Monday, April 13, 2026
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भारत की तीन मुक्केबाजों को स्वर्ण पदक

नयी दिल्ली : भारतीय मुक्केबाज सिमरनजीत कौर (64 किग्रा), मोनिका (48 किग्रा) और भाग्वती कचारी (81 किग्रा) ने तुर्की के इस्तांबुल में अहमत कोमर्ट टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता। राष्ट्रीय चैंपियनशिप की पूर्व पदक विजेता सिमरनजीत ने तुर्की की सेमा कालिस्कन को हराकर खिताब जीता। लाइट फ्लाइवेट वर्ग में चुनौती पेश कर रही मोनिका ने तुर्की की आयसे केगिरर को हराकर स्वर्ण पदक जीता जबकि भाग्यवती ने मेजबान देश की सलमा काराकोयुन को लाइट हैवीवेट वर्ग में हराया।
राष्ट्रमंडल खेलों की पूर्व कांस्य पदक विजेता पिंकी जांगड़ा (51 किग्रा) को हालांकि स्थानीय दावेदार बुसेनाज साकिरोग्लु के खिलाफ हार के साथ रजत पदक मिला। विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता सोनिया लाठेर (57 किग्रा) को भी कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। भारतीय टीम तीसरे स्थान पर रही। भारत की भाग्यवती को टूर्नामेंट की ‘मोस्ट साइंटिफिक बाक्सर’ चुना गया।

‘जब जब फूल खिले’ के लेखक बृज कात्याल का निधन

मुम्बई : दिग्गज फिल्म लेखक बृज कात्याल का उपनगर बांद्रा में स्थित एक आश्रम में निधन हो गया। कात्याल ने शशि कपूर और नंदा अभिनीत हिट फिल्म ‘‘जब जब फूल खिले’’ की कहानी लिखी थी। लेखिका-निर्देशक और करीबी सहयोगी अनुषा श्रीनिवासन अय्यर के मुताबिक, कात्याल कैंसर से जूझ रहे थे। अय्यर ने पीटीआई को बताया, ‘वह रेक्टल कैंसर से पीड़ित थे और उन्हें शांति अवेदना आश्रम में भर्ती कराया गया था, जहां आज दोपहर बाद उनकी मौत हो गयी। वह 85-86 साल के थे।’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे ही लिखने की कला सीखी है। यह बहुत बड़ी क्षति है।’ फिल्म उद्योग के सबसे सफल लेखकों में से एक कात्याल को ‘‘दिल्लगी’’, ‘सांस’ और ‘पल छिन’जैसे कई टीवी धारावाहिकों के लेखक भी रहे। उन्होंने ‘अजूबा’ और ‘ये रात फिर ना आयेगी’ समेत कई फिल्मों का लेखन किया। कत्याल के परिवार में एक दत्तक पुत्र है।

लोकसभा चुनाव से पूर्व जदयू में शामिल हुए प्रशांत किशोर

पटना : चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में रविवार को शामिल हो गए । इससे पहले, किशोर ने ट्वीट कर कहा था कि वे बिहार से अपनी नयी यात्रा शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं। 41 वर्षीय प्रशांत किशोर बिहार के बक्सर जिले के निवासी हैं। प्रशांत किशोर को जदयू में पार्टी स्तर पर क्या जिम्मवारी सौंपी जाएगी, इस बारे में तत्काल स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन लोकसभा चुनाव से पूर्व उनके पार्टी में शामिल होने पर उनके 2019 के लोकसभा चुनाव में उतरने को लेकर अटकलें शुरू हो गयी हैं। वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर को नरेंद्र मोदी के चुनावी रणनीतिकार के तौर पर जाना गया था। प्रशांत ने बाद में भाजपा के धुर विरोधियों से हाथ मिला लिया और 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू के चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाते हुए महागठबन्धन को भारी जीत दिलायी थी । साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद प्रशांत किशोर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सलाहकार के रूप में नियुक्त करके उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया था । हालांकि, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को प्रशांत किशोर जीत दिलाने में असफल रहे थे पर पंजाब में वे उसे जीत दिलाने में सफल रहे थे।

डेयरी कारोबार में उतरा पतंजलि

नयी दिल्ली : बाबा रामदेव का पतंजलि आयुर्वेद अब डेयरी कारोबार में भी उतर गया है। गुरुवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम से रामदेव ने कुछ नई कैटेगरी में उत्पादों को बाजार में लाने का ऐलान किया। इसमें दूध, दही, पनीर और छाछ जैसे डेयरी उत्पाद मुख्य हैं। पतंजलि जल्द ही उपभोक्ताओं के लिए फ्लेवर्ड आयुर्वेदिक दूध भी मुहैया करा सकता है।
बताया गया है कि कंपनी ने इसके लिए दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, पुणे और मुम्बई के करीब 56 हजार दूध विक्रेताओं के साथ करार किया है और इसकी बदौलत संस्थान 2019-20 में 10 लाख लीटर दूध उत्पादन करना चाहता है।
हर्बल पानी में लाएंगे रामदेव: पतंजलि ने पैकेज्ड मिनरल वॉटर भी लॉन्च किया। इसे दिव्य जल के नाम से बाजार में उतारा जाएगा। रामदेव जल्द ही आयुर्वेदिक हर्बल पानी भी बाजार में ला सकते हैं। विदेशी कंपियों को टक्कर देने के लिए रामदेव ने फ्रोजन सब्जियों (मटर, मिक्स वेज, स्वीट कॉर्न और फिंगर चिप्स) को भी लॉन्च किया। रामदेव ने सोलर पैनल और गाय का चारा जैसे उत्पादों को भी बाजार में उतारने का ऐलान किया।

गहरी नींद लाने में करेगा मदद, पसीना भी सोखेगा नासा का तकिया

वॉशिंगटन : नासा ने एक खास तकिया बनाया है, जो गहरी नींद लाने में मदद करता है। साथ ही, पसीना भी सोखता है। नासा ने यह तकिया खास तौर पर अंतरिक्ष यात्रियों को अलग-अलग तापमान में होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बनाया है। इसकी कीमत 99 डॉलर (7100 रुपए) से शुरू होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तकिया दो तरह का है। पहली कैटेगरी में हिब्र नाम का तकिया है, जिसकी कीमत 99 डॉलर (7100 रुपए) रखी गई है। इस तकिए में पसीना सोखने वाली फोम का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, दूसरी कैटेगरी में जीक नाम का तकिया आता है। 200 डॉलर (करीब 14 हजार रुपए) वाले इस तकिए में स्लीप सेंसर, स्पीकर और वाइब्रेटर दिया गया है, जो तेज खर्राटे लेने पर यूजर को धीरे से जगा देता है। नासा के मुताबिक, यह तकिया न तो ज्यादा मोटा बनाया गया है और न ही ज्यादा पतला। ऐसे में यूजर को इस तकिए से किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती।

जब गौतम गम्भीर ने लगाई बिंदी और दुपट्टा ओढ़ा

नयी दिल्ली :  भारतीय क्रिकेटर गौतम गम्भीर क्रिकेट के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी अपनी जिम्मेदारी गम्भीरता से निभाते हैं। और ये बात पिछले कुछ समय से उनके द्वारा किये गए कामों ने साबित भी कर दी है। जी हाँ, छत्तीसगढ़ में नक्‍सली हमले में शहीद हुए जवानों के बच्‍चों की शिक्षा का खर्च उठाना हो या फिर कश्‍मीर में आतंकी हमले में शहीद हुए एएसआई अब्दुल रशीद की बेटी जोहरा की मदद, गंभीर ने देश में सबका दिल जीता है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान माथे पर बिंदी लगाए और दुपट्टा डाले गौतम गंभीर की तस्वीरें जब इंटरनेट पर वायरल हुई तो सब हैरानी में पड़ गये कि क्या चल रहा है। लेकिन इसके पीछे की बात जब लोगों को पता चली तो उनकी हर किसी ने सराहना की। दरअसल, गौतम गम्भीर दिल्ली में हिजड़ा हब्बा के सातवें संस्करण के उद्घाटन में पहुंचे थे। किन्नर समाज के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करने के लिए उन्होंने बिंदी भी लगाई और दुपट्टा भी ओढ़ा। कार्यक्रम में किन्‍नरों ने गौतम गम्भीर को उनकी तरह तैयार होने में मदद की थी।
यह समारोह भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को खत्म करने वाले सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के जश्न में आयोजित किया गया था, जिसके तहत समलैंगिक यौन सम्बन्ध को अपराध माना जाता था। यह फैसला 6 सितम्बर, 2018 को किया गया था।
एचआईवी/एड्स अलायन्स इंडिया द्वारा हाल ही में दिल्ली मॉल में वार्षिक हिजड़ा हब्बा का आयोजन किया गया। जहां ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग एक साथ आए। इस साल के लिए थीम ‘बोर्न दिस वे’ थी। इसका उद्देश्य ट्रांस समुदाय की स्वीकृति का संदेश फैलाना और उन्हें सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए सशक्त बनाना था। इसके पीछे की मंशा समुदाय को उनकी प्रतिभा और विभिन्न क्षेत्रों में देश में योगदान करने की उनकी क्षमता के बारे में शिक्षित करना था। यह कोई पहली बार नहीं है कि गौतम गम्भीर ने समाज की उपेक्षा का शिकार इस खास वर्ग के प्रति अपना समर्थन जताया है। इसी साल उन्‍होंने दो ट्रांसजेंडर्स को अपनी बहन बनाते हुए उनसे राखी बंधवाई थी। गम्भीर ने इसका फोटो भी अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्‍ट किया था। एक बार फिर गौतम को उनकी इस पहल के लिए लोगों की प्रशंसा मिली है। ट्विटर पर उनके लिए लोगों ने कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं दीं,
किसी ने कहा, “ऐसा करने के लिए बहुत साहस की जरूरत होती है,” तो एक दूसरे यूजर ने लिखा, “वह मुझे हर बार हैरान कर देता है इस आदमी के लिए बहुत सम्मान”! ‘बहुत बढ़िया। यह आदमी बड़े सम्मान का हकदार है। एक सेलिब्रिटी के लिए यह करना आसान नहीं है। सर से सलाम!” एक और ने प्रशंसा की।

अमेजन के बेजोस बेघर लोगों और स्कूली बच्चों के लिए 14400 करोड़ रुपए दान देंगे

सैन फ्रांसिस्को : अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस बेघर लोगों और स्कूली बच्चों की मदद के लिए 14400 करोड़ रुपये (2 अरब डॉलर) दान करेंगे। उन्होंने इसे डे वन फंड नाम दिया है। यह राशि जरूरतमंद छात्रों को स्कॉलरशिप और दूसरे खर्चों के लिए दी जाएगी।
बेजोस अप्रवासी बच्चों, कैंसर रिसर्च और शिक्षा के लिए पहले चैरिटी कर चुके हैं। पिछले साल उन्होंने ट्विटर पर सुझाव भी मांगे थे कि वो अपनी निजी संपत्ति का इस्तेमाल कैसे करें? सामाजिक कार्यों पर कम राशि खर्च करने के लिए हाल ही में उनकी निंदा हुई थी। अमेरिकी सांसद बर्नी सेन्डर्स ने अमेजन के वेयरहाउसों में काम करने वाले कर्मचारियों की हालत पर चिन्ता जताई थी।
जकरबर्ग ने फेसबुक में अपने 99% शेयर डोनेट किए: दो अरब डॉलर दान देने के बाद भी बेजोस बिल गेट्स और मार्क जकरबर्ग से काफी पीछे हैं। जकरबर्ग फेसबुक में उनके 99% शेयर दान करने का ऐलान कर चुके हैं। बेजोस दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी हैं। उनकी सम्पत्ति 164 अरब डॉलर है। यह मार्क जकरबर्ग की नेटवर्थ 63.9 अरब डॉलर से करीब 100 अरब डॉलर ज्यादा है।

बेजोस की संपत्ति 9 महीने में 64.5 अरब डॉलर बढ़ी: अमेजन के शेयर में तेजी से बेजोस की संपत्ति 9 महीने में 64.5 अरब डॉलर बढ़ी है। वे लंबे समय से दुनिया के अमीर कारोबारियों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं। अमेजन 4 सितंबर को 1 ट्रिलियन डॉलर (71 लाख करोड़ रुपए) मार्केट कैप वाली अमेरिका की दूसरी और दुनिया की तीसरी कम्पनी बन गई। शेयर बाजार बंद होने पर इससे नीचे आ गया। अमेजन के शेयर ने पिछले एक साल में 99% रिटर्न दिया।

इन कोशिशों से आगे और आगे बढ़ रही है हिन्दी

सुषमा त्रिपाठी

हिन्दी का मतलब सिर्फ हिन्दी साहित्य ही नहीं बल्कि हिन्दी साहित्य के साथ और आगे देखना है। जीवन के हर क्षेत्र में पैठ बनाना है। यह तो मानी हुई बात है कि हिन्दी मीडिया का वर्चस्व है मगर हिन्दी को आज युवा वर्ग भी बहुत आगे ले जा रहा है। हालांकि तकनीक, विज्ञान और कम्प्यूटर के क्षेत्र में और भी काम करने की जरूरत है मगर ऐसा नहीं है कि काम नहीं हो रहा है। नये प्रयोग और नयी तकनीक के साथ नयी सोच हिन्दी को आम जनता से जोड़ रही है। इन प्रयासों का स्वागत करते हुए हम आपको ऐसी ही कुछ संस्थाओं और वेबसाइट्स व यू ट्यूब चैनलों के बारे मे बता रहे हैं जिनको आपको देखना चाहिए ताकि जब आपके सामने कोई हिन्दी के नाम पर मातम मनाए तो आप उनको खरी – खरी सुना सकें। हिन्दी दिवस काी शुभकामनाओं के साथ पेश है जानकारी –


हिन्दी कविता – अमरिका के मियामी में बस चुके एक सफल फिल्म निर्माता और व्यवसायी, मनीष गुप्ता ने जब मैथिलीशरण गुप्त, रामधारी सिंह दिनकर, महादेवी वर्मा, अमृता प्रीतम और कवियों की कविताओं के सम्बन्ध में लोगों की अरुचि देखी तो उन्होनें हिन्दी कविता उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के बेहतरीन कलाकारों के द्वारा जाने-माने समकालीन और पुराने कवियों की कविताएँ प्रस्तुत कराने का निश्चय किया। इस का नतीजा बेहतरीन रहा! मनोज वाजपेयी द्वारा पढ़ी गयी ‘दिनकर’ की ‘रश्मिरथी‘ को 1,90,000 दर्शक मिले और लेखक–अभिनेता पीयूष मिश्रा की स्वरचित कविता ‘प्रेमिकाओं के नाम‘ को 86,000 से ज्यादा दर्शक मिले। कविता को विशेष तौर पर युवाओं केबीच में प्रयास आरम्भ कर दिया और आज कई सेलिब्रिटी हिन्दी कविता पढ़ते नजर आते हैं। हिन्दी कविता की सृजनात्मकता को बरकरार रखते हुए हिन्दी कविता ने इसे बॉलीवुड से खूबसूरती से जोड़ा। चैनल देखें तो पुष्पा भारती की आवाज में कनुप्रिया जरूर सुनें।

https://www.youtube.com/channel/UCBHtPALSbWn0WaRusU9_gFg


गाँव कनेक्शन – गाँव को समझने, गाँव की समस्याओं को समझने में इसकी बड़ी भूमिका है। ग्रामीण भारत को समझने के लिए गाँव कनेक्शन देखना बहुत फायदेमंद है। गाँव कनेक्शन की। यह 5 साल पुराना है। कुछ ख़बरों को अगर देश के सबसे बड़े पत्रकारिता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। गांव के लोगों, किसानों के अख़बार गांव कनेक्शऩ की शुरुआत 2 दिसंबर 2012 को उत्तर प्रदेश के एक गांव में हुई थी। इन पांच वर्षों में गाँव कनेक्शन ने नए मुकाम हासिल किए, पहले साप्ताहिक, फिर दैनिक अखबार के बाद अब डिजिटल माध्यम से ग्रामीण भारत की अलग झलक को देश-दुनिया तक पहुंचा रहा है। इन पांच वर्षों में गाँव कनेक्शन को पत्रकारिता के क्षेत्र के कई उत्कृष्ट सम्मानों से सम्मानित किया गया। साथ ही गाँव कनेक्शन के काम को देश-विदेश की कई मीडिया संस्थानों ने इसके काम को सराहा।

https://www.gaonconnection.com/


लल्लन टॉप – आजतक की वेबसाइट पर समसामायिक विषयों और खोजपरक सामग्री से लेकर खबरों तक का विश्लेषणपरक आज की पीढ़ी को ध्यान में रखकर यहाँ पेश किया जाता है। कहने की जरूरत नहीं कि यह बेहद लोकप्रिय हो चुका है। आप यू ट्यूब पर इसके वीडियो देख सकते हैं। कई मुद्दों पर आपकी असहमति हो सकती है मगर निश्चित रूप से यह प्रयास हिन्दी के प्रसार को बढ़ा रहा है।

https://www.thelallantop.com/

डेवलपमेंट फाइल्स – प्रख्यात लेखक अमरेन्द्र किशोर का यह चैनल सीधे हमारे जमीनी मुद्दों की पड़ताल करता है जिसमें खेती से लेकर जंगल और आदिवासियों जैसे अनगिनत मुद्दे शामिल हैं। अमरेन्द्र किशोर इसके प्रबन्ध सम्पादक हैं। हर वीडियो गहन रिसर्च और कड़ी मेहनत को साफ दर्शाता है। ऐसे कई और चैनलों की जरूरत है। भारत की जमीनी हकीकत समझनी है तो आपको यह चैनल जरूर देखना चाहिेए।

https://www.youtube.com/channel/UC_e7qUVXna8HhCHLjdMLAtw


द बेटर इंडिया – अगर आपको भारत का स्वच्छ, सकारात्मक चेहरा देखना है तो आप इस वेबसाइट पर जरूर जायें। यह भारत के हर कोने से चुनकर सकारात्मक खबरें लाता है। यह हिन्दी और अँग्रेजी, दोनों में उपलब्ध है।

https://hindi.thebetterindia.com/

योर स्टोरी – हिन्दी रोजगार और स्टार्ट अप की भाषा है। ऐसी कई कहानियाँ और युवा उद्यमियों से लेकर दिग्गजों की कहानियाँ आपको इस वेबसाइट पर मिलती हैं और साथ ही मिलते ही सुझाव। यह वेबसाइट भी हिन्दी और अँग्रेजी, दोनों में उपलब्ध है।

https://hindi.yourstory.com


नीलांबर कोलकाता – नीलांबर की स्थापना का मूल उद्देश्य है –साहित्य और संस्कृति के साथ आम जन से सरोकार स्थापित करना। इसकी स्थापना 26 दिसंबर 1999 को ‘और अंत में प्रार्थना ’ के मंचन के साथ ही हुआ था। 1999 से 2005 तक संस्था ने कई प्रकार के साहित्यिक –सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। नीलाम्बर द्वारा आयोजित कविता जंक्शन, एक साँझ कविता की, जैसे आयोजन काफी सफल रहे हैं। यह टीम युवाओं की टीम है और इसने कविता को तकनीक से जोड़कर उसका फलक और भी विस्तृत बनाया है। नीलाम्बर का कविता कोलाज और कई नाटकों का मंचन काफी सराहा गया है। देश भर के साहित्यकारों को साथ लाने का काम करते हुए नीलाम्बर ने लिटरेरिया की शुरुआत की जो कि इतिहास ही कहा जा सकता है क्योंकि देश के सारे साहित्यकारों को वापस कोलकाता की तरफ मोड़ने का काम नीलाम्बर ने किया है जिससे शहर लोकप्रिय हुआ है। नरेश सक्सेना, राजेश जोशी, अनामिका जैसे कई दिग्गज कवि और नयी पौध को शहर में लाने का श्रेय इसी संस्था को जाता है। बगैर किसी खास आर्थिक सहयोग के इतना बड़ा काम करना यह एक उम्मीद तो जगाता ही है। यह संस्था फेसबुक पर हिन्दी को आम आदमी तक ले जाने का काम बखूबी कर रही है। यू ट्यूब लिंक यह रहा –

https://www.youtube.com/channel/UCAMk14W3SIV7o2tZz83uLoA?app=desktop


बोल पोयट्री – बोल पोएट्री तीन दोस्त धीरज पांडेय, विहान गोयल ( ऐक्टर ) और विरेंद्र राय चलाते हैं। यह कविता को वीडियो प्रारूप में पेश करता है और सीधे युवाओं की समस्याओं पर बात करता है। लड़के खासकर अपनी आवाज इसकी कविताओं में पाते हैं। वैसे सामाजिक समस्याओं पर भी यह चैनल मुखर है। मजे की बात है कि इसकी पहली कविता ‘क्या तुम समझती हो’ पहले कई बड़े प्रडक्शन हाउसों और फ़ेस्बुक/यूटूब के बड़े चैनलों ने यह कह कर खारिज कर दी थी कि कविता में दम नहीं है। हर जगह रिजेक्ट होने के बावजूद भी तीनों निराश नहीं हुए और एक सीमित बजट में कुछ दोस्तों की मदद से वीडियो शूट किया और उसके बाद जो हुआ, वह तो इतिहास ही है।

https://www.facebook.com/poetrybol/


सुनो कहानी – फेसबुक, सीरिखा माध्यम बहुत बड़ा वर्चुअल अड्डा है…! जहां हम सब भाती भाती के अनुभव से दो चार होते है. ये माध्यम किसी भी तरह की सूचनाओं को बड़ा फलक तक ले जाना का एक महत्वपूर्ण टूल भी है. इस माध्यम ने बहुत से लोगों से जुड़ने का मौका दिया. जो इस माध्यम का खूबसूरत पहलू है…इला से नबम्बर २०१६ के आस-पास जुड़ना हुआ. फिर हम गाहे-बगाहे कहानियों पर खूब बातें करने लगे…जहां मुझे ज्ञात हुआ कि इला ने समकालीन कहानियाँ कम पढ़ी है…लेकिन समकालीन को जानने व समझने की रूचि उनमेँ लगीं.और मैंने उन्हें कुछ कहानियाँ पढ़ने के लिए भेजी. ये सिलसिला कुछ महीनों तक चलता रहा…इसे सिलसिले के आधार पर हमें समकालीन हिन्दी कहानियों को केंद्र में रखकर कुछ करने का विचार आया…एक बहुत बड़ा वर्ग हैं जो आज नेट इस्तेमाल करता है…और उस वर्ग को साहित्य से जोड़ने के लिए आज साउंड क्लाउड और यू ट्यूब सबसे उपयोगी टूल हैं! .तो हमनें सोचा कि कहानियों को रिकॉर्ड कर यू ट्यूब पर डाला जाए…इस तरह के उपक्रम की शुरुआत हम लोगों ने ‘कथा कथन’ नामक यू ट्यूब चैनल पर कुछ कहानियां डाल कर की. जो भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने का एक मंच हैं. लेकिन, कुछ समय बाद हमें लगा कि एक चैनल क्यूँ न ऐसा शुरू किया जाए जो हिंदी कहानियों पर ही फ़ोकस हो…! उसी आईडिया का नाम -“सुनो कहानी” है… जहाँ समकालीन लेखकों के साथ स्थापित लेखकों की भी कहानियां आप सुन सकेंगे… हर शुक्रवार आप एक नई कहानी से रूबरू होंगे. इस मुहीम में उन लेखकों की भी कहानियां समय-समय पर सुनाई जाएगी जो शायद कहीं छपे नहीं हो! हर उपक्रम को पूरा करने के लिए एक टीम की भी जरूरत रहती हैं. तो ‘सुनो कहानी’ की छोटी सी टीम इस प्रकार हैं-इला जोशी, अनिमेष जोशी, मयंक सक्सेना, अनुज श्रीवास्तव, आलोक कुमार।

https://www.youtube.com/channel/UCW_xd1Eyin-kqVeAbLBe2kA


वैचारिकी – चारिकी भारतीय विद्यामंदिर की ओर से प्रकाशित की जा रही शोध पत्रिका है । धर्म , दर्शन ,विज्ञान , साहित्‍य, लोकसाहित्‍य , इतिहास एवं पुरातत्‍व जैसे महत्‍वपूर्ण विषयों पर शोध परक आलेख प्रकाशित करने वाली यह द्वैमासिक पत्रिका पिछले 31 सालों से निरंतर प्रकाशित हो रही है । सिम्‍पलेक्‍स इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर्स लिमिटेड के सौजन्‍य से प्रकाशित हाने वाली इस पत्रिका के पाठक देश के लगभग सभी भागों में तो है ही विदेशों में भी है। पत्रिका की कुल 4500 प्रतिया पूरे देश में वितरित होती है । भारतीय संस्‍कृति के प्रचार प्रसार के लिए प्रतिबद्ध पत्रिका में विभिन्‍न क्षेत्रों के विद्वानों के साथ ही पाठकों के भी शोध परक आलेख प्रकाशित होते हैं। सत्‍यनारायण पारीक, डा गणपति चंद्र गुप्‍त, डा मनोहर शर्मा इसके सम्‍पादक रह चुके हैं । वर्तमान में डा बाबूलाल शर्मा वैचारिकी के सम्‍पादक हैं।यह कोलकाता से ही निकलने वाली हिन्दी की शोध पत्रिका है जो इतिहास और परम्परा के साथ साहित्य को साथ लेकर चलती हैं। इसमें आपको अतीत झाँकता नजर आयेगा। हिन्दी के साथ अगर राजस्थानी को समझना हो तो वैचारिकी जरूर पढ़ें।
विज्ञान वार्ता – विज्ञान वार्ता एक ब्लॉग है जो विज्ञान के एक सहायक शिक्षक द्वारा चलायी जा रही है। आज लगभग हर लेखक व साहित्यकार की रचनायें और हिन्दी शिक्षण भी आपको यू ट्यूब पर मिल सकती हैं।

सारी दुनिया में छायी मेहंदी है फैशन स्टेटमेंट

मेहंदी भारत ही नहीं बल्कि सारी दुनिया  मेहंदी कुछ समय के लिए ही सही, पर उनकी त्वचा की पहचान बन जाती है, अतः अब वे अपनी उँगलियों तथा पैरों में भी मेहंदी लगवाती हैं। यह प्रथा पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश तथा अन्य अरब के देशों में विख्यात है। आजकल शादियों एवं अन्य उत्सवों में मेहंदी का प्रयोग हाथों तथा पैरों पर भी किया जाता है। हेना का प्रयोग करने वाले ऐसे कई विशेषज्ञ हैं जो आपके पैरों और उँगलियों को खूबसूरत डिज़ाइनों से रंगने में सक्षम हैं। नीचे ऐसी ही कुछ डिज़ाइनों के प्रकार दिए जा रहे हैं।

मेहंदी लगाना एक काफी खूबसूरत प्रथा है जिसका पालन एशियाई देशों में विभिन्न उत्सवों के मौके पर किया जाता है। यह तीज, करवाचौथ, ईद, शादी के समारोहों आदि के समय लगाया जाता है। मेहंदी कई प्रकार की होती हैं और ये एक महिला के हाथों तथा पैरों में एक अलग सुंदरता ले आती है। दुनियाभर में कई महिलाएं ऐसी हैं जो मेहंदी लगाने की दीवानी हैं, और कई ऐसे विशेषज्ञ भी हैं जो उनकी इस इच्छा को पूरा करने के उद्देश्य से नयी नयी डिज़ाइनों की मेहंदी लेकर आते रहते हैं। इसके कुछ उदाहरण हैं पाकिस्तानी मेहंदी, इंडो अरेबिक मेहंदी (Indo Arabic mehndi), मुग़लई मेहंदी, गुजरात मेहंदी आदि। नीचे मेहंदी की डिजाइन के कुछ प्रकार दिए गए हैं।

मेहंदी की डिजाइन के प्रकार  – विभिन्न सांस्कृतिक परिवेशों के आधार पर मेहंदी को कई भागों में बांटा जा सकता है। पाकिस्तानी, अरबी, भारतीय तथा अफ़्रीकी। इन अलग अलग क्षेत्रों के डिज़ाइन भी काफी भिन्न होते हैं।

पाकिस्तानी मेहंदी डिज़ाइन –  मेहंदी डिजाइन फोटो में पाकिस्तानी मेहंदी के डिज़ाइन –  काफी गूढ़ अरबी और भारतीय डिज़ाइनों का मिश्रण होते हैं। इन डिज़ाइनों में काफी बारीकी होती है तथा ये दुल्हनों के द्वारा मेहँदी तथा शादी के मौके पर पहने जाते हैं। बच्चे भी ईद के मौके पर इन डिज़ाइनों का प्रयोग करते हैं।

अरबी मेहंदी डिज़ाइन/अरेबियन मेहंदी डिजाइन –  भारतीय मेहंदी की गूढ़ डिज़ाइनों की तुलना में अरेबियन मेहंदी डिजाइन बनाने में आसान होती है। इनमें ज़्यादातर फूल, पत्तियों और डालियों की चित्रकारी का प्रयोग किया जाता है। अगर आप अपने हाथों और पैरों के ज़्यादातर भाग में मेहंदी लगाना चाहती हैं तो आपके लिए ये डिज़ाइन काफी अच्छे साबित होंगे। अरबी डिज़ाइनों की एक और ख़ास बात यह होती है कि इनमें आकारों को भरा नहीं जाता और सिर्फ बाहरी रूपरेखा बनाई जाती है। ये डिज़ाइन आपके हाथों और पैरों को पूरी तरह से नहीं भरते। इन डिज़ाइनों में काफी कम मेहंदी खर्च होती है और ये आसानी से सूख भी जाते हैं, जिसका अर्थ है कि आपको ज़्यादा देर तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती।

अफ़्रीकी मेहंदी डिज़ाइन –  मेहंदी डिजाइन फोटो में अरबी मेहंदी के डिज़ाइनों की तरह ही अफ़्रीकी मेहंदी में भी आकारों को भरा नहीं जाता। ये डिज़ाइन सामान्य ज्यामितिक (geometric) आकार के होते हैं तथा रेखाओं, चौकोर आकारों तथा बिन्दुओं से भरपूर होते हैं। इस प्रकार की मेहंदी में अरबी मेहंदी की तरह रेखाओं के बीच ज़्यादा जगह नहीं होती। ये आपके हाथों और पैरों को अच्छी तरह से भर लेते हैं।

इंडो अरेबिक मेहंदी डिज़ाइन – इसमें अरबी/अरेबिक मेहंदी अंदाज़ में बाहरी रूपरेखा बनाई जाती है जिसे अच्छे से भरा जाता है। इसमें पारम्परिक भारतीय आकार और साज सज्जा उकेरी जाती है जिसे आप अपने हिसाब से ढाल सकती हैं। यह अरेबिक मेहंदी भारतीय शादियों में प्रयुक्त होने वाली सबसे बेहतरीन डिज़ाइन है।

फूलों वाली मेहंदी की डिज़ाइन – फूल प्रकृति के सबसे खूबसूरत नज़ारों में से एक होते हैं। फूलों के डिज़ाइन मेहंदी को एक नया रंग देने के लिए आसानी से प्रयोग में लाए जा सकते हैं। फूलों की कलाकारी में अगर ग्लिटर तथा शिमर (glitters and shimmers) भी शामिल कर लिए जाएं तो ये शादियों तथा अन्य ख़ास उत्सवों में लगाए जाने के लिए काफी बेहतरीन मेहंदी साबित होगी। इन्हें अच्छे से बनाए जाने तथा पेश किये जाने पर ये काफी सुन्दर दिखते हैं। आप विभिन्न डिज़ाइनों में से कोई भी चुन सकती हैं जिसका प्रयोग कार्यक्रम के अनुसार किया जा सके।

चूड़ियों के जैसी मेहंदी की डिज़ाइन –  मेहंदी का यह प्रकार चूड़ियों के जैसा है। इसकी गोलाकार आकृति आपके हाथों एवं पैरों को काफी खूबसूरत रंग प्रदान करती हैं। इस स्टाइल (style) का प्रयोग करने पर आपको चूड़ियाँ पहनने के बारे में ज़्यादा सोचना नहीं पड़ेगा, क्योंकि ये डिज़ाइन मेहंदी में ही दी गयी है। यह एक अलग रंग से बनाया गया खूबसूरत डिज़ाइन है जिससे आप और आपके हाथ काफी सुन्दर और रंग बिरंगे दिखते हैं।

मोरक्कन मेहंदी –  मोरक्कन हेना डिज़ाइन(mehandi ke design) स्वभाव से काफी ज्यामितिक (geometric) होती है। फूलों के असमान पैटर्न (pattern) इस मेहंदी को काफी खूबसूरत बनाते हैं। यह एक ऐसी डिज़ाइन है जिसका प्रयोग ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएं करना चाहती हैं क्योंकि यह काफी आसान और गरिमामय मेहंदी की डिज़ाइन है। यह कलाइयों की लम्बाई पर काफी सुन्दर लगता है।

राजस्थानी मेहंदी की डिज़ाइन –  इसमें काफी गूढ़ कलाकारी की जाती है तथा मोर, फूल तथा बीच बीच में कुछ घुँघरालेपन तथा कर्व्स (curves) की आकृतियां बनायी जाती हैं। इसमें बीच में ज़्यादा जगह नहीं छोड़ी जाती। इन्हें ज़्यादातर महीन रेखाओं में बनाया जाता है जिसमें हाथों को उँगलियों के सिरे से लेकर कोहनियों तक तथा पैरों को अंगूठे से घुटनों तक अच्छे से ढका जाता है।

ग्लिटर मेहंदी –  यह भारतीय और अरबी डिज़ाइन का मिश्रण है। इनके डिज़ाइन काफी उभरे हुए होते हैं तथा इनकी बाहरी रूपरेखा नाज़ुक पैटर्न और अलग अलग आकारों से भरपूर होते हैं। इन डिज़ाइन्स को और बेहतर बनाने के लिए इनपर चमक (sparkles) का प्रयोग किया गया है। यह आजकल मेहंदी की डिज़ाइन का सबसे प्रचलित आकर्षण है। इन डिज़ाइनों की रूपरेखा को विभिन्न रंगों के पत्थरों से सजाया गया है।

मुग़ल मेहंदी डिज़ाइन –यहाँ ये डिज़ाइन काफी साफ़ सुथरे और बारीकी से भरे हुए हैं। इनका एक अलग ही अंदाज़ है जहां हर कर्ल (curl) और हर बिंदु का अपना महत्त्व तथा अपनी अलग जगह है। मुगलई सबसे पुरानी और सबसे पारम्परिक डिज़ाइनों में से एक है। इनमें फूलों तथा ज्यामिति से जुड़ी हुई डिज़ाइनों का प्रयोग है जिसे हाथों पर काफी खाली जगह छोड़कर उकेरा गया है। आमतौर पर ये नीचे की दिशा में उँगलियों के सिरों से कलाइयों तक जाते हैं। इनमें फूल, पत्तियों और पंखुड़ियों के साथ महत्वपूर्ण रेखाओं और बिन्दुओं का मिश्रण किया गया है। इनमें विभिन्न प्रकार के नमूने, फूल और अन्य पैटर्न ऊपर से नीचे तक फैले हुए होते हैं। इनकी शुरुआत उँगलियों के सिरों से होती है तथा ये हाथ के आधे हिस्से तक जारी रहते हैं। इनमें बहाव के अंदाज़ में विभिन्न नमूनों का प्रयोग किया गया है। इसमें मौजूद अलग अलग रेखाएं, कर्व्स (curves) तथा बिंदु इस मेहंदी को काफी खूबसूरत रूप प्रदान करते हैं। भारत एवं अन्य एशियाई देशों की दुल्हनें इस मेहंदी को काफी पसंद करती हैं।

 

कई रंगों की मेहंदी की डिज़ाइन –  कई रंगों में बनने वाली यह मेहंदी काफी फैशनेबल (fashionable) तथा आजकल के समय में काफी प्रचलन में हैं। इन्हें एक शेडेड अंदाज़ (shaded style) में बनाया गया है। इनमें कई भिन्न भिन्न रंगों का प्रयोग है तथा कई छोटे पत्थरों की सजावट भी है, जिससे इस पैटर्न की खूबसूरती में काफी इज़ाफ़ा हो रहा है।

(आलेख – साभार हिन्दी टिप्स डॉट कॉम)

मेहंदी लायेगी गहरा रंग इस तरह

भारतीय सौन्दर्य सज्जा में मेहंदी का खास स्थान है और इसे अधिकतर राज्यों में लगाया जाता है, फिर चाहे वह करवाचौथ हो या ईद। शादी में भी मेहंदी का होना बेहद जरूरी है और आज मेहंदी बहुत अच्छा प्रोफेशन भी है जिसके लिए डिग्री की नहीं, बस कल्पना और हुनर की जरूरत है। मेहंदी सिर्फ लड़कियाँ ही नहीं पुरुष भी लगाते हैं और बड़े प्रेम से लगाते हैं। मॉल्स में आपको मेहन्दी कॉर्नर भी मिलेंगे। सच कहा जाये तो मेहन्दी अब सिर्फ सौन्दर्य ही नहीं बल्कि एक फैशन स्टेटमेंट और कॅरियर भी है। जरूरी है कि इसे देखने का नजरिया हम बदलें। आइए जानते हैं कि मेहंदी से जुड़ी कुछ खास बातें और इसे गहरा बनाने के तरीके –
मेहंदी का इतिहास
मेहंदी को समर्पित एक वेब पेज की जानकारी बताती है कि मेहंदी संस्कृत शब्द मेदिक्का से ली गई है, हल्दी और हिना पेस्ट का उपयोग हिंदू अनुष्ठान ग्रंथों और इतिहास द्वारा समर्थित है। मेहंदी या भारत में प्रयुक्त हेन्ना मेहेन्दी पौधे से ली गई है जो वैज्ञानिक रूप से लॉसनिया इन्रर्मिस के रूप में जाना जाता है और इसे लोकप्रिय रूप से हेन्ना पेड़ कहा जाता है। यह फूल पौधे अरब प्रायद्वीप, उत्तरी अफ्रीका, पूर्व और दक्षिण अफ्रीका के निकट है। कई अरब देशों में मेहेन्दी प्रथा धूमधाम से मनाई जाती है। इतिहास साबित करता है कि मेहेन्डी या हिना को 1 9वीं शताब्दी में यूरोप में इस्तेमाल किया गया था। यह अरबी संस्कृतियां भारतीय परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा बन गई हैं। मेहंदी भारत के सभी समुदायों में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान बन गई है और आम तौर पर डीजे रातों जैसे अन्य मजेदार भरे कार्यक्रमों का पालन किया जाता है। हिना एक पेस्ट है जो मणि पौधे के उपजी और पत्तियों से बनाई जाती है और जब हाथ पर इसे लागू किया जाता है तो यह मेहंदी बन जाती है।

मेहंदी के गुण – मेहंदी की तासीर ठंड़ी होती हैं। यह बालों में चमक के साथ-साथ दिमाग को शांत रखती है।
मेहंदी का प्रयोग केवल बालों को सुदंर बनाने के लिए ही नहीं किया जाता है, बल्कि इसका प्रयोग विभिन्न रोगों के इलाज में किया जाता है।
ख़ून के विकार, उल्टी, कब्ज, कफ-पित्त, कुष्ठ (कोढ़), बुखार, जलन, रक्तपित्त, पेशाब करने में कठिनाई होना (मूत्रकृच्छ) तथा खुजली आदि रोगों में मेहंदी काफ़ी लाभकारी है।
उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति के पैरों के तलवों और हथेलियों पर मेहंदी का लेप समय-समय पर करने से आराम मिलता है।
मेहंदी लगाने से शरीर की बढ़ी हुई गर्मी बाहर निकल जाती है।
रात के समय मेहंदी को साफ़ पानी में भिगो दें और सवेरे के समय छानकर पीयें। इसके पीने से ख़ून की सफाई होने के साथ-साथ शरीर के अन्दर की गर्मी भी शांत हो जाती है।
इन बातों का ध्यान रखें, मेहंदी रंग लायेगी
साफ हाथों में मेहंदी लगाएं – मेहंदी लगाने या लगवाने से पहले अपने हाथों को अच्छे से धोकर साफ कर लें। अगर मेहंदी लगाने से पहले आपने अपने हाथों में किसी तरह का लोशन या फिर ऑयल लगाया है तो साबुन से हाथों को धोने से वह निकल जाएगा।
चीनी और नींबू का मिश्रण – इस बात को हर कोई जानता है कि मेहंदी लगाने के बाद जब वह सूख जाए, तो उसमें चीनी और नींबू का मिश्रण लगाने से वह काफी गहरी हो जाती है। इस पेस्ट के चिपचिपे होने की वजह से यह मेहंदी को निकलने नहीं देता और आपकी मेहंदी ज्यादा समय तक गहरी रहेगी।
सरसों का तेल लगाएं – मेहंदी को हटाने से 30 मिनट पहले सरसों के तेल को अपने हाथों में लगा लें। सरसों का तेल हथेलियों पर लगाने से मेहंदी आसानी से निकल जाती है। इसके अलावा यह मेहंदी को डार्क भी करती है।
मेहंदी को कभी भी पानी से न धोएं – कई महिलाएं मेहंदी लगाने के बाद मेहंदी वाले हाथों को पानी से धो लेती हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए ऐसा करने से मेहंदी साफ होने के साथ अपना रंग भी छोड़ देती है। मेहंदी छुड़ाने का सबसे आसान तरीका है कि आप या तो अपने हाथों को एक दूसरे के साथ अच्छे से रब कर लें या तो आप एक बटर नाइफ की मदद भी ले सकती हैं। इसके बाद आप अपनी मेहंदी को देखेंगे तो वह गहरे नारंगी रंग की दिखाई देगी। इसके बाद आप अपने हाथों पर पसीना न होने दें, क्योंकि जैसे जैसे समय बितेगा, मेहंदी उतनी ही गहरी हो जाएगी।
सूरज की गर्मी से दूर रहें – मेहंदी लगाते समय सूरज में बैठने से बचना चाहिए। क्योंकि यह आपकी मेहंदी को जल्दी सुखा देगा और आपकी मेहंदी को हल्का बना देगा। गहरी मेहंदी पाने के लिए हमें सूरज की रोशनी से दूरी बनाकर चलना पड़ता है।
विक्स लगाएं – मेहंदी को ऐसे समय में लगाए कि वह पूरी रात भर आपके हाथों में लगी रहे। मेहंदी को हटाने के बाद आप अपने हाथों पर विक्स या आयोडेक्स लगा लें। इन बाम के गर्म होने के कारण यह मेहंदी को गहरा रंग दे देता है।
दस्ताने पहनें – गर्मी के कारण हाथों में मेहंदी का रंग काफी गहरा होने लगता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप किसी गर्म उपकरण के सामने जाकर बैठ जाएं। इसके लिए आपको अपने हाथों पर विक्स और आयोडेक्स लगाना चाहिए। इसके बाद दस्ताने पहन कर सो जाना चाहिए। ऐसा करने से हाथों में गर्मी होने लगती है और मेहंदी का रंग गहरा होने लगता है।
वैक्सिंग और स्क्रबिंग न करें – वैक्सिंग और स्क्रबिंग आपको मेहंदी लगाने से पहले करनी चाहिए ना कि बाद में। मेहंदी लगाने के बाद स्क्रब या वैक्स करने से हाथों से मेहंदी का रंग हल्का होने लग जाता है।
पानी से दूर रहें – अगर आप चाहती हैं कि आपकी मेहंदी काफी गहरी हो तो ऐसे में आपको पानी से दूरी बनानी चाहिए। मेहंदी वाले हाथों में पानी पड़ने से मेहंदी का रंग हल्का हो जाता है। हम जानते है कि ऐसे कई काम होते हैं जिनमें पानी की जरूरत होती हैं। ऐसे में आप अपने घरवालों और दोस्तों की मदद ले सकती हैं। इसके अलावा आप दस्ताने पहनकर भी अपने काम कर सकती हैं। लेकिन ध्यान रहे कि यह दस्ताने ज्यादा समय के लिए ना पहने, ऐसा करने से हाथों में काफी अधिक पसीना आ जाता है जिससे मेहंदी हल्की भी हो सकती है।