Tuesday, October 6, 2026
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स्वतंत्रता सेनानी गौड़ चंद्र महापात्र का निधन

भुवनेश्वर : ओड़िशा के भद्रक जिले के एक सरकारी अस्पताल में मंगलवार को वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी गौड़ चंद्र महापात्र का 104 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। महापात्र के परिजन ने यह जानकारी दी।
साल 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल की सजा काट चुके महापात्र वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। महापात्र के परिवार में उनकी पत्नी मीरा देवी, चार बेटियां और नौ बेटे हैं। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने महापात्र के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें ‘‘सच्चा गांधीवादी’’ करार दिया।

136 साल पहले उदयपुर में लिखा गया था आधुनिक हिन्दी का पहला ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’

उदयपुर : आधुनिक हिंदी के मानक गद्य की सबसे पहली पुस्तक उदयपुर में 136 साल पहले वर्ष 1882 में लिखी गई थी। यह पुस्तक है- सत्यार्थ प्रकाश। इसे लिखा था स्वामी दयानन्द सरस्वती ने। उदयपुर में इस पुस्तक के लेखन स्थल पर आज सत्यार्थ प्रकाश भवन बना हुआ है। दुनियाभर से आने वाले पर्यटक इसे देखते हैं। वे इसे आर्य समाज के संस्थापक और धर्म सुधार आंदोलन के प्रमुख व्यक्ति दयानन्द सरस्वती के ग्रंथ के रूप में देखते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि हिन्दी साहित्य के इतिहासकारों ने अपने ग्रंथों में सत्यार्थ प्रकाश को हिन्दी के उन प्रारम्भिक ग्रंथों में माना है, जिनके गद्य को बाद में सभी ने परम्परा के रूप में ग्रहण किया।
सत्यार्थ प्रकाश के प्रकाशन से पहले हिन्दी गद्य की भाषा ब्रज और अवधी से बहुत अधिक प्रभावित थी। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का इतिहास में माना है कि 1868 से 1893 का कालखंड हिन्दी गद्य के विकास का समय था। स्वामी दयानन्द सरस्वती ने वैसे 1873 के आसपास सत्यार्थ प्रकाश का लेखन शुरू किया था, लेकिन इसे पूरा उदयपुर आकर किया।


उनसे पहले आमतौर पर ब्रजभाषा को ही गद्य के रूप में लिखा जा रहा था। उस समय हिन्दी में हों को हूजिए, हो को होय, आता है को आवता है, आए को आवे, जगह को जाघा, इसलिए को इस करके या भाषा को भाखा लिखा जाता था। उस समय हिन्दी साहित्य में ‘सांसें आती जाती हैं’को ‘आतियां जातियां जो सांसें हैं’ लिखा जाता था। तब कहानी या लेख की भाषा गद्य तो होती थी, लेकिन हर पंक्ति के आखिर में तुक मिलाकर लिखा जाता था।
स्वामी दयानन्द सरस्वती को महाराणा सज्जन सिंह ने बुलवाया था : सत्यार्थ प्रकाश भवन के अध्यक्ष अशोक आर्य बताते हैं कि स्वामी दयानन्द सरस्वती को महाराणा सज्जन सिंह ने उदयपुर आमंत्रित किया था। उन्हें एक अलग भवन में ठहराया था। स्वामी जी ने यहीं सत्यार्थ प्रकाश लिखा।
वे यहां 10 अगस्त 1882 से 27 फरवरी 1883 तक ठहरे थे। इसके बाद वह जोधपुर होते हुए पुष्कर चले गए थे। डॉ. चंद्रभानु सीताराम सोनवणे ने हिन्दी गद्य साहित्य में लिखा है कि सत्यार्थ प्रकाश आधुनिक हिंदी का सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रंथ है। हिन्दी को नई चाल में ढालने में स्वामी दयानन्द सरस्वती का स्थान भारतेंदु हरिश्चंद्र से कम नहीं है।
दयानन्द की प्रेरणा से निकला था पहला हिन्दी दैनिक : 1856 में जन्मे मनीषी समर्थदान चारण ने स्वामी दयानन्द सरस्वती की प्रेरणा से 1886 में अजमेर में राजस्थान प्रेस यंत्रालय की स्थापना कर राजस्थान समाचार साप्ताहिक प्रारंभ किया था। 1904 में यह पत्र दैनिक हो गया, जिसने राजस्थान में दैनिक समाचार पत्रों की आधार भूमि तैयार की। नागरी लिपि में छपने वाला यह दैनिक 12 पेज का था। चंद्रगुप्त वार्ष्णेय ने भी राजस्थान समाचार को प्रदेश का पहला दैनिक पत्र माना था।

(साभार – दैनिक भास्कर)

पूर्व पेट्रोलियम मंत्री सत्यप्रकाश मालवीय का निधन

इलाहाबाद : पूर्व पेट्रोलियम मंत्री सत्यप्रकाश मालवीय का शनिवार देर रात दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। मालवीय (84) प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे। सत्यप्रकाश मालवीय के पीआरओ डाक्टर वीके दीक्षित ने पीटीआई भाषा को बताया कि सत्यप्रकाश मालवीय का कल रात एक बजे निधन हो गया। उनके परिवार में एक बेटी है। उनकी पत्नी का निधन चार साल पहले हो गया था। इलाहाबाद के मालवीय नगर में जन्मे सत्यप्रकाश मालवीय आपातकाल के दौरान 18 महीने नैनी जेल में बंद रहे। उन्होंने बताया कि मालवीय इलाहाबाद के नगर प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री रहे। उन्होंने अपनी राजनीति, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से शुरू की और बाद में सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस में शामिल हुए थे।

इन्होंने 89 साल की उम्र में शुरू किया नया व्यवसाय

गुवाहाटी :  वैसे तो अक्सर लोग 60 की उम्र के बाद अपने काम से थककर अवकाश ग्रहण कर लेते हैं। लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं जो उम्र को मात देकर अवकाश ग्रहण करने के बाद ही अपनी दूसरी पारी शुरू करते हैं। इन लोगों के लिए उम्र महज़ एक आँकड़ा है। लतिका जी ने ऐसा ही किया और ऐसी ही कहानी है 89 साल की लतिका चक्रवर्ती की। असम के धुबरी में पैदा हुई लतिका की शादी कृष्ण लाल चक्रवर्ती से हुई, जो सर्वे ऑफ़ इंडिया में एक सर्वेक्षक थे। और उनका बेटा कप्तान राज चक्रवर्ती भारतीय नेवी में अफ़सर हैं।
अपने पति की मृत्यु के बाद लतिका अपने बेटे के साथ रह रहीं हैं। उनके पति व बेटे, दोनों की ही नौकरी ऐसी रही कि उन्हें देश के ज्यादातर शहरों को देखने का मौका मिला। भारत के अधिकतर कोनों को जानने-समझने की यात्रा उनके जीवन का हिस्सा रही। अपने जीवन की इसी यात्रा में उन्होंने हर जगह से खूबसूरत साड़ियाँ, कुर्ते, और अलग-अलग तरह के कपड़ों के रूप में यादें संजोयी हैं। और हर एक याद की बहुत ही अलग सी कहानियां हैं उनके पास।
उम्र के इस पड़ाव पर उन्होंने अपनी इन यादों को कला के जरिये बांटने की सोची। लतिका को हमेशा से ही सिलाई करने का शौक रहा। वे हमेशा पुरानी चीज़ों पर क्रियात्मक डिज़ाइन करके उन्हें नया रूप दे देतीं। और आज उन्होंने अपनी इसी प्रतिभा को फिर से सहेजने की सोची।
अपनी 64 साल पुरानी सिलाई मशीन से लतिका पुरानी साड़ियों और कपड़ों से हैंडबैग या पोटली बनाकर नई कहानियां गढ़ रही हैं। ये वो कपड़े हैं जिनमें सालों की विरासत है।
इतना ही नहीं उन्होंने अपनी एक ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट भी शुरू की है जहाँ कोई भी उनके द्वारा बनाये गए बैग देख व खरीद सकता है। आज देश के अलग-अलग भागों से लोग उनके काम को सराह रहे हैं और उनके बनाये पोटली बैग खरीद रहे हैं। आप इस लिंक पर जाकर इनके बैग्स देख सकते हैं और खरीद सकते हैं। लतिका जी को हमारा सलाम….ये सचमुच प्रेरणा हैं।

https://www.latikasbags.com/

(साभार – द बेटर इंडिया)

भारतीय सबसे अधिक मेहनती, पांच दिन के कार्य सप्ताह से खुश : अध्ययन

मुम्बई : भारत में 69 प्रतिशत पूर्णकालिक कर्मचारी सप्ताह में पांच दिन काम करके खुश हैं और एक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत दुनिया का सबसे अधिक मेहनती देश है। देश के करीब 70 प्रतिशत कर्मियों का मानना है कि उन्हें समान वेतन में कुछ दिन कम काम करने का विकल्प दिया जाए तो भी वह पांच दिन के कार्य सप्ताह को ही चुनेंगे। कार्यबल प्रबंधन से जुड़ी अमेरिका की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी क्रोनोस इन्कॉर्पोरेटेड के सर्वेक्षण के मुताबिक इस सूची में 43 प्रतिशत कर्मियों के समान मत के साथ मैक्सिको दूसरे और 27 फीसदी के साथ अमेरिका तीसरे स्थान पर है। सर्वेक्षण के मुताबिक ब्रिटेन (16 फीसदी), फ्रांस (17 फीसदी) और ऑस्ट्रेलिया (19 प्रतिशत) 5 दिन के मानक कार्य सप्ताह से बहुत अधिक खुश नहीं हैं। उसके मुताबिक वेतन समान रहने पर दुनिया भर के एक तिहाई से अधिक (34 प्रतिशत) कर्मी सप्ताह में चार दिन और 20 फीसदी कर्मचारी सप्ताह में तीन दिन काम करने की इच्छा रखते हैं। वहीं दुनिया भर के करीब एक चौथाई से अधिक (28 प्रतिशत) कर्मचारी पांच दिन के कार्य सप्ताह से संतुष्ट हैं। इस साल 31 जुलाई से नौ अगस्त के बीच 2,772 कर्मियों में किये गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि एक तिहाई से अधिक (35 प्रतिशत) कर्मी हर सप्ताह एक दिन कम करने बदले 20 प्रतिशत कम वेतन लेने को तैयार हैं।

भारत की तीन मुक्केबाजों को स्वर्ण पदक

नयी दिल्ली : भारतीय मुक्केबाज सिमरनजीत कौर (64 किग्रा), मोनिका (48 किग्रा) और भाग्वती कचारी (81 किग्रा) ने तुर्की के इस्तांबुल में अहमत कोमर्ट टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता। राष्ट्रीय चैंपियनशिप की पूर्व पदक विजेता सिमरनजीत ने तुर्की की सेमा कालिस्कन को हराकर खिताब जीता। लाइट फ्लाइवेट वर्ग में चुनौती पेश कर रही मोनिका ने तुर्की की आयसे केगिरर को हराकर स्वर्ण पदक जीता जबकि भाग्यवती ने मेजबान देश की सलमा काराकोयुन को लाइट हैवीवेट वर्ग में हराया।
राष्ट्रमंडल खेलों की पूर्व कांस्य पदक विजेता पिंकी जांगड़ा (51 किग्रा) को हालांकि स्थानीय दावेदार बुसेनाज साकिरोग्लु के खिलाफ हार के साथ रजत पदक मिला। विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता सोनिया लाठेर (57 किग्रा) को भी कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। भारतीय टीम तीसरे स्थान पर रही। भारत की भाग्यवती को टूर्नामेंट की ‘मोस्ट साइंटिफिक बाक्सर’ चुना गया।

‘जब जब फूल खिले’ के लेखक बृज कात्याल का निधन

मुम्बई : दिग्गज फिल्म लेखक बृज कात्याल का उपनगर बांद्रा में स्थित एक आश्रम में निधन हो गया। कात्याल ने शशि कपूर और नंदा अभिनीत हिट फिल्म ‘‘जब जब फूल खिले’’ की कहानी लिखी थी। लेखिका-निर्देशक और करीबी सहयोगी अनुषा श्रीनिवासन अय्यर के मुताबिक, कात्याल कैंसर से जूझ रहे थे। अय्यर ने पीटीआई को बताया, ‘वह रेक्टल कैंसर से पीड़ित थे और उन्हें शांति अवेदना आश्रम में भर्ती कराया गया था, जहां आज दोपहर बाद उनकी मौत हो गयी। वह 85-86 साल के थे।’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे ही लिखने की कला सीखी है। यह बहुत बड़ी क्षति है।’ फिल्म उद्योग के सबसे सफल लेखकों में से एक कात्याल को ‘‘दिल्लगी’’, ‘सांस’ और ‘पल छिन’जैसे कई टीवी धारावाहिकों के लेखक भी रहे। उन्होंने ‘अजूबा’ और ‘ये रात फिर ना आयेगी’ समेत कई फिल्मों का लेखन किया। कत्याल के परिवार में एक दत्तक पुत्र है।

लोकसभा चुनाव से पूर्व जदयू में शामिल हुए प्रशांत किशोर

पटना : चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में रविवार को शामिल हो गए । इससे पहले, किशोर ने ट्वीट कर कहा था कि वे बिहार से अपनी नयी यात्रा शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं। 41 वर्षीय प्रशांत किशोर बिहार के बक्सर जिले के निवासी हैं। प्रशांत किशोर को जदयू में पार्टी स्तर पर क्या जिम्मवारी सौंपी जाएगी, इस बारे में तत्काल स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन लोकसभा चुनाव से पूर्व उनके पार्टी में शामिल होने पर उनके 2019 के लोकसभा चुनाव में उतरने को लेकर अटकलें शुरू हो गयी हैं। वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर को नरेंद्र मोदी के चुनावी रणनीतिकार के तौर पर जाना गया था। प्रशांत ने बाद में भाजपा के धुर विरोधियों से हाथ मिला लिया और 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू के चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाते हुए महागठबन्धन को भारी जीत दिलायी थी । साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद प्रशांत किशोर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सलाहकार के रूप में नियुक्त करके उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया था । हालांकि, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को प्रशांत किशोर जीत दिलाने में असफल रहे थे पर पंजाब में वे उसे जीत दिलाने में सफल रहे थे।

डेयरी कारोबार में उतरा पतंजलि

नयी दिल्ली : बाबा रामदेव का पतंजलि आयुर्वेद अब डेयरी कारोबार में भी उतर गया है। गुरुवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम से रामदेव ने कुछ नई कैटेगरी में उत्पादों को बाजार में लाने का ऐलान किया। इसमें दूध, दही, पनीर और छाछ जैसे डेयरी उत्पाद मुख्य हैं। पतंजलि जल्द ही उपभोक्ताओं के लिए फ्लेवर्ड आयुर्वेदिक दूध भी मुहैया करा सकता है।
बताया गया है कि कंपनी ने इसके लिए दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, पुणे और मुम्बई के करीब 56 हजार दूध विक्रेताओं के साथ करार किया है और इसकी बदौलत संस्थान 2019-20 में 10 लाख लीटर दूध उत्पादन करना चाहता है।
हर्बल पानी में लाएंगे रामदेव: पतंजलि ने पैकेज्ड मिनरल वॉटर भी लॉन्च किया। इसे दिव्य जल के नाम से बाजार में उतारा जाएगा। रामदेव जल्द ही आयुर्वेदिक हर्बल पानी भी बाजार में ला सकते हैं। विदेशी कंपियों को टक्कर देने के लिए रामदेव ने फ्रोजन सब्जियों (मटर, मिक्स वेज, स्वीट कॉर्न और फिंगर चिप्स) को भी लॉन्च किया। रामदेव ने सोलर पैनल और गाय का चारा जैसे उत्पादों को भी बाजार में उतारने का ऐलान किया।

गहरी नींद लाने में करेगा मदद, पसीना भी सोखेगा नासा का तकिया

वॉशिंगटन : नासा ने एक खास तकिया बनाया है, जो गहरी नींद लाने में मदद करता है। साथ ही, पसीना भी सोखता है। नासा ने यह तकिया खास तौर पर अंतरिक्ष यात्रियों को अलग-अलग तापमान में होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बनाया है। इसकी कीमत 99 डॉलर (7100 रुपए) से शुरू होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तकिया दो तरह का है। पहली कैटेगरी में हिब्र नाम का तकिया है, जिसकी कीमत 99 डॉलर (7100 रुपए) रखी गई है। इस तकिए में पसीना सोखने वाली फोम का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, दूसरी कैटेगरी में जीक नाम का तकिया आता है। 200 डॉलर (करीब 14 हजार रुपए) वाले इस तकिए में स्लीप सेंसर, स्पीकर और वाइब्रेटर दिया गया है, जो तेज खर्राटे लेने पर यूजर को धीरे से जगा देता है। नासा के मुताबिक, यह तकिया न तो ज्यादा मोटा बनाया गया है और न ही ज्यादा पतला। ऐसे में यूजर को इस तकिए से किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती।