Friday, April 24, 2026
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दुनिया में पहली बार कपड़े पर मुद्रित सम्पत्ति दस्तावेज के डिजिटल प्रिंट का हुआ रजिस्ट्रेशन

सूरत : गुजरात में पहली बार कपड़े पर हिन्दी में मुद्रित सम्पत्ति दस्तावेज का रजिस्ट्रेशन किया गया। कपड़े पर दस्तावेज की डिजिटल प्रिंटिंग कराकर प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन अधिवक्ता अरुण लाहोटी ने कराया। उनका दावा है कि यह दुनिया में पहली बार कपड़े पर सम्पत्ति रजिस्ट्रेशन है। शनिवार को सूरत की बहुमाली ए बिल्डिंग में सब रजिस्ट्रार नानपुरा एके पटेल ने संजय बाबूलाल सुराना के नाम से इस दस्तावेज पर संपत्ति का रजिस्ट्रेशन किया। सुराना ने अपनी संपत्ति के रजिस्ट्रेशन का दस्तावेज कपड़े पर बनाने की इच्छा व्यक्त की थी। डिजिटल प्रिंटिंग साईं प्रिंट्स के रोहित कपूर ने किया। दस्तावेज की डिजाइन अनुराधा कपिल सोमानी ने बनाई। कपड़े पर दस्तावेज की कानूनी प्रक्रिया में 3 से 4 महीने लग गए। यह दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट, लॉ म्यूजियम, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड आदि को भेजा जाएगा।
ताड़पत्र और सोने चांदी के भी दस्तावेज बनाए
अरुण लाहोटी का दावा है कि विश्व में ताड़पत्र पर प्रथम दस्तावेज 25 जनवरी 2017 को किया गया था। 27 नवंबर 2018 को सोने-चांदी और हीरे से जड़ित विश्व का पहला दस्तावेज उन्हीं के द्वारा बनाया गया। अब तक 18 से अधिक विश्व तथा भारतीय रिकॉर्ड उनके नाम पर दर्ज हैं।

अभिनंदन और मिराज की स्क्वॉड्रन, मिंटी की सिग्नल यूनिट को सम्मान

नयी दिल्ली : विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की 51वीं स्क्वॉड्रन और मिराज 2000 की 9 स्क्वॉड्रन, फ्लाइट कंट्रोलर मिंटी अग्रवाल की 601 सिग्नल यूनिट को वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया वायुसेना दिवस पर प्रशस्ति पत्र देंगे। तीनों यूनिट को यह सम्मान 26 फरवरी को बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक करने और 27 फरवरी को पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के हमले को नाकाम करने के लिए दिया जाएगा।
अभिनंदन को वीर चक्र प्रदान किया गया था
73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सरकार ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक को अंजाम देने वाले वायु सैनिकों के लिए वीरता पुरस्कारों का ऐलान किया था। विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को वीर चक्र से नवाजा गया था। उन्होंने एयर स्ट्राइक के अगले दिन पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराया था। वीर चक्र युद्धकाल में अदम्य साहस के लिए दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है। पहले नंबर पर परमवीर चक्र और दूसरे पर महावीर चक्र है। कश्मीर में पाक विमानों की घुसपैठ के दौरान फाइटर कंट्रोलर की जिम्मेदारी संभालने वालीं स्क्वॉड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल को युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। इस बार वीरता पुरस्कार पाने वालों में मिंटी अकेली महिला थीं।
मिराज के पायलटों को मिल चुका है वायुसेना पदक
इसके अलावा 26 फरवरी को एयर स्ट्राइक में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को ध्वस्त करने में शामिल रहे मिराज 2000 के पांच पायलटों को वायुसेना पदक दिया गया था। मिराज की 9 स्क्वॉड्रन के पांचों पायलट विंग कमांडर अमित रंजन, स्क्वॉड्रन लीडर राहुल बासोया, पंकज भुजादे, बीकेएन रेड्डी और शशांक सिंह हैं। इन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर इजराइल में बने स्पाइस बम बरसाए थे। इस दौरान करीब 300 आतंकी मारे गए थे।
सीआरपीएफ काफिले पर फिदायीन हमला हुआ था
कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले की जिम्मेदारी आतंकी मसूद अजहर के संगठन ने ली थी। हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट स्थित जैश के आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी।
भारतीय विमानों ने पाक के एफ-16 को खदेड़ा था
एयर स्ट्राइक से बौखलाए पाकिस्तान ने अगले दिन यानी 27 फरवरी को कुछ एफ-16 विमानों को कश्मीर में भारत के सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए भेजा था। पाकिस्तानी विमानों ने घुसपैठ कर हमले की नाकाम कोशिश की, लेकिन भारतीय वायुसेना की मुस्तैदी से उसके नापाक मंसूबे ध्वस्त हो गए। भारत के मिग-21 और मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने उन्हें खदेड़ा था।

भारत ने 1 मार्च को पायलट अभिनंदन को छुड़वाया था
मिग-21 के पायलट अभिनंदन ने डॉग फाइट में पाक विमान को मार गिराया था। इस दौरान भारतीय विमान भी पीओके में जा गिरा और पाक सैनिकों ने अभिनंदन को पकड़ लिया था। इसके बाद भारत ने कूटनीतिक तरीके से 1 मार्च को उन्हें छुड़ा लिया था

स्टेशनों पर अब बायोडिग्रेडेबल बोतलों में मिलेगा पानी, तेजस से हुई शुरुआत

गोरखपुर : रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अब बायोडिग्रेडेबल बोतल (रेल नीर) में पानी मिलेगा। रेलवे की बाटलिंग प्लांट में ऐसी बोतलें बनने लगी हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लखनऊ से दिल्ली के बीच चल रही देश की पहली तेजस ट्रेन में बायोडिग्रेडेबल बोतलें दी जा रही हैं। जनवरी से सभी एक्सप्रेस ट्रेनों और जंक्शन स्टेशनों पर ऐसी बोतलें उपलब्ध कराने की तैयारी है। भविष्य में उपलब्धता के आधार पर स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर रेलवे ने सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। आईआरसीटीसी ने अब रेल नीर की पैकेजिंग बायोडिग्रेडेबल मैटेरियल से करने का निर्णय लिया है। ये बोतलें स्वत: नष्ट हो जाएंगी।गोरखपुर जंक्शन पर रोजाना 24 हजार पानी की बोतलों की खपत है। गोरखपुर से जाने वाली हर ट्रेन में करीब 500 से 700 बोतलें दी जातीं हैं। खानपान के स्टॉलों से भी रेलनीर की बिक्री की जाती है। देशभर में रेलवे के रेलनीर के 10 प्लांट हैं। जिनकी क्षमता 10.9 लाख लीटर प्रतिदिन है। रेलनीर के चार नए प्लांट 2021 लगाने की तैयारी की है। आईआरसीटीसी के इस प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। आईआरसीटीसी, मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अश्विनी श्रीवास्तव के बताया कि तेजस एक्सप्रेस में यात्रियों को बायोडिग्रेडेबल मैटेरियल से तैयार पानी की बोतलें दी जा रही हैं। अभी मुम्बई प्लांट से बोतलों की आपूर्ति होती है। जल्द ही अन्य प्लांट से भी बोतलों की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। दो से तीन महीने में अन्य ट्रेनों व स्टेशनों पर भी बायोडिग्रेडेबल पानी की बोतलें उपलब्ध कराई जाएंगी।

कीनू के बाग ने किसान को बनाया मालामाल, कमा रहा लाखों

चोपटा : नहरी पानी की कमी, बारिश समय पर न होना, फसलों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां व अन्य प्राकृतिक आपदाओं के आने से किसानों को परंपरागत खेती से घाटा ही होने लगा। जब परम्परागत खेती से आमदनी कम हो जाती है और आर्थिक स्थिति डांवांडोल हो जाती है तो विचलित होना स्वाभाविक है, लेकिन गाँव नारायण खेड़ा (सिरसा) के किसान विकास पूनियां ने हौसला हारने की बजाए कमाई का जरिया खोजा।
उसने अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए 9 वर्ष पूर्व में 25 एकड़ भूमि में कीनू का बाग लगाया। इससे परंपरागत कृषि के साथ अतिरिक्त आमदनी शुरू हो गयी। लीक से हटकर कुछ करने के जज्बे ने विकास को हरियाणा के साथ – साथ निकटवर्ती राजस्थान के आस – पास के गांवों में अलग पहचान भी दिलवाई जिससे किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया। विकास पूनिया ने बताया कि रेतीली जमीन व नहरी पानी की हमेशा कमी के कारण परंपरागत खेती में अच्छी बारिश होने पर तो बचत हो जाती वरना घाटा ही लगता। 9 वर्ष पूर्व तत्कालीन सरकार ने समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया कि किसान खेतों में बाग लगाए तो उन्हें कई प्रकार की रियायतें दी जाएंगी। समाचार पत्रों से पढ़कर स्कीम के बारे में विभाग से जानकारी लेकर व वहां से प्रेरणा लेकर 25 एकड़ जमीन में कीनू का बाग लगाया।
कीनू के पौधों में के साथ – साथ मौसमी फसलें गेहूं, सरसों, ग्वार बाजरा व कपास नरमे की खेती भी करता है। कीनू के बाग से उसे पहले 25 लाख रुपये सालाना अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। उसने बताया कि सरकार के सहयोग से उसने खेत में एक पानी की डिग्गी भी बना ली है। उस डिग्गी में पानी इकट्ठा करके रखता है। जब भी सिंचाई की जरूरत होती है तभी कीनू के पौधों व फसलों मे सिंचाई कर लेता है। वह सिंचाई ड्रिप सिस्टम द्वारा की जाती है, जिससे पानी व खाद व दवाई सीधे पौधों को मिल जाती है तथा पानी बेकार नहीं जाता। आस पड़ोस के किसानों को जब भी सिंचाई के पानी की जरूरत नहीं होती तो वह उन किसानों से किराए पर पानी लेकर डिग्गी भर लेता है।
विकास पूनिया ने बताया कि उसके बाग को देखकर गाँव के कई किसानों ने भी कीनू के बाग लगाकर कमाई शुरू कर दी है। पास लगते कई गाँवों के किसान कीनू का बाग देखने के लिए आते हैं और परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का जरिया देखकर खुश होते हैं। विकास ने बताया कि वह सब्जियां अपने खेत में ही उगाता है, कभी भी बाजार से नहीं लाता। जल्दी सिंचाई की जरूरत नहीं होती।
मंडी दूर होने के कारण यातायात खर्च ज्यादा हो जाता है
विकास पूनिया ने बताया कि उसके गांव से सिरसा मंडी दूर पड़ताी है जिससे फलों को वहां ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है तथा बचत कम होती है। उसका कहना है कि अगर फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट नाथूसरी चोपटा में विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी।

(साभाार – अमर उजाला)

बारहवीं पास पिता -पुत्र ने कबाड़ के स्कूटर इंजन से बना दिया ट्रैक्टर

मंडी : कबाड़ से स्कूटर इंजन खरीदकर पिता-पुत्र ने एक साल में खेत जोतने वाला ट्रैक्टर तैयार कर दिया। सुंदरनगर की पलौहटा पंचायत के नेरी गांव के रमेश कुमार और उनके बेटे जितेंद्र वर्मा ने यह कर दिखाया है। दोनों पिता-पुत्र इंजीनियर नहीं बल्कि बारहवीं पास हैं। 20 हजार रुपये में तैयार किए 55 किलोग्राम के इस ट्रैक्टर में पाXच हल लगे हैं।
रिंग व डबल रिंग तीन प्रकार के टायर वर्जन में बने इस ट्रैक्टर में एक लीटर पेट्रोल डालकर दो बीघा जमीन की जुताई की जा सकती है। रमेश ने बताया कि उन्होंने यू-ट्यूब व अपने मैकेनिकल ज्ञान का उपयोग कर स्कूटर-बाइक के इंजन कबाड़ से खरीदकर उसे हल जोतने वाले ट्रैक्टर में तबदील करने में सफलता प्राप्त की है। कई बार फेल भी हुए लेकिन हिम्मत नहीं हारी और लक्ष्य को पूरा कर लिया। रमेश कुमार के मुताबिक यह ट्रैक्टर पहाड़ी राज्यों के किसानों के लिए वरदान साबित होगा। इसे छोटी से छोटी जगह ले जाया जा सकता है। इसमें वाइब्रेशन न होने के कारण स्वास्थ्य पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
ट्रैक्टर में लगाएंगे और उपकरण
मेश कुमार ने कहा कि इस ट्रैक्टर में भविष्य में बदलाव लाएंगे। इसमें खेत से कचरा, घास व अन्य खरपतवार की सफाई करने के लिए उपकरण लगाएं जाएंगे। जुताई के साथ-साथ इस ट्रैक्टर से खेत की सफाई भी होगी। स्कूटर के इंजन के बाद अब वह मोटरसाइकिल के इंजन से भी ट्रैक्टर बनाने में सफल हो गए हैं। रमेश कुमार ने कहा कि उनका चार सदस्यों का परिवार आईआरडीपी में है। बहू चार साल से किडनी के रोग से जूझ रही है। घर की माली हालत ठीक नहीं है।

एक मुस्लिम परिवार, जो रामलीला में निभाताा है राम-भरत, जनक सहित 6 किरदार

हिसार : हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हम सब भाई-भाई। यह बात हरियाणा के आदमपुर में चल रही गणेश रामलीला में किरदार निभा रहे कलाकारों पर बिल्कुल स्टीक बैठती है। 30 साल से ज्यादा पुरानी रामलीला की खास बात है कि इसमें एक ही परिवार के छह मुस्लिम कलाकार किरदार निभा रहे हैं। इनमें से कोई दुकानदार, कोई पेंटर तो कोई चाय बेचकर परिवार का गुजारा कर रहा है।इन कलाकारों में 40 वर्षीय शहाबुद्दीन कुरैशी राम, 43 वर्षीय अनीफ मोहम्मद, जनक, 36 वर्षीय लतीफ मोहम्मद भरत, 45 वर्षीय सरीफ मोहम्मद, नारद और 38 वर्षीय साजिद कुरैशी मंथरा का किरदार निभा रहे हैं। इतना ही नहीं, राम का रोल निभाने वाले शहाबुद्दीन कुरैशी का 16 वर्षीय बेटा परवेज कुरैशी भी राम के किरदार में अहम भूमिका निभा रहा है। परवेज राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में मैकेनिकल का कोर्स कर रहा है।
राम का किरदार निभाने वाले शहाबुद्दीन को पुकारने लगे राम
आदमपुर की गणेश रामलीला में शहाबुद्दीन कई सालों से राम का रोल ही कर रहे हैं। वह घर में ही परचून की दुकान चलाते हैं। अब उन्हें पड़ोसी भी प्यार से राम कहकर पुकारते हैं। इतना ही नहीं, वह अपने बेटे परवेज को भी रामलीला में रोल करवा रहे हैं। वह खुद अपने बेटे को सिखाते हैं।
छ: में से पाँच कलाकारों की उम्र 35 साल से ज्यादा
वैसे तो रामलीला में करीब 40 कलाकार रोल निभा रहे है, लेकिन इनमें छ: मुस्लिम धर्म के कलाकार शामिल हैं। इन छह कलाकारों में से पाँच की उम्र 35 साल से ज्यादा है। इनमें सबसे बड़े 46 वर्षीय सरीफ मोह्मद है, जो भरत का रोल कर रहे हैं। राम का रोल निभाने वाले शहाबुद्दीन कुरैशी का कहना है कि हमें कोई मुस्लिम नहीं कहता है। हम आपस में सब भाई-भाई हैं।
इसलिए रामलीला में किरदार निभाने का हुआ शौक
40 वर्षीय शहाबुद्दीन कुरैशी का कहना है कि जब वह छोटे थे तो अपने परिवार के साथ रामलीला देखने जाते थे। रामलीला देखते समय एक दिन उनके मन में ख्याल आया कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हम सब भाई-भाई। उसके बाद उन्होंने 12 साल की उम्र में ही रामलीला में रोल करना शुरू कर दिया। फिर धीरे-धीरे उनके परिवार के सदस्य भी रोल करने लगे।

गुफा में मिला 40 हजार साल पुराना कंगन

साइबेरिया में वैज्ञानिकों ने एक अद्भुत खोज की है। उन्हें एक प्राचीन काल का कंगन मिला है, जो 40 हजार साल पुराना बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अब तक खोजे गए गहनों में सबसे पुराना है, जिसे देखकर वो भी हैरान हैं। डेनिसोवन्स कई मायनों में अद्वितीय थे, जो लगभग 10 लाख साल पहले अन्य मानवीय पूर्वजों से दूर हो गए थे। हाल ही में वैज्ञानिकों को एक डेनिसोवन महिला की उंगली की हड्डी और दांत मिले थे, जिससे यह पता चलता है कि उनमें और निएंडरथल या आधुनिक मनुष्यों में कोई रूपात्मक समानता नहीं थी। कंगन की खूबसूरती अपने समय से कम से कम 30,000 साल पहले के तकनीक के स्तर को दर्शाती  है।

अब तक वैज्ञानिकों का मानना था कि इस तरह के कौशल केवल नवपाषाण काल में मनुष्यों के बीच विकसित हुए थे, जो लगभग 10,000 ईसा पूर्व में शुरू हुआ था। जाँच में पता चला है कि यह कंगन क्लोराइट नाम के पत्थर से बना है। यह बहुत ही नाजुक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे कंगन शायद किसी विशेष व्यक्ति के लिए और विशेष अवसरों पर पहनने के लिए बनाए जाते थे, जैसे कि डेनिसोवन राजकुमारी के लिएवैज्ञानिक इस कंगन की चमक देखकर हैरान हैं, क्योंकि तेज धूप में यह सूरज की किरणें पड़ते ही चमकने लगता है और रात में आग की रोशनी में यह हरे रंग की रोशनी बिखेरता है। वैज्ञानिकों को यहां से संगमरमर से बनी एक अंगूठी भी मिली है, लेकिन उन्होंने इसके बारे में अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है।

100 टी-20 अन्तरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली भारत की पहली क्रिकेटर बनीं हरमनप्रीत

नयी दिल्ली : महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर 100 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली भारत की पहली क्रिकेटर बन गयी हैं। हरमनप्रीत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ छठे और अंतिम टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में यह उपलब्धि हासिल की। अगर महिला क्रिकेटरों की बात करें तो हरमनप्रीत 100 टी-20 अन्तरराष्ट्रीय खेलने वाली दुनिया की दसवीं क्रिकेटर हैं। भारतीय महिलाओं में उनके आगे मिताली राज (89) का नम्बर आता है। पुरुष क्रिकेटरों में केवल शोएब मलिक (111) ही 100 से अधिक टी-20 अंतरराष्ट्रीय खेल पाए हैं।

नेज़ अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव ने मोहा सिनेप्रेमियों का  मन 

कोलकाता : देश की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता में आयोजित तीन दिवसीय नेज़ अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव 2019 का देश भर से जुटे सिनेप्रेमियों ने भरपूर लुत्फ़ उठाया। 37 देशों की आयीं 73 फ़िल्मों की प्रवृष्टियां में से चुनी गयी फ़िल्मों को प्रदर्शन इसमें हुआ जिसमें फ़ीचर फ़िल्म, डाक्यूमेंट्री, एनिमेशन व शार्ट फ़िल्में शामिल रहीं। समारोह का आयोजन आई लीड संस्थान के कैम्पस में स्थित ऑडिटोरियम में हुआ। निर्णायक मंडल के सदस्य थे अंतरराष्ट्रीय स्तर के फ़िल्मकार व प्राग में फ़िल्म अध्ययन विभाग के प्रोफेसर सैमिर बाजो, साहित्यकार डॉ.अभिज्ञात व संगीतकार संजीब सरकार।

एनिमेशन फ़िल्म ‘वन’ के लिए निर्देशक केतन पाल, वृत्तचित्र ‘स्पीयर्स फ्राम ऑल साइड्स’ के लिए निर्देशक क्रिस्टोफर वॉकर, संगीत के लिए ‘प्लानो’ अन्ना स्टरपोउलोन, विशेष फेस्टिवल पुरस्कार शार्ट फिल्म (छात्र) ‘एन आफ्टरनून अफेयर’ निर्देशक तांग्सु कर्मकार, शार्ट फिल्म स्पेशन मैसेज के लिए ‘हैप्पी बर्थडे’ निर्देशक सीमा देसाई, बेस्ट शार्ट फिल्म (भारत) ‘नान्नू कशमिनचांडी’ के निर्देशक राघव ओंकार शशिधर, फ़ीचर फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का खिताब चेतन सिंह को उनकी फिल्म ‘ऑनन दि ब्लू कैनवास’ को दिया गया। वहीं स्पेशन केटेगरी में नेज़ इनफाइनेट विस्टा अवार्ड ‘अरेंजमेंट’ के लिए निर्देशक अमिर जफ़र को दिया गया। इसके अलावा श्रेष्ठ अभिनेता, अभिनेत्री सिनेमेट्रोग्राफर को भी अवार्ड दिये गये।

 

फ़िल्मकार डॉ.सुदीप रंजन सरकार ने बताया कि मैंने नेज़ मूविंग पिक्सल्स की स्थापना रीता झंवर के साथ की। इस प्रोक्शन हाउस के कई फ़िल्में बनायीं और अंतरराष्ट्रीय समारोह भी किये। नेज़ इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल-2019 पांचवां समारोह है। नेज़ का अगला अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल प्राग में होगा। नेज़ की ओर से प्राग व अमेरिका के फ़िल्मकारों के साथ साझे तौर पर फ़िल्मों का निर्माण किया जायेगा।

फेस्टिवल की चेयरपर्सन रीता झंवर ने कहा कि दुनिया को और बेहतर बनाने का ऐसा ख़्वाब फ़िल्मकार रचते है जिसे पूरी दुनिया देखती है और उसे यह अपनी ही जानी पहचानी या अपनी इच्छाओं की दुनिया लगती है। समारोह में नेज़ की ओर से सोमाली ए विद्यार्थी के सम्पादन में विभिन्न कलाओं पर केन्द्रित एक त्रैमासिक अंग्रेज़ी पत्रिका ‘आर्टे’ तथा डॉ.सुदीप रंजन सरकार की कहानी पर बनी हिन्दी फ़ीचर फ़िल्म ‘अम्फर्मंग : दि ट्रांसफार्मेशन’ पर अनामित्रा पाल द्वारा तैयार गये ग्राफ़िक नॉवेल का लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि फ़िल्म अभिनेता अमन यतन वर्मा ने किया। समापन समारोह में रंगकर्मी उषा गांगुली को नेज़ आइकॉन अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही समाज की विभिन्न गतिविधियों में उल्लेखनीय कार्य के लिए सुभाशिष साहा, मिमि दास, विकास सिंह, पारिजात चक्रवर्ती और मून साहा को नेज़ एक्सलेंस अवार्ड प्रदान किया गया।

इस अवसर पर फ़िल्म अभिनेता अमन वर्मा ने कहा कि आरम्भिक दौर में मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा। कम लोग जानते होंगे कि गायक-संगीतकार हिमेश रेशमिया पहले टीवी सीरियल प्रोड्यूसर थे और उन्होंने कई अभिनेताओं को चांस दिया। मुझे भी वहीं छोटे मोटे रोल मिले। बाद में क्योंकि सास भी कभी बहू थी शांति जैसे धारावाहिकों मेरी पहचान बन गयी। मुझे जल्दी ही लगा कि एक खास करेक्टर में कलाकार को नहीं बंधना चाहिए। बागबान में मेरे निगेटिव रोल का लोगों पर ऐसा असर पड़ा कि लगभग एक दशक तक लोग मुझे रोक रोक कर पूछते थे कि भला संतान इतनी नालायक कैसे हो सकती है। यह मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार रहा। 

रंगकर्मी उषा गांगुली ने कहा कि थियेटर बहुत शक्तिशाली माध्यम है और उसमें समाज को बदलने की अद्भुत ताकत है। वह मनुष्य के सोचने का तौर तरीका व उसका व्यक्तित्व बदल सकता है। वह केवल लोगों का मनोरंजन नहीं करता, लोकरंजन ही उसका काम नहीं है, वह आपको धक्का देता है, वह आपसे सवाल करता है।

मशहूर फिल्म निर्देशक सैमिर बाजो ने फ़िल्म निर्माण से जुड़े व्याखान में कहा कि सिनेमा बनाने के लिए कैमरा व बाहरी उपकरणों से अधिक महत्वपूर्ण है अपने विषय को ठीक से जानना। फिल्मकार की आंतरिक समझ भी उसे महत्वपूर्ण बनाती है। फिल्म में आम तौर पर सबका ध्यान कैमरे पर रहता है लेकिन आवाज पर बहुत ध्यान नहीं दिया जाता। उसकी भूमिका दृश्य से कम नहीं होती।

‘किंग क्वीन 2019’ के मंच से मिला पर्यावरण संरक्षण का सन्देश

संवाददाता – रानी चौधरी, छात्रा – प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय

कोलकाता : “सेव् द ग्रीन” अर्थात पर्यावरण संरक्षण के सन्देश के साथ ‘किंग क्वीन 2019’ प्रतियोगिता का दूसरा ऑडिशन 22 सितम्बर को आयोजित किया गया। यह न्ऑचडिशन दो सत्र में आयोजित हुआ। इसके पहला सत्र फैशन तथा दूसरा सत्र प्रतिभा पर केन्द्रित था। ‘सेव द ग्रीन’ यानी हरियाली को बचाने का सन्देश देते हुए युवा रैम्प पर चले।  इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि चिरश्री राय के अतिरिक्त शर्मिला माइती, चन्द्री मुखर्जी , सोम लाहिड़ी, सुचेतना दे, स्वपन रॉय, पायल पॉल और शफ़ाक़त कलीम  भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। इस  कार्यक्रम का संचालन शगुफ्ता हनाफ़ी ने किया। प्रतियोगिता में 16  से 30 वर्ष के 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।प्रतियोगिता की खासियत यह है कि इसमें आकलन बाहरी सौन्दर्य के साथ आन्तरिक सौन्दर्य पर भी केन्द्रित है। दूसरे सत्र में नृत्य, अभिनय, संगीत जैसी  प्रतिभा व हुनर दिखा। अधिकांश प्रतिभागी पहली  बार इस तरह की किसी प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे।  लॉन्चर्ज की सह प्रमुख तथा किंग क्वीन की सह आयोजक निदेशक शगुफ्ता हनाफी ने बताया कि  इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भी प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं की प्रतिभा को सामने लाना है। और यह कई माध्यमों से सामने लायी जाएगी। आयोजन में फिल्म व विज्ञापन क्षेत्र से जुड़ी कई हस्तियों की नजर युवाओं पर है जिससे युवाओं को उनकी रुचि के अनुसार क्षेत्र विशेष से जोड़ा जा सके। प्रतियोगिता के लिए भारत के कई पूर्वी राज्यों में ऑडिशन हो रहे हैं। प्रतियोगिता का अंतिम चरण इसी साल दिसम्बर में होगा।

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