Tuesday, April 21, 2026
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‘खालसा एड’ ने रमजान के महीने में जीते दिल, इराक के शरणार्थी शिविर में बांटी कुरान

अंतरराष्ट्रीय सिख एनजीओ  खालसा एड ने सद्बावना और सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए इराक के शरणार्थी शिविर में रहने वालों को पवित्र किताब कुरान का वितरण किया है। खालसा एड ने यह कदम मुसलमानों का पवित्र महीना रमजान मनाने के लिए उठाया।
यूनाइटेड किंगडम के इस समूह ने मोसुल में शिविक प्रबंधक को कुरान की पांच प्रतियां भेंट की। समूह के सदस्य शिविर में इफ्तार के लिए भोजन के पैकेट बांट रहे थे। जब शिविर के प्रबंधक ने उनसे पूछा कि क्या वह कुरान की व्यवस्था कर सकते हैं, खालसा एड ने उनकी यह ख्वाहिश भी पूरी की। कुरान के अलावा समूह ने नमाज पढ़ने के लिए चटाई भी उपलब्ध कराईं। समूह के ट्विटर हैंडल से एक वीडियो भी शेयर किया गया है जिसमें समूह के सदस्य कुरान भेंट कर रहे हैं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा है, ‘इस सप्ताह हमारे दल ने इराक में मोसुल के पास एक शिविर में वहां के प्रबंधक के आग्रह पर पवित्र किताब कुरान की पांच प्रतियां और नमाज पढ़ने के लिए चटाई पहुंचाईं। इसके साथ ही हमने रमजान के महीने में इफ्तार के लिए वहां खाने के पैकेट भी वितरित किए।

रॉयल एनफील्ड ने वापस लीं 7,000 बुलेट, बुलेट इलेक्ट्रा

नयी दिल्ली : मोटरसाइकिल कंपनी रॉयल एनफील्ड ने अपनी बुलेट और बुलेट इलेक्ट्रा की करीब 7,000 मोटरसाइकिलों को वापस मंगवाया है। कंपनी ने मंगलवार को कहा कि इन वाहनों में त्रुटिपूर्ण ब्रेक कैलिपर बोल्ट की पहचान की गयी हैकंपनी ने एक बयान में कहा कि 20 मार्च 2019 से 30 अप्रैल 2019 के बीच उत्पादित इन वाहनों में इस त्रुटि की पहचान की गयी है। इसलिए कंपनी पहले से सक्रियता दिखाते हुए इन वाहनों की सर्विस के लिए वापस बुला रही है। ब्रेक कैलिपर बोल्ट, किसी वाहन में ब्रेक लगाने वाली प्रणाली का अहम कलपुर्जा होता है। यह ब्रेक होज और ब्रेक कैलिपर को सुरक्षित करता है।

अभिनय गुरु रोशन तनेजा का निधन

मुम्बई :  अभिनय गुरु के तौर पर मशहूर रोशन तनेजा का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके बेटे ने गत शनिवार सुबह इस बात की जानकारी दी। उनका निधन गत शुक्रवार को हुआ। वह लंबे समय से बीमार थे। उनका अंतिम संस्कार शनिवार शाम 4: 30 बजे मुंबई के सांताक्रुज वेस्ट के विद्युत शमशान गृह में किया जाएगा। रोशन अपने पीछे पत्नी मिथिका और बेटे रोहित, राहुल को छोड़ गए हैं।
रोशन ने नसीरुद्दीन शाह, जया बच्चन, अनिल कपूर, शबाना आजमी जैसे सितारों को अभिनय के गुर सिखाए थे। उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पायोनियर ऑफ़ मेथड एक्टिंग कहा जाता है। वह 1960 से अभिनय सिखा रहे थे। उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (पुणे) से अपने प्रोफेशन की शुरुआत की और फिर मुंबई में द रोशन तनेजा स्कूल ऑफ़ एक्टिंग खोल लिया था। तनेजा परिवार के लिए ट्वीट करते हुए शबाना आजमी ने लिखा-पिछली रात मुझे दुखद सूचना मिली कि रोशन तनेजा नहीं रहे। वह एफटीआईआई में मेरे गुरु थे और वह एकमात्र ऐसे शख्स थे जिनके मैंने पैर छुए। उनके द्वारा एक्टिंग सिखाया जाना मेरे लिए एक सौभाग्य की बात है।
अभिनेता राकेश बेदी ने लिखा-मेरे लिए बुरा दिन,मेरे गुरूजी रोशन तनेजा नहीं रहे। मैं अपना पूरा करियर उन्हें समर्पित करता हूं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। विंदु दारा सिंह ने ट्वीट किया-हमारे गुरु जी रोशन तनेजा नहीं रहे।भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। वह बेहतरीन शिक्षक थे जिन्होंने एक्टिंग से प्यार करना सिखाया और हमें हमेशा परिवार जैसा महसूस कराया।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने आतंकवाद रोधी कार्य में सहयोग को लेकर भारत को सराहा

संयुक्त राष्ट्र :संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने वैश्विक संस्था (यूएन) के आतंकवाद रोधी कार्य में भारत के सहयोग की सराहना की है। साथ ही, इस्लामिक स्टेट से भाग रहे आतंकवादियों का पता लगाने की जरूरत और किसी हमले को अंजाम देने से पहले उन्हें रोके जाने को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एक उच्च प्राथमिकता बताया है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र आतंकवादी यात्रा रोकथाम कार्यक्रम शुरू किए जाने के दौरान यह कहा। श्रीलंका में ईस्टर के दिन हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के करीब दो सप्ताह बाद संयुक्त राष्ट्र ने यह कदम उठाया है। इन हमलों की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली थी। गुतारेस ने कहा कि यह कार्यक्रम आतंकवाद रोधी अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने, आतंकवादियों का पता लगाने, उनकी पहचान करने, उन्हें रोकने और अभियोजित करने के लिए बहुपक्षीय नेटवर्क को विस्तारित करने में और आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित सदस्य देशों के पास इस खतरे से निपटने की क्षमता को सुनिश्चित करने में मदद करेगा। गुतेरस ने कहा, ‘‘मैं संरा के आतंक रोधी कार्य में भारत, जापान, सउदी अरब और कतर के निरंतर सहयोग की सराहना करता हूं। ’’
उन्होंने कहा कि आईएसआईएस के शिकस्त के बाद कई आतंकी स्वदेश लौटने या सुरक्षित पनाहगाहों या दुनिया के संकटग्रस्त हिस्सों में जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कई आतंकी अच्छी तरह से प्रशिक्षित हैं और वे भविष्य में आतंकी हमलों को अंजाम दे सकते हैं। अन्य के कट्टरपंथ फैलाने और अपने उद्देश्य के लिए नये साथियों की भर्ती करने की संभावना है। गुतेरस ने कहा कि किसी हमले को अंजाम देने से पहले इन आतंकवादियों और अन्य खतरनाक अपराधियों का पता लगाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक उच्च प्राथमिकता है।

भोजपुरी गायक पद्मश्री हीरालाल यादव का 93 साल की आयु में निधन

वाराणसी :  बिरहा सम्राट व भोजपुरी गायक हीरा लाल यादव का रविवार को 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वो कई दिनों से बीमार थे। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें अस्पताल से चौकाघाट स्थित आवास पर ले आए, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। बेटे सत्यनारायण यादव ने बताया कि दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने हीरालाल के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है।
हीरलाल यादव को इसी वर्ष जनवरी माह में गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से नवाजा गया था। संगीत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 2015 में यश भारती पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उत्‍तर प्रदेश सरकार ने 1993-94 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान और 2014 में यशभारती के साथ ही विश्व भोजपुरी अकादमी का भिखारी ठाकुर सम्मान व रवींद्र नाथ टैगोर सम्मान से भी उन्हें नवाजा था। हीरालाल यादव का जन्म वर्ष 1936 में वाराणसी जिले के चेतगंज स्थित सरायगोवर्द्धन में हुआ था। उनका बचपन गरीबी में गुजरा था। शौकिया गाते-गाते अपनी सशक्त गायकी से बिरहा को उन्होंने राष्ट्रीय फलक पर पहचान दिलाई और बिरहा सम्राट के रूप में मशहूर हुए। वर्ष 1962 से आकाशवाणी व दूरदर्शन पर बिरहा के शौकीनों को अपना दीवाना बनाया। भक्ति रस में पगे लोकगीत और कजरी पर भी श्रोताओं को खूब झुमाया, वहीं गायकी में शास्‍त्रीय पुट ने बिरहा गायन को विशेष विधा के तौर पर पहचान दिलाई। पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीटर पर भी इनको श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित वाराणसी के बिरहा गायक श्री हीरालाल यादव जी के निधन की खबर से अत्यंत दुख हुआ। दो दिन पहले ही बातचीत कर उनका हालचाल जाना था। उनका निधन लोकगायकी के क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके प्रशंसकों और परिवार के साथ हैं।

स्वाभिमान का प्रतीक हैं महाराणा प्रताप : प्रतिभा सिंह

टीटागढ़ः अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन पश्चिम बंगाल की ओर से महाराणा प्रताप की जयंती धूमधाम से मनायी गयी। गुरुवार की शाम फैंसी बाजार में आयोजित इस समारोह में संगठन की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप ने स्वाभिमान की जंग में अपने प्राणों की आहुति दी। वे सदैव स्वाभिमान से जीने वालों को प्रेरित करते रहेंगे। इस अवसर पर उन्होंने संगठन के विस्तार की चर्चा करते हुए सोदपुर अंचल के कुछ नये पदाधिकारियों के नाम की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सोदपुर इकाई में रीना सिंह उपाध्यक्ष, रीता सिंह कोषाध्यक्ष, मंजू सिंह और सुलेखा सिंह दोनों सचिव बनायी गयीं हैं। कार्यक्रम में इनके अलावा ज्योति सिंह, सुनीता सिंह, ललिता सिंह, आशा सिंह, सुजाता गुप्ता, अनिता साव, शकुंतला विशेष तौर पर उपस्थित थीं।

स्त्री शिक्षा के जरिए गाँधी के आदर्शों को मूर्त किया सीताराम सेकसरिया ने

कोलकाता :  सीताराम सेकसरिया स्वाधीनता संग्राम में तीन बार जेल गए थे और उनके जीवन के ढाई साल जेल में बीते थे। 1947 के बाद व्यवसाय से मुक्त हो कर उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा और स्त्री शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। सीताराम सेकसरिया और भागीरथ कानोड़िया की जोड़ी ने न केवल भारतीय भाषा परिषद की स्थापना की बल्कि राजस्थान में भी कई सामाजिक कार्य किए। उनका जीवन गांधी के विचारों से आलोकित था। भारतीय भाषा परिषद के संस्थापक दिवस समारोह के अवसर पर विद्वानों ने ये विचार व्यक्त किए।
समारोह में ‘गांधी के सुधार आंदोलन और स्त्री शिक्षा’ पर बोलते हुए गांधी शांति प्रतिष्ठान, नयी दिल्ली के अध्यक्ष प्रसिद्ध गाँधीवादी कुमार प्रशांत ने कहा कि जिस गांधी ने 1896 में कस्तूरबा को घर से निकालने की ठान ली थी। उनमें 1916 तक इतना परिवर्तन आ चुका था कि एक विषय पर असहमति के बाद अपनी पत्नी बा से उन्होंने कहा  कि हम असहमति के बावजूद साथ रह सकते हैं। इस तरह गाँधी ने असहमति को कुचलने की जगह उसे मर्यादा दी जो आज भी लोकतंत्र की प्रधान शर्त कही जा सकती है। गाँधी ने यह भी कहा कि एक पुरुष को शिक्षा देेने से एक व्यक्ति शिक्षित होता है पर एक स्त्री को शिक्षा देने से पूरा परिवार शिक्षित होता है। गाँधी ने अहिंसा का जो संदेश दिया, वह आज सांप्रदायिक विद्वेष और हिंसा के दौर में खोता जा रहा है। उनका जीवन आज भी एक संदेश है।
भारतीय भाषा परिषद के संस्थापक दिवस समारोह में कश्मीर में हिंदी की अलख जगाने वाली बीना बुदकी और कोलकाता में वंचितों तक शिक्षा पहुंचाने वाली समाजसेवी सुस्मिता गुप्ता को ‘समाज कल्याण पुरस्कार’ से नवाजा गया। इस अवसर पर रतनलाल शाह ने सीताराम सेकसरिया और भागीरथ कानोड़िया की मित्रता से जुड़े कई मार्मिक प्रसंग सुनाए और महेश लोधा ने गांधी पर अपने विचार रखे। अध्यक्षीय भाषण देते हुए बांग्ला कथाकार रामकुमार मुखोपाध्याय ने गाँधी और रवींद्रनाथ के महान कार्यों में एक गहरा मानवतावादी संबंध देखा। संचालन करते हुए नंदलाल शाह ने  किया।  बिमला पोद्दार ने परिषद की ओर से धन्यवाद दिया।
प्रेषक : सुशील कान्ति

मनुष्यता का साहित्य है भक्तिकालीन काव्य

मिदनापुर : राजा नरेंद्र लाल खान वुमेन कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से ‘भक्तिकालीन काव्य में मानव- मूल्य ‘विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर संगोष्ठी का उद्धाटन करते हुए प्रिंसिपल डॉ जयश्री लाहा ने कहा कि भक्तिकालीन काव्य प्रेम  और मानव मूल्यों का समुच्चय है ।बतौर मुख्य अतिथि विद्यासागर विश्वविद्यालय के डीन प्रोफेसर दामोदर मिश्र ने कहा कि भक्तिकाल का समग्र साहित्य वर्ण व्यवस्था, ईर्ष्या और अंधविश्वास के विरुद्ध मानव जाति, प्रेम और ज्ञज्ञान का संकल्प बीज भाषण देते हुए प्रोफेसर हरिश्चन्द्र मिश्र ने कहा कि भक्तिकाल का साहित्य बहुआयामी और सांस्कृतिक आंदोलन का युग है ।यह उदात्त और मानवीय काल के रूप में हमें प्रेरित करता है ।प्रो विभा कुमारी ने भक्तिकालीन साहित्य में स्त्री -चेतना के विविध आयामों पर चर्चा करते हुए कहा कि सामंती परिवेश में स्त्री का जीवन बंधा था ।रेवेंशा विश्वविद्यालय की प्रो अंजुमन आरा ने कहा कि भक्तिकालीन साहित्य हिंदू धर्म और इस्लाम के अतिवादी कुसंस्कारों का विरोध है और इस युग में भक्त कवियों ने मानव-प्रेम को केंद्र में रखा। डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा कि भक्तिकालीन साहित्य आज भी प्रासंगिक है। डॉ. संजय पासवान ने कहा कि भक्तिकाव्य लोकमंगल के विचारों से संपृक्त है। डॉ. रणजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि आज के वैश्वीकरण  के युग में भक्ति का स्वरूप बदल गया है और बाजार ने भक्ति को वस्तु बना दिया है। डॉ. रामप्रवेश रजक ने भक्तिकाल को प्रेम, ज्ञान और भक्ति का संगम बताया। इस अवसर पर आयोजित कार्यशाला ‘हिंदी में रोजगार की संभावनाएं’ विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए डॉ. राजीव रावत ने कहा कि हमें रोजगार के लिए अपना कौशल विकसित करना होगा। डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि भक्तिकालीन साहित्य में मानव विरोधी मूल्यों के बरक्स साम्प्रदायिक सद्भाव को प्रतिष्ठापित करने का संकल्प है। विभागाध्यक्ष डॉ. रेणु गुप्ता ने कहा कि भक्तिकालीन साहित्य हमें मानवीय बनाता है। डॉ. धनराज भगत ने कहा कि कबीर हमारे यहाँ सबसे बड़े धर्मनिरपेक्ष लेखक के रूप में आते हैं। इस अवसर पर सीमा कुमारी साह, विक्रम मुख्य, नवनीत दास, श्रद्धा कुमारी, प्रो. धनराज भगत, विनय प्रसाद,, सोम दे, सलोनी शर्मा, टीना परवीन, रिया श्रीवास्तव, अशर्फी खातून, रेशमी वर्मा, अभिलक्ष्य आनंद, राधेश्याम सिंह, अंकिता द्विवेदी, बिट्टू कौर, स्वाति के. रेखा, रूबी शर्मा, पूजा मिश्रा , पुष्पलता, सीता महता, रूपल साव, राहुल गौड़, दीपनारायण चौहान, अमित राय, सोनाली कुमारी,शारदा महतो और अनिल कुमार साह ने आलेख पाठ किया। कार्यक्रम का  संचालन करते हुए मधु सिंह ने कहा कि भक्तिकालीन साहित्य का लक्ष्य भक्ति और  ज्ञान के साथ मनुष्य की महत्ता को स्थापित करना था ।धन्यवाद ज्ञापन  देते हुए प्रो. सुमिता भकत ने  कहा कि भक्तिकाल का साहित्य लोकजागरण और मानव मुक्ति का साहित्य है ।

बेसन की सोंधी रोटी पर

निदा फ़ाज़ली

बेसन की सोंधी रोटी पर
खट्टी चटनी जैसी माँ

याद आती है चौका-बासन
चिमटा फुकनी जैसी माँ

बाँस की खुर्री खाट के ऊपर
हर आहट पर कान धरे

आधी सोई आधी जागी
थकी दोपहरी जैसी माँ

चिड़ियों के चहकार में गूंजे
राधा-मोहन अली-अली

मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती
घर की कुंडी जैसी माँ

बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन
थोड़ी थोड़ी सी सब में

दिन भर इक रस्सी के ऊपर
चलती नटनी जैसी माँ

बाँट के अपना चेहरा, माथा,
आँखें जाने कहाँ गई

फटे पुराने इक अलबम में
चंचल लड़की जैसी माँ

कामकाजी माताओं के लिये दफ्तरों में सहयोगात्मक माहौल बनाने की जरूरत: एसोचैम

नयी दिल्ली  : उद्योग मण्डल ‘एसोचैम’ ने अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस पर महिला सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए कामकाजी माताओं के लिये दफ्तरों में सहयोगात्मक माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। एसोचैम के अध्यक्ष बी. के. गोयनका ने एक बयान में कहा ‘दफ्तरों और कामकाज के अन्य स्थानों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के मद्देनजर एक अलग माहौल बनाने की जरूरत है। कामकाजी माताओं के लिये कार्यस्थलों के वातावरण को उनकी सुविधा के हिसाब से रूपान्तरित किये जाने और काम करने के घंटों में लचीलापन लाने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि अनेक कम्पनियों ने कामकाजी माताओं की जरूरतों के हिसाब से अपने संचालनात्मक ढांचे को ढालने का काम शुरू कर दिया है।
गोयनका ने कहा कि उनकी नजर में स्वस्थ समाज के निर्माण में महिला सशक्तीकरण बेहद जरूरी है। लिहाजा कुल श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना भी आवश्यक है। पिछले पांच वर्षों के दौरान श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी का प्रतिशत 25 पर ही बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस भागीदारी को बढ़ाने के लिये उन्हें कार्यस्थल पर अनुकूल माहौल दिया जाना चाहिये, ताकि वे अपनी मातृत्व सम्बन्धी जिम्मेदारियों और दफ्तर के दायित्वों के बीच संतुलन बना सकें। एसोचैम अध्यक्ष ने कहा कि उनका संगठन आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने के लिये अनेक कदम उठा रहा है। चैम्बर ने ‘स्टार्ट-अप’ योजना के तहत महिलाओं के क्षमता विकास तथा प्राविधिक प्रशिक्षण की दिशा में काम शुरू किये हैं।