हनुमान जयंती यानी हनुमान प्रकट उत्सव हिंन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि को मनायी जाती है। हनुमान जी को भगवान शिव का ही अवतार माना जाता है। वाल्मीकि रामायण में बताई गई जगहों और प्रसंगों को जोड़कर मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी के जन्म का स्थान झारखंड के आंजन गांव में स्थिति एक गुफा में माना जाता है। इसके अलावा उनके जन्म से जुड़ी एक अन्य कथा भी है। देवी अंजनी के नाम पर पड़ा इस जगह का नाम
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, हनुमानजी का जन्म गुमला जिले के आंजनधाम स्थित एक पहाड़ी की गुफा में हुआ था। जिस गुफा में भगवान हनुमान का जन्म हुआ था, उसका दरवाजा कलयुग में अपने आप बंद हो गया। गुफा के दरवाजे को भगवान हनुमान की माता अंजनी ने स्वयं बंद कर लिया, क्योंकि स्थानीय लोगों द्वारा वहां दी गई बलि से वे नाराज थीं। यह गुफा आज भी मौजूद है।
जिस गांव में ये गुफा है उसका नाम आंजन है, जो कि हनुमानजी की माता अंजनी के नाम पर ही पड़ा। यह गांव गुमला जिले से लगभग 22 किमी की दूरी पर है। यहां पर एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान हनुमान अपनी माता की गोद में बैठे दिखाई देते हैं।
यहां एक छोटा सा मंदिर है, जिसकी स्थापना भगवान हनुमान के भक्तों ने 1953 में की थी। इस मंदिर में भगवान हनुमान और माता अंजना की सुंदर मूर्ति है। यहां भगवान हनुमान अपनी माता की गोद में बैठे दिखाई देते हैं।
वसुंधरा मिश्र की कहानियों का प्रथम संग्रह ‘टहनी पर चिड़िया’ स्त्री संवेदना की यथार्थ अनुभूतियों के शब्द चित्र हैं । इन कहानियों में स्त्री अपनी आजादी के लिए व्याकुल है।स्त्री पुरुष के संबंधों के लिए आवश्यक है उनका मानसिक तालमेल- स्त्री अपना मार्ग तलाश रही है। कथा की स्त्री पात्राएं अपनी मर्यादा का पूरा ध्यान रखती हैं। इन कहानियों को पढ़कर मुझे 70-75 वर्ष पूर्व प्रकाशित सुमित्रा कुमारी सिन्हा की कहानी ‘व्यक्तित्व की भूख’ का स्मरण हो आया जिसकी नायिका इला कहती है ‘प्रेम ही तो जीवन है, इसकी अवहेलना क्यों? इसके बिना जीवन निस्पंद, निर्जीव, निरानंद हो जाता है। मन में प्रश्नों के समूह उठते क्यों? एक ही रास्ते पर चलने को नारी प्रेरित क्यों? क्या एक ही चीज देखते-देखते मनुष्य का थका मन अटक जाना नहीं चाहता? तो इस मानव सुलभ स्वभाव की हत्या क्यों?’ वस्तुतः यह कहने का साहस आज भी भारतीय समाज की स्त्रियों को नहीं है जबकि स्त्री – विमर्श आज अपने कई चरण पूरे कर चुका है – 50-55 वर्ष की अवधि में समाज की कई वर्जनाएं टूटी भी हैं और सयास तोड़ी भी गई हैं। व्यक्तित्व की भूख व्यक्तित्व की तलाश है। वसुंधरा की नारी पात्राएं अपने व्यक्तित्व की तलाश करती हैं। कुछ लक्ष्य तक पहुंचती हैं, कुछ नहीं कथाएं यथार्थ का स्पर्श करते हुए कल्पना के आदर्श जगत में दीखती है।
‘टहनी पर चिड़िया’ कहानी जैसा कि शीर्षक से स्पष्ट है कथा चिड़िया और चिड़ा के स्वच्छंद, स्वार्थ रहित जीवन को प्रतिबिंबित करते हुए शेष और श्रुति के समाज समर्पित जीवन को दर्शाती है। नायक शेष के हर दिन की शुरुआत चिड़ियों की चहचहाहट और उषा की लालिमा से होती है। चिड़ा और चिड़िया शेष और श्रुति के गहरे मानवीय संबंधों के प्रतीक बन कर आएं हैं। कहानी में समाज के संकीर्ण विचारों के कक्ष में एक खिड़की अवश्य खुलती है जब वे कहती है, ‘उनकी दुनिया पिंजरे में बंद चिड़ियों की तरह न थी, उन चिड़ियों की तरह थी जिनका आकाश से भी परे ब्रह्मांड के रहस्यों से ताल्लुक था।’ शेष और श्रुति ने रेत पर पैरों के निशान बनाने की ठान ली है और प्रगति की दिशा में ये कदम बढ़ते जाते हैं। यहां स्त्री की आजादी तो दिखाई पड़ती है पर एक प्रकार की छटपटाहट भी है जिसका विस्तार दूसरी कहानियों में हुआ है।
अट्ठारह कहानियों के इस संग्रह की अधिकतर कहानियों में स्त्री के भीतर उठने वाली विभिन्न संवेदना विभिन्न पक्षों के संदर्भ में उभर कर आती हैं। ‘आंखों के पीछे’ की नायिका मधु नायक समर से दैहिक प्रेम नहीं मन से जुड़ी है । ये पंक्ति, ‘प्रेम प्यास है और यहीं से जीवन दृष्टि की नई सोच पैदा होती है।’ दार्शनिक विचार, आध्यात्मिक प्रेम की चर्चा है पर निश्चित रूप से प्रेम आकर्षण की ही उपज है। इस प्रकार के संबंधों की स्वीकृति के लिए जद्दोजहद तो हो रही है लेकिन अभी भी समाज स्वीकृति पूरी तरह नहीं मिल पाई है। इसी लिए मधु और समर पलकें बंद कर कल्पना लोक में खो जाते हैं।
‘परछाई’ में तीन पात्रों द्वारा प्रेम का त्रिकोण, जैनेंद्र की कथा जाह्नवी की याद दिलाता है कथा स्त्री की प्रेमाभिव्यक्ति और साथी के चयन की स्वतंत्रता पर प्रकाश डालती है। ‘स्पंदन’ में पुरुष पात्र स्त्री संवेदनाओं को झंकृत कर दिशा भी देते हैं। लेखिका लिखती है,’ बेटी होने की हीनता और चुनौतियों से निकल कर आज रोहित के साथ खुली हवा में सांस ली थी।’ रोहित का भी कहना है कि,’ जहां बेटी का सम्मान न हो वहां प्रगति नहीं हो सकती। स्त्री को अंधे कुएं से निकालना होगा सिर्फ अपने लिए ही नहीं, समाज के उत्थान के लिए भी। जब रोहित की धड़कने बंद हो जाती हैं, वह संसार से विदा ले लेता है तब भी लेखिका की धड़कने उसके ही भावों से धड़कती है।’ यानी अज्ञान के अंधकार से और पराधीनता की बेड़ियों से स्त्री को मुक्त कराने का निरंतर प्रयास उसके जीवन का लक्ष्य बन जाता है।’ प्रेत ‘कहानी में स्त्री जीवन की पीड़ाओं की अभिव्यक्ति बहुत ही सशक्त ढंग से हुई है। पुरुष जब स्त्री की शारीरिक और मानसिक दोंनो क्षुधाओं को पूरा करने में असमर्थ होता है और स्त्री घर, समाज व आर्थिक असुरक्षा के कारण स्वयं को लाचार और घुटन की स्थिति में पाती है, तब वह लाचारी और घुटन की स्थिति किस रूप में अभिव्यक्ति पाती है इसे लेखिका ने मर्यादित रूप में व्यक्त किया है। स्त्री आज भी चुप रहने वाली है यह उसके स्वभाव का हिस्सा बन चुका है–‘दुख सहकर भी मुस्काना’। ‘मां के शायद प्रेत आत्माएं दीखती हैं’ जैसी पंक्तियां स्पष्ट करती हैं कि वस्तुतः आज भी स्त्री के फ्रस्ट्रेशन को भूत – प्रेत का नाम दे कर किनारे कर दिया जाता है।’ संयुक्त परिवार की बहुत सी अनकही समस्याएं यूं ही बंद दरवाजों में छिद्र ढूंढ लिया करती हैं ‘कहानी की सशक्त पंक्ति है।
कहानी रफ्तार, विधि की विडंबना, तू क्यों रूंधे मोहे आदि कहानियों में स्त्री से संबंधित कई संवेदनात्मक विषयों को उठाया गया है। कहानी स्त्री पुरुष में संवाद शैली में भ्रूण हत्या की समस्या को उठाया गया है जिसमें पढ़े लिखे लोग भ्रूण हत्या में अधिक लिप्त हैं।टहनी पर चिड़िया कहानी संग्रह में स्त्री पुरुष की अनुभूतियों और अहसास की कहानियां है।
यज्ञ, स्मृति वन, वह शाम, गवाक्ष, कहाँ है दर्द, कौन सा समय?, पतझड़ आदि कहानियों में लेखिका ने मन के ऊहापोह और जटिल अनुभूतियों को सुंदर बिंबो द्वारा साकार किया है जैसे गवाक्ष कहानी की ये पंक्तियाँ, ‘वहां कोई स्त्री नहीं थी, पुरूष भी नहीं था, बच्चों की किलकारियाँ नहीं थीं, थीं तो एक मकान की दो आंखें जो बाहर से चमचमा रही थीं और अंदर से आंसुओं में डूबी थीं।’ प्रौढ़ और सूक्ष्म वर्णन कहानियों के मर्म को छू लेते हैं।
पति – पत्नी- बच्चे, आजीविका, कैरियर, परिवार, रिश्तों के बीच संतुलन कैसे बनाएं यह आज की सोच है। कहानी कौन सा समय बहुत सुंदर बन पड़ी है।पतझड़ कहानी में लेक्चरर अमर और छात्रा कावेरी की मित्रता का वर्णन है।
जहां ‘अनजाने सावन की तलाश में वह अपने पतझड़ के सूखे पत्तों से भरे सूने आंगन को बुहारना ही भूल गया, जहां उसने जीवन को खिलते देखा था।’ जैसी पंक्तियां परिवार, सामाजिक मान मर्यादा को महत्व दिया गया है।
संग्रह की अंतिम कहानी एक नया कदम में समाज में प्रचलित स्त्री – पुरुष के संबंधों को दैहिक काम वासना से ऊपर मानते हुए हृदय की संवेदना को विशेष महत्व दिया है।
पाठक के लिए कहानी संग्रह का नाम’ टहनी पर चिड़िया’ विशेष रूप से आकर्षित करता है। मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को संग्रह की अट्ठारह कहानियों में विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रमुखता दी गई है। कहानियां पठनीय हैं, हृदय को छूती हैं यही कारण है कि टहनी पर चिड़िया ऊर्जा से भरपूर है।
टहनी पर चिड़िया (कहानी संग्रह) –
डॉ वसुंधरा मिश्र
महाबोधि बुक एजेन्सी
समीक्षक – – – डॉ. मंजू रानी गुप्ता एवं डॉ. सुषमा हंस
नयी दिल्ली : आईसीसी विश्व कप 2019 इंग्लैंड में 30 मई से शुरू होने वाले वनडे विश्व कप के लिए विराट कोहली (Virat Kohli) की अगुआई वाली 15 सदस्यीय भारतीय टीम का एलान कर दिया गया। एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी ने इस टीम का चयन किया। इस कमेटी में एसएसके प्रसाद, देवांग गांधी, शरणदीप सिंह, जतिन परांजपे व गगन खोड़ा शामिल हैं। टीम के चयन के वक्त कप्तान विराट कोहली व कोच रवि शास्त्री भी बैठक में शामिल थे। विराट कोहली का कप्तान के तौर पर ये पहला विश्व कप होगा जबकि खिलाड़ी के तौर पर वो अपनी तीसरा विश्व कप खेलेंगे। इस विश्व कप में टीम इंडिया अपने अभियान का आगाज 5 जून को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ करेगी।
वर्ष 1983 में कपिल की कप्तानी में पहला और फिर वर्ष 2011 में महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में दूसरा वनडे विश्व कप जीतने वाली टीम इंडिया की नजर इस बार विराट कोहली की अगुआई में तीसरी बार खिताब जीतने पर लगी होगी। इस बार ये अंदाजा लगाया जा रहा था कि धौनी के बैकअप के तौर पर दिनेश कार्तिक को शामिल किया गया है। रिषभ पंत को इस टीम में मौका नहीं मिला।
ऑलराउंडर के तौर पर विजय शंकर ने पिछले दिनों काफी प्रभावित किया था और उन्हें विश्व कप टीम में जगह मिल गई है। टीम में अन्य ऑलराउंडर के तौर पर हार्दिक पांड्या और रवींद्र जडेजा को शामिल किया गया है। चौथे नंबर के लिए सबसे ज्यादा बहस चल रही थी और यहां पर बाजी मारी लोकेश राहुल ने। अंबाती रायुडू को चौथे नंबर का दावेदार माना जा रहा था लेकिन वो विश्व कप टीम में जगह बनाने में कामयाब नहीं हो पाए।
टीम में स्पिनर की मुख्य भूमिका कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल निभाएंगे वहीं रवींद्र जडेजा स्पिनर की भूमिका भी निभा सकते हैं और वो बल्लेबाजी और फील्डिंग में भी टीम के लिए फायदेमंद हैं। तेज गेंदबाज के तौर पर टीम में तीन खिलाड़ी जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार और मो. शमी शामिल किए गए हैं। वहीं हार्दिक व विजय भी बल्लेबाजी के साथ-साथ तेज गेंदबाज की भूमिका निभाएंगे।
विश्व कप के लिए टीम इंडिया-
रोहित शर्मा (उप-कप्तान), शिखर धवन, विराट कोहली (कप्तान), लोकेश राहुल, महेंद्र सिंह धौनी (विकेटकीपर), केदार जाधव, दिनेश कार्तिक, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, भुवनेश्वर कुमार, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, रवीेंद्र जडेजा, मो. शमी, विजय शंकर।
एर्नाकुलम : केरल के एर्नाकुलम जिले के मुप्पाथडम नामक गाँव के निवासी, 70 वर्षीय लेखक, श्रीमन नारायण, चाहे तो आराम से घर में बैठकर अपनी बाकी की ज़िन्दगी काट सकते हैं। पर अपने आस-पास के हालात देखकर उन्होंने एक ऐसी राह चुनी, जो सभी के लिए एक मिसाल बन गयी। साथ ही अब उनके गाँव की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
गर्मी से पशु-पक्षियों को बचाने के लिए उन्होंने इस साल करीब 6 लाख रूपये खर्च कर, 10,000 मिट्टी के गमले बांटने का प्राण लिया है और अब तक 9,000 गमले बाँट भी चुके हैं। उनका मानना है कि अगर हर-एक व्यक्ति इन गमलों में रोज़ पानी भरकर रखेगा, तो इन गर्मियों में किसी भी पशु-पक्षी को प्यासा नहीं रहना पड़ेगा।
“गर्मी के बढ़ने के साथ-साथ अधिकांश जल स्रोत सूखने लगते हैं और पशु-पक्षियों के लिए अपनी प्यास बुझाना मुश्किल हो जाता है। गर्मी बढ़ने से सिर्फ हमें ही नहीं बल्कि जानवरों और चिड़ियों को भी डिहाइड्रेशन हो जाता है। इस छोटे से मिट्टी के कटोरे से कम से कम 100 पंछीयों की प्यास बुझ सकती है,” श्रीमन नारायण कहते हैं।
साल 2018 से शुरू हुए इस अभियान को उन्होंने ‘जीव जलथिनु ओरु मनु पथराम’ का नाम दिया है, जिसका अर्थ है ‘जीवन-दायी पानी के लिए एक मिट्टी का गमला’। उनका यह अभियान पिछले साल बहुत सफ़ल रहा और इस साल भी उन्होंने इसे सफ़ल बनाने का बीड़ा उठा लिया है।
मलयालम और अर्थशास्त्र में डबल एमए कर चुके नारायण ने कई किताबें लिखी हैं और वे हमेशा से गाँधी जी के विचारों से प्रभावित रहे। 6 साल पहले उन्होंने अपने समाज सेवा की शुरुआत ‘एंटे ग्रामम् गाँधीजिलुदे’ ( गाँधी जी के रास्ते पे चलता मेरा गाँव) नामक अभियान से की, जिसके तहत उन्होंने अब तक गाँधी जी की आत्मकथा की 5000 प्रतियां बांटी हैं। पिछले साल नारायण ने पर्यावरण के संरक्षण के लिए 15 लाख रूपये खर्च कर, 50,000 पौधे बांटे थे। इसके अलावा नारायण अपने गाँव के हर घर के आस-पास पौधे लगाते रहते हैं और अब तक इस तरह उन्होंने अपने गाँव में 10,000 पेड़ लगाए हैं। अपने गाँव में एक छोटा सा होटल चलाने वाले नारायण की तीन बेटियां हैं। 30 साल पहले ही उनकी पत्नी का देहांत हो चुका था और तब से अपनी बेटियों को उन्होंने अकेले ही पाला है। वे कहते हैं, “मैं अपने तीनों बच्चों की सारी जिम्मेदारियां निभा चुका हूँ। अब वे सब सेटल हो चुके हैं। अब मैं अपनी संपत्ति को भविष्य के लिए संभाले रखने की बजाय अपने धरती की आज की स्थिति सुधारने के लिए खर्च करना चाहता हूँ। इसलिए मैं अपने व्यवसाय और अपने छोटे से होटल से कमाये पैसों को अपने गाँव की भलाई के लिए इस्तेमाल करता हूँ।”
नई दिल्ली पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जवाहरलाल नेहरू रोड पर देश की सबसे ऊंची इमारत ‘द 42’ चौरंगी बनकर तैयार हो गई है। 65 मंजिली इमारत ‘द 42’ की लंबाई 268 मीटर है। इसने देश की सबसे ऊंची गगनचुंबी इमारत का खिताब मुंबई की इम्पीरियल बिल्डिंग से छीन लिया है। इमारत के सामने बड़ा मैदान है और उससे आगे हुगली नदी बहती हुई दिखती है। कोलकाता की दूसरी सबसे ऊंची इमारत अरबाना है। यह 167.6 मीटर ऊंची इमारत है। फोरम एमॉटस्फीयर और वेस्टिन क्रमश: 152 मीटर और 150 मीटर ऊंची इमारतें हैं।
इसके बाद 100 मीटर से अधिक ऊंची 13 इमारतों भी इस शहर हैं, जिनमें साउथ सिटी, आइटीसी रॉयल बंगाल और एक्रोपोलिस शामिल हैं। आपको यहां पर ये भी बता दें कि भारत में सबसे ज्यादा हाई-राइज बिल्डिंग्स मुंबई में हैं, जहा इनकी संख्या 3000 से ज्यादा है। इसमें रिहायशी, कमर्शियल और रिटेल कॉम्पलेक्स शामिल हैं।
इतना ही नहीं देश की सबसे ऊंची दस इमारतों में से नौ केवल मुंबई में ही हैं। आपको बता दें कि साल 2017 में दुनिया में 200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली 144 इमारतें बनी थीं, जिसमें से भारत में इतनी ऊंचाई की महज तीन इमारतें ही थीं। देश में 2010 में पहली बार 200 मीटर ऊंचाई की दो इमारतें बन कर तैयार हुई थीं। चीन पिछले दस वर्ष से लगातार गगनचुंबी इमारतें बनाने के मामले में विश्व का नंबर एक देश बना हुआ है।
देश की दूसरी बड़ी इमारतें
मुंबई की इंपीरियल बिल्डिंग कभी भारत की सबसे ऊंची इमारत हुआ करती थी, लेकिन अब यह दूसरे नंबर पर आ गई है। इसका डिजाइन मशहूर आर्किटेक्ट हाफिज कांट्रेक्टर ने तैयार किया था। साउथ मुंबई की यह इमारत से भले ही आज भारत की सबसे ऊंची इमारत होने का तमगा छिन गया हो लेकिन आज भी यह मुंबई की पहचान है। इस इमारत की जगह कभी स्लम हुआ करता था, लेकिन बाद में यहां पर रहने वालों को नई जगह पर बसाया है। यह इमारत करीब 256 मीटर (840 फीट) ऊंची है। इसके दो अलग-अलग टावर हैं जिनमें 60 फ्लोर हैं। यह शपूरजी पालोनजी और दिलीप ठाकर का ज्वाइंट वेंचर प्रोजेक्ट है, जो 2010 में बनकर तैयार हुआ था।
आहुजा टावर वर्तमान में भारत की तीसरी और मुंबई की दूसरी सबसे ऊंची इमारत है। यह करीब 248.5 मीटर ऊंची (815 फीट) ऊंची है। इसमें फ्लोर की संख्या 54 है और यह पूरी तरह से रेजिडेंशियल है। यह 2014 2010 में बनकर तैयार हुआ था।
वन अविघना पार्क वर्तमान में देश में चौथी सबसे ऊंची इमारतों में शामिल है। इसकी ऊंचाई 247 मीटर (810 फीट) है। पूरी तरह से रेजिडेंशियल इस बिल्डि़ग में 61 फ्लोर हैं। यह मुंबई के लॉवर परेल में स्थित है। इस लग्जरी रेजिडेंशियल टावर को कई अवार्ड मिल चुके हैं। यह इमारत 2017 में बनकर तैयार हुई थी।
लोधा अल्टामाउंट देश की पांचवीं सबसे ऊंची इमारतों में शामिल है। यह भी मुंबई में स्थित है। इसकी ऊंचाई करीब 240 मीटर (787 फीट) है। आपको बता दें कि अल्टामाउंट रोड की गिनती दुनिया की दसवीं सबसे महंगी सड़कों में की जाती है। 40 मंजिला इस इमारत के पास ही मुकेश अंबानी और कुमारमंगलम बिड़ला का भी घर है। यह इमारत 2018 में बनकर तैयार हुई थी।
ऑरिस सेरेनिटी टावर भी मुंबई में ही है और देश की छठी सबसे ऊंची इमारत है। यह 235 मीटर (771 फीट) ऊंची है। पूरी तरह से रेजिडेंशियल यह इमारत 69 मंजिला है। यह इमारत 2018 में बनकर तैयार हुई थी। यह इमारत 2018 में बनकर तैयार हुई थी।
टू आईसीसी भी मुंबई में ही है, जो 223.2 मीटर (732 फीट) ऊंची है। यह इमारत 69 मंजिला है और 2018 में बनकर तैयार हुई थी।
वर्ल्ड क्रेस्ट भी मुंबई में ही है, जो 222.5 मीटर (730 फीट) ऊंची है और देश की आठवीं सबसे ऊंची इमारत है। यह इमारत 57 मंजिला है और 2014 में बनकर तैयार हुई थी। इसका काम 2011 में शुरू हुआ था इस पर 321 मिलियन यूएस डॉलर की लागत आई थी। लॉवर परेल में स्थित यह इमारत करीब सात हैक्टेयर इलाके में बनी है।
लोधा वेनेजिया देश की नौवीं सबसे ऊंची इमारत है जो 213 मीटर (700 फीट) से अधिक ऊंची है। यह इमारत 68 मंजिला है और 2017 में बनकर तैयार हुई थी।
लोधा बेलिसिमो टावर भी मुंबई में ही है और देश की दसवीं सबसे ऊंची इमारत का तमगा इसके ही पास है। यह करीब 197.5 मीटर (648 फीट) ऊंची है। 53 मंजिला यह इमारत 2012 में बनकर तैयार हुई थी।
नयी दिल्ली : धन के संकट से जूझ रही निजी क्षेत्र की एयरलाइन जेट एयरवेज ने अंतत: बुधवार को परिचालन अस्थायी तौर पर स्थगित करने की घोषणा की। पिछले ढाई दशक से भी अधिक समय से सेवाएं दे रही इस एयरलाइन ने कहा है कि आज ही मध्यरात्रि को अमृतसर से नयी दिल्ली की उसकी उड़ान के बाद उसका परिचालन फिलहाल बंद किया गया।
इस एयरलाइन के बैंकों के समूह ने उसे 400 करोड़ रुपये का आपतकालीन कर्ज देने से इनकार कर दिया। वित्तीय सहारे के अभाव में उसके प्रबंधकों को बची खुची सभी उड़ाने बंद करने का यह निर्णय लेना पड़ा। पट्टे के विमानों का किराया न चुका पाने के कारण उसकी उड़ानों की संख्या पहले ही बहुत सीमित रह गयी थी। जेट एयरवेज ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा है, ‘‘हम अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को तुरंत प्रभाव से निरस्त करने के लिये मजबूर हैं। बुधवार की रात को इस विमानन कम्पनी ने अस्थायी तौर पर अंतिम उड़ान भरी।
एयरलाइन ने कहा कि रिणदाता बैंक की ओर से उसे परिचालन में बनाये रखने के लिये जरूरी कर्ज देने से इनकार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है।
जेट एयरवेज ने कहा, ‘‘कर्जदाताओं और अन्य किसी भी स्रोत से आपातकालीन कोष उपलब्ध नहीं होने से ईंधन और दूसरी अहम सेवाओं का भुगतान नहीं कर पाने की वजह से एयरलाइन अपने परिचालन को जारी रखने में सक्षम नहीं हो पायेगी।’’ इस स्थिति को देखते हुये जेट एयरवेज की आखिरी उड़ान उड़ान समय सारिणी के मुताबिक 2230 बजे अमृतसर हवाईअड्डे से नयी दिल्ली के लिये उड़ान भरेगी।
जेट एयरेवज की मंगलवार को हुई निदेशक मंडल की बैठक में प्रबंधन ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय दुबे को रिणदाता बैंकों से 400 करोड़ रुपये का आपात कोष उपलब्ध कराने की आखिरी बार अपील करने के लिये प्राधिकृत कर दिया। निदेशक मंडल ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांग स्वीकार नहीं की जाती है तो वह बुधवार को एयरलाइन के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला ले सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक ने बैंकों के ऋणदाता समूह की ओर से कल देर रात जेट एयरवेज को सूचित कर दिया था कि वह एयरलाइन की अंतरिम कोष उपलब्ध कराने के आग्रह पर विचार करने में असमर्थ हैं। एयरलाइन ने अपने वक्तव्य में यह जानकारी दी है।
नयी दिल्ली : ज्यादा आमदनी पर भी आयकर नहीं देने वाले या नाम मात्र का टैक्स चुकाने वालों पर विभाग का पहरा और सख्त होता जा रहा है। इसके लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने नियोक्ताओं से ज्यादा जानकारी मांगी है और नियोक्ता द्वारा दिये जाने वाले फॉर्म-16 का आकार भी बढ़ा दिया है। नए फॉर्म में पार्ट बी (एनेक्सर) का हिस्सा अब दो पन्ने के बजाय पांच पन्नों का होगा।
वित्त मंत्रालय की तरफ से फॉर्म-16 में बदलाव की अधिसूचना 12 मई 2019 से लागू हो होगी। ऐसे में वर्ष 2018-19 के लिए किसी कर्मचारी को नियोक्ता की तरफ से दिया जाने वाला फॉर्म-16 नए प्रोफार्मा पर होगा। इसमें वित्त वर्ष के दौरान किसी संस्थान से दूसरे संस्थान में आने वाले कर्मचारियों का पूर्व संस्थान से प्राप्त कुल वेतन का भी कॉलम जोड़ा गया है। इसे कुल वेतन वाले पहले कॉलम के विस्तार (ई) में स्थान दिया गया है। पुराने फॉर्म-16 में इसका उल्लेख नहीं था। साथ ही इसमें डिडक्शन को विशेष स्थान दिया गया है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि वेतनभोगी करदाताओं के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन का प्रावधान पिछले वर्ष ही फिर से किया गया है, इसलिए इस बार इसे फॉर्म-16 में भी जोड़ा है। अब सभी डिडक्शन की विस्तार से जानकारी देनी होगी।
नहीं कर सकेंगे फर्जीवाड़ा
आयकर विशेषज्ञ चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रवीण कुमार भारती का कहना है कि जब नियोक्ता से फॉर्म-16 में ज्यादा जानकारी मांगी जाएगी तो नियोक्ता भी कर्मचारियों से ज्यादा जानकारी मांगेंगे। ऐसे में कर्मचारियों को एक-एक डिडक्शन की सही जानकारी देनी होगी और यदि वे फर्जीवाड़ा करेंगे तो बच नहीं पाएंगे।
आईटीआर फॉर्म भी किया था बदलाव
इससे पहले आयकर विभाग ने आईटीआर फॉर्म में भी बड़ा बदलाव करते हुए इसे काफी जटिल बना दिया था। सबसे बड़ा परिवर्तन खेती से आय लेने वाले नौकरीपेशा के लिए था, जिन्हें 5 हजार से ज्यादा आय होने पर आईटीआर-2 दाखिल करना पड़ेगा। इसे पहले के 17 पेज से बढ़ाकर 23 पेज का कर दिया गया है, जो काफी जटिल हो गया है।
नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत देने की गुहार की गई है। वकील आशतोष दुबे की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया कि मुस्लिम महिलाओं पर मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने पर रोक गैरकानूनी और असंवैधानिक है। यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया कि कुरान और हदीस में लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। इस तरह की परंपरा महिलाओं की गरिमा के भी खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि पुरुषों की तरह महिलाओं का भी इबादत करने का संवैधानिक अधिकार है। याचिका में कहा गया है कि अभी जमात-ए-इस्लामी और शिया समुदाय के फिरकों में ही मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत है जबकि सुन्नी समुदाय के कई फिरको में इसकी मनाही है। यहां तक कि जहां मुस्लिम महिलाओं को नमाज के लिए मस्जिद में जाने की इजाजत है वहां उनके लिए अलग जगह है। इस पर कोर्ट ने केन्द्र और राज्य से जवाब माँगा है।
हंसी के बेताज बादशाह रहे चार्ली चैपलिन मूक युग के उन महान कलाकारों में से हैं, जिन्हें आज भी उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए याद किया जाता है। अभिनेता होने के साथ- साथ चार्ली भी क्लासिक हॉलीवुड युग के एक महत्वपूर्ण फिल्म निर्माता, संगीतकार और संगीतज्ञ भी रहे। चार्ली चैपलिन का जन्म 16 अप्रैल 1889 को लंदन के वॉलवर्थ में हुआ था
दुनिया भर को हंसाने वाले इस आदमी का जीवन खुद अवसाद से भरा रहा। मां मंच अभिनेत्री थीं, चार्ली के पिता शराबी थे और मां को मानसिक बीमारी के चलते बाद में पागलखाने जाना पड़ा। एक अभिनेता और फिल्म निर्माता-निर्देशक की हैसियत से उन्होंने जो कीर्तिमान स्थापित किए उन्हें तोड़ पाना संभवतः किसी के भी बस की बात नहीं।
बिना कुछ बोले पूरी दुनिया को हंसाने वाले चार्ली चैपलिन ने अपने सफर की शुरुआत 13 वर्ष की आयु में ही कर दी थी। उन्होंने अपने 75 वर्ष के फिल्मी सफर में अभिनता, निर्देशक, लेखक, निर्माता और संगीतज्ञ की सारी जिम्मेदारियो को बखूबी निभाया। चार्ली अपनी कॉमिक एक्टिंग के साथ- साथ अपनी चाल के लिए भी काफी पसंद किये गए और आज भी उनके चलने के स्टाइल को कॉपी किया जाता है। उन्होंने एक से एक यादगार भूमिकाएं अदा की। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश, नगर या कस्बा होगा जहां के लोगों ने इस महान व्यक्तित्व के बारे में न सुन रखा हो। सबसे ऊपर उनकी छवि एक हंसोड़ मसखरे की है, जिसे बच्चे-बूढ़े और सभी आयु वर्गों के लोगों के बीच समान प्रसिद्धि प्राप्त हुई। 6 जुलाई, 1925 को वह टाइम मैग्जीन के कवर पर आने वाले पहले एक्टर बने। 1973 में ‘लाइम-लाइट’ में बेस्ट म्युजिक के लिए ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित चार्ली को 1975 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा नाइट की उपाधि दी गयी। उन्हें दो मानद अकादमी पुरस्कार भी दिए गए।
हिटलर जैसे तानाशाह का चार्ली ने अपनी फिल्म ‘द ग्रेट डिक्टेटर’ में खुलकर मजाक उड़ाया था। वामपंथ का समर्थन करने के कारण चार्ली पर अमेरिका ने बैन भी लगा दिया था। चार्ली चैपलिन के जिस हैट, छड़ी और छोटी मूंछों वाले किरदार को हम पहचानते हैं, उसका नाम ट्रैम्प है। चार्ली चैपलिन जितने अच्छे कलकार थे उतने ही सादगी भरे इंसान भी थे। उन्हें फिल्मों में उनके योगदान के साथ- साथ उनके विचारों के लिए भी सराहा जाता है। दुनिया को बिना कुछ बोले हँसाने वाले इस कलाकार ने बीमारी के चलते 25 दिसंबर 1977 को दुनिया को अलविदा कह दिया।
विख्यात नाटककार चार्ल्स मैकआर्थर को एक स्क्रीनप्ले लिखने के लिए हॉलीवुड बुलाया गया था। साहित्य से गहरा जुड़ाव रखने वाले चार्ल्स मैकआर्थर की समझ में नहीं आ रहा था कि अच्छा स्क्रीनप्ले कैसे लिखा जाए। उन्हें विजुअल जोक्स लिखने में परेशानी हो रही थी। ‘आप मुझे ये बताइये कि मैं फिफ्थ एवेन्यू में टहल रही एक मोटी औरत को केले के छिलके पर फिसलता हुआ कैसे दिखाऊं कि लोग उस पर हंसें भी? इसे हजारों दफा लिखा-किया जा चुका है।’ मैकआर्थर ने कहा। ‘लोगों को हंसाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? क्या मुझे पहले केले का छिलका दिखाना चाहिए, उसके बाद मोटी औरत को उसकी तरफ आते हुए, और उसके बाद वह फिसल जाती है?’
‘ऐसा कुछ भी नहीं!’ एक क्षण को झिझके बगैर चार्ली चैप्लिन बोले- ‘आप मोटी औरत को आते हुए दिखाइए, फिर आप केले के छिलके को दिखाइए, उसके बाद आप केले के छिलके और मोटी औरत दोनों को एक साथ दिखाइए, इसके बाद वह औरत केले के छिलके पर पैर धरेगी और सामने के मैनहोल में गायब हो जाएगी।’
दूसरा किस्सा- मोंटे कार्लो में एक प्रतियोगिता चल रही थी। इस में प्रतिभागियों को चार्ली चैप्लिन जैसा बन कर आना था। चार्ली चैप्लिन खुद उस में भाग लेने पहुंच गए और उन्हें तीसरा स्थान मिला। चार्ली के कुछ विचार
हंसी के बिना बिताया हुआ दिन, बर्बाद किया हुआ दिन है।
मेरी जिंदगी में बेशुमार दिक्कतें हैं लेकिन यह बात मेरे होंठ नहीं जानते, वो सिर्फ मुस्कुराना जानते हैं।
आईना मेरा सबसे अच्छा दोस्त है क्योंकि जब मैं रोता हूं तो वो कभी नहीं हंसता।
अगर आप जमीन पर देखेंगे तो कभी इंद्रधनुष नहीं देख पाएंगे।
बिना कुछ करे कल्पना का कोई मतलब नहीं है।
आप किसका अर्थ जानना चाहते हैं? ज़िन्दगी इच्छा है, अर्थ नहीं।
नयी दिल्ली : ऐसे कारोबारी जिनका सालाना टर्नओवर दो करोड़ रुपये से अधिक है वो अब वित्त वर्ष 2017-18 के लिए जीएसटी ऑडिट रिपोर्ट ऑनलाइन फाइल सकते हैं। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ने अपने पोर्टल पर इसका फॉर्मेट मुहैया करा दिया है। देश में जीएसटी एक जुलाई 2017 से लागू हुआ था। इसके पहले वर्ष 2017-18 की ऑडिट रिपोर्ट कारोबारियों को 30 जून तक दाखिल करनी है। सरकार ने 31 दिसंबर 2018 को एनुअल रिटर्न के फार्म- जीएसटीआर-9, जीएसटीआर-9ए और जीएसटीआर-9सी नोटिफाई किए थे। मार्च में इन्हें भरने की तारीख तीन माह बढ़ाकर 30 जून 2019 कर दी थी। जीएसटीएन ने जीएसटीआर-9सी रिटर्न फॉर्म ऑफलाइन भी उपलब्ध कराया है। करदाता इसे भरकर पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड सभी करदाताओं के लिए जीएसटीआर-9 सालाना रिटर्न है। जीएसटीआर-9ए रिटर्न कंपोजिशन स्कीम चुनने वाले करदाताओं के लिए है। जीएसटीआर-9सी एक रिकॉन्सिलेशन स्टेटमेंट है। यह चार्टर्ड अकाउंटेंट या कॉस्ट अकाउंटेंट से सत्यापित और हस्ताक्षरित होना चाहिए। इसे एनुअल रिटर्न के साथ फाइल करना आवश्यक है।