुई छवि आपको दिखाई देगी और यही पूजा के मुख्य स्त्रोत के रूप में पायी जाती है।

प्राकृतिक अस्तित्व

यह बहुत ही अद्भुत है कि आज भी, प्राकृतिक तरीके से योनि नम रहती है सोते से निकलने वाला पानी योनी के आकार के तख्ते के माध्यम से बहता है।

देवी का रक्तस्त्राव

कामाख्या मंदिर भी खून बह रही देवी या मासिक धर्म वाली देवी के रूप में प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि जून या आषाढ़ के महीने में, देवी का रक्तस्राव या मासिक धर्म होता है। योनि या गर्भगृह से बहने वाला सामान्य पानी का रंग भी लाल हो जाता है।

मुख्य मंदिर

यह पवित्र स्थान या योनि स्थापना मंदिर के बीच एक कक्ष में स्थित है। तीर्थ यात्री गर्भ गृह में जाने के लिए एक संकीर्ण गली से धीरे-धीरे होकर जाते हैं। गली में कुछ सीढ़ियों चढ़ने के बाद, आप एक बहुत ही छोटे आकार का तालाब पाएंगे जहां वास्तविक झरने का पानी बहता है। तीर्थयात्री तालाब के किनारे बैठकर अपनी उपासना को प्रस्तुत करते हैं। वहाँ पर आप प्रतीकात्मक योनि अंग को देख सकते है जोकि एक लाल कपड़े से ढकी रहती है।

महान अंबुबाची मेला

महान अंबुबाची मेला, जिसे प्रजनन समारोह के रूप में भी जाना जाता है, यह मेला कामख्या मंदिर में पांच दिनों के लिए जून के महीने में होता है। इस समय के दौरान, मंदिर तीन दिनों के लिए बंद रहता है और यह माना जाता है, इस समय देवी मासिक धर्म चल रहा होता है। वास्तव में, देश के विभिन्न भागों से भक्त पहले दिन से ही मंदिर परिसर में कामाख्या देवी की प्रशंसा वाले महिमा गीत गाना शुरू कर देते हैं। वे तीन दिन और रात प्रतीक्षा करते हैं और जब चौथे दिन मंदिर का द्वार खुलता है, तो हजारों भक्त अपनी प्रार्थनाओं को प्रस्तुत करने के लिए अंदर आते हैं और फिर पवित्र जल को कामाख्या देवी के भक्तों में वितरित किया जाता है।

कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं

आज तक, कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि वास्तव में पानी लाल क्यों हो जाता है। लेकिन मासिक धर्म एक महिला को जन्म देने वाली (संतान उत्पन्न करने वाली शक्ति) का प्रतीक है। इसलिए जो कुछ भी कारण है कामख्या मंदिर हर महिला के भीतर इस ‘शक्ति’ या साधना को मनाता हैं।

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घर बैठे मिलेगा डीजल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने शुरू की सर्विस

नयी दिल्ली :    इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के बाद अब सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटिड (HPMC) ने भी मुंबई में डीजल की होम डिलिवरी सर्विस शुरू कर दी है। कंपनी अब इस सेवा का और भी शहरों में विस्तार करने की योजना बना रही है। डीजल की होम डिलिवरी के लिए कुछ दिनों पहले बेंगलुरु बेस्ड एक स्टार्टअप ने भी सर्विस शुरू की थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से बाद में अथॉरिटी की ओर से उसे तेल देने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने एक बयान जारी कर कहा कि ‘एचपी फ्यूल कनेक्ट’ सर्विस अपने चुनिंदा ग्राहकों को डीजल मुहैया कराएगी। उन ग्राहकों के पास जरूरी मशीनरी और सुरक्षा के बंदोबस्त होने जरूरी हैं। हाल ही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी पुणे में ऐसी ही सर्विस शुरू की थी। होम डिलिवरी के लिए ग्राहकों के पास फ्यूल डिस्पेंसर होना जरूरी है। यह तेल एक मध्यम आकार के टैंकनुमा ट्रक द्वारा डिलिवर किया जाएगा।

तेल और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले साल इस सर्विस के बारे में सूचना दी थी और अब इंडियन ऑयल के बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने इसे शुरू भी कर दिया है। जून 2017 में बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप एएनबी फ्यूल्स ने ऐसे ही पेट्रोल और डीजल को माईपेट्रोलपंप ब्रैंड के तहत होम डिलिवर करने की सर्विस शुरू की थी। लेकिन पेट्रोलियम तथा एक्सप्लोसिव सुरक्षा संगठन (PESO) ने एक सर्कुलर जारी कर तेल कंपनियों को एएनबी को तेल सप्लाई करने पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। PESO का कहना था कि ऐसा करना सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है।

HPCL ने कहा कि शुरू में उसके टार्गेट पर कमर्शियल शॉप, शॉपिंग मॉल्स और स्कूल जैसे संस्थान हैं, जहां बिजली के लिए जेनरेटर चलाने की जरूरत होती है। बयान में कहा गया, ‘इस सुविधा से उन लोगों को लाभ होगा जो पेट्रोल पंप पर तेल लाने के लिए जाते थे। इससे समय के साथ साथ तेल को लाने में लगने वाली अतिरिक्त लागत में कमी आएगी। इससे तेल भी बर्बाद होने से बचेगा और किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।’ हालांकि PESO ने इन तेल कंपनियों को भी सिर्फ प्रायोगिक तौर पर ही इस सर्विस को शुरू करने की अनुमति दी है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अभी 61,983 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से 90 फीसदी पंप सरकारी कंपनियों के हैं। बाकी रिलायंस और एस्सार जैसी प्राइवेट कंपनियां भी पेट्रोल पंप चलाती हैं। भारत में 2016-17 में डीजल की खपत 76 मिलियन टन थी वहीं पेट्रोल की खपत 23.8 मिलियन टन थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेल की होम डिलिवरी से तेल की कालाबाजारी पर भी अंकुश लगेगा और ग्राहकों को शुद्ध तेल मिल सकेगा।

उच्च न्यायालय दो महीने में सभी अदालतों में यौन उत्पीड़न निरोधक समितियां गठित करें: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने  सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीशों से कहा कि वे 2013 के कानून के अनुरूप दो महीने के भीतर सभी अदालतों में यौन उत्पीड़न निरोधक समितियां गठित करें। शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल से अनुरोध किया कि वह उच्च न्यायालय के साथ ही राजधानी की सभी जिला अदालतों में एक सप्ताह के भीतर ये समितियां गठित करें।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने तीस हजारी अदालत की महिला वकील और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से कहा कि वे अपने विवाद मिलजुल कर सुलझायें। न्यायालय ने निर्देश दिया कि दोनों ही पक्षों के वकीलों को एक दूसरे के खिलाफ दर्ज करायी गयी प्राथमिकियों के सिलसिले में गिरफ्तार नहीं किया जाये।

पीठ ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को दोनों पक्षों के वकीलों की शिकायतों की जांच का निर्देश दिया है।

पीठ ने इन दोनों प्राथमिकियों से जुड़े मुकदमे की सुनवाई पटियाला हाउस अदालत को स्थानांतरित कर दी और बार के नेताओं से कहा कि वे न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप नहीं करें।

न्यायालय ने वकीलों अैर दिल्ली बार एसोसिएशन के कुछ सदस्यों के खिलाफ महिला वकील की याचिका का निबटारा कर दिया।

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न ( रोकथाम , प्रतिबंध और निदान ) कानून , 2013 के तहत प्रत्येक कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिये समिति का गठन अनिवार्य है।

फ्लिपकॉर्ट में 77% हिस्सेदारी के बाद अब 85% की तैयारी में वॉलमार्ट

बेंगलुरुः देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकॉर्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमिशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।

वॉलमार्ट ने किस दर पर फ्लिपकॉर्ट के शेयरों को हासिल किया यह जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। वॉलमार्ट की फाइलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लिपकॉर्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट और टैलीकॉम कंपनी सॉफ्टबैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं किया है। सॉफ्टबैंक के पास फ्लिपकॉर्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात साने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्टबैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।

एसईसी फाइलिंग के अनुसार, वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर कैश में निवेश कर रहा है और फ्लिपकॉर्ट के मौजूदा शेयर होल्डर्स से 14 अरब डॉलर मूल्य के शेयर खरीद रहा है। वॉलमार्ट ने कहा है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकॉर्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव्ज को अपॉइंट या रिप्लेस कर सकता है। फिलहाल कल्याण कृष्णमूर्ति फ्लिपकॉर्ट के सीईओ हैं और को-फाउंडर बिन्नी बंसल ग्रुप सीईओ हैं। को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चैयरमैन सचिन बसंल ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया।

अल्पसंख्यक मंत्रालय 15 हजार युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क कोचिंग कराएगा

नयी दिल्ली : केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उनका मंत्रालय वर्ष 2018 में अल्पसंख्यक समुदायों के 15 हजार से अधिक लड़के-लड़कियों को यूपीएससी और कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये मदद मुहैया कराएगा। नकवी ने सिविल सेवा 2017 में अल्पसंख्यक मंत्रालय की फ्री-कोचिंग प्राप्त कर सफल अभ्यर्थीयों को आज सम्मानित किया।

इस मौके पर नकवी ने संवाददाताओं से कहा, ” अल्पसंख्यक मंत्रालय प्रतिभाओं के “प्रोत्साहन, प्रमोशन एवं प्रोग्रेस” के लिए बड़े पैमाने पर पुख्ता प्रयास कर रहा है ताकि कोई भी प्रतिभाशाली युवा सिविल सेवा, मेडिकल, इंजीनियरिंग, अन्य प्रशासनिक सेवाओं, बैंकिंग आदि परीक्षाओं में पास हो कर बेहतर नौकरी प्राप्त करने से वंचित ना रह सके।”

उन्होंने कहा, ‘अल्पसंख्यक मंत्रालय विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिल कर प्रतिभावान युवाओं को सिविल सेवा, मेडिकल, इंजीनियरिंग, अन्य प्रशासनिक सेवाओं, बैंकिंग आदि के लिए बड़े पैमाने पर फ्री-कोचिंग मुहैया करा रहा है। इस वर्ष भी देश भर से 15 हजार से ज्यादा युवाओं को फ्री-कोचिंग दी जाएगी।”

पूर्व सांसद, साहित्यकार और कवि बालकवि बैरागी का निधन

नीमच :  देश के ख्यातनाम साहित्यकार व कवि बालकवि बैरागी का  निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। मूलत: मनासा क्षेत्र के बालकवि बैरागी साहित्‍य और कविता के सा‍थ राजनीति के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। वे राज्‍यसभा के सदस्‍य रहे।इस सरस्‍वती पुत्र को कई सम्‍माना से नवाजा गया था। श्री बैरागी का मनासा में भाटखेड़ी रोड पर कवि नगर पर निवास है। वहीं पर उन्‍होंने शाम 6 बजे अंतिम सांस ली।

श्री बैरागी की गिनती कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं में होती थी। वे मध्‍यप्रदेश में अर्जुन सिंह सरकार में खाद्यमंत्री भी रहे। कवि बालकवि बैरागी काे मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा कवि प्रदीप सम्मान भी प्रदान‍ किया गया।

साहित्‍य अौर राजनीति से जुड़े रहने के कारण उनकी कविताओं में साहित्य और राजनीति की झलक देखने को मिलती है। गीत, दरद दीवानी, दो टूक, भावी रक्षक देश के, आओ बच्चों गाओ बच्चों श्री बैरागी की प्रमुख रचनाएं हैं।

मृदुभाषी और मस्‍तमौला स्‍वभाव तथा सौम्‍य व्‍यक्तित्‍व के धनी बालकवि बैरागी ने अंतरराष्ट्रीय कवि के रूप में नीमच जिले को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था।

बताया जाता है कि नीमच में एक कार्यक्रम में शामिल होकर वे अपने घर मनासा पहुंचे थे। वहां कुछ समय आराम करने के लिए अपने कमरे में गए। शाम करीब 5:00 बजे जब उन्हें चाय के लिए उठाया गया तो उनके निधन की खबर लगी।

वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर अंचल में फैलते हुए शोक की लहर दौड़ गई कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां उनके निवास पर पहुंच रही हैं।

बैरागी का जन्म 10 फरवरी 1931 को मनासा विकासखंड के रामपुरा में हुआ था। वे 1945 से कांग्रेस में सक्रिय रहे। 1967 में उन्होंने विधानसभा चुनाव में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को शिकस्त दी थी। 1969 से 1972 तक पं. श्यामाचरण शुक्ल के मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रहे।

1980 में मनासा से दोबारा विधायक निर्वाचित हुए। अर्जुनसिंह की सरकार में भी वे मंत्री रहे। 1984 तक लोकसभा में रहे। 1995-96 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में संयुक्त सचिव रहे। 1998 में मप्र से राज्यसभा में गए। 29 जून 2004 तक वे निरंतर राज्यसभा सदस्य रहे।

2004 में उन्हें राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के आंतरिक संगठनात्मक चुनावों के लिए उन्हंे चुनाव प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया। 2008 से 2011 तक मप्र कांग्रेस में उपाध्यक्ष रहे। मप्र कांग्रेस चुनाव समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं। वर्तमान में वे केंद्रीय हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य थे।

शोक स्वरूप मनासा बंद रहेगा बालकवि बैरागी का अंतिम संस्कार 14 मई की दोपहर करीब 2 बजे मनासा में होगा। कवि नगर स्थित निज निवास से दोपहर 2 बजे अंतिम यात्रा निकलेगी। बैरागी के निधन पर शोक स्वरूप मनासा नगर सोमवार को बंद रहेगा।

मुक्तांगन-कविता कोश काव्य पाठ श्रृंखला का तीसरा अध्याय

नयी दिल्ली : मुक्तांगन-कविता कोश काव्य पाठ श्रृंखला का तीसरा अध्याय जो कवि सुमित्रा नंदन पंत को समर्पित था कई मायनों में एक यादगार कार्यक्रम रहा। जहाँ एक ओर प्रतिभागी कवियों ने अपनी और पंत जी की कुछ बेहतरीन कविताएं सुनायीं वहीं उपस्थित श्रोता भी अंत तक उनका हौसला बढ़ाने कुर्सियों पर जमे रहे।
वरिष्ठ लेखिका अर्चना वर्मा ने पंत के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने सारगर्भित विचार रखे। मुक्तांगन की इस सीरीज द्वारा कई नयी प्रतिभाएं सामने आ रहीं हैं, कई नवोदित कवियों ने तो पहली बार मंच पर अपनी कविता प्रस्तुत की। मुक्तांगन का मंच उनकी प्रतिभा को सबके सामने लाने में सहायक हुआ। देश के कोने कोने से कविताएँ मेल द्वारा प्राप्त हो रहीं हैं। नव प्रतिभा प्रोत्साहन योजना के तहत इस बार के चयनित नाम रहे –  आलेख -सुषमा व्यास ‘राजनिधि’, कविता -प्रथम -विशेष चंद्र नमन, द्वितीय-कल्पना झा, तृतीय-किरण यादव। निर्णायक वरिष्ठ लेखिका अर्चना वर्मा रहीं। द्वितीय कड़ी के विजेताओं सुषमा कनुप्रिया, देवेंद्र, प्रांजल और आशुतोष को भी पुरस्कृत किया गया।

हिंदी साहित्य का संबंध सांस्कृतिक जागरण से है

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा ‘साहित्य संवाद’ के तहत आयोजित सभा में भक्ति साहित्य और आधुनिक बोध पर चर्चा करते हुए कहा गया कि हिंदी साहित्य की परम्परा को अखंडता में देखने की जरूरत है। अंग्रेजी राज का मध्यकाल और आधुनिक काल का विभाजन अब स्वीकार नहीं किया जा सकता। हिंदी साहित्य आम लोगों के सांस्कृतिक जागरण का साहित्य है। शोधछात्रा पूजा गुप्ता ने शोध आलेख पाठ में कहा कि भक्ति काव्य का प्रभाव राष्ट्रीय स्वाधीनता पर था, लेकिन वर्तमान युग में नहीं है। गांधी पर नरसी मेहता और तुलसी का असर था। स्वाधीनता संग्रामी भक्त कवियों के भजन गाकर अंग्रेजी राज में लोगों को इकट्ठा करते थे। गुरुनानक और चैतन्य देव ने सामाजिक भेदभाव का विरोध कर राष्ट्रीय चेतना का मार्ग प्रशस्त कर रहे थे। पविंद कुमार ने हिंदी के विशिष्ट कथाकार काशीनाथ सिंह पर आलेख पाठ करते हुए कहा कि काशीनाथ सिंह की कृतियां जीवन को अर्थ देने और जनांदोलन की चेतना को व्यक्त करने के लिए सामने आईं। उनमें बनारस की संस्कृति अपनी समस्याओं के साथ उभरती है। उन्होंने युवाओं के बदलते मन को भी समझने का प्रयत्न किया है। कथाकार सेराज खान बातिश. ने कहा कि इस समय अपने विचारों में कमी आ गई है और अंधानुकरण बढ़ा है। कवि राज्यवर्द्धन ने कहा कि लेखन को अब वाचिक निपुणता से जोड़ना जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शंभुनाथ ने कहा कि साहित्य संवाद का यह मंच शोधार्थियों के चिंतन और लेखन को समृद्ध करने का अवसर प्रदान करता है। इस अवसर पर प्रकाश त्रिपाठी, राजेश साह, नवोनीता दास, जूही करन, सुषमा त्रिपाठी, पंकज सिंह, मिथिलेश साव, कालीप्रसाद जायसवाल ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन संजय जायसवाल और धन्यवाद ज्ञापन राजेश मिश्र ने दिया।