Friday, June 19, 2026
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अवसाद या अपराध

— ‘पंकज सिंह’

(परदा उठता है रोहन अपने पूरे परिवार के साथ भोजन के दौरान बातें करते हुए अपने कार्य में हो रही प्रगति का बखान करता है)
पात्र परिचय

रोहन : एक दिहाड़ी मजदूर
सरला देवी : रोहन की माँ
कृष्णा : रोहन का छोटा भाई
सीमा : रोहन की छोटी बहन
सुजाता : रोहन की बड़ी बहन
कुसुम : रोहन की पत्नी
दृश्य -1
रोहन : आज तो काम पर मजा ही आ गया अम्मा। कॉन्ट्रेक्टर रवि भइया मेरे काम से बहुत खुश हुए। उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि कल से मुझे 200 की जगह 250 रुपए रोज का देंगे।
माँ : सच बोल रहे हो बेटे! अब हम अपनी सुजाता के लिए दूसरों पर आश्रित नहीं रहेंगे।
रोहन : हाँ माँ। अपने कृष्णा का डॉ. बनने का सपना भी जरूर पूरा होगा।
कुसुम : यह सब तो ठीक है जी पर हमको तो कुछ और चाहिए।
सीमा : जी भैया। हम और भाभी आज ही बात कर रहे थे। कितने दिन हो गए फिल्म गए। (मनुहार करती है)…भैया कल ले चलो ना।
कृष्णा : गाँव बसा नहीं कि भिखारियों ने पहले ही भीड़ लगा दी। सिर पर दसवीं की बोर्ड परीक्षा है और इनको देखनी है फिल्म…चिढ़ाते हुए…सिनेमा देखने चली हैं।

रोहन : अरे ठीक है भई ! एक दिन नहीं पढ़ने से फेल नहीं हो जाएगी मेरी बहन । मेरी छोटी बहुत होशियार है।
कृष्णा : भैया तुमने ही इसे सिर पर चढ़ा रखा है। अभी से किसी की नहीं सुनती है। मैं कहे देता हूँ, इतना लाड़ – दुलार ठीक नहीं है।
सुजाता : फिर तुम दोनों लड़ने लगे। देखो माँ की तबीयत ठीक नहीं है। भैया, आप पहले माँ का इलाज करवाइए। इसके बाद हमारे सिर पर जो साहू जी का कर्ज है उसे खत्म कीजिए। रोज-रोज  के ताने अब सहे नहीं जाते हैं।
रोहन : अरे सुजाता! सब हो जाएगा तू इतनी चिन्ता क्यों करती है। बहना, अभी हम है और जब तक मैं हूँ तुम सबको को कभी कुछ सोचने की जरूरत नहीं है। (अचानक खबर सुनाई पड़ती है।
कल से पूरा भारत बंद और कोई भी व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकलेगा। रोहन, सुजाता, सीमा, और कृष्णा सब एक दूसरे को देखते है । पूरे घर में एक सन्नाटा छा जाता है परदा गिरता है।)

दृश्य-2
( परदा उठता है। रोहना चिन्ता में डूबा है। परेशान छिपाना चाहता है मगर स्थिति ऐसी है कि अब उसे माँ से इसके बारे में बात करनी पड़ रही है। माथे पर चिन्ता की लकीरें, रुँआसा चेहरा लिए वह माँ के पास जाकर चुपचाप बैठ जाता है। माँ समझ रही है…मगर रोहन की चिन्ता बढ़ाना नहीं चाहती।
आखिर रोहन को चुप्पी तोड़नी पड़ती है – अम्मा, तीन दिन तो किसी तरह गुजार लिये मगर आगे….बात पूरी होने से पहले ही उत्साह में डूबी सीमा घुसती है…सब उसे देखने लगते हैं।
रोहन : माँ अब तेरी तबीयत कैसी है? मैं जानता हूँ कल तुझे दवा नहीं दे पाया हूँ और न ही घर में अनाज का एक भी दाना ही बचा है। सोचता हूँ कि एक- दो दिन और किसी प्रकार चल जाएगा पर उसके बाद क्या होगा, कुछ समझ नहीं आता।
माँ : बेटा, दवा की चिंता मत कर। मैं ठीक हूँ, बस तुम बहू और भाई- बहनों का ध्यान रखो। (थोड़ा रुक कर) बात तो तेरी ठीक है बेटा अगर बचाकर भी चलाया जाए तो घर की नईया पार नहीं लग पाएगी। लेकिन यह भी तुझे ध्यान रखना होगा जिसका कोई नहीं होता, भगवान उसको असहाय नहीं छोड़ते। भगवान पर भरोसा रख मेरे लाल। समय सब मुसीबत खत्म कर देता है। (अचानक दरवाजे से सीमा का शोर सुनायी पड़ता है।)
सीमा : भइया! भइया! बाहर राशन के लिए सबका नाम लिखा जा रहा है। जल्दी चलो। (सबके चेहरे खिल जाते हैं।)
रोहन : (रोहन दौड़ते हुए जाता है और नाम लिखने वाले बाबू से कहता है।) भइया हमारा भी नाम लिख लीजिए। हमें भी राशन चाहिए था।
राशनवाला : यहाँ खैरात नहीं बँटते हैं। एक तो लॉकडाउन ने धन्धा खत्म कर रखा है, ऊपर ये चले आये मुँह उठा के। (थोड़ा ठहरता है)..ऐसा है मेरे भाई कि नेताजी ने तो पहले से ही नाम गिनवा दिये हैं हमको। हम बस कूपन दे रहे हैं। जरा रुको तुम्हारा नाम होगा तो जरूर मिलेगा। (खाते में नाम की जाँच करने लगता है)। देखो भाई, तुम्हारा नाम नहीं है ।जाओ, पहले नेताजी से मिलो और यहाँ भीड़ मत लगाओ।
फिर अचानक उसका पारा गरम हो जाता है – जानते नहीं हो कोरोना फैला है कोरोना। सबको मारेगा क्या? भाग यहां से।(रोहन उदास चेहरा लेकर घर लौटता है। उसके सामने अपनी बीमार माँ, भाई-बहनों और पत्नी का उदास चेहरा एक बार आंखों के सामने घूम जाता है।)
दृश्य- 3
(आज लॉकडाउन का पाँचवा दिन है दवा के अभाव में माँ का बुरा हाल है उनकी तबीयत बहुत बिगड़ गयी है।)
माँ : बेटा तू बड़ा है । इस स्वार्थ भरी दुनिया मे अपना कोई नहीं है। बेटा मुझे नहीं लगता है कि मैं अब बच सकूँगी। अपने भाई और पत्नी का ख्याल तुझे ही रखना है। दोनों बहनों की जिम्मेदारी अब तुझ पर ही है बेटा उन्हें हमेशा अपने साथ रखना।(तभी दरवाजे पर दो व्यक्ति आवाज देते है ‘घर में कोई है चावल लेने के लिए’)
( सुजाता दौड़ी बाहर की तरफ जाती है और देखती है एक व्यक्ति है हाथ में एक अनाज से भरा हुआ थैला लिए हुए है और दूसरा का कैमरा ऑन करके तैयार है। सुजाता जैसे ही हाथ बढाती है अंदर से रोने और चिल्लाने की आवाज सुनाई पड़ता है।)
कृष्णा : दीदी माँ अब नहीं रही! जल्दी चलो, माँ हमे छोड़कर चली गई। (पूरा माहौल रुदन में डूब जाता है।
सूत्रधार : रात को रोहन और उसकी पत्नी अपना भविष्य सोच कर बहुत परेशान हो जाते हैं। अंत में जब पूरा घर छान मारने के बाद रोहन को सिर्फ 10 रुपये मिलते हैं। इस रुपये से वह सबका पेट तो नहीं भर सकता था पर उसके पास इससे निजात पाने एक खतरनाक उपाय समझ आ गया। और अगले दिन समाचार आता है कि पाँच सदस्य वाले एक परिवार ने भूख से तंग आ कर जहर खा लिया है। सरकार के पास कोरोना से बचने के कई उपाय भले हों पर भूख से बचने का अभी भी कोई उपाय नहीं है। हमे साथ मिल कर इस पर विचार करना होगा .अपने आस – पास देखिए और ऐसा कोई जरूरतमन्द है तो उनकी मदद करिए और हाँ, हो सके तो कैमरा बाहर मत निकालिएगा

 

सहयोग का हाथ बढ़ाइए

बड़े ही दुखी मन से सूचित करना चाहता हूँ कि कोरोना वाइरस के भय से हमारी NGO संस्था मे रहने वाले 500 लोग बहुत ही दयनीय हालत में हैं और शुभचिंतक लोग भी संस्था में नही आ रहे हैं इस वजह से अनाज की कमी भी हो गयी है । अगर हो सके तो कृपया आटा, चावल, दाल, चीनी, दुध, ताजी सब्जियाँ व खाद्य तेल के अलावा सेनेटाइजर, साबुन, डाईपर , फिनीट व फिनाईल, आदि अपनी श्रद्धा से दान में दे दीजिए । आप के सहयोग के हम आभारी रहेंगे।

अनुरोध 

रवि कालरा

द अर्थ सेवियर्स फाउंडेशन

सम्पर्क – +91-9717088002

 

अंतर्बोध पेड़

*निखिता पाण्डेय*

खड़ा हूं अपने सिद्धान्तों की जड़ों पर,
हर रोज़ संघर्ष की शाखा फैल रही है मेरी,
हुआ हूं शिकार हिंसा का,
न किया किसी पर वार कभी।
खुद के जीवन से प्रेम बहुत
पर को मुर्दा न किया कभी,
अधिकार बोध,कर्तव्य बोध,
मानवता और संस्कार बोध,
चर और चराचर चक्रबोध
हां भाव-बुद्धि का युगल बोध।
मानव-मानवता अंतर्बोध,
स्वीकार-नकार का अंतर्बोध,
सत्य और असत्य का अंतर्बोध,
मुक और हुंकार का अंतर्बोध,
सब देख समझ कर खड़ा हूं मैं।
अपने विवेक पर अड़ा हूं मैं
तू काटा या आग से जला मुझे,
जितना हो ज़ोर,आ मिटा मुझे।
मैं विचार हूं,मेरी शक्ति प्रबल,
न अधीर,धीर हूं और प्रखर।
मेरी शाखा पर बैठ मुझे,
ज्यों बांट रहा थोड़ा-थोड़ा तू,
मुझे या अपनी मानवता को
काट रहा थोड़ा-थोड़ा तू….।

(चित्र – नमिता सिंह)

 

पोहा बिरयानी

शेफ सीमा साव

सौजन्य – शिव संगी किचेन

कोलकाता से निकला भारत का पहला डिजिटल इन्ट्रैक्टिव ई पेपर

कोलकाता : कोरोना काल आपदा का समय है मगर इस आपदा के बीच से ही अवसर और आविष्कार दोनों ही निकल रहे हैं। कोलकाता के ताजा टीवी समूह की पहल से एक ऐसा ही आविष्कार हुआ है। ताजा टीवी समूह द्वारा प्रकाशित हिन्दी दैनिक छपते – छपते अब डिजिटल इन्ट्रैक्टिव ई पेपर बन गया है। गौरतलब है कि कोरोना के कारण लॉकडाउन के दौर में आवश्यक सेवा घोषित किये जाने पर भी मुद्रित अखबारों के प्रसार को लेकर समस्या होने लगी थी। नतीजा यह हुआ कि इस दौर में ई पेपर ही मोबाइल के जरिए पाठकों तक अधिक पहुँचने लगा। अब इस तकनीक को और बेहतर बनाते हुए ताजा टीवी समूह ने इस सूचना क्रान्ति को एक और ऊँचाई दी है। ताजा टीवी के मुताबिक छपते – छपते भारत का पहला डिजिटल इन्ट्रैक्टिव पेपर होगा। छपते – छपते समूह के सम्पादक विश्वम्भर नेवर के मुताबिक ई पेपर जब पाठकों के हाथ में होगा तो पाठक उस खबर को पढ़ने के साथ खबर का वीडियो भी देख सकेंगे औऱ इसके लिए उनको बस प्ले बटन दबाना होगा। छपते – छपते से प्राप्त जानकारी के मुताबिक आई लीड ने इस कदम में उनको सहयोग दिया है। आई – लीड के चेयरमैन प्रदीप चोपड़ा ने बताया कि यह अपने -आप में एक नया प्रयास है और उनका सुझाव माना। स्थानीय खबरों के लिए ताजा टीवी लोकप्रिय है और इससे सबको फायदा होगा।

समकालीन हिन्दी कविताओं को लेकर डॉ. अभिज्ञात की कार्यशाला

कोलकाता : कविता में रुचि रखने और सीखने की इच्छा रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।  सुपरिचित लेखक डॉ.अभिज्ञात की हिन्दी कविता पर ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला 16 जून 2020 से प्रारम्भ होगी। हर मंगलवार को चलने वाली यह कार्यशाला पांच सप्ताह चलेगी। कार्यशाला से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी शुभजिता पर साझा की जा रही है।
मंगलवार का दिन संवाद का होगा, जिसमें आपसे बातचीत कर आपकी शंकाओं का समाधान भी किया जायेगा। आप अपनी सुविधा का समय स्वयं तय करके बता दें। लेकिन यह समय दोपहर एक बजे से शुरू होगा। रात एक बजे तक बातचीत की सुविधा रहेगी, क्योंकि दूसरे देशों में भारतीय समय से काफी अंतर है। यह सुविधा भारतीय लोगों के लिए भी रहेगी।
कार्यशाला में समकालीन कविता अर्थात आज लिखी जा रही कविताओं पर मार्ग-निर्दशन किया जायेगा। आपकी कविताओं का भी होगा मूल्यांकन और बताया जायेगा कैसे उसे और चुस्त-दुरुस्त करें। आपकी रचनाओं पर प्रतिक्रियाएं सार्वजनिक नहीं की जायेंगी ताकि आपकी खामियों पर दूसरों की नज़र न जाये, क्योंकि आप सीखने की प्रक्रिया में हैं। गीतों या छंद पर कार्यशाला बाद में अलग से कभी होगी। यह कार्यशाला अतुकांत, छंदमुक्त या मुक्तछंद जो भी आप कहते हों उस विधा में होगी, जो समकालीन कविता की मुख्य विधा है।
पांच दिन की कुल कार्यशाला का प्रतिभागी शुल्क प्रति प्रतिभागी एक हज़ार भारतीय रुपया और विदेश की मुद्रा का भी उसी के समतुल्य होगा। कुछ आर्थिक तौर पर कमज़ोर छात्र-छात्राएं भी इसमें प्रतिभागी बनना चाहती हूं उनके लिए प्रयोजक की तलाश की जा रही है। इसलिए यदि किसी के समक्ष आर्थिक संकट हो तो संभव है रास्ता निकल आये। रचनाकारों का एक व्हाट्सऐप ग्रूप बनाया जा रहा है जिसमें सभी सूचनाएं होंगी।
-इस ग्रूप में आप अपनी रचनाएं जब चाहें पोस्ट कर सकते हैं, जिन्हें ग्रूप के अन्य सदस्य भी पढ़ कर अपनी प्रतिक्रियाएं दें।
-डॉ.अभिज्ञात ग्रूप में पोस्ट की गयी रचनाओं पर विचार नहीं करेंगे बल्कि जो रचनाएं प्रतिभागियों से मांगी जायेंगी उन पर विचार करके उनकी ख़ूबियों और कमियों पर व्यक्तिगत नम्बर पर भेजेंगे। उन पर फो़न से भी बात की जायेगी। प्रतिभागी शुल्क का भुगतान 15 जून 2020 तक कर दिया जाना चाहिए। यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के दिये गये खाते में जमा कराना होगा।
-आपकी सहमति के बाद आपका नम्बर PoetryWorkshop-1 से जोड़ दिया जायेगा। कृपया किस फोन नम्बर को जोड़ना है लिखकर भेजिए।
-किसी कारणवश यदि कार्यशाला रद्द की गयी तो एक-दो दिन के अन्दर आपकी रकम आपके खाते में वापस कर दी जायेगी।

देश में मास्क का अधिशेष उत्पादन, उद्योग ने निर्यात की अनुमति मांगी

नयी दिल्ली : देश में मास्क का उत्पादन जरूरत से ज्यादा हो चुका है। ऐसे में चिकित्सा उपकरण उद्योग ने सरकार से अधिशेष उत्पादन के निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया है। उद्योग का कहना है कि सरकार को गैर-एन95 मास्क के निर्यात पर रोक को हटाना चाहिए। इससे विनिर्माताओं को अपना अधिशेष भंडार निकालने में मदद मिलेगी और उत्पादन एक बार फिर पूरी क्षमता से शुरू हो सकेगा।
कोविड-19 महामारी फैलने के बीच सरकार ने मार्च में सभी तरह के मास्क के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे देश में इसकी कमी नहीं हो। पिछले महीने सरकार ने चिकित्सा और सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले मास्क को छोड़कर अन्य के निर्यात की मंजूरी दे दी थी। इनमें सूती, रेशमी, ऊनी और बुनाई वाले मास्क शामिल हैं। लेकिन चिकित्सा और सर्जरी से संबंधित मास्क के निर्यात पर प्रतिबंध अभी जारी है।
उद्योग का कहना है कि कोविड-19 महामारी फैलने के बाद देश में मास्क का उत्पादन काफी तेजी से बढ़ा है। आज देश में अधिशेष उत्पादन की स्थिति बन गई है, जिससे विनिर्माता अपनी पूरी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। भारतीय चिकित्सा उपकरण उद्योग ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है, ‘‘हम आपसे आग्रह करते हैं कि एन95 को छोड़कर सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले तीन-परत वाले मास्क के निर्यात की अनुमति दी जाए। अभी हमारे पास इसका अधिशेष भंडार है।’’
उद्योग ने कहा कि विनिर्माताओं के पास इतनी क्षमता है जिससे घरेलू जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सकता है। पत्र में कहा गया है कि इन अधिशेष भंडार की वजह से विनिर्माताओं ने पिछले 15-20 दिन से उत्पादन या पूरी तरह रोक दिया है और या उसे धीमा कर दिया है।

फेसबुक ने घृणा समूहों से जुड़े करीब 200 अकाउंट हटाए

सैन फ्रांसिस्को : फेसबुक ने श्वतों को सर्वश्रेष्ठ मानने वाले समूहों से जुड़े सोशल मीडिया के करीब 200 अकाउंट को हटा दिया है। कम्पनी के अधिकारियों ने गत शुक्रवार को कहा कि ये समूह पुलिस द्वारा काले लोगों की हत्या को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में सदस्यों को शामिल होने को प्रोत्साहित करते हैं और कुछ मामलों में हथियारों के साथ भी।
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मौजूद ये अकाउंट ‘प्राउड ब्वॉयज’ और ‘अमेरिकन गार्ड’ नाम के दो घृणा समूहों से जुड़े हुए थे जो इन सोशल मीडिया मंचों पर पहले से प्रतिबंधित हैं।
अधिकारी इन अकाउंट को हटाने की तैयारी के लिए पहले से उनपर नजर रख रहे थे जब उन्होंने ऐसे पोस्ट देखे जो मिनियापोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से भड़के प्रदर्शनों का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे थे।
फेसबुक के आतंकवाद रोधी एवं खतरनाक संगठन नीति के निदेशक ब्रायन फिशमैन ने कहा, “हमने देखा कि ये समूह प्रदर्शनों में जाने के लिए समर्थकों एवं सदस्यों को जुटाने की योजना बना रहे थे और कुछ मामलों में हथियारों के साथ जाने की तैयारी कर रहे थे।”
कम्पनी ने अकाउंट उपयोगकर्ताओं के ब्यौरे नहीं दिए जैसे कि उनकी प्रदर्शनों को लेकर क्या योजना थी और वे अमेरिका में कहां रहते हैं। इसने कहा कि “तकरीबन” 190 अकाउंट हटाए गए हैं।
‘प्राउड ब्वॉयज’ और ‘अमेरिकन गार्ड’ दोनों को ही नफरत भरे भाषणों को प्रतिबंधित करने वाले नियमों के उल्लंघन के लिए फेसबुक से हटा दिया गया था।

रिलायंस जियो में छठा बड़ा निवेश, मुबाडला ने 1.85 फीसदी हिस्सा खरीदा

9,093.60 करोड़ रुपये में हुआ सौदा
नयी दिल्ली : रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को अपनी डिजिटल इकाई जियो प्लेटफार्म्स में अबू धाबी स्थित निवेश कंपनी मुबाडाला को 9,093.60 करोड़ रुपये में 1.85 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की।
रिलायंस द्वारा बीते कुछ सप्ताह में यह छठा सौदा है, जिसके जरिए अब तक कुल 87,655.35 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं। इस धनराशि से समूह को कर्जमुक्त होने में मदद मिलेगी।
कंपनी ने एक बयान में बताया, ‘‘मुबाडला इन्वेस्टमेंट कंपनी (मुबाडला) जियो प्लेटफॉर्म में 9,093.60 करोड़ रुपये निवेश करेगी। इसके लिए इक्विटी मूल्य 4.91 लाख करोड़ रुपये और उद्यम मूल्य 5.16 लाख करोड़ रुपये आंका गया है।’ इस निवेश के साथ जियो प्लेटफार्म्स ने फेसबुक, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, केकेआर और मुबाडला जैसे प्रमुख वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों और निवेशकों के जरिए छह सप्ताह से कम समय में कुल 87,655.35 करोड़ रुपये जुटाए हैं। फेसबुक ने 22 अप्रैल को जियो प्लेटफार्म्स में 43,574 करोड़ रुपये में 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। इस सौदे के कुछ दिनों बाद दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी निवेशक सिल्वर लेक ने जियो प्लेटफार्म्स में 5,665.75 करोड़ रुपये में 1.15 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी।
इसके बाद अमेरिका स्थित विस्टा इक्विटी पार्टनर्स ने 8 मई को जिलो प्लेटफार्म्स में 11,367 करोड़ रुपये में 2.32 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी। वैश्विक इक्विटी फर्म जनरल अटलांटिक ने 17 मई को कंपनी में 6,598.38 करोड़ रुपये में 1.34 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की। इसके बाद अमेरिकी इक्विटी निवेशक केकेआर ने 11,367 करोड़ रुपये में 2.32 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी जियो प्लेटफार्म्स एक प्रौद्योगिकी कंपनी है। रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड, जिसके पास 38.8 करोड़ मोबाइल ग्राहक हैं, वह जियो प्लेटफार्म्स की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बनी रहेगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा कि मुबाडला सर्वाधिक कुशाग्र और परिवर्तनकारी वैश्विक निवेशकों में है।
उन्होंने कहा, ‘‘अबू धाबी के साथ अपने लंबे संबंधों के जरिए मैंने व्यक्तिगत रूप से यूएई की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के विविधीकरण और उसे वैश्विक रूप से जोड़ने में मुबाडला के काम के प्रभाव को देखा है। हमें उम्मीद है कि कंपनी को मुबाडाला के अनुभव से फायदा होगा।’’
मुबाडला इंवेस्टमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक और समूह सीईओ खलादून अल मुबारक ने कहा, ‘‘हम तेजी से विकास करने वाली कंपनियों में निवेश करने और उनके साथ सक्रिय रूप से काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने और नए अवसरों से फायदा उठाने के लिए तकनीकी के इस्तेमाल में अग्रणी हैं। ’’