नयी दिल्ली : मोदी कैबिनेट ने शैक्षणिक संस्थानों में नियुक्ति में आरक्षण लागू करने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद नियुक्तियों में आरक्षण के लिए दोबारा 200 पॉइंट रोस्टर लागू होगा। इसके मुताबिक, अब विश्वविद्यालय और कॉलेज को यूनिट माना जाएगा। यूजीसी ने मार्च 2018 में 13 पॉइंट रोस्टर लागू किया था, इसमें विभाग को यूनिट माना जाता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2017 में 13 रोस्टर लागू करने का फैसला दिया था
यूजीसी ने पिछले साल मार्च में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अप्रैल 2017 के फैसले को लागू किया था। इसके मुताबिक, पदों पर आवंटन की गिनती करते वक्त एक विभाग को यूनिट के तौर पर लिया जाता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने मानव संसाधन मंत्रालय की याचिका को खारिज कर दिया था, जो हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। जावड़ेकर ने 11 फरवरी को लोकसभा में कहा था कि सरकार पुनर्याचिका रद्द होने के बाद अध्यादेश ला सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि सरकार संस्थानों में रिजर्वेशन रोस्टर को फिर से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। जावड़ेकर ने कहा था कि सरकार 200 पॉइंट रोस्टर लागू करेगी, जिससे पदों पर आवंटन की गिनती करते वक्त यूनिवर्सिटी या कॉलेज को यूनिट के तौर पर माना जाएगा, न कि किसी एक विभाग को।
क्या है 13 पॉइंट रोस्टर?
यूजीसी के आदेश के बाद से अभी तक 13 पॉइंट रोस्टर से विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्तियां हो रही हैं। इसके मुताबिक, विश्वविद्यालयों या कॉलेज को यूनिट नहीं माना जाएगा, बल्कि एक विभाग को यूनिट माना जाएगा। अगर किसी विभाग में चार नियुक्तियां निकलती हैं तो तीन स्थानों पर सामान्य और चौथे स्थान पर ओबीसी उम्मीदवार को मौका मिलेगा। अगली बार जब नियुक्तियां निकलेंगी तो इसे पांच के बाद से जोड़ा जाएगा। 7 वें स्थान पर एससी, आठवें स्थान पर ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार को मौका मिलेगा। इसे रजिस्टर में दर्ज करना होगा। यह प्रक्रिया 13 पॉइंट तक चलेगी। एसटी वर्ग के उम्मीदवार को तभी मौका मिलेगा, जब विभाग में 14 पद होंगे। वहीं, 200 पॉइंटरोस्टर में यूनिवर्सिटी और कॉलेज को यूनिट मानकर आरक्षण दिया जाता है। इसमें प्रक्रिया 200 पॉइंट तक चलती है।
शैक्षणिक संस्थानों में फिर लागू होगा 200 पॉइंट रोस्टर
गोरखपुर / बच्चों के लिए आई सरल गीता, कठिन श्लोक को पढ़ने में होगी आसानी
गोरखपुर : गीता के कठिन श्लोक पढ़ने में आसानी हो, इसके लिए अब सरल गीता का प्रकाशन हो रहा है। इस वर्ष की शुरुआत में गीता प्रेस गोरखपुर ने विशेष रूप से बच्चों के लिए ऐसी गीता तैयार की है। इसके तहत संस्कृत के मूल श्लोकों के लंबे-लंबे शब्दों के उच्चारण को आसान बनाने के लिए उनके बीच अंतर (डैश लगाकर) दिया गया है। मूल श्लोकों के साथ ही लाल-काले रंग में यह श्लोक प्रकाशित किए गए हैं। इस संबंध में गीता प्रेस के उत्पाद प्रबंधक डाॅ. लालमणि तिवारी ने कहा कि अभी भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो गीता के श्लोकों को सही उच्चारण के साथ नहीं पढ़ पाते हैं। इसे ध्यान में रखकर सरल गीता तैयार की गई है, जिससे वे गीता के श्लोकों को आसानी से सही पढ़ सकें। खासतौर पर बच्चे। सरल गीता के अलावा गीताप्रेस धार्मिक किताबों के साथ ही विभिन्न संस्कारों की पद्धतियां भी प्रकाशित करने जा रही है। मार्च अंत तक विवाह संस्कार, उपनयन संस्कार पद्धति का प्रकाशन शुरू हो जाएगा। गीताप्रेस हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, नेपाली सहित 15 भाषाओं में 1800 प्रकार की पुस्तकों का प्रकाशन कर रहा है। स्थापना से लेकर वर्ष 2018 तक के 95 सालों में सवा चौदह करोड़ से अधिक गीता और तीन करोड़ 35 लाख से अधिक रामचरित मानस (रामायण सहित) की प्रतियाें का प्रकाशन गीताप्रेस ने किया है। संस्कारों पर पुस्तक प्रकाशन के संबंध में तिवारी ने कहा कि 16 संस्कारों के विषय में हम जागरूक नहीं हैं। यज्ञोपवीत (उपनयन), विवाह और अंत्येष्ठि तीन ही संस्कार मुख्य रूप से बचे हैं। जो संस्कृति विकसित हो रही है उसमें मंत्रों से ज्यादा यंत्रों का प्रयोग बढ़ा है। विवाह आदि संस्कार तो आधा-एक घंटे में ही हो रहे हैं, फोकस जयमाला और फोटोग्राफी तक सीमित हो गया है। संस्कारों की यह पुस्तकें लोगों को उनके महत्व व विधि को बताएंगी। दो वर्ष पहले संस्कार प्रकाश पुस्तक प्रकाशित की थी जिसमें सभी संस्कारों के बारे में संक्षिप्त जानकारी थी लेकिन पूर्णरूप से विधि-विधान नहीं था। वर्ष 2018 में श्रीमद्भागवत महापुराण श्रीधरीटीका गुजराती में और महाभारत तेलुगु में गीताप्रेस ने प्रकाशित की थी। अब 2019 में मलयालम में भागवत महापुराण प्रकाशित होगा। आर्थिक तंगी जैसी कोई बात नहीं है। यह केवल अफवाह है। बीते चार साल में 20 करोड़ रुपए से अधिक की मशीनें करीब दो लाख वर्गफुट में फैले परिसर में लगाई गई हैं। गीताप्रेस के देशभर में 21 ब्रांच ऑफिस और 52 स्टेशनों पर स्टॉल हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर पर धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया की रिपोर्ट)
भारतीय सेना को मिले 172 नए अधिकारी
चेन्नई : भारतीय सेना के अधिकारी के तौर पर यहां ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) से 172 कैडेट्स ने शनिवार को पासिंग आउट परेड के साथ ही कमीशन प्राप्त किया। इन अफसरों में युवक और युवतियां दोनों शामिल हैं। पासिंग आउट परेड में भूटान और अफगानिस्तान के अफसर भी शामिल थे।
आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक जनरल ऑफिसर, कमांडर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने आज परेड की सलामी ली और नए अफसरों को भारतीय सेना के मूल्यों का पालन करने को प्रेरित किया। इसके साथ ही उन्होंने अकादमी के अंडर ऑफिसर सिद्धार्थ भवनानी को सोर्ड ऑफ ऑनर और एक रजत पदक से सम्मानित किया। इसके मुताबिक सिंह ने उत्कृष्ट मानकों का प्रदर्शन करने के लिये कैडेट्स और ओटीए के कर्मचारियों को बधाई दी। विज्ञप्ति में कहा गया कि उन्होंने कैडेट संध्या को स्वर्ण पदक और बटालियन अंडर ऑफिसर नोयोनिका बिंदा को कांस्य पदक प्रदान किया।
स्वीडन / बुजुर्गों की भूख बढ़ाने के लिए केयर होम्स में 3डी-प्रिंट वाला खाना पहुंचाने की योजना
स्टॉकहोम : स्वीडन की एक म्यूनिसिपल कॉरपोरशन बुजुर्गों के केयरहोम्स में 3डी-प्रिंट वाला खाना देने की तैयारी कर रही है ताकि उनकी भूख को बढ़ाया जा सके। अफसरों का मानना है कि 3डी प्रिंट वाला खाना थोड़ा उभरा हुआ दिखाई देता है और आपको ज्यादा आकर्षित करता है।
हेम्सटेड म्यूनिसिपैलिटी के केटरिंग डिपार्टमेंट के प्रमुख रिचर्ड एस्प्लॉन्ड कहते हैं कि जब आपको खाने और चबाने में दिक्कत होने लगे तो आपको भूख भी नहीं लगती। इसको लेकर हमारे मन में खाने को थोड़ा और खूबसूरत दिखाने का आइडिया आया ताकि खाना काफी असल जैसा लगे। म्यूनिसिपैलिटी ने खाने की इस योजना को मूर्तरूप देने के लिए एक भागीदार भी जोड़ा है। अफसरों को उम्मीद है केयरहोम्स में रहने वाले बुजुर्गों को मिलने वाले चिकन और ब्रोकली का रूप बेहतर होगा और उन्हें खाने की इच्छा होगी।
प्रोजेक्ट का संयोजन संभाल रहीं एक रिसर्चर एवेलीना होगलंड का कहना है कि केयरहोम्स को रोज उनके यहां रहने वाले लोगों के डिस्फेगिया से जूझना पड़ता है। इसमें चबाने में दिक्कत के साथ इंसान पर्याप्त खाना भी नहीं खा पाता। अगर लोग लगातार कम खाना खाएंगे तो उन्हें बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। स्वीडन में 8% वयस्कों को चबाने की समस्या है। हालांकि यह प्रोजेक्ट फिलहाल अध्ययन के स्तर में है। अफसरों को उम्मीद है कि हेमस्टेड और हेलसिंगबोर्ग शहर में इस साल के अंत तक केयरहोम्स में 3डी प्रिंट वाला खाना दिया जाने लगेगा।
होगलंड के मुताबिक- पहली चुनौती तो यह है कि मेडिकल टेक्नोलॉजी के लिए डिजाइन किए गए प्रिंटर को हमें अपने मुताबिक बनाना है। साथ ही यह ध्यान भी रखना है कि वे स्वच्छता के साथ पर्याप्त मात्रा में प्रिंट कर सकें। केटरिंग डिपार्टमेंट के प्रमुख रिचर्ड की एक अन्य चिंता है कि 3डी प्रिंटेड चिकन खाने में बहुत मजेदार नहीं लगता। हालांकि वह यह भी कहते हैं कि जो आज परोसा जा रहा है, उससे तो यह काफी बेहतर होगा।
महिलाओं के लिए हैं बैंकों की ये 7 योजनाएँ
अगर आप अपना काम शुरू कर रही है और आर्थिक समस्या एक बड़ी बाधा है तो यह योजनाएँ आपकी मदद कर सकती हैं। सरकार और सरकारी बैंकोें द्वारा संचालित ये योजनाएँ आपकी राह आसान बनाएँगी। एक नजर इन योजनाओं पर –
मुद्रा योजना – भारत सरकार की इस योजना के तहत महिलाएं ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग यूनिट, ट्यूशन सेंटर जैसे व्यवसाय कर सकती हैं। लोन के पहले आवेदक का सत्यापन किया जाता है। इसके बाद महिला आवेदकों को मुद्रा कार्ड मिलता है। इसके जरिए वे व्यवसाय की जरूरत का सामान खरीद सकती हैं। इस योजना को शिशु, किशोर और तरुण ऐसी तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
अन्नपूर्णा योजना – यह स्कीम उन महिलाओं के लिए है जो स्मॉल स्केल पर फूड कैटरिंग बिजनेस करना चाहती हैं। इनमें टिफिन सर्विस, पैक्ड स्नैक्स जैसे काम किए जाते हैं। इसमें अधिकतम 50 हजार रुपए तक का कर्ज मिलता है, जिसे 36 महीनों में रिटर्न करना होता है। इस लोन में एक महीने का EMI फ्री पीरियड भी मिलता है। इंटरेस्ट मार्केट रेट के मुताबिक ही वसूल किया जाता है। यह योजना स्टेट बैंक ऑफ मैसूर कीहै।
उद्योगिनी योजना – यह कर्ज लघु, खुदरा व कृषि क्षेत्र में दिया जाता है। इस कर्ज को वही महिलाएं ले सकती हैं जिनकी उम्र 18 से 45 साल के बीच है। इसमें अधिकतम सीमा 1 लाख रुपए की है। यह योजना पंजाब और सिंध बैंक में है।
स्त्री शक्ति पैकेज – ऐसी कंपनियां जिनमें 50 प्रतिशत से ज्यादा शेयर महिला के नाम पर हैं, वे इस योजना का फायदा उठा सकती हैं। इसमें लोन अमाउंट 2 लाख रुपये से ज्यादा का होता है तो ब्याज दर 0.5 प्रतिशत लगती है। 5 लाख रुपए तक के कर्ज पर कोई सिक्युरिटी भी जमा नहीं करना होती। यह एसबीआई की योजना है।
देना शक्ति योजना – देना बैंक की इस स्कीम में कृषि, छोटे उद्योग, खुदरा व्यवसाय, माइक्रो क्रेडिट, एजुकेशनल और हाउसिंग को ध्यान में रखा गया है। अधिकतम सीमा और ब्याज दर अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से बाँटा किया गया है। जैसे शिक्षा और खुदरा क्षेत्र में 20 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जा रहा है। ब्याज दर 0.25 प्रतिशत है।
महिला उद्यम निधि योजना – यह योजना उन महिलाओं के लिए है, जो छोटे स्तर पर अपना उद्योग संचालित करती हैं। छोटे स्तर पर काम कर रही हैं महिलाएं अपने व्यवसाय को उन्नत अथवा आधुनिक बनाने इस योजना का फायदा उठा सकती हैं। पंजाब नेशनल बैंक यह योजना चला रहा है।
सेंट कल्याणी योजना – सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की इस स्कीम में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस इंडस्ट्री में माइक्रो और लघु उद्योग से जुड़ी महिलाओं को टारगेट किया गया है। इसमें हस्तशिल्प, सिलाई, डॉक्टर्स, ब्यूटी पार्लर्स, गारमेंट मेकिंग, ट्रांसपोर्ट बिजनेस आदि शामिल हैं। यह स्कीम रिटेल ट्रेड, एजुकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के लिए नहीं है।
(साभार – दैनिक भास्कर)
‘ साहित्य सौरभ ‘ के सम्पादक मंडल में प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय
कोलकाता : कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की प्रोफेसर एवं सम्प्रति वेस्ट बंगाल युनिवर्सिटी आफ टीचर्स ट्रेनिंग, एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन की कुलपति प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय को टोरंटो, कनाडा से अति शीघ्र प्रकाशित होने वाली “पुस्तक भारती ” संस्थान की त्रैमासिक अंतराष्ट्रीय शोध-पत्रिका ‘ रिसर्च-ई-जर्नल ‘ एवं साहित्यिक पत्रिका ‘ साहित्य सौरभ ‘ के सम्पादक मंडल में स्थान प्रदान किया गया है । सुविख्यात साहित्यसेवी डॉ रत्नाकर नराले जो पुस्तक भारती संस्था के सी.ई.ओ हैं, ने बताया कि टोरंटो, कनाडा की पुस्तक भारती संस्था कनाडा के ISBN से www.amazon.com द्वारा विश्वस्तर पर प्रकाशन- वितरण की उत्तम सेवा प्रदान करती है ।संस्था के सचिव डॉ राकेश दुबे ने बताया कि ‘ पुस्तक भारती ‘ कनाडा की नामचीन संस्था है, जो उच्च स्तरीय प्रकाशन एवं अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जानी जाती है ।पत्रिका का प्रथम अंक भारतीय साहित्य एवं संस्कृति पर केन्द्रित होगा ।
प्रतिरोध की संस्कृति है स्त्री सृजनात्मकता
हावड़ा : मुक्तांचल और हावड़ा की संस्था विद्यार्थी मंच के तत्वावधान में ‘स्त्री कलम: प्रतिरोध की संस्कृति ‘ विषय पर एक विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुक्तांचल के स्त्री कलम केन्द्रित अंक का लोकार्पण भी किया गया। इस प्रकाशन पर्व में डॉ सत्या उपाध्याय ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। सुधा शर्मा ने काव्य आवृत्ति द्वारा स्त्री की आजादी को मुखरित किया। मुक्तांचल पत्रिका की संपादक डॉ. मीरा सिन्हा ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि स्त्री कलम केंद्रित यह अंक स्त्री लेखन को व्यापकत्व देने का प्रयत्न है। हमें सृजनात्मकता के साथ-साथ पठनीयता को बनाये रखने की जरूरत है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर चंद्रकला पांडे ने कहा कि स्त्री रचनात्मकता का फलक व्यापक होने के साथ निर्भयता से लबरेज़ हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस दिन स्त्रियां भय मुक्त होंगी और स्त्रियों के प्रति समाज का सोच बदलेगा, उस दिन स्त्री अपने वजूद को पा सकेंगी। बतौर प्रमुख वक्ता विश्वभारती विश्वविद्यालय की प्रो.मंजुरानी सिंह ने कहा कि स्त्री के लेखन की शुरूआत असहमति और प्रतिरोध से हुई है। डॉ सुनीता गुप्ता ने कहा कि कविता प्रतिरोध का माध्यम है। कविता स्त्री के लिए उनके होने की जिद है। विशिष्ट वक्ता के तौर पर आमंत्रित शशि मुदीराज ने कहा कि जहां स्त्रियों ने खुद को व्यक्त करने की कोशिश की है, वहीं से स्त्रियों के समक्ष चुनौतियां शुरू हो गईं। आज स्थिति बदली है और स्त्रियों ने हर तरह की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर लिया है। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में शैलेन्द्र शांत, उमा झुनझुनवाला, सिराज खान बातिश, विमलेश त्रिपाठी, रितेश पांडेय, जीवन सिंह, सविता पोद्दार, सुषमा कनुप्रिया, कालिका प्रसाद उपाध्याय, सरिता खोवाला, रीमा पांडेय, आरती सिंह, श्वेता सिंह, मनप्रीत घई, संजीव दुबे, राहुल गौंड, अनुराधा सिंह ‘अनु ‘, मधु सिंह, मंजू बेज, अजमत अंसारी, अनीसा सावरी ने अपनी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए प्रो. शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि आज भी स्त्रियों स्थिति ज्यादा नहीं बदली है, वैचारिक धरातल पर स्थिति वैसी ही है जैसी पहले थी। स्त्रियों के हाथ में कलम का आना प्रतिरोध का बड़ा सबूत है और वह इसी कलम के माध्यस से अपने प्रतिरोध को शब्दों में बयां करती हैं। इस मौके पर विनीता लाल, पार्वती शॉ, संजय पांडेय, सुधा शर्मा ,त्रिनेत्र कांत त्रिपाठी ,हेमंत सिंह ,मनीष सिन्हा , शुभम जायसवाल, मुकेश झा ,गुड़िया राय, अनुभव सिन्हा ,प्रभा उपाध्याय, विनोद यादव , नेहा सिंह , अजय ठाकुर , सुशील पांडेय उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन विवेक लाल ने दिया।
महिन्द्रा इकोल सेन्ट्राल, हैदराबाद ने की बीटेक डिग्री कोर्स (2019-23) में दाखिले की घोषणा
ऑनलाइन एप्लिकेशन पोर्टल अब लाइव है। महिन्द्रा इकोल सेन्ट्राल (एमईसी) ने चार साल के अपने बी टेक प्रोग्राम में दाखिले की घोषणा की है। यह इसके हैदराबाद कैम्पस के लिए है और शिक्षा सत्र 2019-23 के लिए है। कुल 240 सीटें हैं और हरेक सुविज्ञताओं जैसे कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, मेकैनिकल इंजीनियरिंग और सिविल इंजीनियरिंग में 60-60 सीटें हैं।
आईबी या अन्य स्वीकृत बोर्ड से जिन छात्रों के पास सभी विषयों में 60% एग्रीगेट अंकों के साथ किसी वैधानिक बोर्ड से 10+2 या समतुल्य की डिग्री है, दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं। दाखिला या तो जेईई (JEE) मेन 2019 के आधार पर दिया जाएगा (जेईई JEE (मेन) 2019 परीक्षा में योग्य हों या जेईई JEE एडवांस्ड 2019में बैठने के योग्य हों) या एसएटी SAT स्कोर्स (न्यूनतम 1800 उन विषयों में जिनमें गणित, भौतिक शास्त्र और रसायन शास्त्र शामिल होने चाहिए)।
आवेदन करने के लिए छात्र को www.mahindraecolecentrale.edu.in के जरिए आवेदन पोर्टल पर लॉग ऑन करना होगा और ऑनलाइन आवेदन पत्र भरना होगा। जो योग्य छात्र 10 मई 2019 के पहले आवेदन करेंगे उन्हें कौनसेलिंग के पहले चरण में शामिल करने पर विचार किया जाएगा। (आमतौर पर यह मई के अंतिम या जून के पहले हफ्ते में होना निर्धारित होता है।) आवेदन पत्र 7 जुलाई 2019 तक भरे जा सकते हैं। महिन्द्रा इकोल सेन्ट्राल की स्थापना उच्च स्तर के उद्योग और शिक्षाक्षेत्र की सहक्रिया से हुआ है। महिन्द्रा इकोल सेन्ट्राल के डायरेक्टर डॉ. यजुलु मेडुरी कहते हैं, “एमईसी उद्योग के लिए तैयार इंजीनियर बनाने पर ध्यान देता है : ये वो लोग होते हैं जो ना सिर्फ आवशयक कौशल से युक्त होते हैं बल्कि अच्छे प्रबंधक, लीडर और इनोवेटर भी होते हैं।”
एमईसी के पाठ्यक्रम को इस तरह डिजाइन किया गया है जो यह सुनिश्चित करता है यहाँ के विद्यार्थी बहुमुखी हों, उत्कृष्ट इंजीनियरिंग शिक्षा से युक्त हों और उद्योग के लिए तैयार इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर निकलें। डॉ. मेडुरी ने आगे कहा, “हमारा मानना है कि एमईसी में हम ऐसे इंजीनियर तैयार करते हैं जो अंतरराष्ट्रीय चुनौती का सामना कर सकते हैं और लीडर्स, आंत्रप्रेन्योर्स यानी उद्यमी और इनोवेटर्स यानी आविष्कारक बन सकते हैं।”
चार साल की बीटेक डिग्री छात्र को अनूठी योग्यता देगी जिससे वे इंजीनियरिंग की अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना कर सकेंगे और नई टेक्नालॉजी अपना सकेंगे जिससे उन्हें भविष्य को पुनर्पारिभाषित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ऐसे पेशेवर तैयार होंगे जो बहुराष्ट्रीय संगठनों की जटिलताओं से निपटने में उस्ताद होंगे। एमईसी (महिन्द्रा इकोल सेन्ट्राल) विश्व स्तर की संरचना मुहैया कराता है ताकि छात्रों और फैकल्टी के लिए मजबूत अनुसंधान कार्यक्रम को सपोर्ट किया जा सके।
परिचित हूँ मैं

परिचित हूँ मैं,
स्वयं की क्षमता से,
परिचित हूँ मैं,
स्वयं की शक्ति से,
मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम्हारे प्रोत्साहन का,
जब तुम कहते हो ,
मैं अग्नि हूँ,
मैं दुर्गा हूँ,
कि,मैं शक्ति स्वरूपा हूँ,
कि ,मैं जन्मदात्री हूँ,
ऐसे अनेको अलंकरण,
जिसे तुम स्वयं तार-तार कर देते हो,
अवसर पाकर,
कभी चहारदीवारी में,
तो कभी सुनसान एकांत में।
एहसास है मुझे,
कि ,मैं अभिन्न अंग हूँ
इस सृष्टि की,
कि मेरे बिना अधूरे हो तुम,
जैसे ,मुझे अधूरा समझते हो अपने बिना।
एहसानों के बोझ से मत दबाओ मुझे ,
यह नीला अम्बर मेरा भी उतना है,
जितना तुम्हारा है,
एक टुकडा़ मेरा ही मुझे देकर,
एहसान का मुलम्मा मत चढा़ओ तुम।
परिचित हूँ मैं……
सुनिए कभी!

बेशक “वो” …..
साथ चाहती हो, पर सहारा नहीं।
अपने हिस्से का….
सम्मान चाहती, पर सामान नहीं।
सम्भवतः वो सिर्फ…
समर्पण चाहती हो, आपका बलिदान नहीं।
दिन के अंत में केवल..
सहज संवाद चाहती हो, नाहक वाद-विवाद नहीं।
वो भी बनना चाहती हो….
एक मिसाल, महज मज़ाक नहीं।
उसको भी तो दरवाज़े की
नेमप्लेट पर ख्वाहिश होती होगी …..
कभी अपने नाम की,
न कि सिर्फ एक अदद सरनाम की।
तो सुनिए कभी ….
क्योंकि
“वो” तो बस
अपने हिस्से की
ज़मीन चाहती है ।
उसे ज़रूरत ही नहीं
आपके हिस्से के आसमान की।।




