मे साइ (थाईलैंड) : पानी से भरी गुफा से किशोर थाई फुटबॉल टीम को बाहर निकालने वाले बचावकर्मी अब अपने कार्यस्थल को साफ कर रहे हैं क्योंकि उनके साहसिक अभियान के लिए उस जगह को संग्रहालय में तब्दील करने की योजना है।
एक फिल्म प्रोडक्शन हाउस तो गोताखोरों , चिकित्साकर्मियों एवं अन्य बचावकर्मियों के साहसिक कारनामे को हॉलीवुड में बड़े पर्दे पर उतारने की योजना पर पहले ही काम शुरू कर चुका है। इन बचावकर्मियों ने ‘ वाइल्ड बोर्स ’ फुटबॉल टीम को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी थी।
बचाव का चौंकाने वाला फुटेज जारी किया गया जिसमें 11 से 16 साल के बच्चों को स्ट्रेचर पर सुरक्षित ले जाते हुए दिखाया गया है। ये बच्चे अस्पताल में बिस्तर पर खुश नजर आ रहे हैं। उन्हें और मरीजों से अलग रखा गया है क्योंकि डॉक्टर यह सुनिश्चित हो लेना चाहते हैं कि गुफा के अंदर कहीं वे किसी संक्रमण के शिकार तो नहीं हो गये।
बचावकर्मियों ने थाम लुआंग गुफा के मुहाने पर लगाए गए औद्योगिक पानी पंप , भारी मशीनें , एवं अन्य उपकरण वहां से हटा लिए हैं।
बचावदल के प्रमुख नारोंगसाक ओसोट्नकोर्न ने संवाददाताओं से कहा कि इस जगह को संग्रहालय में तब्दील किया जाएगा जहां इस अभियान में इस्तेमाल लाये गये कपड़े एवं उपकरण प्रदर्शित किये जाएंगे।
थाईलैंड में गुफा बचाव स्थल को संग्रहालय में किया जाएगा तब्दील
राकेश सिन्हा, सोनल मानसिंह, रघुनाथ महापात्र और राम सकल राज्यसभा के लिये मनोनीत
नयी दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राकेश सिन्हा, सोनल मानसिंह, रघुनाथ महापात्र और राम सकल को राज्यसभा के लिये मनोनीत किया है । सूत्रों ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए और प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने इन चार लोगों को राज्यसभा के लिये मनोनीत किया।
उत्तर प्रदेश के किसान नेता राम सकल ने दलित समुदाय के कल्याण एवं बेहतरी के लिये काम किया है। किसान नेता के रूप में उन्होंने किसानों, श्रमिकों के कल्याण के लिये काम किया । वह तीन बार सांसद रह चुके हैं और उन्होंने उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया ।
सिन्हा दिल्ली स्थित विचार समूह ‘इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के संस्थापक और मानद निदेशक हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय में मोतीलाल नेहरू कालेज में प्रोफेसर और भारतीय सामाजिक विज्ञान शोध संस्थान के सदस्य भी हैं। वह नियमित रूप से समाचार पत्रों में आलेख लिखते हैं ।
महापात्र का पारंपरिक स्थापत्य और धरोहरों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्य में हिस्सा लिया। उनके प्रसिद्ध कार्यों में संसद के सेंट्रल हॉल में लगी भगवान सूर्य की छह फुट लम्बी प्रतिमा और पेरिस में बुद्ध मंदिर में लकड़ी से बनी बुद्ध की प्रतिमा शामिल है। मान सिंह प्रसिद्ध भरतनाट्यम और ओडिसी नृत्यांगना हैं और उन्होंने छह दशकों से इस क्षेत्र में योगदान दिया है।
पाकिस्तान चुनाव से पहले हाफिज सईद को झटका, फेसबुक ने पार्टी का पेज किया ब्लॉक
इस्लामाबाद : पाकिस्तान में आम चुनाव से पहले फेसबुक ने इस्लामी मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) के कई अकाउंटों और पेजों को बंद कर दिया है। इसे मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की अगुवाई वाली जमात-उद-दावा के राजनीतिक संगठन के लिए एक झटका माना जा रहा है। यह जानकारी आज एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आई है। फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि यह सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है कि उनकी सोशल नेटवर्किंग साइट पाकिस्तान, भारत, ब्राजील , मैक्सिको और अन्य देशों में होने वाले चुनावों में सकारात्मक बातचीत का समर्थन करेगी और हस्तक्षेप को रोकेगी।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने खबर दी है कि हाल ही में फेसबुक के अधिकारियों ने पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) से संपर्क किया था और 25 जुलाई को आम चुनाव से पहले विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के फर्जी पेजों की पहचान करने और हटाने में स्थानीय अधिकारियों की मदद करने का प्रस्ताव दिया था। ईसीपी ने एमएमएल को एक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता नहीं दी है। इस साल अप्रैल में अमेरिका ने 2008 में मुंबई हमले को अंजाम देने वाले लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) आतंकी संगठन के साथ संबंधों को लेकर एमएमएल को विदेशी आतंकी संगठनों की सूची में डाल दिया था।
एमएमएल को ईसीपी से मान्यता नहीं मिलने के बाद जेडीयू प्रमुख सईद ने घोषणा की थी कि उसकी पार्टी के करीब 200 प्रत्याशी कम चर्चित अल्ला-ओ-अकबर तहरीक (एएटी) के बैनर तले चुनाव लड़ेगी। इस पार्टी का पहले ही चुनाव आयोग में पंजीकरण हो रखा है। एमएमएल के प्रवक्ता तबिश क्यूम ने संवाददाताओं को बताया कि फेसबुक ने बिना कारण बताए उसके चुनाव प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं के कई अकाउंट बंद कर दिए हैं।
मोहम्मद कैफ ने प्रतिस्पर्द्धी क्रिकेट से संन्यास लिया
नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के सर्वश्रेष्ठ फील्डरों में शुमार रहे निचले क्रम के उम्दा बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने भारत के लिये आखिरी मैच खेलने के करीब 12 साल बाद आज सभी तरह के प्रतिस्पर्द्धी क्रिकेट को अलविदा कह दिया ।
सैतीस बरस के कैफ ने 13 टेस्ट, 125 वनडे खेले थे और उन्हें लाडर्स पर 2002 में नेटवेस्ट ट्राफी फाइनल में 87 रन की मैच जिताने वाली पारी के लिये जाना जाता है।
कैफ ने बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष सी के खन्ना और कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी को ईमेल भेजकर लिखा ,‘‘ मैं आज सभी तरह के प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास ले रहा हूं ।’’
वह विश्व कप 2003 में फाइनल खेलने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थे । युवराज सिंह के साथ वह अंडर 19 क्रिकेट से चमके थे । उत्तर प्रदेश के लिये रणजी ट्राफी जीतने वाले कैफ ने आखिरी प्रथम श्रेणी मैच छत्तीसगढ के लिये खेला था । उन्होंने लिखा ,‘‘ नेटवेस्ट ट्राफी में मिली जीत को 16 साल हो गए हैं और आज मैं संन्यास ले रहा हूं । मैं भारत के लिये खेलने का मौका दिये जाने के लिये बोर्ड का शुक्रगुजार हूं । ’’
सौरव गांगुली की अगुवाई में भारतीय टीम जब भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सुनहरे पन्ने लिख रही थी तो युवराज के साथ कैफ उसका अभिन्न अंग थे । कैफ ने 13 टेस्ट में 32 की औसत से 2753 रन बनाये । वहीं 125 वनडे में उनका औसत 32 रहा । कैफ हिन्दी क्रिकेट कमेंटेटर के रूप में दूसरी पारी शुरू कर चुके हैं ।
आठ वर्षीय योग चैंपियन ईश्वर शर्मा बना ‘ब्रिटिश इंडियन ऑफ दी ईयर’
नयी दिल्ली : योग के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धि हासिल करने के लिए भारतीय मूल के एक आठ वर्षीय छात्र को ‘ब्रिटिश इंडियन ऑफ दी ईयर’ पुरस्कार से नवाजा गया है। वह अंडर-11 ब्रिटिश राष्ट्रीय योग चैंपियन का विजेता है। ईश्वर शर्मा नाम के इस बच्चे ने व्यक्तिगत और कलात्मक दोनों योग में कई सम्मान हासिल किए हैं। पिछले महीने उसने कनाडा के विन्निपेग में आयोजित ‘वर्ल्ड स्टुडेंट गेम्स – 2018’ में ग्रेट ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया था।
अंडर-11 ब्रिटिश राष्ट्रीय योग चैंपियन विजेता हैं ईश्वर
केंट के सेंट माइकल्स प्रीप्रेटरी स्कूल में पढ़ने वाले ईश्वर ने कहा, ‘मेरा मानना है कि मैं किसी और के बजाय खुद से मुकाबला कर रहा हूं। यह हर मुश्किल को आसान करने के लिए मुझे चुनौती देता है। मैं हमेशा योग का छात्र रहूंगा। मैं अपने शिक्षकों का आभारी हूं।’
व्यक्तिगत और कलात्मक योग में कई सम्मान हासिल कर चुके हैं
बर्मिंघम में आयोजित छठे वार्षिक सम्मान समारोह में ईश्वर को युवा विजेता श्रेणी में ‘ब्रिटिश इंडियन ऑफ द ईयर’ से सम्मानित किया गया। ईश्वर के पिता विश्वनाथ ने कहा कि उसकी उपलब्धियों पर हमें गर्व है। उसने बेहतरीन अकादमिक प्रदर्शन किया है। हम चाहते हैं कि वह अपनी जीवनशैली और आदतों से बड़ों और बच्चों को प्रेरित करे। मैसूर से संबंध रखने वाले ईश्वर समय-समय पर मैसूर आकर भी योग का प्रशिक्षण लेते हैं। मैसूर को प्रतिष्ठित योग गुरुओं का गढ़ कहा जाता है।
अमेरिकी स्कूलों में पढ़ाया जाएगा भारत की गदर पार्टी का आन्दोलन
एस्टोरिया : भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाली गदर पार्टी की अमेरिकी धरती पर स्थापना और उसके आन्दोलन के बारे में अमेरिका के ओरेगन राज्य के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया जाएगा। ये घोषणा इस पार्टी की स्थापना बैठक के 105 साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में ओरेगन राज्य की गवर्नर केट ब्राउन की मौजूदगी में वहां की अटार्नी जनरल एलन एफ. रोसेनब्लूम ने की। ओरेगन राज्य में मनाई गई पार्टी की स्थापना बैठक की 105वीं सालगिरह पर राज्य के गवर्नर की उपस्थिति में अटार्नी जनरल ने की इसे स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा की।गदर मेमोरियल फाउंडेशन की तरफ से आयोजित इस समारोह में गवर्नर ने भी गदर पार्टी की स्थापना का इतिहास एस्टोरिया शहर से जुड़े होने को लेकर प्रसन्नता जाहिर की। कोलंबिया नदी के किनारे हुए समारोह में ओरेगन ही नहीं वाशिंगटन राज्य, कैलिफोर्निया और यहां तक कि कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया से भी भाग लेने के लिए सैकड़ों भारतीय पहुंचे हुए थे। इस समारोह का आयोजन उस भवन के बराबर में बने पार्क में किया गया था, जहां 105 साल पहले गदर पार्टी की पहली स्थापना बैठक आयोजित की गई थी।
गदर पार्टी – एस्टोरिया में वर्ष 1910 में करीब 74 भारतीय परिवार रोजगार के लिए पहुंचे थे, जिनमें अधिकतर पंजाब के सिक्ख थे। ये सभी यहां मजदूर का काम करते थे। इंग्लैंड की आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में क्रांति आंदोलन से जुड़ी गतिविधियां चलाने के आरोप लगने पर अमेरिका चले आए लाला हरदयाल ने इन सभी भारतीयों को संगठित किया। इसके बाद 23 अप्रैल, 2013 को एस्टोरिया में गदर पार्टी की स्थापना की घोषणा की गई। इसका संस्थापक अध्यक्ष सरदार सोहन सिंह भाकना को बनाया गया।
इस पार्टी ने वहां युगांतर आश्रम नाम से अपना मुख्यालय बनाया और हिंदी, गुरमुखी और उर्दू में हिंदुस्तान गदर नाम से अखबार निकालकर विदेशों में बसे भारतीयों को भेजना शुरू किया। पहले विश्व युद्ध के समय इस पार्टी ने जर्मनी की मदद से अफगानिस्तान के काबुल में निर्वासित आजाद भारत सरकार की स्थापना की और अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। अंग्रेजों ने अपने साथी देशों की मदद से जर्मनी से आने वाले हथियारों के जहाज डुबो दिए और गदर पार्टी के सदस्यों को पकड़कर कई को फांसी चढ़ा दिया। लेकिन इस पार्टी की तरफ से जगह-जगह चिपकाए गए पर्चों से फैलाई गई लहर से ही भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद सरीखे क्रांतिकारियों ने प्रेरणा ली थी।
एस्टोरिया में बनाया गया है मेमोरियल
एस्टोरिया से इस पार्टी का संबंध कुछ साल पहले स्थानीय इतिहासकार योहाना आग्डेन ने अपने शोध के दौरान ढूंढा था। उसने इस बारे में एस्टोरिया सिटी काउंसिल को लिखा, जिसके बाद शहर के मेयर ने वर्ष 2013 में इस पार्टी की स्थापना बैठक के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक पार्क में इसका मेमोरियल फलक स्थापित किया था। 2017 में ये फलक चोरी हो गया था, जिसे स्थानीय सामुदायिक नेताओं की मदद से एस्टोरिया सिटी काउंसिल ने दोबारा स्थापित कराया है।
फ्रांस ने इतिहास दोहराया, दूसरी बार बना फीफा विश्व कप विजेता
मॉस्को : फीफा 2018 के खिताबी मुकाबले में रविवार को फ्रांस ने क्रोएशिया को 4-2 से हरा दिया। इसी के साथ फ्रांस ने फुटबॉल इतिहास में दूसरी बार फीफा विश्व कप का खिताब जीत लिया। वहीं अपना सबसे शानदार वर्ल्ड कप खेल रही क्रोएशिया की टीम इस मैच में कमाल नहीं दिखा सकी और पहला विश्व कप जीतने से चूक गई। फ्रांस ने 18वें मिनट में मारियो मैंडजुकिच के आत्मघाती गोल से बढ़त बनायी लेकिन इवान पेरिसिच ने 28वें मिनट में बराबरी का गोल दाग दिया। फ्रांस को हालांकि जल्द ही पैनल्टी मिली जिसे एंटोनी ग्रीजमैन ने 38वें मिनट में गोल में बदला जिससे फ्रांस कतो हाफ टाइम तक 2-1 से आगे कर दिया।
दूसरे हाफ में क्रोएशिया वापसी करने के इरादे से उतरा लेकिन फ्रांस ने अपनी तूफान जारी रखा। पॉल पोग्बा ने 59वें मिनट में तीसरा गोल दागाकर क्रोएशिया के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। इसे कुछ देर बाद ही किलियान एमबापे ने 65वें मिनट में फ्रांस की बढ़त 4-1 कर दिया और क्रोएशिया के लिए जीत के सारे दरवाजे बंद कर दिए। हालांकि 69वें मिनट में फ्रांस के कप्तान और गोलकीपर लॉरिस की गलती से क्रोएशिया के लिए मैंडजुकिच ने दूसरा गोल दागा। इसके बाद भी क्रोएशिया ने हार नहीं मानी। उसने कुछ अच्छे प्रयास किये लेकिन उसके शॉट बाहर चले गये। इस बीच इंजुरी टाइम में पोग्बा को अपना दूसरा गोल करने का मौका मिला लेकिन वह चूक गये। रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही फ्रांस दूसरी बार विजेता बनकर जश्न में डूब गया।
तिपहिया रिक्शों का मजबूत विकल्प बन सकता है यह सस्ता’छोटू’ वाहन
नयी दिल्ली : Bajaj Qute को 2012 ऑटो एक्स्पो में पेश किया गया था। उस वक्त इसको RE60 कोडनेम के तहत पेश किया गया था। फाइनली, इसको भारत सरकार ने भी सड़क पर चलने की वैधता दे दी है। Bajaj Qute एक क्वॉड्रिसाइकल है। इसमें 216सीसी, सिंगल सिलिंडर, वाटर कूल्ड पेट्रोल इंजन दिया गया है। इस छोटे से इंजन को 4 स्पीड गियरबॉक्स से लैस किया गया है। बजाज का दावा है कि Qute 70 किलोमीटर प्रति घंटा की टॉप स्पीड से दौड़ सकता है और यह 35 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज दे सकता है।
चार यात्रियों के लिए बने इस वाहन में 2+2 या 1+3 का कंफिगरेशन दिया जा सकता है। इसका वज़न महज 400 किलोग्राम होगा। 2.75 m इसकी लंबाई, 1.3 m चौड़ाई होगी। इसमें 44 लीटर की बूटस्पेस क्षमता होगी।
अमेरिका में इसको 2,000 अमेरिकी डॉलर में बेचा जाता है। निकट भविष्य में इसके एलपीजी या सीएनजी विकल्प में भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इसको हल्के बॉडी शेल पर बनाया गया है और इसमें मजबूत स्टील और प्लास्टिक मटीरियल्स का इस्तेमाल किया गया है। ये भारत में ऑटो रिक्शा के विकल्प के तौर पर तेजी से उभर सकते हैं।
इसमें चार लोगों के बैठने की व्यवस्था है और यह चारों तरफ दरवाजों से बंद है। ऐसे में यह तिपहिया ऑटो रिक्शों के मुकाबले कहीं अधिक सेफ है। बजाज इसे 1.5 लाख रुपये के प्राइस रेंज में लॉन्च कर सकती है। इसे प्राइवेट कार खरीदारों को नहीं दिया जाएगा।
बिहार पुलिस में महिलाओं की संख्या और बढ़ेगी
पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पुलिस में महिलाओं की संख्या 2006 में दो प्रतिशत से भी कम थी। आज उनकी संख्या 15 प्रतिशत से ज्यादा है। आनेवाले दिनों में इनकी संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि महिलाओं को जितना आरक्षण दिया गया है उतनी संख्या में अगले पांच वर्षों में महिलाएं पुलिस में होंगी। अब बिहार में अनुसूचित जनजाति की महिलाओं की पुलिस बटालियन भी है। ऐसा करनेवाला बिहार देश का पहला राज्य है। देशभर में कहीं भी ऐसी बटालियन नहीं है। बिहार में एसटी महिला बटालियन में 675 पद थे, लेकिन 222 ही चयनित हो पाई हैं। इसकी एक वजह है कि बिहार में अनुसूचित जनजाति की संख्या कम है।
पहले अपराधियों को पकड़ने में पुलिसवाले दस कदम दौड़ते ही हांफने लगते थे। थानों में एफआईआर के लिए कागज मांगा जाता था। अब सूरत बदल गई है। थानों के लिए भवन का निर्माण हुआ। गाड़ियां खरीदीं गईं और अत्याधुनिक हथियार दिए गए। वर्दी के लिए रुपए दिए जा रहे हैं।
बिहार में गंदे पानी से बनेगा दुनिया में सबसे सस्ता पेयजल
दरभंगा : बिहार में शुरू की गई एक नवोन्मेषी और लागत प्रभावी पेयजल परियोजना से प्रदेश के लोगों को दुनिया में सबसे सस्ता पीने का पानी मिलेगा। परियोजना के तहत लोगों को 50 पैसे में एक लीटर पीने का पानी मुहैया करवाने का वादा किया गया है। सुलभ इंटरनेशनल ने दरभंगा में शनिवार को ‘सुलभ जल’ नाम से इस परियोजना का शुभारंभ किया। इस परियोजना में तालाब के गंदे पानी को स्वच्छ पेयजल में बदला जाएगा।
सामाजिक संगठन ने एक विज्ञप्ति में कहा, “ एक दशकों पहले सुलभ इंटरनेशनल द्वारा बिहार में ही सुलभ शौचालय की संकल्पना की नींव पड़ी थी जिसका प्रसार देशभर में हुआ। आज (शनिवार) एक नवोन्मेषी परियोजना की नींव रखी गई जिसके तहत दुनिया में सबसे सस्ता पीने का पानी महज 50 पैसे में एक लीटर मुहैया करवाया जाएगा।”
संगठन ने कहा, “सुलभ जल शुद्धिकरण के विविध चरणों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। यह नदी या तालाब जैसे जलाशयों से स्वच्छ व सुरक्षित जल मुहैया करवाएगा।” सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने दरभंगा नगर निगम परिसर स्थित हरिबोल तालाब में परिजयोजना की नींव रखी। पाठक ने कहा, “परियोजना जल्द शुरू की जाएगी। दिसंबर तक यह चालू हो जाएगी।”
इस परियोजना पर करीब 20 लाख रुपये की लागत आएगी और इसमें 8,000 लीटर पेयजल रोजाना निकाला जाएगा जिसकी लागत नाममात्र होगी।
उन्होंने कहा, “स्थानीय लोग और एनजीओ इसका रखरखाव कार्य संभालेंगे। समुदाय की सक्रिय भागीदारी से यह परियोजना चलेगी। इसमें रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।” प्रायोगिक परियोजना पश्चिम बंगाल के 24 परगना, मुर्शिदाबाद और नादिया जिलों में सुलभ और एक फ्रांसीसी संगठन के साथ शुरू की गई थी जो सफल रही।




