अहमदाबाद : एशियाई खेलों में महिलाओं के चार गुणा 400 मीटर रिले टीम दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम की सदस्य सरिता कभी नंगे पांव दौड़ती थी। सरिता गुजरात के आदिवासी बहुल डांग जिले से है। स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा इस खिलाड़ी को गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने एक करोड़ रूपये की इनामी राशि देने की घोषणा की है। सरिता के पिता ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। उन्होंने कहा, ‘ मेरे पास खुशी बयां करने के लिए शब्द नहीं है। उसने गांव और पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उसे बचपन से ही दौड़ना पसंद था। अब पूरा देश उसे जानता है।’ उनके कोच अजिमोन के एस ने कहा कि सरिता ने उस वक्त सबका ध्यान अपनी तरफ खिंचा जब उसने अपनी दौड़ एक मिनट से कुछ अधिक समय में पूरी की। अजिमोन ने कहा, ‘ उसने 400 मीटर की दौड़ को एक मिनट एक सेकंड में पूरा किया। वह आदिवासी बहुल डांग जिले से है और वह हिन्दी भी नहीं बोल सकती है। मैंने गुजराती कोच की मदद से उसे नादियाद अकादमी से जुड़ने के लिए तैयार किया।’’
इंडिया पोस्ट का पेमेंट बैंक शुरू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की शुरुआत
नयी दिल्ली : डाक विभाग के पूर्ण स्वामित्व वाले इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) का ऑपरेशन की आधिकारिक रूप से शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में इसकी विधिवत शुरूआत की। इसी के साथ ही देश भर में इसकी 650 शाखाएं और 3250 डाकघरों में सेवा केंद्रों की शुरुआत हो जाएगी। साल के अंत तक देश के 1.55 लाख डाकघरों में यह सेवा शुरू हो जाएगी।
खुलेंगे तीन तरह के सेविंग्स अकाउंट
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक आपको तीन तरह के सेविंग अकाउंट खोलने की सुविधा देगा। रेगुलर सेविंग अकाउंट, डिजिटल सेविंग अकाउंट और बेसिक सेविंग अकाउंट। ये तीनों अकाउंट जीरो बैलेंस पर खोले जा सकते हैं। खाता खुलने के बाद आप पैसा जमा व निकासी कर सकते हैं। इन सभी के लिए सालाना ब्याज दर 4 फीसदी रहेगी।
पेमेंट्स बैंक की सेवाएँ
इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक आम लोगों तक पहुंच के मामले में भारत का दूसरा सबसे बड़ा पेमेंट बैंक होगा। प्राइवेट सेक्टर में एयरटेल और पेटीएम पहले से पेमेंट बैंक की सर्विस दे रही हैं। IPPB की सर्विसेज के तहत सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट, डॉमेस्टिक रेमिटेंस सर्विसेज, डिजिटल पेमेंट, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस, म्युचुअल फंड आदि शामिल हैं। इसके अलावा सरकार पेमेंट्स बैंक का इस्तेमाल नरेगा का वेतन, सब्सिडी, पेंशन आदि बांटने में भी करेगी।
17 करोड़ पोस्टल सेविंग्स बैंक खाते जुड़ेंगे
IPPB को 17 करोड़ पोस्टल सेविंग्स बैंक खातों को अपने साथ जोड़ने की अनुमति दी गई है। आईपीपीबी के काम शुरू करने के बाद ग्रामीण इलाकों में लोगों को डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की सुविधा मिलने लगेगी। वह किसी भी बैंक खाते में धन हस्तांतरित कर सकेंगे। यह काम वह मोबाइल एप अथवा डाकघर में जाकर कर सकेंगे।
आंवला के 500 पौधों ने बनाया लखपति, कभी चलाता था जीप
नयी दिल्ली : अमर सिंह अपना व अपने परिवार का पेट पालने के लिए कभी जीप चलाया कराता था, लेकिन एक बार किसी अखबार में आंवले के गुणों को जानकर उसने आंवले के पौधे अपने खेत में क्या लगाए कि उसकी गिनती गांव के लखपति के रूप में होती है। वह न केवल अपने परिवार, बल्कि दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहा है। राजस्थान के भरतपुर जिले की कुम्हेर तहसील क्षेत्र के समन गांव का निवासी अमर सिंह ने पारिवारिक परिस्थितियों के कारण 11वीं पास करने के बाद पढ़ाई छोड दी और एक डग्गेमार जीप पर कण्डक्टरी करने लगा तथा तीन महीने बाद जीप चलाना सीखकर इसी पर ड्राइवर बन गया। एक दिन उसे एक रद्दी के कागज के टुकडे में आंवला के 100 गुणकारी फायदे लिखे मिले। जिन्हें देखकर वह तुरन्त कृषि अधिकारियों से मिला और आंवले के 500 पौधों की मांग की। सन 2002 में कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये पौधों से अमर सिंह ने अपने खेत में आंवले का बाग लगा दिया। आंवले के पौधे लगाने के चार साल बाद अमर सिंह का आंवले का बाग फलों से लद गया, लेकिन अमर सिंह ने आंवले की उपयोगिता के बारे में जो पढ़ा व सुना था, उसके अनुरूप आंवले के दाम नहीं मिल पा रहे थे। अमर सिंह इन आंवलों को लेकर मथुरा भी गया लेकिन वहां भी उसे उचित भाव नहीं मिला। आखिर जो भाव मिलता उसी में बेचने के लिए अमर सिंह मजबूर हो रहा था।
लुपिन लैब, मुम्बई की स्वयं सेवी संस्था लुपिन ह्यूमन वैलफेयर एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन ने वर्ष 2006 में कुम्हेर कस्बे में फल प्रसंस्करण का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया। जिसमें समन गांव का अमर सिंह भी शामिल हुआ। वैसे अमर सिंह आंवले के फलों के उचित दाम नहीं मिलने से इतना टूट चुका था कि उसे आंवले के बाग को हटा कर खेती करने का मन बना लिया था, फिर भी अमर सिंह ने फल प्रसंस्करण प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुआ। उसने प्रशिक्षण में अन्य फलों के साथ-साथ आंवले के विभिन्न उत्पाद बनाने का गहन प्रशिक्षण लिया। लुपिन संस्था ने पुनः अमर सिंह को आंवले का अचार, मुरब्बा, जैम, जैली, कैण्डी, चैरी आदि का प्रशिक्षण दिलाया और कार्य शुरू कराने के लिए सिडबी एवं विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से 2 लाख का ऋण दिलाया।
अमर सिंह को लुपिन संस्था के मार्गदर्शन एवं आर्थिक सम्बल से आगे बढने का पूरा विश्वास प्राप्त हो गया तो उसने अपने खेत के सारे आंवलों के विभिन्न उत्पाद तैयार करने के लिए 82 क्विंटल चीनी काम में ली अर्थात करीब 150 क्विंटल उत्पाद तैयार किये। जिन्हें तैयार करने के लिए उसका पूरा परिवार एवं गांव के करीब 20 लोगों को तीन माह तक रोजगार दिया।
उसने करीब 100 क्विंटल मुरब्बा, 10-10 क्विंटल अचार, जैम, कैण्डी, जैली आदि बनाई। उसने मुरब्बा बनाने में करीब 25 रुपये प्रति किलो की लागत आई जिसे उसने अपने गांव के आसपास व स्थानीय बाजार में 40 रुपये प्रतिकिलो की दर पर बेच कर करीब 2 लाख रुपये की आय प्राप्त कर ली। अब वह इसकी लागत को और कम करने की दिशा में जुटा हुआ है। वह आगामी वर्षों में अन्य फलों के प्रसंस्करण कर लोगों को कम दामों पर उपलब्ध कराया जिसके लिए लुपिन संस्था निरन्तर प्रयास कर रही है। लुपिन अमर सिंह को नवीन पैकेजिंग विधि के अलावा उत्पादों को राष्ट्रीय मेलों, खादी विक्रय केन्द्रों पर उपलब्ध कराने में सहयोग कर रही है।
अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अगले साल जनवरी में होगी सुनवाई
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था की समस्या के बारे केन्द्र और राज्य सरकार के कथन के मद्देनजर संविधान के अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई आज अगले साल जनवरी के लिये स्थगित कर दी। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर के नागिरकों को विशेष अधिकार और सुविधायें प्रदान करता है।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ से केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि राज्य में आठ चरणों में सितंबर से दिसंबर के दौरान स्थानीय निकाय के चुनाव हो रहे हैं और वहां कानून व्यवस्था की समस्या है।
इन याचिकाओं पर सुनवाई अगले साल जनवरी के दूसरे सप्ताह के लिये स्थगित करते हुये पीठ ने कहा, ‘‘चुनाव हो जाने दीजिये। हमें बताया गया है कि वहां कानून व्यवस्था की समस्या है। संविधान में 1954 में राष्ट्रपति के आदेश पर अनुच्छेद 35-ए शामिल किया गया था। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर के नागरिकों को विशेष अधिकार और सुविधायें प्रदान करता है तथा यह राज्य के बाहर के लोगों को इस राज्य में किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति प्राप्त करने पर रोक लगाता है।
यही नहीं, इस राज्य की कोई महिला यदि किसी बाहरी व्यक्ति से शादी करती है तो उसे संपत्ति के अधिकार से वंचित किया जाता है और उसके उत्तराधिकारियों पर भी यह प्रावधान लागू होता है। मामले पर सुनवाई शुरू होते ही अतिरिक्त सालिसीटर जनरल ने कहा कि राज्य में 4,500 सरपंचों और दूसरे स्थानीय निकाय के पदों के लिये आठ चरणों में सितंबर से दिसंबर के दौरान चुनाव होंगे।
उन्होंने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुये कहा कि यदि स्थानीय निकाय के चुनाव नहीं हुये तो इसके लिये आवंटित 4,335 करोड़ रुपये की धनराशि का इस्तेमाल इस मद में नहीं हो सकेगा। उन्होंने राज्य की मौजूदा कानून व्यवस्था की ओर भी पीठ का ध्यान आकर्षित किया। अटार्नी जनरल ने कहा कि बड़ी संख्या में अर्द्धसैनिक बल वहां पर तैनात हैं। वहां शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव हो जाने दीजिये और इसके बाद जनवरी या मार्च में इन याचिकाओं पर सुनवाई की जा सकती है। यह विषय बहुत ही संवेदनशील है।
अतिरिक्त सालिसीटर जनरल का कहना था कि हालांकि यह मुद्दा लैंगिक भेदभाव से संबंधित है परंतु इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिये यह उचित समय नहीं है। संविधान के इस अनुच्छेद का विरोध कर रहे समूह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर जाकर वहां 60 साल से रहने वाले लोगों को वहां रोजगार या मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजों में शिक्षा के लिये प्रवेश का लाभ नहीं मिल रहा है।नेशनल कांफ्रेंस और मार्क्सवादी पार्टी सहित कुछ राजनीतिक दलों ने इस अनुच्छेद का समर्थन करते हुये भी शीर्ष अदालत में याचिकायें दायर की हैं
अवसाद के शिकार बच्चों को बातचीत और पढ़ाई में होती है ज्यादा परेशानी
टोरंटो : अवसाद से पीड़ित बच्चों में सामाजिक और एकेडेमिक कौशल में कमी की छह गुना अधिक संभावना होती है। ऐसे बच्चों को लोगों से बातचीत और पढ़ाई में परेशानी हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि छह से 12 वर्ष तक की आयु के तीन प्रतिशत बच्चों में अवसाद की समस्या हो सकती है लेकिन माता-पिता तथा शिक्षक बच्चों में अवसाद को आसानी से नहीं पहचान पाते।
अमेरिका के मिसौरी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर कीथ हर्मन ने कहा कि जब आप शिक्षकों और माता-पिता को बच्चों में अवसाद का स्तर मापने के लिए कहते हैं तो आम तौर पर उनकी रेटिंग में 5-10 प्रतिशत का अंतर होता है। उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर शिक्षक को यह पता हो सकता है कि बच्चे को कक्षा में दोस्त बनाने में परेशानियां आ रही हैं लेकिन शायद माता-पिता घर में इस बात पर ध्यान न दे सके हों।
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए प्राथमिक स्कूल के 643 बच्चों के प्रोफाइल का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि पढ़ाई में 30 प्रतिशत बच्चों में अवसाद का हल्के से ज्यादा अनुभव हुआ लेकिन माता-पिता और शिक्षक अक्सर बच्चों में अवसाद को पहचानने में विफल हो जाते हैं। हर्मन ने पाया कि जिन बच्चों में अवसाद के संकेत पाए गए, उनमें अपनी उम्र के अन्य बच्चों के मुकाबले कौशल की कमी की छह गुना ज्यादा आशंका होने की बात सामने आई।
एसबीआई ने दिया झटका, अब महंगा हो जाएगा घर और गाड़ी का कर्ज
नयी दिल्ली : देश में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक यानि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने ग्राहकों को झटका दिया है। अब यहां से गाड़ी या फिर घर के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। एसबीआई ने अपने बेंचमार्क उधारी दर यानी एमसीएलआर में 0.20 प्रतिशत की शनिवार को बढ़ोतरी करने की घोषणा कर दी है। ये बढ़ोतरी तीन साल की अवधि के लिए है। जिसके बाद अब एसबीआई का एमसीएलआर बढ़कर 8.1 प्रतिशत हो गया।
एमसीएलआर पूर्व में 7.9 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 8.1 प्रतिशत हो गया। एक साल की अवधि के लिए एमसीएलआर 8.25 प्रतिशत से बढ़कर 8.45 प्रतिशत हो गया। अधिकांश खुदरा लोन का बेंचमार्क एक साल के एमसीएलआर से जुड़ा है।
बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से मौद्रिक समीक्षा में बढ़ाए गए रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी किए जाने के एक महीने बाद अपने एमसीएलआर में यह बढ़ोतरी की। वर्तमान में रेपो रेट 6.50 प्रतिशत है। बीते 6 जून 2018 से पहले रिजर्व बैंक ने 28 जनवरी 2014 को रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी।
क्या होता है एमसीएलआर
एमसीएलआर वो न्यूनतम दर होती है जिसके नीचे की दर पर कोई भी वाणिज्यिक (कॉमर्शियल) बैंक अपने ग्राहकों को कर्ज नहीं दे सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने साल 2016 के अप्रैल महीने में एमसीएलआर को सामने रखा था, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक बैंकों को लिए एक निर्देश देना था ताकि वो अपनी लेंडिंग रेट्स का निर्धारण कर सके।
अमृता प्रीतम की दो कवितायें
आत्ममिलन
मेरी सेज हाजिर है
पर जूते और कमीज की तरह
तू अपना बदन भी उतार दे
उधर मूढ़े पर रख दे
कोई खास बात नहीं
बस अपने अपने देश का रिवाज है……
मेरा पता
आज मैंने
अपने घर का नम्बर मिटाया है
और गली के माथे पर लगा
गली का नाम हटाया है
और हर सड़क की
दिशा का नाम पोंछ दिया है
पर अगर आपको मुझे ज़रूर पाना है
तो हर देश के, हर शहर की,
हर गली का द्वार खटखटाओ
यह एक शाप है, यह एक वर है
और जहाँ भी
आज़ाद रूह की झलक पड़े
— समझना वह मेरा घर है।
जन्माष्टमी पर कान्हा का मुँह करें मीठा
नारियल मलाई लड्डू

धनिया मेवा पंजीरी

अमझेरा जहाँ श्रीकृष्ण ने किया था रूक्मिणी हरण

राजा भीष्मक ने रुक्मणि का विवाह चंदेरी के राजा शिशुपाल से तय कर दिया लेकिन रुक्मणि स्वयं को श्रीकृष्ण को अर्पित कर चुकी थी। जब उसे अपनी सखी से पता चला कि उसका विवाह तय कर दिया गया है तब रुक्मणि ने वृद्ध ब्राह्मण के साथ कृष्ण को संदेश भेजा। कृष्ण रुक्मणि का पत्र पाते ही कुंदनपुर की ओर निकल पड़े। रुक्मणि रोज अमझेरा के अंबिका मंदिर में पूजा के लिए आती थी। इसी अम्बिका माता के मंदिर से श्रीकृष्ण ने रुक्मणि का हरण किया।

रुक्मिणि ने यहीं अंबिका माता की पूजी की। मंदिर के तीन फेरे लिए और श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने चार घोडों के रथ पर हरण कर लिया। जब श्रीकृष्ण रुक्मणि को लेकर जा रहे थे तब रुक्मणि के भाई रुक्मी ने उनका विरोध किया। श्रीकृष्ण ने रुक्मी को यहां से सवायोजन दूर भोजकट वन में बांध दिया। इस जगह को आज भी लोग भोपावर के नाम से जानते हैं।
कृष्ण कालीन इस मंदिर में प्राणप्रतिष्ठित अंबिका माता की मूर्ति को बेहद चमत्कारिक माना जाता है। पूरे विश्व में यह एकमात्र मूर्ति है जिसमें मां की योनी से सर्प निकलता है और शरीर पर तीन स्तन हैं। इसलिए इसे त्रिस्तनीय माता भी कहा जाता है। मां का मुख पश्चिम मुखी है। मंदिर के पास ही श्मशान है। इसलिए इस मंदिर को लोग तांत्रिक स्थल मानते हैं।
कृष्ण रुक्मणि का हरण करके ले जा रहे थे तब रुक्मणि के भाई रुक्मी ने कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा था। इस समय श्री कृष्ण के रथ में चार घोड़े जुते हुए थे। उन्होंने इतनी तेजी से रथ दौड़ाया कि मंदिर के पिछले हिस्से में रथ के पहियों के निशान आ गए। यह निशान आज भी मौजूद हैं।
(साभार – श्रीराम टूरिज्म)
स्त्रियाँ अगर दूसरी स्त्रियों को सम्मान नहीं देंगी तो उनको सम्मान कैसे मिलेगा
वरिष्ठ लेखिका प्रभा खेतान के विशाल व्यक्तित्व से अलग उनकी बड़ी बहन डॉ. गीता गुप्ता खेतान ने भी संघर्ष करके अपनी जगह बनायी। जब लड़कियों के लिए घर से निकलना चुनौती हुआ करता था, तब उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई भी की और नौैकरी भी की। इसके बाद वे स्कॉटलैंड के ग्लासगो पढ़ने गयीं। गीता जी लन्दन से एमआरसीओजी और कनाडा के कनाडियन कॉलेज ऑफ फैमिली फिजिशियन कार्यरत रहीं। कई पेपर और कई पुरस्कार व सम्मान उनके नाम पर दर्ज हैं। पिछले 4 साल से वे कोलकाता में हैं और ईस्टर्न डायग्ऩस्टिक सेंटर को अपनी सेवाएँ दे रही हैं और बेहद अच्छी चित्रकार भी हैं। डॉ. गीता गुप्ता खेतान से हुई बातचीत के कुछ अंश –
प्रभा संवेदनशील थी मगर मैं व्यावहारिक रही
हम 7 भाई – बहन थे। मेरी सबसे बड़ी बहन के बच्चे भी थे। हम एक ही घर में पढ़े। मेरी माँ काफी समृद्ध परिवार से थीं और बच्चों को आया के पास रखा जाता था। माँ ने घरेलू काम नहीं किये पर व बेहद स्वाभिमानी थीं। प्रभा शुरू से ही मेधावी थी। संवेदनशील, सकारात्मक और साहित्योन्मुखी थी। महज 8 साल की उम्र में ही उसने मंच पर प्रस्तुति दी और तभी से उसकी कविता में विद्रोह सामने आने लगा था। मन्नू भण्डारी हमारी शिक्षिका थीं और प्रभा की मेंटर भी थीं। मुझमें भी पढ़ने की आदत प्रभा ने ही डाली मगर मैं बहुत व्यावहारिक रही हूँ और मैंने अपनी मेहनत से परीक्षाएँ पास कीं।
रिश्तेदार टोकते रहे और हम पढ़ते चले गये
मैं डॉक्टर हूँ। विदेश में उस जमाने में अलग रहकर पढ़ाई की है जहाँ कोई नौकर -चाकर नहीं था। अपना हर काम खुद करती थी। जीवन अपनी शर्तों पर जीया। यह स्थिति होती है जब आप स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं। पिता की मृत्यु कम उम्र में हुई तो हमने आर्थिक अभाव भी देखा। उनकी मृत्यु के समय ही मैंने तय किया कि मुझे डॉक्टर बनना है और फोरेंसिक डॉक्टर बनना है। रिश्तेदार टोकते रहे और हम पढ़ते चले गये। ये माँ की शक्ति थी कि हम बड़े हुए। जब शादी के लिए कहा गया तो हमने कह दिया कि हमारी डिग्री ही हमारा हीरा है।
शिक्षा वह है जो स्वाभिमानी बनाये
आज माँ होकर लड़कियाँ भ्रूण हत्या करती हैं। वह माँ होने के बावजूद इस बात के लिए तैयार कैसे हो जाती हैं? अगर ऐसी औरतें अपनी बेटी की इज्जत नहीं कर सकतीं तो कोई उनकी इज्जत क्यों करेगा? सँयुक्त परिवारों में औरतों के लिए बच्चों को समय दे पाना आसान नहीं होता। आज भी परिवारों में दामाद को जो सम्मान मिलता है, वह बहुओं को नहीं मिलता। तो कहने का मतलब यह है कि शिक्षा वह है जो आपको स्वाभिमानी बनाए और आप अपना आत्मसम्मान हर स्थिति में बनाये रखें। वह अपनी पढ़ाई वह है जो आपको सोचने और समझने की शक्ति देता है। अपने हर निर्णय के लिए वे दूसरों पर निर्भर रहती हैं। प्रभा ने दूसरों को आगे बढ़ाया और सोचने की शक्ति दी।
शिक्षा का मतलब समग्र विकास होता है
सिर्फ डिग्री ही शिक्षा नहीं होती। शिक्षा का मतलब समग्र विकास होता है,महँगे स्कूलों में पढ़ने भर से कोई शिक्षित नहीं होता। भारत में बच्चों को बचत करना नहीं सिखाया जाता। कोई ब्रांड आपको बेहतर इन्सान नहीं बना सकता। आप ब्रांड पर निर्भर क्यों रहें, आप खुद में ही एक ब्रांड हैं। विदेशों में रही हूँ तो ये जानती हूँ कि अगर वहाँ ब्रांड है तो बजट भी है। लोग बचत करते हैं मगर यहाँ बच्चों को बचत करना नहीं सिखाया जाता और न ही पैसों की कद्र करना सिखाया जाता है। मैं यहाँ महँगी – महँगी किताबें खरीदती थी और पढ़ने बाहर गयी कि तो देखा कि वहाँ लोग पुस्तकालय में किताबें पढ़ते हैं….ये देखकर लगा कि हम कितनी बर्बादी करते थे। इतनी तैयारी करते देखकर आज हैरत होती है।
पैसे और परिवार की कद्र करें
मैं पहले ग्लासगो में रही और शादी के बाद कनाडा में मैं मॉन्ट्रियाल में रही थी, वहीं नौकरी की। वहाँ आर्ट थेरेपी होती है और रंगों के माध्यम से मानसिक स्थिति का पता चल जाता है। 90 के दशक में पिकॉसो की प्रदर्शनी देखी..अच्छी लगी तो प्रभा से कहा कि सेवानिवृत्त होने के बाद सीखूँगी तो उसने कहा कि अभी सीखूँ। मैंने पेंटिंग सीखी और मुझे रंगों से प्यार है..यह मेरी पेंटिंग में नजर आता है। आज लड़कियों की स्थिति बहुत बदली है। जीवन स्तर, भाषा, शिक्षा और परवरिश का तरीका बदला है। पैसे और परिवार की कद्र करें तो सब सही होगा।




