Saturday, April 25, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]

महाराष्ट्र- उत्तर प्रदेश में श्रीकृष्ण के साथ होती है रुक्मिणी की पूजा, द्वारिका में है अलग मंदिर

दुनियाभर में भगवान कृष्ण के कई मंदिर हैं। जहां उनकी पूजा देवी राधा या बड़े भाई बलराम के साथ होती हैं, लेकिन पत्नी के साथ भगवान श्रीकृष्ण के बहुत ही कम मंदिर हैं। इनमें देश के 2 ऐसे मंदिर हैं जहां भगवान श्रीकृष्ण की पूजा देवी रुक्मिणी के साथ की जाती है, वहीं गुजरात का एक ऐसा मंदिर है जहाँ देवी रुक्मिणी का अलग मंदिर है और उनकी पूजा भगवान श्रीकृष्ण के साथ नहीं की जाती है। पौष माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है –

पंढरपुर
महाराष्ट्र में पुणे से लगभग 200 कि.मी की दूरी पर एक गाँव है, जहां श्रीकृष्ण को उनकी पत्नी रुक्मिणी के साथ पूजा जाता है। महाराष्ट्र के इस पंढरपुर नाम के गांव में विट्ठल रुक्मिणी मंदिर नाम का एक मंदिर है। जहां भगवान श्रीकृष्ण को पत्नी रुक्मिणी के साथ पूजा जाता है। इस मंदिर में काले रंग की सुंदर मूर्तियां हैं। विट्ठल रुक्मिणी मंदिर पूर्व दिशा में भीमा नदी के तट पर है। भीमा नदी को यहां पर चंद्रभागा के नाम से जाना जाता है। आषाढ़, कार्तिक, चैत्र और माघ महीनों के दौरान नदी के किनारे मेला लगता है। जिसमें भजन-कीर्तन करके भगवान विट्ठल को प्रसन्न किया जाता है। कई भक्त अपने घरों से मंदिर तक पैदल यात्रा भी करते हैं। जिसे दिंडी यात्रा कहा जाता है। मान्यता है कि इस यात्रा को आषाढ़ मास की एकादशी या कार्तिक माह की एकादशी को मंदिर में खत्म करने का महत्व है।

द्वारिका पुरी
द्वारिका पुरी में द्वारकाधीश मंदिर से 2 किलोमीटर दूर रुक्मिणी के मंदिर के रूप में मौजूद है। ये मंदिर एक अलग हिस्से में बना हुआ है। ये मंदिर 12 वीं सदी में बना है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ माता रुक्मिणी की पूजा नहीं की जाती है। इसके पीछे दुर्वासा ऋषि के शाप की कथा है। जिस वजह से श्रीकृष्ण और देवी रुक्मणी को 12 साल तक एक-दूसरे से अलग रहन पड़ा था। इतना ही नहीं इस वजह से द्वारकाधीश के मंदिर में भी रुक्मणी माता को स्थान नहीं मिला।

मथुरा
मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा पत्नी रुक्मिणी साथ की जाती है। माना जाता है इस मंदिर में मौजूद भगवान कृष्ण की मूर्ति लगभग 250 साल पहले ग्वालियर में खुदाई के दौरान सिंधिया शासन काल के कोषाध्यक्ष को मिली थी। माना जाता है भगवान कृष्ण ने कोषाध्यक्ष गोकुल दास जी के सपने में आकर आदेश दिया कि ब्रज भूमि में मेरी मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनवाओ। इस मंदिर में मौजूद द्वारकाधीश मंदिर में कृष्ण के 8 स्वरूप की पूजा होती है। इसमें हर बार द्वारकाधीश जी के वस्त्र से लेकर पूजा पाठ और भोग सब कुछ अलग-अलग होता है। इस मंदिर में श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी की हर दिन 8 अलग-अलग झांकियां सजती हैं। इन झांकियों के 8 भाव होते हैं और 8 बार ही दर्शन के लिए मंदिर के पट खुलते हैं।

शुभजिता

शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।

शुभजिताhttps://www.shubhjita.com/
शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।
Latest news
Related news