Sunday, July 5, 2026
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मॉनसून में रहिए मस्त, दिखें जबरदस्त

बारिश के दिन हर किसी को पसंद आते हैं क्योंकि ये वातावरण में थोड़ी ठंडक लेकर आते हैं। लेकिन इसी के साथ इस मौसम में पुरुषों को तकलीफ आती है कि किस तरह से खुद के लुक को स्टाइलिश बनाया जाए।  पुरुषों के लिए जरूरी होता है मौसम के अनुसार अपना ड्रेसिंस और स्टाइल चेंज करना जिससे वे खुद का कूल लुक दिखा सकें। आप अपने बैग में छोटा तौलिया या गमछा रख सकते हैं जो कि आपके काम आ सकता है। हम पुरुषों के लिए लेकर आए हैं कुछ टिप्स जो मानसून के दिनों में उनको स्टाइलिश बनाए। तो आइये जानते हैं इन टिप्स के बारे में –
* ट्रेंडी एक्सेसरीज़ – वॉलेट्स में लेदर फैब्रिक वाले पर्स का चुनाव न करें। इस दौरान प्लास्टिक की लेयर चढ़े वॉलेट्स का इस्तेमाल करें। साथ ही वॉटरप्रूफ वॉच, बैग के लिए रेन कवर्स या ब्रीफ केस के लिए रेन कवर्स यूज़ करें। इससे आप बारिश में होने वाली परेशानियों से बचे रहेंगे और स्मार्ट भी दिखेंगे।
* फैब्रिक – इस सीज़न ब्राइट और बोल्ड कलर को सिर्फ लड़कियां ही नहीं आप भी ट्राई कर सकते हैं। मानसून सीज़न में मोटे फैब्रिक को बाय कहें और चुनें हल्के रंग। बहुत ज्यादा गहरे रंग और एक ही रंग के कपड़े पहनने की बजाय इस मौसम में आप मल्टीकलर शर्ट या स्टाइलिश कोट्स वाली टी-शर्ट चुन सकते हैं। साथ ही पैंट या जींस को मोड़कर पहनें।

* रबर सोल फुटवियर – मौसम के अनुसार ही फुटवियर का चुनाव करें। इस दौरान लेदर शूज़ न पहनें क्योंकि लेदर शूज बारिश में भीगने के बाद खराब दिखेंगे और आपके पैर को नुकसान भी पहुंचाएंगें। बारिश के मौसम में रबर सोल फुटवेयर का इस्तेमाल सबसे ठीक होता है। रबर लोफर्स भी आज़माए जा सकते हैं, बशर्ते इसकी ऑफिस में मनाही न हो। गीले मोजे व अंडरगारमेंट्स ना पहनें।

* वॉटर रेपैलेंट जींस – इस सीज़न वॉटर रेपैलेंट जींस का चुनाव करें क्योंकि बारिश में भीगने पर भी इसमें रखें वॉलेट और मोबाइल फोन बच जाते हैं। इसे स्त्री व पुरुष दोनों के लिए ही डिज़ाइन किया गया है।

* वॉटरप्रूफ आउटरवियर – स्टाइलिश और स्मार्ट दिखने के लिए मानसून सीज़न में बाज़ार में आपको खूबसूरत वॉटर रेस्सिटेंट लॉन्ग ओवरकोट्स मौज़ूद मिल जाएंगे। इनमें हल्के रंग के स्टाइलिश ओवरकोट्स को पहनकर वाकई आप स्मार्ट दिखेंगे इसलिए इन्हें अपनी वॉर्डरोब का हिस्सा बनाएं।

(साभार – हिन्दी लाइफ बेरी डॉट कॉम)

बारिश में सलामत रखें इन्द्रधनुषी फैशन

मानसून कदम रख चुका है। रिमझिम बारिश ढेर सारी खुशियाँ लाती है तो कपड़े खराब होने का टेंशन भी लाती है। बहुत हल्के रंग के कपड़े पहन नहीं सकतेे और कही जाना भी है तो सलीके से ही जाना है तो इतना सोचने की जरूरत तो नहीं है क्योंकि जरा सी समझदारी आपके कपड़ों की खूबसूरती बचा सकती है और आपको भी स्टाइलिश रख सकती है, जरूरत बस इन बातों का ख्याल रखने की है –

डेनिम न पहनें –  डेनिम को सूखने में बहुत वक्त लगता है। लंबे समय तक गीला डेनिम पहनने से त्वचा की समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए डेनिम जैकेट्स, शॉर्ट्स, जींस पहनना बंद कर दें। इनकी बजाय ढीले फिट वाले कॉटन के बॉटम्स पहनना शुरू करें। जैसे- पलाजो, मिडी स्कर्ट्स, क्यूलॉट्स, वाइड लेग ट्राउजर्स और स्लिम पैंट्स। इस सीज़न वॉटर रेपैलेंट जींस का भी चुनाव कर सकती हैं क्योंकि बारिश में भीगने पर भी इसमें रखें वॉलेट और मोबाइल फोन बच जाते हैं। इसे स्त्री व पुरुष दोनों के लिए ही डिज़ाइन किया गया है।
  रेन बूट्स या सैंडल पहनें – इस सीजन में आप हाई हील्स सैंडल्स न पहनें, यही बेहतर है। इसकी जगह आप स्टाइलिश फ्लिप फ्लॉप सैंडल या स्टाइलिश रेनी शूज पहन सकतीं हैं। वैसे तो मानसून में स्लिपर्स ज्यादा पहने जातें है, लेकिन अगर आप कुछ स्पेशल ट्राई करना चाहती हैं तो गमबूट और मैकक्वीन हील्स पहन सकती हैं। ये आरामदायक तो होते ही हैं साथ ही शॉर्ट ड्रेसेस के साथ स्टाइलिश भी लगते हैं। रंगीन फुटवियर्स के लिए यह मौसम एकदम बेस्ट है, साथ ही जितना हो सके ब्लैक या ब्राउन लेदर बूट्स से बचने की कोशिश करें . इसके अलावा रेन बूट्स भी पहन सकती हैं। ये आपके लुक को पूरा करने के साथ-साथ आपके पैरों को सही रखें।
 ढीले कपड़े पहनें – गीले होने पर टाइट फिट आउटफिट्स बॉडी पर चिपकते हैं। इस मौसम में कॉटन, खादी या सिंथेटिक मटेरियल के ढीले कपड़े पहने जा सकते हैं। फुल स्लीव की जगह हाफ स्लीव या स्लीवलेस परिधान चुनिए। ऑफ शोल्डर पहना जा सकता है। लिनन या कॉटन के डंग्रीज़ और जंपसूट्स पहने जा सकते हैं। इसके अलावा आप ट्रेडिशनल लुक के प्‍लाजो भी आजमा सकती है। इन द‍िनों स्‍कर्ट भी फैशन हैं ये आपके स्‍टाइल‍िश लुक देने के साथ ही आपको बार‍िश के इस सीजन में कम्‍फर्टटेबल भी महसूस कराएंगे। आजकल स्कर्ट का लुक देने वाले पलाजो भी बाजार में हैं।
बाल कसकर न बाँधें – ढीली चोटी या खुले बाल, आपकी बारिश को खूबसूरत बना सकते हैं। शॉर्ट हेयर कट लिया जा सकता है क्योंकि मॉनसून के लिए ये बेहद प्रैक्टिल स्टाइल होगा। लेयर वाला हेवी मेकअप अवॉइड करें। वॉटरप्रूफ प्रोडक्ट्स के साथ लाइट मेकअप किया जा सकता है।
भारी मेकअप और जेवरों से बनायें दूरी – मिनिमल और म्यूटेड एसेसरीज इस्तेमाल करें किसी भी लुक में मिनिमल और म्यूटेड एसेसरीज शामिल की जा सकती हैं। पानी सोखने वाले टाइट फुटवियर पहनने से बचिए। इससे बैक्टीरियल ग्रोथ की संभावना रहती है। न्यूड शेड ग्लैडिएटर सैंडल्स, ओपन सैंडल्स, बैलरीना, स्लिप-ऑन्स पहने जा सकते हैं। मेटल एसेसरीज पहनना बंद कर सकते हैं क्योंकि गीले होने पर इनसे स्किन एलर्जी हो सकती है। ब्राइट स्कार्फ्स पहने जा सकते हैं। बारिश के मौसम में खुले टोट बैग्स कैरी करने से भी बचिए। पॉलीस्टर इनर लाइनिंग और जिपर वाले बैग्स ही कैरी करें। ब्राइट रंग की छतरियां ट्रेंडी हैं। ट्रांसपेरेंट और प्रिंटेड छतरियां भी खूब देखने में आ रही हैं।

 

जानिए रथयात्रा के तीनों रथों की कहानी

जगन्नाथ भगवान हिंदु धर्म के चार धामों में जगन्नाथ पुरी का बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु रामेश्वरम में स्नान, द्वारका में शयन, बद्रीनाथ में ध्यान और पुरी में भोजन करते हैं। भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए बिना चारों धामों की यात्रा अधूरी मानी जाती है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा प्रारंभ होती है। ऐसा कहा जाता है कि रथ यात्रा के जरिए भगवान मौसी के घर जनकपुर जाते हैं। रथ यात्रा में बलरामजी के रथ को ‘तालध्वज ’ कहते हैं। देवी सुभद्रा के रथ को ‘दर्पदलन’, जबकि भगवान जगन्नाथ के रथ को ‘नंदीघोष’ या ‘गरुड़ध्वज ’ कहा जाता है। यह सबसे पीछे रहता है। इन तीनों रथों की उंचाई, पहिए और आकृति अलग-अलग होती हैं।

ये है तीनों रथों की खासियत
1. भगवान जगन्नाथ का रथ
इस रथ को गरुड़ध्वज, कपिध्वज या नंदीघोष कहा जाता है। इसमें 16 पहिए होते हैं व ऊंचाई साढ़े 13 मीटर तक होती है। लाल और पीले रंग का लगभग 1100 मीटर कपड़ा रथ को ढंकने के लिए उपयोग में लाया जाता है। इस रथ को बनाने में 832 लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है।
इस रथ के सारथी का नाम दारुक है। इस रथ के रक्षक भगवान विष्णु के वाहन पक्षीराज गरुड़ और नृसिंह हैं। रथ पर लगे झंडे को यानी ध्वजा का नाम त्रिलोक्यमोहिनी है। रथ में जय और विजय नाम के दो द्वारपाल होते हैं।
इस रथ के घोड़ों का नाम शंख, बलाहक, श्वेत एवं हरिदाश्व है, जिनका रंग सफेद होता है। इसके अलावा भगवान जगन्नाथ के रथ की रक्षा के लिए शंख और सुदर्शन स्तंभ भी होता है। रथ को जिस रस्सी से खींचा जाता है, वह शंखचूड़ (एक प्रकार का नाग) नाम से जानी जाती है।
इस रथ में भगवान जगन्नाथ के अलावा अन्य सहायक देवता के रूप में वराह, गोवर्धन, कृष्ण, नृसिंह, राम, नारायण, त्रिविक्रम, हनुमान और रूद्र भी होते हैं। भगवान जगन्नाथ के रथ के साथ 8 ऋषि भी चलते हैं जिनके नाम नारद, देवल, व्यास, शुक, पाराशर, विशिष्ठ, विश्वामित्र और रूद्र हैं।
 बलराम जी का रथ
इस रथ का नाम तालध्वज है। यह रथ 13.2 मीटर ऊंचा व 14 पहियों का होता है, जो लाल, हरे रंग के कपड़े व लकड़ी के 763 टुकड़ों से बना होता है। इस रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मताली होते हैं। इनके रथ की ध्वजा का नाम उनानी हैं।
इस रथ में काले रंग के 4 घोड़े लगे होते हैं। जिनका नाम त्रिब्रा, घोरा, दीर्घशर्मा व स्वर्णनवा है। इस रथ में नंद और सुनंद नाम के 2 द्वारपाल होते हैं। रथ की रक्षा के लिए हल और मुसल भी होते हैं। इनके रथ की शक्तियों के नाम ब्रह्म और शिवा है। इनके रथ को खिंचने के लिए वासुकी नाग के रुप में रस्सी होती है।
इस रथ में बलराम जी के अलावा अन्य सहायक देवता के रूप में गणेश, कार्तिकेय, सर्वमंगल, प्रलंबरी, हलायुध, मृत्युंजय, नटवर, मुक्तेश्वर और शेषदेव होते हैं। बलराम जी के रथ के साथ अंगिरा, पौलस्त्य, पुलह, असस्ति, मुद्गल, अत्रेय और कश्यप ऋषि भी चलते हैं।

देवी सुभद्रा का रथ
सुभद्रा के रथ का नाम देवदलन है। इसके अन्य नाम दर्पदलन और पद्मध्वज भी है। 12.9 मीटर ऊंचे 12 पहिए के इस रथ में लाल, काले कपड़े के साथ लकड़ी के 593 टुकड़ों का इस्तेमाल होता है।
इस रथ के रक्षक जयदुर्गा और सारथी अर्जुन होते हैं। इस रथ की द्वारपाल गंगा और यमुना होती हैं। इनके रथ की ध्वजा का नाम नदंबिका है। इनके रथ की रक्षा के लिए पद्म और कल्हर के रुप में शस्त्र होते हैं।
इस रथ की शक्तियों के नाम चक्र और भुवनेश्वरी है। सुभद्रा जी के रथ में लाल रंग के 4 घोड़े होते हैं। जिनके नाम रोचिक, मोचिक, जिता व अपराजिता है। इस रथ को खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचुड़ा कहते हैं।
सुभद्रा जी के इनके अलावा रथ में सहायक देवियों के रुप में चंडी, चामुंडा, उग्रतारा, वनदुर्गा, वराही, श्यामा, काली, मंगला और विमला नाम की देवियां होती हैं। इनके रथ के साथ भृगु, सुपर्व, व्रज, श्रृंगी, ध्रुव और उलूक ऋषि चलते हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

कोलकाता की रूपसा बनीं सुपर डांसर की विनर

मुम्बई : बच्चों के डांस रियलटी शो सुपर डांसर चैप्टर-3 का ग्रैंड फिनाले 23 जून को हुआ जिसमें कोलकाता की 6 साल की रूपसा बतबयाल ने जीत हासिल की। रूपसा को 15 लाख रुपए का चेक ईनाम के तौर पर मिला। साथ ही उनके ट्रेनर निशांत को भी 5 लाख रुपए का चेक दिया गया। शो के सभी फाइनलिस्ट्स को भी एक-एक लाख रुपए दिए गए। रूपसा का मुकाबला मुंबई के तेजस वर्मा से था। वहीं फाइनलिस्ट के तौर पर गौरव सरवन, सक्षम शर्मा और जयश्री गोगोई भी रूपसा के प्रतियोगी थे।ग्रैंड फिनाले में सभी प्रतिभागियों ने अपने गुरू के साथ परफॉर्म किया था। शिल्पा ने ग्रैंड फिनाले के लिए पहली बार टीवी पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। वे बतौर जज अनुराग बासु और गीता कपूर के साथ भी मौजूद रहीं। रूपसा की परफॉर्मेन्स के बाद शिल्पा ने रूपसा के पैर भी चूम लिए।

मोटर व्हीकल संशोधन बिल को मंजूरी, 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव

नयी दिल्ली : केंद्रीय कैबिनेट ने मोटर व्हीकल (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी। इसमें नियम तोड़ने वालों पर 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। इमरजेंसी वाहनों को रास्ता नहीं देने और योग्य नहीं होने के बावजूद ड्राइविंग करते पाए जाने पर 10,000 रुपये तक जुर्माना लगेगा। ओवर स्पीड पर 1,000 से 2,000 रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव है। ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों का उल्लंघन करने वाले कैब चालकों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। ओवरलोडिंग पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इस बिल को संसद के मौजूदा सत्र में पारित करवाने की कोशिश की जाएगी। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
नाबालिग चालकों के मामले में अभिभावकों को दोषी माना जाएगा
बिना इंश्योरेंस ड्राइविंग करते पाए जाने पर 2,000 रुपये और हेलमेट नहीं लगाने वालों पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। साथ ही 3 महीने के लिए लाइसेंस भी निलंबित किया जाएगा। नाबालिगों द्वारा नियम तोड़ने पर वाहन मालिक और अभिभावकों को दोषी मानते हुए व्हीकल का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा। 3 साल की जेल के साथ 25,000 रुपये के जुर्माने का भी प्रस्ताव है। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। अभी 100 रुपये का जुर्माना लगता है। संबंधित अधिकारी का आदेश नहीं मानने पर 500 रुपए की बजाय 2000 रुपये फाइन लगेगा।

बंद नहीं होंगे बीएसएनएल, एमटीएनएल, उबारने की तैयारी

नयी दिल्ली : सरकार ने स्पष्ट किया कि बीएसएनएल और एमटीएनएल को बंद करने की योजना नहीं है बल्कि उन्हें उबारने की तैयारी की जा रही है। दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने लोकसभा में यह जानकारी दी।
बीएसएनएल, एमटीएनएल ने सरकार से मदद मांगी थी। प्रसाद ने कहा कि बीएसएनएल और एमटीएनएल के रिवाइवल प्लान के लिए आईआईएम अहमदाबाद और डेलॉइट की मदद भी ली गई थी। उनकी सिफारिशों के आधार पर विस्तृत योजना बनाई जा रही है। घाटे से जूझ रही दोनों टेलीकॉम कंपनियों ने दूरसंचार विभाग से मदद मांगी थी। प्रसाद ने बताया कि बीएसएनएल की कुल आय का 75.06% और एमटीएनएल की आय का 87.15% कर्मचारियों पर खर्च हो जाता है। जबकि, निजी कंपनियों में यह 2.9% से 5% तक है। प्रसाद ने कहा कि पिछले 5-6 महीने में एमटीएनएल के कर्मचारियों के वेतन में कुछ दिन की देरी हुई थी। लेकिन, फिलहाल किसी का वेतन बकाया नहीं है। बीएसएनएल के कर्मचारियों को लगातार वेतन मिल रहा है। फरवरी की सैलरी में थोड़ी देरी हुई थी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस साल 31 मार्च तक बीएसएनएल में कुल 1 लाख 63 हजार 902 कर्मचारी थे। इस दौरान एमटीएनएल के कर्मचारियों की संख्या 21,679 थी।

शार्क अटैक से 5 गुना ज्यादा जानें सेल्फी की वजह से गईं, भारत में 159 लोगों की मौत

लगभग हर स्मार्टफोन यूजर सेल्फी का दिवाना है। सबसे अलग सेल्फी लेने की सनक में लोग खतरनाक जगाहों पर फोटोग्राफी करने से भी पीछे नहीं हटते, जिस कारण कई लोग जान गवां देते हैं। इंडिया जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर की रिपोर्ट के अनुसार साल 2011 से 2017 तक 259 लोगों सेल्फी लेने के कारण अपनी जान गवां बैठे।
भारत में हुई सबसे ज्यादा मौतें…
मौतों का यह आँकड़ा साल दर साल बढ़ाता गया वो भी तब जब फोन से परफेक्ट शॉट लेने थोड़ा मुश्किल था, ऐसे में सेल्फी स्टिक के आने से हर कोई परफेक्ट फोटो लेने के लिए जोखिम उठाने लगा। अक्टूबर 2011 से नवम्बर 2017 के बीच दुनियाभर में लगभग 259 लोगों की मौत सेल्फी लेने के दौरान हुई। जबकि इसी समय के बीच शार्क के हमले से मरने वालों की संख्या केवल 50 थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक सेल्फी लेने में महिलाएं सबसे आगे है जबकि युवा पुरुष जोखिम लेने में नहीं हिचकिचाते। यह सभी मिलकर सेल्फी से होने वाली मौतों को तीन हिस्सों में बांटते हैं जिसमें डूबने, दुर्घटनाग्रस्त होने और सेल्फी के दौरान गिरना शामिल है।130 करोड़ जानसंख्या वाले भारत में लगभग 80 करोड़ लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में खूद की फोटो लेते समय मरने वालों की संख्या में 159 लोगों के साथ भारत सबसे आगे हैं। यह आँकड़ा पूरी दुनिया में मरने वालों में आधे से ज्यादा है।
इसी समस्या के निपटने के लिए भारत के कई खतरनाक हिस्सों को नो-सेल्फी जोन में तब्दील कर दिया गया है। इसमें मुंबई के 16 स्पॉट शामिल है। सेल्फी के दौरान होने वाले हदसों में भारत के बाद रशिया का नाम आता है जहां 2011 से 2017 के बीच 16 लोगों की जान गई जबकि यूएस और पाकिस्तान में 14 लोगों की जान गयी। रशिया में सेल्फी लेते समय ज्यादातर लोगों की जान ब्रिज या ऊंची बिल्डिंग से गिरने से गई या तो खूद को गोली मरने और लैंड माइन को उठाते हुए सेल्फी लेते समय गयी।

अफसर सारा ने महिलाओं के लिए बनायी गाना और सुरक्षा टीम

भुवनेश्वर : ‘झिअ-बोहु तुम अउ भय न करा, फोन अच्छी तुम डायल करा, झिआंकु कमेंट मरीबा चालिबा नहीं, रोड रोमोनकु करा थरहरा’ ओडिशा के गजपति जिले में यह गाना चर्चा में है। इसका अर्थ है- बेटियों अब डरो नहीं, तुम्हारे पास फोन नंबर है उसे डायल करो, महिलाओं पर फब्तियां कसना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, रोमियो को अब तुम्हारा डर होना चाहिए।’ यह गाना ओडिशा की महिला आईपीएस अधिकारी सारा शर्मा ने बनाया है। गाने का उद्देश्य है महिलाओं को छेड़छाड़ के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत मिले। उनमें इस तरह के अपराध के खिलाफ जागरुकता फैलाई जा सके। सारा ने छेड़छाड़ की घटनाएं रोकने के लिए स्पेशल पुलिस टीम का गठन किया। सारा के मुताबिक यह गाना पुलिस की टीम को अपराध के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करता है। सारा फरवरी में गजपति में एसपी बनी थीं। वे शास्त्रीय गायन से भी जुड़ी हैं।

बेहतर काम करती हैं बोर्ड में अधिक महिलाओं वाली कम्पनियां

जकार्ता : इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्प (आईएफसी) के एक अध्ययन के मुताबिक दक्षिण पूर्व एशिया और चीन की ऐसी कम्पनियाँ, जिनके बोर्ड में महिलाओं का प्रतिनिधत्व पुरुषों के मुकाबले अधिक रहा, उन्होंने वित्तीय मामलों में बेहतर परिणाम दिए।
30% से ज्यादा प्रतिनिधित्व वाली कम्पनियों में इक्विटी पर रिटर्न 6.2% रहा
आईएफसी के मुताबिक जिन कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 30 फीसदी से ऊपर रहा, उनमें एसेट पर रिटर्न 3.8 फीसदी रहा। वहीं जिन कंपनियों में महिलाओं का प्रतिनिधितव नहीं था उनका रिटर्न 2.4 फीसदी रहा। आईएफसी ने यह अध्ययन वीमेंस एमपावरमेंट वर्किंग ग्रुप और इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज के साथ मिलकर किया था।
आईएफसी के रीजनल डायरेक्टर विवेक पाठक ने बताया कि जिन कंपनियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 30 फीसदी से अधिक था, इक्विटी पर उनका रिटर्न 6.2 फीसदी रहा जबकि पुरुष प्रतिनिधित्व वाले बोर्ड का रिटर्न 4.2 फीसदी रहा। इस अध्ध्यन में चीन, इंडोनेशिया फिलीपीन्स, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम की 1,000 कंपनियों को शामिल किया गया था। सर्वे में शामिल कंपनियों में थाइलैंड की कंपिनयों में सबसे ज्यादा जेंडर डाइवर्सिटी थी। यहां लिस्टेड कंपिनयों में बोर्ड में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 20 फीसदी रहा। उसके बाद 15 फीसदी के साथ इंडोनेशिया और वियतनाम का नंबर रहा। सर्वे में शामिल करीब 40 फीसदी कंपनियों के बोर्ड में कोई भी महिला नहीं थी। करीब 16 फीसदी कंपनियों में 30 फीसदी से अधिक महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहा।

नागार्जुन जयंती के अवसर पर कवि पर्व का आयोजन

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से नागार्जुन जयंती के अवसर पर भारतीय भाषा परिषद में कवि पर्व का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कवयित्री निर्मला तोदी ने कहा कि नागार्जुन हिंदी कविता के सबसे सहज और बोधगम्य कवि हैं ।इस अवसर पर आयोजित कवि पर्व के अंतर्गत राजेश मिश्र, मनोज झा,सुषमा त्रिपाठी, राहुल शर्मा, मधु सिंह, राहुल गौड़, रूपेश यादव, निर्मला तोदी ने काव्य पाठ किया। कवि नागार्जुन को याद करते हुए मृत्युंजय श्रीवास्तव, विनोद यादव, नारायण दास, विनोद यादव मास्टर जी, पार्वती शॉ, अनूप यादव, सूर्यदेव राय आदि ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया ।कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए संजय जायसवाल ने कहा कि नागार्जुन बहुजन समाज के लिए प्रतिबद्ध थे। उन्होंने सरकार की गलत नीतियों का विरोध करते हुए नैतिक साहस का परिचय भी दिया ।उनके पूरे रचना संसार में मानव हित के बेचैनी और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध के स्वर सुनाई पड़ते हैं ।धन्यवाद ज्ञापन डॉ अनीता राय ने दिया ।