Friday, April 24, 2026
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ग्रामीणों ने गंदे तालाब को अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट में बदला, रोजगार और साक्षरता बढ़ी

4 लाख वार्षिक आय वाला गाँव अब 7 करोड़ कमा रहा

इंडोनेशिया के एक गाँव की तस्वीर स्थानीय लोगों ने मिलकर बदल दी। 15 साल पहले गंदगी, बेरोजगारी और गरीबी से जूझते अंबेल पोंगोक गांव को अब एक नामी टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर जाना जाता है। ग्रामीणों में मिलकर यहां के एक गंदे और प्रदूषित तालाब को अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट में तब्दील कर दिया है। गाँव का हर परिवार अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट से रोजाना 2500 रुपये महीना कमा रहा है। इस तालाब का इंस्टाग्राम अकाउंट हैं जिस पर 40 हजार से अधिक फॉलोअर हैं। कभी गरीब गाँव कहा जाने वाला अंबेल पोंगोक आज इंडोनेशिया के 10 समृद्ध गाँवों की लिस्ट में शामिल है। अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट बनाने का श्रेय इंडोनेशिया के ही जुनैदी मुल्योनो को जाता है। जुनैदी ने कई साल पहले यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों को अंबेल पोंगोक गांव पर एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा। रिपोर्ट में गाँव की समस्याओं, खूबियों और इसे कैसे बेहतर बनाया जाए जैसे मुद्दे शामिल किए गए। रिपोर्ट में उन्होंने पाया कि गाँव में एक तालाब है। उन्होंने तालाब को बिजनेस मॉडल में तब्दील करने की प्लानिंग की। इस मॉडल को तिरता मंदिरी नाम दिया। तालाब 20 मीटर लंबा और 50 मीटर चौड़ा है, जिसका इस्तेमाल कपड़े धोने के लिए किया जाता था। जुनैदी ने तालाब को अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट में तब्दील करने की योजना बनाई और इसमें गाँव वालों से निवेश करने को कहा। उन्होंने ग्रामीणों से वादा किया इससे होने वाली कमाई का कुछ हिस्सा सालों तक गांव वालों को देते रहेंगे। शुरुआत में गांव के 700 में 430 परिवारों ने निवेश किया। कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने सैलानियों की आमद के बाद निवेश करने का मन बनाया। तालाब को एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन और हॉट-स्पॉट में तब्दील कर दिया गया। जुनैदी ने इंस्टाग्राम की मदद से इसे लोकप्रिय बनाया। हर परिवार ने इसमें औसतन 25 हजार रुपये निवेश, जिन्हें अब रिटर्न के तौर पर 2500 रुपए प्रतिमाह मिल रहा है। पर्यटकों के पहुँचने से गाँववालों की आमदनी बढ़ रही है। उनका जीवन बेहतर हो रहा है। बच्चों की साक्षरता दर बढ़ रही है। गांव की अर्थव्यवस्था का नक्शा की बदल गया है। लोगों को रोजगार मिल गया है। 2006 में जुनैदी इस गांव से चुनाव भी लड़ चुके हैं। 2005 में गांव की वार्षिक आय 4 लाख रुपये थी, लेकिन अब सिर्फ एक तालाब की बदौलत यह आँकड़ा 7 करोड़ रुपये हो गया है। वीकेंड पर यहाँ हजारों पर्यटक आते हैं। अंडरवाटर में सेल्फी लेना उन्हें तालाब का दीवाना बना रहा है। सेल्फी को यादगार बनाने के लिए गाँववालों ने तालाब में मोटरसाइकिल, बेंच और पुराने टीवी सेट को रखा है। जिसे साथ आप तस्वीरें ले सकते हैं। यहाँ टूरिस्ट आते हैं और तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हैं, यह इसकी लोकप्रियता में इजाफा कर रहा है।

ओडिशा में 184 कक्षाएं बनीं स्मार्ट कक्षाएं

भुवनेश्वर : ओडिशा के नौ केंद्रीय विद्यालयों की 184 कक्षाओं का डिजिटलीकरण किया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं स्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केन्द्रीय विद्यालयों की स्मार्ट कक्षाओं का उद्घाटन किया। इनमें से छह स्कूल भुवनेश्वर, दो स्कूल खोरडा रोड और एक कटक में है। अधिकारियों ने बताया कि 184 कक्षाओं को स्मार्ट कक्षाओं में तब्दील किया गया है। इसपर कुल चार करोड़ रुपये का खर्चा आया है। यह कार्य तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओनएजीसी) के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत किया गया है।उन्होंने बताया कि इस पहल से 12,300 छात्र-छात्राओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट कक्षाओं में कंप्यूटर, सीखने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर, सुनने में सहयोग देने वाली डिवाइस, नेटवर्किंग और ऑडियो-विजुअल क्षमता होगी। प्रधान ने कहा कि वह 2005 में अमेरिका की यात्रा के दौरान इस तरह की कक्षाओं की शुरुआत करने के लिए प्रेरित हुए थे। प्रधान ने पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए केंद्रीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं से अपील की कि वह अपने लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ें।

राकेश कुमार भदौरिया होंगे अगले वायुसेना प्रमुख

नयी दिल्ली : एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया अगले वायुसेना प्रमुख होंगे। मई में वायुसेना उपप्रमुख बनाए गए भदौरिया वर्तमान वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ की जगह लेंगे। वायुसेना के इतिहास में 28 साल बाद ऐसा संयोग बना है कि सेवानिवृत्ति के दिन उपप्रमुख को प्रमुख बनाया जा रहा है। 1991 में एयर मार्शल एनसी सूरी भी ऐसी ही परिस्थिति में चीफ बने थे। भदौरिया दो साल तक यानी 62 की उम्र तक वायुसेना प्रमुख रहेंगे। गुरुवार को एक और संयोग भी बना, जो घरेलू लड़ाकू विमान तेजस से जुड़ा है। एयर मार्शल भदोरिया जिस तेजस विमान के टेस्ट पायलट रहे हैं, उसकी उड़ान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भरी और वायुसेना प्रमुख की नियुक्ति की घोषणा भी उसी दिन हुई। भदौरिया ने रफाल सौदे की अध्यक्षता की है: भदौरिया वायुसेना उपप्रमुख बनने से पहले बेंगलुरू ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख थे। उन्होंने फ्रांस के साथ 36 रफाल लड़ाकू विमानों के सौदे के लिए नियुक्त भारतीय दल की अध्यक्षता की थी। वह फ्रांस में रफाल उड़ा भी चुके हैं। वह 15 जून 1980 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में ‘साॅर्ड ऑफ ऑनर’ सम्मान के साथ शामिल हुए थे। अपने चार दशक के करिअर के दौरान भदौरिया जगुआर स्क्वाॅड्रन और प्रमुख एयरफोर्स स्टेशनों के चीफ रह चुके हैं। उन्हें 26 प्रकार के लड़ाकू विमानों को उड़ाने का 4,250 घंटे का अनुभव है।

सम्मान सिद्धि योजना / किसान खुद ही कर सकेंगे पीएम-किसान पोर्टल पर पंजीकरण

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री किसान सम्मान सिद्धि योजना के तहत सालाना 6 हजार रुपए लेने के लिए किसान अगले हफ्ते से सीधे पीएम-किसान पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। भुगतान की जानकारी पता कर सकेंगे। पोर्टल के जरिए आधार सत्यापन भी कर पाएंगे। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने यह जानकारी दी। अग्रवाल ने बताया कि सरकार अब तक 6.55 लाख किसानों को एक-दो किश्तें जारी कर चुकी है। विभिन्न राज्यों में किसानों को भुगतान मिला है या नहीं इसकी जांच की जा रही है। राज्य सरकारों से भी क्रॉस चेक करने के लिए कहा है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान सिद्धि (पीएमकेएसएस) योजना के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपए तीन किश्तों में दिए जाएंगे। यह 87,000 करोड़ रुपए की योजना है। अंतरिम बजट में इसका ऐलान किया था। पहले 2 हेक्टेयर तक जमीन वालों के लिए योजना का लाभ देने की शर्त रखी गई। मई में सभी किसानों को इसमें शामिल कर लिया गया।

इस नवरात्र वैष्णो देवी मंदिर में लगेगा सोने का दरवाजा

श्रीनगर : वैष्णो देवी मंदिर में सोने का दरवाजा लगाया जा रहा है। 96 फीट लंबी पारंपरिक गुफा के इस दरवाजे को 29 सितंबर से शुरू हो रही नवरात्र में लगाया जाएगा। इससे पहले गुफा के बाहर संगमरमर का दरवाजा होता था। यह पारंपरिक गुफा सिर्फ सर्दियों में कुछ दिनों के लिए ही श्रद्धालुओं के लिए खोली जाती है। हालांकि हर दिन पुजारी आरती के लिए इसी पारंपरिक गुफा वाले दरवाजे का इस्तेमाल करते हैं। सोने के इस नए दरवाजे के एक पल्ले पर माता लक्ष्मी और दूसरे पर आरती उकेरी गई है। इसके अलावा इस पर भगवान गणपति की तस्वीर और मंत्र हैं। दरवाजे के ऊपरी हिस्से में गुंबद और छत्र हैं, जिस पर नौ सीढ़ियां बनाई गई हैं जो नौ देवियों का प्रतीक हैं। श्राइन बोर्ड के सीईओ सिमरनदीप सिंह के मुताबिक सोने के इस दरवाजे को श्राइन बोर्ड की नई डोनेशन पॉलिसी के तहत बनवाया गया है। नवरात्र के लिए माता के भवन को थाईलैंड, हॉलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, ऊंटी और पालमपुर से मंगवाए देसी-विदेशी फूलों और फलों से सजाया जाएगा। यहीं नहीं पहली बार कटरा बेस कैंप से भवन तक के 13 किमी लंबे घुमावदार रास्ते पर रंगबिरंगी लाइटिंग की जा रही है। इसके अलावा पिछले साल कटरा में शुरू हुए लंगर में नवरात्र के दौरान फलाहार दिया जाएगा।इस नवरात्र उत्सव के दौरान नौ दिनों तक अलग-अलग कार्यक्रम होंगे और राज्यपाल सत्यपाल मलिक इसका उद्घाटन करेंगे। हर बार की तरह ही नवरात्र के मशहूर दंगल का आयोजन होगा। 2005 से 2012 तक पाकिस्तान के पहलवान भी इस दंगल में भाग लेने आते थे। भारत-पाक के बीच तनाव के चलते 2013 से इन्हें बुलाना बंद कर दिया गया है और इस बार भी पाकिस्तानी पहलवान नहीं आएंगे। कटरा में इस उत्सव का आयोजन 1996 से हो रहा है। दर्शनार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर राज्य पुलिस ने पैरामिलिट्री के साथ मिलकर खास ग्रिड तैयार किया है। पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती के अलावा कटरा टाउन, भवन के इलाके और यात्रा मार्ग को सीसीटीवी कैमरे की जद में लाया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार इन नौ दिनों में 3-4 लाख श्रद्धालु वैष्णो देवी के दर्शन करने आएंगे।
3 महीने में कारीगरों ने गुफा के पास ही वर्कशॉप में तैयार किया दरवाजा
इस दरवाजे को कारीगरों ने तीन महीने में तैयार किया है। इसे बनाने के लिए श्राइन बोर्ड ने उन कारीगरों को बुलाया था जिन्होंने इससे पहले मुंबई में सिद्धिविनायक और दिल्ली में झंडेवालान मंदिर में नक्काशी का काम किया है। श्राइन बोर्ड ने गुफा के पास ही एक खास वर्कशॉप में इस दरवाजे को तैयार करवाया है। दरवाजे को ठोस चांदी से बनाया गया है जबकि इसकी परत सोने की है।
साभार – दैनिक भास्कर

वैचारिक ऊर्जा और आधुनिक समाज

राखी राय हल्दर

रफ्तार के साथ भागती जिन्दगी में हर व्यक्ति व्यस्त है। ज्यादा से ज्यादा ऐशो आराम के साधन जुटा लेने को ही वह सुख समृद्धि का आधार मानकर उन्हें बटोरने के लिए लगातार दौड़ रहा है। अपने परिवार को सुखी और सम्पन्न बनाने की कोशिश में वह खुद को काम में डुबो देता है। लेकिन यहाँ उसकी व्यस्तता परिवार के साथ उसके रिश्तों के रेशों को कमजोर करती जाती है। रिश्तों को बचाने के लिए समय का निवेश करने की जरूरत होती है और सुख-साधन बटोरने का काम भी समय की माँग करता है। ऐसे में व्यक्ति समय निवेश करे भो तो कहाँ करे? यही बहुत बड़ी उलझन बन जाती है। दरअसल समय देने की क्रिया एक जटिल क्रिया है जिसमें समय के साथ और बहुत कुछ निवेश किया जाता है। मन-मस्तिष्क और ध्यान इस निवेश में शामिल है। ये तीनों क्वांटम स्तर पर ऊर्जा की सृष्टि करते हैं और यह ऊर्जा हमें उद्देश्य प्राप्ति की दिशा में ले जाती है। इसलिए सफलता हासिल करने के सवाल पर आने से पहले इंसान के लिए यह तय करना जरूरी है कि उसके लिए सफलता का क्या मतलब है? उसकी चाहत के कितने आयाम हैं? उनमें से महत्वपूर्ण आयाम कौन से हैं? और वह अपनी सर्वाधिक ऊर्जा का निवेश कहाँ करना चाहता है? मुँह में परिवार को सुखी बनाने का मंत्र हो और समिधा वस्तुओं को बटोरने के यज्ञ में दी जाए तो आदमी की स्थिति त्रिशंकु जैसी हो जाती है। परिवार को सुखी रखने के लिए बटोरी गई वस्तुओं में ही परिवार रमा रहता है और स्वजनों की आत्मा तक व्यक्ति की ऊर्जा पहुँच नहीं पाती। क्योंकि सारी ऊर्जा साधनों को बटोरने में लगा दी गई है। अन्य शब्दों में कहें तो स्वजनों को समय न दिए जाने के कारण उस रिश्ते में उचित ऊर्जा का निवेश नहीं हो पाता। इसका फल व्यक्ति उस उम्र में भोगता है जिस उम्र में उसे स्वजनों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जीवन की इस स्थिति की व्याख्या भी विज्ञान के क्वांटम ऊर्जा की अवधारणा के जरिए पेश की जा सकती है। लेकिन वर्तमान शिक्षा पद्धति में तो विज्ञान को प्रयोगों की सीढ़ी पर चढ़े हुए एक आसमानी विषय के रूप में पेश किया जाता है। वैज्ञानिक चेतना के अभाव में जहाँ एक ओर जीवन की नदी सूख रही है वहीं विज्ञान को जीवन से काट देने वाले विषयों में ऊर्जा निवेश करके किताबी बुद्धि की नदी में बाढ़ लाई जा रही है।
वर्तमान दौर का फैशन है कि शुद्धाचरण की बात करने वाले को ज्ञानी बाबा या संत कहकर दूर से प्रणाम किया जाए लेकिन सफलता की मनमानी अवधारणा गढ़कर उसके पीछे दौड़ने वालों को यह नहीं दिखता कि ईमानदारी, विश्वास, वफादारी जैसे मूल्यों की दुर्लभता उनके जीवन में भी हर कदम पर मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। शक, चौकीदारी, सुरक्षा के प्रश्नों पर ज्यादा ऊर्जा का व्यय करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं वे खुद इन मूल्यों को लेकर चलने के प्रति भी आश्वस्त नहीं हैं। क्योंकि यह बात आम हो गई है कि आजकल भलाई का जमाना नहीं रहा। गौर से देखें तो सुख, शान्ति, शक्ति, आनन्द, ज्ञान, और प्रेम जैसे मूल्य प्राथमिक मूल्य हैं। इन मूल्यों के बगैर ईमानदारी, विश्वास, वफादारी जैसे मूल्यों को टिकने का आधार नहीं मिलता। प्राथमिक मूल्यों से आत्मा को मिली शक्ति से ही वह ईमानदारी, विश्वास और वफादारी जैसे गुणों का सृजन करती है। गौर करें कि आज हम सुख, शान्ति, शक्ति, आनन्द, ज्ञान और प्रेम पाने के लिए बाह्य साधनों पर निर्भर करने लगे हैं। आत्मा के भीतर ही इन मूल्यों का अक्षय कोष है यह जान ही नहीं पाते। आत्मा के विकास के प्रश्न को दरकिनार करके आधुनिक मानव प्राथमिक मूल्यों को बाहर खोजता है। आत्मा पर नियंत्रण पाए बगैर इन मूल्यों की खोज में खुद को परिस्थिति के हवाले कर देता है। तब परिस्थिति उसके ‘स्व’ को अपने इशारों पर नचाती है। आत्मतत्व को पुष्ट करने की शिक्षा के बगैर ‘स्व’ तत्व की ऊर्जा को जान पना मुश्किल है। यह शिक्षा प्राचीन भारत में विद्यमान थी। आज क्वांटम सिद्धांत में भी ऊर्जा के अनगिनत रूप होने की बात की जा रही है। लेकिन नई पीढ़ी विद्यालय स्तर से ऊर्जा के कुछ सीमित रूपों के बारे में ही जान पाती है तभी वह समझ भी नहीं सकती कि विचार भी एक ऊर्जा ही है। इंसान का दिमाग कम्प्यूटर के रैम की तरह है। इसमें से नकारात्मक स्मृतियों को डिलीट करने की जरूरत पड़ती है। क्योंकि ऐसी स्मृतियाँ वैचारिक ऊर्जा को अपने दायरे में फँसाकर उन्हें या तो नष्ट करती है या फिर उनसे नकारात्मक ऊर्जा को जन्म देती हैं। जिसे हम मनोवैज्ञानिक स्तर पर ईर्ष्या, द्वेष, घृणा जैसे तमाम भावों के रूप में महसूस करते हैं। एक बार किसी नकारात्मक स्मृति पर ध्यान केन्द्रित करके उससे शरीर पर तत्क्षण पड़ने वाले प्रभाव को महसूस करने की कोशिश करें तो वैचारिक ऊर्जा के प्रभाव का पता चल जाएगा। ठीक उसके बाद किसी शुभचिंता से भरी स्मृति को केन्द्र में रखकर यही प्रयोग किया जाए तो वैचारिक ऊर्जा के स्फूर्ति दायक लक्षण को भी महसूस किया जा सकता है।
वर्तमान शिक्षा विद्यार्थियों को परिस्थिति से मुकाबला करने का प्रशिक्षण नहीं देती। बल्कि शिक्षित होकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की बात करती है। और इसी को सफलता कहती है। व्यक्ति शिक्षित होकर आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनने से पहले अनगिनत दौरों से गुजरता है। अनगिनत लोगों के संपर्क में आता है, अनगिनत अनुभव अपनी झोली में बटोर लेता है, अनगिनत परिस्थितियों से टकराकर मन को स्थिर और आश्वस्त करने के लिए संघर्ष से गुजरता है। इस क्रम में कभी उसका अहं तो कभी संस्कार मन में बवंडर खड़ा करते हैं। वह इन बवंडरों से भी गुजरता है। अनजानी इच्छाएँ परिवेश से आकर उसके मन में घर जमा लेती हैं। इन इच्छाओं की पूर्ति और अपूर्ति के हिंडोलों में भी वह शिक्षित होने का प्रमाणपत्र पाने तक झूल लेता है। शिक्षित होने तक आत्मा के स्तर पर व्यक्ति इतना कुछ झेल लेता है। आत्मतत्व को समझने, उसे स्थिर और पुष्ट रखने के सुनिश्चित प्रशिक्षण के बगैर ही इन हालातों से टकराते हुए संस्कार उसके भीतर आकार लेने लगते हैं। परिस्थितियों के ठेलम ठेल में संस्कारों को यूं ही तैयार होने की इजाजत न देकर वैज्ञानिक ढंग से आत्म शिक्षा के जरिए इसे बचपन से ही तैयार करने की कोशिश की जाए तो समाज में सकारात्मक मूल्यों का प्रसार हो सकता है। लेकिन यह प्रशिक्षण विज्ञान सम्मत ढंग से एक अलग पाठ्यक्रम के संरचना की गुंजाइश रखता है।
यह बहुत बड़ी विडम्बना है कि व्यक्ति अपनी वैचारिक ऊर्जा को नजरअंदाज करके ऊर्जा के बाह्य साधनों की ही बात करता रहा है। हकीकत तो यह है कि वैचारिक ऊर्जा को जब उसने ऊर्जा के बाह्य साधनों को समझने में लगया तब उन साधनों का राज़ उसके सामने खुला। ऐसे ही सृष्टि में अनगिनत साधन हैं जिन्हें खोलने की चाभी व्यक्ति की वैचारिक ऊर्जा ही है। इस लिहाज से देखें तो वैचारिक ऊर्जा को पैदा करने वाली आत्मशक्ति इस सृष्टि का कितना बड़ा तोहफा है। व्यक्ति में एक मिनट में पच्चीस से तीस किस्म के विचार जन्म लेते हैं। दिन भर में मन में उठने वाले विचारों की संख्या कितनी विशाल होती है यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन व्यक्ति अगर अपने मन में उठने वाले विचारों के प्रति सचेत न हो तो उसके भीतर से पैदा होने वाली यह ऊर्जा दिन में किस परिमाण में नष्ट होती है, इसका अंदाज लगाना कठिन नहीं है। आत्मशक्ति को जानने और नियंत्रित करने का प्रशिक्षण मिले तो दिन भर में फलदायक विचारों को पैदा करके उन्हें सुनिश्चित दिशा में प्रवाहित किया जा सकता है। इस तरह किसी क्षेत्र में निवेश की गई वैचरिक ऊर्जा से उस क्षेत्र को जानने का द्वार खुल सकता है। हर व्यक्ति का आत्मतत्व अनोखा और मौलिक है। इस आत्मतत्व को जानने के लिए ऊर्जा का निवेश करने का प्रशिक्षण अनगिनत लोगों को सृष्टि के अनगिनत सत्यों को जानने का मौका दे सकती है। यहाँ एक बात गौरतलब है कि विकारमुक्तता आत्मा की सर्वाधिक परिपुष्ट स्थिति है। अंतर्मन में उठने वाले विचारों को सचेत होकर देखना और नकारात्मक विचारों को पहचान कर खुद को उससे मुक्त करते रहने की प्रक्रिया ही आत्मा को उत्तरोत्तर सशक्त बनाने की प्रक्रिया है। आत्मिक दृष्टि से सशक्त व्यक्ति का रिमोट परिस्थिति के हाथ में नहीं होता। बल्कि वह अपने चुनाव के अधिकार का प्रयोग करते हुए सूझबूझ के साथ अपनी प्रतिक्रिया का चुनाव करता है। उसकी आत्मा का पासवर्ड सिर्फ उसके पास होता है। वह किसी अनिष्टकारी सोच को अपने आत्मतत्व को विचलित करने की इजाजत नहीं देता।
आधुनिक समाज में भौतिक साधनों के आधार पर जीवन स्तर को नापा जाता है। आन्तरिक साधनों की घोर उपेक्षा के कारण ऊँचा जीवन स्तर हासिल करने के बावजूद भी धन सम्पन्न लोगों के जीवन में गुणवत्ता की कमी पाई जाती है। आत्मतत्व को समृद्ध करने की शिक्षा के बगैर जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के सवाल पर विचार करना नामुमकिन है। आज समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ आत्मविकास की शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है। समाज हो या साहित्य सबमें आत्मस्खलन और आत्मा के संकट का प्रश्न ही मुँह बाए खड़ा है। आत्मस्खलन के चलते सांस्कृतिक संकट की जड़ें जीवन और समाज में गहराती जा रही हैं। इस संकट को चुनौती देना आज के युग की बहुत बड़ी माँग है।

सम्पर्क

नं. 2, देशबन्धु नगर
पो. – सोदपुर,
कोलकाता – 700110
दूरभाष – 9231622659

पढ़ने की संस्कृति : एक प्रस्ताव

यदि आप अपने विद्यालय में पुस्तकों का कोना आरंभ करना चाहते हैं तो यह प्रस्ताव आपके लिए है। जब बच्चों के आस-पास किताबें तथा पत्रिकायें होती हैं तो वे उन्हें पलटते और टटोलते हुए एक दिन पढ़ने के शौकीन बन जाते हैं। शैक्षिक दख़ल पुस्तकालय में हमारे पास साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ के अलावा हिंदी साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं हंस, कथादेश, लमही, परिकथा, पाखी, कथाक्रम, वागर्थ, वसुधा, आधारशिला, इंद्रप्रस्थ भारती, लोकगंगा आदि के दो दशकों के चुनिंदा दुर्लभ अंक हैं, जिनमें हिंदी के श्रेष्ठ साहित्य सहित दुनिया की भाषाओं से अनुदित साहित्य उपलब्ध है। हमने 25 से 30 पत्रिकाओं के कुछ बंडल बनाये हैं, जिन्हें हम निशुल्क इंटर कॉलेजों की 11-12 वीं कक्षाओं में ‘पुस्तक कोने’ के लिए देना चाहते हैं।

हमारी अपेक्षाएं-

01. पत्रिकाओं के बंडल सीमित हैं। अतः पहले आओ-पहले पाओ की शर्त पर उपलब्ध रहेंगे।

02. योजना सिर्फ इंटर कॉलेजों की 11 व 12 वीं कक्षाओं हेतु है, जहां आप एक मेज पर इन पत्रिकाओं को रख देंगे तथा मॉनिटर को उनके रख-रखाव तथा आदान-प्रदान का दायित्व दे देंगे। यदि आपके विद्यालय में जीवंत (कार्यशील) पुस्तकालय है तो आप इन पत्रिकाओं को वहां भी रख सकते हैं।

03. पत्रिकाओं के बंडल शैक्षिक दख़ल पुस्तकालय, निकट कामाख्या मंदिर, रानीबाग (नैनीताल) से आपको खुद ही ले जाने होंगे।

अपनी सहमति देकर साहित्य की इन दुर्लभ पत्रिकाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में योगदान दीजिए।

(प्रारूप)

सम्पर्क – दिनेश कर्नाटक 9411793190

क्या आप क्लास 5 से बेहतर हिन्दी जानते हैं?

कोलकाता :  भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज की लाइब्रेरी में अनौपचारिक हिन्दी गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था” क्या आप क्लास 5 से बेहतर हिन्दी जानते हैं?” प्रो दिलीप शाह ने हिन्दी भाषा के विकास पर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि हिन्दी हमारी मातृभाषा है उसे अधिक से अधिक बोलना और सीखना चाहिए। सीखो, जानो और परखो के आधार पर इस कार्यक्रम में डॉ वसुंधरा मिश्र ने सबसे पहले उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए हिन्दी की विशेषता पर प्रकाश डाला। हिन्दी में सभी भाषाओं के शब्द मिलते हैं। भारत के एक बड़े हिस्से में बोली जाने वाली हिन्दी विदेश में 175 विश्वविद्यालयों में पढाई जा रही है। चीनी भाषा के बाद पूरे विश्व में हिन्दी द्वितीय भाषा है। हिन्दी दिवस के अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने हिन्दी क्विज जिसमें समास, वाक्य प्रयोग, पर्यायवाची, शुद्ध शब्द, मुहावरों के प्रयोग करवाये गए। अंजलि दूबे, रक्षा मिश्रा, निधि, वसुंधरा, हर्षिता मुदित, श्रेयांश मिश्रा आदि विद्यार्थियों ने स्वरचित हिंदी में कविताओं का पाठ किया एवं गीत गायन किया। इस अवसर पर सभी शिक्षकगणों और विद्यार्थियों ने अपने नाम और मोबाइल नंबर हिंदी में लिखे। डॉ वसुंधरा मिश्र ने “हिन्दी की रेल चली हिन्दी की रेल चली” कविता सुनाई। शिक्षिकाओं में रिचा कोठारी, समरीन आलम, नेहा मूंधड़ा ने हिन्दी क्विज में सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन धर्मेश दुधेरिया और संयोजन मंदिरा गुप्ता, रक्षा मिश्रा ने किया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने धन्यवाद दिया

भवानीपुर कॉलेज में एन एन एस की ओर से बच्चों को मिलीं उम्मीद की किरणें

कोलकाता :  भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज की एन एस एस ने अनाथ बच्चों के लिए “रे ऑफ होप” कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें 200 से अधिक बच्चों को आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर तीन एनजीओ के सहयोग से बच्चों को बुलाया गया। यहाँ उन्होंने कॉलेज में शॉपिंग, मनोरंजन, खाना पीना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह और प्रबन्धन के प्रमुख सदस्यों की ने और विद्यार्थियों ने इसमें शामिल हो अपना सहयोग दिया। बच्चों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आनंद लिया। आशा और उम्मीद की रोशनी ऐसे बच्चों के जीवन में भी उजियारा लाए इस आशय से बच्चों को कुछ खुशियां मनाने के लिए कार्यक्रम किया गया। इस पहल को एन एस एस के अधिकारी डॉ दिव्येष शाह ने लिया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

रोहित गुप्ता बने एएससीआई के नये अध्यक्ष

मुम्बई : एडवर्टाइज़िंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) की 33वीं वार्षिक आम बैठक के बाद आज, बोर्ड की बैठक में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के अध्यक्ष रोहित गुप्ता को सर्वसम्मति से एएससीआई के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स का अध्यक्ष चुन लिया गया। रोहित गुप्ता ने उपभोक्ता, मीडिया और मनोरंजन के उद्योगों में प्रमुख नेतृत्व के पदों पर 30 वर्षों से अधिक का समय बिताया है। बीबीएच कम्युनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबन्धक सहयोगी, सुभाष कामथ को उपाध्यक्ष चुना गया और शशि सिन्हा, मीडिया ब्रांड्स प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को एक बार फिर मानद कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्यों में शामिल हैं; गिरीश अग्रवाल (निदेशक, दैनिक भास्कर समूह), विकास अग्निहोत्री (निदेशक बिक्री, गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड), प्रसून बासु (अध्यक्ष – दक्षिण एशिया, नीलसन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड),  हरीश भट्ट (निदेशक, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज़ लिमिटेड), मधुसूदन गोपालन (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रॉक्टर एंड गैंबल हाइजीन एंड हेल्थ केयर लिमिटेड), संदीप कोहली (कार्यकारी निदेशक और उपाध्यक्ष, पर्सनल केयर हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड), प्रो. एस.के. पालेकर (अनुबंधक प्रोफेसर एवं सलाहकार, एक्सिक्यूटिव एजुकेशन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी),  एन.एस. राजन (प्रबंध निदेशक, केचम सम्पर्क प्राइवेट लिमिटेड),   अंबति शंकरनारायणन (पूर्व उपाध्यक्ष, सीआईएबीसी),   डी शिवकुमार (समूह कार्यकारी अध्यक्ष, आदित्य बिड़ला मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड),    उमेश श्रीखंडे (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, टैपरुट इंडिया कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड),  के.वी. श्रीधर (संस्थापक और मुख्य क्रिएटिव ऑफिसर (निदेशक), हाइपर कलेक्टिव क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड),  शिवकुमार सुंदरम (अध्यक्ष आय, बेनेट कोलमन एंड कंपनी लिमिटेड)।