Wednesday, April 22, 2026
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नौकरी तलाश रही थीं इंजीनियरिंग से स्नातक चन्द्राणी, बन गयीं सबसे युवा सांसद

किओन्झार (ओडिशा)  :   चन्द्राणी मुर्मू 17वीं लोकसभा में सबसे युवा सांसद बन गयी हैं। उन्होंने  2017 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। तभी से मैं नौकरी ढूंढ रही थी। चार कम्पनियों में आवेदन किया था। सरकारी नौकरी की भी लगभग सभी परीक्षाएँ दे रखी हैं। वह बताती हैं कि  31 मार्च को अचानक उनके मामा (हरमोहन सोरेन) ने फोन करके पूछा कि चुनाव लड़ सकती हो? उन्होंने कहा, ‘सीएम नवीन पटनायक किसी पढ़ी-लिखी महिला को टिकट देने की सोच रहे हैं। मैंने तुरंत सहमति दे दी। दरअसल, मेरे नाना 1980 और 1984 में दो बार कांग्रेस से सांसद थे। नाना की वजह से मुझ पर राजनीतिक असर रहा है। एक अप्रैल को मुझे फोन आया कि सीएम मिलना चाहते हैं। मैं उनसे मिली। तब भी मुझे नहीं लगा कि टिकट मिलेगा। फिर 2 अप्रैल को मेरा नाम घोषित हो गया। अगले 45 दिन में मैं अनंत सर को हराकर सांसद बन गई। सच पूछिए तो मैं सभी इलाकों में प्रचार भी नहीं कर सकी। प्रचार के दौरान पहली बार हेलीकॉप्टर में बैठी। सोचिए, मध्यम वर्ग में हेलीकॉप्टर किसे नसीब होता है? वह वाइल्ड ड्रीम में भी हेलीकॉप्टर के बारे में नहीं सोचता। चुनाव अभियान के दौरान जब मुझे टिकट मिला मेरा एक वीडियो (मोर्फ्ड फोटो के साथ) वायरल हो रहा था। मेरे नाम से अफवाह फैली। टिकट मिलने से एक तरफ नाम हो रहा था, वहीं दूसरी ओर बदनाम किया जा रहा था। इस घटना से बहुत आहत हुई। लेकिन, सबने भरोसा मुझमें भरोसा जताया तो मैं इस सदमे से उबर आई। राजनीति में मेरी रुचि थी और मैंने सोचा था कि अगर जीवन में कभी छोटा-मोटा मौका मिलेगा तो इस दिशा में जरूर जाऊँगी। ‘
25 साल की बीजद सांसद चन्द्राणी हैं मुर्मू। ओडिशा के किओन्झार से दो बार सांसद रहे भाजपा के अनंत नायक को 66203 वोट से हराकर संसद पहुंची हैं।

यूएनओ हैल्थकेयर अवार्ड / विश्व के 10 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में आचार्य बालकृष्ण

जिनेवा : पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण को यूएनओ की संस्था यूएनएसडीजी (यूनाइटेड नेशंस सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल) ने विश्व के 10 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है। शनिवार को उन्हें जेनेवा में यूएनएसडीजी हेल्थकेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। बालकृष्ण का कहना है कि उन्हें खुशी है कि भारतीय संस्कृति के प्रसार के लिए यह सम्मान मिला। बाबा रामदेव ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि बालकृष्ण को यह उपलब्धि आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में नए अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए मिली है। बालकृष्ण ने भारतीय चिकित्सा पद्धति योग व आयुर्वेद को सम्पूर्ण विश्व में फिर से स्थापित किया है। जिनेवा में शनिवार को आयोजित हुए समारोह में विश्व भर के कई लोगों को सम्मानित किया गया। यह पहली बार है जब यूएनएसडीजी ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया भर के नामचीन लोगों को सम्मानित किया। इन लोगों ने विश्व स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान दिया है। प्राइमरी हेल्थ केयर, नॉन कम्युनिकेबल डिजीज कंट्रोल और डिजिटल हेल्थ को बढ़ाने देने के लिए बड़े पैमाने पर वित्त पोषण करना यूएनएसडीजी का लक्ष्य है। इस सम्मेलन में 50 देशों से लगभग 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया। पतंजलि के उत्पाद आज दुनियाभर में अपनी पकड़ बना चुके हैं। 1995 में हरिद्वार में दिव्य फार्मेसी के रूप में शुरू किए गए पतंजलि ग्रुप के प्रमुख बालकृष्ण को फोर्ब्स की रईसों की सूची में भी शामिल किया गया है। उनकी निजी संपदा 25,000 करोड़ रुपये आँकी गयी है। पतंजलि के 97% शेयर बालकृष्ण के पास हैं।

वांगचुक से प्रेरणा लेकर 18 पेटेंट लेेने वाले पहले भारतीय युवा बने अजिंक्य कोत्तावार

वांगचुक से प्रेरणा लेकर 18 पेटेंट लेेने वाले पहले भारतीय युवा बने अजिंक्य कोत्तावार की कहानी

नागपुर : मेरा जन्म नागपुर में हुआ, लेकिन मेरा मूल गांव महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का पाटनबोरी है। पिता रवींद्र पाटनबोरी में एक सीमेंट फैक्ट्री में काम करते थे। मां स्कूल में पढ़ाती थीं, इन दोनों की इतनी आय थी कि बस घर चल जाता था। मेरी नौवीं तक की पढ़ाई पाटनबोरी में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए मैं यवतमाल आ गया, लेकिन स्कूल में मन नहीं लगता था। फिल्म थ्री-इडियट्स से मशहूर हुए सोनम वांगचुक का वायरस मेरे अंदर घुसा हुआ था। मैं भी कोई आविष्कार करना चाहता था। माता-पिता को पता चला तो उन्होंने डांटा कि पहले ग्रेजुएशन कर लो, फिर जो चाहो करना। अच्छे अंक लाओगे तो नौकरी भी अच्छी मिलेगी।

12वीं के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया तो मेरी दबी हुई प्रतिभा को पंख लगना शुरू हो गए। 2013 में सेकंड ईयर में 21 वर्ष का था तब मैंने ‘ए वेरीएबल वॉल्यूम पिस्टन सिलेंडर असेंबली’ यंत्र बनाया। इसे किसी गाड़ी में फिट करने पर वह अलग-अलग सीसी में बदल सकती थी। आविष्कार लेकर मैंने एक बड़ी भारतीय कार निर्माता कंपनी से संपर्क किया तो उन्होंने तारीफ करते हुए कहा कि कमर्शियली यह अफोर्डेबल नहीं है। 2013 में आगे की पढ़ाई के लिए मैं एनआईटी सिलचर गया। मैं पास के गांवों में ग्रामीणों से मिलकर उनकी परेशानियां समझता था। मैं चाहता था कि उनकी परेशानी दूर करने के लिए कोई प्रयोग करूं। वहां मैंने चाय की पत्ती से बायोडीजल बनाया, लेकिन कॉलेज प्रशासन को यह नागवार गुजरा। कॉलेज ने कहा कि यहां यह सब नहीं कर सकते तो मैंने कॉलेज ही छोड़ दिया। वैसे भी किताबों व डिग्री में मेरी रुचि नहीं थी। इसी वर्ष मैंने नया प्रयोग किया, जिसमें किसी कार को डीजल व पेट्रोल दोनों से चला सकते थे। पेटेंट कराकर जब महिन्द्रा कंपनी को बताया तो उन्होंने इस्टीमेट बनाकर बताया कि यह तकनीक काफी महंगी पड़ेगी। यदि गाड़ी मार्केट में नहीं चली तो? 2015 में जब इंजीनियरिंग कर चुका था तब मैंने वॉटर फिल्टर बनाया। हमारे गांव में नदी है, लेकिन वॉटर सप्लाय सिस्टम नहीं होने से बर्तनों में पानी लाना पड़ता था।

मैंने 200 लीटर के एक ड्रम में फिल्टर लगाकर उसे पहिए वाली गाड़ी पर फिट कर दिया। नदी का पानी घर लाते समय रास्ते में ड्रम घूमता था, जिससे पानी घर आते-आते फिल्टर हो जाता था। यह इतना फिल्टर हो जाता है कि पीने योग्य हो जाए। ग्रामीण इससे बहुत खुश हुए। देश में निर्मित बैटरी वाली कार एक बार चार्ज करने पर 120 किमी चलती है। मैंने हाईब्रिड तकनीक का इस्तेमाल कर साबित किया कि बैटरी खत्म होने के बाद वही कार दो लीटर फ्यूल में 160 किमी और चलेगी। यानी बैटरी और दो लीटर फ्यूल में 280 किमी। मेरा इन्वेंशन जुड़ने के बाद गाड़ी अब फ्यूल व बैटरी से 300 किमी चलती है। कार कंपनी को मेरा पेटेन्ट पसंद आया। मैं उनके साथ इस पर काम कर रहा हूं। इस बीच 12 आविष्कारों का पेटेंट अपने नाम कराकर 2016 में सोनम वांगचुक से मिलने लद्दाख गया। उन्होंने कहा अपने क्षेत्र में अपने लोगों के बीच काम करो, उन्हें तुुम्हारी जरूरत होगी। 26 की उम्र में 18 अाविष्कारों के अंतरराष्ट्रीय पेटेंट मेरे नाम हैं। इस उम्र में मैं यह उपलब्धि हासिल करने वाला पहला भारतीय हूं। इसके बाद मैं यवतमाल जिले के स्कूल-कॉलेजों में ग्राउंड पर बच्चों से विचार साझा करने लगा। यह बात शिक्षण संस्थानों को पता चली तो वे प्रभावित हुए। शिक्षण संस्थानों ने मुझे इजाजत दी तो मैंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की टीम बनाई और बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। यवतमाल में ही करीब 22 हजार विद्यार्थियों को मैं पढ़ा चुका था। अप्रैल 2019 तक सभी जगह के 52 हजार विद्यार्थियों को मैंने पढ़ाया है। मैंने इसकी कभी कोई फीस नहीं ली।

2018 में मैंने अपने ‘ज्ञान फाउंडेशन’ की स्थापना की। पांचवीं से 10वीं कक्षा तक का पाठ्यक्रम मॉडल बनाया ताकि बच्चे पढ़कर नहीं, देख व प्रयोग कर विषय में पारंगत हो सकें। शिक्षा के सरलीकरण के लिए मैंने 4 हजार से अधिक प्रोजेक्ट बनाए। गणित को सरल बनाने के लिए 500 मॉडल बनाए, जिनसे 2500 कॉन्सेप्ट सीख सकते हैं। विज्ञान, भूगोल और इतिहास के भी प्रोजेक्ट बनाए, इसमें खेल-खेल में पढ़ा गया बच्चे कभी नहीं भूलते। फाउंडेशन के माध्यम से हम स्कूलों में वर्कशॉप चलाते हैं। मैंने दिसंबर 2018 में यवतमाल में एक्टिविटी सेंटर शुरू किया। राज्य में ऐसे 12 सेंटर शुरू करना चाहता हूं। यहां काम करने वाले स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दे रहा हूं। ये स्वयंसेवक गांव-खेड़े में बच्चों को सिखाएंगे। चूंकि फैकल्टी और अन्य कार्य के लिए पैसा चाहिए, इसलिए आने वाले बच्चों से मैं बहुत नॉमिनल फीस लेता हूं। जो नहीं दे सकते, उनके लिए माफ है। मेरा इरादा इसे देशभर में फैलाना है।

एडवांस सोलर सिस्टम पर काम कर रहा हूं। प्रयोग सफल रहा तो सामान्य पेनल से 30% अधिक एफिशियंसी मिल सकती है। ऑटोमेटिक क्लिनिंग सिस्टम से आउटपुट बढ़ जाएगा। एजुकेशन सिस्टम- 4000 प्रयोग ज्यादातर स्कूलों में इस्तेमाल हो रहे हैं। 70 किमी से अधिक माइलेज देने वाली फोर व्हीलर मैंने बनाई। इस पर महिन्द्रा के साथ काम कर रहा हूं। 150 किमी प्रतिलीटर से ज्यादा एवरेज देने वाली टू व्हीलर बनाई। पोर्टेबल मोबाइल चार्जर, जो व्हीकल पर चलते समय हवा से चार्ज करता है। वॉटर हार्वेस्टर, इसके कारण सूख चुके बोरिंग गर्मी में भी पानी दे रहे हैं। व्हीकल ट्रैकिंग एंड एक्सीडेंटल सिस्टम से चोरी गई गाड़ी पकड़ सकते हैं। साथ ही दुर्घटना होने पर रिश्तेदारों को सूचना के साथ लोकेशन मिलत जाती है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

जब घोड़ी पर निकली दुल्हन

बसोली (बूंदी) : गुढ़ाबांध पंचायत के गांव रामी की झोपड़ियां में रविवार को दलित समाज की एक बेटी सुनीता रैगर की घोड़ी पर ठाठ-बाट से बिंदौरी निकाली गई। समाज व गांव में किसी तरह के विरोध की आशंका के चलते परिवार ने हिंडौली एसडीएम से पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। इस पर हिंडौली प्रशासन, दबलाना व बसौली पुलिस जाब्ता तैनात रहा। गाँव के रैगर समाज में पहली बार किसी बेटी को घोड़ी पर बिठाकर बिंदौरी निकाली गई है। सुबह 7.30 से 9 बजे तक बिंदौरी निकाली गई। सुनीता के पिता भागचंद रेगर, गांव के पंच-पटेल हीरालाल का कहना था कि गांव में पीढ़ियों से ऐसा नहीं हुआ कि किसी बेटी को घोड़ी पर बिठाकर बिंदौरी निकाली गई हो। यह बेड़ी अब टूट गई है।

कान फिल्म फेस्टिवल में पहली बार नागपुरी फिल्म फुलमनिया और लाेहरदगा की स्क्रीनिंग 

राँची :  नागपुरी फिल्म फुलमनिया और लोहरदगा की स्क्रीनिंग 15 मई को कान फिल्म फेस्टिवल में हुई। इससे पहले लोहरदगा के रहने वाले लाल विजय की पहली शॉर्ट फिल्म “दी साइलेंट स्टेचू’2016 में कान फिल्म फेस्टिवल में शामिल की गई थी।

फुलमनिया फिल्म के निर्माता लाल विजय शाहदेव मुंबई बेस्ड झारखंड के युवा फिल्मकार हैं। झारखंड फिल्म फेस्टिवल के स्वागत समिति का अध्यक्ष होने के बावजूद उन्होंने पैसे लेकर अवॉर्ड बांटने का आराेप लगाते हुए फेस्टिवल का बहिष्कार किया था। अब उसे कान में मौका मिल रहा है। दाेनाें फिल्माें के निर्माता-निर्देशक लाल विजय 13 मई काे फ्रांस पहुंचेंगे।

डायन प्रथा की क्रूरता को दिखाती है फुलमनिया
फुलमनिया में झारखंड की डायन बिसाही प्रथा काे दिखाया गया है। इसमें महिलाओं के शाेषण और बांझपन के दर्द काे भी इसमें प्रमुखता से पेश किया गया है। रांची की काेमल सिंह मुख्य भूमिका में है। लोहरदगा बेरोजगार युवकों के नक्सली बनने की कहानी पर आधारित है। 20 साल का लड़का मनु सेना में जाना चाहता है, लेकिन एक एजेंट के चक्कर मे फंसकर नक्सली बन जाता है। शर्त होती है कि नक्सली बनकर समर्पण करने के बाद सरकार की पॉलिसी के मुताबिक नौकरी पक्की। लेकिन उसके साथ ऐसा कुछ नहीं होता।

बिना दुल्हन की शादी; 200 मेहमान बने बाराती, 800 लोगों को दावत 

हिम्मतनगर :  27 वर्षीय अजय बारोट का सपना अपने चचेरे भाई की तरह ही शानदार शादी करने का था, लेकिन दिमागी तौर पर कमजोर होने की वजह से उनके लिए कोई रिश्ता नहीं मिल रहा था। अजय जब भी दूसरों की शादी में जाते, उनकी यह इच्छा और तीव्र हो जाती। इस पर वे अपने परिवार से भी बात करते, लेकिन घर के लोगों के पास इसका कोई जवाब नहीं होता था। कई कोशिशों के बाद जब कोई रिश्ता तय नहीं हो सका, तब परिवार ने बिना दुल्हन के ही अजय की इच्छा पूरी करने का निर्णय लिया। शादी से एक दिन पहले मेहंदी और संगीत सेरेमनी हुई। इसमें करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों ने हिस्सा लिया। अगले दिन अजय को सुनहरी शेरवानी, गुलाबी पगड़ी और लाल और सफेद गुलाबों की माला पहनाकर दूल्हा बनाया गया। फिर अजय को घोड़े पर बैठाकर गांव घुमाया गया। इस रस्म में लगभग 200 लोग शामिल हुए। यही नहीं, गुजराती संगीत और ढोल की धुन पर सभी ने डांस भी किया। परिवार ने घर के करीब सामुदायिक भवन में दावत दी। इसमें लगभग 800 लोग पहुंचे।

समाज की परवाह किए बगैर बेटे का सपना पूरा किया

अजय के पिता विष्णु बारोट ने मीडिया से कहा, ‘‘मेरा बेटा शादी की रस्मों को लेकर बहुत उत्सुक था। उसने बहुत कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था। वह चीजों को देर से सीखता। दूसरों की शादी को देखकर वह हमसे अपनी शादी को लेकर सवाल करता, तब हमारे पास कोई जवाब नहीं होता था। वह अपनी शादी का आनंद लेना चाहता था। उसके लिए रिश्ता ढूंढना संभव नहीं था। ऐसे में परिवार से उसकी शादी को लेकर बात की और समारोह आयोजन का फैसला लिया। ताकि उसे लगे कि उसकी शादी हो रही है और उसका सपना पूरा हो रहा है। मैं अब बहुत खुश हूं कि मैंने अपने बेटे के सपने को पूरा किया है, बिना यह सोचे कि समाज क्या कहेगा।’’

शादी सामान्य थी, बस इसमें दुल्हन नहीं थी
अजय के अंकल कमलेश बरोट ने कहा कि उनके भतीजे को संगीत का बहुत शौक है। डांस करने से उसके चेहरे पर चमक आ जाती है। वह गांव की किसी भी शादी को याद नहीं करता था। फरवरी में मेरे बेटे की शादी को देखने के बाद, अजय हमसे अपनी शादी के बारे में पूछने लगा था। जब मेरा भाई अपने बेटे की इच्छा को पूरा करने के लिए बिना दुल्हन वाला आइडिया लेकर आया, तो हम सभी ने उसका साथ देने का फैसला किया।”

बिना दुल्हन की शादी से आहत नहीं हैं हम: परिवार
अजय की छोटी बहन ने कहा, “हमने अपने रिश्तेदारों को शादी का निमंत्रण भेजा और एक पुजारी की उपस्थिति में गुजराती परंपरा के अनुसार सभी रस्में निभाईं। मेरा भाई भाग्यशाली है कि परिवार ने उसकी इच्छा का समर्थन किया। हम सभी उसके लिए खुश हैं। हम बिना दुल्हन की शादी की भावना से आहत नहीं हैं। हम सिर्फ अजय को खुश देखना चाहते थे। क्योंकि वह हमें बहुत प्रिय है।”

अमेजन का कर्मचारियों को नौकरी छोड़ बिजनेस शुरू करने का मौका, पैसे कम्पनी देगी

न्यूयॉर्क : दुनिया की सबसे बड़ी ईकॉमर्स कंपनी अमेजन सामान की डिलीवरी तेज करना चाहती है। इसके प्राइम मेंबर्स को अभी ऑर्डर के दो दिन में डिलीवरी मिलती है। अमेजन इसे एक दिन करना चाहती है। इसके लिए इसने अपने कर्मचारियों को एक ऑफर दिया है- नौकरी छोड़ो और डिलीवरी बिजनेस शुरू करो।
कंपनी खोलने और बिजनेस शुरू करने के लिए अमेजन 7 लाख रुपए भी देगी। जो लोग ऐसा करेंगे, उन्हें मुफ्त में तीन महीने की सैलरी मिलेगी। अभी अमेजन ज्यादातर डिलीवरी पोस्ट ऑफिस और कूरियर के जरिए करती है। अब यह डिलीवरी बिजनेस पर भी अपना कंट्रोल चाहती है। इसीलिए यह स्कीम लेकर आई है। अमेजन का यह ऑफर पार्टटाइम और फुलटाइम दोनों कर्मचारियों के लिए है। अमेजन ने पिछले साल ऐसी ही स्कीम शुरू की थी, लेकिन उसमें सेना से रिटायर लोगों को बिजनेस शुरू करने के लिए कंपनी 7 लाख रुपए देती है। इस स्कीम के तहत अब तक 200 लोगों ने डिलीवरी बिजनेस शुरू किया है।

पर्यावरण को बचाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड को चट्टानों में कैद कर रहे वैज्ञानिक

रेक्याविक : आइसलैंड में वैज्ञानिकों ने फैक्ट्रियों और वाहनों से बढ़ रहे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने का तरीका खोज लिया है। रिसर्चर अब इस खतरनाक ग्रीन हाउस गैस को चट्टानों में बदल रहे हैं। इससे पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की कमी तो हो रही है। साथ ही जीवाश्म ईधन बनाने की प्रक्रिया को भी छोटा बनाने का तरीका निकाल लिया गया है। इस तकनीक को आइसलैंड में कार्बफिक्स प्रोजेक्ट के तहत ईजाद किया गया है। इसमें आइसलैंड यूनिवर्सिटी, फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च और अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने योगदान दिया है। प्रोजेक्ट के निदेशक एडा सिफ अरादोतिर के मुताबिक, नए तरीके में सबसे पहले पर्यावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को भाप का इस्तेमाल कर कंटेनरों में कैद किया जाता है। इसके बाद गैस को कंडनसेशन (संघनन) के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद गैस को पानी में मिलाया जाता है और फिर तरल पदार्थ को पाइप के इस्तेमाल से सैकड़ों किलोमीटर दूर मौजूद चट्टानों में भारी दबाव पर जमा दिया जाता है। यह चट्टानें जमीन के करीब 3300 फीट नीचे स्थित होती हैं। भारी दबाव में गैस के दोबारा ठोस होने की प्रक्रिया शुरू होती है। जैसे ही पानी के साथ मिली CO2 चट्टान में मौजूद कैल्शियम, मैग्निशियम या आयरन के संपर्क में आती है, वैसे ही इसका खनिज में बदलना शुरू हो जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस प्रकिया से महज दो साल में ही सारी CO2 खनिज में बदल जाती है। जबकि प्राकृतिक तौर पर तो चट्टान को CO2 सोखने में हजारों साल लग जाते हैं। जिस पावरप्लांट पर वैज्ञानिकों ने यह रिसर्च की वहां कार्बनडाइऑक्साइड उत्सर्जन करीब 33% तक कम हो गया। हालांकि, दुनिया के बाकी किसी हिस्से में यह प्रयोग सफल रहेगा या नहीं यह वहां की स्थिति पर निर्भर करेगा। इसकी वजह यह है कि एक टन CO2 को चट्टान में भरने के लिए करीब 25 टन पानी लगता है। ग्लेशियर के पास मौजूद होने की वजह से आइसलैंड के लिए यह तकनीक फायदेमंद है। लेकिन बाकी देशों में पानी की कमी एक बड़ा मुद्दा है।

भगवान बुद्ध की स्मृतियाँ सहेजने वाले ऐतिहासिक स्थल

गौतम बुद्ध भारत विश्व को भारत की वह देन हैं जिन्होंने समता और मानवता का मतलब पूरी दुनिया को बताया। भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में उनके द्वारा शुरू किये गये बौद्ध धर्म को अपनाया। महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़े ऐसी ही ऐतिहासिक जगहों को जानिए

कपिलवस्तु – कपिलवस्तु गौतम बुद्ध के पिता राजा शुद्धोधन के राज्य शाक्य गणराज्य (शाक्य महाजनपद) की राजधानी थी. अब कपिलवस्तु दक्षिण नेपाल में एक जिला है। गृह त्याग से पहले गौतम बुद्ध यहीं अपने पिता के महल में निवास करते थे।
लुम्बिनी –गौतम बुद्ध का जन्म स्थान. यह नेपाल में रुपनदेही (Rupandehi) जिले में है। लुम्बिनी वन नेपाल के तराई क्षेत्र में कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से पश्चिम में 8 मील दूर रुक्मिनदेई नामक स्थान के पास स्थित है। दक्षिण मध्य नेपाल में स्थित लुंबिनी में उस स्थल पर महाराज अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व बुद्ध के जन्म की स्मृति में एक स्तम्भ बनवाया था।
देवदह – गौतम बुद्ध का ननिहाल देवदह में था. वर्तमान में यह रुपनदेही जिले में एक नगरपालिका है।

कपिलवस्तु

बोधगया – बोधगया भारत में बिहार राज्य के गया जिले में स्थित है। वैशाखी पूर्णिमा के दिन सिद्धार्थ वटवृक्ष के नीचे ध्यानस्थ थे। समीपवर्ती गाँव की एक महिला सुजाता को पुत्र हुआ. उसने बेटे के लिए एक वटवृक्ष से मनौती की थी। वह मनौती पूरी करने के लिए सोने के थाल में गाय के दूध की खीर भरकर पहुँची। सिद्धार्थ वहां बैठे ध्यान कर रहे थे. उसे लगा कि ‘वृक्षदेवता ही मानो पूजा लेने के लिए शरीर धारण करके बैठे हैं।’ सुजाता ने बड़े आदर से सिद्धार्थ को खीर भेंट की और कहा – “जैसे मेरी मनोकामना पूरी हुई, उसी तरह आपकी भी हो।” उसी रात को ध्यान लगाने पर सिद्धार्थ की साधना सफल हुई। उसे सच्चा बोध हुआ. तभी से सिद्धार्थ बुद्ध कहलाए। जिस पीपल के वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को बोध मिला वह बोधिवृक्ष कहलाया और गया का समीपवर्ती वह स्थान बोधगया।
सारनाथ – सारनाथ भारत में उत्तरप्रदेश राज्य के वाराणसी जिले में है। आषाढ़ की पूर्णिमा को गौतम बुद्ध काशी के पास मृगदाव (वर्तमान में सारनाथ) पहुँचे। वहीं पर उन्होंने सबसे पहला धर्मोपदेश दिया. और पाँच मित्रों को अपना अनुयायी बनाया. और उन्हें धर्म के प्रचार करने के लिये भेज दिया।
कुशीनगर – कुशीनगर भारत में उत्तरप्रदेश राज्य के कुशीनगर जिले में ही एक नगर है. यहाँ गौतमबुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था।
श्रावस्ती – श्रावस्ती राप्ती नदी के दक्षिणी किनारे पर प्राचीनकाल में भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक था. यह गोंडा-बहराइच जिलों की सीमा पर स्थित है। यहाँ प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल है। आज के सहेत-महेत गाँव ही श्रावस्ती है। अब “सहेत” बहराइच ज़िले में और “महेत” गोंडा ज़िले में पड़ता है। प्राचीन काल में यह कौशल देश की दूसरी राजधानी थी। भगवान राम के पुत्र लव ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। यहाँ बुद्ध ने अपना सबसे अधिक तपस्वी जीवन बिताया था। बुद्ध ने इस प्राचीन शहर को 25 बरसात की ऋतुओं में अपना समय दिया. जिसमें अधिकांश समय जेतवन मठ को दिया। हजारों बौद्ध हर साल इस शहर में बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आते हैं। बौद्ध धर्म के विभिन्न संप्रदाय आधुनिक श्रावस्ती में मठों का निर्माण करने के लिए आते हैं। पूरी दुनिया में बौद्धों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। श्रावस्ती उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला भी है, जिसका मुख्यालय भींगा है।

श्रावस्ती

साँची – साँची मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में है। साँची तीसरी शताब्दी ईसवी पूर्व में निर्मित स्तूप के लिए प्रसिद्ध है। बौद्धों के आलावा अन्य धर्मों के सैंकड़ो हजार लोग हर साल साँची का दौरा करते हैं। साँची का महान स्तूप भारत में सबसे पुरानी वास्तु संरचना है। साँची का स्तूप बुद्ध के अनुयायी सम्राट अशोक के शासनकाल में बनाया गया था। यह बौद्धों के लिए आठ पवित्रतम स्थानों में से एक है। 1989 में यूनेस्को ने इस स्मारक को विश्व धरोहर घोषित किया है।
साँची का स्तूप – बौद्धनाथ स्तूप पूरी दुनिया में बौद्धों के लिए पूजा की एक पवित्र स्थान है। नेपाल में काठमांडू शहर से 20 किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्तूप 36 मीटर ऊंचा है। बौद्धनाथ स्तूप दुनिया के सबसे ऊंचे बौद्ध स्तूपों में से एक है। इस स्तूप का निर्माण किया जा रहा था, तब इलाके में भयंकर अकाल पड़ा था. इसलिए पानी न मिलने के कारण ओस की बूंदों से इसका निर्माण किया गया। बौद्धनाथ बौद्धों के लिए सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यह नेपाल में पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

बगान – बगान म्यांमार में इरावदी नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन नगर है। यह नगर 9 वीं शताब्दी से लेकर 13 वीं शताब्दी तक पुगं राज्य की राजधानी था। 11 वीं से 13 वीं शताब्दी के समय जब यह राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर था, तब यहाँ 10 हजार से अधिक बौद्ध मन्दिर, पगोडा और मठ निर्मित किये गये थे। इनमें से 2200 मंदिर अब भी अच्छी स्थिति में विद्यमान हैं. बौद्ध मंदिरों को समर्पित दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्र है।

साँची

बोरोबुदुर – बोरोबुदुर सबसे प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थानों में से एक है। यह इंडोनेशिया में जावा द्वीप पर स्थित है। दुनिया में कुछ सबसे बड़े बौद्ध मंदिरों में से है। 20 लाख से अधिक पत्थर के ब्लॉकों निर्मित इन मंदिरों को पूरा करने में 75 साल लगे। इसका मूल आधार वर्गाकार है जिसकी प्रत्येक भुजा 118 मीटर (387 फीट) है। इसमें नौ मंजिले हैं जिनमें नीचली छः वर्गाकार हैं तथा उपरी तीन वृत्ताकार हैं। उपरी मंजिल पर मध्य में एक बड़े स्तूप के चारों ओर बहत्तर छोटे स्तूप हैं। प्रत्येक स्तूप घण्टी के आकार का है, जो कई सजावटी छिद्रों युक्त है. बुद्ध की मूर्तियाँ इन छिद्रयुक्त सहपात्रों के अन्दर स्थापित हैं। स्मारक में सीढ़ियों की विस्तृत व्यवस्था है। गलियारों में 1460 कथा उच्चावचों और स्तम्भवेष्टनों से तीर्थयात्रियों का मार्गदर्शन होता है। बोरोबुदुर विश्व में बौद्ध कला का सबसे विशाल और स्थापत्य कलाओं से पूर्ण स्मारक है।
8 वीं सदी में निर्मित मंदिरों को रहस्यमय तरीके से 14 वीं शताब्दी में छोड़ दिया गया। वैज्ञानिकों का मानना है एक बड़े ज्वालामुखी विस्फोट से ये मंदिर ज्वालामुखी राख के नीचे दब गये थे. जिससे यहाँ सबकुछ नाश हो गया था। उक्त तथ्य 2010 व 2014 में जावा में हुए जवालामुखी विस्फोटो से भी प्रामाणिक लगता है। अक्टूबर और नवम्बर 2010 में मेरापी पर्वत में भारी ज्वालामुखी विस्फोट से बोरोबुदुर बहुत प्रभावित हुआ। मंदिर परिसर से लगभग 28 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित ज्वालामुखी की राख मंदिर परिसर में भी गिरी। 3 से 5 नवम्बर तक ज्वालामुखी विस्फोट के समय मंदिर की मूर्तियों पर 2.5 सेंटीमीटर की राख की परत चढ़ गयी। इससे आस-पास के पेड़-पौधों को भी नुकसान हु।  विशेषज्ञों ने इस ऐतिहासिक स्थल के नुकसान की आशंका व्यक्त की। 5 से 9 नवम्बर तक मंदिर परिसर को राख की सफाई करने के लिए बन्द रखान पड़ा।
यूनेस्को ने 2010 में मेरापी पर्वत ज्वालामुखी विस्फोट के बाद बोरोबुदुर के पुनःस्थापन के लिए यूएस $30 लाख दिये। 55,000 से अधिक पत्थरों की सिल्लियाँ बारिस के कारण किचड़ से बन्द हुई जल निकासी प्रणाली की सफ़ाई के लिए हटायी गयी। पुनः स्थापन का कार्य नवम्बर 2011 तक समाप्त हुआ13 फरवरी 2014 में योगकर्ता से 200 किलोमीटर पूर्व में स्थित पूर्वी जावा में केलुड में हुये ज्वालामुखी विस्फोट से निकली ज्वालामुखी राख से प्रभावित होने के बाद बोरोबुदुर पर्यटन यात्रियों के लिए एक बार फिर बन्द करना पड़ा था।
स्वयंभूनाथ – स्वयंभूनाथ भारत के बाहर बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यह नेपाल की काठमांडू घाटी में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित प्राचीन धार्मिक परिसर में है। इस परिसर का निर्माण 5 वीं शताब्दी में किया किया गया था. यहाँ एक पुस्तकालय और एक तिब्बती मठ भी है। स्वयंभूनाथ नेपाल में पूजा लिए बौधों का सबसे पुराना स्थान है।

बोधगया

वैशाली – ईसा पूर्व छठी सदी के उत्तरी और मध्य भारत में विकसित हुए 16 महाजनपदों में वैशाली का स्थान अति महत्त्वपूर्ण था। विश्व को सर्वप्रथम गणतंत्र (Republic) का ज्ञान कराने वाला स्थाजन वैशाली ही है। आज वैश्विक स्तर पर जिस लोकतंत्र को अपनाया जा रहा है वह यहाँ के लिच्छवी शासकों की ही देन है।
वैशाली भारत के बिहार का एक जिला है. जिसका मुख्यालय हाजीपुर है। इसी जिले में वैशाली गाँव है। बोध प्राप्ति के पाँच वर्ष बाद गौतम बुद्ध का यहाँ आये थे। यहाँ वैशाली की प्रसिद्ध नगरवधू आम्रपाली सहित चौरासी हजार नागरिक संघ में शामिल हुए। वैशाली के समीप कोल्हुआ में महात्मा बुद्ध ने अपना अंतिम सम्बोधन दिया था। इसकी याद में महान मौर्य महान सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दि ईसा पूर्व सिंह स्तम्भ का निर्माण करवाया था। महात्मा बुद्ध के महा परिनिर्वाण के लगभग 100 वर्ष बाद वैशाली में दूसरे बौद्ध परिषद का आयोजन किया गया था। इस आयोजन की याद में दो बौद्ध स्तूप बनवाये गये. वैशाली के समीप ही एक विशाल बौद्ध मठ है, जिसमें महात्मा बुद्ध उपदेश दिया करते थे. बुद्ध के सबसे प्रिय शिष्य आनंद की पवित्र अस्थियाँ हाजीपुर (पुराना नाम – उच्चकला) के पास एक स्तूप में रखी गयी थी. पाँचवी तथा छठी सदी के दौरान प्रसिद्ध चीनी यात्री फाहियान तथा ह्वेनसांग ने वैशाली का भ्रमण कर यहाँ की भव्यता वर्णन किया है।
स्तूप : स्तूप शब्द संस्कृत और पालि: से लिया गया है जिसका शाब्दिक अर्थ “ढेर” होता है। अर्थात एक गोल टीले के आकार की संरचना जिसका प्रयोग पवित्र बौद्ध अवशेषों को रखने के लिए किया जाता है. कभी यह बौद्ध प्रार्थना स्थल होते थे। इसी स्तूप को चैत्य भी कहा जाता है.
पगोडा : पगोडा शब्द का प्रयोग नेपाल, भारत, वर्मा, इंडोनेशिया, थाइलैंड, चीन, जापान एवं अन्य पूर्वी देशों में भगवान् बुद्ध अथवा किसी संत के अवशेषों पर निर्मित स्तंभाकृति मंदिरों के लिये किया जाता है। इन्हें स्तूप भी कहते हैं।

(साभार – सही समय डॉट कॉम)

मुम्बई ने चेन्नई को 1 रन से हराकर चौथी बार जीता आईपीएल -2019

हैदराबाद : मुम्बई इंडियंस ने आईपीएल 2019 के रोमांचक फाइनल मुकाबले में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी चेन्नई सुपर किंग्स को 1 रन से हराकर चौथी बार खिताब अपने नाम किया। हैदराबाद स्थित राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेले गए मैच में मुम्बई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजों ने रोहित के फैसले को गलत साबित करते हुए मुंबई इंडियंस को 20 ओवरों में 8 विकेट पर 149 रन के स्कोर पर रोक दिया। चेन्नई के लिए आखिरी ओवर तक सब सही जा रहा था लेकिन शेन वाटसन (80) के रन आउट होते ही बाजी पलट गई। आखिरी गेंद पर चेन्नई को जीत के लिए 2 रन चाहिए थे। लसिथ मलिंगा ने इसी गेंद पर शार्दुल ठाकुर को पगबाधा आउट कर मुम्बई के खाते में चौथा आईपीएल खिताब डाल दिया। चेन्नई 20 ओवरों में 7 विकेट के पर 148 रन ही बना सकी।
शेन वाटसन ने 59 गेंदों पर 8 चौके और चार 6 मारे। वाटसन को इस मैच में तीन जीवनदान भी मिले, लेकिन वह फिर भी चेन्नई को जीत नहीं दिला पाए। इसी के साथ मुम्बई ने एक बार फिर चेन्नई को फाइनल जीतने से रोक दिया। यह चौथी बार था तब चेन्नई और मुम्बई फाइनल खेल रही थीं जिसमें से तीन बार मुंबई को जीत मिली है। 150 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई ने तेज शुरुआत की लेकिन मुम्बई ने तुरंत वापसी करते हुए उसे परेशान किया। लगातार बड़े शॉट मार रहे फैफ डु प्लेसिस (26) को क्रुणाल पंड्या ने क्विंटन डि कॉक के हाथों स्टम्पिंग कराया। वह 33 के कुल स्कोर पर आउट हुए। वाटसन और सुरेश रैना (8) ने टीम का स्कोर 70 तक पहुंचाया। रैना इसी स्कोर पर आउट हो गए। इसके बाद अंबाती रायुडू (1) जसप्रीत बुमराह का शिकार बने तो महेंद्र सिंह धौनी (2) को ईशान किशन ने सीधे थ्रो पर रन आउट कर पवेलियन भेजा। चेन्नई का स्कोर 4 विकेट पर 82 रन था। यहाँ से वाटसन ने एक छोर संभाले रखा। उन्होंने मलिंगा के 16 और क्रुणाल के 18वें ओवर में 20-20 रन बटोरते हुए चेन्नई को मैच में बनाए रखा। वाटसन का साथ दे रहे ड्वेन ब्रावो (15) 19वें ओवर में आउट हो गए। आखिरी ओवर में चेन्नई को 9 रन की जरूरत थी। वाटसन के रहते चेन्नई की जीत की उम्मीदें बरकरार थीं। लेकिन चौथी गेंद पर दो रन लेने के चक्कर में वाटसन रन आउट हो गए। अगली दो गेंदों पर चार रन चाहिए थे। ठाकुर ने पांचवीं गेंद पर 2 रन लिए, लेकिन आखिरी गेंद पर पगबाधा आउट हो गए। जसप्रीत बुमराह रहे ‘मैच ऑफ द मैच’ चुने गए।
खिताबी मुकाबले में दोनों टीमों के खिलाड़ी
चेन्नई सुपर किंग्स: फैफ डु प्लेसिस, शेन वाटसन, सुरेश रैना, अंबाती रायुडू, एमएस धौनी (विकेटकीपर/कप्तान), ड्वेन ब्रावो, रवींद्र जडेजा, हरभजन सिंह, दीपक चाहर, शार्दुल ठाकुर, इमरान ताहिर।
मुम्बई इंडियंस: रोहित शर्मा (कप्तान), क्विंटन डि कॉक (विकेटकीपर), सूर्य कुमार यादव, ईशान किशन, क्रुणाल पंड्या, हार्दिक पंड्या, कीरन पोलार्ड, राहुल चाहर, मिशेल मैक्लेनाघन, जसप्रीत बुमराह, लसिथ मलिंगा।