Tuesday, April 21, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 627

शख्स, जिसने स्पर्श से धीरूभाई अम्बानी को भी स्वस्थ कर दिया

मुम्बई :  आध्यात्मिक स्पर्श उपचार एक अकथनीय घटना है जो किसी भी वैज्ञानिक प्रणाली और प्रक्रियाओं से आगे की बात करती है। हैरत इस बात की है कि यह उपचार कोई डॉक्टर नहीं आम इन्सान कर रहा है और बहुत से लोगों को पीड़ामुक्त कर चुका है। स्पर्श से प्रभावित भाग में गर्मी पैदा होती है। दावा है कि इसके परिणामस्वरूप मरीज को उम्र भर दर्द और कठोरता से राहत मिलती है। यह शख्स हैं मोहन जोशी, जो डॉक्टर नहीं है और न ही भगवान का कोई अवतार। जोशी का कहना है कि वर्षों पहले उनको एक आध्यात्मिक गुरु से यह पता चला था कि वास्तव में उन्हें विशेष शक्तियां प्रदान की गई थीं, जो सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, रुमेटीइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस जैसे मामलों में राहत दिला सकती थीं। शुरुआत उन्होंने एक दोस्त के कहने पर उसके उपचार से की और निःशुल्क चिकित्सा प्रदान करने लगे।
उनका कहना है कि यह चिकित्सा प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत सस्ती और सुलभ है। इस आध्यात्मिक उपचार चिकित्सा से लाभान्वित होने वााले लोगों की सूची लम्बी है। इनमें प्रमुख उद्योगपति, लेखक, अभिनेता, सीए, अधिवक्ता शामिल हैं और सूची जारी होती है। आध्यात्मिक उपचार गठिया, लूम्बेगो, वैरिकाज़ नसों की सूजन, ब्रोंकोस्पज़म, ऑस्टियोपोरोसिस, स्पॉन्डिलाइटिस, पक्षाघात, पेट में ऐंठन, जमे हुए कंधे, सिर का चक्कर, तनाव, अनिद्रा जैसी कई अन्य बीमारियो में कारगर है। भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त हो चुके जोशी स्पर्श चिकित्सा की शक्ति को एक निस्वार्थ कार्य मानते हैं। जोशी 1982 से मुम्बई में आध्यात्मिक उपचार का अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने तब से अब तक सौ से अधिक रोगियों का इलाज किया है। लगभग 40 प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं ने उनके उपचार कार्य को गति दी है। उनका कहना है कि अपनी चिकित्सा से उन्होंने धीरूभाई अम्बानी, दिवंगत नेता बलराम जाखड़ तक का इलाज किया है। अम्बानी के शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा मार गया था, जोशी के उपचार से ठीक हुए। हालाँकि वे यह भी स्वीकार करते हैं कि यह उपचार प्रणाली राहत देती है, पूर्णतया समाधान नहीं है। कोलंबो में प्रसिद्ध विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें “डॉक्टर ऑफ साइंस” की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने भारत के कई शहरों जैसे मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, सूरत, नवसारी, भोपाल, इंदौर, मदुरै, कोयम्बटूर, पोलाची आदि में चिकित्सा शिविरों में भी भाग लिया है। फिलहाल उनको इस काम में उनकी बेटी से मदद मिल रही है।

20 लाख तक की ग्रेच्युटी पर नहीं लगेगा आयकर

नयी दिल्ली : कर्मचारियों को अब 20 लाख तक की ग्रेच्युटी पर कोई आयकर नहीं देना होगा। कैबिनेट की बैठक में वित्त मंत्रालय के ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार ने बजट में ही कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाने का ऐलान किया था। श्रम मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी गई है। इस प्रस्ताव से उन कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा जो ग्रेच्युटी भुगतान कानून, 1972 के दायरे में नहीं आते।
मंत्रालय ने बताया, “वित्त मंत्रालय ने आयकर कानून, 1961 की धारा 10 (10) (तीन) के तहत ग्रेच्युटी के लिए आयकर छूट सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी है।’ कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(10)(iii) में संशोधन किया जाएगा और इस एक्ट के तहत ग्रेच्युटी की रकम पर मिलने वाली इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जाएगी।

फ्रांस्वा बेटनकोर्ट : दुनिया की सबसे अमीर महिला

नयी दिल्ली : खूबसूरत दिखने के लिए दुनियाभर में महिलाएं ही नहीं पुरूष भी तरह तरह के सौंदर्य प्रसाधन इस्तेमाल करते हैं। क्रीम, फाउंडेशन, शैंपू और हेयर कलर जैसे उत्पादों से उनकी खूबसूरती कितनी बढ़ती है, यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन इन तमाम लोगों की जेब से निकलने वाले पैसे ने फ्रांस की सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनी लॉरियल की मालकिन को दुनिया की सबसे अमीर महिला जरूर बना दिया है। आज आलम यह है कि इस कंपनी की मालकिन की संपति 51 अरब डालर पर पहुंच चुकी है।
भारतीय टेलीविजन के विज्ञापनों में कभी ऐश्वर्या राय तो कभी सोनम कपूर लड़कियों को लॉरियल के विभिन्न सौंदर्य प्रसाधन, शैंपू, कंडीशनर या हेयर कलर लगाने की सलाह देती हैं। शहरों में ही नहीं बल्कि गांव देहात की लड़कियों में भी इन सुंदरियों की तरह दिखने की चाहत इतनी ज्यादा है कि देश में भी ऐसे तमाम उत्पादों पर दिल खोलकर पैसा खर्च किया जाता है। फोर्ब्स द्वारा हाल ही में जारी दुनिया के रईस लोगों की सूची में फ्रांस की कॉस्मेटिक कंपनी लॉरियल की वारिस फ्रांस्वा बेटनकोर्ट को 15वां स्थान मिला है। चूंकि इस सूची में उनसे ऊपर सभी पुरूष हैं इसलिए उन्हें दुनिया की सबसे अमीर महिला माना गया है। यह सच है कि फ्रांस्वा को यह दौलत उनकी मेहनत से नही बल्कि किस्मत से मिली है, लेकिन पिछले दो साल में उन्होंने कंपनी और अपनी संपति में इजाफा किया है। वह लिलियन बेटनकोर्ट की पुत्री हैं, जिनकी 2017 में मौत होने के बाद तमाम संपति इकलौती बेटी फ्रांस्वा को मिली।
इस परिवार का फोर्ब्स की सूची में आना कोई नई बात नहीं है। फ्रांस्वा से पहले उनकी मां लिलियन दुनिया की सबसे अमीर महिला और दुनिया की 14वीं सबसे अमीर शख्स थीं और 2017 में उनकी संपत्ति 44.3 अरब डॉलर थी। 2005 में फोर्ब्स ने लिलियन को दुनिया की 39वीं सबसे ताकतवर महिला बताया था। लिलियन बेटनकोर्ट का जन्म पेरिस में हुआ था और वह अपने माता पिता की इकलौती संतान थीं। उनके पिता यूगेन शूलर ने साल 1909 में लॉरियल की शुरुआत की थी। लिलियन मात्र 5 साल की थीं जब उनकी मां का देहांत हो गया। वह अपने पिता के बहुत नजदीक रहीं और बहुत कम उम्र में कंपनी के कामों में उनका हाथ बंटाने लगीं।
समय के साथ कंपनी बढ़ती रही और साल 1950 में लिलियन ने राजनीतिज्ञ आंद्रे बेटनकोर्ट से शादी कर ली। उनके यहां 10 जुलाई 1953 को फ्रांस्वा बेटनकोर्ट का जन्म हुआ। फ्रांस्वा को इस कंपनी की सर्वेसर्वा होने के अलावा बाइबल पर टिप्पणियों और यहूदी-ईसाई संबंधों पर उनकी सशक्त लेखनी के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने ज्यां पियरे मीयर्स से विवाह किया और दोनों के दो बच्चे हैं, जिनकी उन्होंने यहूदी परंपरा के अनुसार परवरिश की है।
2017 में कंपनी की कमान संभालने वाली फ्रांस्वा की उपलब्धियों की बात करें तो बेटनकोर्ट के नेतृत्व में लॉरियल कंपनी ने वर्ष 2018 में बिक्री का रिकार्ड बनाते हुए पिछले एक दशक में बिक्री में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की। वह 1997 से लॉरियल के बोर्ड में शामिल रही हैं और कंपनी की चेयरपर्सन हैं। वह अपने परिवार के समाज सुधार के कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं और उनके द्वारा चलाये जा रहे फाउंडेशन ने देश में विज्ञान और कला की प्रगति में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
देश में सौंदर्य प्रसाधनों का कारोबार जिस तेजी से बढ़ रहा है और अब तो पुरूषों ने भी इस क्षेत्र में महिलाओं को टक्कर देना शुरू कर दिया है। ऐसे में कोई आश्चर्य नहीं अगर यह कंपनी आने वाले दशकों में भी बिक्री में वृद्धि के नये रिकार्ड कायम करे और फ्रांस्वा की कमाई इसी तरह बढ़ती रहे।

पुणे, कोलकाता व पटना के लिए सीधी फ्लाइट के प्रयास तेज

भोपाल :  भोपाल से वर्तमान में आठ शहरों के लिए सीधी हवाई यात्रा की जा सकती है। पुणे, कोलकाता, पटना और लखनऊ के लिए सीधी फ्लाइट शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए एयरलाइंस कंपनियों से चर्चा चल रही है। भोपाल से दुबई के लिए इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू करने की मांग भी यात्री कर रहे हैं।इस दिशा में जल्द ही अच्छे परिणाम सामने होंगे। यह जानकारी गुरुवार को राजाभोज एयरपोर्ट के डायरेक्टर अनिल विक्रम ने संभागायुक्त दफ्तर में एयर कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए आयोजित बैठक में दी। इस दौरान टैक्स का मुद्दा भी उठा। अधिकारियों ने बताया कि संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव काे बताया कि एयर टर्बाइन फ्यूल पर लगने वाला वैट 24 प्रतिशत है। वैट कम किया जाता है तो एयरलाइंस कंपनियां तेजी से फ्लाइट मूवमेंट बढ़ा सकती हैं। इसमें एअर इंडिया, इंडिगो, जेट एयरवेज के अफसर मौजूद थे।

116 साल की जापानी महिला को सबसे बुजुर्ग व्यक्ति का खिताब

तोक्यो : ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने 116 साल की जापानी महिला को शनिवार को विश्व के सबसे बुजुर्ग जीवित व्यक्ति के खिताब से नवाजा है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने शनिवार को एक समारोह में काने तनाका के नाम इस रिकॉर्ड को आधिकारिक रूप से मान्यता दी। समारोह का आयोजन दक्षिण पश्चिम जापान के फुकुओका में एक नर्सिंग होम में किया गया।
जश्न मनाने के लिए उनके परिवार के सदस्य एवं मेयर भी मौजूद थे। तनाका का जन्म दो जनवरी, 1903 में हुआ था। वह आठ भाई-बहनों में सातवें नंबर पर हैं। उन्होंने 1922 में हिदेओ तनाका से शादी की थी और उनके चार बच्चे हैं। उन्होंने एक बच्चे को गोद भी लिया था।
इससे पहले सबसे बुजुर्ग जीवित व्यक्ति का खिताब जापान की ही एक अन्य महिला चियो मियाको के नाम था जिनका 117 की उम्र में पिछले साल जुलाई में निधन हो गया था।जापान के लोगों की उम्र अमूमन लंबी होती है और सबसे बुजुर्ग व्यक्तियों की सूची में उनका वर्चस्व रहता है।
भले ही खान-पान में बदलाव या मोटापा बढ़ रहा है लेकिन यहां यह अब भी दुर्लभ है। जापानियों की पाक परंपरा में मछलियों, चावल, सब्जियों एवं कम वसा वाले खाने को ज्यादा तरजीह दी गई है। तनाका को अब तक का सबसे बुजुर्ग व्यक्ति बनने के लिए अभी कई और बरस गुजारने होंगे। गिनीज विश्व रिकॉर्ड के मुताबिक यह रिकॉर्ड फ्रांस की महिला जियाने लुई कालमें के नाम है जो 122 साल की थी।

गूगल ने बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी सिखाने के लिये पेश किया ‘बोलो’ एप

नयी दिल्ली : सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल ने बुधवार को एक नये एप ‘बोलो’ की पेशकश की। यह एप प्राथमिक कक्षा के बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी सीखने में मदद करेगा। कम्पनी ने कहा कि यह एप उसकी आवाज पहचानने की तकनीक तथा टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक पर आधारित है। इसे सबसे पहले भारत में पेश किया गया है।
कम्पनी ने बताया कि इसमें एक एनिमेटेड पात्र दीया है जो बच्चों को कहानियां पढ़ने के लिये प्रोत्साहित करती है और किसी शब्द का उच्चारण करने में दिक्कत आने पर बच्चों की मदद करती है। यह कहानी पूरा करने पर बच्चों का मनोबल भी बढ़ाती है। गूगल इंडिया के उत्पाद प्रबंधक नितिन कश्यप ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘हमने इस एप को इस तरह डिजायन किया है कि यह ऑफलाइन भी काम कर सके। इसके लिये बस 50 एमबी के इस एप को इंस्टॉल करना होगा। इसमें हिंदी और अंग्रेजी की करीब 100 कहानियां हैं।’’ उन्होंने कहा कि एप गूगल प्ले स्टोर पर नि:शुल्क उपलब्ध है। यह एंड्रायड 4.4 (किटकैट) तथा इसके बाद के संस्करण वाले सारे डिवाइस पर चल सकता है। कश्यप ने कहा कि गूगल ने इस एप का उत्तर प्रदेश के करीब 200 गांवों में परीक्षण किया है। उन्होंने कहा कि परिणाम उत्साहजनक रहने के बाद इसे पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि एप में बंगाली जैसी अन्य भारतीय भाषाओं को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

इसरो के युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम के लिए देशभर से होगा चयन

भोपाल : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुख्य रूप से स्टूडेंट्स को अंतरिक्ष की गतिविधियों से परिचित कराना है। इसके तहत कक्षा 8वीं पास विद्यार्थी (जो कक्षा 9वीं में पढ़ रहे हैं) वे इस कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रीष्मावकाश शुरू होगा। यह प्रोग्राम दो सप्ताह चलेगा। इस दौरान चयनित विद्यार्थियों इसरो के सेंटर में ही रहना होगा। इसरो ने नोटिफिकेशन में कहा है कि हर वर्ष राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से 3 स्टूडेंट्स का चयन इस प्रोग्राम के लिए किया जाएगा। स्टूडेंट्स का चयन एकेडमिक परफॉर्मेंस और करिकुलम एक्टिविटी के आधार पर किया जाएगा। इसरो ने मार्च-2019 के अंत तक राज्यों से चयनित स्टूडेंट्स की सूची मांगी है। इनमें एमपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड के छात्र-छात्राएं शामिल हो सकते हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्टूडेंट्स के अंदर साइंस के प्रति रुचि बढ़ाना है।

सात चरण में 11 अप्रैल से 19 मई तक होंगे लोकसभा चुनाव

नयी दिल्ली : चुनाव आयोग ने 17वीं लोकसभा का चुनाव सात चरण में, 11 अप्रैल से 19 मई के बीच कराने का फैसला किया है। सातों चरण के मतदान के बाद 23 मई को मतगणना होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने रविवार को चुनाव कार्यक्रम घोषित करते हुये बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिये 11 अप्रैल को होने वाले मतदान की अधिसूचना 18 मार्च को जारी की जायेगी। उल्लेखनीय है कि 2014 में 16वीं लोकसभा का चुनाव नौ चरण में कराया गया था।
अरोड़ा ने बताया कि आम चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही देश में चुनाव आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गयी है। अरोड़ा ने चुनाव आयुक्तों अशोक लवासा और सुशील चंद्रा के साथ संवाददाता सम्मेलन में बताया कि दूसरे चरण का मतदान 18 अप्रैल, तीसरे चरण का मतदान 23 अप्रैल, चौथे चरण का मतदान 29 अप्रैल, पांचवें चरण का मतदान छह मई, छठवें चरण का मतदान 12 मई और सातवें चरण का मतदान 19 मई को होगा। अरोड़ा ने बताया कि 23 मई को मतगणना के आधार पर चुनाव परिणाम घोषित होगा। समूची चुनाव प्रक्रिया 27 मई को सम्पन्न करने का लक्ष्य तय किया गया है।

मुम्बई दुनिया का 16वां सबसे महंगा रिहायशी शहर

मुम्बई : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई दुनिया के सबसे महंगे प्रमुख आवासीय शहरों में 16वें पर है। नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। ‘द वेल्थ रिपोर्ट 2019’ में दुनिया के 20 सबसे महंगे प्रमुख आवासीय शहरों में मुंबई एकमात्र भारतीय शहर है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में 10 लाख डॉलर (7 करोड़ रुपए) में लगभग 100 वर्गमीटर जमीन खरीद सकते हैं। यहां जमीन की कीमत 930 डॉलर प्रति वर्गफुट है।
मुम्बई के मुकाबले दिल्ली में आधी कीमत
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 10 लाख डॉलर में 201 वर्गमीटर जमीन खरीदी जा सकती है। वहीं, बेंगलुरु में इतनी रकम में 334 वर्गमीटर जमीन ले सकते हैं।
आवासीय संपत्ति की कीमतें बढ़ने में मुम्बई का 67वां नंबर
2018 में वैश्विक रूप से आवासीय संपत्ति की कीमतों में बढ़ोतरी के मामले में मुंबई 0.3% इजाफे के साथ 67वें नंबर पर रहा। कीमतें बढ़ने के मामले में 1.4% इजाफे के साथ दिल्ली 55वें और 1.1% बढ़ोतरी के साथ बेंगलुरु 56वें नंबर पर रहा।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट में  खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं  सिर्फ 9% महिलाएं

मुम्बई : देश में 9% महिलाएं और 11% पुरूष ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट में खुद को सुरक्षित मानते हैं। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े एक सर्वे में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 3% महिलाएं और पुरुष पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहद असुरक्षित मानते हैं। महिलाओं की यह राय, यात्रा के दौरान उनके साथ होने वाले उत्पीड़न, छेड़खानी, गाली गलौज, छीटाकशी के चलते बनी है।
दरअसल, विश्व महिला दिवस के मौके पर ओला ने कैब एग्रीगेटर की एक रिपोर्ट जारी की। इसे 11 शहरों की 9935 महिलाओं से बात कर के तैयार किया गया है और उनकी राय जानी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 35% लोग मानते हैं कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट रात के बजाय दिन में ज्यादा सुरक्षित है। 96% महिलाएं सुरक्षा, आराम, कम किराए समेत कई प्राथमिकताओं को देखते हुए पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करने के लिए तैयार हैं। इस सर्वे में अहमदाबाद, बेगलुरू, भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, जम्मु-कश्मीर, कोच्ची, मुंबई, मैसूर और नई दिल्ली को शामिल किया गया है। मजबूरी में करना पड़ता है पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल
रिपोर्ट की मानें तो 40% लोगों ने बताया कि वे सस्ता होने के चलते पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, 15% ने माना कि उनके पास पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। इसी के चलते मजबूरी में इसका इस्तेमाल करना पड़ता है।
40-45% महिलाएं ऑटो का करती हैं इस्तेमाल
सर्वे के मुताबिक, 40% महिलाएं बस का इस्तेमाल करती हैं। 35% महिलाएं मेट्रो या ट्रेन का इस्तेमाल करती हैं और 40-45% महिलाएं ऑटो या फिर टैक्सी का इस्तेमाल करती हैं या फिर कोई अन्य विकल्प देखती हैं। 89% महिलाएं यह महसूस करती हैं कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और बेहतर किया जा सकता है।