Wednesday, July 8, 2026
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दूसरों की हत्या करने वाले लोग राष्ट्रवादी नहीं हो सकते : वेंकैया नायडू

नयी दिल्ली : उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू का कहना है कि घृणा और भीड़ हत्या जैसे मामलों में शामिल लोग खुद को राष्ट्रवादी नहीं कह सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिये सिर्फ कानून पर्याप्त नहीं है बल्कि सामाजिक व्यवहार में बदलाव लाना भी बहुत जरूरी है। उपराष्ट्रपति ने भीड़ हत्या जैसी घटनाओं के राजनीतिकरण पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को राजनीतिक दलों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, सामाजिक बदलाव की जरूरत है)। यह इस पार्टी या उस पार्टी की वजह से नहीं है। जैसे ही आप इन्हें दलों से जोड़ते हैं, मुद्दा खत्म हो जाता है। बेहद स्पष्ट तरीके से बता दूं कि यही हो रहा है। घृणा और भीड़ हत्या की घटनाओं के बारे में सवाल करने पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह कोई नया चलन नहीं है, पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं।
पीटीआई को दिये गए एक इंटरव्यू में नायडू ने कहा, इसके लिए सामाजिक व्यवहार को बदलना होगा…जब आप किसी दूसरे की हत्या कर रहे हैं, तो खुद को राष्ट्रवादी कैसे कह सकते हैं। धर्म, जाति, रंग और लिंग के आधार पर आप भेदभाव करते हैं। राष्ट्रवाद, भारत माता की जय का अर्थ बहुत व्यापक है। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ चीजों से सिर्फ कानून के माध्यम से नहीं निपटा जा सकता। इनपर लगाम लगाने के लिए सामाजिक बदलाव जरूरी है।
पिछले कुछ सालों में देश के विभिन्न भागों में हुई भीड़ हत्या की घटनाओं को लेकर सरकार कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों के निशाने पर है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में नौ राज्यों में भीड़ हत्या की घटनाओं में 40 लोगों की जान गई है। नायडू ने कहा, जब निर्भया मामला आया, चारों ओर निर्भया कानून की मांग को लेकर कोलाहल था। निर्भया कानून बन गया, लेकिन क्या वे रूके। मैं राजनीति में नहीं पड़ रहा, इन घटनाओं को सबके सामने लाने का राजनीतिक दलों का अपना तरीका है। मेरा कहना है कि इसके लिए सिर्फ एक विधेयक/कानून की जरूरत नहीं है, इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक कौशल की जरूरत है। तब सामाजिक बुराई को खत्म किया जा सकता है। मैंने संसद में यह कहा था।

देश में राष्ट्रवाद को लेकर बहस चल रहे होने की बात करते हुए नायडू ने कहा कि इसकी सही परिभाषा होनी चाहिए और इसे स्पष्ट रूप से व्यक्त किया जाना चाहिये। उपराष्ट्रपति ने कहा, मेरे अनुसार राष्ट्रवाद या भारत माता की जय का अर्थ 130 करोड़ लोगों की जय है। जाति, पंथ, लिंग, धर्म या क्षेत्र के आधार पर कोई भी भेदभाव राष्ट्रवाद के खिलाफ है।

स्वच्छता एप पर मिली सवा करोड़ शिकायतों में से 90 फीसदी का निपटारा : पुरी

नयी दिल्ली : आवास एवं शहरी विकास मामलों के मंत्रालय के स्वच्छ भारत अभियान के तहत गंदगी की शिकायत करने के लिये शुरु किये गये स्वच्छता एप पर एक साल में लगभग 1.25 करोड़ शिकायतें मिली। आवास एवं शहरी विकास मामलों के राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया है कि इनमें से लगभग 1.12 करोड़ शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है।
पुरी ने बतौर मंत्री, एक साल का अपना कार्यकाल पूरा होने पर इस अवधि में हुये कामों का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुये यह जानकारी दी। ब्लॉग के माध्यम से उन्होंने कहा कि स्वच्छता एप को देश भर में 68 लाख से अधिक लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में गंदगी की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने के लिये केन्द्रीकृत निगरानी प्रणाली पर आधारित इस एप से मिली शिकायतों के निपटान की दर 90 प्रतिशत से अधिक है। इसकी वजह से शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान का प्रभावी असर दिखने लगा है।
पुरी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2014 में नियोजित शहरी विकास के लिये शुरु की गयी अब तक की सबसे बड़ी कार्ययोजना ‘शहरी मिशन’ का असर शहरों में व्यवस्थित विकास के रूप में दिखने लगा है। पुरी ने कहा कि उन्होंने पिछले साल तीन सितंबर को कार्यभार संभाला था। उन्होंने बताया कि इससे पहले 2014 में शहरों का कायाकल्प करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के महत्वाकांक्षी ‘शहरी मिशन’ अभियान की शुरुआत हुयी थी। पुरी ने कहा कि तत्कालीन शहरी विकास मंत्री और वर्तमान उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू से एक साल पहले इस अभियान की कमान संभालने के बाद समावेशी और सतत शहरी विकास के कई अहम कार्य पूरे कर लिये गये।

इसमें उन्होंने शहरी मिशन के तहत शुरु किये गये स्वच्छ भारत अभियान, स्मार्ट सिटी मिशन, सभी के लिये आवास और शहरों में परिवहन, पानी एवं सड़क सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास से जुड़े अमृत मिशन के कामों का ब्यौरा दिया। पुरी ने बताया कि अब तक 18 राज्य और 3258 शहर खुले में शौच की समस्या से मुक्त हो चुके हैं। इनमें से 2806 शहरों को इस दावे की पुष्टि का तीसरे पक्षकार से प्रमाणपत्र भी मिल गया है। इस अभियान के तहत देश भर में 4.30 लाख सार्वजनिक शौचालय और 58.30 लाख घरों में निजी शौचालयों का निर्माण हो गया है।

पुरी ने बताया कि सभी को आवास सुविधा मुहैया कराने के लिये प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 8.55 लाख घरों का निर्माण कर लाभार्थियों को सौंप दिये गये हैं। इनमें से सात लाख घर पिछले एक साल में बनाये गये। पिछले एक साल में 6225 आवास योजनाओं के तहत 55 लाख घरों के निर्माण की मंजूरी दी गयी, जबकि इस अवधि में 17 लाख नये घरों का निर्माणकार्य शुरु किया गया।

पुरी ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पहले तीन दौर की प्रक्रिया के समयबद्ध संचालन को अहम उपलब्धि बताते हुये कहा कि चौथे चरण की योजना का भी काम शुरु कर दिया गया है। सौ स्मार्ट शहरों की सूची में शिलांग को शामिल करने के अलावा चौथे चरण में दस अन्य शहरों का चयन किया जा चुका है।

अजा/अजजा संशोधित कानून के प्रावधान पर रोक नहीं लगा सकते: सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली :उच्चतम न्यायलय ने कहा कि संसद द्वारा पारित अजा/अजजा संशोधन कानून पर इस समय रोक नहीं लगायी जा सकती परंतु उसने इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने संसद द्वारा नौ अगस्त को पारित अजा/अजजा (अत्याचारों की रोकथाम) संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सरकार से छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
संसद द्वारा पारित इस विधेयक में अजा/अजजा कानून के तहत गिरफ्तारी के मामले में चुनिंदा सुरक्षा उपाये करने संबंधी शीर्ष अदालत के फैसले को निष्प्रभावी कर दिया गया है।
शीर्ष अदालत ने 20 मार्च को अपने फैसले में कहा था कि इस कानून के तहत शिकायत दर्ज होने पर तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। न्यायालय ने इस मामले में अनेक निर्देश दिये थे और कहा था कि इस कानून के तहत दर्ज मामले में सरकारी कर्मचारी को सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति से ही गिरफ्तार किया जा सकता है।
इस मामले में याचिकाकर्ता पृथ्वी राज चौहान के वकील ने पीठ से कहा कि न्यायालय को याचिका पर सुनवाई होने तक अजा/अजजा कानून के नये प्रावधानों पर क्रियान्वयन पर रोक लगानी चाहिए। इस पर पीठ ने कहा, ‘‘कैसी रोक? यह अब कानून है और इस समय रोक नहीं लगायी जा सकती।’’ इस पर वकील ने कहा कि सरकार ने खामियों को दूर किये बगैर ही शीर्ष अदालत के फैसले को निष्प्रभावी करने के लिये नये प्रावधान जोड़ दिये हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘हमे मालूम है कि सरकार नये संशोधन ले आयी है और वे भी त्रुटियों को दूर किये बगैर ही।’’
याचिकाओं में कहा गया है कि संसद ने मनमाने तरीके से कानून में संशोधन करने और इसके पहले के प्रावधानों को इस तरह से बहाल करने का फैसला किया कि जिससे निर्दोष व्यक्ति अग्रिम जमानत के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सके।

याचिका में कहा गया है कि इस संदर्भ में अजा/अजजा (अत्याचारों की रोकथाम) कानूनी की धारा 18-ए, जो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 को इसके दायरे से बाहर रखती है, संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हनन करती है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि संशोधन के बाद कानून की संरचना से स्वतंत्रता और जवाबदेही के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन होता है।

याचिका में कहा गया है कि कानून का दुरूपयोग होने पर न्यायालय ‘‘मूक दर्शक’’ नहीं बना रह सकता क्योंकि हम सभ्य समाज में रहते हैं और इस कानून के दुरूपयोग की अनेक घटनायें हो चुकी हैं। याचिका में कहा गया है कि इस बात की आशंका है कि संशोधित कानून जल्द ही लोगों को परेशान करने और प्रारंभिक जांच के बगैर की सिर्फ आरोप के आधार पर लोगों को गिरफ्तार करने का एक नया हथियार बन जायेगा और इससे मौलिक अधिकारों का हनन होगा।
इन संशोधनों से अजा/अजजा के खिलाफ अत्याचार के आरोपी व्यक्ति के लिये अग्रिम जमानत की कोई संभावना नहीं रहेगी। इसमें आपराधिक मामला दर्ज करने के लिये किसी भी तरह की प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं है और इस कानून के तहत गिरफ्तारी के लिये किसी भी तरह की मंजूरी जरूरी नहीं होगी।

रेलवे की सुरक्षा 5 साल में सबसे बेहतर, 75 हादसों में हुईं 40 मौतें

नयी दिल्ली  : रेल यात्रियों की सुरक्षा के मानकों पर अकसर आलोचना झेलने वाले रेलवे ने इस मोर्च पर अपनी स्थिति में खासा सुधार किया है। सितंबर 2017 से अगस्त 2018 के बीच एक साल में 75 रेल हादसों में 40 लोगों की मौत हुई है। बीते 5 सालों में एक साल के भीतर रेल हादसों में यह सबसे कम नुकसान है। रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है। अधिकारी ने बताया कि सितंबर 2016 से अगस्त 2017 के बीच आठ रेल हादसे हुए थे, जिनमें 249 लोग हताहत हुए थे।
इंदौर-पटना एक्सप्रेस के पटरी से उतरने की ही घटना में 150 से अधिक यात्री मारे गए थे। वहीं 2017 से 2018 की इसी अवधि के दौरान 40 लोगों की मौत हुई । इस दौरान दो बड़ी घटनाएं हुई थीं। अगस्त 2017 में उत्कल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी, जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी और दूसरी घटना इस साल अप्रैल में उत्तर प्रदेश में हुई जिसमें एक स्कूल वैन ट्रेन की चपेट में आ गई थी। इससे वैन में सवार 13 बच्चों की मौत हो गई थी।
इसी तरह सितंबर 2013 से अगस्त 2014 के बीच 139 रेल हादसों में 275 लोगों की जान चली गई थी। 2014-2015 की इसी अवधि में 108 हादसों में 196 लोग मारे गए थे। अधिकारी ने बताया, ‘एक सितंबर 2013 से 31 अगस्त 2014 की अवधि के आंकड़ों की तुलना एक सितंबर 2017 से 31 अगस्त 2018 की अवधि से करने पर टक्करों और ट्रेन के पटरी से उतरने की घटना में हताहतों की संख्या मिलाकर देखी जाए तो ये 62 से घटकर चार हो गई है- यानि 93 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।’ उन्होंने बताया कि घायलों और मृतकों की संख्या में कमी खासतौर पर पटरियों का बड़े पैमाने पर नवीनीकरण, नियमित सुरक्षा समीक्षाएं, कर्मचारियों को सुरक्षा के लिए दिया गया बेहतर प्रशिक्षण और सुरक्षा प्रदर्शन पर करीब से निगरानी रखने के कारण आई है। इसके अलावा मानवरहित क्रॉसिंग्स को हटाए जाने के चलते भी हादसों में कमी आई है। रेलवे मार्च 2020 तक इन्हें पूरी तरह खत्म करने की योजना बना रहा है।

ओसाका बनीं ग्रैंडस्लैम जीतने वाली जापान की पहली महिला

न्यूयॉर्क : जापान की नाओमी ओसाका ने यूएस ओपन के फाइनल में 6 बार की चैम्पियन अमेरिका की सेरेना विलियम्स को हरा दिया। इस जीत के साथ ओसाका ग्रैंडस्लैम जीतने वाली जापान की पहली महिला खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने सेरेना को सीधे सेटों में 6-2, 6-4 से हरा दिया।
ओसाका ने पहला सेट आसानी से जीत लिया। दूसरे सेट में सेरेना वापसी की कोशिशें कर रही थीं। इस दौरान उनके कोच पर कथित रूप से हाथ से इशारा करने पर एक गेम का जुर्माना लगा। चेयर अंपायर ने कोच की हरकत को नियमों का उल्लंघन माना। चेयर अंपायर कार्लोस रामोस के फैसले के बाद सेरेना ने गुस्से में अपना रैकेट पटक दिया। हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांगी। सेरेना ने कहा-बेईमानी की बजाय मैं मैच हारना पसंद करुंगी: सेरेना ने गुस्से में अंपायर को कथित रूप से चोर भी कहा। इसका खंडन करते हुए सेरेना ने अंपायर से कहा, “मैं आपसे माफी मांगती हूं। मैंने कभी बेईमानी नहीं की। मेरी एक बेटी है और मैं उसके सामने एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहती हूं। बेईमानी के बजाय मैं मैच हारना पसंद करूंगी।”
ओसाका ने कहा- सेरेना से फाइनल खेलने का सपना था: खिताब जीतने के बाद ओसाका ने कहा, “मुझे पता था कि यहां सब सेरेना का समर्थन करेंगे। उनके लिए तालियां बजाएंगे। मेरा सपना था कि मैं यूएस ओपन का फाइनल सेरेना के खिलाफ खेलूं।” उन्होंने सेरेना की तरफ झुककर उन्हें धन्यवाद भी दिया।

नोकिया अगले स्मार्टफोन में देगा 5 रियर कैमरे

सैन फ्रांसिस्को : नोकिया के अगले फ्लैगशिप स्मार्टफोन नोकिया 9 के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि इसमें पेंटा-कैमरा सेटअप होगा, जिससे पिछले हिस्से में पांच कैमरे लगे होंगे। मीडिया में लीक हुई तस्वीरों से यह जानकारी मिली है। इन तस्वीरों से पता चलता है कि इस फोन के पिछले हिस्से में पांच कैमरों की प्रणाली, एलईडी फ्लैश और इंफ्रारेड रेडिएशन (आईआर) फोकसिंग एपचर्स होगा।न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक द नेक्स्ट वेब (टीएनडबल्यू) की रपट में क हा गया है कि इन पांच लेंसों की भूमिका अलग-अलग होगी, जिसमें टेलीफोटो, ब्लैक-व्हाइट, कलर और मल्टी लेंस पिक्सल सिंथेसिस शामिल हैं। इस स्मार्टफोन का आंतरिक कोड नाम टीए-1094 है, जिसमें किसी फूल के पैटर्न में पांच कैमरे दिए गए हैं। मुख्य कैमरा बीच में है और उसके चारों तरफ अन्य कैमरे और एलईडी फ्लैश और आईआर फोकसिंग अपरचर्स को दिया गया है। रपट में कहा गया है कि जेइस नोकिया के साथ लंबे समय से कैमरा पार्टनर के रूप में जुड़ा है और इस डिवाइस के कैमरों के पेटेंट के लिए कंपनी ने आवेदन भी किया है।

भारत से चोरी हुई 800 साल पुरानी बेशकीमती दो मूर्ति फिर आई देश, अमेरिका ने लौटाई

न्यूयार्क : दो अमेरिकी संग्रहालयों में प्रदर्शित भारत से चुराई गईं हजारों डॉलर की दो प्राचीन मूर्तियां अमेरिका ने भारत को लौटा दी हैं। दोनों मूर्तियां न्यूयार्क में वाणिज्य दूतावास में एक कार्यक्रम में भारत के महावाणिज्य दूत संदीप चक्रवर्ती को मैनहट्टन जिला आर्टनी साइरस वेंस जूनियर ने सौंपीं। चक्रवर्ती ने इस प्रयास की सराहना की है। पहली मूर्ति लिंगोधभवमूर्ति 12 वीं सदी की है। भगवान शिव की ग्रेनाइट से निर्मित यह ऐतिहासिक मूर्ति चोल काल की है। फिलहाल इसकी कीमत 225,000 डॉलर आंकी गई है। इसे तमिलनाडु से चुराया गया था और अलबामा के बर्मिंघम संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया था। दूसरी मूर्ति बोधिसत्व मंजूश्री की मूर्ति है। उसके हाथ में तलवार है और मूर्ति सोने के रंग में रंगी है। 12 वीं सदी की यह फिलाइट मूर्ति 1980 के दशक में बिहार में बोधगया के समीप के एक मंदिर से चुराई गई थी। वर्तमान इसकी कीमत करीब 275,000 डॉलर आंकी गई है। इसे उत्तरी कैरोलीना विश्वविद्यालय के आकलैंड आर्ट संग्रहालय से हासिल किया गया है।

पीरियड्स में न करवायें वैक्सिंग

क्या पीरियड्स के दौरान वैक्सिंग नहीं करना चाहिए? पीरियड्स के दौरान वैक्सिंग कराने से त्वचा बहुत जलन होती है? ऐसा क्यों होता है? वैक्सिंग के बाद त्वचा में होनेवाली जलन से बचना चाहती हैं, तो भूल से भी पीरियड्स के दौरान वैक्सिंग न करवाएं। पीरियड्स के दौरान, ख़ासकर शुरुआती तीन दिनों में त्वचा बेहद संवेदनशील हो जाती है, जिससे न सिर्फ़ वैक्सिंग के दौरान, बल्कि वैक्सिंग के बाद भी त्वचा में जलन महसूस होती है. अतः हमेशा ये कोशिश करें कि पीरियड्स के दौरान वैक्सिंग न कराएं। यदि पीरियड्स के दौरान वैक्सिंग कराना ज़रूरी हो, तो वैक्सिंग के बाद त्वचा का ख़ास ध्यान रखें.

वैक्सिंग के बाद होने वाली जलन से बचने के आसान घरेलू उपाय:
 वैक्सिंग के बाद हाथोें में कोल्ड क्रीम लगाएं। ऐसा करने से आपको जलन से राहत मिलेगी।
वैक्सिंग के बाद टी ट्री ऑयल भी लगा सकती हैं. इस तेल में एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो खुजली और सूजन को कम करते हैं।
यदि वैक्सिंग के बाद त्वचा में खुजली हो रही है, तो आधा कप नारियल तेल में 1 कप चीनी डालें और इस मिश्रण को स्क्रब की तरह इस्तेमाल करें।

नारियल तेल मे एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जिससे त्वचा में होने वाली खुजली दूर होती है. नारियल तेल त्वचा को पोषण भी देता है।

(साभार – मेरी सहेली)

मारुति सुजुकी ने भारत में शोकेस की पहली इलेक्ट्रिक कार, 2020 में होगी लॉन्च

नयी दिल्ली : जापान की बड़ी कार कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन ने अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स प्लान का खुलासा किया है। सुजुकी मोटर कॉर्प. के चेयरमैन ओसामू सुजुकी ने कहा कि कंपनी अगले माह से भारत में 50 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की टेस्टिंग शुरू कर देगी। उन्होंने यह बात ग्लोबल मोबिलिटी समिट ‘MOVE’ में कही। इस मौके पर सुजुकी ने अपनी इलेक्ट्रिक कार को शोकेस भी किया। सुजुकी ने कहा कि कंपनी ने टोयोटा मोटर कॉर्प. के साथ मिलकर साल 2020 तक भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल लॉन्च करने का फैसला लिया है। कंपनी अपने गुजरात प्लांट में 2020 से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में यूज होने वाली lithium-ion बैटरी का प्रोडक्शन शुरू कर देगी। ओसामू सुजुकी ने कहा कि मुझे आज यह ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि हम भारत में अगले माह से 50 इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोटोटाइप के रोड रनिंग टेस्ट को शुरू कर देंगे, ताकि इंडियन क्लाइमेट और ट्रैफिक कंडीशन के हिसाब से भारतीय कस्टमर्स के लिए सुरक्षित और आसानी से यूज होने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स डेवलप किए जा सके। सुजुकी ने यह भी कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किए बिना नहीं हो सकता है। इस संबंध में हम भारत सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। भारत में इलेक्ट्रिक कार के लिए मारुति सुजुकी 2018 वैगनआर को टेस्ट के तौर पर यूज कर सकती है और भारत में लॉन्च होने वाली पहली इलेक्ट्रिक कार भी ऐसी हो सकती है। वैगनआर लंबे समय से भारत में है और इसे नए वर्जन के साथ रिप्लेस किया जाएगा। इसमें कोई शक नहीं है कि पहला वर्जन पेट्रोल इंजन के साथ आएगा।

महिलाओं को दशकों तक सताती है यौन उत्पीड़न की याद

वाशिंगटन : किसी महिला के लिए यौन उत्पीड़न की घटना को भुला पाना आसान नहीं होता है और इस घटना की शिकार महिलाओं के जहन में इसकी यादें दशकों तक बनी रहती हैं।
एक अध्ययन के अनुसार अन्य दुखद घटनाओं और जीवन में उतार-चढ़ाव से संबंधित घटनाओं का सामना करने वाली महिलाओं के विपरीत यौन हिंसा की पीड़ितों के जहन में घटना की अधिक गहन यादें देखी गयीं, जिसे उनके लिए भुला पाना मुश्किल था।
अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ट्रेसी शोर्स ने कहा कि कुछ हद तक यह आश्चर्य की बात नहीं है कि ये यादें अवसाद और चिंता से संबंधित हैं क्योंकि इन महिलाओं को याद है कि क्या हुआ और वे इसके बारे में बहुत कुछ सोचती हैं।
पत्रिका फ्रंटियर्स इन न्यूरोसाइंस में प्रकाशित अध्ययन में शोर्स ने कहा कि लेकिन इन भावनाओं और विचारों को आमतौर पर पोस्ट ट्रॉमाटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के साथ जोड़ा जाता है जबकि हमारे अध्ययन में ज्यादातर महिलायें जिन्होंने इन ज्वलंत यादों का अनुभव किया वे पीटीएसडी से पीड़ित नहीं थी, जो आमतौर पर अधिक तीव्र मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रियाओं से जुड़े होते हैं।
इस अध्ययन में 18-39 आयु वर्ग की 183 महिलायें शामिल थीं। 64 महिलाओं ने बताया कि वे यौन हिंसा की पीड़िता हैं जबकि 119 ने बताया कि उनका यौन हिंसा का कोई इतिहास नहीं रहा है।
जिन महिलाओं का यौन हिंसा का इतिहास रहा है, उनके जहन में इन घटनाओं की यादें पूरी तरह से थीं और घटना की यादों को स्पष्ट रूप से उनके दिमाग में देखा गया। उन्होंने बताया कि घटना को भूल पाना उनके लिए कठिन रहा है और वे इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। हाल के इस अध्ययन से संकेत मिलते हैं कि अपने कॉलेज के दिनों में प्रत्येक पांच कॉलेज छात्राओं में से एक यौन हिंसा का सामना करती है।