Friday, April 10, 2026
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अब विश्वविद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए पीएचडी अनिवार्य: प्रकाश जावडेकर

नई दिल्ली : अब विश्वविद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्य होगी। क्योंकि सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध को बढ़ावा और गुणवत्ता में सुधार के लिए पहली बार कॉलेज और यूनिवर्सिटी शिक्षकों की भर्ती में अलग नियम व मापदंड बनाए हैं। खास बात यह है कि एपीआई में बदलाव किया है, जिसमें अब कॉलेज शिक्षकों को प्रमोशन के लिए रिसर्च नहीं करनी पड़ेगी, बल्कि उनका काम छात्रों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाना है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर के मुताबिक, वर्ष 2021-22 सत्र से यूनिवर्सिटी में अस्सिटेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य होगी। जबकि कॉलेजों में पहले की भांति नेट और मॉस्टर डिग्री के आधार पर शिक्षक बन सकते हैं। लेकिन यदि कॉलेज में अस्सिटेंट प्रोफेसर पद पर तैनात शिक्षक को प्रमोशन (एसोसिएट प्रोफेसर बनना) चाहिए होगी तो पीएचडी जरूरी होगी। इसके अलावा यदि कोई कॉलेज शिक्षक यूनिवर्सिटी में जाकर सेवा देना चाहता होगा तो भी पीएचडी की डिग्री अनिवार्य रहेगी।ओलंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडल विजेताओं के लिए विशेष वर्ग बनाया गया है, जिसमें अस्सिटेंट डायरेक्टर / कॉलेज डायरेक्टर, फिजिक्ल एजुकेशन, स्पोट्र्स और डिप्टी डायरेक्टर, फिजिकल एजुकेशन के तहत भर्ती होंगी।

खास बातें – 

. देशभर के विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए एक जुलाई 2021 से पीएचडी अनिवार्य होगी।
. कॉलेजों में पहले की तरह मास्टर डिग्री के साथ नेट या पीएचडी के तहत शिक्षक बन सकते हैं।
. यूनिवर्सिटी शिक्षक की प्रमोशन के दौरान रिसर्च और कॉलेज शिक्षक को बेहतरीन पढ़ाई को आधार बनाया जाएगा।
. एपीआई में बदलाव किया गया है, अब शिक्षकों का मूल्यांकन ग्रेडिंग सिस्टम से होगा जबकि यूनिवर्सिटी शिक्षक को रिसर्च के आधार पर स्कोर मिलेगा।
.दुनिया की टॉप पांच सौ सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से पीएचडी धारक सीधे यूनिवर्सिटी या कॉलेज स्तर पर अस्सिटेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती हो सकते हैं।
– यूनिवर्सिटी या कॉलेज स्तर पर अस्सिटेंट प्रोफेसर पर नए भर्ती होने वाले शिक्षकों को एक महीने का इंडेक्शन प्रोग्राम के तहत ट्रेङ्क्षनग लेनी अनिवार्य होगी।
– यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को सिर्फ शोधकार्यो पर फोकस करना है, जिसमें एमफिल और पीएचडी छात्रों को बेहतरीन शोध करवाने में मदद करनी है। जबकि कॉलेज स्तर के शिक्षकों अपने पसंद से शोध में भाग ले सकते हैं, लेकिन अनिवार्य नहीं होगा। उनका काम पढ़ायी, छात्रों को अधिक से अधिक विषयों समेत कोर्स से जोडना रहेगा। इसके अलावा छात्र की ओवरऑल पर्सानालिटी डेवलेपमेंट में बढ़ावा देना शामिल है।

धोखेबाज एनआरआई पतियों की संपत्ति और पासपोर्ट जब्त करेगी सरकार

नयी दिल्ली : भारत सरकार देश की लड़कियों से शादी करके विदेश भाग जाने वाले अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) पुरुष पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार कानून में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार जानबूझकर कोर्ट की कार्यवाही को नजरअंदाज करने वाले एनआरआई पतियों की संपत्ति को जब्त करने के लिए कानून में बदलाव करेगी। जिसकी वजह से ऐसा करने वाले पतियों पर कोर्ट के समन का जवाब देने के लिए दबाव बनाया जा सकेगा।
बहुत से मामले सामने आने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। खासतौर से पंजाब में एनआरआई लड़के -लड़कियों से एक बेहतरीन जीवन देने का वादा करते हुए शादी करते हैं लेकिन बहुत जल्द महिला को छोड़कर विदेश भाग जाते हैं। मंत्रियों के एक समूह ने ऐसे पतियों पर कानूनी कार्रवाई करने और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कुछ संभावित उपाय सुझाए हैं। इन उपायों में विदेश मंत्रालय द्वारा एक वेबसाइट का निर्माण करना शामिल है जिसके जरिए एनआरआई पतियों को कोर्ट का समन दिया जाएगा।

इस वेबसाइट पर पति के खिलाफ समन डाला जाएगा और यह माना जाएगा कि आरोपी ने उसे स्वीकार कर लिया है। इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए कानून में कुछ जरूरी संशोधन भी किए जाएंगे। यदि कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहा पति समन जारी होने के बाद भी कोर्ट में पेशी के लिए नहीं आया तो उसे भगोड़ा घोषित कर दिया जाएगा। ऐसे अपराधियों से निपटने के लिए जो दूसरे देश चले जाते हैं या फिर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपनी पहचान बदल लेते हैं उनके पासपोर्ट को रद्द कर दिया जाएगा।

आरोपी एनआरआई की पैतृक संपत्ति को तब तक के लिए जब्त कर लिया जाएगा जब तक कि वह अदालत में पेश नहीं हो जाता। इसके अलावा एनआरआई को शादी के 48 घंटे के अंदर पंजीकृत करवाना होगा। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें विदेश में रहने वाले लड़के शादी के बाद अपनी पत्नी को भारत में ही छोड़कर जाते हैं।

सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों से निपटेगी बंगाल सरकार , बनेगा नया कानून

कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों और पोस्ट की समस्या से निपटने के लिए एक नए कानून पर काम कर रही है। देश के कई हिस्सों में ऐसे पोस्टों से हो रही परेशानियों और अशांति की पृष्ठभूमि में यह कदम सामने आया है। गृह विभाग के एक अधिकारी ने पीटीआई – भाषा को बताया कि राज्य सरकार की मंशा है कि समाज में शांति एवं सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या घृणा पैदा करने के उद्देश्य से फर्जी खबरें फैलाने वालों और तस्वीरों को छेड़छाड़ कर उन्हें पोस्ट करने के जिम्मेदार लोगों के अपराध और सजा की प्रकृति पर अधिक स्पष्टता लाई जाए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नया कानून बनाते हुए अपराधियों के रिकॉर्ड रखने के अलावा पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल तथा देश के अन्य हिस्सों में सोशल मीडिया पर फैली फर्जी खबरों पर एक डेटा बैंक तैयार कर रही है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में फर्जी खबरें फैलने की कई रिपोर्टों के बाद नया कानून तैयार किया जा रहा है। शिलॉन्ग , झारखंड में गोड्डा और असम के कार्बी आंगलोंग जिले में हाल में हुई घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। अधिकारी ने कहा कि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर फर्जी खबरों और तस्वीरों को तोड़ – मरोड़ कर पोस्ट करने के बड़े असर हो सकते हैं। इससे लोगों के बीच अशांति पैदा हो सकती है तथा इससे निपटने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में जनता के बीच डर या चिंता पैदा करने या अपराध करने की मंशा से ऐसे पोस्ट डालने वाले लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया जाता है। नया कानून बनाने की प्रक्रिया में सरकार पश्चिम बंगाल पुलिस की सहायता भी ले रही है। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने कई पेड टि्वटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट की पहचान की है जिनका ऐसे पोस्टों के लिए अलग – अलग तरीके से लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा , ‘‘ उन्होंने इसकी भी पहचान की है कि फर्जी टि्वटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट चलाने वालों और फर्जी खबरें , तस्वीरें तथा लेख साझा करने वाले लोगों का कैसे विभिन्न माध्यमों से वित्त पोषण किया जाता है। ’’

शतरंज चैंपियन सौम्या स्वामीनाथन ने हिजाब के विरोध में छोड़ी एशियन चैंपियनशिप

पुणे : भारत की महिला शतरंज खिलाड़ी सौम्या स्वामीनाथन (29) ईरान के हमदान में 26 जुलाई से 4 अगस्त तक चलने वाले एशियन टीम शतरंज चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लेंगी। सौम्या भारत की नंबर 5 महिला शतरंज खिलाड़ी हैं। सौम्या ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा है कि वह इस चैंपियनशिप में इसलिए हिस्सा नहीं लेंगी क्योंकि उन्हें इस्लामिक देश ईरान में हिजाब पहनने को कहा जाएगा। बता दें ईरान में हिजाब और स्कार्फ पहनने का नियम महिलाओं के लिए अनिवार्य है। सौम्या का मानना है कि उन्होंने यह फैसला अपने निजी अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए लिया है।
सौम्या ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘मैं जबरदस्ती स्कार्फ या बुरखा नहीं पहनना चाहती। मुझे लगता है कि ईरान के स्कार्फ पहनने के कानून से मेरे मूलभूत मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है। साथ ही इस कानून से मेरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विचार, विवेक और धर्म की सुरक्षा का भी उल्लंघन होता है। ऐसी परिस्थिति में मेरे पास एक ही रास्ता है कि मैं ईरान ना जाऊं।’
पहले भी कई खिलाड़ी ले चुके हैं ऐसा फैसला
इससे पहले साल 2016 में इसी वजह से टॉप भारतीय शूटर हिना सिद्धु ने भी ईरान में आयोजित एशियाई एयरगन बैठक में जाने से मना कर दिया था। सौम्या ने आगे लिखा कि ‘मैं यह देखकर बहुत निराश महसूस कर रही हूं कि इस तरह की चैंपियनशिप आयोजित करते वक्त खिलाड़ियों के अधिकारों और कल्याण को बहुत कम महत्वपूर्ण माना जाता है।’ सौम्या का कहना है कि जब भी वह राष्ट्रीय टीम में चुनी जाती हैं और भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं तो वह बेहद गौरवान्वित महसूस करती हैं। सौम्या ने कहा कि उन्हें इस बात का बहुत अफसोस है कि वह इस तरह के एक महत्वपूर्ण चैंपियनशिप में भाग नहीं ले पाएंगी। सौम्या का मानना है कि एक खिलाड़ी खेल को अपनी जिंदगी में सबसे सबसे पहले रखता है लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता।’

ऐसा ही एक फैसला शतरंज खिलाड़ियों में यूक्रेन की बहने अन्ना और मारिया ने भी किया था। उन्होंने मानवाधिकार और लिंग समानता का उल्लंघन मानते हुए सऊदी अरब में टूर्नामेंट खेलने से इंकार कर दिया था। फिलहाल पांच सदस्यीय महिला टीम में शेष सदस्यों की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है।

भावना कंठ के बाद एक और बेटी ‘अद्विका झा’ उड़ाएगी फाइटर प्लेन

मधुबनी : देश में बेटियां परचम लहरा रही हैं। अपनी लगन और मेहनत से बिहार का नाम लगातार रौशन हो रहा है। अब एक और बेटी ने अपने बिहार का नाम रौशन किया है। बिहार के मधुबनी जिले के लखनौर प्रखंड स्थित उमरी गांव की बेटी अद्विका झा ने कुछ ऐसा काम किया है कि पढ़कर आपको भी फक्र होगा। अद्विका की लगन और मेहनत रंग लायी है और अब वह एक पायलट बनेगी।
भावना कंठ के बाद अद्विका बिहार की दूसरी महिला है जो फाइटर प्लेन उड़ाएगी। आर्मी और बीएसएफ की तरह इंडियन एयरफोर्स भी अब बेटियों को दुश्मन के विरुद्ध और खतरनाक बनाना चाहता है। ताकि दुश्मन भी भारतीय बेटियों की ताकत को जान ले। इसके लिए एयरफोर्स ने महिला फ्लाइंग अफसरों के हाथ लड़ाकू विमानों की कमान सौंपने का काम शुरू कर दिया है।

शुरुआत तो फ्लाइंग अफसर अवनी चतुर्वेदी से हो चुकी है, लेकिन इसी कड़ी में इंडियन एयरफोर्स में भावना कंठ के बाद अद्विका ने भी इतिहास रच दिया है। अभी फ्लाइंग अफसर भावना अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में तैनात है और उसने अंबाला एयरबेस से ही मिग-21 बिसन एयरक्राफ्ट में उड़ान भरी थी। ये जांबाज बेटी इस लड़ाकू विमान में 30 मिनट तक आसमान में रही तो अद्विका डेढ़ साल के प्रशिक्षण के बाद भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट और मालवाहक प्लेन को उड़ाते दिखेगी। अद्विका का चयन भारतीय वायुसेना के शॉर्ट सर्विस कमीशंड फॉर वीमेन कोर्स में पायलट के लिए हुआ है।

जुलाई से हैदराबाद स्थित वायुसेना अकादमी में अद्विका का प्रशिक्षण शुरू होगा। प्रशिक्षण के डेढ़ साल बाद वह फाइटर प्लेन उड़ाकर दुश्मनों होश ठिकाने ला देगी। अद्विका डॉ अजय कुमार की बेटी हैं। वह दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय में प्रवक्ता पद पर हैं। जबकि उनकी मां एक गृहिणी हैं।

अद्विका ने बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। उसने दिल्ली के केंद्रीय विद्यालय से 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा पास की। भारतीय वायुसेना में पायलट के लिए चुने जाने के बाद अद्विका काफी खुश है। अब अद्विका को उस दिन का इंतजार है जब देश के दुश्मनों को वह धुल चटाएगी। अद्विका को खुशी है कि उसे वायुसेना के जरिए देश की सेवा करने का मौका मिला है।

बढ़ी 23 लाख सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने 23 लाख से अधिक विश्वविद्यालयों व कॉलेजों से सेवानिवृत्त शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे दिया है। सरकार ने इनकी पेंशन में 18 हजार रुपये तक का इजाफा कर दिया है। इन शिक्षक-गैर शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया गया है। सरकार के इस फैसले से केंद्रीय विश्वविद्यालयों व यूजीसी के आधीन डीम्ड विश्वविद्यालयों के 25 हजार पेंशनरों को फायदा पहुंचेगा। इसके अलावा राज्यों के उन विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिनके यहां पर सातवां वेतन आयोग लागू हो चुका है। इसमें आठ लाख शिक्षक व 15 लाख गैर-शिक्षक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने खुद सरकार के इस फैसले की जानकारी ट्विटर के माध्यम से दी।

दिवंगत पिता के प्रति

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

सूरज के साथ-साथ
सन्ध्या के मंत्र डूब जाते थे,
घंटी बजती थी अनाथ आश्रम में
भूखे भटकते बच्चों के लौट आने की,
दूर-दूर तक फैले खेतों पर,
धुएँ में लिपटे गाँव पर,
वर्षा से भीगी कच्ची डगर पर,
जाने कैसा रहस्य भरा करुण अन्धकार फैल जाता था,
और ऐसे में आवाज़ आती थी पिता
तुम्हारे पुकारने की,
मेरा नाम उस अंधियारे में
बज उठता था, तुम्हारे स्वरों में।
मैं अब भी हूँ
अब भी है यह रोता हुआ अन्धकार चारों ओर
लेकिन कहाँ है तुम्हारी आवाज़
जो मेरा नाम भरकर
इसे अविकल स्वरों में बजा दे।

(२)

‘धक्का देकर किसी को
आगे जाना पाप है’
अत: तुम भीड़ से अलग हो गए।

‘महत्वाकांक्षा ही सब दुखों का मूल है’
इसलिए तुम जहाँ थे वहीं बैठ गए।
‘संतोष परम धन है’
मानकर तुमने सब कुछ लुट जाने दिया।

पिता! इन मूल्यों ने तो तुम्हें
अनाथ, निराश्रित और विपन्न ही बनाया,
तुमसे नहीं, मुझसे कहती है,
मृत्यु के समय तुम्हारे
निस्तेज मुख पर पड़ती यह क्रूर दारूण छाया।

(३)

‘सादगी से रहूँगा’
तुमने सोचा था
अत: हर उत्सव में तुम द्वार पर खड़े रहे।
‘झूठ नहीं बोलूँगा’
तुमने व्रत लिया था
अत:हर गोष्ठी में तुम चित्र से जड़े रहे।

तुमने जितना ही अपने को अर्थ दिया
दूसरों ने उतना ही तुम्हें अर्थहीन समझा।
कैसी विडम्बना है कि
झूठ के इस मेले में
सच्चे थे तुम
अत:वैरागी से पड़े रहे।

(४)

तुम्हारी अन्तिम यात्रा में
वे नहीं आए
जो तुम्हारी सेवाओं की सीढ़ियाँ लगाकर
शहर की ऊँची इमारतों में बैठ ग थे,
जिन्होंने तुम्हारी सादगी के सिक्कों से
भरे बाजार भड़कीली दुकानें खोल रक्खी थीं;
जो तुम्हारे सदाचार को
अपने फर्म का इश्तहार बनाकर
डुगडुगी के साथ शहर में बाँट रहे थे।

पिता! तुम्हारी अन्तिम यात्रा में वे नहीं आए
वे नहीं आए

पिता को भी देना चाहिए अब पितृत्व अवकाश

नयी दिल्ली : बच्चे को माँ के साथ पिता की भी जरूरत है मगर हमारे समाज में ऐसा नहीं दिखता। पितृत्व की भूमिका को व्यवस्थाओं और प्रावधानों ने सीमित करके रखा है। यूनीसेफ की ताजा रि‍पोर्ट के अनुसार भारत दुनिया के उन 90 देशों में शामिल है जहां कि पितृत्व को लेकर कोई राष्टीय नीति नहीं है। निजी ढांचों में तो नवजात बच्चों की देखभाल और उनके साथ समय बि‍ताने के लिए पर्याप्त वैतनि‍क छुट्टियों तक का प्रावधान नहीं हो पाया है। केवल भारत ही नहीं, रि‍पोर्ट के मुताबि‍क दुनि‍या में नए-नए आए दो ति‍हाई तकरीबन (9 करोड) बच्‍चे ऐसे हैं जि‍नके पि‍ताओं को एक भी दि‍न का वैतनि‍क अवकाश नहीं मि‍लता है।
हमें यह बात सोचनी चाहिए कि भारत दुनिया के उन संवेदनशील देशों में है जहां कि नवजात मृत्यु दर एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह एक बड़े कलंक की तरह है, लेकिन इससे निपटने के उपायों में केवल एक पक्ष ही शामिल क्यों हो। भारत में बच्चों की स्थिति वैसे ही नाजुक है। नवजात बच्चों की तो और भी ज्यादा। देखिए कि भारत में वर्ष 2008 से 2015 के बीच आठ साल में 62.40 लाख नवजात शिशु मृत्यु का शिकार हुए हैं। जन्म के 28 दिन के अंदर मरने वाले इन बच्चों की यह संख्या थोड़ी नहीं है। देश के चार राज्यों (उत्तरप्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्यप्रदेश) में देश की कुल नवजात मौतों की संख्या में से 56 प्रतिशत मौतें दर्ज होती हैं। एक महीने से पांच साल की उम्र में बच्चों की मृत्यु का जितना जोखिम होता है, उससे 30 गुना ज्यादा जोखिम इन 28 दिनों में होता है। इसलिए सबसे बेहतर है कि इन 28 दिनों में बच्चों के खतरे को कम से कम करने के लिए उन्हें ज्यादा सुरक्षा, ज्यादा ध्यान और लाड़—प्यार दिया जाए, लेकिन ऐसा हो कहां पाता है। अपने आसपास ही देख लीजिए। कितने पिताओं को इसके लिए व्य​वस्थित रूप से छुटिटयां मिल पाती हैं, या दूसरी सुविधाएं मिल पाती हैं।
एकल परिवार और नौकरीपेशा महि‍लाओं की बढती संख्‍या के कारण बच्चों की पर​वरिश का संकट और भयंकर रूप से बढ़ा है। परंपराओं में गर्भ से लेकर मातृत्व को प्राप्त होने तक और उसके बाद एक नवजात शिशु की परवरिश के जो ताने—बाने थे, वह भी तो इसके साथ ही साथ बिखर रहे हैं। देखिए कि आठ सालों में 26.30 लाख नवजात शिशुओं की मृत्यु समय पूर्व जन्म लेने के कारण हुई यानी 948 बच्चे हर रोज समय से पहले जन्म लेने के कारण ही मर जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन मानता है कि शिशु का समयपूर्व जन्म मृत्यु और जीवन में किसी न किसी किस्म की विकलांगता का बड़ा कारण बनता है। अब इस बात पर भी गौर किया जाना चाहिए कि समय पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों की क्या चुनौतियां होती होंगी।
आखिर यह हालात बन ही क्यों रहे कि बड़ी संख्या में पहले ही जन्म हो रहे हैं। और यदि हो भी रहे हैं तो ऐसी परिस्थितियों में पिताओं की भूमिका कहीं बढ़कर हो जाती है, क्योंकि जन्म देने वाली ​स्त्री के पास उस परिस्थिति को भुगतने के सिवाय बहुत विकल्प नहीं होते, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में निर्णय लेने से लेकर उसे अंजाम तक पहुंचा देने का काम तो केवल पिता का होता है। इस बात पर गौर भले ही नहीं किया जाता, पर मातृत्व की ​तरह पितृत्व भी तो उन्हीं ​चुनौतियों से गुजरता है।
वैसे इस बात पर अब चर्चा शुरू हो गई है। इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि पितृत्व को एक व्यवस्थित स्वरूप देकर उसे कानून प्रावधानों और नीतियों में लाया जाए। देखना है कि यह कब तक हो पाता है।

(साभार)

पिता ने लाड़ली बिटिया की शादी के कार्ड में छपवाया खर्च; लिखा- न आएं शराब पीकर

मुरैना (ग्वालियर) : दहेज बंदी का पालन गुर्जर समाज में शुरू हो गया है जिससे कि समाज बिना दहेज के बिटिया की विदाई को तैयार हैं। इसकी शुरूआत एक पिता ने अपनी बेटी की शादी से कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक पिता का नाम इन्द्र सिंह गुर्जर है और वो अपनी बिटिया के विवाह में कोई दहेज नहीं दे रहे हैं इसका प्रमाण बिटिया की शादी के लिए छपवाया गया कार्ड है। पूजा के विवाह के कार्ड में संत हरि गिरि महाराज द्वारा तय किए गए खर्च का पूरा उल्लेख है। जिसमें लिखा गया है कि विवाह पढ़ने आने वाले पंडित जी को 1100 रुपए की दक्षिणा दी जाएगी। इसके अलावा थाली 5100 रुपए, लगुन 1100 रुपए, दरवाजा 1100 रुपए, भात 5100 रुपए, अंक माला 10 रुपए, टीका 50 रुपए, पान 1100 रुपए व पांच बर्तन और कूलर, अलमारी, पलंग प्रदान किए जा रहे हैं। बारात में केवल 100 बारातियों का सत्कार किया जाएगा। पिता ने बताया कि उनकी बिटिया पूजा का विवाह अतेन्द्र सिंह गुर्जर के साथ 20 जून को है। शादी कार्ड पर न केवल दहेज बंदी का उल्लेख है बल्कि शराबबंदी का असर भी नजर आ रहा है। कार्ड पर स्पष्ट रूप से नोट लिखा गया है कि कोई भी व्यक्ति शराब पीकर शादी समारोह में न आएं। कार्ड में कराए गए इस नोट में बताया गया है कि यह आदेश संत हरि गिरि महाराज का है। लड़की के चाचा ने बताया कि समाज में शराब बंदी पहले ही हो चुकी है और अब दहेज बंदी का भी पालन हो रहा है। यह सब संत की कृपा से हुआ है।
पूजा के विवाह का शादी कार्ड बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की अपील भी कर रहा है। कार्ड के एक हिस्से में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और न दहेज लेंगे न दहेज देंगे की अपील की गई है। इसके अलावा एक शादी कार्ड पर छपा स्लोगन सब कुछ जाहिर कर रहा है।
स्लोगन कुछ इस तरह है कि –
“मृत्यु भोज और माला छूटी, खाना छूटा मेज पे। बाजे छूटे दारू छूटी, अब की चोट दहेज पे।।”

गर्मी से राहत देंगे ये शीतल पेय

आमतौर पर गर्मी लगी नहीं कि आप कोल्ड ड्रिंक की ओर दौड़ लगा देते हैं जो कि आपकी जेब पर भारी पड़ते हैं मगर घर में ही आसानी से ऐसे पेय तैयार किये जा सकते हैं जो आपको तरोताजा रखेंगे।

चंदन का शर्बत

सामग्री :1 किलो चीनी, 3 लीटर पानी, 10 ग्राम चंदन पाउडर, 2 बड़ा चम्मच नींबू का रस , 2 बड़ा चम्मच दूध


विधि : सबसे पहले चंदन पाउडर को एक सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। एक बड़े बर्तन में चीनी और पानी मिलाकर मीडियम आंच में उबलने के लिए रखें। कुछ देर बाद आंच तेजकर इसे खौलाएं। जब पानी में अच्छी तरह उबाल आ जाए तो इसमें दूध डालकर 3-4 मिनट तक और उबालें। इसके बाद इसमें नींबू का रस डालकर 4-5 मिनट तक और उबालें। इसकी जाँच करें कि एक तार की चाशनी बनी है या नहीं। अगर चाशनी बन गई है तो इसे आंच से उतार  लें और इसमें चंदन की पोटली डाल दें। इस शरबत को रातभर ऐसे ही रख दें। अगले दिन इसे छानकर बोतल में भर लें।

                             स्ट्रॉबेरी लेमोने़ड

सामग्री 500 ग्राम स्ट्रॉबेरी, आधा कप नींबू का रस, एक कप चीनी, एक गिलास पानी, 3 गिलास सोडा, 4 आइस क्यूब
सजावट के लिए : स्ट्रॉबेरी स्लाइस, नींबू के स्लाइस

विधि : स्ट्रॉबेरी के हरे डंठल निकालकर अच्छे से धो लें। अब बाकी स्ट्रॉबेरी को दो भागों में काट लें। एक स्ट्रॉबेरी और एक नींबू को स्लाइस में काटकर अलग रख लें सजाने के लिए। अब स्ट्रॉबेरी को अच्छे से पीस लें और छलनी से छान लें। स्ट्रॉबेरी के जूस को एक जग में डाल लें। पानी और चीनी मिलाकर अच्छे से घोलें। अब स्ट्रॉबेरी के जूस में नींबू का रस और चीनी का पानी डालकर अच्छे से मिलाएं। स्ट्रॉबेरी लेमोनेड तैयार है। गिलास में सोडा, लेमनेड डालें और इनके ऊपर लेमन व स्ट्रॉबेरी स्लाइस लगाकर गार्निश कर सर्व करें।