नयी दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन बांध सुरक्षा विधेयक-2018 पेश किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत में बांधों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी और संस्थागत कार्ययोजना मुहैया कराना है। भारत में बांधों की सुरक्षा के लिए कानून की कमी के कारण यह चिंता का मुद्दा है। बांधों का निर्माण वैसे भी देश में बड़ी बहस का मसला बनता रहा है। हालांकि सच्चाई यह भी है कि देश के तेज विकास के लिए ऊर्जा जरूरतें पूरी करनी होंगी। इसके लिए बांध बनाने ही होंगे लेकिन परिस्थिति की संतुलन को भी बनाए रखना जरूरी है।
अमेरिका और चीन के बाद सबसे बड़े बांध भारत में हैं। यहां 5,200 से अधिक बड़े बांध हैं और लगभग 450 निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा हजारों मध्यम और छोटे बांध हैं।
ये हैं प्रावधान
यह विधेयक वर्तमान में मौजूद सलाहकार निकाय के रूप में मौजूद केंद्रीय बांध सुरक्षा संगठन (सीडीएसओ) और राज्य बांध सुरक्षा संगठन (एसडीएसओ) की जगह प्रत्येक राज्य के लिए नियामक निकाय के रूप में एक राज्य बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एसडीएसए) और एक राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एसडीएसए) की स्थापना सुनिश्चित करता है। एनडीएसए दिशानिर्देशों का एक ढांचा स्थापित करेगा, जिसके अनुसार बांधों की सुरक्षा को बनाए रखा जाना है। इस विधेयक में बांधों का निर्माण करने वाली कंपनियों को लापरवाही के लिए और सुरक्षा मानदंडों का पालन न करने पर दंडित करने के प्रावधान भी शामिल है।
सुरक्षा बिल क्यों है जरूरी
भारत के 75 फीसद बड़े बांध 25 वर्ष से अधिक पुराने हैं। 164 बांध सौ साल से भी अधिक पुराने हैं। पूर्व में अलग-अलग समय पर देश के भीतर 36 बांधों के टूटने से न केवल पर्यावरणीय क्षति हुई बल्कि हजारों लोगों की जान भी जा चुकी है। इनमें राजस्थान के ग्यारह, मध्य प्रदेश के दस, गुजरात के पांच, महाराष्ट्र के चार , आंध्र प्रदेश के दो और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु ओडिशा के एक-एक बांध शामिल हैं। 1979 में गुजरात में स्थित मच्छू -2 बांध के टूटने से 1,800 लोगों की मौत हो गई थी।
राज्य क्यों हैं विरोध में
कानून बनने के बाद प्रत्येक राज्य में स्थित बांधों की सुरक्षा के लिए एसडीएसए स्थापित किया जाएगा। एक राज्य के स्वामित्व वाले बांध, जो किसी अन्य राज्य में स्थित हैं, या केंद्रीय लोक सेवा उपक्रमों (सीपीएसयू) के अंतर्गत आने वाले बांध या वो बांध जो दो या दो से अधिक राज्यों में फैले हैं, सभी एनडीएसए के अधिकार क्षेत्र में होंगे। इसी कारण से तमिलनाडु जैसे राज्यों को ओर से विधेयक का विरोध किया जा रहा है। क्योंकि यह राज्य केरल में कई बांधों का प्रबंधन करता है, मुल्ला पेरियार बांध उनमें से एक है। विरोध करने वाले राज्यों को डर है कि यह विधेयक उनकी शक्ति कमजोर करेगा। 2014 में तमिलनाडु और केरल सुप्रीम कोर्ट में गए थे। तमिलनाडु अपने यहां बांधों की जल भंडारण क्षमता में वृद्धि करना चाहता था, जबकि केरल ने सुरक्षा का हवाला देते हुए विरोध किया था। चूंकि जल राज्य का विषय है, लिहाजा कांग्रेस, तेदेपा, अन्नाद्रमुक और बीजद जैसे राजनीतिक दलों ने भी इस विधेयक का विरोध किया है।
भारत से बांधों के मामले में कहीं पीछे है चीन
अब तीन साल तक सुरक्षित रहेगी माँ बनने वाली खिलाड़ियों की रैंकिंग
सेंट पीटर्सबर्ग : अब महिला टेनिस खिलाड़ियों की रैंकिंग मां बनने के कारण नीचे नहीं आएगी। अंतरराष्ट्रीय महिला टेनिस संघ (डब्ल्यूटीए) ने गुरुवार को यह फैसला किया। ऐसी खिलाड़ियों की रैंकिंग ब्रेक लेने से तीन साल की अवधि तक सुरक्षित रहेगी। यह लाभ चोट के कारण बाहर होने वाली खिलाड़ियों को भी दिया जाएगा। हालांकि, डब्ल्यूटीए ने इस खिलाड़ियों को टूर्नामेंट सीडिंग देने की गारंटी से इनकार कर दिया है। सीडिंग देने के मामले में डब्ल्यूटीए की दलील है कि इसे देने का अधिकार टूर्नामेंट के आयोजकों के पास ही रहेगा। हालांकि, इतनी गारंटी दी गई है कि ऐसी खिलाड़ियों को पहले राउंड में किसी सीडेड खिलाड़ी से मुकाबला नहीं करना होगा।
अमेरिकी टेनिस स्टार सेरेना विलियम्स ने 2017 में मां बनने के बाद इस साल फरवरी में वापसी की थी, लेकिन उन्हें फ्रेंच ओपन में कोई सीडिंग नहीं दी गई। हालांकि, विम्बलडन में उन्हें 25वीं दी गई थी। उस वक्त वे रैंकिंग के लिहाज से टॉप 32 से बाहर थीं। डब्ल्यूटीए ने खिलाड़ियों को ड्रेस कोड के लिहाज से भी राहत दी है। अमेरिकी स्टार सेरेना विलियम्स अब अपना मशहूर ब्लैक कैट सूट पहन सकेंगी। डब्ल्यूटीए ने कहा कि लेंगिंग और मिड थाई कम्प्रेशन शॉर्ट्स को बिना स्कर्ट के भी पहना जा सकेगा।
कृषि ऋण माफी चुनावी वादों का हिस्सा नहीं होना चाहिए: राजन
नयी दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने शूक्रवार को कहा कि कृषि ऋण माफी जैसे मुद्दों को चुनावी वादा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र लिखा है कि ऐसे मुद्दों को चुनाव अभियान से अलग रखा जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि इससे न केवल कृषि क्षेत्र में निवेश रुकता है, बल्कि उन राज्यों के खजाने पर भी दबाव पड़ता है जो कृषि ऋण माफी को अमल में लाते हैं।
गौरतलब है कि पिछले पांच साल के दौरान राज्यों में होने वाले चुनावों में किसी ना किसी राजनीतिक दल ने कृषि ऋणमाफी का वादा किया है। हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी अनाज का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और कृषि ऋण माफी कई पार्टियों के घोषणापत्र का हिस्सा रहा है।
राजन ने कहा, ‘‘मैं हमेशा से कहता रहा हूं और यहां तक कि मैंने चुनाव आयुक्त को भी पत्र लिखकर कहा है कि ऐसे मुद्दों को चुनाव अभियान का हिस्सा नहीं होना चाहिए। मेरा कहने का तात्पर्य है कि कृषि क्षेत्र की समस्याओं पर निश्चित रूप से विचार किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या कृषि ऋण माफ करने से किसानों का भला होने वाला है? क्योंकि किसानों का एक छोटा समूह ही है जो इस तरह का ऋण पाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ कृषि ऋण माफी का अक्सर फायदा उन लोगों को मिलता है जिनके बेहतर संपर्क होते हैं ना कि गरीबों को। दूसरा इससे प्राय: उस राज्य की राजकोषीय स्थिति के लिए कई समस्याएं पैदा होती हैं जो इसे लागू करते हैं और मेरा मानना है कि दुर्भाग्यवश इससे कृषि क्षेत्र में निवेश भी घटता है। राजन ने कहा कि आरबीआई भी बार-बार कहता रहा है कि ऋण माफी से ऋण संस्कृति भ्रष्ट होती है, वहीं केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बजट पर भी दबाव पड़ता है।
राजन ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि किसानों को भी उनके हक से कम नहीं मिलना चाहिए। हमें एक ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जहां वह एक सक्रिय कार्यबल बन सकें। इसके लिए निश्चित तौर पर अधिक संसाधनों की जरूरत है, लेकिन क्या ऋण माफी सर्वश्रेष्ठ विकल्प है, मेरे हिसाब से इस पर अभी बहुत विचार करना बाकी है। राजन सितंबर 2016 तक तीन साल के लिए आरबीआई के गवर्नर रहे हैं। इस समय वह शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में अध्यापन कार्य कर रहे हैं।
इस रेलवे स्टेशन को बखूबी सम्भाल रहीं महिलाएं
भागलपुर : दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जो महिलाएं नहीं कर सकती हैं। अब महिलाएं रेलवे स्टेशनों को भी संभाल रही हैं। रेलवे के मालदा मंडल ने नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक अनूठी पहल की है। मंडल के भागलपुर स्टेशन (बिहार) पर ट्रेनों के संचालन के लिए स्टेशन मास्टर पैनल में चार महिला पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई है। ये सभी महिलाएं दक्षता के साथ ट्रेन परिचालन का कार्य कर रही हैं। ट्रेन परिचालन के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी पैनल सिस्टम पर सभी को तैनात किया गया है। वे पैनल बटन दबाकर सिग्नल से लेकर रेलवे ट्रैक चेंज करने का काम कर रही हैं। मालदा मंडल की रेल मंडल प्रबंधक महिला होने के कारण उन्होंने महिलाओं के कंधे पर बड़ी जवाबदेही दी है। श्वेता भारती, श्वेता वर्मा, पूजा कुमारी और सोनाली अभी ट्रेन ऑपरेट करने का काम बखूबी निभा रही हैं। ये सभी महिला रेल अधिकारी पुरुषों की ही तरह निर्धारित मानकों के अनुरूप अपने कर्तव्यों का पालन कर रही हैं। इस रेलवे स्टेशन के ट्रेनों के परिचालन के सभी काम अलग-अलग शिफ्टों में 24 घंटे महिलाएं ही संभालती हैं। महिला कर्मियों ने कहा कि शुरुआती दौर में उन्हें परेशानियां हुई थीं, लेकिन समय के साथ वे इस कार्य में दक्ष होती गईं और अब वे आराम से ट्रेनों का संचालन कर रही हैं। यहां काम करने वाली सभी महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है कि ताकि वे किसी बड़े रेलवे स्टेशन पर काम करने के दौरान पेश आनेवाली चुनौतियों का भी आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें। अलग-अलग विभागों में 60 से ज्यादा महिलाएं हैं तैनात: भागलपुर स्टेशन पर रोजाना औसतन 90 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। 42 जोड़ी एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं। पूर्व रेलवे जोन के तीन सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में से भागलपुर एक है। इस स्टेशन पर फिलहाल अलग-अलग विभाग में 60 महिला रेल कर्मियों की तैनाती की गई है। यहां वे स्टेशन मास्टर के अलावा बुकिंग क्लर्क, टिकट चेकिंग स्टाफ और ट्रेनों के रखरखाव का कार्य कर रही हैं। इसी तरह महिला यात्रियों की सुरक्षा में आरपीएफ और जीआरपी में हवलदार पद पर दो महिलाएं और कई निरीक्षक हैं। महिला पोर्टर और चतुर्थवर्गीय कर्मचारी भी इस स्टेशन पर तैनात हैं। ट्रेनों की साफ-सफाई से लेकर अन्य कार्य भी महिलाएं कर रही हैं।
विनोद खन्ना की पहली पत्नी गीतांजलि का निधन
मुम्बई : दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना की पहली पत्नी गीतांजलि का महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित परिवार के फार्महाउस पर निधन हो गया। वह 70 साल की थीं। पुलिस ने बताया कि गीतांजलि और उनके अभिनेता पुत्र अक्षय खन्ना सप्ताहांत में मांडवा स्थित फार्महाउस पर गए थे। मांडवा थाना प्रभारी मेघना बुरांडे ने बताया कि शनिवार को गीतांजलि ने बेचैनी की शिकायत की जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इलाज के बाद अभिनेता उन्हें लेकर वापस आ गए। अक्षय मां को शयनकक्ष में ले गए और उन्हें आराम करने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि इसके बाद अक्षय थोडी देर के लिए बाहर चले गए। लौटने पर उन्होंने घरेलू सहायक से मां के बारे में पूछताछ की और उनके शयनकक्ष में गए जहां वह अचेत स्थिति में थी। इसके बाद उन्होंने भाई राहुल खन्ना एवं डाक्टरों को घर बुलाया। डाक्टरों की सलाह पर गीतांजलि को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। रविवार को पोस्टमार्टम करने के बाद उनका शव परिजनो के हवाले कर दिया गया। विनोद खन्ना का पिछले साल अप्रैल में 70 साल की उम्र में निधन हो गया था। वह भारतीय जनता पार्टी के सांसद थे। खन्ना का गीतांजलि के साथ 1985 में तलाक हो गया था।
सेना को रोजगार का जरिया न समझें, नौकरी चाहिए तो रेलवे में जाएं: सेना प्रमुख
पुणे : सेना प्रमुख बिपिन रावत ने हिदायत दी है कि लोग सेना को रोजगार का एक मौका समझते हैं, उन्हें इस सोच से बाहर निकलने की जरूरत है। सेना में शामिल होने के लिए उनको शारीरिक और मानसिक दोनों तौर पर मजबूत होना चाहिए। रावत ने उन सैनिकों के चेतावनी भी दी जो कर्तव्य से बचने या फायदा पाने के लिए बीमारी या शारीरिक लाचारी की आड़ लेते हैं। रावत ने यह भी भरोसा दिलाया कि जो पूर्व और वर्तमान सैनिकों ने ड्यूटी के दौरान अपना कोई अंग गंवाया, उनकी पूरी मदद की जाएगी। रावत ने चेतावनी देते हुए कहा- सेना रोजगार देने वाली संस्था नहीं है। अपने दिमाग से यह गलतफहमी निकाल दें। अगर आप सेना मे आते हैं तो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से चुस्त-दुरुस्त होना चाहिए। हमेशा कठिन हालात का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। रावत के मुताबिक- कई लोग मेरे पास आते हैं और सेना में नौकरी लगाने की बात कहते हैं। मैं उनसे कहता हूं कि भारतीय सेना नौकरी का साधन नहीं है। नौकरी लेनी है तो रेलवे में जाएं या अपना व्यवसाय कर लीजिए। रावत पुणे के एक समारोह में दक्षिणी, दक्षिणी-पश्चिमी और मध्य कमांड के वर्तमान और सेवानिवृत 600 दिव्यांग सैनिकों के बीच गुरुवार को बोल रहे थे। सेना ने 2018 को ‘ड्यूटी के दौरान दिव्यांग हुए सैनिकों का वर्ष’ घोषित किया है। रावत ने कहा- मैं कई ऐसे सैनिकों और अफसरों को जानता हूं जो खुद को हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन, डाइबिटीज से पीड़ित बताते हैं और चुनौती वाली पोस्टों पर नियुक्ति से राहत चाहते हैं। ये लोग दरअसल शारीरिक-मानसिक रूप से कमजोर होते हैं और तनाव झेल नहीं पाते। अगर वास्तव में अक्षम सैनिक जबर्दस्त प्रदर्शन कर सकता है तो उन्हें शर्म आनी चाहिए। रावत के मुताबिक- सैनिक और अफसर जिन मुश्किल हालात में काम करते हैं, इस बात को हम बखूबी जानते हैं। जो डॉक्टर आपको मेडिकल सहायता देते हैं, वे भी यह जानते हैं कि जब वे सही और गलत का निर्णय लेते हैं, तो कुछ लोग अदालत में जाते हैं। अदालत के फैसले के बाद सैनिक गर्व से कहते हैं कि उन्हें अक्षमता पेंशन मिली।
सेना प्रमुख ने कहा- भारतीय सेना आपकी मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है। अगर आपको किसी भी तरह की तकलीफ है तो इसके लिए आप अपनी यूनिट को पत्र लिख सकते हैं। अगर आपको कोई मदद नहीं मिलती तो इसके लिए सेना द्वारा नियुक्त अफसर को मैसेज करें। मैं भरोसा दिलाता हूं कि आपको एक महीने में जवाब मिल जाएगा।
पश्चिम बंगाल के विधानसभा उपाध्यक्ष का निधन
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष एच ए सफवी का शहर के एक अस्पताल में बुधवार की सुबह में उम्र संबंधी बीमारियों की वजह से 73 साल की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। पूर्व आईपीएएस अधिकारी सफवी तृणमूल कांग्रेस की टिकट पर 2011 और 2016 में उलुबेरिया (पूर्वी) विधानसभा सीट से चुने गए थे। वह तृणमूल कांग्रेस की सरकार में नदी परिवहन एवं कारावास प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी संभाली थी। सफवी को 23 जून 2016 को विधानसभा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘‘ मुझे यह जानकर दुख हुआ कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष हैदर अजीज सफवी अब हमारे बीच नहीं हैं। वह लंबे समय से हमारे साथ जुड़े हुए बेहद वरिष्ठ और सम्मानीय व्यक्ति थे। उनका हमारे बीच से जाना बड़ी क्षति है।’ मुख्यमंत्री ने सफवी के परिवार के प्रति संवेदना जताई।
सिंधू ने विश्व टूर फाइनल्स का खिताब जीता
ग्ंवाग्झू, : भारत की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधू 2017 की विश्व चैंपियन नोजोमी ओकुहारा को हराकर विश्व टूर फाइनल्स के खिताबी मुकाबले में जीत के साथ लंबे समय बाद किसी बड़ी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं। सिंधू ने सीधे गेम में जीत दर्ज की और विश्व टूर फाइनल्स का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
लगातार तीसरी बार सत्रांत फाइनल्स में खेल रही सिंधू को पिछले साल जापान की ही अकाने यामागुची के खिलाफ शिकस्त के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा था लेकिन इस बार वह एक घंटे और दो मिनट चले मुकाबले में ओकुहारा को 21-19 21-17 से हराकर खिताब जीतने में सफल रहीं। काफी समय से बड़े टूर्नामेंटों के फाइनल में जीत दर्ज करने में नाकाम रही सिंधू ने जश्न के आंसुओं के साथ राहत की सांस ली। साइना नेहवाल 2011 में विश्व सुपर सीरीज फाइनल्स के फाइनल में पहुंची थी जबकि 2009 में ज्वाला गुट्टा और वी दीजू की जोड़ी मिश्रित युगल में उप विजेता रही थी। ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता सिंधू ने अहम मौकों पर धैर्य बरकरार रखा और अधिकांश समय जापान की खिलाड़ी पर बढ़त बनाए रखी। पहले गेम में ओकुहारा ने कुछ गलतियां की जिससे सिंधू ने बढ़त बनाई। सिंधू ने कुछ अच्छे ड्राप शाट लगाए और नेट पर अच्छे अंक जुटाकर 7-3 की बढ़त बनाई लेकिन ओकुहारा ने स्कोर 5-7 कर दिया। सिंधू ने हालांकि लंबी रैली में दबदबा बनाया और वह ब्रेक तक 11-6 से आगे थी। ओकुहारा ने इसके बाद वापसी की और 16-16 के स्कोर पर बराबरी हासिल कर ली। जापान की खिलाड़ी एक समय 6-14 से पीछे थी लेकिन अगले 12 में से 10 अंक जीतकर स्कोर बराबर करने में सफल रहीं। ओकुहारा ने हालांकि इसके बाद दो स्मैश बाहर मारकर सिंधू को 19-17 से बढ़त बनाने का मौका दिया। सिंधू को इसके बाद तीन गेम प्वाइंट मिले। ओकुहारा ने दो गेम प्वाइंट बचाए लेकिन सिंधू ने शानदार ड्राप शाट के साथ पहला गेम जीत लिया। दूसरे गेम में भी सिंधू ने ओकुहारा को लंबी रैली में उलझाकर 6-4 की बढ़त बनाई लेकिन जापान की खिलाड़ी ने 7-7 पर बराबरी हासिल कर ली। सिंधू हालांकि ब्रेक तक 11-9 की बढ़त बनाने में सफल रही। ओकुहारा ने 12-13 और फिर 16-17 के स्कोर से सिंधू पर दबाव बनाए रखा। ओकुहारा ने नेट पर शाट उलझाकर सिंधू को 18-16 की बढ़त बनाने का मौका दिया। सिंधू ने लंबी रैली का अंत स्मैश के साथ करते हुए स्कोर 19-16 किया। सिंधू ने 19-17 के स्कोर पर नेट पर भाग्यशाली अंक के साथ तीन मैच प्वाइंट हासिल किए और फिर तुरंत अगला अंक जीतकर गेम, मैच और खिताब अपने नाम किया।
देश की पहली महिला फोटोग्राफर होमी व्यारवाला
नयी दिल्ली : क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त, 1947 को लाल किले पर ध्वज फहराए जाने की एेतिहासिक फोटो किस महिला पत्रकार ने अपने कैमरे में कैद किया। 21वीं सदी में भले ही एक महिला फोटोग्राफर का होना बहुत सहज लगे, लेकिन उस वक्त यह बड़ी बात थी। घटनास्थल पर एक महिला के हाथों में कैमरा लोगों के लिए अचरज का विषय था। जाहिर है कि उस दौर में एक महिला फ़ोटो पत्रकार होना उनके लिए कतई आसान नहीं रहा होगा। आज हम आपको उस महिला फोटो ग्राफर के बारे में बताएंगे, जिसने सामाजिक दायरे को लांघते हुए यह कारनामा कर दिखाया।
इस मशहूर फ़ोटो-पत्रकार का नाम था होमी व्यारवाला। उन्हें भारत की पहली महिला फ़ोटो-पत्रकार होने का श्रेय प्राप्त है। होमी भारत के ब्रिटिश शासन से लेकर आजाद होने की अविध के दौरान देश में बदलाव के दौर की तस्वीरें खींचने के लिए जाना जाता है। आम तौर पर पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस पेशे में उन्होंने अपनी एक अलग छाप छोड़ी।
आधुनिक भारत के इतिहास में होमी ने कुछ यादगार और दुर्लभ तस्वीरें अपने कैमरे में कैद की। होमी ने आजाद भारत के बाद तिरंगा फहराने की तस्वीर अपने कैमरे में कैद किया। इसके अलावा महात्मा गांधी की हत्या की दुर्लभ तस्वीरें खींचीं थीं। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की तोते को रिहा करने वाली उनकी तस्वीर बहुत चर्चित रही। देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के अंतिम संस्कार की दुर्लभ फोटो भी उन्होंने अपने कैमरे में कैद किया। ब्रिटेन की महरानी एलिजाबेथ और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति आइजनहावर जब भारत आए तो उन्होंने उनकी यादगार तस्वीरें भी खींचीं।
दिल्ली आने के बाद होमी ने साइकिल से पूरी दिल्ली की परिक्रमा किया था। वह दिल्ली के एक छोर से दूसरे छोर तक साइकिल से गईं थी। दरअसल, ब्रिटिश सूचना सेवा में चयन के बाद होमी मुंबई से दिल्ली पहुंची। उन्होंने दिल्ली में लंबा वक्त बिताया। दिल्ली आने पर होमी ने पूरी दिल्ली को समझने के लिए साइकिल से इसका भ्रमण किया।
भारत की पहली महिला फोटो पत्रकार पर गूगल की भी नजर पड़ी। गूगल ने उनके इस योगदान के लिए होमी की 10वीं जयंती पर उनका डुडल बनाकर उन्हें सम्मानित किया। गूगल के इस सम्मान के बाद पूरी दुनिया की नजर होमी पर गई थी। इसके बाद वह सुर्खियों में आईं।
होमी ने बताया बेहतरीन फोटो खींचने का हुनर
होमी ने एक अच्छे फोटोग्राफर बनने और एक अच्छी फोटो खींचने का हुनर भी बताया था। उनकी स्पष्ट मान्यता थी कि एक बेहतरीन फोटो के लिए एक बेहतरीन कैमरे के साथ-साथ कंपोजिशन का सही समय और कोण बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिसे इसकी समझ है, वही बेहतरीन फोटो पत्रकार है। एक अंग्रेजी अखबार को दिए एक साक्षात्कार में होमी ने ये बातें कहीं थीं। अपने इस साक्षात्कार में उन्होंने कहा था एक ही समय पर कई लोग एक चीज की तस्वीर खींच रहे होते हैं और सबकी अपनी शैली और अंदाज होता है। लेकिन कोई एक ही होता है, जो सही कोण से तस्वीर खींच पाता है।
दसवीं की परीक्षा पास करने वाली अकेली छात्रा
होमी का जन्म 9 दिसंबर, 1913 को गुजरात के नवसारी में हुआ था। बेटी की बेहतर शिक्षा दिलाने के मकसद से होमी के परिजन मुंंबई आ गए। मुंबई के एक बेहतरीन स्कूल में होमी का दाखिला कराया। अपने स्कूल में दसवीं की परीक्षा पास करने वाली वह अकेली छात्रा थीं। इस स्कूल में कुल 36 छात्र थे। होमी जेजे स्कूल अाफ आर्ट्स और मुंबई के सेंट जेवियर कालेज से पढ़ाई पूरी की। फोटोग्राफी की दुनिया से उनकी पहचान टाइम्स आफ इंडिया में फोटोग्राफर उनके पति मानेकशा व्यारवाला ने कराई।
(साभार – दैनिक जागरण)
वेबसाइट्स से बच्चों के अश्लील वीडियो हटाने के लिए जल्द जारी होंगे निर्देश
नयी दिल्ली : वेबसाइट्स से बच्चों के अश्लील वीडियो, दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म की तस्वीरें और वीडियो हटाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय जल्द ही दिशानिर्देश या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी करेगा। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में दिशानिर्देश या एसओपी दो हफ्ते के भीतर जारी किए जाने की उम्मीद है। साथ ही गृह मंत्रालय फेसबुक, यूट्यूब, वाट्सएप और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ नियमित रूप से बैठकें कर रहा है ताकि अफवाहों और नफरत फैलाने वाले संदेशों को फैलने से रोका जा सके। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि दुष्कर्म और बच्चों से जुड़े अश्लील वीडियो और तस्वीरें हटाने के लिए सरकार दिशानिर्देश या एसओपी जारी कर सकती है।




