Friday, April 24, 2026
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पेट्रोल पंपों पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर अब नहीं मिलेगी कोई छूट

नयी दिल्ली : पेट्रोल पंपों पर ईंधन खरीदने पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर अब कोई छूट नहीं मिलेगी। अभी तक सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां क्रेडिट कार्ड से ईंधन के लिए भुगतान पर 0.75 प्रतिशत की छूट दे रही थीं। करीब ढाई साल पहले डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई थी। देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को भेजे एसएमएस में कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की सलाह पर एक अक्टूबर से पेट्रोल पंपों से ईंधन की खरीद पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर मिलने वाली 0.75 प्रतिशत की छूट को बंद किया जा रहा है। वर्ष 2016 के आखिर में नोटबंदी के बाद सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कम्पनियों इंडियन आयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) को ईंधन की खरीद के लिए कार्ड से भुगतान पर 0.75 प्रतिशत की छूट देने का निर्देश दिया था। क्रेडिट-डेबिट कार्ड और ई-वॉलेट के जरिये 0.75 प्रतिशत की छूट को दिसंबर, 2016 में शुरू किया गया था। यह व्यवस्था ढाई साल से अधिक समय तक चली। अब इसे बंद करने का फैसला किया गया है। नकद छूट के अलावा सरकार ने पेट्रोलियम कम्पनियों को कार्ड भुगतान शुल्क मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) का बोझ भी वहन करने को कहा था। आमतौर पर एमडीआर की लागत रिटेलर द्वारा वहन की जाती है।

अमिताभ बच्चन को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार

नयी दिल्ली : प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन को इस साल का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार देने का एलान किया गया है। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार किसी कलाकार के लिए भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्विटर पर इस खबर की पुष्टि की। जावड़ेकर ने ट्वीट किया ‘‘दो पीढ़ियों का मनोरंजन तथा उन्हें प्रेरित करने वाले कलाकार अमिताभ बच्चन को सर्वसम्मति से दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है। पूरा देश एवं अंतरराष्ट्रीय समुदाय प्रसन्न है। उन्हें मेरी ओर से हार्दिक बधाई।’’ 76 वर्षीय अमिताभ बच्चन ने 1970 के दशक में ‘‘जंजीर’’, ‘‘दीवार’’ और ‘‘शोले’’ जैसी फिल्मों के माध्यम से युवा पीढ़ी के गुस्से को अभिव्यक्ति दी और उन्हें ‘‘एंग्री यंग मैन’’ कहा गया। 1970 के दशक से शुरू हुआ अमिताभ का स्टारडम भारतीय सिनेमा में अब तक जारी है। अपने पाँच दशक के कॅरियर में अमिताभ ने कई यादगार फिल्में दीं और उन्हें चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बड़े पर्दे पर अपने अभिनय का करिश्मा बिखेरने वाले अमिताभ बच्चन ने छोटे पर्दे यानी टीवी पर भी खासी सफलता हासिल की।

भारत में नेपाल के हैं सर्वाधिक विदेशी छात्र, उच्च शिक्षा के लिए कर्नाटक बना पसन्द : एचआरडी

नयी दिल्ली :  भारत में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों में सर्वाधिक छात्र नेपाल के हैं और इस मामले में दूसरे नंबर पर अफगानिस्तान हैं। इसके साथ ही भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विदेशी छात्रों का पसंदीदा राज्य कर्नाटक है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में यह बताया गया है। भारत में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या विदेशी छात्राओं से अधिक है। विदेशी छात्रों के बीच बी-टेक सबसे लोकप्रिय पाठ्यक्रम है। इस मामले में दूसरे नंबर पर बीबीए पाठ्यक्रम है। उच्च शिक्षा के लिए पंजीकरण कराने वाले विदेशी छात्रों की संख्या 47,427 है। कर्नाटक में सर्वाधिक 10,023 विदेशी छात्र पढ़ते हैं। इसके बाद महाराष्ट्र (5003), पंजाब (4533), उत्तर प्रदेश (4514), तमिलनाडु (4101), हरियाणा (2872), दिल्ली (2141), गुजरात (2068) और तेलंगाना (2020) का नाम आता है। एचआरडी मंत्रालय के अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के अनुसार, ‘‘विश्वभर के 164 देशों के विदेशी छात्र भारत में पढ़ते हैं। पंजीकरण कराने वाले कुल विदेशी छात्रों के 63.7 प्रतिशत छात्र शीर्ष 10 देशों के हैं। सर्वाधिक (26.88 प्रतिशत) छात्र नेपाल के हैं। इसके बाद अफगानिस्तान (9.8 प्रतिशत), बांग्लादेश (4.38 प्रतिशत), सूडान (4.02 प्रतिशत), भूटान (3.82 प्रतिशत) और नाइजीरिया (3.4 प्रतिशत) के छात्र हैं।’’ इसमें बताया गया कि अमेरिका के 3.2 प्रतिशत, यमन के 3.2 प्रतिशत, श्रीलंका के 2.64 प्रतिशत और ईरान के 2.38 प्रतिशत छात्र हैं। पीएचडी के लिए पंजीकरण कराने वाले विदेशी छात्रों के मामले में इथियोपिया (295) सबसे आगे है और उसके बाद यमन (149) का नाम आता है। आँकड़ों के अनुसार सर्वाधिक संख्या में विदेशी छात्रों ने स्नातक के पाठ्यक्रमों (73.4 प्रतिशत) के लिए पंजीकरण कराया है जबकि स्नातकोत्तर के लिए 16.15 प्रतिशत विदेशी छात्रों ने पंजीकरण कराया है। रिपोर्ट के अनुसार विदेशी छात्रों के बीच सबसे लोकप्रिय पाठ्यक्रम बी-टेक (8,861 छात्र) है। इसके अलावा बीबीए (3354), बीएससी (3320) , बीए (2226), बी-फार्मा, बीसीए, एमबीबीएस, नर्सिंग और बीडीएस भी लोकप्रिय हैं। वार्षिक सर्वेक्षण के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों को तीन व्यापक वर्गों विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों और स्वतंत्र संस्थानों में बांटा गया है। वर्ष 2018-19 के सर्वेक्षण में कुल 962 विश्वविद्यालयों, 38,179 महाविद्यालयों और 9190 स्वतंत्र संस्थानों ने हिस्सा लिया।

नयी दिल्ली भारत में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों में सर्वाधिक छात्र नेपाल के हैं और इस मामले में दूसरे नंबर पर अफगानिस्तान हैं। इसके साथ ही भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विदेशी छात्रों का पसंदीदा राज्य कर्नाटक है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में यह बताया गया है। भारत में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या विदेशी छात्राओं से अधिक है। विदेशी छात्रों के बीच बी-टेक सबसे लोकप्रिय पाठ्यक्रम है। इस मामले में दूसरे नंबर पर बीबीए पाठ्यक्रम है। उच्च शिक्षा के लिए पंजीकरण कराने वाले विदेशी छात्रों की संख्या 47,427 है।

कर्नाटक में सर्वाधिक 10,023 विदेशी छात्र पढ़ते हैं। इसके बाद महाराष्ट्र (5003), पंजाब (4533), उत्तर प्रदेश (4514), तमिलनाडु (4101), हरियाणा (2872), दिल्ली (2141), गुजरात (2068) और तेलंगाना (2020) का नाम आता है। एचआरडी मंत्रालय के अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के अनुसार, ‘‘विश्वभर के 164 देशों के विदेशी छात्र भारत में पढ़ते हैं। पंजीकरण कराने वाले कुल विदेशी छात्रों के 63.7 प्रतिशत छात्र शीर्ष 10 देशों के हैं। सर्वाधिक (26.88 प्रतिशत) छात्र नेपाल के हैं। इसके बाद अफगानिस्तान (9.8 प्रतिशत), बांग्लादेश (4.38 प्रतिशत), सूडान (4.02 प्रतिशत), भूटान (3.82 प्रतिशत) और नाइजीरिया (3.4 प्रतिशत) के छात्र हैं।’’ इसमें बताया गया कि अमेरिका के 3.2 प्रतिशत, यमन के 3.2 प्रतिशत, श्रीलंका के 2.64 प्रतिशत और ईरान के 2.38 प्रतिशत छात्र हैं। पीएचडी के लिए पंजीकरण कराने वाले विदेशी छात्रों के मामले में इथियोपिया (295) सबसे आगे है और उसके बाद यमन (149) का नाम आता है। आँकड़ों के अनुसार सर्वाधिक संख्या में विदेशी छात्रों ने स्नातक के पाठ्यक्रमों (73.4 प्रतिशत) के लिए पंजीकरण कराया है जबकि स्नातकोत्तर के लिए 16.15 प्रतिशत विदेशी छात्रों ने पंजीकरण कराया है।

रिपोर्ट के अनुसार विदेशी छात्रों के बीच सबसे लोकप्रिय पाठ्यक्रम बी-टेक (8,861 छात्र) है। इसके अलावा बीबीए (3354), बीएससी (3320) , बीए (2226), बी-फार्मा, बीसीए, एमबीबीएस, नर्सिंग और बीडीएस भी लोकप्रिय हैं।

वार्षिक सर्वेक्षण के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों को तीन व्यापक वर्गों विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों और स्वतंत्र संस्थानों में बांटा गया है। वर्ष 2018-19 के सर्वेक्षण में कुल 962 विश्वविद्यालयों, 38,179 महाविद्यालयों और 9190 स्वतंत्र संस्थानों ने हिस्सा लिया।

पूर्व दिग्गज क्रिकेटर माधव आप्टे का निधन

मुम्बई : पूर्व दिग्गज क्रिकेटर माधव आप्टे का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। आप्टे के परिवार के सदस्य ने यह जानकारी दी। वह 86 बरस के थे। भारत और मुंबई के बीच पूर्व सलामी बल्लेबाज माधव आप्टे को ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां सुबह छह बजकर नौ मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके बेटे वामन आप्टे ने पीटीआई को यह जानकारी दी। माधव आप्टे ने भारत की ओर से सात टेस्ट में एक शतक और तीन अर्धशतक की मदद से 542 रन बनाए। उनका शीर्ष स्कोर नाबाद 163 रन रहा। प्रथम श्रेणी में माधव आप्टे ने 67 मैचों में छह शतक और 16 अर्धशतक की बदौलत 3336 रन जुटाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका शीर्ष स्कोर नाबाद 165 रन रहा। माधव आप्टे ने नवंबर 1952 में पाकिस्तान के खिलाफ क्रिकेट क्लब आफ इंडिया में टेस्ट पदार्पण किया और अपना अंतिम टेस्ट अप्रैल 1953 को किंग्सटन में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला। उन्होंने अपने पदार्पण टेस्ट में 30 और नाबाद 10 रन की पारियां खेली।

वह किसी टेस्ट श्रृंखला में 400 से अधिक रन बनाने वाले पहले भारतीय सलामी बल्लेबाज थे। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ 1953 में 460 रन बनाकर यह उपलब्धि हासिल की।

माधव आप्टे को एक अन्य दिग्गज बल्लेबाज वीनू मांकड़ ने सलामी बल्लेबाज की भूमिका सौंपी थी। वह बाद में घरेलू क्रिेकेट में मुंबई के कप्तान भी बने। वह अपने करियर के दौरान मांकड़, पोली उमरीगर, विजय हजारे और रूसी मोदी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ खेले। वह प्रतिष्ठित सीसीआई के अध्यक्ष भी रहे।

परमब्रत चटर्जी बनेंगे नये व्योमकेश

कोलकाता : अभिनेता परमब्रत चटर्जी ने बताया कि उनकी आने वाली फिल्म सत्यन्वेषी व्योमकेश1970 के सामाजिक-राजनीतिक घटनाक्रम के आसपास बुनी गई है। इसमें नक्सली हिंसा से लेकर बांग्लादेश मुक्ति संग्राम तक का जिक्र है। चटर्जी कहानीफिल्म में किए गए अपने अभिनय के लिए भी जाने जाते हैं। चटर्जी सत्यन्वेषी व्योमकेशमें मुख्य भूमिका में हैं। व्योमकेश पात्र पहली बार सरदेन्दु बंदोपाध्याय की 1963 की थ्रिलर फिल्म मोगनो मोइनकपर आधारित है। अभिनेता ने कहा, ‘‘ मेरा मानना है कि इस फिल्म में व्योमकेश पिछली फिल्मों की अपेक्षा ज्यादा राजनीतिक व्यक्ति है और उसका विभिन्न मुद्दों पर अपना रुख भी है।’’

1700 साल पहले डूबे जहाज पर मिले रोमन साम्राज्य काल के 200 जार 

मैड्रिड :  स्पेन के बेलेरिक आईलैंड के मेजोरका तट से कुछ दूर समुद्र में 1700 साल पहले डूबे जहाज पर रोमन साम्राज्य काल के 200 से अधिक जार मिले हैं। इनमें से 100 अच्छी स्थिति हैं। माना जा रहा है इनका इस्तेमाल, मछली की चटनी, ऑलिव ऑइल और शराब को रखने के लिए किया जाता था। इन्हें जुलाई माह में फेलिक्स अलारकोन और उनकी पत्नी ने खोजा था।  फेलिक्स अलारकोन ने बताया कि ये जार 33 फीट लंबे और 16 फीट चौड़े पुराने जहाज के मलबे में पाए गए। समुद्री पानी और नमक की वजह से इनके दो हैंडल जाम हो गए हैं और अभी तक खोला नहीं गया है। पुरातत्ववेत्ताओं ने इन्हें बड़ी सुरक्षा के साथ जहाज के मलबे से बाहर निकाला है। बेलेरिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेरीटाइम आर्केलॉजी स्टडीज के प्रमुख पुरातत्ववेत्ता सेबेस्टियन मुनर ने बताया, इन्हें जहाज में बड़ी सुरक्षा के साथ संरक्षित किया गया था। यह व्यापारी जहाज मेलोर्का और स्पेन के बीच ट्रांसपोर्ट का काम करता था।

मेलोर्का के संग्रहालय भेजे गए जार

विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज के शेष बचे नाजुक हिस्सों को देखकर लगता है कि यह किसी तूफान के कारण नहीं डूबा था। जार निकालने का काम स्पेनिश नौसेना के जवान और राष्ट्रीय पुलिस के गोताखोरों ने किया। इन जारों को मेलोर्का के संग्रहालय में भेज दिया गया है। यहां विश्लेषणकर्ता जार में सुरक्षित चीजों के रखने के पुराने तरीकों को जानेंगे।

4 महीनों में नमक की परत हटेगी

मेलोर्का विरासत परिषद की डायरेक्टर कीका कोल ने बताया, जारों को पहले 4 महीनों तक स्वीमिंग पूल में रखा जाएगा। ताकि उन पर नमक के पानी की परत को हटाया जा सके। यह प्रक्रिया जरूरी है ताकि समुद्री पानी की परत से जाम जार खोलने पर चटक या टूट न जाएं। यह समुद्र में 1700 साल पड़े रहे हैं। लिहाजा हम कोई गलती नहीं करना चाहते हैं। एक दिन हम इन पर लिखे आलेख भी समझ जाएंगे। हम उनके व्यापार के तरीकों, पैकेजिंग, उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थात तक भेजने के तरीकों का अध्ययन करेंगे।

यहाँ कालीधार पहाड़ी पर अग्निरूप में हैं ज्वालादेवी

180 साल पहले फिर से बनवाया गया था मंदिर

 हिमाचल प्रदेश की कालीधार पहाड़ी पर ज्वाला देवी मंदिर में देवी को ज्योता वाली माँ भी कहा जाता है, क्योंकि मां के नौ रूप यहाँ अग्नि के रूप में हैं। बगैर तेल और बाती के यह ज्योत वर्षों से जल रही है। इस बार प्रबन्धन ने स्वच्छता के लिए यहां प्लास्टिक की थैली, थाली और ग्लास पर प्रतिबंध लगा दिया है। नवरात्र के आरंभिक दिनों में 50 से 60 हजार भक्त रोज आएंगे तो अंतिम दिनों में संख्या एक लाख के पार कर जाएगी।

मंदिर के पुजारी संदीप शर्मा बताते हैं कि यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस बार नवरात्र में 8 से 10 लाख लोगों के आने का अनुमान है। नौ ज्वालाओं में प्रमुख ज्वाला जी चांदी के दीये के बीच स्थित हैं। उन्हें महाकाली कहा जाता है। अन्य आठ ज्वालाओं में मां अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजी देवी हैं। मान्यता है कि इसी जगह पर मां सती की जिह्वा गिरी थी।

दिन में 5 बार होती है आरती

आरती के समय सुन्दर नजारा होता है। दिन में 5 बार आरती होती है। सुबह पांच बजे पहली आरती में मालपुआ, खोआ, मिस्री का प्रसाद चढ़ाया जाता है। एक घंटे बाद दूसरी आरती में पीले चावल और दही का भोग लगता है। तीसरी आरती दोपहर में होती है। इसमें चावल, छह दालों व मिठाई का भोग होता है। शाम को चौथी आरती में पूरी-चना और हल्वे का भोग। रात नौ बजे शयन आरती, सौंदर्यलहरी का गान और सोलह शृंगार होता है। इसके बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। नवरात्र पर यहाँ विशेष मेला लगता है, जो 8 अक्टूबर तक चलेगा। वर्तमान मंदिर का पूरा निर्माण महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने 1835 में करवाया था। मुख्य मंदिर के पास गोरखनाथ का मंदिर भी है। पास ही गोरख डिब्बी है, जो एक कुंड है। कुंड का पानी खौलता हुआ दिखता है, लेकिन छूने पर ठंडा होता है।

बांग्लादेश / भबानीपुर शक्तिपीठ में मां का अपर्णा रूप, नवरात्र में होता है सिर्फ कलश पूजन

देवी के 51 शक्तिपीठों में से चार बांग्लादेश में हैं। इनमें से एक है, बगोरा जिले के शेरपुर कस्बे से 28 किलोमीटर दूर करतोय नदी के तट पर भबानीपुर शक्तिपीठ। यहां नवरात्र में कलश पूजा होती है, प्रतिमा की नहीं। पुजारी रवींद्र नाथ भादुड़ी बताते हैं, रोज 300 से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं, लेकिन नवरात्र में आने वालों की संख्या हजारों में होती है। भारत से भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं।

पाँच एकड़ में फैला है मंदिर परिसर

मंदिर प्रबंध समिति के शिवाशीष पोद्दार के अनुसार राजा रामकिशन ने 17वीं और 18वीं शताब्दी के बीच यहां 11 मंदिर बनवाए थे। तब उन्होंने इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार करवाया था। यह शक्तिपीठ लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में फैला है। यहां देवी के अपर्णा रूप की पूजा होती है। अपर्णा का अर्थ है- जो भगवान शिव को अर्पित है। हर शक्तिपीठ पर देवी के साथ भैरव भी होते हैं। यहां के भैरव का नाम वामन हैं।

दिन में 3 बार भोग के साथ होती है आरती

यहां दिन में तीन बार आरती की परपंरा है। सुबह की आरती को बाल्य भोग कहा जाता है। दोपहर की आरती में अन्न भोग और शाम को महाभोग कहा जाता है। यहां स्थापित भैरव का नाम वामन है। आम दिनों में यहां काली की पूजा होती है। लेकिन नवरात्र में कलश पूजा की परंपरा है। मान्यता है कि यहां देवी के बाएं पैर की पायल गिरी थी। यहां महासप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी पर पशु बलि भी होती है। मंदिर के पास ही तालाब है, जिसे शक तालाब कहा जाता है। इसमें स्नान के बाद दर्शन किया जाता है। मुस्लिम भी यहां नियमित आते हैं। लॉ की पढ़ाई कर रहीं हुमा इस्लाम बताती हैं कि उनका परिवार रामनवमी सहित बड़े उत्सवों के मौके पर शक्तिपीठ मेले में जाता है। भारत, श्रीलंका, नेपाल से यहां हजारों भक्त आते हैं। बांग्लादेश में भबानीपुर के अलावा खुलना में सुगंध नदी के तट पर सुगंध शक्तिपीठ, चटगांव में चट्टल शक्तिपीठ और जैसाेर खुलना में यशोर शक्तिपीठ भी है।

बेटी बांसुरी ने निभाया अधिवक्ता हरीश साल्वे को एक रुपया देने का माँ सुषमा स्वराज का वादा 

नयी दिल्ली : पूर्व विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी ने अपनी मां का वादा निभाया है। निधन से चंद घंटे पहले उन्होंने वकील हरीश साल्वे को फोन कर कहा था कि घर आओ अपनी 1 रुपये की फीस ले जाओ। लेकिन, उसी दिन 6 अगस्त को सुषमा स्वराज का निधन हो गया था। वरिष्ठ वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे कुलभूषण जाधव केस को हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लड़ने के लिए महज एक रुपए की प्रतीकात्मक फीस ली थी। सुषमा के पति स्वराज कौशल ने शुक्रवार को एक ट्वीट करके बताया, ‘सुषमा स्वराज, बांसुरी ने आज तुम्हारी अंतिम इच्छा को पूरा कर दिया है। कुलभूषण जाधव के केस की फीस का एक रुपया जो आप छोड़ गयी थीं, उसने आज हरीश साल्वे को भेंट कर दिया है।

भोपाल में खुलेगा देश का पहला ई-वेस्ट क्लीनिक

क्लीनिक पर ई- वेस्ट यानी कम्प्यूटर, मोबाइल और चार्जर की प्रोसेसिंग की जाएगी

तीन महीने के पायलट प्रोजेक्ट के तहत ट्रायल होगा

भोपाल : भोपाल में देश का पहला ई- वेस्ट क्लीनिक बनने जा रहा है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) और नगर निगम के बीच इस पर सहमति बन गई है। नगर निगम आयुक्त बी विजय दत्ता ने बताया कि इस क्लीनिक पर ई- वेस्ट यानी कम्प्यूटर से लेकर मोबाइल और चार्जर तक की प्रोसेसिंग की जाएगी। जिस ई- वेस्ट की प्रोसेसिंग संभव नहीं होगी उसका उपयोग कबाड़ से जुगाड़में किया जाएगा और कलाकृति आदि बनाई जाएगी। ई- वेस्ट क्लीनिक संचालित करने वाला भोपाल देश में पहला नगर निगम होगा। तीन महीने तक पायलट प्रोजेक्ट के तहत ट्रायल किया जाएगा। सीपीसीबी दिल्ली से आए डायरेक्टर विनोद कुमार बाबू और एडिशनल डायरेक्टर आनंद कुमार ने नगर निगम आयुक्त बी विजय दत्ता से चर्चा के बाद देश का पहला ई- वेस्ट क्लीनिक भोपाल में खोलने पर सहमति जताई। आयुक्त दत्ता ने बताया कि निगम इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनियों के साथ एमओयू करेगा। इस एमओयू के तहत निगम ई- वेस्ट कलेक्ट करेगा और यह कंपनियां अपने प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग इस क्लीनिक पर करेंगी।

दो साल पहले ‘कबाड़ से जुगाड़’ के तहत रेडियो लगाया था

क्लीनिक से निकलने वाला प्लास्टिक भी रीसाइकिल होगा, जो मटेरियल किसी काम का नहीं होगा उसका उपयोग सजावट आदि की सामग्री बनाने में होगा। निगम दो साल पहले कबाड़ से जुगाड़के तहत रोशनपुरा चौराहा पर रेडियो लगा चुका है। इस रेडियो पर स्वच्छता के संदेश प्रसारित होते हैं। इस एमओयू से पहले सीपीसीबी के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने नगर निगम के ट्रांसफर स्टेशनों सहित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर और भानपुर स्थित प्लास्टिक रिकवरी सेंटर आदि का निरीक्षण किया।  भोपाल से 435 मीट्रिक टन ई-वेस्ट निकल रहा है और इसमें हर साल 12 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। ई-वेस्ट खुले में फेंकने या कबाड़ी को बेचने पर 3 लाख तक की पेनाल्टी या एक साल जेल हो सकती है

ई वेस्ट कलेक्शन सेंटर भी खुलेंगे

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के तहत नगर निगम को ई- वेस्ट कलेक्शन सेंटर खोले जाना हैं। अब तक भोपाल में कोई कलेक्शन सेंटर नहीं है। सीपीसीबी के अफसरों ने कहा कि भविष्य की प्लानिंग को देखते हुए भोपाल में ई- वेस्ट कलेक्शन और प्रोसेसिंग सेंटर की संभावनाएं बहुत अच्छी हैं। जब हम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों यानि कम्प्यूटर, मोबाइल फोन, प्रिंटर्स, फोटोकॉपी मशीन, इन्वर्टर, यूपीएस, एलसीडी/टेलीविजन, रेडियो, ट्रांजिस्टर, डिजिटल कैमरा आदि को लम्बे समय तक उपयोग के बाद खराब हुए उपकरण को ई-वेस्ट कहा जाता है। असुरक्षित तरीके ई-कचरे को रिसाइकल करने के दौरान निकलने वाले रसायनों के सम्पर्क में आने से स्किन डिसीज, लंग कैंसर के साथ नर्वस सिस्टम, किडनी, हार्ट और लिवर को भी नुकसान पहुंच सकता है। इस ई- वेस्ट को खुले में फेंकने पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। 2012 में नगर निगम ने शहर में पांच स्थानों पर ई- वेस्ट कलेक्शन सेंटर शुरू किए थे, लेकिन यह कुछ ही समय में बंद हो गए। 2015 में एनजीटी ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि ई- वेस्ट कलेक्शन सेंटर खोले जाएं। इसके बाद इंदौर में तो ऐसा सेंटर खुला, लेकिन भोपाल इससे अछूता ही था और भोपाल का ई- वेस्ट या तो दफ्तरों और घरों में पड़ा हुआ है या वह साधारण कचरे में पहुँच रहा है।